कनौजिया की तरह इस पत्रकार की गिरफ्तारी पर हल्ला क्यों नहीं?

पत्रकार की गिरफ्तारी पर अब उठने लगे हैं सवाल, पत्नी ने लगाए पुलिस पर कई आरोप

Last Modified:
Saturday, 15 June, 2019
Rupesh Kumar

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में गिरफ्तार किये गए पत्रकार प्रशांत कनौजिया भले ही मीडिया संस्थानों के दबाव और सुप्रीम कोर्ट के दखल के चलते सलाखों से बाहर निकल आये हों, लेकिन झारखंड का एक पत्रकार अभी भी अपनी रिहाई की बाट जोह रहा है। फ्रीलांस जर्नलिस्ट रूपेश कुमार सिंह समेत तीन लोगों को कुछ दिन पहले नक्सली बताकर गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस का कहना है कि इनके पास से विस्फोटक बरामद किया गया है, जबकि रूपेश कुमार की पत्नी इप्सा सताक्षी का दावा है कि उनके पति को गिरफ्तार कहीं से किया गया, दिखाया कहीं और गया। इतना ही नहीं, विस्फोटक को बाकायदा प्रायोजित तरीके से उनकी गाड़ी में प्लांट कर दिया गया।

स्थानीय अखबार ‘प्रभात खबर’ में इस संबंध में प्रकाशित समाचार में बताया गया है कि रूपेश कुमार, मिथलेश कुमार सिंह और उनके ड्राइवर मोहम्मद कलाम को गया से 30 किमी दूर हाईवे से विस्फोटक के साथ गिरफ्तार किया गया था। जैसे ही गिरफ्तारी की खबर मीडिया में आई, बिहार पुलिस ने रूपेश के रामनगर और बोकारो स्थित घर पर छापा मारा और उनका लैपटॉप, फोन सहित कुछ कथित नक्सल साहित्य बरामद करके ले गई। हालांकि, स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि जिसे पुलिस नक्सल साहित्य बता रही है, वो कुछ और नहीं, बल्कि मैगजीन ‘लाल माटी’ में रूपेश के प्रकाशित लेख हैं, रूपेश ‘लाल माटी’ के संपादक भी हैं।

इप्सा सताक्षी का भी यही कहना है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस ने घर की तलाशी लेने से पहले कोई वारंट नहीं दिखाया। उनके बार-बार मांगने पर भी अधिकारी खामोश रहे। यह पूरा मामला 4 जून से शुरू हुआ, जब मिथलेश के पैतृक गाँव औरंगाबाद जाते वक़्त सभी को गिरफ्तार कर लिया गया। काफी देर तक जब सभी का कोई पता नहीं चला तो मिथलेश के परिवार ने रामगढ़ पुलिस स्टेशन में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई। इसके बाद मामले में मोड़ उस वक़्त आया जब मिथलेश ने रूपेश के भाई को अपने सकुशल होने और वापस लौटने की बात कही, हालांकि ऐसा हुआ नहीं।

दो दिन बाद यानी 6 जून को आला पुलिस अधिकारियों ने प्रेस कांफ्रेंस करके बताया कि पुलिस को विस्फोटक से लदे वाहन के नेशनल हाईवे से गुजरने की खबर मिली थी, जिसके आधार पर पत्रकार रूपेश सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का यहां तक कहना है कि रूपेश पहले भी नक्सलियों को विस्फोटक सप्लाई करता रहा था। पुलिस की इस थ्योरी पर शक इसलिए भी हो रहा है, क्योंकि स्थानीय पत्रकारों को रूपेश से मिलने नहीं दिया जा रहा है।

वहीं, रूपेश से जेल में मुलाकात के बाद उनकी पत्नी का कहना है कि तीनों की गिरफ्तारी आईबी द्वारा 4 जून को सुबह 9.30 बजे की गई, जबकि पुलिस 6 जून की गिरफ्तारी दिखा रही है। जब सभी सड़क किनारे गाड़ी खड़ी करके टॉयलेट जा रहे थे, तभी उन पर अचानक पीछे से हमला बोला गया और बाल खींचकर, आंखों पर पट्टी बांधकर बाराचट्टी के कोबरा बटालियन कैम्प ले जाया गया। जहां रूपेश को बिल्कुल भी सोने नहीं दिया गया और रात भर बुरी तरीके से दिमागी टार्चर किया गया। उन्हें धमकाया गया कि व्यवस्था या सरकार के खिलाफ लिखना छोड़ दो। इतना ही नहीं, यह भी कहा गया कि ‘पढ़े-लिखे हो, अच्छे से आराम से कमाओ, खाओ। ये आदिवासियों के लिए इतना क्यों परेशान रहते हो। कभी कविता, कभी लेख। इससे आदिवासियों व माओवादियों का मनोबल बढ़ता है भाई। क्या मिलेगा इससे। जंगल, जमीन के बारे में बड़े चिंतित रहते हो, इससे कुछ हासिल नहीं होना है। शादीशुदा हो, परिवार है, उनके बारे में सोचो। सरकार कितनी अच्छी-अच्छी योजनाएं लायी है। इनके बारे लिखो। आपसे कोई दुश्मनी नहीं है,छोड़ देंगे’।

इप्सा सताक्षी के अनुसार, तीनों को कहा गया कि आप लोगों को छोड़ देंगे और 5 जून को मिथिलेश कुमार से दोपहर 1 बजे कॉल भी करवाया गया, लेकिन किसी को छोड़ा नहीं गया। 5 जून को रूपेश को 4 घंटे सोने दिया गया फिर 5 जून की शाम को कोबरा बटालियन के कैम्प में ही इनके सामने विस्फोटक गाड़ी में रखा गया। विरोध करने पर शेरघाटी एएसपी रवीश कुमार ने कहा, ‘अरे पकड़े हैं तो ऐसे ही छोड़ देंगे? अपनी तरफ से केस पूरी मजबूती से रखेंगे रूपेश जी।’ फिर इसी विस्फोटक को दिखाकर डोभी थाने में प्रेस कांफ्रेंस की गई और तीनों को शेरघाटी जेल भेज दिया गया।

गौर करने वाली बात यह है कि जिस तरह प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी को लेकर हल्ला मचा था, वैसा रूपेश कुमार के मामले में क्यों नहीं है? एडिटर गिल्ड सहित सभी संस्थाओं की ख़ामोशी इस सवाल को पुख्ता करती है कि क्या मीडिया को केवल दिल्ली में होने वाली हलचल ही दिखाई देती है?

 

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दुनिया को अलविदा कह गए वरिष्ठ पत्रकार केके शर्मा

पंजाब केसरी के वरिष्ठ पत्रकार केके शर्मा का निधन हो गया है। वह कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे।

Last Modified:
Saturday, 30 May, 2020
KK Sharma

पंजाब केसरी के वरिष्ठ पत्रकार केके शर्मा का निधन हो गया है। वह कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। राजधानी दिल्ली के संजय गांधी अस्पताल में शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। शनिवार को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

बता दें कि केके शर्मा के पुत्र अश्विनी कुमार भी पत्रकार हैं और इन दिनों समाचार एजेंसी ‘हिन्दुस्थान’ में कार्यरत हैं। केके शर्मा के निधन पर ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट’ (इंडिया) से संबद्ध ‘दिल्ली पत्रकार संघ’ (DELHI JOURNALISTS ASSOCIATION) और तमाम पत्रकारों समेत दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शोक जताते हुए अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

 

 

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इस बीमारी ने छीन ली वरिष्ठ पत्रकार पीयूष कांति दास की जिंदगी

असम के वरिष्ठ पत्रकार पीयूष कांति दास का बुधवार की देर रात निधन हो गया। वे 55 वर्ष के थे।

Last Modified:
Friday, 29 May, 2020
piy0000ush4

असम के वरिष्ठ पत्रकार पीयूष कांति दास का बुधवार की देर रात निधन हो गया। वे 55 वर्ष के थे और किडनी की बीमारी से ग्रसित थे। तबीयत ज्यादा खराब होने चलते उन्हें गुवाहाटी के एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया, जहां बीते बुधवार रात करीब 11 बजे अंतिम सांस ली।

पत्रकार की फैमिली में उनकी पत्नी और एक बेटी शिंजिनी सौहार्दियो हैं। पत्रकार के निधन पर विभिन्न दल एवं संगठनों के अलावा सरकार की ओर से भी गहरा शोक व्यक्त किया गया है।

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कोरोना की चपेट में आए दूरदर्शन के कैमरामैन की मौत

देश में कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसकी चपेट में आकर अब तक कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, वहीं बड़ी संख्या में लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

Last Modified:
Friday, 29 May, 2020
Corona

देश में कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसकी चपेट में आकर अब तक कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, वहीं बड़ी संख्या में लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। बुधवार को कोरोना की चपेट में आकर पब्लिक ब्रॉडकास्टर दूरदर्शन (डीडी) के कैमरामैन योगेश कुमार (53) की मौत हो गई। कोरोना से अपने एक एम्प्लॉयी की मौत के बाद दूरदर्शन ने अपने कुछ एम्प्लॉयीज को आइसोलेशन में जाने के लिए कहा है। वहीं, बिल्डिंग में सैनिटाइजेशन का काम किया जा रहा है।    

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, योगेश कुमार की मौत बुधवार को हुई हालांकि उनकी कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट गुरुवार को आई। अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि वह कैसे संक्रमित हुए थे। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, ‘योगेश ने बेचैनी की शिकायत की थी, जिसके बाद उन्हें शालीमार बाग एरिया में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां से हमें पता चला कि कार्डियक अरेस्ट के कारण उनकी मौत हुई है, हालांकि, गुरुवार को उनकी कोविड-19 की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई। हम दूरदर्शन के ऑपरेशन के परिचालन को दूसरी बिल्डिंग में शिफ्ट कर रहे हैं और सभी जरूरी प्रोटकॉल का पालन किया जाएगा।’

बताया यह भी जाता है कि योगेश कुमार ने पिछले दिनों कम से कम दो वरिष्ठ अधिकारियों के इंटरव्यू में अपनी सहभागिता निभाई थी। इनमें एक रेलवे के और दूसरा केंद्रीय मंत्रालय के अधिकारी थे। यही नहीं, करीब 12 दिन पहले वह ‘एम्स’ (AIIMS) एरिया में भी गए थे। इस घटना के बाद प्रसार भारती ने डीडी न्यूज के ट्रांसमिशन का कार्य कुछ दिन तक खेलगांव स्थित ऑफिस में शिफ्ट कर दिया है।

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नहीं रहे मातृभूमि ग्रुप के प्रबंध निदेशक एमपी वीरेंद्र कुमार

समाचार एजेंसी ‘प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया’(PTI) के तीन बार चेयरमैन रह चुके थे वीरेंद्र कुमार, वह पीटीआई के निदेशक मंडल में भी शामिल थे

Last Modified:
Friday, 29 May, 2020
Veerendra Kumar

मलयालम लेखक-पत्रकार और केरल से राज्यसभा सदस्य एमपी वीरेंद्र कुमार का गुरुवार को कोझिकोड में निधन हो गया। वह 84 साल के थे। वीरेंद्र कुमार मलयालम दैनिक समाचार पत्र मातृभूमि समूह के प्रबंध निदेशक थे। वीरेंद्र कुमार समाचार एजेंसी ‘प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया’(PTI) के  तीन बार चेयरमैन रह चुके थे। वह समाचार एजेंसी के निदेशक मंडल में भी शामिल थे। वीरेंद्र कुमार का अंतिम संस्कार आज वायनाड में किया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वीरेंद्र कुमार को गुरुवार रात करीब 8.30 बजे कार्डियक अरेस्ट के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने देर रात करीब साढ़े 11 बजे कोझिकोड के निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली।

वीरेंद्र कुमार का जन्म 22 जुलाई को केरल के वायनाड में एम के पाथमप्रभा के घर हुआ था। वीरेंद्र कुमार कई किताब लिख चुके हैं। वह वर्ष 1987 में केरल विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। वह दो बार लोकसभा के लिए भी चुने गए। मार्च 2018 में वह केरल से राज्यसभा के लिए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित हुए थे।

उनके परिवार में पत्नी, तीन पुत्रियां और एक पुत्र हैं। वर्ष 2016 में हिमालय पर यात्रा वृत्तांत (हैमवाता भूमिइल) के लिए उन्हें मूर्तिदेवी पुरस्कार दिया गया था। एमपी वीरेंद्र कुमार के निधन पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

 

 

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राजद्रोह के मामले में गिरफ्तार एडिटर को मिली जमानत

गुजरात की एक अदालत ने बुधवार को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार 'फेस ऑफ नेशन' न्यूज पोर्टल के एडिटर धवल पटेल को जमानत दे दी

Last Modified:
Thursday, 28 May, 2020
Court

गुजरात की एक अदालत ने बुधवार को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार 'फेस ऑफ नेशन' न्यूज पोर्टल के एडिटर धवल पटेल को जमानत दे दी।  एडिटर धवल पटेल ने राज्य में कोरोना वायरस के बढ़ते मामले पर रिपोर्ट करते हुए गुजरात में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना जताई थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

सत्र अदालत के न्यायाधीश पीसी चौहान ने एडिटर को नियमित जमानत देते हुए कहा कि वह अब प्राथमिकी को रद्द करने का अनुरोध करने वाली याचिका पर सुनवाई करेंगे। यह प्राथमिकी अहमदाबाद पुलिस की अपराध शाखा ने भारतीय दंड संहिता की धारा 124(ए) और आपदा प्रबंधन कानून के तहत दर्ज की गई थी।

प्राथमिकी के मुताबिक, धवल पटेल ने 7 मई को अपने पोर्टल पर एक खबर लिखी थी, जिसका शीर्षक था, 'मनसुख मंडाविया को हाईकमान ने बुलाया, गुजरात में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना'। वहीं खबर में कहा गया था कि कि मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के कोरोना वायरस संकट से निपटने के तरीके से आलाकमान खुश नहीं है, लिहाजा रूपाणी के स्थान पर केंद्रीय मंत्री मंसुख मंडाविया को मुख्यमंत्री बना सकता है।

बता दें कि मंडाविया केंद्रीय मंत्री और गुजरात से राज्यसभा सांसद हैं।

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जानिए, क्यों कार्यक्रम छोड़ जान बचाने के लिए स्टूडियो से बाहर भागी महिला एंकर

टीवी चैनल पर लाइव चले इस दृश्य को जिसने भी देखा वह हैरान रह गया, जिसके बाद कई यूजर्स ने महिला एंकर और चैनल के प्रबंधन की मूर्खता की आलोचना भी की

Last Modified:
Wednesday, 27 May, 2020
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कई बार ऐसा सुनने या पढ़ने को मिला होगा कि किसी टीवी कार्यक्रम में अचानक कुछ हादसा हो जाए और दर्शक उसे लाइव देख रहे हों। हो सकता है कि शायद इस तरह के दृश्य को आपने टीवी पर लाइव देखा भी हो। दरअसल कुछ इसी तरह का मामला मिस्र (Egypt) से सामने आया है।

यहां की एक महिला एंकर लुबना असल (Lubna Asal) को अपने टीवी शो में एक मेहमान के साथ बंदर बुलाना महंगा पड़ गया। 'अरब मीडिया' की रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीवी कार्यक्रम (अल-हयात अल-यूएम) 'जिंदगी आज' की मेजबान लुबना असल ने एक व्यक्ति को इंटरव्यू के लिए आमंत्रित किया था, जिसमें वह अपने साथ एक बंदर भी लाया था। कार्यक्रम में बातचीत के दौरान बंदर अचानक महिला एंकर की ओर देखने लगा। महिला भी घबरा गई। फिर अचानक बंदर उस पर कूद पड़ा, जिसके बाद स्टूडियो में भगदड़ मच गई।

जब टीवी कार्यक्रम चल रहा था, महिला एंकर ने स्टूडियो में अपनी कुर्सी के पास बंदर को बैठाया और मेहमान से सवाल पूछने में व्यस्त रहीं। महिला समय-समय पर बंदर को देखती रही, ताकि वह उनके पास न जाए और आराम से बैठ जाए, लेकिन बंदर अचानक महिला की तरफ कूद पड़ा, जिसके बाद स्टूडियो में भगदड़ मच गई। स्‍टूडियो में मौजूद लोग इधर-उधर दौड़ने लगे। लुबना असल ने बचाव करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सकीं और फिर महिला घबराहट में चिल्लाने लगीं। उन्‍होंने अपनी जान बचाने के लिए कार्यक्रम छोड़ दिया और स्टूडियो से बाहर भाग गईं।

टीवी चैनल पर लाइव चले इस दृश्य को जिसने भी देखा वह हैरान रह गया, जिसके बाद कई यूजर्स ने महिला एंकर और चैनल के प्रबंधन की मूर्खता की आलोचना भी की और कहा कि वे भविष्य में किसी भी जानवर को अपने कार्यक्रम में आमंत्रित न करें, अन्यथा एक बड़ा हादसा हो सकता है।  

यहां देखें वीडियो-

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महिला आयोग ने न्यूज चैनल के इस रवैये को बताया असंवेदनशील, लिया ये स्टेप

मामला असम स्थित ‘प्राग’ न्यूज चैनल से जुड़ा हुआ है। आयोग ने मंगलवार को चैनल के असंवेदनशील रवैये की निंदा करते हुए कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है।

Last Modified:
Wednesday, 27 May, 2020
NCW

न्यूज चैनल द्वारा गर्भावस्था के कारण अपनी महिला पत्रकार को कथित रूप से इस्तीफा देने के लिए मजबूर करने के मामले की राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने कड़ी निंदा की है। मामला असम स्थित ‘प्राग’ न्यूज चैनल से जुड़ा हुआ है। आयोग ने मंगलवार को चैनल के असंवेदनशील रवैये की निंदा करते हुए कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। बताया जाता है कि रंजीता राभा नामक यह महिला पत्रकार इस चैनल से करीब 14 साल से जुड़ी हुई थी। आरोप है कि गर्भवती होने के कारण उसे इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया है।     

इस बारे में जारी एक बयान में राष्ट्रीय महिला आयोग का कहना है, ‘महिलाओं के सभी अधिकारों में से एक मातृत्व का अधिकार भी है। हालांकि, असम की एक हालिया घटना ने विभिन्न संस्थानों द्वारा अपनी गर्भवती एंप्लाईज के प्रति दोहरे मापदंड को उजागर किया है।’

‘NCW’ का कहना है कि 22 मई को एक मीडिया रिपोर्ट सामने आई थी। ‘Indian Journalists Union criticises Prag News for sacking pregnant journalist’ शीर्षक से प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया था कि संस्थान ने गर्भवती महिला पत्रकार को नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किया है।

इसके बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने चैनल द्वारा अपनी गर्भवती एंप्लाईज के प्रति अपनाए गए इस रवैये की निंदा की है। आयोग ने चैनल से इस मामले में जल्द से जल्द अपना पक्ष भेजने के लिए कहा है। बता दें कि इससे पहले ‘इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन’ (IJU) ने रंजीता राभा को चैनल प्रबंधन द्वारा हटाए जाने पर गहरी चिंता जताई थी।

‘इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन’ का कहना था, ‘राभा के अनुसार वह इस मामले को सीएमडी संजीव नारायण के पास ले गई थी, जिन्होंने कहा कि चैनल में मैटरनिटी लीव की कोई व्यवस्था नहीं है और इस अवधि की सैलरी नहीं दी जाएगी। इसके बाद उन्होंने इस्तीफा देने के आदेश भी दिए।’

‘इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन’ का यह भी कहना था कि राभा को नौकरी से हटाया जाना अस्वीकार्य है और यह सीधे-सीधे लैंगिक भेदभाव का मामला है।

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इस खबर को लेकर मीडिया से नाराज हुए राष्ट्रपति, कही ये बात

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मीडिया से नाराजगी जगजाहिर है। मीडिया के प्रति एक बार फिर उनकी नाराजगी सामने आई है।

Last Modified:
Tuesday, 26 May, 2020
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मीडिया से नाराजगी जगजाहिर है। मीडिया के प्रति एक बार फिर उनकी नाराजगी सामने आई है। दरअसल, मीडिया में कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित देश की स्थिति के बीच ट्रंप के गोल्फ खेलने की खबर सामने आई थी। लिहाजा इसी खबर को लेकर ट्रंप ने मीडिया पर निशाना साधा है। ट्रंप ने मीडिया पर हमला बोलते हुए कहा कि मुझे पता था कि यह होगा।

राष्ट्रपति ने इस मामले पर सफाई देते हुए ट्वीट में लिखा, ‘बाहर निकलने के लिए या थोड़ा व्यायाम करने के लिए मैं हर वीकेंड पर गोल्फ खेलता हूं। फर्जी और भ्रष्टाचारी न्यूज ने इसको ऐसे दिखाया जिससे यह पाप की तरह लगने लगा।’

ट्रंप ने आगे लिखा, 'मीडिया ने यह क्यों नहीं कहा कि मैंने तीन महीने बाद पहली बार गोल्फ खेला है और अगर मैं तीन वर्ष बाद भी गोल्फ खेलता तब भी वे इसी तरह से ही कहते। वे नफरत और बेईमानी के आदि हो चुके है तथा वे वास्तव में विक्षिप्त हैं।'

अमेरिका के प्रमुख प्रकाशनों ने दरअसल देश में कोरोना वायरस से एक लाख लोगों की मौत के बीच ट्रम्प के वर्जीनिया में गोल्फ खेले जाने को लेकर उनकी कड़ी आलोचना की थी जिसको लेकर उन्होंने यह ट्विट किया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अमेरिका (Coronavirus in America) में अबतक कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या 17 लाख पहुंच गई है, जबकि मौत का आंकड़ा 99,459 हो गया है। कोविड-19 (COVID-19) से 3 लाख 53 हजार लोग ठीक भी हुए हैं।

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MakeMyTrip से अलग होकर अनंत पटेल ने इस OTT प्लेटफॉर्म के साथ शुरू की नई पारी

MakeMyTrip के अनंत पटेल अब ‘डिज्नी+ हॉटस्टार’ (Disney+ Hotstar) के साथ जुड़ गए हैं। उन्हें यहां मार्केटिंग डायरेक्टर बनाया गया है

Last Modified:
Monday, 25 May, 2020
Anant Patel

MakeMyTrip के अनंत पटेल अब ‘डिज्नी+ हॉटस्टार’ (Disney+ Hotstar) के साथ जुड़ गए हैं। उन्हें यहां मार्केटिंग डायरेक्टर बनाया गया है। पटेल ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट को अपडेट कर इस बात की जानकारी दी है।

उन्हें एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव है और उनका पिछला असाइनमेंट  MakeTyTrip के साथ था, जहां वे मार्केटिंग में असोसिएट डायरेक्टर के तौर पर कार्यरत थे। वे पिछले चार वर्षों तक इसकी कंपनी के साथ जुड़े हुए थे।

ट्रैवेल पोर्टल से पहले, पटेल विभिन्न पदों पर रहते हुए OLX, Hungama और JUSTDIAL जैसी कंपनियों के साथ जुड़े हुए थे।

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दुनिया को अलविदा कह गए वरिष्ठ खेल पत्रकार डॉ. स्वरूप बाजपेयी

मध्य प्रदेश के वरिष्ठ खेल पत्रकार और समीक्षक डॉ. स्वरूप बाजपेयी का रविवार को निधन हो गया। वे  78 वर्ष के थे और बाजपेयी पिछले कुछ समय से गले के कैंसर से पीड़ित थे

Last Modified:
Monday, 25 May, 2020
Dr. Swaroop Bajpai

मध्य प्रदेश के वरिष्ठ खेल पत्रकार और समीक्षक डॉ. स्वरूप बाजपेयी का रविवार को निधन हो गया। वे  78 वर्ष के थे और बाजपेयी पिछले कुछ समय से गले के कैंसर से पीड़ित थे। इसकी वजह से उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता चला गया और उन्होंने रविवार को आखिरी सांस ली।

क्रिकेट के प्रसिद्ध सांख्यिकीविद रहे डॉ. बाजपेयी को क्रिकेट का चलता फिरता इनसाइक्लोपीडिया माना जाता था। उनके परिवार में पत्नी के अलावा 5 बेटियां और 1 बेटा है।

एक सप्ताह के भीतर शहर में ख्यात खेल हस्तियों के दुनिया से विदा होने का यह दूसरा मामला है। इससे पहले बास्केटबॉल के पूर्व नेशनल खिलाड़ी और नए बॉस्केटबॉल कॉम्पलेक्स के कर्णधार भूपेंद्र बंडी जी का निधन हुआ था और अब डॉ. बाजपेयी हमारे बीच नहीं रहे हैं।

डॉ. बाजपेयी कई दशक तक ‘नईदुनिया’ अखबार से जुड़े रहे। यही नहीं,  उन्होंने 1983 से 2005 तक ‘नईदुनिया’ की खेल पत्रिका 'खेल हलचल' का जिम्मा भी संभाला। वे शहर के ऐसे शख्स थे, जिन्हें क्रिकेट के आंकड़ें मुंह जुबानी याद रहते थे।

1999 में डॉ. बाजपेयी ने वन-डे क्रिकेट विश्व कप पर पुस्तक का प्रकाशन भी किया। उन्होंने इंदौर क्रिश्चियन कॉलेज से पढ़ाई पूरी की और फिर बाद में यहीं पर इतिहास के विभागाध्यक्ष रहे। उन्हें कॉलेज से इस कदर लगाव था कि सेवानिवृत्ति के बाद भी वहीं पढ़ाते रहे।

डॉ. बाजपेयी मध्य भारत के एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने होलकर कालीन क्रिकेट और कुश्ती पर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की थी। उन्हें कविताओं का भी शौक था। छात्र जीवन में वे राजनीति में भी सक्रिय रहे।

हमेशा हंसमुख और लोगों की मदद में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले डॉ. बाजपेयी के अचानक निधन से इंदौर का पूरा खेल जगत स्तब्ध है। मध्यप्रदेश टेबल टेनिस संगठन के आजीवन अध्यक्ष पद्मश्री अभय छजलानी के अलावा, चेयरमैन ओम सोनी, अर्जुन अवॉर्डी कृपाशंकर बिश्नोई ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उनका अंतिम संस्कार सोमवार सुबह 9 बजे रामबाग मुक्तिधाम में होगा।

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