शोधकर्ताओं-छात्रों के साथ आम पाठकों के लिए भी लाभप्रद होगा वाणी प्रकाशन का ये कोश

हिंदी साहित्य, दर्शन, इतिहास, आलोचना आदि विषयों को समाहित किये हुए सात खण्डों के कोश की प्रति राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को भेंट की गई

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 17 August, 2019
Last Modified:
Saturday, 17 August, 2019
Ram Nath

भारतीय भाषा परिषद और वाणी प्रकाशन के तत्वाधान में निर्मित 'हिंदी साहित्य ज्ञान कोश' 16 अगस्त 2019 को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को राष्ट्रपति निवास में भेंट किया गया। इस अवसर पर वाणी प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अरुण माहेश्वरी, निदेशक अदिति माहेश्वरी-गोयल और  प्रधान संपादक शंभूनाथ के साथ कुसुम खेमानी ( अध्यक्ष भारतीय भाषा परिषद), विमला पोद्दार (मंत्री, भा.भा.प.) विवेक गुप्त (सन्मार्ग अखबार के मुख्य संपादक एवं पूर्व राज्यसभा सांसद) उपस्थित थे।

इसके उपरांत इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में ‘हिंदी साहित्य ज्ञानकोश’ पर एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया जिसमें इस परियोजना के मुख्य संपादक  शंभूनाथ एवं वाणी प्रकाशन के प्रबन्ध निदेशक अरुण माहेश्वरी ने पत्रकारों से कोश में लगे विशद शोध एवं इसकी निर्माण प्रक्रिया पर बातचीत की।

उन्होंने बताया कि वाणी प्रकाशन और भारतीय भाषा परिषद् के तत्वावधान में निर्मित सात खण्डों का ‘हिंदी साहित्य ज्ञान कोश’ अब हिंदी के पाठकों के लिए उपलब्ध है। हिंदी साहित्य, दर्शन, इतिहास, आलोचना आदि सभी विषयों को समाहित किये हुए यह सात खण्डों का महती ज्ञान कोश हिंदी साहित्य में पहला ऐसा प्रयास है जो शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, शिक्षकों के अतिरिक्त आम पाठकों के लिए भी उतना ही लाभप्रद है।

शंभूनाथ ने बताया, ‘हिंदी साहित्य ज्ञानकोश’ पूरे हिंदी संसार का एक सपना था। 1958 से 1965 के बीच धीरेन्द्र वर्मा द्वारा बना ‘हिंदी साहित्य कोश’ करीब पचास साल पुराना हो चुका था। इसके अलावा, आज साहित्य का अर्थ विस्तार हुआ है। साहित्य का ज्ञान अब एक व्यापक सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य और दुनिया के बहुत से विचारों, सिद्धान्तों और अवधारणाओं को जाने बिना संभव नहीं है। साहित्य आज भी ज्ञान का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण मानवीय रूप है। यह आम नागरिकों के लिए पानी और मोबाइल की तरह जरूरी है।’

वाणी प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अरुण माहेश्वरी ने बताया कि हिंदी साहित्य ज्ञानकोश में 2660 प्रविष्टियां हैं। यह 7 खण्डों में 4560 पृष्ठों का है। इसमें हिंदी साहित्य से सम्बन्धित इतिहास, साहित्य सिद्धान्त आदि के अलावा समाज विज्ञान, धर्म, भारतीय संस्कृति, मानवाधिकार, पौराणिक चरित्र, पर्यावरण, पश्चिमी सिद्धान्तकार, अनुवाद सिद्धान्त, नवजागरण, वैश्वीकरण, उत्तर-औपनिवेशिक विमर्श आदि कुल 32 विषय हैं। हिंदी की प्रकृति और भूमिका अन्य भारतीय भाषाओं से विशिष्ट है। इसलिए ज्ञानकोश में हिंदी राज्यों के अलावा दक्षिण भारत, उत्तर-पूर्व और अन्य भारतीय क्षेत्रों की भाषाओं-संस्कृतियों से भी परिचय कराने की कोशिश है। इसमें हिंदी क्षेत्र की 48 लोक भाषाओं और कला-संस्कृति पर सामग्री है। देश भर के लगभग 275 लेखकों ने मेहनत से प्रविष्टियाँ लिखीं और उनके ऐतिहासिक सहयोग से ज्ञानकोश बना।

संपादक शंभुनाथ ने बताया, इस ज्ञानकोश के निर्माण में राधावल्लभ त्रिपाठी, जवरीमल्ल पारख, अवधेश प्रसाद सिंह और राजकिशोर जैसे ख्याति प्राप्त विद्वानों ने बहुत श्रम किया है। हमने कोलकाता में कार्यशालाएं कीं। इंटरनेट की सुविधाएं लीं और नयी पद्धतियों को अपनाया। हमारा लक्ष्य था कि एक बृहद, तथ्यपूर्ण, समावेशी और सारवान ज्ञानकोश बने। यह ज्ञान का एक विकासशील कोश है और एक राष्ट्रीय शुरुआत है। हमारा विश्वास है कि हिंदी की आने वाली पीढ़ियों द्वारा इसकी नींव पर ज्ञान की बहुमंजिला इमारत बनती रहेगी।’

हिंदी का पहला ‘हिंदी विश्वकोश’ नगेन्द्रनाथ बसु के सम्पादन में 1916 से 1931 के बीच तैयार किया था। यह उनके बांग्ला विश्वकोश की ही हिंदी छाया था। इसके पश्चात ‘हिंदी साहित्य कोश’ 1956 में आया था। नागरी प्रचारिणी सभा ने 1960 से 70 के बीच हिंदी विश्वकोश प्रकाशित किया था। अब इसके बाद भारतीय भाषा परिषद के ‘हिंदी साहित्य ज्ञानकोश’ को हम एक बड़े हस्तक्षेप के रूप में देख सकते हैं। इसको ग्रन्थ रूप देने और वितरण व्यवस्था में वाणी प्रकाशन की ऐतिहासिक भूमिका है। कोलकाता के सन्मार्ग ने इसे मुद्रित किया है।

अरुण माहेश्वरी ने बताया कि यहां जुड़ा साहित्य शब्द अपने विशद अर्थ में है। इसके अंतर्गत दर्शन, राजनीति, इतिहास आदि सब समाहित है। यह विश्व कोश से कहीं आगे की बात है और साहित्य शब्द के जुड़ने से व्यापक विस्तार ले लेता है। प्रेस वार्ता में पत्रकारों की तरफ़ से आए इन सुझावों का उन्होंने स्वागत किया कि हर साल इसमें नए संशोधन जोड़ें जाएं और उनसे पाठकों को परिचित कराया जाये। साथ ही इसके डिजिटल संस्करण को भी शीघ्र लाने की बात कही गई।

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कम्युनिकेशन सेक्टर में है ‘टी शेप्ड’ लोगों की जरूरत: प्रो. संजय द्विवेदी

एफआईएमटी कॉलेज द्वारा आयोजित ऑनलाइन करियर काउंसलिंग सेशन में ‘IIMC’ के महानिदेशक ने विद्य़ार्थियों को मीडिया संगठनों की कार्यप्रणाली से अवगत कराया।

Last Modified:
Monday, 02 August, 2021
Pro Sanjay Dwivedi

‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (IIMC) के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी का कहना है कि आज कम्युनिकेशन सेक्टर में मल्टी टैलेंटेड लोगों की आवश्यकता है। कॉरपोरेट की भाषा में ऐसे लोगों को ‘टी शेप्ड’ कहा जाता है। भारत की नई शिक्षा नीति भी इस कोशिश में है कि देश में ‘टी शेप्ड’ लोगों की संख्या बढे़।

एफआईएमटी कॉलेज द्वारा आयोजित ऑनलाइन करियर काउंसलिंग सेशन में प्रो. द्विवेदी ने विद्य़ार्थियों को मीडिया संगठनों की कार्यप्रणाली से अवगत कराया तथा इस क्षेत्र में करियर की संभावनाओं को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि गेमिंग, एनीमेशन, मल्टीमीडिया, वेब डिजाइनिंग और फोटोग्राफी जैसे कौशल वाले क्षेत्रों में अवसर खुले हैं। पत्रकारिता के अलावा विद्यार्थी अन्य करियर विकल्प का चयन कर सकते हैं, जिसमें फिल्म या टीवी के लिए प्रोडक्शन तथा लेखन, निजी क्षेत्र में कॉरपोरेट कम्युनिकेशन और डिजिटल मार्केटिंग में काफी अवसर हैं।

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि कोविड-19 ने मीडिया के परिदृश्य को बदल दिया है, इसलिए विद्यार्थियों के लिए ई-कॉमर्स और डिजिटल मीडिया कंपनियों में कंटेंट क्रिएशन में रोजगार के अनेक अवसर हैं। टीवी और फिल्म संगठनों के अलावा, ओटीटी प्लेटफॉर्म भी अच्छे लेखकों की तलाश में हैं। ऐसे में लेखन कार्य में अच्छा कौशल रखने वाले विद्यार्थियों के लिए रोजगार की अपार संभावनाएं हैं।

इस सेशन में एन. के. बगरोडिया ग्लोबल स्कूल के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में एफआईएमटी कॉलेज के स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की अध्यक्ष प्रो. गरिमा बोरा, असिस्टेंट प्रोफेसर एस. एस. डोगरा एवं एन. के. बगरोडिया ग्लोबल स्कूल की प्रिसिंपल जयश्री नवानी भी उपस्थित थीं। कार्यक्रम का संचालन राघव मित्तल ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन सरोज व्यास ने किया। इस काउंसलिंग में अनेक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया और मीडिया एवं मनोरंजन के क्षेत्र में करियर के अवसरों से संबंधित जानकारी हासिल की।

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बीमारी से लड़ रहे वरिष्ठ पत्रकार को मुख्यमंत्री ने भेजी आर्थिक मदद

फरीदाबाद के वरिष्ठ और वयोवृद्ध पत्रकार अमरनाथ बागी पिछले काफी दिनों से बीमार चल रहे हैं। इलाज पर होने वाला खर्च वहन न कर पाने के चलते उन्होंने मदद की अपील की थी

Last Modified:
Thursday, 29 July, 2021
Bagi45454

फरीदाबाद के वरिष्ठ और वयोवृद्ध पत्रकार अमरनाथ बागी पिछले काफी दिनों से बीमार चल रहे हैं। इलाज पर होने वाला खर्च वहन न कर पाने के चलते उन्होंने मदद की अपील की थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने वयोवृद्ध पत्रकार अमरनाथ बागी को इलाज के लिए दो लाख रुपए की आर्थिक मदद भेजी है।

वरिष्ठ पत्रकार अमरनाथ बागी ने मुख्यमंत्री की समय पर की गई इस मदद के लिए उनका धन्यवाद किया है। अमरनाथ बागी शेर-ए-हरियाणा समाचार पत्र के संपादक हैं और गत लगभग 70 वर्षों से पत्रकारिता कर रहे हैं। वे 94 वर्ष के हैं।

पूरी उम्र पत्रकारिता और समाज के लिए समर्पित वरिष्ठ पत्रकार बागी इलाज पर होने वाला खर्च वहन करने में सक्षम नहीं थे और उन्होंने इसके लिए मदद की मांग की थी। यह सूचना जब मुख्यमंत्री को मिली तो वह उनकी मदद के लिए आगे आए और दो लाख रुपए की राशि मुख्यमंत्री राहत कोष से देने के आदेश दिए। सोमवार को यह राशि बागी के खाते में पहुंच गई।

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कोरोना के खिलाफ 'जंग' में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका: प्रो. संजय द्विवेदी

पटना वीमेंस कॉलेज की ओर से आयोजित वेबिनार में आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि कोरोना के विरुद्ध इस अभियान में मीडियाकर्मी अग्रणी योद्धा रहे हैं।

Last Modified:
Tuesday, 27 July, 2021
IIMC

‘कोरोनावायरस पूरे विश्व के लिए एक अनजानी आपदा है। इस महामारी के खिलाफ आम जनता को जागरूक करने में मीडिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कोरोना के विरुद्ध इस अभियान में मीडियाकर्मी अग्रणी योद्धा रहे हैं।‘ यह विचार भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के महानिदेशक प्रो. संजय ​द्विवेदी ने मंगलवार को पटना वीमेंस कॉलेज द्वारा आयोजित दो दिवसीय वेबिनार के उद्घाटन सत्र में व्यक्त किए।

‘कोविड काल में मीडिया की भूमिका एवं चुनौतियां’ विषय पर विचार व्यक्त करते हुए प्रो. द्विवेदी ने कहा कि मीडिया जन सामान्य के सशक्तिकरण का माध्यम है और वर्तमान आपदा की स्थिति में उसने ये बात साबित की है। सकारात्मक खबरों का प्रसार कर मीडिया ने लोगों को जागरूक करने और उनका हौसला बढ़ाने का काम किया है।

प्रो. द्विवेदी के अनुसार पूरी दुनिया के लगभग 51 प्रतिशत लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान लोगों के बीच संपर्क और संवाद कायम रखने में सोशल मीडिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यही कारण है कि आज कोरोना के खिलाफ लड़ाई का एक बड़ा हिस्सा इसी के जरिये लड़ा जा रहा है। सोशल मीडिया उन गांवों तक सूचना पहुंचाने का कार्य कर रहा है, जहां अन्य संचार माध्यमों की पहुंच न के बराबर है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट की क्रांति के समय ‘ग्लोबल विलेज’ का जो स्लोगन बेहद चर्चित हुआ था, वो इस महामारी के समय साकार रूप में सामने आया है।

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि लोकतंत्र की सफलता उसकी पत्रकारिता पर निर्भर करती है। कोरोना संक्रमण के दौरान अपनी भूमिका से मीडिया ने ये साबित किया है उसे यूं ही लोकतंत्र का चौथा स्तंभ नहीं कहा जाता। कार्यक्रम में कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. सिस्टर एम रश्मि ए.सी. तथा जनसंचार विभाग की अध्यक्ष सुश्री मिनती चकलनवीस ने भी हिस्सा लिया। वेबिनार के दौरान प्रो. द्विवेदी ने विद्यार्थियों के सवालों का जवाब भी दिया। कार्यक्रम का संचालन विकास मिश्रा ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन अंकिता ने किया।

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वरिष्ठ पत्रकार खुशदीप सहगल ने बताए मीडिया में सफल होने के पांच ‘सूत्रवाक्य'

वरिष्ठ पत्रकार खुशदीप सहगल ने अब पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखने वाले युवाओं और यहां कार्यरत पत्रकारों को इस प्रोफेशन की बारीकियां सिखाने का फैसला लिया है।

Last Modified:
Tuesday, 27 July, 2021
Khushdeep Sehgal

‘टीवी टुडे नेटवर्क’ (TV Today Network) से पिछले दिनों रिटायर होने के बाद वरिष्ठ पत्रकार खुशदीप सहगल ने अब पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखने वाले युवाओं और यहां कार्यरत पत्रकारों को इस प्रोफेशन की बारीकियां सिखाने का फैसला लिया है। इसके लिए खुशदीप सहगल ने एक मिशन शुरू किया है, जिसमें वह समय-समय पर युवा साथियों से संवाद करेंगे। इस मिशन के उद्देश्य से लोगों को परिचित कराने और ज्यादा से ज्यादा युवा साथियों को इससे लाभान्वित कराने के तहत उन्होंने 24 जुलाई को मेरठ में एक कार्यक्रम रखा।

यह भी पढ़ें: ये है मेरे मिशन से जुड़ी वो पोस्ट जिसका इंतज़ार था...खुशदीप

इस कार्यक्रम में अपने मिशन के बारे में तमाम बातों पर चर्चा करने के साथ ही खुशदीप सहगल ने बताया कि वह किस तरह से पत्रकारिता की दुनिया में आए। इस मौके पर उनका कहना था,‘जो मिशन हाथ में लिया है, उसमें मेरा लगाव हर उस युवा से है जो मीडिया, क्रिएटिव राइटिंग और ब्लॉगिंग में भविष्य बनाना चाहता है, भले ही उसकी रिहाइश का शहर कोई सा भी हो।’

कार्यक्रम में अपने संबोधन में खुशदीप सहगल ने जो कहा, उसका पांच वाक्यों में निचोड़ ये था।

1- यूपीएससी परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों को इम्तिहान की तैयारी के दौरान ही सामान्य अध्ययन के लिए जी-तोड़ मेहनत करनी पड़ती है, लेकिन एक पत्रकार को हर दिन अपने को दुनिया भर में हो रहे घटनाक्रमों से अवगत रखना होता है।

2- अगर आप किसी संस्थान में कार्यरत हैं तो वहां की पॉलिसी, नियम कायदों को मानिए। अगर आपका इरादा ‘क्रांति’ लाने का है तो पहले संस्थान से इस्तीफा दीजिए। अपना अलग माध्यम खड़ा कीजिए, वहां से वो सब कहिए जो आप कहना चाहते हैं, लेकिन संस्थान के बैनर तले ऐसा करना अनुचित है।

3- अच्छे पत्रकार को अपनी स्टोरी शुरू से आखिर तक यानि रॉ इनपुट से लेकर एंड प्रेजेंटेशन तक ओन (Own) करनी चाहिए. जैसा कि एक अच्छा शेफ अपनी डिश के साथ करता है।

4- अच्छे बॉसेज वही हो सकते हैं, जिन्हें अपने स्टाफ के हर सदस्य की क्षमताओं की पहचान हो। उसी हिसाब से प्लसपाइंट्स को उभार कर बेहतर काम लिया जा सके।

5- युवावस्था में ही मीडिया में कैसे बड़े मकाम तक पहुंचा जा सकता है, इसके लिए कड़ी मेहनत ही एक रास्ता है और कोई शार्ट कट नहीं है। इसके लिए मैंने युवा साथियों को आजतक/इंडिया टुडे ग्रुप के न्यूज डायरेक्टर और मेरे बॉस रहे राहुल कंवल का हवाला दिया।

बता दें कि खुशदीप हिंदी ब्लॉगिंग की दुनिया में भी जाना-माना नाम हैं। उनके ब्लॉग ‘देशनामा’ को 2013 में इंडीब्लॉगर्स ने पॉलिटिकल न्यूज़ की कैटेगरी में सभी भाषाओं में बेस्ट ब्लॉग चुना। इसके अलावा ब्लॉगअड्डा ने 2014 में खुशदीप के ब्लॉग को हिंदी में भारत का बेस्ट ब्लॉग घोषित किया था।

अपने मिशन और मेरठ के कार्यक्रम के बारे में खुशदीप सहगल ने ‘देशनामा’ में विस्तार से जानकारी दी है। खुशदीप सहगल के इस पूरे ब्लॉग को आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

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नहीं रहे कैपिटल महाराजा ग्रुप के चेयरमैन आर. राजामहेंद्रन

श्रीलंका में मीडिया की जानी-मानी हस्ती राजामहेंद्रन ने रविवार की सुबह कोलंबो के अस्पताल में आखिरी सांस ली।

Last Modified:
Sunday, 25 July, 2021
Rajamahendran

श्रीलंका में मीडिया की जानी-मानी हस्ती और ‘कैपिटल महाराजा ग्रुप’ (Capital Maharaja Group) के चेयरमैन आर. राजामहेंद्रन का निधन हो गया है। बताया जाता है कि काफी दिनों से उनकी तबीयत खराब थी और कोलंबो के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था, जहां पर रविवार को उन्होंने आखिरी सांस ली।

राजामहेंद्रन के आकस्मिक निधन के बारे में ‘श्री अधिकारी ब्रदर्स’ (SAB) ग्रुप के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मार्कंड अधिकारी ने कहा, ‘राजामहेंद्रन के निधन की खबर सुनकर काफी दुखी हूं। वह हमारे परिवार के काफी करीबी थे।‘

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'किसान संसद' के दौरान कथित पत्रकार ने वीडियो जर्नलिस्ट पर किया हमला

कृषि कानूनों के खिलाफ गुरुवार से जंतर-मंतर पर शुरू हए आंदोलन के दौरान मीडियाकर्मियों से मारपीट का मामला सामने आया है।

Last Modified:
Friday, 23 July, 2021
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कृषि कानूनों के खिलाफ गुरुवार से जंतर-मंतर पर शुरू हए आंदोलन के दौरान मीडियाकर्मियों से मारपीट का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां प्रदर्शन के दौरान एक वीडियो जर्नलिस्ट पर हमला किया गया। मीडियाकर्मी को इलाज के लिए पास के ही राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया।

वीडियो जर्नलिस्ट की पहचान नागेंद्र गोसाईं के रूप में हुई है। हमला वहां हुआ, जहां से सभी मीडियाकर्मी प्रदर्शन कवर कर रहे थे। हालांकि, इसी दौरान एक शख्स ने वीडियो जर्नलिस्ट के ऊपर कैमरा स्टैंड (ट्राईपॉड) से हमला कर दिया, जिसमें उनके हाथ से खून बहने लगा।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हमलावर को पकड़ा लिया गया है। गोसाईं पर हमला कथित स्वतंत्र पत्रकार प्रभजोत सिंह द्वारा किया गया।

उन्होंने बताया कि गोसाईं ने कहा कि सिंह सुबह मीडियाकर्मियों को अपशब्द कह रहे थे और उसकी रिकॉर्डिंग भी कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सिंह ने एक महिला पत्रकार के खिलाफ भी अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।

उन्होंने कहा कि जब अन्य पत्रकारों ने अपत्ति जतायी तो कहासुनी हुई और सिंह ने उन पर एक ट्राईपॉड से हमला किया। उन्होंने बताया कि गोसाई ने कहा कि उन पर सिंह ने तीन बार हमला किया जिसमें उनके हाथ में चोट लगी।

गोसाईं ने कहा कि एक मेडिकोलीगल केस (एमएलसी) किया गया है और संसद मार्ग पुलिस थाने में एक लिखित शिकायत दी गई है।

बता दें कि किसानों ने गुरुवार से जंतर-मंतर पर 'किसान संसद' शुरू की है। यह प्रदर्शन 13 अगस्त तक यानी संसद के मॉनसून सत्र खत्म होने तक चलेगा। किसानों ने ऐलान किया है कि तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन के लिए वे इस दौरान रोज स्पीकर और डिप्टी स्पीकर चुनेंगे और साथ में अहम बिलों पर चर्चा करेंगे। इस दौरान हर दिन जंतर-मंतर पर 200 किसानों का जमावड़ा लगेगा। 

 

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भैंस का इंटरव्यू कर सुर्खियों में बना यह पत्रकार, वीडियो वायरल

चांद नवाब से लेकर गधे के इंटरव्यू तक, हमेशा ही पाकिस्तान की पत्रकारिता में एक अद्भुत चीज देखने को मिलती है।

Last Modified:
Thursday, 22 July, 2021
pak45454

हम सचमुच अजीब दौर में जी रहे हैं। अजीबोगरीब खबरों के सुर्खियों में बने रहने का सिलसिला जारी है। चांद नवाब से लेकर गधे के इंटरव्यू तक, हमेशा ही पाकिस्तान की पत्रकारिता में एक अद्भुत चीज देखने को मिलती है। इन दिनों मशहूर पाकिस्तानी पत्रकार अमीन हफीज का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इस वीडियो में पत्रकार हफीज ने ईद के मौके पर एक भैंस का इंटरव्यू लिया और भैंस ने पत्रकार के सवालों का जवाब दिया।

दरअसल हफीज एक भैंस के आगे माइक ले जाते हैं और उससे पूछते, ‘हांजी आप बताएं कि आपको लाहौर में आकर कैसा लगा’ इस पर भैंस भी जवाब देती है तो पत्रकार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और वो कहते हैं, ‘भैंस जवाब दे रही है कि लाहौर अच्छा लगा।’

अगर आपको याद हो तो यह वहीं जनाब है जिन्होंने कभी गधे का इंटरव्यू लिया था और अब हफीज ने एक भैंसे का इंटरव्यू लिया है।

इसके बाद हफीज भैंस से अगला सवाल पूछते हैं, ‘आप बताइए, लाहौर का खाना अच्छा है या आपके गांव का खाना अच्छा है।’ इस पर भैंस जवाब देती है तो हफीज खुशी से उछल पड़ते हैं और कहते हैं, ‘हां कहती है लाहौर का खाना अच्छा है।’

यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। नायला इनायत ने इस वीडियो की क्लिप ट्विटर पर साझा की है। इस वीडियो को देखने के बाद हर कोई जमकर हंस रहा है। ये वीडियो देखने के बाद एक यूजर ने कहा कि सच में पाकिस्तान कमाल की जगह है, यहां कुछ भी हो सकता है।

सोशल मीडिया पर धूम मचा रहे इस वीडियो को अभी तक 8 हजार से अधिक लोग देख चुके हैं जबकि बड़ी संख्या में लोग शेयर भी कर रहे हैं। इसके साथ ही लोग इस पर जमकर कमेंट कर पत्रकार हफीज को ट्रोल भी कर रहे हैं।

एक यूजर ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘ये वहीं शख्स है जिसे जानवरों के इंटरव्यू करने में महारत हासिल है’ वहीं एक यूजर ने लिखा, कुर्बानी के नाम पर इतना अत्याचार क्यों हो रहा है।’

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गैरकानूनी घोषित हुआ यह प्रमुख पत्रकार संघ

यह कदम पूर्व सोवियत राष्ट्र के स्वतंत्र मीडिया और नागरिक समाज कार्यकर्ताओं पर की जा रही व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है।

Last Modified:
Thursday, 22 July, 2021
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बेलारूस में अधिकारियों ने देश के प्रमुख पत्रकार संघ को गैरकानूनी घोषित कर दिया है। यह कदम पूर्व सोवियत राष्ट्र के स्वतंत्र मीडिया और नागरिक समाज कार्यकर्ताओं पर की जा रही व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुधवार को न्याय मंत्रालय ने देश की शीर्ष अदालत से कहा कि कार्यालय पट्टा दस्तावेजों में कथित खामियों के मद्देनजर ‘बेलारुसियन एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट’ (बीएजे) को बंद किया जाए।

वहीं दूसरी तरफ, बीएजे ने कहा कि वह शिकायतों का जवाब देने के लिए आवश्यक दस्तावेज इसलिए उपलब्ध नहीं करा सका, क्योंकि पिछले हफ्ते पुलिस द्वारा की गई छापेमारी के बाद से ही उसका मुख्यालय सील है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष आंद्रेई बास्टुनेट्स ने कहा, ‘यह पूरी तरह से खत्म कर देने का अभियान है। न्याय मंत्रालय मर्यादा बनाए रखने की कोशिश भी नहीं कर रहा। भले ही स्थिति निराशाजनक लगती है, हम कानूनी तरीकों से बीएजे का बचाव करेंगे।’

बीएजे ने कहा कि अधिकारियों ने पिछले दो हफ्ते में मीडिया कार्यालयों और पत्रकारों के घर पर 67 छापे मारे हैं, जबकि 31 पत्रकारों को हिरासत में लिया गया।

बता दें कि एसोसिएशन की स्थापना 1995 में की गई थी और अभी 1,204 पत्रकार इसके सदस्य हैं। यह बेलारूस में सबसे बड़ा और सबसे सम्मानित मीडिया संघ है और ‘इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स’ का सदस्य है।

गौरतलब है कि बीएजे को बंद करने का कदम देश में स्वतंत्र मीडिया पर लगातार किए जा रहे हमलों के बीच उठाया गया है। बेलारूस के तानाशाह राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको के अगस्त 2020 में छठी बार चुने जाने के बाद से ही मीडिया और सरकार के बीच विवाद जारी है।

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इस वजह से पत्रकारों को अपनी लेखनी की धार तेज करने की जरूरत है, बोले राज्यपाल कोश्यारी

पत्रकार अपने विचारों से समाज गढ़ते हैं। समाज में जहां कुछ गलत हो रहा होता है उसे सामने लाने की ताकत पत्रकारों की लेखनी में होती है

Last Modified:
Wednesday, 21 July, 2021
Bhagatsinghkothyari5454

पत्रकार अपने विचारों से समाज गढ़ते हैं। समाज में जहां कुछ गलत हो रहा होता है उसे सामने लाने की ताकत पत्रकारों की लेखनी में होती है, इसलिए पत्रकारों को अपनी लेखनी की धार को तेज करने की जरूरत है। यह बात महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कही।

राज्यपाल मंगलवार को राजभवन में मंत्रालय व विधानमंडल पत्रकार संघ के वार्षिक पत्रकारिता पुरस्कार वितरण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल थे। राज्यपाल द्वारा मंत्रालय और विधानमंडल पत्रकार संघ-2020 के लिए जीवन गौरव पुरस्कार वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश बाल जोशी को प्रदान किया गया, जबकि वरिष्ठ पत्रकार चंदन शिरवाले को उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

वरिष्ठ पत्रकार किरण तारे और औरंगाबाद के सिद्धार्थ गोडम को राज्य स्तरीय उत्कृष्ट पत्रकारिता प्रदान किया गया। इस मौके पर राज्यपाल कोश्यारी ने कहा कि पत्रकारिता एक जोखिम भरा काम है, इसके बावजूद समाज के लिए यह जोखिम उठाने के लिए तैयार रहना महत्वपूर्ण है। समाज की बुरी चीजों के साथ-साथ अच्छी चीजें भी सामने आनी चाहिए। पत्रकारिता को यदि समग्र दृष्टि से किया जाए तो वह निश्चित रूप से समाज के लिए पथ प्रदर्शक होगी।

राज्यपाल ने पुरस्कार विजेता पत्रकारों को बधाई देते हुए कहा कि सभ्य समाज के निर्माण के लिए अच्छी पत्रकारिता महत्वपूर्ण है।

समारोह में मौजूद जनसंपर्क, पर्यटन और राज्य शिष्टाचार राज्य मंत्री अदिति तटकरे ने कहा कि जनसंपर्क महानिदेशालय के माध्यम से पत्रकारों से संवाद बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पत्रकारों के लिए हम इस विभाग के तहत किसी भी योजना या नई पहल को प्राथमिकता देंगे। तटकरे ने कहा कि कुछ खबरें हमें बताती हैं कि बतौर जन प्रतिनिधि हम कौन सा गलत फैसला ले रहे हैं।  

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महज इस आधार पर पत्रकार को हिरासत में रखना उसके जीने के अधिकार का उल्लंघन है: SC

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मणिपुर के पत्रकार एरेन्ड्रो लेचोम्बाम (Erendro Leichombam) को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है।

Last Modified:
Tuesday, 20 July, 2021
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मणिपुर के पत्रकार एरेन्ड्रो लेचोम्बाम (Erendro Leichombam) को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है। एरेन्ड्रो लेचोम्बाम को एक विवादित फेसबुक पोस्ट करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था, साथ ही उन पर नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) लगाया गया था। 

दरअसल, बीते गुरुवार को मणिपुर बीजेपी के अध्यक्ष प्रोफेसर एस. टिकेंद्र सिंह का कोरोना संक्रमित होने के कारण निधन हो गया था और उसी दिन पत्रकार  एरेन्ड्रो ने अपनी फेसबुक पोस्ट पर लिखा था, ‘गाय का गोबर और गोमूत्र काम नहीं करता है। रेस्ट इन पीस।’

सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि हम इस व्यक्ति को एक भी दिन हिरासत में रखने की इजाजत नहीं दे सकते। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि वह (पत्रकार) इसके लिए एक रात भी जेल में नहीं डाला जा सकता है। हालांकि, SG की अपील पर रिहाई मंगलवार तक के लिए रखी गई है, लेकिन बेंच की ओर से कहा गया कि लेचोम्बाम को हिरासत में रखना उनके जीने के अधिकार का उल्लंघन है।

दरअसल, बीजेपी नेता के निधन के बाद एरेन्ड्रो लेचोम्बाम द्वारा फेसबुक पर पोस्ट किया गया था, जिसे विवादित बताते हुए स्थानीय बीजेपी नेताओं ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। स्थानीय पुलिस ने इसी मामले में एक्शन लेते हुए मई महीने में उन पर कई धाराओं में केस दर्ज किया था, साथ ही एनएसए भी लगाया था। मई महीने से ही एरेन्ड्रो लेचोम्बाम जेल में बंद हैं।

एरेन्ड्रो लेचोम्बाम के पिता द्वारा सुप्रीम कोर्ट में इस गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका लगाई गई थी, जिसपर अब सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए पत्रकार की तुरंत रिहाई का आदेश दिए हैं।

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