शोधकर्ताओं-छात्रों के साथ आम पाठकों के लिए भी लाभप्रद होगा वाणी प्रकाशन का ये कोश

हिंदी साहित्य, दर्शन, इतिहास, आलोचना आदि विषयों को समाहित किये हुए सात खण्डों के कोश की प्रति राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को भेंट की गई

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 17 August, 2019
Last Modified:
Saturday, 17 August, 2019
Ram Nath

भारतीय भाषा परिषद और वाणी प्रकाशन के तत्वाधान में निर्मित 'हिंदी साहित्य ज्ञान कोश' 16 अगस्त 2019 को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को राष्ट्रपति निवास में भेंट किया गया। इस अवसर पर वाणी प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अरुण माहेश्वरी, निदेशक अदिति माहेश्वरी-गोयल और  प्रधान संपादक शंभूनाथ के साथ कुसुम खेमानी ( अध्यक्ष भारतीय भाषा परिषद), विमला पोद्दार (मंत्री, भा.भा.प.) विवेक गुप्त (सन्मार्ग अखबार के मुख्य संपादक एवं पूर्व राज्यसभा सांसद) उपस्थित थे।

इसके उपरांत इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में ‘हिंदी साहित्य ज्ञानकोश’ पर एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया जिसमें इस परियोजना के मुख्य संपादक  शंभूनाथ एवं वाणी प्रकाशन के प्रबन्ध निदेशक अरुण माहेश्वरी ने पत्रकारों से कोश में लगे विशद शोध एवं इसकी निर्माण प्रक्रिया पर बातचीत की।

उन्होंने बताया कि वाणी प्रकाशन और भारतीय भाषा परिषद् के तत्वावधान में निर्मित सात खण्डों का ‘हिंदी साहित्य ज्ञान कोश’ अब हिंदी के पाठकों के लिए उपलब्ध है। हिंदी साहित्य, दर्शन, इतिहास, आलोचना आदि सभी विषयों को समाहित किये हुए यह सात खण्डों का महती ज्ञान कोश हिंदी साहित्य में पहला ऐसा प्रयास है जो शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, शिक्षकों के अतिरिक्त आम पाठकों के लिए भी उतना ही लाभप्रद है।

शंभूनाथ ने बताया, ‘हिंदी साहित्य ज्ञानकोश’ पूरे हिंदी संसार का एक सपना था। 1958 से 1965 के बीच धीरेन्द्र वर्मा द्वारा बना ‘हिंदी साहित्य कोश’ करीब पचास साल पुराना हो चुका था। इसके अलावा, आज साहित्य का अर्थ विस्तार हुआ है। साहित्य का ज्ञान अब एक व्यापक सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य और दुनिया के बहुत से विचारों, सिद्धान्तों और अवधारणाओं को जाने बिना संभव नहीं है। साहित्य आज भी ज्ञान का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण मानवीय रूप है। यह आम नागरिकों के लिए पानी और मोबाइल की तरह जरूरी है।’

वाणी प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अरुण माहेश्वरी ने बताया कि हिंदी साहित्य ज्ञानकोश में 2660 प्रविष्टियां हैं। यह 7 खण्डों में 4560 पृष्ठों का है। इसमें हिंदी साहित्य से सम्बन्धित इतिहास, साहित्य सिद्धान्त आदि के अलावा समाज विज्ञान, धर्म, भारतीय संस्कृति, मानवाधिकार, पौराणिक चरित्र, पर्यावरण, पश्चिमी सिद्धान्तकार, अनुवाद सिद्धान्त, नवजागरण, वैश्वीकरण, उत्तर-औपनिवेशिक विमर्श आदि कुल 32 विषय हैं। हिंदी की प्रकृति और भूमिका अन्य भारतीय भाषाओं से विशिष्ट है। इसलिए ज्ञानकोश में हिंदी राज्यों के अलावा दक्षिण भारत, उत्तर-पूर्व और अन्य भारतीय क्षेत्रों की भाषाओं-संस्कृतियों से भी परिचय कराने की कोशिश है। इसमें हिंदी क्षेत्र की 48 लोक भाषाओं और कला-संस्कृति पर सामग्री है। देश भर के लगभग 275 लेखकों ने मेहनत से प्रविष्टियाँ लिखीं और उनके ऐतिहासिक सहयोग से ज्ञानकोश बना।

संपादक शंभुनाथ ने बताया, इस ज्ञानकोश के निर्माण में राधावल्लभ त्रिपाठी, जवरीमल्ल पारख, अवधेश प्रसाद सिंह और राजकिशोर जैसे ख्याति प्राप्त विद्वानों ने बहुत श्रम किया है। हमने कोलकाता में कार्यशालाएं कीं। इंटरनेट की सुविधाएं लीं और नयी पद्धतियों को अपनाया। हमारा लक्ष्य था कि एक बृहद, तथ्यपूर्ण, समावेशी और सारवान ज्ञानकोश बने। यह ज्ञान का एक विकासशील कोश है और एक राष्ट्रीय शुरुआत है। हमारा विश्वास है कि हिंदी की आने वाली पीढ़ियों द्वारा इसकी नींव पर ज्ञान की बहुमंजिला इमारत बनती रहेगी।’

हिंदी का पहला ‘हिंदी विश्वकोश’ नगेन्द्रनाथ बसु के सम्पादन में 1916 से 1931 के बीच तैयार किया था। यह उनके बांग्ला विश्वकोश की ही हिंदी छाया था। इसके पश्चात ‘हिंदी साहित्य कोश’ 1956 में आया था। नागरी प्रचारिणी सभा ने 1960 से 70 के बीच हिंदी विश्वकोश प्रकाशित किया था। अब इसके बाद भारतीय भाषा परिषद के ‘हिंदी साहित्य ज्ञानकोश’ को हम एक बड़े हस्तक्षेप के रूप में देख सकते हैं। इसको ग्रन्थ रूप देने और वितरण व्यवस्था में वाणी प्रकाशन की ऐतिहासिक भूमिका है। कोलकाता के सन्मार्ग ने इसे मुद्रित किया है।

अरुण माहेश्वरी ने बताया कि यहां जुड़ा साहित्य शब्द अपने विशद अर्थ में है। इसके अंतर्गत दर्शन, राजनीति, इतिहास आदि सब समाहित है। यह विश्व कोश से कहीं आगे की बात है और साहित्य शब्द के जुड़ने से व्यापक विस्तार ले लेता है। प्रेस वार्ता में पत्रकारों की तरफ़ से आए इन सुझावों का उन्होंने स्वागत किया कि हर साल इसमें नए संशोधन जोड़ें जाएं और उनसे पाठकों को परिचित कराया जाये। साथ ही इसके डिजिटल संस्करण को भी शीघ्र लाने की बात कही गई।

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इन 'खास दिनों' में एबीपी न्यूज नेटवर्क ने नंबर वन की कुर्सी पर फिर बनाई जगह

इस बारे में एबीपी न्यूज नेटवर्क के सीईओ अविनाश पांडे का कहना है कि हम लगातार इस दिशा में काम करना जारी रखेंगे, ताकि दर्शक हमारे काम से हमेशा खुश रहें।

Last Modified:
Saturday, 06 June, 2020
ANN

देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था 'ब्रॉडकास्‍ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल' (BARC) इंडिया के अनुसार, ‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ (ANN) ने 12वें से 19वें हफ्ते के बीच बड़ी खबरों के लिहाज से कई महत्वपूर्ण दिनों में नंबर वन न्यूज नेटवर्क के रूप में फिर अपनी जगह बनाई है।

रेटिंग के अनुसार, एबीपी न्यूज नेटवर्क जनता कर्फ्यू (22 मार्च), प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पहले लॉकडाउन की घोषणा (24 मार्च) , पीएम द्वारा दूसरे लॉकडाउन की घोषणा (14 अप्रैल) और गृह मंत्रालय द्वारा तीसरे लॉकडाउन की घोषणा (1 May) वाले दिन टॉप नेटवर्क की लिस्ट में नंबर एक पर रहा है।   

यही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर एकजुटता दिखाने के मौके पर पूरे देश में जब दीये जलाए गए थे (5 April 2020), उस दिन भी यह नेटवर्क नंबर वन (Source BARC, TG- NCCS 15+, Mkt- HSM, Gross Imp (in Mn), 05 Apr, TB- 2100-2200 Hrs) रहा था।  

इसके साथ ही एबीपी न्यूज नेटवर्क ने अपनी रीजनल चैनल्स जैसे-एबीपी आनंदा, एबीपी माझा, एबीपी अस्मिता और एबीपी गंगा के द्वारा प्रमुख शहरी और ग्रामीण मार्केट्स में अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई है। इन चैनल्स पर व्युअर्स स्थानीय खबरों से जुड़े रहते हैं और उनसे जुड़े अपडेट्स हासिल कर सकते हैं।

इस बारे में नेटवर्क की ओर से कहा गया है कि महामारी के विकराल और भयावह रूप को देखते हुए देश में लोगों के लिए कंटेंट और न्यूज का उपभोग (news-consumption) बहुत आवश्यक हो गया है। इस जरूरत को देखते हुए नेटवर्क ने कंटेंट को लेकर कई नई पहल की हैं। एबीपी गंगा पर ‘Corona Ke Karam Yodha’, एबीपी न्यूज पर ‘Sachchai ka Sensex’ और एबीपी आनंदा पर ‘Suman De’ को दर्शकों ने काफी सराहा है और लीडरशिप पोजीशन तक पहुंचने में इनका अहम योगदान है।      

इस बारे में एबीपी न्यूज नेटवर्क के सीईओ अविनाश पांडे का कहना है, ‘महामारी के इस दौर में जब चारों ओर अनिश्चतता का माहौल है, हम लगातार काम कर रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित कर सकें कि लोगों को न्यूज अपडेट्स मिलते रहें और वे हमसे लगातार जुड़े रहें। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि हम देश के लिए अपने मौलिक कर्तव्य को पूरा करने में सफल रहे हैं। हम लगातार इस दिशा में काम करना जारी रखेंगे, ताकि दर्शक हमारे काम से हमेशा खुश रहें।’

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आतंकवाद के खात्मे में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है भाषायी पत्रकारिता: विवेक अग्रवाल

जाने-माने क्राइम रिपोर्टर विवेक अग्रवाल ने कहा कि भाषायी पत्रकारिता आतंकवाद के खात्मे में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है

Last Modified:
Thursday, 04 June, 2020
journalism

जाने-माने क्राइम रिपोर्टर व वरिष्ठ पत्रकार विवेक अग्रवाल ने कहा कि भाषायी पत्रकारिता आतंकवाद के खात्मे में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा ‘वैश्विक आतंकवाद और मीडिया’ विषय पर आयोजित फेसबुक लाइव के दौरान विवेक अग्रवाल ने कहा कि आतंकवाद की समस्या विश्व के हर कोने में है। केवल धरती ही नहीं, अब आतंकवाद जल क्षेत्रों में भी समुद्री लुटेरों के रूप में पहुंच कर आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। पूरे विश्व में उदार लोकतंत्र से लेकर कठोर साम्यवादी राष्ट्र जैसे चीन और रूस में भी आतंकवाद एक बड़ी समस्या है। खासतौर पर अमेरिका में हुई आतंकवादी हमले की घटना के बाद विश्व में आतंकवाद को गंभीर समस्या के रूप में स्वीकार कर लिया गया है।

अग्रवाल ने कहा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तुलना में प्रिंट मीडिया आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में ज्यादा प्रभावी और जवाबदारी से अपनी भूमिका निभाता नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया आतंकवाद को फैलाने का एक बड़ा हथियार बन गया है। इसलिए सोशल मीडिया पर उपलब्ध आतंकी साहित्य और उनकी गतिविधियों को तलाश कर उनके प्लेटफार्म को भी समाप्त किये जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत में सायबर आतंकवाद को खत्म करने के लिए तकनीकी रूप से और अधिक संसाधन जुटाए जाना जरूरी है इसके अलावा राज्य पुलिस को भी साइबर तकनीक में पारंगत करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया शिक्षित वर्ग को आतंकवाद से प्रभावित करने का सबसे बड़ा प्लेटफार्म बनता जा रहा है। मीडिया को इस बारे में भी सोचने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद से जुड़ी खबरों को प्रस्तुत करने में मीडिया कई बार आतंकवादियों के हाथों अनजाने में इस्तेमाल भी हो जाता हैं। इसके लिए जरूरी है कि मीडिया और संपादक और अधिक जिम्मेदारी से तय करें कि क्या दिखाया जाना है क्या नहीं।

मीडिया छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने बताया कि केवल अनपढ़ और गरीब ही नहीं आतंकवाद में शिक्षित युवाओं को भी शामिल कराया जा रहा है। नशीले पदार्थ, सोने की तस्करी, नकली नोट का कारोबार, अपहरण, हफ्ता वसूली जैसे अपराधिक गतिविधियों से ही आतंकवाद के लिए पैसा जुटाया जाता।

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कोरोना को मात देकर लौटे पत्रकार ने उठाया ये सराहनीय कदम

कोरोनावायरस (कोविड-19) के खिलाफ ‘जंग’ में उतरे कई मीडियाकर्मी भी अब तक इसकी चपेट में आकर संक्रमित हो चुके हैं।

Last Modified:
Wednesday, 03 June, 2020
Corona

कोरोनावायरस (कोविड-19) के खिलाफ ‘जंग’ में उतरे कई मीडियाकर्मी भी अब तक इसकी चपेट में आकर संक्रमित हो चुके हैं। मध्य प्रदेश के इंदौर के एक अखबार में संवाददाता के रूप में काम करने वाले देव कुंडल (50) भी इसकी चपेट में आ गए थे, हालांकि वह अब इस महामारी को मात देकर घर लौट आए हैं। यही नहीं, अब उन्होंने एक सराहनीय पहल करते हुए इस महामारी से जूझ रहे मरीजों की जान बचाने के लिये मंगलवार को शहर के महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय (एमवायएच) में अपना प्लाज्मा दान किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्लाज्मा दान देने के बाद कुंडल ने कहा, ‘अगर मेरा प्लाज्मा चढ़ाए जाने से कोविड-19 के किसी गंभीर मरीज की जान बच सकती है तो मानवता के नाते मैं खुद को धन्य समझूंगा।’

गौरतलब है कि एमवायएच, देश के उन चुनिंदा संस्थानों में शामिल है, जिन्हें ‘भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद’ (आईसीएमआर) ने कोविड-19 मरीजों पर प्लाज्मा थेरेपी के चिकित्सकीय प्रयोग की अनुमति दी है। बता दें कि कोविड-19 से संक्रमित होने के बाद देव कुंडल को 14 अप्रैल को शहर के निजी अस्पताल में भर्ती किया गया था। इलाज के बाद ठीक होने पर वह दो मई को घर लौट आए हैं।

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महिला एंकर ने दी जान, वीडियो बनाकर बताई थी वजह

बेंगलुरु से 29 साल की एक महिला एंकर के सुसाइड की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि एंकर ने जहर पीकर अपनी जान दी है

Last Modified:
Tuesday, 02 June, 2020
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बेंगलुरु से 29 साल की एक महिला एंकर के सुसाइड की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि एंकर ने जहर पीकर अपनी जान दी है।

पुलिस जांच में पता चला कि चंदना वीके नाम की महिला एंकर ने मरने से पहले एक विडियो बनाया था, जिसमें उसने अपनी मौत के लिए अपने ब्वॉयफ्रैंड दिनेश को जिम्मेदार ठहराया था। एंकर का आरोप था कि उसके ब्वॉयफ्रैंड ने शादी के लिए मना कर दिया, जिसके बाद उसे यह कदम उठाना पड़ा।

साउथ बेंगलुरु (Suddaguntepalya) की पुलिस ने दिनेश व उसके परिवार के खिलाफ फिलहाल आत्महत्या के लिए उसकाने का मामला दर्ज कर लिया है। आरोपित के परिवार में उनके पिता लोकप्पा गौड़ा, मां गायत्री, बहन शायला और चाचा स्वामी उर्फ ​​दयानंद हैं। फिलहाल ये सभी फरार हैं, जिन्हें पकड़ने के लिए पुलिस ने एक टीम बनाई है।  

चंदना ने रियल एस्टेट के कुछ विज्ञापनों में काम किया था। वह हसन जिले के बेलूर की रहने वाली थीं।

शुरुआती जांच में पता चला कि एक वीडियो क्लिप बनाने के बाद चंदना ने जहर खा लिया था। इस वीडियो क्लिप में वह दिनेश से कहती हुई दिखाई देती हैं, ‘आपने कहा था कि अगर मैं मर जाउं, तो यह आपके लिए अच्छा है। इसलिए, मैं अपनी जिंदगी खत्म कर रही हूं और इसकी वजह आप हैं, दिनेश।’ जिसके बाद 28 मई, दोपहर करीब 2.30 बजे एंकर ने दिनेश, उसके माता-पिता, अपने माता-पिता और दोस्तों को क्लिप भेजी थी।

वीडियो को देखते हुए, चंदना के माता-पिता ने एंकर के पड़ोसियों को तुरंत इसकी जानकारी दी और उन्हें उसके पास जाने को कहा, जिसके बाद पड़ोसी उन्हें एक निजी अस्पताल में ले गए, जहां 30 मई को लगभग 12.30 बजे इलाज के दौरान एंकर की मौत हो गई।

अपनी पुलिस शिकायत में चंदना के पिता ने कहा कि उनकी बेटी और दिनेश पिछले पांच वर्षों से रिश्ते में थे। दिनेश ने उससे शादी करने का वादा किया था और दोनों परिवार रिश्ते के बारे में जानते थे।

चंदना से दिनेश ने 5 लाख रुपए उधार लिए थे, लेकिन पिछले कुछ महीनों से वह उससे बचने लगा और उसने उससे शादी करने से भी इनकार कर दिया। शिकायत में कहा गया है कि दिनेश के परिवार के सदस्यों ने चंदना से कहा कि वे उसकी शादी किसी और से कर देंगे।

पुलिस ने महिला एंकर के परिजनों को फिलहाल भरोसा दिलाया कि दिनेश व उनके परिवार के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

 

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आज कम ही ऐसे पत्रकार उभर रहे हैं, जिनमें संघर्ष करने का साहस दिखता हो: राज्यपाल लालजी टंडन

भारत में ऐसे भी पत्रकार हुए हैं, जिन्होंने सामाजिक सौहार्द के लिए अपने प्राणों की आहूति दे दी। ये लोग आज भी पत्रकारिता व पत्रकारों को प्रेरणा देते हैं।

Last Modified:
Tuesday, 02 June, 2020
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आज हमें उन पत्रकारों को याद करना चाहिए, जिन्होंने अपनी लेखनी से समाज जागरण का कार्य किया, जिन्होंने समाज की समस्याओं के समाधान दिए हैं। भारत के यशस्वी पत्रकारों ने अपनी कलम से स्वतंत्रता आंदोलन को धारदार बना दिया था। अनेक पत्रकारों ने छोटे-छोटे समाचार पत्र निकालकर स्वतंत्रता की अलख जगाई। भारत में ऐसे भी पत्रकार हुए हैं, जिन्होंने सामाजिक सौहार्द के लिए अपने प्राणों की आहूति दे दी। ये लोग आज भी पत्रकारिता व पत्रकारों को प्रेरणा देते हैं। यह विचार मध्यप्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन ने हिंदी पत्रकारिता दिवस पर आयोजित ऑनलाइन व्याख्यान में व्यक्त किए।

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की ओर से हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन ने ‘शिक्षा, पत्रकारिता एवं जीवन मूल्य’ विषय पर अपने संबोधन में कहा कि हमें पूर्वजों से जो इतिहास धरोहर के रूप में मिला है, उसे देखना जरूरी है। महापुरुषों के संघर्ष और उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता को देखकर, उससे प्रेरित होकर रास्ता निकालने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिस समय पत्रकारिता मिशन थी, तब पत्रकारिता का उद्देश्य शोहरत नहीं था। उस समय पत्रकारिता विदेशी गुलामी के प्रति जो जनाक्रोश था, उसकी अभिव्यक्ति थी। उस समय समाज की विकृतियों को दूर करने और उसके जागरण के लिए पत्रकारिता का उपयोग किया जाता था। किंतु, धीरे-धीरे यह प्रतिबद्धता कम होने लगी। इसी कारण आज जो स्थिति है, उसमें बहुत कम ऐसे लोग उभर रहे हैं, जिनमें बौद्धिक क्षमता, आत्मबल, प्रतिबद्धता और सामाजिक उद्देश्य के लिए संघर्ष करने का साहस दिखता हो।

राज्यपाल ने कहा कि सामाजिक समस्याओं के प्रति पत्रकारों की निश्चित अवधारणा एवं विचार जब लेखनीबद्ध होते हैं, तो वे ज्वाला बन जाते हैं। आपातकाल के दौर की साहसिक पत्रकारिता का भी उल्लेख माननीय राज्यपाल ने किया। सोशल मीडिया के दुरुपयोग के प्रति भी उन्होंने चेताया और उसे रोकने के लिए आगे आने की बात कही।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि हिंदी के विस्तार में हिंदी पत्रकारिता का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने बताया कि बांग्लाभाषी कोलकाता से हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत हुई। कोलकाता भारतीय भाषायी पत्रकारिता का सबसे बड़ा केंद्र रहा है। पंडित जुगलकिशोर शुक्ल ने 30 मई, 1826 को उदंत्त मार्तंड का प्रकाशन कर हिंदी पत्रकारिता की नींव रखी। उन्होंने बताया कि आगामी सात दिन तक ‘हिंदी पत्रकारिता सप्ताह’ के अंतर्गत विश्वविद्यालय विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर भी ऑनलाइन व्याख्यान आयोजित कराने जा रहा है।

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निजी चैनल के वाहन पर हमला, दो एम्प्लॉयीज की गई जान, 6 घायल

एक निजी टीवी चैनल के वाहन पर विस्फोट से हमला किया गया, जिसमें चैनल के दो कर्मचारियों की मौत हो गई। इनमें एक पत्रकार और एक ड्राइवर बताया जा रहा है

Last Modified:
Monday, 01 June, 2020
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अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक निजी टीवी चैनल के वाहन पर विस्फोट से हमला किया गया, जिसमें चैनल के दो कर्मचारियों की मौत हो गई। इनमें एक पत्रकार और एक ड्राइवर बताया जा रहा है। आंतरिक मंत्रालय के एक अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है।  

बता दें कि अफगानिस्तान के इस टेलिविजन चैनल का नाम ‘खुर्शीद टीवी’ है, जिसके वाहन पर निशाना साधते हुए शनिवार को आइइडी ब्लास्ट किया गया। इस विस्फोट में एक पत्रकार और ड्राइवर की मौत हो गई। खुर्शीद टीवी के संपादक सिद्दकी के मुताबिक, इस विस्फोट में चैनल के 6 स्टाफ विस्फोट में जख्मी है और दो की हालत गंभीर है।

अफगानिस्तान के पूर्व चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर अब्दुल्ला ने ट्वीट में कहा कि खुर्शीद टीवी के स्टाफ पर हमले से वे काफी दुखी हैं और मामले में जांच के लिए उन्होंने कानून प्रवर्तन प्राधिकारियों को निर्देश दिया है। अफगानिस्तान राष्ट्रपति के प्रवक्ता सिदिक सिद्दकी ने भी हमले की निंदा की है।

फिलहाल इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ग्रुप ने ली है।   

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इस कार्यक्रम के जरिये याद किए गए वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुलश्रेष्ठ

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर नेशनल मीडिया क्लब की ओर से पंकज कुलश्रेष्ठ की पत्नी को सौंपा गया एक लाख रुपए का चेक

Last Modified:
Sunday, 31 May, 2020
Journalism Day

हिंदी पत्रकारिता दिवस के मौके पर शनिवार को नेशनल मीडिया क्लब (एनएमसी) की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुलश्रेष्ठ को श्रद्धांजलि दी गई। पंकज कुलश्रेठ की श्रद्धाजंलि सभा में ऑनलाइन रूप से (जूम एप के माध्यम से) शिरकत करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ह्रदय नारायण दीक्षित ने कहा कि  पत्रकारिता दिवस के मौके पर नेशनल मीडिया क्लब के द्वारा जो कार्य किया गया है, वह सराहनीय है।

उन्होंने कहा कि नेशनल मीडिया क्लब पत्रकारों की रक्षा को लेकर समय-समय पर जो कार्य करता है, वह काबिले तारीफ हैं। इस क्लब के माध्यम से पत्रकारों को नया मुकाम मिला है। उन्होंने कहा कि पंकज कुलश्रेठ की मृत्यु पत्रकार जगत की लिए बहुत बड़ी क्षति है।

कर्यक्रम के दौरान नेशनल मीडिया क्लब के अध्यक्ष सचिन अवस्थी ने पंकज कुलश्रेष्ठ की पत्नी को एक लाख रुपए का चेक प्रदान किया। श्रद्धांजलि सभा में ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए विधानसभा अध्यक्ष ह्रदय नारायन दीक्षित व नेशनल मीडिया क्लब के संस्थापक रमेश अवस्थी समेत तमाम पत्रकारों ने पंकज कुलश्रेष्ठ को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके साथ ही वक्ताओं ने हिंदी पत्रकारिता दिवस की शुभकामनाएं भी दीं।

इस दौरान नेशनल मीडिया क्लब के संस्थापक रमेश अवस्थी ने आश्वासन दिया कि प्रदेश सरकार से बात कर जल्द ही पंकज कुलश्रेष्ठ के परिवार के एक सदस्य की सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि इस महामारी के खत्म होने के बाद नेशनल मीडिया क्लब के द्वारा एक बड़ा आयोजन किया जाएगा, जिसमें कोरोना वॉरियर्स पत्रकारों के साथ ही उन सभी पत्रकारों का सम्मान किया जाएगा, जिन्होंने इस समय में अपने कार्य को लगातार अंजाम दिया। वहीं, सचिन अवस्थी ने कहा कि नेशनल मीडिया क्लब पंकज कुलश्रेठ के परिवार के सदस्यों के साथ हमेशा खड़ा है। सरकार से बात करके जल्द परिवार को आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाएगी। इस दौरान शहर के वरिष्ठ पत्रकार बृजेंद्र पटेल, समीर कुरेशी, अनिल शर्मा, पंकज राठोर, अनिल राणा, कमिर कुरेशी आदि मौजूद रहे।

गौरतलब है कि दैनिक जागरण, आगरा के वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुलश्रेष्ठ का पिछले दिनों निधन हो गया था। कोरोनावायरस (कोविड-19) पॉजिटिव होने के बाद उन्हें आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने आखिरी सांस ली थी।

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दुनिया को अलविदा कह गए वरिष्ठ पत्रकार केके शर्मा

पंजाब केसरी के वरिष्ठ पत्रकार केके शर्मा का निधन हो गया है। वह कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे।

Last Modified:
Saturday, 30 May, 2020
KK Sharma

पंजाब केसरी के वरिष्ठ पत्रकार केके शर्मा का निधन हो गया है। वह कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। राजधानी दिल्ली के संजय गांधी अस्पताल में शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। शनिवार को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

बता दें कि केके शर्मा के पुत्र अश्विनी कुमार भी पत्रकार हैं और इन दिनों समाचार एजेंसी ‘हिन्दुस्थान’ में कार्यरत हैं। केके शर्मा के निधन पर ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट’ (इंडिया) से संबद्ध ‘दिल्ली पत्रकार संघ’ (DELHI JOURNALISTS ASSOCIATION) और तमाम पत्रकारों समेत दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शोक जताते हुए अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

 

 

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इस बीमारी ने छीन ली वरिष्ठ पत्रकार पीयूष कांति दास की जिंदगी

असम के वरिष्ठ पत्रकार पीयूष कांति दास का बुधवार की देर रात निधन हो गया। वे 55 वर्ष के थे।

Last Modified:
Friday, 29 May, 2020
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असम के वरिष्ठ पत्रकार पीयूष कांति दास का बुधवार की देर रात निधन हो गया। वे 55 वर्ष के थे और किडनी की बीमारी से ग्रसित थे। तबीयत ज्यादा खराब होने चलते उन्हें गुवाहाटी के एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया, जहां बीते बुधवार रात करीब 11 बजे अंतिम सांस ली।

पत्रकार की फैमिली में उनकी पत्नी और एक बेटी शिंजिनी सौहार्दियो हैं। पत्रकार के निधन पर विभिन्न दल एवं संगठनों के अलावा सरकार की ओर से भी गहरा शोक व्यक्त किया गया है।

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कोरोना की चपेट में आए दूरदर्शन के कैमरामैन की मौत

देश में कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसकी चपेट में आकर अब तक कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, वहीं बड़ी संख्या में लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

Last Modified:
Friday, 29 May, 2020
Corona

देश में कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसकी चपेट में आकर अब तक कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, वहीं बड़ी संख्या में लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। बुधवार को कोरोना की चपेट में आकर पब्लिक ब्रॉडकास्टर दूरदर्शन (डीडी) के कैमरामैन योगेश कुमार (53) की मौत हो गई। कोरोना से अपने एक एम्प्लॉयी की मौत के बाद दूरदर्शन ने अपने कुछ एम्प्लॉयीज को आइसोलेशन में जाने के लिए कहा है। वहीं, बिल्डिंग में सैनिटाइजेशन का काम किया जा रहा है।    

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, योगेश कुमार की मौत बुधवार को हुई हालांकि उनकी कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट गुरुवार को आई। अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि वह कैसे संक्रमित हुए थे। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, ‘योगेश ने बेचैनी की शिकायत की थी, जिसके बाद उन्हें शालीमार बाग एरिया में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां से हमें पता चला कि कार्डियक अरेस्ट के कारण उनकी मौत हुई है, हालांकि, गुरुवार को उनकी कोविड-19 की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई। हम दूरदर्शन के ऑपरेशन के परिचालन को दूसरी बिल्डिंग में शिफ्ट कर रहे हैं और सभी जरूरी प्रोटकॉल का पालन किया जाएगा।’

बताया यह भी जाता है कि योगेश कुमार ने पिछले दिनों कम से कम दो वरिष्ठ अधिकारियों के इंटरव्यू में अपनी सहभागिता निभाई थी। इनमें एक रेलवे के और दूसरा केंद्रीय मंत्रालय के अधिकारी थे। यही नहीं, करीब 12 दिन पहले वह ‘एम्स’ (AIIMS) एरिया में भी गए थे। इस घटना के बाद प्रसार भारती ने डीडी न्यूज के ट्रांसमिशन का कार्य कुछ दिन तक खेलगांव स्थित ऑफिस में शिफ्ट कर दिया है।

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