पहली बार इस तरह की फिल्म में नजर आएंगे धर्मेंद्र

मुंबई में शुरू हो चुकी है लेखक और डायरेक्टर मनोज शर्मा की इस फिल्म की शूटिंग

Last Modified:
Monday, 24 June, 2019
Dharmendra

लेखक और डायरेक्टर मनोज शर्मा इन दिनों सातवे आसमान पर हैं। उन्होंने अपनी हॉरर कॉमेडी फिल्म 'खली बली' में एक्टर धर्मेंद्र को कास्ट कर लिया है। यह धर्मेंद्र की पहली हॉरर कॉमेडी फिल्म है। फिल्म का निर्माण कर रहे हैं वन एंटरटेनमेंट फिल्म प्रोडक्शंस के कमल किशोर मिश्रा और प्राची मूवीज।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार फिल्म की शूटिंग मुंबई में शुरू हो चुकी है और फिल्म की शूटिंग को धर्मेंद्र काफी एन्जॉय भी कर रहे हैं। खली बली फिल्म में वह मनोचिकित्सक का किरदार निभा रहे हैं। यह पहली बार है कि धर्मेंद्र अलग जोनर की हॉरर कॉमेडी फिल्म में काम कर रहे हैं। फिल्म में धर्मेंद्र के अलावा एक्ट्रेस मधू, कायनात अरोड़ा, रनजीश दुग्गल, राजपाल यादव, विजय राज, एकता जैन, यासमीन खान, ब्रिजेंद्र काला, योगेश लखानी और असरानी हैं।

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भारत में नदियों को प्रदूषण मुक्त करने की मांग हुई तेज, सरकार के सामने रखे गए ये प्रस्ताव

रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्यों की रविवार सुबह 8 बजे आगरा में यमुना आरती स्थल एत्माद्दौला व्यू पॉइंट, पर नदियों का हमारे जीवन में महत्व और उनको प्रदूषण मुक्त बनाने के सम्बन्ध में सभा हुई

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Sunday, 27 September, 2020
Last Modified:
Sunday, 27 September, 2020
Rivers Connect

रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्यों ने आगरा में रविवार सुबह 8 बजे यमुना आरती स्थल एत्माद्दौला व्यू पॉइंट, पर नदियों का हमारे जीवन में महत्व और उनको प्रदूषण मुक्त बनाने के सम्बन्ध में सभा की, जिसमें रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्यों ने वर्तमान सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रस्ताव रखे हैं।  

रिवर कनेक्ट कैंपेन के सूत्रधार ब्रज खंडेलवाल ने बताया कि आगरा यमुना रिवर कनेक्ट अभियान वर्ष 2014 से लगातार छह वर्षों से जीवनदायिनी यमुना में अविरल जलधारा व उसको प्रदूषण मुक्त कैसे किया जाए, इसके लिए समर्पित भाव से पूरी तरह प्रयासरत है। दुनिया की बहुत सारी नदियों की तरह आजकल भारतीय नदियों का पानी भी प्रदूषित हो चुका है, जबकि इन नदियों को हमारी संस्कृति में हमेशा पवित्र जगह दी जाती रही है। पर साथ ही, भारत के लोग इन नदियों से मुंह नहीं फेर सकते। वे देश की जीवन रेखाएं हैं और भारत का भविष्य कई रूपों में हमारी नदियों की सेहत से जुड़ा हुआ है।

भारत में नदी प्रदूषण को प्रदूषण मुक्त करने के प्रस्ताव-

1- वर्तमान नदियों में प्रदूषण की इस समस्या को कम समय में ही सुलझाया जा सकता है और इसके लिए टेक्नोलॉजी पहले से ही मौजूद है। बस जरूरत है सख्त नियमों की और उन्हें लागू कराने के लिए पक्के इरादों की। हमें स्वयं जाकर नदियों को साफ करने की जरूरत नहीं है। अगर हम नदियों को प्रदूषित करना छोड़ दें, तो वे स्वयं को एक बरसात के मौसम में ही साफ कर लेंगी।

2- भारत एक राष्ट्र के रूप में अगर नदी प्रदूषण पर काबू पाने के लिए पूरी तरह गंभीर है, तो इसके लिए केंद्रीय नदी प्राधिकरण बनाने की जरूरत है, क्योंकि अब तक इन नदियों को गम्भीरतापूर्वक प्राथमिकता नहीं दी गई है।

3- भारत में रासायनिक और औद्योगिक कचरे वाले कई उद्योग अपने गंदे जल का वाटर ट्रीटमेंट प्रोसेस तभी करते हैं, जब सम्बन्धित विभाग का इंस्पेक्टर मौजूद हो। जब उनके ऊपर निगरानी नहीं होती, तो कई उद्योग गंदे जल को साफ किए बिना ही नदियों में बहा देते हैं। अगर हम चाहते हैं कि यह वाटर ट्रीटमेंट प्रोसेस असरदार हो, तो यह महत्वपूर्ण है कि गंदे जल के उपचार को भी एक बढ़िया व्यवसाय बनाया जाए। सरकार को बस नदी में जाने वाले जल की गुणवत्ता के लिए मानक तय करने होंगे।

4- नदियों में मृत जानवरों को नहीं फेंकना चाहिए। नदी किनारे बसे लोगों को नदी में गंदे कपड़े नहीं साफ करने चाहिए, क्योंकि गंदे व दूषित कपड़े के रोगाणु पानी में दूर-दूर तक फैलकर बीमारी फैला सकते हैं। नदी में डिटर्जेंट पाउडर, साबुन का प्रयोग और जलीय जीवों के शिकार से परहेज करना चाहिए, क्योंकि नदी के जीवों जैसे मछली, कछुआ, घड़ियाल, मेढ़क आदि प्रदूषण को दूर करते हैं। प्रदूषण दूर करने को लेकर सरकार को जागरूकता कार्यक्रम चलाना चाहिए।

5- नदियों को प्रदूषण रहित बनाने के लिए शहर के गंदे नालों को रोकने के साथ-साथ नदी किनारे मल-मूत्र त्याग करने और धोबी-घाटों पर भी प्रतिबंध होना चाहिए। वर्तमान में पवित्र नदियों में शहर के गंदे पानी को गिरने से रोकने की प्रबल आवश्यकता है और हमारी पवित्र नदियों को प्रदूषण रहित बनाना वर्तमान में हरेक व्यक्ति का लक्ष्य होना चाहिए।

6- दिल्ली-आगरा के मध्य स्टीमर फेरी सेवा पर्यटको के लिए शीघ्र शुरू करें, जैसे कि वायदा किया था, माननीय मुख्यमंत्री योगी जी से मांग की गई कि यमुना पर ताज के डाउनस्ट्रीम बैराज का निर्माण अति शीघ्र किया जाए, मेट्रो का कार्य बाद में। यमुना की सफाई, डिसल्टिंग की पुख्ता व्यवस्था हो। नालो को टेप किया जाए।

7- रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्यों ने मोदी सरकार से राष्ट्रीय नदी नीति व केंद्रीय नदी प्राधिकरण के गठन की मांग की एवं बताया कि हिंदू धर्म में लोग जिस तरह आसमान में सप्त ऋषि के रूप में सात तारों को पूज्य मानते हैं, उसी तरह पृथ्वी पर सात नदियों को पवित्र मानते हैं, जिस प्रकार आसमान में ऋषि भारद्वाज, ऋषि वशिष्ठ, ऋषि विश्वामित्र, ऋषि गौतम, ऋषि अगत्स्य, ऋषि अत्रि एवं ऋषि जमदग्नि अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए विराजमान हैं, उसी तरह पृथ्वी पर सात नदियां गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा, कावेरी, शिप्रा एवं गोदावरी अपने भक्तों की सुख एवं समृद्धि का प्रतीक मानी जाती हैं। गंगा नदी को स्वर्ग लोक से पृथ्वी पर लाने के लिए राजा भगीरथ द्वारा भगवान महादेव के तप की पौराणिक कथा पूरे देश में लोकप्रिय है।

रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्यों ने बताया कि देश में नदियों के योगदान एवं महत्व का अनुमान इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि वाराणसी आज विश्व के प्राचीनतम नगर एवं प्राचीनतम जीवित सभ्यता के रूप में जाना जाता है और वाराणसी गंगा के तट पर बसा हुआ है। आज वाराणसी विश्व में धार्मिक, शैक्षिक, पर्यटन, सांस्कृतिक एवं व्यापारिक नगर के रूप में प्रतिष्ठित है। इसके अलावा प्रयाग, अयोध्या, मथुरा, आगरा, नासिक, उज्जैन, गुवाहाटी, गया, पटना आदि सभी प्रमुख प्राचीन शहर नदियों के किनारे ही बसे हुए हैं। इसी तरह दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, अहमदाबाद, सूरत, हैदराबाद, मैसूर, हुबली आदि आधुनिक नगर भी नदियों के तट पर ही बसे हुए हैं।

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि भारत में प्राचीन काल से ही नदियों का अत्यधिक महत्व रहा है और आज भी बहुत हद तक हमारा जीवन नदियों पर निर्भर है। इनके प्रति सम्मान का भाव बनाए रखना इसलिए जरूरी है ताकि हम इनकी स्वच्छता और पवित्रता को चिरकाल तक बनाए रख सकें। इनका जल हमारे लिए उपयोगी हो सकेगा और हम लंबे समय तक इनका लाभ उठा सकेंगे।

सभा में सर्व श्री श्रवण कुमार, पद्मिनी अय्यर, यमुना आरती महंत श्री नंदन श्रोत्रिय, डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य, जुगल श्रोत्रिय, राहुल राज, दीपक राजपूत, पंडित प्रमोद गौतम, शाहतोष गौतम, दिलीप जैन, अमित कोहली, निधि पाठक,  डॉ. हरेंद्र गुप्ता, विकास, जगन प्रसाद, मोहन, नीलम कश्यप, शिवम्, सोनवीर, सुरजीत, रोहित गुप्ता, रंजन शर्मा आदि ने भाग लिया।

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नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार मोहन राव, CM ने जताया शोक

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक दुखद खबर सामने आई है। खबर है कि वरिष्ठ पत्रकार मोहन राव का शुक्रवार को निधन हो गया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 26 September, 2020
Last Modified:
Saturday, 26 September, 2020
Mohan

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक दुखद खबर सामने आई है। खबर है कि वरिष्ठ पत्रकार मोहन राव का शुक्रवार को निधन हो गया। दिल का दौरा पड़ने से मोहन राव का शुक्रवार बीती रात हैदराबाद में निधन हो गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनका पार्थिव शरीर शनिवार दोपहर सड़क मार्ग के जरिए रायपुर लाया जा रहा है। पहले यह उम्मीद थीं कि उनकी अंतिम यात्रा सी-75 टैगोर नगर स्थित उनके आवास से दोपहर दो बजे निकलगी, लेकिन मार्ग में भीषण बारिश के चलते पार्थिव शरीर शाम छह-सात बजे तक यहां पहुंच पाएगा।

मोहन राव जी की एकमात्र पुत्री जो अमेरिका में रहती है वह भी रविवार सुबह दस बजे तक रायपुर पहुंच जाएगी। परिजनों के मुताबिक उनकी अंतिम विदाई का कार्यक्रम रविवार की सुबह 11 से 12 बजे के बीच राजेंद्र नगर स्थित मुक्तिधाम में होगा।

मोहन राव का पत्रकारिता जीवन ‘नवभारत’ और ‘पायनियर’ के नाम रहा। अंतिम समय में वे दैनिक ‘पायनियर’ में अपनी सेवाएं दे रहे थे। हांलांकि उनके करियर की शुरुआत ‘रायपुर टाइम्स’ और ‘अग्रदूत’ से हुई लेकिन ‘नवभारत’ समाचार पत्र में करीब 30 सालों तक बतौर वरिष्ठ पत्रकार काम किया। उन्होंने राजनीतिक पत्रकार के तौर पर खुद को स्थापित किया।

मोहन राव के निधन सीएम भूपेश बघेल ने शोक व्यक्त किया है। उन्होंने मृतक मोहन राव के ​परिजनों के लिए संबल प्रदान प्रदान करने की कामना की है। सीएम भूपेश ने ट्वीट कर लिखा है कि छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार मोहन राव जी के निधन की दुखद सूचना मिली। उनसे दशकों का आत्मीय रिश्ता रहा है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति और परिवार को दुख की इस घड़ी में संबल प्रदान करें।

वहीं, छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार मोहन राव के निधन पर सूबे के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता जगत के लिए मोहन राव की सेवाओं को हमेशा याद किया जाएगा। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति और परिजनों को यह वियोग सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

 

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हिंदी पखवाड़े का समापन कुछ यूं करेगा प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान IIMC

देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान ‘भारतीय जन संचार संस्थान’ (IIMC) में आयोजित हिंदी पखवाड़े का समापन 28 सिंतबर को आयोजित एक वेबिनार से होगा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 25 September, 2020
Last Modified:
Friday, 25 September, 2020
IIMC

देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान ‘भारतीय जन संचार संस्थान’ (IIMC) में आयोजित हिंदी पखवाड़े का समापन 28 सिंतबर को आयोजित एक वेबिनार से होगा, जिसका विषय है ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय भाषाएं’। इस कार्यक्रम में देश के प्रमुख विद्धान अपने विचार व्यक्त करेंगे।

भारतीय जन संचार संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने बताया कि इस वेबिनार में हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री मुख्य अतिथि होंगे, जबकि अध्यक्षता महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा करेंगे। कार्यक्रम में प्रसिद्ध लेखिका और दैनिक हिन्दुस्तान की कार्यकारी संपादक जयंती रंगनाथन मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगी। वेबिनार के प्रमुख वक्ताओं के तौर पर ‘नवभारत टाइम्स’, मुंबई के पूर्व संपादक विश्वनाथ सचदेव, ‘दैनिक जागरण’, नई दिल्ली के सह-संपादक अनंत विजय और पांडिचेरी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सी जयशंकर बाबू अपने विचार प्रकट करेंगे।

प्रो. द्विवेदी ने इस आयोजन के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि हाल ही में घोषित राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारत सरकार ने भारतीय भाषाओं के सम्मान के लिए विशेष कदम उठाए हैं। भारतीय भाषाओं की प्रगति से ही राष्ट्र गौरव और समाज के आत्मविश्वास एवं स्वाभिमान में भी वृद्धि होगी। भारतीय भाषाओं को सम्मान मिलने से न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव संभव हो सकते हैं, बल्कि इससे रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि हो सकती है। इसलिए संस्थान ने इस वर्ष हिंदी पखवाड़े का आयोजन भारतीय भाषाओं के बीच संवाद बढ़ाने की भावना के साथ किया है।

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि इस वर्ष हमारा ये प्रयास था कि हिंदी पखवाड़ा संवाद और विमर्श का प्रबल माध्यम सिद्ध हो। इसलिए इस बार हमने हिंदी पखवाड़े की शुरुआत ‘भारतीय भाषाओं में अंतर-संवाद’ विषय पर चर्चा से की। हर वर्ष की तरह इस बार भी हिंदी पखवाड़े के तहत भारतीय जन संचार संस्थान में हिंदी पुस्तकों एवं पत्र-पत्रिकाओं की प्रदर्शनी, निबंध प्रतियोगिता, हिंदी टिप्पणी एवं प्रारूप लेखन प्रतियोगिता, हिंदी काव्य पाठ प्रतियोगिता, हिंदी टंकण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस बार पखवाड़े के दौरान भारतीय सूचना सेवा प्रशिक्षुओं के लिए एक कार्यशाला का आयोजन भी किया गया, ताकि उन्हें रोजमर्रा के सरकारी कामकाज को हिंदी में करने के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित किया जा सके।

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इंडिया टुडे ग्रुप से विदाई लेकर एंकर निदा अहमद ने जॉइन किया ये चैनल

इंडिया टुडे ग्रुप के हिंदी न्यूज चैनल ‘तेज’ को हाल ही में अलविदा कहने वाली न्यूज एंकर निदा अहमद ने अब अपनी नई पारी का आगाज कर दिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 24 September, 2020
Last Modified:
Thursday, 24 September, 2020
nida

इंडिया टुडे ग्रुप के हिंदी न्यूज चैनल ‘तेज’ को हाल ही में अलविदा कहने वाली न्यूज एंकर निदा अहमद ने अब अपनी नई पारी का आगाज कर दिया है। वे अब ‘जी यूपी-उत्तराखंड ’ में एंकर की भूमिका निभाती नजर आएंगी। उन्हें यहां प्रड्यूसर की जिम्मेदारी दी गई है।

बता दें कि वे अक्टूबर, 2018 से ‘तेज’ न्यूज चैनल की टीम हिस्सा थी। यूपी-उत्तराखंड के रीजनल न्यूज चैनल ‘समाचार प्लस’ से वे यहां पहुंची थीं। ‘तेज’ में वे सीनियर एसोसिएट प्रड्यूसर के साथ-साथ एंकरिंग की भी जिम्मेदारी संभाल रहीं थीं। ‘समाचार प्लस’ में उन्होंने बतौर एंकर करीब दो साल काम किया।

निदा अहमद ने अपने करियर की शुरुआत क्राइम रिपोर्टर के रूप में की। 'तेज' और 'समाचार प्लस' के अतिरिक्त निदा 'ईटीवी नेटवर्क' और 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' में भी काम कर चुकी हैं। उन्होंने यहां अगस्त 2015 से मई, 2016 तक एंकरिंग की भूमिका निभाई, जबकि इसके पहले  निदा 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' से अपने करियर की शुरुआत बतौर असिसटेंट प्रड्यूसर की थी, जहां से ही उन्होंने एंकरिंग की बारीकियों को सीखा और क्राइम रिपोर्टर की भूमिका निभाई।

आज निदा अहमद की गिनती मीडिया की उभरती तेज तर्रार एंकर में की जाने लगी है। समाजिक सेवा में भी निदा का ​​योगदान हमेशा सराहनीय रहा है। गरीब बच्चों की मदद के लिये निदा को स्वर्ण पदक से भी सम्मानित किया जा  चुका है। निदा अहमद को मीडिया इंडस्ट्री में भी काफी पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।

 

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‘न्यूज24’ से अलग होकर आकाश वत्स ने अब यहां शुरू की नई पारी

हिंदी न्यूज चैनल ‘न्यूज24’ के आउटपुट डेस्क में सीनियर प्रड्यूसर के पद से हाल ही में विदाई लेने वाले आकाश वत्स ने अब अपनी नई पारी की घोषणा कर दी है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 24 September, 2020
Last Modified:
Thursday, 24 September, 2020
Akash

हिंदी न्यूज चैनल ‘न्यूज24’ के आउटपुट डेस्क में सीनियर प्रड्यूसर के पद से हाल ही में विदाई लेने वाले आकाश वत्स ने अब अपनी नई पारी की घोषणा कर दी है। बता दें कि ‘टीवी9 भारतवर्ष’ में बतौर सीनियर प्रड्यूसर वे अपनी नई पारी का आगाज कर रहे हैं। वे आउटपुट टीम के साथ मिलकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे।

आकाश ‘न्यूज नेशन’ से ‘न्यूज24’ पहुंचे थे। बतौर सीनियर प्रड्यूसर वे ‘न्यूज नेशन’ में बहुत ही कम समय रहे। इससे पहले वे ‘जी हिन्दुस्तान’ में प्रड्यूसर की भूमिका में थे। यहां रहते हुए उन्होंने कई राज्यों में रिपोर्टिंग भी की। जून, 2018 में वे ‘इंडिया न्यूज’ से अलग होकर ही यहां आए थे।

आकाश 'इंडिया न्यूज' के साथ सितंबर, 2016 में बतौर प्रड्यूसर जुड़े थे। इसके पहले वे 'समाचार प्लस यूपी/उत्तराखंड' में कार्यरत थे। यहां उन्होंने ढ़ाई साल तक अपना योगदान दिया। 

आकाश वत्स ने आर.जे. के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की। उन्होंने 'नेपाल वन' टीवी, 'नेटवर्क टेन' और' समाचार प्लस' में एंकरिंग भी कर चुके हैं। वे वॉयस ओवर के लिए भी जाने जाते हैं और तमाम पैकेजेज में अपनी आवाज दे चुके हैं।

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पत्रकार की बेटी को दबंगों ने जिंदा जलाया, इलाज के दौरान हुई मौत

यूपी के सुलतानपुर जिले में पत्रकार की बेटी को जिंदा जलाने का मामला सामने आया है। सुल्तानपुर जिले के बल्दीराय थाना क्षेत्र में सोमवार को कुछ दबंगों ने पत्रकार की बेटी को जिंदा जला दिया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 23 September, 2020
Last Modified:
Wednesday, 23 September, 2020
journalist

यूपी के सुलतानपुर जिले में पत्रकार की बेटी को जिंदा जलाने का मामला सामने आया है। सुल्तानपुर जिले के बल्दीराय थाना क्षेत्र में सोमवार को कुछ दबंगों ने पत्रकार की बेटी को जिंदा जला दिया, जिसके बाद देर रात इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

परिजनों ने बताया कि बेटी घर के बाहर नल पर पानी भरने गई थी, तभी उसे जला दिया। परिजनों ने आरोपियों और पुलिस की मिलीभगत का आरोप भी लगाया।

मंगलवार रात बल्दीराय थाना क्षेत्र का टरणसा मजरे ऐंजर गांव छावनी में तब्दील था। भारी संख्या में पुलिस बल लगाकर पत्रकार प्रदीप सिंह की बेटी श्रद्धा सिंह का अंतिम संस्कार कराया गया। यहां लोगों की भारी भीड़ जमा थी। वहीं इस बीच जेल में बंद मृतक युवती के पत्रकार पिता ने परोल पर पहुंचकर अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया। उन्होंने इस दौरान बल्दीराय थाने के प्रभारी और देहली बाजार चौकी इंचार्ज पर गंभीर आरोप लगाए। फिलहाल पुलिस ने हत्याकांड से जुड़े चार में से तीन आरोपियों को पकड़ने की बात कही है।

जानकारी के मुताबिक, सोमवार शाम जब पत्रकार की बेटी श्रद्धा सिंह दरवाजे पर लगे नल से पानी भर रही थी, तभी परसौली के रहने वाले आरोपी सुभाष, महंथ और जय करन वहां पहुंचे। इन सभी ने सरेआम उसे बंधक बनाकर दरवाजे पर ही उसे जला दिया और फरार हो गए। आग की लपटों से घिरी बेटी की आवाज सुनकर परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। आनन-फानन में उसे लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र धनपत गंज लेकर आए। श्रद्धा सिंह 90% जल चुकी थी, लिहाजा इस अवस्था में उसका मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान हुआ और फिर डॉक्टर्स ने उसे ट्रामा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया। जहां रात में उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।

वहीं, लड़की के पिता पत्रकार प्रदीप सिंह ने एसओ बल्दीराय पर आरोप लगाते हुए कहा कि पहले जो एफआईआर हुई थी, उसमें आजतक पुलिस ने कोई गिरफ्तारी नहीं की। एसओ बल्दीराय ने धारा बदल दी। आरोपियों की गिरफ्तारी न होने का ये नतीजा है कि आज उनका मनोबल बढ़ा है।

प्रदीप ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में जो घटना हुई उसमें चौकी इंचार्ज ने बदलाव कर नई तहरीर ली है। पहली तहरीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई है। सभी के पास मौजूद है नहीं होगी तो हम उपलब्ध करा देंगे। चौकी इंचार्ज खुर्शीद अहमद पूरी तरह से विरोधियों से मिले हुए हैं। उन्होंने ये भी कहा कि एसओ ने मुकदमा 302 में चार्जशीट किया है, जबकि मुकदमा 304 का है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2 जून को हुई घटना में स्थानीय पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगा था। बाद में प्रदीप की पत्नी अर्चना की तहरीर पर आईजी रेंज फैजाबाद डॉक्टर संजीव गुप्ता के निर्देश पर जानलेवा हमले समेत आईपीसी की 10 धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसमें बेटी के हत्यारोपी भी शामिल हैं। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर बाद में 307 की धारा आरोपियों पर से हटा दी गई थी, जो हत्यारोपियों के लिए संजीवनी का काम कर गई।  

फिलहाल सोमवार को बेटी श्रद्धा को जिंदा जलाने वाले दरिंदों के खिलाफ पुलिस ने मां की तहरीर पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से दी गई जानकारी के अनुसार नामजद 3 आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जबकि एक आरोपी पिछले एक महीने से हरियाणा में रह रहा है।  

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युवाओं को मीडिया की बारीकियों से कुछ यूं रूबरू कराएगा श्री अधिकारी ब्रदर्स ग्रुप

इस कार्यकम का उद्देश्य युवाओं को मीडिया के बारे में शिक्षित करना है। कार्यक्रम को गवर्नेंस नाउ के एमडी कैलाश अधिकारी होस्ट करेंगे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 22 September, 2020
Last Modified:
Tuesday, 22 September, 2020
SAB Group

‘श्री अधिकारी ब्रदर्स’ (SAB) समूह ने युवाओं को मीडिया के बारे में शिक्षित करने के लिए 'मास्टरमाइंड्स' (Masterminds) नाम से एक कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। इस कार्यक्रम को ‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance now) के एमडी कैलाश अधिकारी होस्ट करेंगे। इस कार्यक्रम के द्वारा युवाओं को इंडस्ट्री लीडर्स व विषय विशेषज्ञों से मीडिया की बारीकियां सीखने का मौका मिलेगा। देश में महंगी होती जा रही शिक्षा व सीटों की सीमित उपलब्धता के बीच सभी को मुफ्त शिक्षा सुलभ बनाने की दिशा में समूह द्वारा यह पहला कदम है।

'मास्टरमाइंड्स' की लॉन्चिंग के मौके पर ‘सब ग्रुप’ (SAB Goup)के मैनेजिंग डायरेक्टर मार्कंड अधिकारी मार्कंड अधिकारी ने कहा,‘डिजिटल युग में तेजी से बदल रहीं सभी चीजों की तरह शिक्षा का भी एक नया रूप सामने आया है। अब वो दिन नहीं रहे जब शिक्षा केवल औपचारिक संस्थानों (Formal Institution) में जाकर ग्रहण करने तक सीमित थी। आजकल शिक्षा का दायरा तेजी से बढ़ता जा रहा है और इसके साथ ही सभी चीजों को तेजी से व्यापक होने की जरूरत है। मुझे लगता है कि यह तरीका सिर्फ एजुकेशन के बारे में नहीं है बल्कि अनंत ज्ञान के बारे में जानकारी जुटाने के लिए हैं। ऐसे में हमने महसूस किया कि हमें एक मंच के माध्यम से युवाओं को मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में एक पहल करने की जरूरत है। इसके लिए ही यह शुरुआत की गई है।’

उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम को ‘गवर्नेंस नाउ’ के एमडी कैलाश अधिकारी होस्ट करेंगे, जो विजिनरी टॉक सीरीज के तहत विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ीं देश की जानी-मानी शख्सियतों का इंटरव्यू कर रहे हैं। ‘गवर्नेंस नाउ’ के प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन कर जूम (Zoom) के जरिये इस कार्यक्रम में शामिल हुआ जा सकता है। बता दें कि महामारी की शुरुआत में प्रवासी श्रमिकों की मदद के लिए ‘श्री अधिकारी ब्रदर्स’ ने ‘the Sri Adhikari Brothers initiative 2.0’ पहल शुरू की थी। इस पहल के तहत समूह द्वारा तमाम श्रमिकों के हुनर की पहचान कर उन्हें आर्थिक रूप से मदद का बीड़ा उठाया गया। 

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आकाशवाणी व दूरदर्शन में तमाम बड़े पदों पर कार्यरत रहे अरुण कुमार वर्मा का निधन

बिहार की मीडिया के जाने-माने नाम वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार वर्मा का निधन हो गया है। वह पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 22 September, 2020
Last Modified:
Tuesday, 22 September, 2020
Arun Kumar Verma

बिहार की मीडिया के जाने-माने नाम वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार वर्मा का निधन हो गया है। ‘आकाशवाणी’ और ’दूरदर्शन न्यूज’ पटना में न्यूज एडिटर रह चुके अरुण कुमार वर्मा (68) पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। पटना के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। पीआईबी (PIB) पटना के पूर्व जॉइंट डायरेक्टर/डायरेक्टर और बिहार स्टेट इंफॉर्मेशन कमिश्नर, पटना रह चुके अरुण कुमार वर्मा ने सोमवार को इलाज के दौरान अंतिम सांस ली।

‘भारतीय सूचना सेवा’ (इंडियन इंफॉर्मेशन सर्विस) में चयन के बाद अरुण कुमार वर्मा को ‘आकाशवाणी’ पटना में असिस्टेंट न्यूज एडिटर पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बाद वे यहां पर न्यूज एडिटर, डिप्टी डायरेक्टर (न्यूज), जॉइंट डायरेक्टर/डायरेक्टर (न्यूज) बने। इसके अलावा उन्होंने ‘दूरदर्शन’ पटना में भी न्यूज एडिटर और जॉइंट डायरेक्टर/डायरेक्टर (न्यूज) के पद पर भी कार्य किया था।  

‘इंडियन इंफॉर्मेशन सर्विस’ में चयन से पूर्व अरुण कुमार वर्मा ने बिहार सरकार के एक विभाग में जनसंपर्क अधिकारी के रूप में भी काम किया था। अरुण कुमार वर्मा के निधन पर तमाम पत्रकारों व गणमान्य लोगों ने शोक जताते हुए उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी है।

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मीडिया एजुकेशन के भविष्य की दिशा पर दिग्गजों ने कुछ यूं रखी अपनी राय

आईआईएमसी की ओर से 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: भारत में पत्रकारिता और जनसंचार शिक्षा की भविष्य की दिशा' विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 22 September, 2020
Last Modified:
Tuesday, 22 September, 2020
Media Education

‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (आईआईएमसी) द्वारा सोमवार को 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: भारत में पत्रकारिता और जनसंचार शिक्षा की भविष्य की दिशा' विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार में ‘इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र’ के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा, ‘मीडिया शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए मीडिया एजुकेशन काउंसिल की आवश्यकता है। इसकी मदद से न सिर्फ पत्रकारिता एवं जनसंचार शिक्षा के पाठ्यक्रम में सुधार होगा, बल्कि मीडिया इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार पत्रकार भी तैयार किये जा सकेंगे।'

डॉ. जोशी का यह भी कहना था कि नई शिक्षा नीति में कहीं भी मीडिया या पत्रकारिता शब्द का जिक्र नहीं है, लेकिन हमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति से प्रेरणा लेते हुए जनसंचार और पत्रकारिता शिक्षा के भविष्य के बारे में सोचना होगा। उन्होंने कहा, अख्तर अंसारी का एक शेर है, 'अब कहां हूं कहां नहीं हूं मैं, जिस जगह हूं वहां नहीं हूं मैं, कौन आवाज दे रहा है मुझे, कोई कह दो यहां नहीं हूं मैं।' यानी जो कहीं नहीं है, वो हर जगह है। जैसे शिक्षा नीति में मीडिया शब्द न होकर भी हर जगह है। उन्होंने कहा कि तकनीक ने मीडिया को भी बदल दिया है। आज स्कूलों में 3डी तकनीक से पढ़ाई हो रही है।

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के पॉइंट 11 की चर्चा करते हुए कहा, ‘हमें होलिस्टिक एजुकेशन पर ध्यान देना होगा। इस संदर्भ में अगर हम भारतीय संस्कृति की बात करें, तो प्राचीन काल में भारतीय शिक्षा-क्रम का क्षेत्र बहुत व्यापक था। शिक्षा में कलाओं की शिक्षा भी अपना महत्त्वपूर्ण स्थान रखती थीं और इनमें चौंसठ कलाएं महत्वपूर्ण हैं। अगर हम देखें तो ये कलाएं आज हमारे अत्याधुनिक समाज का हिस्सा हैं।’ 

नई शिक्षा नीति है एक क्रांतिकारी कदम: कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो. गीता बामजेई ने कहा कि नई शिक्षा नीति भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक क्रांतिकारी कदम है। प्रो. बामजेई ने कहा कि अगर हम इस शिक्षा नीति को सही तरह से अपनाते हैं, तो ये नीति हमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की तरफ ले जाएगी। उन्होंने कहा कि इस शिक्षा नीति से ज्ञान और कौशल के माध्यम से एक नए राष्ट्र का निर्माण होगा। मीडिया शिक्षा के परिदृश्य पर चर्चा करते हुए प्रो. बामजेई ने कहा, ‘अब समय आ गया है कि हमें जनसंचार शिक्षा में बदलाव करना चाहिए। हमें पत्रकारिता के नए पाठ्यक्रमों का निर्माण करना चाहिए, जो आज के समय के हिसाब से हों।‘ उन्होंने कहा कि हमें अपना विजन बनाना होगा कि पत्रकारिता के शिक्षण को हम किस दिशा में लेकर जाना चाहते हैं।

मीडिया शिक्षण में चल रही है स्पर्धा: नवभारत, इंदौर के पूर्व संपादक प्रो. कमल दीक्षित ने कहा कि मीडिया शिक्षण में एक स्पर्धा चल रही है। अब हमें यह तय करना होगा कि हमारा लक्ष्य स्पर्धा में शामिल होने का है, या फिर बेहतर पत्रकारिता शिक्षण का माहौल बनाने का है। प्रो. दीक्षित ने कहा कि आज के समय में पत्रकारिता बहुत बदल गई है, इसलिए पत्रकारिता शिक्षा में भी बदलाव आवश्यक है। आज लोग जैसे डॉक्टर से अपेक्षा करते हैं, वैसे पत्रकार से भी सही खबरों की अपेक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि हम ऐसे कोर्स बनाएं, जिनमें कंटेट के साथ साथ नई तकनीक का भी समावेश हो। प्रो. दीक्षित ने कहा कि हमें यह तय करना होगा कि पत्रकारिता का मकसद क्या है। क्या हमारी पत्रकारिता बाजार के लिए है, कॉरपोरेट के लिए है, सरकार के लिए है या फिर समाज के लिए है। अगर हमें सच्चा लोकतंत्र चाहिए तो पत्रकारिता को अपने लक्ष्यों के बारे में बहुत गहराई से सोचना होगा।

जो चीज 'चैलेंज' करती है, वहीं 'चेंज' करती है: हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय की प्रो. कंचन मलिक का कहना था कि अगर हम नई शिक्षा नीति का गहन अध्ययन करें, तो हम पाएंगे इसमें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति आत्मनिर्भर बनने पर जोर देती है। इसे हम इस तरह समझ सकते हैं, कि 'जो चीज आपको चैलेंज करती है, वही आपको चेंज करती है।' प्रो. मलिक ने कहा कि जनसंचार शिक्षा का प्रारूप बदलना हमारे लिए बड़ी चुनौती है, लेकिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति से प्रेरणा लेकर हम यह कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया शिक्षा का काम सिर्फ छात्रों को ज्ञान देना नहीं है, बल्कि उन्हें इंडस्ट्री के हिसाब से तैयार भी करना है। मीडिया शिक्षकों को इस विषय पर ध्यान देना होगा।

न्यू मीडिया है अब न्यू नॉर्मल: न्यू मीडिया पर अपनी बात रखते हुए माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की प्रोफेसर पी. शशिकला ने कहा कि न्यू मीडिया अब न्यू नॉर्मल है। हम सब जानते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण लाखों नौकरियां गई हैं। इसलिए हमें मीडिया शिक्षा के अलग अलग पहलुओं पर ध्यान देना होगा। हमें बाजार के हिसाब से प्रोफेशनल तैयार करने चाहिए।

क्षेत्रीय भाषाओं पर ध्यान देने की जरूरत: मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एहतेशाम अहमद खान ने कहा कि नई शिक्षा नीति में क्षेत्रीय भाषाओं पर ध्यान देने की बात कही गई है। जनसंचार शिक्षा के क्षेत्र में भी हमें इस पर ध्यान देना होगा। मीडिया शिक्षा के संस्थानों को तकनीक के हिसाब से खुद को तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि भारतीय जनसंचार संस्थान को इस विषय पर सभी मीडिया संस्थानों का मार्गदर्शन का काम करना चाहिए।

समाज के विकास के लिए संवाद आवश्यक: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कृपाशंकर चौबे ने कहा कि किसी भी समाज को आगे ले जाने और उसके विकास के लिए संवाद जरूरी है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति गुणवत्ता की बात करती है। इसके साथ ही हमें शिक्षा के बाजारीकरण और महंगी होती शिक्षा पर लगाम लगानी होगी। संवाद और संचार का भारतीय मॉडल: भारतीय जन संचार संस्थान के महानिदेशक प्रोफेसर संजय द्विवेदी ने कहा कि यह देश में पहला मौका है, जब हम राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संदर्भ में जनसंचार शिक्षा के बारे में बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य एक बेहतर दुनिया बनाना है।

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि मीडिया शिक्षा की यात्रा को वर्ष 2020 में 100 साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन हमें अभी भी बहुत काम करना बाकी है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा के पास विदेशी मॉडल की तुलना में बेहतर संचार मॉडल हैं। इसलिए हमें संवाद और संचार के भारतीय मॉडल के बारे में बातचीत शुरू करनी चाहिए। इसके अलावा भारत की शास्त्रार्थ परंपरा पर भी हमें चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का व्यवसायीकरण चिंता का विषय है। इसके खिलाफ सभी लोगों को एकत्र होना चाहिए। हमें समाज के अंतिम आदमी के लिए शिक्षा के द्वार खोलने चाहिए। प्रो. द्विवेदी ने कहा कि जनसंचार शिक्षा में हमें क्षेत्रीय भाषाओं पर काम करने की जरूरत है।

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राष्ट्र स्तरीय इस प्रतियोगिता के लिए रचनाएं आमंत्रित

इस प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए 18 अक्टूबर 2020 तक अपनी प्रविष्टि भेजी जा सकती हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 21 September, 2020
Last Modified:
Monday, 21 September, 2020
Writing

बेटी बचाओ अभियान के तहत महिला बाल विकास एवं जनकल्याण समिति ‘सरोकार’ की ओर से ‘बिटिया के जन्मदिन के बधाई गीत लेखन’ राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए प्रविष्टि भेजने की अंतिम तारीख 18 अक्टूबर 2020 रखी गई है।

इस प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए प्रतिभागियों को निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।

1: प्रतिभागी अपनी मौलिक रचना ही भेजें। रचना के साथ मौलिकता का प्रमाण लिखित में देना आवश्यक है।

2: रचनाएं हिंदी अथवा भारत की किसी भी लोकभाषा में हो सकती हैं।

3: एक या एक से अधिक रचनाएं भेजी जा सकती हैं।

4: प्रतियोगी द्वारा भेजी गई रचनाएं उनके नाम के साथ सरोकार के अभियान में उपयोग की जा सकेंगी।

5: अपनी रचना ई-मेल- sarokarzindagi@gmail.com अथवा वॉट्सऐप नंबर- 9926311225 पर लिखित में भेजी जा सकती हैं।

6: रचना के साथ अपनी एक रंगीन तस्वीर और परिचय में अपना नाम, उम्र, जेंडर, व्यवसाय, मोबाइल नंबर, ई-मेल तथा रचना की भाषा का उल्लेख अनिवार्य है। ऐसा न करने पर रचना अस्वीकृत कर दी जाएगी।

7: चयनित सर्वश्रेष्ठ रचनाकारों को सरोकार की ओर से एक प्रमाण पत्र और साथ उन्हें सरोकार के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रचना की प्रस्तुति करने का अवसर दिया जाएगा।

इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए मोबाइल नंबर-9926311225 अथवा sarokarzindagi@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

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