एक्सचेंज के मुताबिक “इंद्रेश यादव” नाम का एक व्यक्ति “Crude Call” नाम से लोगों को स्टॉक मार्केट में निवेश के टिप्स दे रहा है और गारंटीड रिटर्न का लालच दे रहा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
बाजार नियामक 'नेशनल स्टॉक एक्सचेंज' (NSE) ने निवेशकों के लिए एक अहम चेतावनी जारी की है। एक्सचेंज के मुताबिक “इंद्रेश यादव” नाम का एक व्यक्ति “Crude Call” नाम से लोगों को स्टॉक मार्केट में निवेश के टिप्स दे रहा है और गारंटीड रिटर्न का लालच दे रहा है।
NSE को मिली जानकारी के अनुसार यह व्यक्ति मोबाइल नंबर, वेबसाइट, ऐप और फेसबुक पेज के जरिए लोगों तक पहुंच रहा है और उन्हें निवेश के नाम पर फंसा रहा है। इसके अलावा यह कथित तौर पर ‘डब्बा ट्रेडिंग’ जैसी गैरकानूनी सेवाएं भी ऑफर कर रहा है।
एक्सचेंज ने साफ किया है कि ऐसे किसी भी स्कीम या प्रोडक्ट में पैसा लगाना कानून के खिलाफ है। NSE ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे केवल रजिस्टर्ड स्टॉक ब्रोकर के जरिए ही ट्रेडिंग करें। इसके लिए एक्सचेंज की वेबसाइट पर “Know Your Stock Broker” जैसी सुविधा भी उपलब्ध है, जहां किसी भी ब्रोकर की जानकारी चेक की जा सकती है।
NSE ने यह भी बताया कि “Crude Call” से जुड़ा यह व्यक्ति या संस्था एक्सचेंज के साथ रजिस्टर्ड नहीं है। इस मामले में पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई गई है।
कानून के तहत ऐसे मामलों में सख्त सजा का प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर आरोपी को 10 साल तक की जेल या 25 करोड़ रुपये तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। साथ ही ‘डब्बा ट्रेडिंग’ को भी गंभीर अपराध माना गया है।
एक्सचेंज ने निवेशकों को चेताया है कि ऐसे गैरकानूनी प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग करना पूरी तरह उनके अपने जोखिम पर होगा। अगर किसी तरह का विवाद होता है, तो निवेशकों को एक्सचेंज की शिकायत निवारण या सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाएगा।
NSE ने आखिर में दोहराया है कि निवेश करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें और किसी भी तरह के झूठे वादों या गारंटी के झांसे में न आएं।
भारत में क्विक कॉमर्स का मुकाबला अब सिर्फ कुछ मिनटों में किराना पहुंचाने तक सीमित नहीं रहा है। Flipkart Minutes और Blinkit के बीच मुकाबला तेजी से बड़ा हो रहा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत में क्विक कॉमर्स का मुकाबला अब सिर्फ कुछ मिनटों में किराना पहुंचाने तक सीमित नहीं रहा है। Flipkart Minutes और Blinkit के बीच मुकाबला तेजी से बड़ा हो रहा है। मौजूदा कारोबार, ऑर्डर और मुनाफे के मामले में Blinkit अभी काफी आगे है, लेकिन Flipkart Minutes ने जिस तेजी से अपने स्टोर और ऑर्डर बढ़ाए हैं, उससे यह मुकाबला आने वाले समय में और दिलचस्प होने वाला है।
Flipkart Minutes पर मोबाइल फोन को हटाकर औसत नेट ऑर्डर वैल्यू करीब 500-530 रुपये बताई गई है। वहीं Blinkit की जून तिमाही में यह वैल्यू 518 रुपये थी। ये आंकड़े UBS के आकलन पर आधारित हैं। मोबाइल फोन को शामिल करने पर Flipkart Minutes की औसत ऑर्डर वैल्यू इससे ऊपर चली जाती है।
हालांकि, सिर्फ औसत ऑर्डर वैल्यू से दोनों कंपनियों के कारोबार की पूरी तस्वीर नहीं मिलती। महंगे स्मार्टफोन किसी ऑर्डर की कीमत को काफी बढ़ा सकते हैं, लेकिन इससे यह पता नहीं चलता कि ग्राहक कितनी बार दोबारा ऑर्डर कर रहा है, किसी स्टोर से कितने ऑर्डर निकल रहे हैं या हर डिलीवरी पर कंपनी को कितना फायदा हो रहा है।
Blinkit की बढ़त अभी बरकरार
वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में Blinkit ने 33.1 करोड़ ऑर्डर पूरे किए। यानी रोजाना करीब 36 लाख ऑर्डर। इस दौरान कंपनी का नेट ऑर्डर वैल्यू 17,132 करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर 86 फीसदी ज्यादा था।
Blinkit के पास इस अवधि में 3.18 करोड़ मासिक लेन-देन करने वाले ग्राहक और 2,443 डार्क स्टोर थे। कंपनी ने पहली बार समायोजित EBITDA में 102 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया, जबकि एक साल पहले उसे 162 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। उसका योगदान मार्जिन भी 5.3 फीसदी रहा। इससे यह संकेत मिलता है कि क्विक कॉमर्स में बड़े पैमाने पर कारोबार के साथ अब मुनाफे की तस्वीर भी धीरे-धीरे सुधर रही है। हालांकि, मार्जिन अभी भी बहुत ज्यादा नहीं है।
Flipkart Minutes की रफ्तार ने चौंकाया
Flipkart Minutes के पूरे वित्तीय आंकड़े सार्वजनिक रूप से Blinkit की तरह उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इसके ऑर्डर और स्टोर से जुड़े कुछ आंकड़े अनुमान या UBS के आकलन पर आधारित हैं। 6 सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Flipkart Minutes अब अनुमानित तौर पर रोजाना 11 लाख से 12 लाख ऑर्डर संभाल रहा है। पिछले साल नवंबर में यह आंकड़ा करीब 3.90 लाख से 4 लाख ऑर्डर प्रतिदिन था। यह आधिकारिक Flipkart आंकड़ा नहीं, बल्कि रिपोर्ट में दिया गया अनुमान है।
वहीं स्टोर नेटवर्क के मामले में Flipkart ने आधिकारिक तौर पर जून 2026 में बताया था कि Minutes ने 1,000 माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर का आंकड़ा पार कर लिया है। ये सेंटर 130 से ज्यादा शहरों और 8,000 से ज्यादा पिनकोड में फैले थे। कंपनी ने नेटवर्क को 2026 के अंत तक करीब 1,500 सेंटर तक ले जाने की योजना भी बताई थी।
UBS के आकलन के मुताबिक, Minutes का एक औसत स्टोर रोजाना 800-1,000 ऑर्डर संभाल रहा है। करीब पांच-छह महीने पुराने स्टोरों में यह संख्या 1,200-1,500 ऑर्डर प्रतिदिन तक पहुंच सकती है।
ऑर्डर के मामले में कितना अंतर?
अगर Flipkart Minutes के रोजाना 12 लाख ऑर्डर के ऊपरी अनुमान को आधार माना जाए, तो 91 दिनों की एक तिमाही में करीब 10.92 करोड़ ऑर्डर बनते हैं। यह Blinkit के 33.1 करोड़ तिमाही ऑर्डर का लगभग एक-तिहाई है। इसलिए यहां एक बात साफ समझनी जरूरी है- Minutes की औसत ऑर्डर वैल्यू Blinkit के करीब पहुंच रही है, लेकिन कुल ऑर्डर की संख्या अभी काफी पीछे है। 11-12 लाख रोजाना ऑर्डर का आंकड़ा अनुमान है, जबकि Blinkit के 33.1 करोड़ तिमाही ऑर्डर कंपनी के रिपोर्टेड आंकड़े हैं।
Flipkart को पुराने ग्राहक आधार का फायदा
Flipkart Minutes की सबसे बड़ी ताकत यह है कि उसे ग्राहक आधार शून्य से तैयार नहीं करना पड़ रहा। Flipkart के पास पहले से करोड़ों ग्राहक, विक्रेता, भुगतान नेटवर्क, गोदाम और डिलीवरी का बुनियादी ढांचा मौजूद है।
UBS के आकलन के मुताबिक, जिन जगहों पर Minutes उपलब्ध है, वहां Flipkart पर आने वाले करीब 40-45 फीसदी ग्राहक उसके क्विक कॉमर्स सेक्शन का भी इस्तेमाल करते हैं। यह आंकड़ा भी आधिकारिक कंपनी आंकड़ा नहीं, बल्कि UBS के चेक्स पर आधारित अनुमान है।
यही वजह है कि Flipkart के लिए Minutes को बढ़ाना किसी नए क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के मुकाबले आसान हो सकता है। ग्राहक पहले से Flipkart पर मौजूद हैं और कंपनी उन्हें रोजमर्रा की खरीदारी के लिए उसी ऐप पर बनाए रखना चाहती है।
मोबाइल से किराने तक पहुंचने की कोशिश
Flipkart की ताकत लंबे समय से मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी बड़ी खरीदारी में रही है। अब Minutes के जरिए कंपनी रोजमर्रा के सामान की खरीदारी भी अपने प्लेटफॉर्म पर लाना चाहती है। एक ग्राहक सोमवार को किराना, बुधवार को कॉस्मेटिक्स और शुक्रवार को स्मार्टफोन खरीद सकता है। कंपनी के लिए लक्ष्य यही है कि बड़ी खरीदारी के बीच भी ग्राहक रोजमर्रा की जरूरतों के लिए Flipkart पर वापस आता रहे।
यहीं पर Blinkit और Flipkart Minutes की रणनीति एक-दूसरे से टकराती है। Flipkart को Blinkit जैसी बार-बार होने वाली खरीदारी चाहिए, जबकि Blinkit धीरे-धीरे बड़ी और ज्यादा कैटेगरीज वाले सामान की तरफ बढ़ रहा है। Blinkit अब सिर्फ दूध, फल और सब्जियों तक सीमित नहीं है। ब्यूटी प्रोडक्ट्स, खिलौने, छोटे इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टेशनरी और दूसरे सामान भी उसके कारोबार का हिस्सा बन रहे हैं।
असली परीक्षा होगी मुनाफे की
Flipkart Minutes के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ ज्यादा स्टोर खोलना नहीं, बल्कि उन स्टोरों को पर्याप्त ऑर्डर और मुनाफे तक पहुंचाना है। UBS के आकलन के मुताबिक, करीब 500-600 रुपये की औसत ऑर्डर वैल्यू पर एक परिपक्व Minutes स्टोर को ब्रेक-ईवन के करीब पहुंचने के लिए लगभग 1,400-1,500 ऑर्डर प्रतिदिन की जरूरत हो सकती है। जबकि औसत स्टोर अभी इससे नीचे है। यह भी कंपनी का आधिकारिक आंकड़ा नहीं, बल्कि आकलन है।
दूसरी तरफ Blinkit के एक स्टोर ने जून तिमाही में औसतन 8.27 लाख रुपये का नेट ऑर्डर वैल्यू प्रतिदिन दर्ज किया। कंपनी का मानना है कि एक परिपक्व स्टोर आगे चलकर 11 लाख रुपये प्रतिदिन तक पहुंच सकता है। वहीं एक Blinkit स्टोर और उससे जुड़ी वेयरहाउसिंग के लिए करीब 2.5 करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च का अनुमान है।
छोटे शहरों पर भी नजर
Flipkart Minutes की रणनीति सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। कंपनी ने जून में बताया था कि उसका नेटवर्क 130 से ज्यादा शहरों और 8,000 से ज्यादा पिनकोड तक पहुंच चुका है। Tier-II और Tier-III शहरों में भी तेज विस्तार हो रहा है। कंपनी के मुताबिक, इन बाजारों में उसका कारोबार पिछले साल की तुलना में 42 गुना बढ़ा था।
उत्तर प्रदेश भी Minutes के विस्तार में अहम भूमिका निभा रहा है। कंपनी ने जून में गोरखपुर में अपना 1,000वां माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर खोला था। उत्तर प्रदेश में ऑर्डर सालाना आधार पर 6 गुना बढ़ने और राज्य के Tier-II व Tier-III बाजारों में 20 गुना वृद्धि की जानकारी कंपनी ने दी थी।
फिलहाल Blinkit आगे, लेकिन Flipkart की रफ्तार तेज
मौजूदा तस्वीर में Blinkit के पास ऑर्डर, स्टोर, ग्राहक और घोषित मुनाफे के मामले में साफ बढ़त है। वहीं Flipkart Minutes की सबसे बड़ी ताकत उसका तेज विस्तार, पहले से मौजूद ग्राहक आधार और इलेक्ट्रॉनिक्स समेत कई कैटेगरीज में मजबूत पकड़ है। इस मुकाबले में सिर्फ ऑर्डर वैल्यू देखना पर्याप्त नहीं होगा। क्विक कॉमर्स का असली खेल ऑर्डर की संख्या, ग्राहक कितनी बार लौटता है, स्टोर की क्षमता, डिलीवरी लागत और हर ऑर्डर पर होने वाली कमाई से तय होगा।
Flipkart Minutes ने दो साल से भी कम समय में 1,000 से ज्यादा सेंटर खड़े कर दिए हैं और ऑर्डर तेजी से बढ़ाए हैं। लेकिन अब अगला सवाल यह है कि क्या वह इस रफ्तार को लंबे समय तक मुनाफे में बदल पाएगा। फिलहाल कहा जा सकता है कि Blinkit के पास बढ़त है, लेकिन Flipkart Minutes तेजी से पीछा कर रहा है। आने वाले समय में असली मुकाबला इस बात पर होगा कि कौन कम लागत में ज्यादा ग्राहकों को बार-बार ऑर्डर करने के लिए तैयार कर पाता है।
बेंगलुरु में गुरुवार, 3 सितंबर को एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप के छठे इंडियन मार्केटिंग अवॉर्ड्स (IMA) South का शानदार आयोजन किया गया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
बेंगलुरु में गुरुवार, 3 सितंबर को एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप के छठे इंडियन मार्केटिंग अवॉर्ड्स साउथ (IMA South) का शानदार आयोजन किया गया। इस खास अवॉर्ड समारोह में दक्षिण भारत के उन ब्रैंड्स, कंपनियों, टैलेंट, कंटेंट और प्लेटफॉर्म्स को सम्मानित किया गया, जिन्होंने मार्केटिंग, कम्युनिकेशन, क्रिएटिविटी और इनोवेशन के क्षेत्र में बेहतरीन काम किया है।
IMA South 2026 की इस शानदार अवॉर्ड नाइट में विज्ञापन और मार्केटिंग इंडस्ट्री से जुड़े कई बड़े बिजनेस हेड्स, टॉप इंडस्ट्री लीडर्स, मार्केटर्स और विचारकों ने हिस्सा लिया। समारोह में दक्षिण भारत में अपनी प्रभावी मार्केटिंग रणनीतियों और शानदार काम के जरिए पहचान बनाने वाले संगठनों, टीमों और लोगों को सम्मानित किया गया।
इस साल के बड़े अवॉर्ड्स की बात करें तो Lulu Group ने ‘Brand of the Year’ का खिताब अपने नाम किया। वहीं Bharat Media & Entertainment Group (BMEG) को ‘Agency of the Year’ के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। दोनों कंपनियों ने अपनी-अपनी कैटेगरी में शानदार प्रदर्शन करते हुए अवॉर्ड नाइट में खास जगह बनाई।
मेडल टैली की बात करें तो Lulu Group ने अलग-अलग कैटेगरी में कुल 11 मेडल जीते। इनमें 4 गोल्ड, 5 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मेडल शामिल रहे। वहीं Bharat Media & Entertainment Group (BMEG) ने अपने शानदार काम और इनोवेशन के लिए कुल 21 मेडल अपने नाम किए। इनमें 6 गोल्ड, 7 सिल्वर और 8 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं।
अवॉर्ड समारोह में Swiggy Instamart, Coromandel, Tata Motors और MYG जैसे ब्रैंड्स भी प्रमुख विजेताओं में शामिल रहे। वहीं एजेंसियों की बात करें तो DIVO, Flipkart Ads, Havas Play और 88GB ने सबसे ज्यादा मेडल जीतने वाली एजेंसियों में अपनी जगह बनाई।
Indian Marketing Awards South का मकसद दक्षिण भारत में मार्केटिंग के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने वाली कंपनियों और टीमों को पहचान और सम्मान देना है। इन अवॉर्ड्स में ऐसी कंपनियां हिस्सा ले सकती हैं, जिनका कॉरपोरेट ऑफिस या मार्केटिंग डिविजन दक्षिण भारत में स्थित है। इसके अलावा दूसरे राज्यों में मुख्यालय रखने वाली कंपनियां भी इसमें हिस्सा ले सकती हैं, अगर उन्होंने दक्षिण भारत के बाजार के लिए कोई खास कैंपेन बनाया और चलाया हो।
IMA South 2026 के छठे संस्करण के लिए Matrimony.com Ltd. के Founder, Chairman, Managing Director & CEO Murugavel Janakiraman को Jury Chair बनाया गया था। वह TiE Chennai के Chairman और CII Tamil Nadu के Vice Chairman भी हैं। वहीं BW Businessworld और exchange4media के Chairman & Editor-in-Chief Dr. Annurag Batra ने Co-Jury Chair की जिम्मेदारी संभाली।
इस साल की जूरी में इंडस्ट्री के कई अनुभवी लीडर्स, बिजनेस हेड्स और एक्सपर्ट्स शामिल रहे। इन सभी ने अलग-अलग क्षेत्रों में किए गए काम, उनकी क्रिएटिविटी, इनोवेशन और मार्केटिंग प्रभाव के आधार पर एंट्रीज का मूल्यांकन किया।
Indian Marketing Awards South में मार्केटिंग से जुड़े काम को पांच प्रमुख कैटेगरी में रखा गया है। इनमें Stages of Brand Building, Communication, Special Marketing, Start-Ups/Emerging Players और Excellence/Special Recognition शामिल हैं। इन प्रमुख कैटेगरी के तहत अलग-अलग सब-कैटेगरी में ब्रैंड्स, कंपनियों, एजेंसियों और टीमों को उनके बेहतरीन काम के लिए सम्मानित किया गया।
IMA South के जरिए दक्षिण भारत के मार्केटिंग और विज्ञापन क्षेत्र में हो रहे नए प्रयोग, क्रिएटिविटी और इनोवेशन को एक बड़ा मंच मिलता है। इस साल भी अवॉर्ड समारोह में कई बड़े ब्रैंड्स और एजेंसियों ने अपने शानदार काम के दम पर कई पुरस्कार हासिल किए। अवॉर्ड नाइट ने एक बार फिर दिखाया कि दक्षिण भारत का मार्केटिंग और कम्युनिकेशन इकोसिस्टम देश के सबसे तेजी से आगे बढ़ते बाजारों में से एक है।
यहां देखें विजेताओं की पूरी लिस्ट-

प्रिया चांदनी भारती एक्सा लाइफ इंश्योरेंस में ब्रांड मैनेजमेंट और पीआर की प्रमुख बनी हैं। उनके पास बीमा, बैंकिंग, रिटेल और विज्ञापन क्षेत्रों में 18 वर्षों से अधिक अनुभव है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
प्रिया चांदनी (Priya Chandni) ने भारती एक्सा लाइफ इंश्योरेंस (Bharti AXA Life Insurance) में Head – Brand Management & PR के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है। उनके पास बीमा, बैंकिंग, रिटेल और विज्ञापन क्षेत्र में 18 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
नई भूमिका में चांदनी कंपनी के ब्रांड मैनेजमेंट और जनसंपर्क से जुड़े कामकाज का नेतृत्व करेंगी। उनका फोकस ब्रांड निर्माण, मार्केटिंग और कम्युनिकेशन से जुड़ी पहलों पर रहेगा। अपने 18 साल से अधिक लंबे करियर में चांदनी ने बीमा, बैंकिंग, रिटेल और विज्ञापन जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया है। उन्होंने उपभोक्ता-केंद्रित कारोबारों के लिए ब्रांड निर्माण, एकीकृत मार्केटिंग और कम्युनिकेशन से जुड़ी कई पहलों का नेतृत्व किया है।
उनके अनुभव में ब्रांड रणनीति, एकीकृत मार्केटिंग और कम्युनिकेशन शामिल हैं। उनका पेशेवर सफर अलग-अलग क्षेत्रों में उपभोक्ताओं से सीधे जुड़ने वाले ब्रांड तैयार करने पर केंद्रित रहा है। भारती एक्सा लाइफ इंश्योरेंस से पहले चांदनी ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC FIRST Bank), गीतांजलि ग्रुप (Gitanjali Group), टीडब्ल्यूए (TBWA) और हवास (Havas) जैसी प्रमुख संस्थाओं में विभिन्न भूमिकाओं पर काम किया है।
नई जिम्मेदारी के साथ वह भारती एक्सा लाइफ इंश्योरेंस के ब्रांड मैनेजमेंट, मार्केटिंग और जनसंपर्क से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाएंगी।
कोटक अल्टरनेट एसेट मैनेजर्स ने पुष्कर जौहरी को प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल का मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया है। वह निवेश रणनीति और फंड जुटाने की जिम्मेदारी संभालेंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
कोटक अल्टरनेट एसेट मैनेजर्स लिमिटेड (Kotak Alternate Asset Managers Limited) यानी कोटक अल्ट्स (Kotak Alts) ने पुष्कर जौहरी (Pushkar Jauhari) को प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर नियुक्त किया है।
नई भूमिका में जौहरी कोटक अल्ट्स के प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल मंच के लिए निवेश रणनीति, फंड जुटाने, नए निवेश, पोर्टफोलियो प्रबंधन और निवेश से बाहर निकलने की प्रक्रिया का नेतृत्व करेंगे।
कोटक अल्ट्स के प्रबंध निदेशक श्रीनिवास श्रीनिवासन (Srini Sriniwasan) ने नियुक्ति पर कहा कि कंपनी पुष्कर जौहरी का स्वागत करते हुए उत्साहित है। उन्होंने बताया कि जौहरी के पास भारत और यूरोप के निजी इक्विटी, वेंचर कैपिटल और सार्वजनिक बाजारों में करीब 25 वर्षों का अनुभव है।
श्रीनिवासन के मुताबिक, जौहरी ने एक निजी इक्विटी कारोबार खड़ा किया है और निवेश के हर चरण में काम किया है। उनका अनुभव और पिछला प्रदर्शन कोटक अल्ट्स के मंच को आगे बढ़ाने में उपयोगी होगा।
जौहरी ने अपनी नियुक्ति पर कहा कि उनके अनुभव में अच्छे निजी इक्विटी निवेश की शुरुआत सही कारोबार चुनने से होती है और उसके विकास के दौरान उससे करीबी तौर पर जुड़े रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि कोटक अल्ट्स के पास एक स्थापित मंच और अनुभवी निवेश टीमें हैं। वह टीम और पोर्टफोलियो कंपनियों के साथ मिलकर उनके विकास में मदद करने और निवेशकों के लिए मूल्य तैयार करने को लेकर उत्साहित हैं।
Havas की ग्लोबल ब्रैंड और डिजाइन कंसल्टेंसी Conran Design Mumbai ने अपनी टीम को मजबूत करते हुए दो अहम नियुक्तियों का ऐलान किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
Havas की ग्लोबल ब्रैंड और डिजाइन कंसल्टेंसी Conran Design Mumbai ने अपनी टीम को मजबूत करते हुए दो अहम नियुक्तियों का ऐलान किया है। कंपनी ने तजीन शेख को एसोसिएट क्रिएटिव डायरेक्टर और जेर्विन डिसूजा को क्लाइंट पार्टनर नियुक्त किया है।
मुंबई में रहकर दोनों नई जिम्मेदारियां संभालेंगे। इन नियुक्तियों का मकसद एजेंसी की ब्रैंड रणनीति, डिजाइन और क्लाइंट के साथ साझेदारी को और मजबूत करना है। दोनों अधिकारी एजेंसी के कारोबार को आगे बढ़ाने और नए अवसर तलाशने में भी अहम भूमिका निभाएंगे।
तजीन और जेर्विन अब ब्रैंड स्ट्रैटजी के सीनियर डायरेक्टर अलमास अहमद के साथ मिलकर एजेंसी की रणनीतिक और रचनात्मक क्षमता को बढ़ाने पर काम करेंगे। साथ ही क्लाइंट के साथ रिश्तों को मजबूत करने और अलग-अलग क्षेत्रों में नए कारोबारी अवसर तलाशने पर भी उनका फोकस रहेगा।
Thom Newton ने दोनों नियुक्तियों का किया स्वागत
Conran Design Group के Global CEO Thom Newton ने दोनों नियुक्तियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि तजीन और जेर्विन एजेंसी में नई सोच और उद्यमी ऊर्जा लेकर आएंगे। उनके मुताबिक, इससे क्लाइंट्स के लिए नए और बेहतर ब्रैंड समाधान तैयार करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि Conran Design Group की कोशिश हमेशा से अपने अलग-अलग क्षेत्रीय केंद्रों की प्रतिभाओं को एक साथ लाने की रही है, ताकि स्थानीय बाजार की समझ के साथ विश्वस्तरीय ब्रैंड क्षमताओं का इस्तेमाल किया जा सके।
Tazeen Shaikh के पास ब्रैंड और डिजाइन का लंबा अनुभव
Tazeen Shaikh को ब्रैंड और एक्सपीरियंस डिजाइन के क्षेत्र में लंबा अनुभव है। उन्हें ब्रैंड पहचान, कॉरपोरेट ब्रैंडिंग, ब्रैंड आर्किटेक्चर, रिटेल, साइनज, डिजिटल प्लेटफॉर्म और कस्टमर एक्सपीरियंस जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल है।
Conran Design में शामिल होने से पहले तजीन Landor में डिजाइन डायरेक्टर थीं। वहां उन्होंने कई बड़े ब्रैंड्स के लिए ब्रैंड और एक्सपीरियंस से जुड़े प्रोजेक्ट्स की क्रिएटिव दिशा संभाली।
उनके काम में Tata Motors, Tata.ev, Godrej, Dell, Jio, Dunkin, Asian Paints और Bridgestone जैसे ब्रैंड शामिल रहे हैं।
Conran Design Mumbai में अपनी नई भूमिका को लेकर तजीन ने कहा कि एजेंसी की करीब 70 साल की विरासत और डिजाइन के जरिए संस्कृति, व्यवहार और लोगों की सोच को प्रभावित करने का नजरिया उन्हें काफी आकर्षित करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि Havas का Village Model अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक साथ काम करने का मौका देता है। इससे क्रिएटिव, मीडिया, हेल्थ, पीआर और दूसरी क्षमताओं के बीच मिलकर काम करने और ग्राहकों के लिए जुड़े हुए ब्रैंड अनुभव तैयार करने के नए अवसर मिलते हैं।
जेर्विन डिसूजा के पास क्लाइंट और बिजनेस डेवलपमेंट का अनुभव
वहीं, जेर्विन डिसूजा को ब्रैंड कंसल्टिंग, विज्ञापन, एक्सपीरिएंशियल मार्केटिंग और बिजनेस डेवलपमेंट का अनुभव है।
Conran Design में आने से पहले वह Landor में Client Director के पद पर काम कर रहे थे। वहां उन्होंने नए कारोबार को बढ़ाने, बड़े क्लाइंट्स के साथ रणनीतिक रिश्ते मजबूत करने और इंटीग्रेटेड ब्रैंडिंग प्रोग्राम्स को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
उनके अनुभव में Amazon, P&G, Tata Motors, Castrol, Godrej Properties, One8, Adani Cements, Generali Central और American Tourister जैसे ब्रैंड्स के साथ काम करना शामिल है।
नई जिम्मेदारी पर Jervin ने कहा कि आज ब्रैंड्स के पास लोगों से ज्यादा मानवीय और प्रासंगिक तरीके से जुड़ने का मौका है। उनके मुताबिक, Conran Design की खासियत रणनीति, क्रिएटिविटी और बिजनेस सोच को एक साथ लाकर जटिल कारोबारी चुनौतियों का समाधान करना है।
उन्होंने कहा कि Havas के व्यापक नेटवर्क के साथ काम करने से अलग-अलग एजेंसियों और विशेषज्ञताओं को साथ लाकर क्लाइंट्स के लिए ज्यादा व्यापक समाधान तैयार किए जा सकते हैं।
एजेंसी की ग्रोथ पर रहेगा फोकस
इन दोनों नियुक्तियों के साथ Conran Design Mumbai का फोकस ब्रैंड रणनीति, क्रिएटिव काम और क्लाइंट पार्टनरशिप को और मजबूत करने पर रहेगा। तजीन और जेर्विन की विशेषज्ञता का इस्तेमाल एजेंसी नए प्रोजेक्ट्स और कारोबारी अवसरों को बढ़ाने के लिए करेगी।
गिरीश बालचंद्रन को The PRactice Group का Group CEO नियुक्त किया गया है। ग्रुप के तहत The PRactice और ON PURPOSE दोनों कम्युनिकेशन कंसल्टेंसी शामिल हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गिरीश बालचंद्रन (Girish Balachandran) को द प्रैक्टिस ग्रुप (The PRactice Group) का Group CEO नियुक्त किया गया है। नई ग्रुप संरचना के तहत द प्रैक्टिस (The PRactice) और ऑन पर्पज (ON PURPOSE) को एक साथ लाया गया है।
बालचंद्रन ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी साझा की। वह ON PURPOSE के मैनेजिंग डायरेक्टर की भूमिका भी निभाते रहेंगे। इस कम्युनिकेशन कंसल्टेंसी की शुरुआत उन्होंने करीब नौ साल पहले की थी।
The PRactice की स्थापना नंदिता लक्ष्मणन (Nandita Lakshmanan) ने 26 साल पहले की थी। वह नई ग्रुप संरचना में Founding Partner के तौर पर जुड़ी रहेंगी। वहीं जकरिया जेम्स (Zacharia James) और ऋषि सेठ (Rishi Seth) ग्रुप में Managing Partners की भूमिका निभाएंगे।
दो दशकों से ज्यादा का अनुभव-
गिरीश बालचंद्रन के पास पब्लिक रिलेशंस और कम्युनिकेशन के क्षेत्र में दो दशक से ज्यादा का अनुभव है। अपने करियर के दौरान उन्होंने अलग-अलग कम्युनिकेशन और पब्लिक रिलेशंस संगठनों में वरिष्ठ भूमिकाएं निभाई हैं।
ON PURPOSE शुरू करने से पहले वह एवियन मीडिया (Avian Media), वैगनर एडस्ट्रॉम (Waggener Edstrom) और केचम पब्लिक रिलेशंस (Ketchum Public Relations) समेत कई संस्थानों के साथ काम कर चुके हैं।
The PRactice Group के Group CEO के रूप में बालचंद्रन अब दोनों कम्युनिकेशन कंपनियों को एक साझा ग्रुप स्ट्रक्चर के तहत आगे बढ़ाने में नेतृत्व करेंगे। नई व्यवस्था का उद्देश्य दोनों संगठनों की विशेषज्ञता और अनुभव को एक साथ लाकर कम्युनिकेशन कंसल्टिंग के क्षेत्र में ग्रुप की मौजूदगी को मजबूत करना है।
हालांकि, जल्दी खरीदारी शुरू होने के बावजूद आखिरी समय की खरीदारी का चलन बरकरार रहा। बिगबास्केट के करीब आधे राखी और गिफ्टिंग ऑर्डर त्योहार से पहले के अंतिम 48 घंटों में डिलीवर हुए।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
रक्षाबंधन अब सिर्फ राखी बांधने और मिठाई खिलाने तक सीमित नहीं रह गया है। टाटा (Tata) के स्वामित्व वाले क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म बिगबास्केट (bigbasket) के आंकड़े बताते हैं कि इस बार त्योहार की खरीदारी का दायरा काफी बढ़ा है।
कंपनी के मुताबिक, रक्षाबंधन से करीब एक महीने पहले ही ग्राहकों ने खरीदारी शुरू कर दी थी। इस दौरान राखी, मिठाई और चॉकलेट समेत गिफ्टिंग से जुड़े सामान की बिक्री पिछले साल के मुकाबले 156 फीसदी बढ़ी। इस अवधि में पांच लाख से ज्यादा राखी और गिफ्टिंग आइटम डिलीवर किए गए।
आंकड़ों के मुताबिक मिठाइयों की बिक्री दोगुने से ज्यादा रही, जबकि चॉकलेट की बिक्री में 148 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। क्यूरेटेड गिफ्टिंग सेट की बिक्री भी करीब तीन गुना पहुंच गई। इससे संकेत मिलता है कि ग्राहक अब रक्षाबंधन के लिए सिर्फ राखी नहीं, बल्कि कई तरह के सामान एक साथ खरीद रहे हैं।
हालांकि, जल्दी खरीदारी शुरू होने के बावजूद आखिरी समय की खरीदारी का चलन बरकरार रहा। बिगबास्केट के करीब आधे राखी और गिफ्टिंग ऑर्डर त्योहार से पहले के अंतिम 48 घंटों में डिलीवर हुए।
कंपनी ने बताया कि इस सीजन में बेची गई राखियों को अगर एक-दूसरे के ऊपर रखा जाए तो उनकी कुल ऊंचाई माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई से करीब नौ गुना हो सकती है। वहीं, राखी और गिफ्टिंग की आधी से ज्यादा यूनिट्स बिगबास्केट के निजी ब्रांड दैव्या स्पर्श (Daivya Sparsh) से आईं।
रक्षाबंधन की खरीदारी में ब्यूटी और पर्सनल केयर, परफ्यूम, इलेक्ट्रॉनिक्स और जनरल मर्चेंडाइज की मांग भी बढ़ी। स्मार्टवॉच और ऑडियो एक्सेसरीज जैसे प्रोडक्ट भी गिफ्टिंग के विकल्प के तौर पर उभरे।
बिगबास्केट के चीफ बाइंग एंड मर्चेंडाइजिंग ऑफिसर विशाल दास (Vishal Das) के मुताबिक, रक्षाबंधन अब पहले के मुकाबले ज्यादा व्यापक अवसर बन रहा है। कंपनी का मानना है कि यह ट्रेंड आने वाले त्योहारी सीजन में भी जारी रह सकता है।
हेल्थकेयर और फार्मा क्षेत्र की कंपनी इंटीग्रेस हेल्थ (Integrace Health) ने तान्या जुल्का को वाइस प्रेजिडेंट (मार्केटिंग) के पद पर नियुक्त किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
हेल्थकेयर और फार्मा क्षेत्र की कंपनी इंटीग्रेस हेल्थ (Integrace Health) ने तान्या जुल्का को वाइस प्रेजिडेंट (मार्केटिंग) के पद पर नियुक्त किया है।
तान्या जुल्का ने भी लिंक्डइन पोस्ट के माध्यम से अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी साझा की। अपनी पोस्ट में तान्या ने कहा कि वह हमेशा इस बात में विश्वास रखती हैं कि जुनून ही प्रभाव पैदा करता है। व्यक्तिगत लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए एक छोटे से ब्रेक के बाद वह वाइस प्रेजिडेंट (मार्केटिंग) के रूप में अपने नए अध्याय की शुरुआत को लेकर बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य फार्मा क्षेत्र में एक अग्रणी हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म के निर्माण, मजबूत और सार्थक ब्रैंड विकसित करने तथा मरीजों के लिए अधिक प्रभाव पैदा करने में योगदान देना है।
उन्होंने कहा कि वह सीखने, निर्माण करने और टीम के साथ मिलकर सकारात्मक बदलाव लाने के लिए उत्सुक हैं। वहीं, इंटीग्रेस हेल्थ के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (सीईओ) रेहान ए. खान ने अपने लिंक्डइन संदेश में कहा कि कंपनी को तान्या जुल्का का वाइस प्रेजिडेंट (मार्केटिंग) के रूप में स्वागत करते हुए खुशी हो रही है।
तान्या जुल्का के पास रोश और एबॉट जैसी कंपनियों में एक दशक से अधिक का नेतृत्व अनुभव है। इंटीग्रेस हेल्थ से जुड़ने से पहले वह रोश डायग्नोस्टिक्स इंडिया एवं नेबरिंग मार्केट्स में हेड मार्केटिंग (डायरेक्टर मार्केटिंग) के पद पर कार्यरत थीं। रोश डायग्नोस्टिक्स की नेतृत्व टीम का हिस्सा रहते हुए उन्होंने मार्केटिंग फंक्शन की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
वर्ष 2015 में फार्मा क्षेत्र से जुड़ने से पहले तान्या जुल्का कंसल्टिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में भी काम कर चुकी हैं। अब वह इंटीग्रेस हेल्थ में मार्केटिंग स्ट्रैटेजी और ब्रैंड निर्माण से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालेंगी।
जियोस्टार (JioStar) से द्विजेंद्र पाराशर के जुड़ने की खबर है, जिन्होंने स्पोर्ट्स में मार्केटिंग के सीनियर डायरेक्टर की नई जिम्मेदारी संभाली है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जियोस्टार (JioStar) से द्विजेंद्र पाराशर के जुड़ने की खबर है, जिन्होंने स्पोर्ट्स में मार्केटिंग के सीनियर डायरेक्टर की नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने खुद LinkedIn पर एक पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी साझा की।
अपनी नई भूमिका को लेकर द्विजेंद्र पाराशर ने लिखा, “लगता है कि आप एक इंसान को क्रिकेट से दूर तो कर सकते हैं, लेकिन क्रिकेट को उस इंसान से दूर नहीं कर सकते। यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि मैंने JioStar में Senior Director - Marketing, Sports के तौर पर नई भूमिका शुरू की है।”
JioStar से जुड़ने से पहले द्विजेंद्र पाराशर Tata Consumer Products के साथ काम कर रहे थे। इससे पहले वह करीब दो साल तक Rajasthan Royals में Head of Marketing के पद पर रहे।
पाराशर के पास मार्केटिंग और ब्रैंडिंग के क्षेत्र में लंबा अनुभव है। अपने करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने The Walt Disney Company, Pidilite Industries और Samsung Electronics जैसी कंपनियों के साथ भी काम किया है।
Rajasthan Royals में अपनी भूमिका के दौरान उन्होंने टीम की मार्केटिंग और ब्रैंड से जुड़े कामकाज को संभाला। अब JioStar में उनकी नई जिम्मेदारी स्पोर्ट्स मार्केटिंग से जुड़ी होगी। JioStar के पास भारत में क्रिकेट समेत कई प्रमुख खेल आयोजनों से जुड़े बड़े मीडिया अधिकार हैं।
अर्बन कंपनी ने अपने Native वॉटर प्यूरिफायर को लेकर कथित भ्रामक विज्ञापन अभियान पर केंट आरओ सिस्टम्स के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में मामला दायर किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अर्बन कंपनी (Urban Company) ने वॉटर प्यूरिफायर ब्रांड केंट आरओ सिस्टम्स (Kent RO Systems) के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। कंपनी ने आरोप लगाया है कि केंट आरओ की एक विज्ञापन मुहिम में उसके Native वॉटर प्यूरिफायर को लेकर कथित तौर पर झूठे और भ्रामक दावे किए गए।
मीडिया रिपोर्ट्स और अर्बन कंपनी की रेगुलेटरी फाइलिंग के मुताबिक, कंपनी ने 11 अगस्त को केंट आरओ के खिलाफ मानहानि और प्रोडक्ट डिस्पैराजमेंट का मुकदमा दायर किया। विवाद के केंद्र में Native रेंज के दो साल तक चलने वाले फिल्टर और दो साल तक सर्विसिंग की जरूरत नहीं होने से जुड़ा दावा है।
अर्बन कंपनी के Native M0, M1, M2, M1 Pro और M2 Pro मॉडल इस विवाद में शामिल हैं। कंपनी का आरोप है कि केंट की विज्ञापन और सोशल मीडिया कैंपेन में उसके दो साल के फिल्टर और नो-सर्विसिंग फीचर को कथित तौर पर ‘मार्केटिंग गिमिक’ बताया गया और Native प्यूरिफायर के इस्तेमाल को उपभोक्ताओं के लिए असुरक्षित और जोखिम भरा बताया गया।
मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट में 12 अगस्त को सुनवाई हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुनवाई के बाद केंट आरओ ने विवादित विज्ञापनों और सोशल मीडिया कंटेंट को हटाने पर सहमति जताई। कंपनी ने यह भी आश्वासन दिया कि वह आगे ऐसे समान प्रचार नहीं करेगी, जिसमें दो साल के फिल्टर या नो-सर्विसिंग फीचर वाले वॉटर प्यूरिफायर को लेकर अर्बन कंपनी के उत्पादों को निशाना बनाया जाए।
केंट को 12 अगस्त से 15 दिनों के भीतर संबंधित विज्ञापन और सोशल मीडिया कंटेंट हटाने को कहा गया है। अर्बन कंपनी के अनुसार, अदालत का आदेश 12 अगस्त को पारित हुआ था, जबकि इसे दिल्ली हाईकोर्ट की वेबसाइट पर 22 अगस्त को अपलोड किया गया।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाजार में कंपनियां उत्पाद की कीमत और प्रदर्शन के साथ-साथ फिल्टर बदलने, मेंटेनेंस और लंबे समय की लागत जैसे पहलुओं पर भी मुकाबला कर रही हैं।
दोनों कंपनियों के बीच इससे अलग भी कानूनी विवाद चल रहा है। केंट आरओ ने अर्बन कंपनी के खिलाफ पेटेंट उल्लंघन का मामला दायर किया है, जबकि अर्बन कंपनी ने केंट के पेटेंट को चुनौती देते हुए काउंटरक्लेम और टॉर्टियस इंटरफेरेंस से जुड़ा अलग मुकदमा भी दायर किया है। कंपनी की फाइलिंग के अनुसार, ये मामले अभी अदालत में विचाराधीन हैं।