इस पॉलिसी का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को बनाए रखना बताया गया है, लेकिन पत्रकारों और मीडिया संगठनों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला मानते हुए विरोध जताया है।
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Vikas Saxena
अमेरिका के रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने हाल ही में पत्रकारों के लिए एक नई मीडिया पॉलिसी लागू की है, जिसके तहत उन्हें बिना अनुमति के कोई भी जानकारी प्रकाशित नहीं करने की शपथ लेनी होगी और पेंटागन में उनकी गतिविधियां सिर्फ कुछ निर्धारित क्षेत्रों तक सीमित रहेंगी, जब तक कि वे किसी अधिकारी के साथ न हों।
इस पॉलिसी का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को बनाए रखना बताया गया है, लेकिन पत्रकारों और मीडिया संगठनों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला मानते हुए विरोध जताया है।
न्यूयॉर्क टाइम्स, एसोसिएटेड प्रेस, रॉयटर्स, सीबीएस न्यूज, फॉक्स न्यूज, और द वॉशिंगटन पोस्ट जैसे प्रमुख मीडिया संगठनों ने इस पॉलिसी पर आपत्ति जताई है। इनका कहना है कि यह पॉलिसी पत्रकारों को बिना अनुमति के कोई भी जानकारी प्रकाशित करने से रोकती है, जिससे स्वतंत्र पत्रकारिता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
पत्रकारों की प्रतिक्रिया
पत्रकारों ने इस पॉलिसी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला मानते हुए पेंटागन से अपनी प्रेस पास लौटा दी है और कार्यस्थल छोड़ दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि वे अपनी रिपोर्टिंग जारी रखेंगे, लेकिन अब उन्हें पेंटागन के अंदर से रिपोर्टिंग करने की अनुमति नहीं होगी। पत्रकारों का कहना है कि यह पॉलिसी प्रेस स्वतंत्रता और स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए खतरा है।
पेंटागन का पक्ष
पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने इस पॉलिसी का बचाव करते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारों को केवल यह स्वीकार करना होगा कि वे पॉलिसी को समझते हैं, न कि उस पर सहमति जतानी होगी।
हालांकि, आलोचकों का कहना है कि यह पॉलिसी पत्रकारों को अपनी स्वतंत्रता से वंचित करती है और सरकार द्वारा नियंत्रित जानकारी के प्रसार को बढ़ावा देती है। इस विरोध के बावजूद, पेंटागन ने कहा था कि मंगलवार शाम 5 बजे तक पत्रकारों को इस पॉलिसी को स्वीकार करना होगा, अन्यथा उन्हें अपने प्रेस बैज लौटाने होंगे और कार्यस्थल छोड़ना होगा। इस अल्टीमेटम के बाद कम से कम 30 प्रमुख मीडिया संगठनों ने इस पॉलिसी को अस्वीकार कर दिया है।
अमेरिका के मशहूर मीडिया कारोबारी टेड टर्नर का 87 साल की उम्र में निधन हो गया है। CNN नेटवर्क ने खुद इस खबर की पुष्टि की है।
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Samachar4media Bureau
अमेरिका के मशहूर मीडिया कारोबारी टेड टर्नर का 87 साल की उम्र में निधन हो गया है। CNN नेटवर्क ने खुद इस खबर की पुष्टि की है। टर्नर वही शख्स थे जिन्होंने दुनिया को 24 घंटे चलने वाले न्यूज चैनल का कॉन्सेप्ट दिया और मीडिया इंडस्ट्री को पूरी तरह बदलकर रख दिया।
टेड टर्नर ने साल 1980 में CNN (केबल न्यूज नेटवर्क) की शुरुआत की थी। यह दुनिया का पहला ऐसा चैनल था जो 24 घंटे लगातार खबरें दिखाता था। उस समय कई लोगों को यह आइडिया अजीब लगा और चैनल का मजाक भी उड़ाया गया, लेकिन धीरे-धीरे CNN दुनिया का सबसे भरोसेमंद न्यूज प्लेटफॉर्म बन गया।
CNN ने कई बड़े घटनाक्रमों की लाइव और लगातार कवरेज करके अपनी पहचान बनाई। 1981 में अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन पर हमले की खबर हो या 1986 का चैलेंजर स्पेस शटल हादसा- CNN ने तेज और लगातार अपडेट देकर खुद को साबित किया। इसके बाद 1990-91 के गल्फ वॉर की लाइव कवरेज ने चैनल को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टेड टर्नर को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें ब्रॉडकास्ट इतिहास के सबसे बड़े नामों में से एक बताया और कहा कि वे उनके अच्छे दोस्त भी थे। वहीं CNN के मौजूदा चेयरमैन और CEO मार्क थॉम्पसन ने कहा कि टर्नर वह शख्स थे जिनके कंधों पर खड़े होकर आज CNN आगे बढ़ रहा है।
टर्नर सिर्फ CNN तक ही सीमित नहीं थे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अपने परिवार के बिजनेस से की थी और बाद में एक रेडियो स्टेशन खरीदा। यही आगे चलकर Turner Broadcasting System (TBS) बना, जिसने उन्हें अमेरिका के बड़े मीडिया टायकून में शामिल कर दिया।
अपनी अलग और बेबाक पर्सनैलिटी के लिए भी टर्नर काफी मशहूर थे। उन्हें “माउथ ऑफ द साउथ” और “कैप्टन आउटरेजियस” जैसे नामों से भी जाना जाता था। कहा जाता है कि वे कई सालों तक CNN के ऑफिस में ही रहते थे और सीधे न्यूजरूम में जाकर बहस करते थे।
मीडिया के अलावा भी टर्नर कई क्षेत्रों में सक्रिय रहे। वे एक बेहतरीन नाविक थे और 1977 में अमेरिका कप जीत चुके थे। उन्होंने कई स्पोर्ट्स टीम्स के मालिकाना हक भी रखे, जिनमें अटलांटा ब्रेव्स (बेसबॉल) और अटलांटा हॉक्स (बास्केटबॉल) शामिल हैं।
टर्नर एक बड़े समाजसेवी भी थे। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र को 1 बिलियन डॉलर (करीब 8,000 करोड़ रुपये) दान दिए और पर्यावरण से जुड़े कई कामों में योगदान दिया।
टेड टर्नर की निजी जिंदगी भी चर्चा में रही। उनकी शादी मशहूर अभिनेत्री जेन फोंडा से हुई थी, जो 2001 तक चली। साल 2018 में उन्होंने बताया था कि उन्हें लेवी बॉडी डिमेंशिया नाम की बीमारी है।
टेड टर्नर का जाना मीडिया इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उन्होंने जिस 24 घंटे के न्यूज मॉडल की शुरुआत की थी, वही आज दुनिया भर के न्यूज चैनलों की पहचान बन चुका है।
अमेरिका की मीडिया इंडस्ट्री में एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी (Warner Bros. Discovery) के शेयरहोल्डर्स ने कंपनी को बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
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Samachar4media Bureau
अमेरिका की मीडिया इंडस्ट्री में एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी (Warner Bros. Discovery) के शेयरहोल्डर्स ने कंपनी को बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब Paramount Global करीब 110 अरब डॉलर (एंटरप्राइज वैल्यू) की बड़ी डील के जरिए WBD को खरीदने की दिशा में आगे बढ़ गया है।
डील के मुताबिक, Paramount WBD के सभी शेयर 31 डॉलर प्रति शेयर के हिसाब से खरीदेगा। इस सौदे में कंपनी की इक्विटी वैल्यू करीब 81 अरब डॉलर आंकी गई है। अगर यह डील पूरी हो जाती है, तो Paramount के पास Warner Bros की बड़ी-बड़ी फ्रेंचाइजी जैसे Harry Potter और Game of Thrones का कंट्रोल आ जाएगा। साथ ही HBO Max और न्यूज़ नेटवर्क CNN भी इसी के दायरे में आ जाएंगे।
कंपनी के CEO David Zaslav ने कहा कि शेयरहोल्डर्स की मंजूरी इस ऐतिहासिक डील को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। वहीं Paramount का कहना है कि आने वाले महीनों में डील को फाइनल करने की उम्मीद है, जिससे एक नई तरह की बड़ी मीडिया कंपनी बनाई जा सकेगी।
हालांकि, यह सौदा अभी पूरी तरह से पक्का नहीं हुआ है। इसे अमेरिका के न्याय विभाग और यूरोप के रेगुलेटर्स से मंजूरी मिलना बाकी है। वहीं, कई एक्सपर्ट्स और इंडस्ट्री के लोग इस डील का विरोध भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे मीडिया इंडस्ट्री कुछ बड़ी कंपनियों के हाथ में सिमट जाएगी।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
यह डील इतनी आसान नहीं रही। पिछले साल के आखिर में Netflix भी Warner Bros के साथ करीब 72 अरब डॉलर की डील करने की कोशिश में था। लेकिन Paramount ने इससे ज्यादा कीमत की पेशकश कर दी और सीधे शेयरहोल्डर्स के पास पहुंच गया। इसके बाद कई महीनों तक दोनों कंपनियों के बीच टक्कर चली, लेकिन आखिर में Paramount बाजी मार ले गया और Netflix पीछे हट गया।
डील के क्या होंगे असर?
अगर यह सौदा पूरा हो जाता है, तो हॉलीवुड के दो बड़े स्टूडियो एक ही छत के नीचे आ जाएंगे। साथ ही Paramount और HBO Max जैसे बड़े स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म भी एक साथ आ सकते हैं। इसके अलावा अमेरिका के दो बड़े न्यूज नेटवर्क- CBS और CNN भी एक ही ग्रुप का हिस्सा बन जाएंगे।
लेकिन इस डील को लेकर इंडस्ट्री के कई कलाकार, डायरेक्टर्स और राइटर्स खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि इससे नौकरियां जा सकती हैं और कंटेंट में विविधता कम हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी में कुछ जगहों पर छंटनी और बदलाव भी हो सकते हैं।
वहीं, कंपनियों का दावा है कि इससे यूजर्स को ज्यादा कंटेंट और बेहतर सर्विस मिलेगी। लेकिन आलोचकों को डर है कि आगे चलकर स्ट्रीमिंग की कीमतें बढ़ सकती हैं और कंटेंट के विकल्प कम हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, यह डील अगर पूरी होती है, तो अमेरिकी मीडिया इंडस्ट्री की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
BBC ने वित्तीय दबाव के चलते लगभग 2000 कर्मचारियों की छंटनी की योजना बनाई है। यह 15 साल में सबसे बड़ा restructuring कदम है, जिससे कंपनी 500 मिलियन पाउंड की बचत करना चाहती है।
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ब्रिटेन के पब्लिक ब्रॉडकास्टर BBC ने वित्तीय दबाव के चलते अपने वर्कफोर्स में बड़े पैमाने पर कटौती करने का फैसला किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 1,800 से 2,000 कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं, जो पिछले 15 वर्षों में सबसे बड़ी छंटनी मानी जा रही है।
यह फैसला BBC के बढ़ते खर्च और घटती आय के बीच लिया गया है। अंतरिम डायरेक्टर जनरल रोड्री टैल्फन डेविस ने कर्मचारियों को बताया कि कंपनी को अगले दो वर्षों में लगभग 500 मिलियन पाउंड की बचत करनी है।
उन्होंने संकेत दिया कि केवल कर्मचारियों की संख्या ही नहीं, बल्कि कुछ चैनल या सेवाएं भी बंद की जा सकती हैं। डेविस ने कहा कि उत्पादन लागत में वृद्धि, लाइसेंस फीस और कमर्शियल इनकम पर दबाव, और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता जैसे कारण इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं।
BBC अब भर्ती, यात्रा, कंसल्टेंसी और इवेंट्स जैसे खर्चों में भी कटौती करेगा। इस बीच, ब्रॉडकास्टिंग यूनियन Bectu की प्रमुख फिलिपा चाइल्ड्स ने इस फैसले को कर्मचारियों के लिए “विनाशकारी” बताया है। यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब मई में पूर्व Google एग्जीक्यूटिव मैट ब्रिटिन BBC की कमान संभालने वाले हैं।
डोनाल्ड ट्रंप की मीडिया कंपनी 'ट्रंप मीडिया एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप' (TMTG) ने ब्रिटिश अखबार 'दि गार्जियन' (The Guardian) के खिलाफ चल रहा मानहानि का केस वापस ले लिया है।
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डोनाल्ड ट्रंप की मीडिया कंपनी 'ट्रंप मीडिया एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप' (TMTG) ने ब्रिटिश अखबार 'दि गार्जियन' (The Guardian) के खिलाफ चल रहा मानहानि का केस वापस ले लिया है।
यह मामला उस रिपोर्ट से जुड़ा था जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी जांच एजेंसियां कंपनी को मिले करीब 8 मिलियन डॉलर (करीब 66 करोड़ रुपये) के भुगतान की जांच कर रही हैं, और शक है कि यह मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हो सकता है।
कंपनी ने फ्लोरिडा की एक अदालत में केस वापस लेने की जानकारी दी। हालांकि, इसे “बिना शर्त” पूरी तरह खत्म नहीं किया गया है, यानी TMTG चाहे तो भविष्य में फिर से केस दायर कर सकती है।
यह खबर पहली बार मार्च 2023 में ‘द गार्डियन’ ने प्रकाशित की थी। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि न्यूयॉर्क के प्रॉसिक्यूटर्स कुछ ऐसे फंड्स की जांच कर रहे हैं, जिनका संबंध रूस के राष्ट्रपति व्लमिदिर पुतिन के करीबी लोगों से हो सकता है।
इस रिपोर्ट के बाद TMTG ने आरोप लगाया था कि अखबार ने पक्षपात और गलत इरादे से खबर छापी है, और इसी आधार पर केस दर्ज किया गया था।
लेकिन बाद में अदालत ने केस के ज्यादातर हिस्से को खारिज कर दिया था और कहा था कि रिपोर्टिंग में “जानबूझकर गलत” (malice) साबित नहीं हुआ। इसके बावजूद कंपनी ने दोबारा शिकायत दाखिल की थी, जिसे अब पूरी तरह वापस ले लिया गया है।
हालांकि केस वापस लेने की वजह नहीं बताई गई है। वहीं, ‘द गार्डियन’ ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी रिपोर्टिंग पूरी तरह तथ्यों और ठोस सबूतों पर आधारित थी।
गौरतलब है कि हाल के समय में ट्रंप मीडिया कंपनियों के खिलाफ कई बड़े कानूनी कदम उठा रहे हैं, लेकिन इस मामले में उनका पीछे हटना एक अलग संकेत माना जा रहा है।
इस गिरफ्तारी के बाद नेपाल में विरोध शुरू हो गया था। खासतौर पर युवा वर्ग और Gen Z से जुड़े एक्टिविस्ट्स ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया और रोशन पोखरेल की तत्काल रिहाई की मांग की।
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नेपाल में अभिव्यक्ति की आज़ादी को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। प्रधानमंत्री बालेन शाह (Balendra Shah) की आलोचना करने पर गिरफ्तार यूट्यूबर को विरोध के बाद रिहा कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, यूट्यूब चैनल ‘Hades’ चलाने वाले रोशन पोखरेल को 9 अप्रैल 2026 को पूर्वी नेपाल के पंचथर जिले से गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने चैनल पर प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।
पुलिस के मुताबिक, पोखरेल को चार दिनों तक हिरासत में रखा गया। इसके बाद 12 अप्रैल को उन्हें निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया। रिहाई के साथ यह शर्त भी रखी गई कि जांच में जरूरत पड़ने पर उन्हें पुलिस के सामने उपस्थित होना होगा।
गौरतलब है कि इस गिरफ्तारी के बाद नेपाल में विरोध शुरू हो गया था। खासतौर पर युवा वर्ग और Gen Z से जुड़े एक्टिविस्ट्स ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया और रोशन पोखरेल की तत्काल रिहाई की मांग की। उनका कहना था कि केवल विचार व्यक्त करने के आधार पर किसी को गिरफ्तार करना उचित नहीं है और यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री बालेन शाह खुद भी राजनीति में आने से पहले यूट्यूबर और रैपर के तौर पर लोकप्रिय रहे हैं। उन्होंने अपने गीतों और वीडियो के जरिए नेपाल की व्यवस्था, भ्रष्टाचार और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी थी, जिससे उन्हें युवाओं के बीच खास पहचान मिली।
हाल ही में हुए आम चुनावों के बाद बालेन शाह के नेतृत्व में सरकार का गठन हुआ है। यह चुनाव पिछले वर्ष हुए बड़े युवा आंदोलनों के बाद कराए गए थे, जिनमें भ्रष्टाचार मुक्त शासन और सिस्टम में बदलाव की मांग उठी थी।
ऑस्ट्रेलिया के मीडिया नेटवर्क 'नाइन नेटवर्क' (Nine Network) ने BBC के साथ अपनी पुरानी साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए एक बड़ा कदम उठाया है।
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Vikas Saxena
ऑस्ट्रेलिया के मीडिया नेटवर्क 'नाइन नेटवर्क' (Nine Network) ने BBC के साथ अपनी पुरानी साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। अब Nine अपने प्लेटफॉर्म 9Now पर BBC News का नया फ्री चैनल लॉन्च कर रहा है, जो विज्ञापनों के साथ मुफ्त में देखा जा सकेगा।
इस नए चैनल के जरिए दर्शकों को 24 घंटे लाइव BBC News देखने का मौका मिलेगा। खास बात ये है कि यह खबरें दुनिया के अलग-अलग हिस्सों (जैसे- यूके, अमेरिका और सिंगापुर) से पेश की जाएंगी। यानी ऑस्ट्रेलिया के लोग अब एक ही जगह से ग्लोबल न्यूज का पूरा अपडेट ले सकेंगे।
इस चैनल पर कई पॉपुलर प्रोग्राम्स भी दिखाए जाएंगे, जैसे World News America, Newsnight, Business Today, NYSE – Opening Bell और The Travel Show। इससे दर्शकों को सिर्फ खबरें ही नहीं, बल्कि बिजनेस, ट्रैवल और इंटरनेशनल मामलों की गहराई से जानकारी भी मिलेगी।
BBC News चैनल, 9Now पर पहले से मौजूद BBC के अन्य FAST चैनलों की लिस्ट में शामिल हो गया है। इनमें BBC Comedy, BBC Food, BBC Home & Garden, Top Gear और Antiques Roadshow जैसे चैनल पहले से ही उपलब्ध हैं।
Nine Network के 9Now और प्रोग्रामिंग डायरेक्टर हमीश टर्नर (Hamish Turner) ने कहा कि BBC News को जोड़ने से उनके 9News नेटवर्क को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब गलत जानकारी तेजी से फैल रही है, ऐसे में लोगों को भरोसेमंद और 24 घंटे चलने वाली ग्लोबल न्यूज देना बेहद जरूरी है।
कुल मिलाकर, इस कदम से ऑस्ट्रेलिया के दर्शकों को एक मजबूत और विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय न्यूज प्लेटफॉर्म मिलने वाला है, जो उन्हें दुनिया भर की बड़ी खबरों से जोड़े रखेगा।
दुनिया की सबसे पुरानी और बड़ी न्यूज एजेंसियों में से एक 'एसोसिएटेड प्रेस' (Associated Press - AP) ने अपने कामकाज में बदलाव करते हुए एम्प्लॉयीज की छंटनी करने का फैसला लिया है।
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Samachar4media Bureau
दुनिया की सबसे पुरानी और बड़ी न्यूज एजेंसियों में से एक 'एसोसिएटेड प्रेस' (Associated Press - AP) ने अपने कामकाज में बदलाव करते हुए एम्प्लॉयीज की छंटनी करने का फैसला लिया है। खबर के मुताबिक, कंपनी अपने कुल स्टाफ का 5% से भी कम हिस्सा कम करेगी।
यह फैसला खास तौर पर अमेरिका में AP की न्यूज टीम पर असर डालेगा। इसके अलावा कुछ अन्य यूएस-बेस्ड टीमों में भी थोड़ी बहुत कटौती की जाएगी।
AP की एग्जिक्यूटिव एडिटर जूली पेस (Julie Pace) ने एम्प्लॉयीज को भेजे गए मेमो में बताया कि यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है, ताकि कंपनी अपने काम को ग्राहकों की जरूरतों के हिसाब से बेहतर बना सके। मीडिया इंडस्ट्री में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और दर्शकों का न्यूज देखने का तरीका भी बदल रहा है।
दरअसल, पूरी दुनिया में मीडिया कंपनियां इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। विज्ञापन से होने वाली कमाई घट रही है और वेबसाइट ट्रैफिक भी कम हो रहा है। इसी वजह से कई बड़ी कंपनियां छंटनी कर रही हैं।
हाल ही में 'दि वॉशिंगटन पोस्ट' (The Washington Post) ने अपने करीब एक-तिहाई स्टाफ को निकालने की प्रक्रिया शुरू की थी। वहीं CNN, NBC News और Business Insider जैसे बड़े मीडिया संस्थान भी पिछले एक साल में छंटनी कर चुके हैं।
AP इससे पहले 2024 के अंत में भी करीब 8% एम्प्लॉयीज की छंटनी कर चुका है। हालांकि कंपनी की कमाई अभी स्थिर बनी हुई है, लेकिन पारंपरिक अखबारों से मिलने वाला बिजनेस कम हो रहा है।
अब AP की कमाई का बड़ा हिस्सा टीवी चैनलों, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और टेक कंपनियों से आ रहा है। कंपनी ने कहा है कि पहले वह स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने का विकल्प देगी और यह कटौती न्यूज कवरेज पर ज्यादा असर नहीं डालेगी।
कुल मिलाकर, यह कदम बदलते मीडिया माहौल के हिसाब से खुद को ढालने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, अपराधियों का पीछा करते समय एक वाहन पलट गया, जिसमें से एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है और उस वाहन को जब्त कर लिया गया है।
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Samachar4media Bureau
इराक की राजधानी बगदाद में अमेरिकी पत्रकार शेली किटलसन (Shelly Kittleson) को अगवा करने का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इराक के गृह मंत्रालय ने कहा है कि 31 मार्च 2026 की शाम अज्ञात लोगों ने शेली को सैदून स्ट्रीट के पास अगवा किया। इसके बाद इराकी सुरक्षा बलों ने तुरंत खोज-तलाशी अभियान शुरू किया।
पुलिस के अनुसार, अपहरण के बाद अपराधियों का पीछा करते समय एक वाहन पलट गया, जिसमें से एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है और उस वाहन को जब्त कर लिया गया है। हालांकि किटलसन का अब तक कोई पता नहीं चला है और जांच जारी है।
शेली किटलसन एक अनुभवी स्वतंत्र (फ्रीलांस) पत्रकार हैं, जिन्होंने Al-Monitor, BBC, Politico और Foreign Policy जैसे कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग की है। बताया जाता है कि शेली को पहले ही सुरक्षा खतरों के बारे में चेतावनी दी जा चुकी थी।
ईरान की राजधानी तेहरान में एक बड़ा हमला हुआ है। कतर के टीवी नेटवर्क Al Araby टेलीविजन नेटवर्क के दफ्तर वाली इमारत पर इजरायल की मिसाइल गिरने की खबर है
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Samachar4media Bureau
ईरान की राजधानी तेहरान में एक बड़ा हमला हुआ है। कतर के टीवी नेटवर्क Al Araby टेलीविजन नेटवर्क के दफ्तर वाली इमारत पर इजरायल की मिसाइल गिरने की खबर है, जिससे वहां काफी नुकसान हुआ है।
चैनल के मुताबिक, इस हमले के बाद बिल्डिंग को भारी क्षति पहुंची और उनका लाइव प्रसारण तुरंत बंद करना पड़ा। अंदर की तस्वीरों में टूटी खिड़कियां, बिखरा हुआ कांच और मलबा साफ दिखाई दे रहा है। बाहर भी आसपास की सड़कों और इमारतों को नुकसान पहुंचा है।
हमले के समय चैनल के ब्यूरो चीफ हाजेम कल्लास रिपोर्टिंग कर रहे थे। उन्होंने बताया कि वे युद्ध पर रिपोर्ट दे रहे थे, तभी अचानक मिसाइल आकर बिल्डिंग से टकरा गई।
यह दफ्तर एक रिहायशी इलाके में है, जहां आसपास कई दुकानें और सुविधाएं भी मौजूद हैं। उसी बिल्डिंग में फिजियोथेरेपी सेंटर, ब्यूटी पार्लर, डेंटल क्लिनिक और कैफे भी चल रहे थे।
फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि इस इलाके को निशाना क्यों बनाया गया। हालांकि इस हमले ने इलाके में दहशत फैला दी है।
गौरतलब है कि ईरान में यह संघर्ष 28 फरवरी से शुरू हुआ था, जब इजरायल और अमेरिका ने हमले किए थे। इसके बाद से पूरे मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ता जा रहा है। हाल ही में रूस के सरकारी चैनल RT के दफ्तर को भी तेहरान में नुकसान पहुंचने की खबर आई थी।
फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन के चेयरमैन ब्रेंडन कार ने चेतावनी दी है कि यदि टीवी और रेडियो ब्रॉडकास्टर्स जनता के हित में काम नहीं करेंगे, तो उनके लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं।
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Samachar4media Bureau
अमेरिका में मीडिया कवरेज को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (Federal Communications Commission) के चेयरमैन ब्रेंडन कार (Brendan Carr) ने चेतावनी दी है कि यदि टीवी और रेडियो ब्रॉडकास्टर्स जनता के हित में काम नहीं करेंगे, तो उनके लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं।
यह बयान उस समय आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध की मीडिया कवरेज पर नाराजगी जताई थी।
ब्रेंडन कार ने अमेरिकी चैनल CBS News से बातचीत में कहा कि ब्रॉडकास्टिंग लाइसेंस किसी की निजी संपत्ति नहीं है। यदि कोई चैनल जनता के हित में काम नहीं करता, तो उसका लाइसेंस वापस लिया जा सकता है।
कार ने कुछ ब्रॉडकास्टर्स पर “गलत खबरें और खबरों को तोड़-मरोड़कर पेश करने” का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि लाइसेंस रिन्यू होने से पहले चैनल चाहें तो अपनी गलती सुधार सकते हैं।
हालांकि डेमोक्रेटिक पार्टी के कई नेताओं ने कार के इस बयान की आलोचना की है और इसे संविधान के खिलाफ बताया है। मैसाचुसेट्स की सीनेटर एलिजाबेथ वारेन (Elizabeth Warren) ने कहा कि सरकार को यह अधिकार नहीं है कि वह ऐसी बातों पर रोक लगाए जो उसे पसंद नहीं हैं।
वहीं कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूजॉम (Gavin Newsom) ने इसे खुलकर असंवैधानिक बताया। एरिजोना के सीनेटर मार्क केली (Mark Kelly) ने कहा कि यह FCC की हद से ज्यादा दखल है, क्योंकि सरकार आलोचना से बचना चाहती है।
दरअसल एफसीसी अमेरिका की मीडिया नियामक संस्था है, जो रेडियो, टीवी और सैटेलाइट प्रसारण को नियंत्रित करती है। यह संस्था ब्रॉडकास्ट स्टेशनों को आठ साल के लिए लाइसेंस देती है। हालांकि एफसीसी सीधे तौर पर टीवी नेटवर्क जैसे CBS, NBC, ABC या Fox को लाइसेंस नहीं देती।
एफसीसी की वेबसाइट के अनुसार, अमेरिका के संविधान के पहले संशोधन (First Amendment) और कम्युनिकेशंस एक्ट के तहत आयोग को प्रसारण सामग्री को सेंसर करने की अनुमति नहीं है। आयोग का कंटेंट पर नियंत्रण भी काफी सीमित है और यह केवल टीवी और रेडियो प्रसारण तक ही लागू होता है।
इस बीच ट्रंप प्रशासन और कई टीवी चैनलों के बीच विवाद पहले भी सामने आते रहे हैं। ट्रंप कई बार मीडिया संस्थानों पर उनके खिलाफ पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग करने का आरोप लगा चुके हैं और कुछ बड़े अखबारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी कर चुके हैं।