पैरामाउंट और वार्नर ब्रदर्स के विलय के बाद एम्प्लॉयीज की छंटनी की संभावना अब सामने आई है।
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Vikas Saxena
पैरामाउंट और वार्नर ब्रदर्स के विलय के बाद एम्प्लॉयीज की छंटनी की संभावना अब सामने आई है। Skydance Media के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों ने हाल ही में एम्प्लॉयीज को भेजे एक ज्ञापन में पुष्टि की है कि पैरामाउंट-वार्नर ब्रदर्स विलय पूरा होने के बाद एम्प्लॉयीज की संख्या में कटौती की जा सकती है।
नेतृत्व की ओर से भेजे गए इस संदेश से साफ संकेत मिलता है कि विलय के बाद होने वाले बदलावों में वर्कफोर्स में कमी भी शामिल होगी। नई संयुक्त कंपनी अपने कामकाज को एक साथ लाने और दोनों कंपनियों के बीच तालमेल से होने वाले फायदे हासिल करने की कोशिश करेगी।
विलय के बाद बदलेगा कंपनी का ढांचा
Skydance Media के अधिकारियों के संदेश के मुताबिक, एम्प्लॉयीज की संख्या में कमी विलय के बाद की रणनीति का हिस्सा होगी। इसका मतलब है कि दोनों कंपनियों के कामकाज को एक साथ लाने के दौरान कुछ पदों और भूमिकाओं में बदलाव या उन्हें खत्म किए जाने की संभावना है।
हालांकि, शुरुआती जानकारी में यह नहीं बताया गया है कि कितने एम्प्लॉयीज की छंटनी होगी या यह प्रक्रिया कब शुरू होगी।
मीडिया कंपनी में बड़े संगठनात्मक बदलाव के संकेत
पैरामाउंट और वार्नर ब्रदर्स के विलय के बाद बनने वाली संयुक्त मीडिया कंपनी को अपने कामकाज को एकीकृत करना होगा। इसी प्रक्रिया में समान तरह की भूमिकाओं और कामकाज को एक साथ लाने की जरूरत पड़ सकती है।
Skydance Media के सीईओ की ओर से छंटनी की पुष्टि ऐसे समय हुई है, जब विलय के बाद नई कंपनी के ढांचे और कामकाज को लेकर बड़े बदलाव की तैयारी है। फिलहाल एम्प्लॉयीज की छंटनी से जुड़ी संख्या और समयसीमा स्पष्ट नहीं की गई है, लेकिन नेतृत्व के संदेश ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि विलय पूरा होने के बाद कंपनी में महत्वपूर्ण संगठनात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
हॉलीवुड में एक बड़ी कंपनी का गठन हो गया है। डेविड एलिसन की पैरामाउंट ने 111 अरब डॉलर में वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी का अधिग्रहण पूरा कर लिया है।
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Samachar4media Bureau
हॉलीवुड में एक बड़ी कंपनी का गठन हो गया है। डेविड एलिसन की पैरामाउंट ने 111 अरब डॉलर में वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी का अधिग्रहण पूरा कर लिया है। इस सौदे के बाद दो बड़ी फिल्म स्टूडियो कंपनियां, टेलीविजन नेटवर्क, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म, खेल प्रसारण अधिकार और न्यूज कारोबार अब एक ही कॉरपोरेट छतरी के नीचे आ गए हैं।
इस संयुक्त कंपनी का संचालन स्काईडांस नाम से होगा। यही वह नाम है जिसे डेविड एलिसन ने करीब 20 साल पहले शुरू किए गए अपने स्टूडियो के लिए इस्तेमाल किया था।
अब इस बड़े सौदे के बाद कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती दोनों कंपनियों के विशाल कारोबार को एक साथ लाने की है। नई कंपनी को 80 अरब डॉलर से ज्यादा के कर्ज को संभालना होगा और खुद को तकनीक आधारित मनोरंजन कंपनी के तौर पर विकसित करना होगा।
डेविड एलिसन कंपनी के चेयरमैन और सीईओ होंगे, जबकि यनॉन क्रेज सह-सीईओ की भूमिका निभाएंगे। नेतृत्व टीम का लक्ष्य ऐसी नई पीढ़ी की मीडिया और मनोरंजन कंपनी तैयार करना है, जो डिज्नी, नेटफ्लिक्स, अमेजन, एप्पल और गूगल जैसी बड़ी कंपनियों के साथ मुकाबला कर सके।
फिल्म, टीवी, स्ट्रीमिंग और खेल अधिकारों का बड़ा पोर्टफोलियो
इस सौदे के बाद बनी कंपनी के पास फिल्मों और टेलीविजन की बड़ी संख्या में संपत्तियां, स्ट्रीमिंग कारोबार, खेल प्रसारण अधिकार, न्यूज कारोबार, पुरानी सामग्री का बड़ा संग्रह और कई चर्चित मनोरंजन ब्रैंड होंगे। हालांकि, कंपनी के मुताबिक केवल बड़ा आकार ही उसका लक्ष्य नहीं है। स्काईडांस इस बड़े कारोबार को तकनीक, डेटा और सामग्री बनाने और दर्शकों तक पहुंचाने की नई क्षमताओं के साथ जोड़ना चाहती है।
कंपनी का नाम स्काईडांस, लेकिन पैरामाउंट और वार्नर ब्रदर्स के ब्रैंड रहेंगे
नई कंपनी का कॉरपोरेट नाम भले ही स्काईडांस होगा, लेकिन दर्शकों को पैरामाउंट और वार्नर ब्रदर्स के नाम पहले की तरह दिखाई देंगे। पैरामाउंट और वार्नर ब्रदर्स अपने-अपने ब्रैंड के तहत काम करते रहेंगे। फिल्मों और शो के सामने पैरामाउंट का पहाड़ और वार्नर ब्रदर्स की ढाल वाला लोगो भी बना रहेगा।
कंपनी ने स्काईडांस नाम चुनने का फैसला जानबूझकर किया है। उसका कहना है कि वार्नरपैरामाउंट या पैरामाउंटवार्नर जैसे नाम दोनों स्टूडियो को छोटा महसूस कराते, जबकि स्काईडांस नाम दोनों की विरासत को बनाए रखते हुए एक नए अध्याय का संकेत देता है।
इस तरह नई कंपनी के सामने एक साथ दो काम होंगे- दोनों कारोबारों को एक करना और उन ब्रैंडों की पहचान को भी बनाए रखना, जिनकी वजह से पैरामाउंट और वार्नर ब्रदर्स दुनिया भर में जाने जाते हैं।
हर साल कम से कम 30 फिल्में बनाने की योजना
स्काईडांस ने संयुक्त कारोबार के लिए बड़ी सामग्री रणनीति भी तैयार की है। कंपनी ने हर साल कम से कम 30 फिल्में बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। इन फिल्मों में नई कहानियों के साथ-साथ हैरी पॉटर, मिशन: इम्पॉसिबल, द लॉर्ड ऑफ द रिंग्स, डीसी, ट्रांसफॉर्मर्स और स्टार ट्रेक जैसी बड़ी फ्रेंचाइजी भी शामिल होंगी।
टेलीविजन और स्ट्रीमिंग के लिए कंपनी के पास गेम ऑफ थ्रोन्स, लैंडमैन, एनसीआईएस, ट्रैकर और स्पंजबॉब स्क्वायरपैंट्स जैसी चर्चित संपत्तियां हैं। कंपनी ने हॉगवर्ट्स लेगेसी और मॉर्टल कोम्बैट जैसी गेमिंग फ्रेंचाइजी का भी जिक्र किया है। इसके अलावा उसके पास सीबीएस पर एनएफएल, यूएफसी, यूईएफए और मार्च मैडनेस जैसे लाइव खेल अधिकार भी होंगे।
कंपनी के मुताबिक, फिल्मों, टेलीविजन, स्ट्रीमिंग, गेमिंग और लाइव स्पोर्ट्स को एक साथ लाना उसकी रणनीति का अहम हिस्सा है। इससे दर्शकों तक पहुंचने और अपनी मनोरंजन संपत्तियों से कमाई करने के कई रास्ते मिलेंगे।
तकनीक और AI पर भी रहेगा जोर
इस नई कंपनी की रणनीति में तकनीक को भी खास जगह दी गई है। स्काईडांस का कहना है कि वह तकनीक, डेटा और नई तकनीकी क्षमताओं का इस्तेमाल सामग्री बनाने, उसे दर्शकों तक पहुंचाने और उससे कमाई करने के अलग-अलग चरणों में करना चाहती है। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI भी शामिल है।
कंपनी के मुताबिक, AI का इस्तेमाल रचनात्मक लोगों की कल्पनाओं के दायरे को बढ़ाने और काम की उत्पादकता सुधारने के लिए किया जाएगा। हालांकि, कंपनी का कहना है कि तकनीक का काम कला की जगह लेना नहीं, बल्कि उसकी मदद करना होना चाहिए।
मनोरंजन कारोबार में भी काफी बदलाव आया है। दर्शकों के पास अब पहले से कहीं ज्यादा प्लेटफॉर्म और विकल्प हैं। तकनीक सामग्री बनाने और उसे लोगों तक पहुंचाने के तरीके बदल रही है, जबकि स्ट्रीमिंग ने सामग्री देखने और उससे कमाई करने के तरीके को भी बदल दिया है।
इसी वजह से स्काईडांस खुद को केवल एक बड़ी स्टूडियो कंपनी के तौर पर नहीं, बल्कि तकनीक से संचालित मनोरंजन कारोबार के लिए तैयार की गई मीडिया कंपनी के तौर पर पेश कर रही है।
6 अरब डॉलर की बचत का लक्ष्य
इस सौदे से जुड़े वित्तीय आंकड़े भी काफी बड़े हैं। संयुक्त कंपनी को करीब 70 अरब डॉलर का राजस्व हासिल होने की उम्मीद है। इसके साथ ही पैरामाउंट और वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के कारोबार को एक साथ लाने से कम से कम 6 अरब डॉलर की बचत यानी तालमेल से होने वाले वित्तीय लाभ का लक्ष्य रखा गया है।
कंपनी के मुताबिक, इस बचत से कारोबार को ज्यादा कुशल बनाने और सामग्री, प्रतिभा तथा तकनीक में निवेश के लिए पूंजी उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, दोनों बड़े कारोबारों को एक साथ लाने का मतलब कुछ मुश्किल कारोबारी फैसले भी होंगे। कंपनी ने माना है कि एकीकरण की प्रक्रिया में बदलाव आएंगे और इससे कर्मचारियों से जुड़े फैसले भी प्रभावित हो सकते हैं। कंपनी ने कहा है कि इस प्रक्रिया को सोच-समझकर और सम्मान के साथ संभाला जाएगा।
80 अरब डॉलर से ज्यादा का कर्ज भी चुनौती
नई कंपनी के सामने सबसे बड़ी तत्काल चुनौतियों में से एक उसकी वित्तीय स्थिति है। संयुक्त कंपनी पर 80 अरब डॉलर से ज्यादा का कर्ज होगा। इसका मतलब है कि कारोबार का आकार बढ़ाने के साथ-साथ कंपनी को अपने वित्तीय मामलों पर भी काफी ध्यान देना होगा।
ऐसे में 6 अरब डॉलर की लक्षित बचत कंपनी के लिए सिर्फ एक कारोबारी लक्ष्य नहीं है। यह सामग्री और तकनीक में निवेश करने के साथ-साथ कर्ज और अन्य वित्तीय जिम्मेदारियों को संभालने में भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
इसके साथ ही स्काईडांस का कहना है कि वह इतनी वित्तीय क्षमता बनाए रखना चाहती है कि रचनात्मक काम में जोखिम ले सके, कर्मचारियों और तकनीक में निवेश कर सके और ऐसे अवसरों पर काम कर सके जो उसे प्रतिस्पर्धी बाजार में अलग पहचान दिलाएं।
अब असली चुनौती सौदे को सफलतापूर्वक लागू करने की
डेविड एलिसन और यनॉन क्रेज के सामने अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी इस पूरे सौदे को जमीन पर लागू करने की है। उन्हें दो बड़ी कंपनियों के संगठनों को एक साथ लाना होगा, रचनात्मक प्रतिभाओं को जोड़े रखना होगा, बड़ी और पुरानी फ्रेंचाइजी की कीमत बनाए रखनी होगी और कारोबार में ऐसी बचत करनी होगी जिससे उन व्यवसायों को नुकसान न पहुंचे, जिन्होंने इन कंपनियों को यहां तक पहुंचाया है।
कंपनी ने अपनी आगे की रणनीति के लिए चार बड़े लक्ष्य बताए हैं- कहानी कहने के मामले में आगे रहना, तकनीक के मामले में ज्यादा सक्षम बनना, वैश्विक स्तर पर मुकाबला करना और कर्मचारियों, रचनाकारों, दर्शकों, विज्ञापनदाताओं तथा साझेदारों का भरोसा हासिल करना।
संयुक्त कंपनी के पास काम करने के लिए बहुत बड़ा पोर्टफोलियो है। उसके पास दशकों का फिल्म और टेलीविजन इतिहास, बड़ी फ्रेंचाइजी, खेल अधिकार, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म और दुनिया भर में दर्शकों तक पहुंच है। वहीं, नई तकनीकी रणनीति का मकसद इन संपत्तियों का अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर ज्यादा प्रभावी इस्तेमाल करना है।
दर्शकों के लिए फिलहाल इसका सीधा असर यह हो सकता है कि उन्हें अपनी पसंद की पुरानी और चर्चित फ्रेंचाइजी तक पहुंचने के और रास्ते मिलें। रचनात्मक लोगों के लिए कंपनी बड़े पैमाने और ज्यादा वितरण क्षमता का वादा कर रही है। वहीं निवेशकों के लिए करीब 70 अरब डॉलर के राजस्व और कम से कम 6 अरब डॉलर की लक्षित बचत का संयोजन अहम है।
हालांकि, 111 अरब डॉलर का यह अधिग्रहण पूरा होना कहानी का अंत नहीं, बल्कि अगले चरण की शुरुआत है। दो बड़ी कंपनियों को एक साथ चलाना, 80 अरब डॉलर से ज्यादा के कर्ज को संभालना और यह साबित करना कि बड़े आकार को टिकाऊ विकास में बदला जा सकता है- अब यही तय करेगा कि स्काईडांस का यह सबसे बड़ा दांव कितना सफल होता है।
पैरामाउंट (Paramount) के CEO डेविड एलिसन ने Warner Bros Discovery के अधिग्रहण के बाद भी मार्क थॉमसन को CNN के प्रमुख पद पर बनाए रखने की इच्छा जताई है।
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Samachar4media Bureau
पैरामाउंट (Paramount) के CEO डेविड एलिसन ने वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी (Warner Bros Discovery) के अधिग्रहण के बाद भी मार्क थॉमसन को CNN के हेड के पद पर बनाए रखने की इच्छा जताई है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एलिसन (Ellison) और थॉम्पसन (Thompson) के बीच पिछले कुछ हफ्तों से नए कॉन्ट्रैक्ट को लेकर बातचीत चल रही है। हालांकि, अभी दोनों पक्षों के बीच शर्तों पर सहमति नहीं बनी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बातचीत में सबसे अहम मुद्दा संपादकीय स्वतंत्रता का है। Thompson चाहते हैं कि मालिकाना हक बदलने के बाद भी CNN की पत्रकारिता को लेकर उनके पास व्यापक नियंत्रण बना रहे। इसके लिए वह कुछ स्पष्ट गारंटी चाहते हैं।
CNN और CBS News को साथ चलाने की तैयारी
यह बातचीत ऐसे समय हो रही है, जब Paramount यह तय करने में जुटा है कि Warner Bros Discovery के साथ सौदा पूरा होने के बाद CNN और CBS News किस तरह साथ काम करेंगे।
सूत्र के मुताबिक, CBS News की एडिटर-इन-चीफ Bari Weiss के इस सौदे के बाद CNN में कोई भूमिका निभाने की उम्मीद नहीं है।
Paramount ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जबकि Warner Bros Discovery ने Reuters के सवाल का तुरंत जवाब नहीं दिया। इससे पहले Wall Street Journal ने भी रिपोर्ट किया था कि डेविड एलिसन ने Mark Thompson से CNN प्रमुख के तौर पर बने रहने को कहा है।
$110 अरब के सौदे को मिली मंजूरी
अमेरिका की एक अदालत ने Paramount को Warner Bros Discovery के $110 अरब के अधिग्रहण को पूरा करने का रास्ता साफ कर दिया है। इसके साथ ही कई महीनों से चल रही नियामकीय और कानूनी अड़चनें खत्म हो गई हैं। इस सौदे के पूरा होने के बाद CNN और CBS News एक ही कंपनी के मालिकाना हक के तहत आ जाएंगे।
इस सौदे को लेकर अमेरिका के 12 राज्यों के एक समूह ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि इस विलय से ऐसी बड़ी मीडिया कंपनी बन सकती है, जिसके पास फिल्मों और टेलीविजन की कीमतों पर ज्यादा प्रभाव हो सकता है। हालांकि, 21 सितंबर को Paramount और कैलिफोर्निया की अगुवाई वाले 12 अमेरिकी राज्यों के समूह के बीच समझौता हो गया। इसके बाद सौदे को आगे बढ़ने का रास्ता मिला।
संपादकीय स्वतंत्रता के लिए बनेगा स्वतंत्र बोर्ड
समझौते के तहत बनने वाली नई संयुक्त कंपनी में एक स्वतंत्र न्यूज एडिटोरियल इंडिपेंडेंस बोर्ड (News Editorial Independence Board) बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य CNN और CBS News दोनों की संपादकीय स्वतंत्रता और तथ्यों पर आधारित पत्रकारिता के मानकों की रक्षा करना होगा।
ऐसे में Mark Thompson के साथ चल रही बातचीत काफी अहम मानी जा रही है। CNN अब एक बहुत बड़े मीडिया समूह का हिस्सा बनने की तैयारी कर रहा है और इस पूरी प्रक्रिया में संपादकीय स्वतंत्रता सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक बनकर सामने आई है।
अमेरिका की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी OpenAI ने कहा है कि उसने 100 से ज्यादा संगठनों को अपने AI एजेंट्स से जुड़ी अनधिकृत गतिविधियों के मामलों की जानकारी दी है।
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Samachar4media Bureau
अमेरिका की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी OpenAI ने कहा है कि उसने 100 से ज्यादा संगठनों को अपने AI एजेंट्स से जुड़ी अनधिकृत गतिविधियों के मामलों की जानकारी दी है। कंपनी फिलहाल अपने AI मॉडल्स से जुड़ी गतिविधियों की व्यापक समीक्षा कर रही है। यह समीक्षा Hugging Face से जुड़े एक मामले के बाद शुरू की गई है।
OpenAI के मुताबिक, कंपनी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसके AI मॉडल्स से जुड़ी गतिविधियों का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। इसके लिए करीब 50 पेटाबाइट डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है। कंपनी ने कहा है कि इतनी बड़ी मात्रा में डेटा की जांच के कारण इस समीक्षा को पूरा होने में कई महीने लग सकते हैं।
AI मॉडल्स ने किया इंटरनेट का अनचाहा इस्तेमाल
OpenAI ने बताया कि कुछ मामलों में उसके AI मॉडल्स ने इंटरनेट की सुविधा का ऐसे तरीकों से इस्तेमाल किया, जैसा उन्हें करने के लिए निर्देश नहीं दिया गया था। कंपनी के मुताबिक, पीछे मुड़कर देखने पर कुछ मामलों में यह भी सामने आया कि AI मॉडल्स पर जरूरी पाबंदियां उतनी प्रभावी नहीं थीं, जितनी होनी चाहिए थीं।
कंपनी ने पिछले कुछ महीनों में ऐसे मामलों को रोकने या उनकी शुरुआती स्तर पर पहचान करने के लिए कई नए तकनीकी और संचालन संबंधी उपाय भी लागू किए हैं।
Hugging Face वाला मामला सबसे गंभीर
OpenAI ने कहा कि Hugging Face से जुड़ा मामला अब तक उसके सामने आया AI मॉडल्स की अनधिकृत गतिविधि का सबसे गंभीर मामला है। कंपनी इसी घटना के बाद अपने AI मॉडल्स से जुड़ी गतिविधियों की व्यापक जांच कर रही है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब AI कंपनियां ऐसे AI एजेंट्स तेजी से विकसित और इस्तेमाल कर रही हैं, जो इंटरनेट से जुड़े टूल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं और इंसानों के सीमित हस्तक्षेप के साथ कई तरह के काम कर सकते हैं।
इससे यह सवाल भी बढ़ रहा है कि ऐसे AI सिस्टम पर किस तरह नजर रखी जाए और यह कैसे सुनिश्चित किया जाए कि वे अपनी तय सीमाओं से बाहर जाकर काम न करें।
AI एजेंट्स को लेकर बढ़ रही चिंता
AI एजेंट्स सामान्य चैटबॉट से आगे जाकर खुद कुछ कदम उठाने में सक्षम होते हैं। उदाहरण के लिए, वे इंटरनेट पर जानकारी खोजने, टूल्स का इस्तेमाल करने या किसी तय काम को पूरा करने के लिए कई चरणों में कार्रवाई कर सकते हैं। इसी वजह से AI कंपनियों के सामने इन सिस्टम की निगरानी और नियंत्रण की चुनौती भी बढ़ रही है।
OpenAI ने इससे पहले कहा था कि अपनी समीक्षा पूरी करने में कई महीने लग सकते हैं, क्योंकि इसमें बड़ी मात्रा में डेटा और काफी विस्तृत जांच शामिल है।
अमेरिका की बदलती वीजा नीतियों का असर अब कोलंबिया यूनिवर्सिटी के जर्नलिज्म कार्यक्रम पर भी दिखाई दे रहा है।
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अमेरिका की बदलती वीजा नीतियों का असर अब कोलंबिया यूनिवर्सिटी के जर्नलिज्म कार्यक्रम पर भी दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय छात्रों से मिलने वाले आवेदनों में तेज गिरावट के बीच कोलंबिया जर्नलिज्म स्कूल ने अपने मास्टर ऑफ आर्ट्स (MA) कार्यक्रम में नए दाखिले एक साल के लिए रोक दिए हैं। रॉयटर्स ने इस मामले से परिचित चार लोगों के हवाले से यह जानकारी दी है।
जर्नलिज्म स्कूल ने गुरुवार को कहा कि वह एमए कार्यक्रम का “महत्वपूर्ण मूल्यांकन” करने के लिए दाखिले अस्थायी रूप से रोक रहा है। स्कूल के डीन जेलानी कॉब ने रॉयटर्स को बताया कि यह कार्यक्रम एक साल के लिए रोका जाएगा और इस दौरान 2005 में शुरू किए गए इस डिग्री कार्यक्रम को नए सिरे से तैयार किया जाएगा, क्योंकि उस समय जर्नलिज्म का बाजार आज से काफी अलग था।
कॉब ने यह भी बताया कि वीजा से जुड़े बदलाव और दूसरे ऐसे ही मुद्दे इस फैसले पर विचार करते समय सामने आए थे। उन्होंने कहा कि स्कूल को कार्यक्रम में जरूरी बदलावों पर भी विचार करने के लिए समय चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या पर असर
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की वीजा नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता की वजह से विदेशों से आने वाले संभावित छात्रों में कोलंबिया के जर्नलिज्म एमए कार्यक्रम को लेकर रुचि कम हुई है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय आवेदनों में कितनी गिरावट आई है, इसका सटीक आंकड़ा सामने नहीं आया है।
इस एमए कार्यक्रम में लगभग आधे छात्र अंतरराष्ट्रीय होते हैं, इसलिए विदेशों से आने वाले आवेदनों में कमी का कार्यक्रम पर सीधा असर पड़ा है। कम नामांकन के कारण कार्यक्रम में पहले भी कुछ बदलाव किए गए थे। मसलन, 2024-25 के शैक्षणिक वर्ष में साइंस और पॉलिटिक्स के सेमिनार को एक साथ कर दिया गया था।
वीजा नीतियों में क्या बदलाव हुए?
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल ट्रंप प्रशासन ने नए छात्र वीजा के अपॉइंटमेंट कुछ समय के लिए रोक दिए थे। बाद में इन्हें दोबारा शुरू किया गया, लेकिन आवेदकों की ऑनलाइन गतिविधियों की अतिरिक्त जांच की व्यवस्था की गई। प्रशासन ने कहा था कि इसका मकसद अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संभावित खतरों की पहचान करना है।
विदेशी छात्रों और पत्रकारों के अमेरिका में रहने की अवधि को लेकर भी इस साल एक नया नियम लाने की कोशिश की गई थी। हालांकि, लागू होने से पहले ही एक संघीय जज ने इसे रोक दिया था।
कार्यक्रम को नए तरीके से तैयार करने की तैयारी
कोलंबिया जर्नलिज्म स्कूल की वेबसाइट के मुताबिक, एमए कार्यक्रम में दाखिले फिलहाल अस्थायी रूप से रोके गए हैं। स्कूल का कहना है कि वह बदलते वैश्विक जर्नलिज्म की जरूरतों के हिसाब से अपने डिग्री कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा करता है।
यह एमए कार्यक्रम अनुभवी पत्रकारों के लिए है और इसमें आर्ट्स एंड कल्चर, बिजनेस एंड इकोनॉमिक्स, पॉलिटिक्स और साइंस जैसे क्षेत्र शामिल हैं। स्कूल ने यह भी कहा है कि इच्छुक छात्रों के लिए दूसरे डिग्री कार्यक्रम उपलब्ध हैं।
इसी बीच, कोलंबिया जर्नलिज्म स्कूल ने दो साल के पार्ट-टाइम ऑनलाइन मास्टर ऑफ साइंस इन जर्नलिज्म कार्यक्रम की भी घोषणा की है। इसकी पढ़ाई ऑनलाइन होगी और 2026-27 सत्र के लिए आवेदन 15 दिसंबर 2026 तक किए जा सकते हैं।
बीबीसी के डायरेक्टर जनरल मैट ब्रिटिन ने कहा है कि बीबीसी की आर्थिक स्थिति और लोगों के कंटेंट देखने-सुनने के बदलते तरीके को देखते हुए कुछ चैनल और रेडियो स्टेशन बंद किए जा सकते हैं।
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बीबीसी के डायरेक्टर जनरल मैट ब्रिटिन ने कहा है कि बीबीसी की आर्थिक स्थिति और लोगों के कंटेंट देखने-सुनने के बदलते तरीके को देखते हुए कुछ चैनल और रेडियो स्टेशन बंद किए जा सकते हैं। इससे बचाए गए संसाधनों को ऑन-डिमांड सेवाओं में लगाया जा सकेगा।
बीबीसी करीब 500 मिलियन पाउंड की बचत करने की कोशिश कर रहा है। मैट ब्रिटिन ने बीबीसी वन के कार्यक्रम ‘संडे विद लॉरा कुइन्सबर्ग’ में कहा कि यह गारंटी नहीं दी जा सकती कि कोई भी कार्यक्रम या चैनल हमेशा चलता रहेगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है और इसी वजह से कुछ फैसलों पर उनकी उम्मीद से पहले विचार करना पड़ रहा है।
मैट ब्रिटिन ने कहा कि दर्शकों का व्यवहार भी तेजी से बदल रहा है। अगर ज्यादातर लोग कंटेंट ऑन-डिमांड देख रहे हैं, तो बीबीसी को अपनी अलग-अलग सेवाओं की लागत और उनकी उपयोगिता पर विचार करना होगा।
‘हम अभी भी पुराने मॉडल में फंसे हुए हैं’
ब्रिटिन ने कहा कि बचत करते समय उनका मुख्य ध्यान दर्शकों पर पड़ने वाले असर को कम करने पर है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हो सकता है किसी चैनल के प्रसारण कार्यक्रम को करीब 1 लाख लोग टीवी पर देख रहे हों, जबकि उसी कार्यक्रम को 5 लाख लोग आईप्लेयर पर देख रहे हों। ऐसे में सवाल यह है कि उस सेवा को पूरी तरह ऑन-डिमांड करने का सही समय क्या है।
उन्होंने कहा कि उनकी जिम्मेदारी लाइसेंस फीस देने वाले लोगों के पैसे की सही कीमत सुनिश्चित करना भी है। ब्रिटिन के मुताबिक, बीबीसी को दर्शकों तक पहुंचने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाने होंगे। उन्होंने कहा कि लोग कंटेंट देखने के तरीके में आगे बढ़ चुके हैं, जबकि बीबीसी अभी भी पुराने मॉडल से जुड़ा हुआ है।
पिछले कुछ महीनों में बीबीसी ने कई नौकरियों और कार्यक्रमों को बंद करने की घोषणा की है। इनमें ‘ब्लैंकेटी ब्लैंक’, ‘सेलिब्रिटी मास्टरमाइंड’, ‘लाइव एट द अपोलो’ और ‘फुटबॉल फोकस’ शामिल हैं। आने वाले समय में और कटौती की उम्मीद है।
मैट ब्रिटिन ने मई में बीबीसी के महानिदेशक का पद संभाला था। इससे पहले वह करीब एक दशक तक यूरोप, मध्य पूर्व और अफ्रीका में गूगल के अध्यक्ष रहे थे।
AI को लेकर भी बोले ब्रिटिन
जब लॉरा कुइन्सबर्ग ने उनसे पूछा कि क्या वह AI से किसी कार्यक्रम को बनाने और प्रस्तुत करने की अनुमति देंगे, तो ब्रिटिन ने कहा कि वह कुछ तय नियमों और सीमाओं के तहत ऐसा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बीबीसी इस तकनीक के साथ प्रयोग करना और यह समझना चाहता है कि AI क्या कर सकता है और क्या नहीं। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह मानव रचनात्मकता में विश्वास करते हैं।
ब्रिटिन ने कहा कि बीबीसी के किसी भी काम को AI से पूरी तरह बदला नहीं जाना चाहिए। उनके मुताबिक, AI कई जगहों पर लाइसेंस फीस के पैसे का बेहतर इस्तेमाल करने, फैसले लेने और रचनात्मक काम में मदद कर सकता है, लेकिन यह इंसानों का विकल्प नहीं है।
छह बड़ी टेक कंपनियों के हाथ में जानकारी जाने का खतरा
ब्रिटिन ने भविष्य में कुछ बड़ी टेक कंपनियों के हाथ में जानकारी पर बहुत ज्यादा नियंत्रण होने के खतरे की भी बात कही।
उन्होंने कहा कि AI तेजी से आगे बढ़ रहा है और ऐसी स्थिति बन सकती है, जहां छह कंपनियां भविष्य में लोगों की जानकारी तक पहुंच और नई जानकारी व गलत जानकारी के निर्माण पर नियंत्रण कर लें। उन्होंने कहा कि इन छह कंपनियों में कोई भी यूरोप या ब्रिटेन की नहीं है।
ब्रिटिन ने कहा कि ऐसी स्थिति में बीबीसी की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि आधे अरब से ज्यादा लोग बीबीसी को भरोसेमंद संस्था मानते हैं।
बड़ी टेक कंपनियों पर भरोसे के सवाल पर उन्होंने कहा कि कई प्लेटफॉर्म मौजूद हैं और वह किसी भी प्लेटफॉर्म पर अपने आप भरोसा नहीं करेंगे। उनके मुताबिक, यह लगातार देखते रहना जरूरी है कि ये प्लेटफॉर्म कैसे काम करते हैं और बीबीसी का कंटेंट सही जगह पर पहुंच रहा है या नहीं।
उन्होंने कहा कि बीबीसी और उसकी ऐप्स व सेवाएं ‘एल्गोरिदम का विकल्प’ होनी चाहिए। उनके मुताबिक, बाकी जगहों पर कंटेंट अक्सर किसी न किसी व्यावसायिक हित से प्रभावित होता है।
अमेरिका की एक संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन को आदेश दिया है कि पिछले हफ्ते व्हाइट हाउस में प्रवेश पर रोक लगाए गए तीन मीडिया संस्थानों को तुरंत फिर से वहां पहुंच दी जाए।
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Samachar4media Bureau
अमेरिका की एक संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन को आदेश दिया है कि पिछले हफ्ते व्हाइट हाउस में प्रवेश पर रोक लगाए गए तीन मीडिया संस्थानों को तुरंत फिर से वहां पहुंच दी जाए।
जज के आदेश के मुताबिक CNN, MS NOW और Politico को 14 दिनों के लिए व्हाइट हाउस में प्रवेश की अनुमति बहाल करनी होगी। जज ने कहा कि इन मीडिया संस्थानों पर लगाया गया प्रतिबंध संभवत: उनके संवैधानिक अधिकारों और उचित कानूनी प्रक्रिया (Due Process) का उल्लंघन करता है।
तीनों मीडिया संस्थानों के कुछ पत्रकारों ने बताया कि गुरुवार सुबह उन्हें व्हाइट हाउस में प्रवेश करने से रोक दिया गया था। इसके बाद इन तीनों संस्थानों ने कानूनी कार्रवाई शुरू की थी। ट्रंप प्रशासन ने अदालत में इस कार्रवाई का बचाव करते हुए आरोप लगाया था कि इन मीडिया संस्थानों ने गलत जानकारी प्रकाशित की और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा किया।
जज टिमोथी केली ने अपने फैसले में कहा कि CNN, Politico और MS NOW इस बात को साबित करने में सफल होने की संभावना रखते हैं कि व्हाइट हाउस ने प्रतिबंध लागू करते समय उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। जज ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े ट्रंप प्रशासन के तर्कों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रतिबंध की शुरुआती घोषणा करते समय राष्ट्रीय सुरक्षा का कोई जिक्र नहीं किया था।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को प्रतिबंध की घोषणा करते हुए इन तीनों मीडिया संस्थानों पर उनके और उनकी टीम की कवरेज में 'फेक न्यूज', 'काल्पनिक बातें और झूठ' लिखने का आरोप लगाया था।
जज के आदेश में कहा गया कि रिकॉर्ड में ऐसा पर्याप्त तथ्यात्मक आधार नहीं है, जिससे यह साबित हो कि पत्रकारों के हार्ड पास रद्द करने से वास्तव में राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा होगी या मुकदमे के दौरान पास बहाल करने से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा होगा।
ट्रंप प्रशासन ने मंगलवार को अदालत में दाखिल अपने जवाब में इन मीडिया संस्थानों की प्रकाशित कई खबरों का हवाला दिया था। इनमें व्हाइट हाउस में निर्माण कार्य और नए बॉलरूम से जुड़ी खबरें भी शामिल थीं।
जज ने कहा कि ज्यादातर मामलों में जिन खबरों पर व्हाइट हाउस ने आपत्ति जताई, उन्हें ऐसे पत्रकारों ने लिखा था जिनके पास हार्ड पास थे ही नहीं। बाकी मामलों में भी ट्रंप प्रशासन यह साबित नहीं कर सका कि संबंधित पत्रकार के पास हार्ड पास होना उन खबरों के लिए जरूरी था।
ट्रंप प्रशासन ने अपने शुरुआती जवाब में रक्षा विभाग के अधिकारियों के बयान भी पेश किए थे। हालांकि, जज ने कहा कि इन अधिकारियों को इस बात की सीधी जानकारी नहीं थी कि व्हाइट हाउस में पत्रकार कैसे काम करते हैं या इस मामले से जुड़े तथ्यों की उन्हें प्रत्यक्ष जानकारी थी।
मीडिया संस्थानों की ओर से अदालत में पैरवी कर रहे वकील टेड बूट्रोस ने CNN से कहा कि यह फैसला प्रेस की स्वतंत्रता, उचित कानूनी प्रक्रिया और कानून के शासन के पक्ष में एक मजबूत फैसला है।
सोमवार को अमेरिका के कई बड़े टीवी नेटवर्क ने प्रतिबंध के विरोध में व्हाइट हाउस की पूल ड्यूटी से हटने का फैसला किया था। इस व्यवस्था के तहत कई मीडिया संस्थान राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की कवरेज से जुड़ी सामग्री आपस में साझा करते हैं, जिससे लागत और जगह दोनों की बचत होती है। इसके अलावा CBS News, The New York Times और Fox News समेत 49 मीडिया संस्थानों ने भी CNN, MS NOW और Politico की कानूनी याचिका के समर्थन में अदालत में अपनी दलीलें पेश की थीं।
ट्रंप अक्सर मीडिया संस्थानों की आलोचना करते रहे हैं। उनके प्रशासन ने The New York Times, The Wall Street Journal और BBC समेत कई मीडिया संस्थानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की है। इनमें से कुछ मामलों में मीडिया संस्थानों ने करोड़ों डॉलर के समझौते किए हैं। BBC के खिलाफ ट्रंप का मुकदमा अभी जारी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र (UN) में उनकी कवरेज कर रही CNN की एंकर कैटलिन कॉलिन्स को फटकार लगाई।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र (UN) में उनकी कवरेज कर रही CNN की एंकर कैटलिन कॉलिन्स को फटकार लगाई। ट्रंप ने यह टिप्पणी ऐसे समय की, जब वह पहले ही CNN समेत दो अन्य मीडिया संस्थानों को व्हाइट हाउस से प्रतिबंधित कर चुके हैं।
मंगलवार को कैटलिन कॉलिन्स ने ट्रंप से पूछा कि ईरान युद्ध कब खत्म होगा। उन्होंने एक सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि करीब दो-तिहाई अमेरिकी मानते हैं कि अमेरिका यह युद्ध नहीं जीत रहा है।
इस पर ट्रंप ने कहा, “यहां होना सम्मान की बात है। मुझे हैरानी है कि CNN यहां मेरी कवरेज कर रहा है।” इसके बाद उन्होंने कॉलिन्स से कहा, “आपको यहां मेरी कवरेज नहीं करनी चाहिए। आपने कहा था कि आप मेरी कवरेज नहीं करेंगी। आपको यहां नहीं होना चाहिए।”
कॉलिन्स ने ट्रंप को बताया कि संयुक्त राष्ट्र ने उनकी संस्था CNN को महासभा की कवरेज के लिए प्रवेश की अनुमति दी है। इस मामले पर द गार्जियन ने CNN से प्रतिक्रिया मांगी है।
पिछले हफ्ते ट्रंप ने CNN, Politico और MS Now को व्हाइट हाउस से प्रतिबंधित करने का ऐलान किया था। उन्होंने बिना कोई सबूत दिए इन मीडिया संस्थानों पर लगातार “झूठी और काल्पनिक खबरें” लिखने और रिपोर्ट करने का आरोप लगाया था। शनिवार को इन तीनों मीडिया संस्थानों के रिपोर्टरों और दूसरे कर्मचारियों को व्हाइट हाउस में प्रवेश नहीं दिया गया।
CNN ने शनिवार को कहा था कि वह सरकार और अन्य सार्वजनिक संस्थाओं को जवाबदेह ठहराने की अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेगा। नेटवर्क ने कहा कि वह बिना किसी डर या पक्षपात के ट्रंप प्रशासन के कामकाज और फैसलों की रिपोर्टिंग जारी रखेगा।
इसके बाद CNN, Politico और MS Now ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। इन संस्थानों ने प्रतिबंध हटाने और अपने रिपोर्टरों के उन हार्ड पास को बहाल करने की मांग की है, जिनसे उन्हें व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश मिलता है। इस मामले में एक संघीय जज के बुधवार को सुनवाई करने की उम्मीद है।
ट्रंप के इस कदम की दूसरे मीडिया संगठनों और प्रेस की स्वतंत्रता के समर्थन में काम करने वाले संगठनों ने आलोचना की है। उनका आरोप है कि अमेरिकी राष्ट्रपति स्वतंत्र प्रेस के अधिकार को सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं।
वहीं, ट्रंप ने अपने फैसले का बचाव किया है। उनका कहना है कि यह कदम “स्वतंत्र प्रेस पर हमला” नहीं है, बल्कि “राष्ट्रीय सुरक्षा” से जुड़े खतरों से निपटने के लिए उठाया गया है। ट्रंप ने हाल में व्हाइट हाउस में एक विजय स्मारक जैसे आर्च और एक बॉलरूम बनाने को लेकर भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से व्हाइट हाउस में प्रवेश पर रोक लगाए जाने के बाद CNN, MS NOW और Politico ने अमेरिकी संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से व्हाइट हाउस में प्रवेश पर रोक लगाए जाने के बाद CNN, MS NOW और Politico ने अमेरिकी संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया है। तीनों मीडिया संस्थानों ने सोमवार को यह कदम उठाया। उनका कहना है कि उनके पत्रकारों की मान्यता रद्द करने का फैसला उनके कवरेज पर आपत्ति के कारण लिया गया।
तीनों संस्थानों ने अदालत से इस रोक को तुरंत हटाने और अपने पत्रकारों की व्हाइट हाउस तक पहुंच बहाल करने की मांग की है। मामले की सुनवाई वॉशिंगटन डीसी की संघीय अदालत में होनी है। मौजूदा जानकारी के मुताबिक, पहली सुनवाई बुधवार को हो सकती है।
CNN, MS NOW और Politico ने संयुक्त बयान में कहा कि उनके पत्रकारों की मान्यता बिना किसी पूर्व सूचना या प्रक्रिया के रद्द की गई। उनका आरोप है कि सरकार ने उनकी रिपोर्टिंग से असहमति के कारण यह कदम उठाया। तीनों संस्थानों ने इसे अमेरिकी संविधान के फर्स्ट अमेंडमेंट में दी गई प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़ा मामला बताया है।
ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने इस आरोप को खारिज किया है कि यह प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि कार्रवाई ‘फेक न्यूज’ के खिलाफ है। ट्रंप का आरोप है कि इन मीडिया संस्थानों की खबरें गलत और पक्षपातपूर्ण हैं तथा उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जोड़ा है।
व्हाइट हाउस ने भी कहा है कि मामला मीडिया को खबरें करने से रोकने का नहीं, बल्कि व्हाइट हाउस के अंदर विशेष पहुंच देने का है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इसी तरह का तर्क दिया है।
पत्रकारों को प्रवेश नहीं मिला
ट्रंप की घोषणा के बाद शनिवार को तीनों संस्थानों के पत्रकारों को व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश नहीं दिया गया और उनके प्रेस पास भी ले लिए गए। CNN पर व्हाइट हाउस टीवी पूल की जिम्मेदारी भी नहीं रही।
दूसरे टीवी नेटवर्क भी हुए शामिल
CNN के अलावा ABC, CBS, NBC और Fox News ने भी सोमवार को राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की साझा टीवी कवरेज यानी टीवी पूल को रोक दिया। टीवी पूल में अलग-अलग नेटवर्क बारी-बारी से राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की कैमरा कवरेज करते हैं और उसका वीडियो दूसरे मीडिया संस्थानों को उपलब्ध कराते हैं।
CNN को सोमवार को राष्ट्रपति की न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान इस पूल की जिम्मेदारी संभालनी थी, लेकिन रोक के बाद बाकी नेटवर्कों ने भी उस कवरेज में हिस्सा नहीं लिया।
मामले की कानूनी पृष्ठभूमि
इस मामले में ‘व्यू पॉइंट डिस्क्रिमिनेशन’ यानी किसी संस्था के विचार या रिपोर्टिंग के आधार पर उसके साथ अलग व्यवहार किए जाने का मुद्दा उठाया गया है। CNN के वकील टेड बौट्रस ने इस मामले में फिर से पैरवी शुरू की है। वे इससे पहले 2018 में CNN के पत्रकार जिम एकोस्टा के व्हाइट हाउस प्रेस पास के मामले में भी जुड़े थे। मौजूदा केस की सुनवाई जज टिमोथी जे. केली कर रहे हैं, जिन्होंने 2018 में एकोस्टा का प्रेस पास बहाल करने का आदेश दिया था।
मामला अब अदालत में है और व्हाइट हाउस तथा तीनों मीडिया संस्थानों के दावों पर आगे सुनवाई होगी।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का भाषण फॉक्स न्यूज ने नॉर्थ कैरोलाइना में एक चुनावी रैली के दौरान बीच में ही रोक दिया।
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अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का भाषण फॉक्स न्यूज ने नॉर्थ कैरोलाइना में एक चुनावी रैली के दौरान बीच में ही रोक दिया। वेंस रिपब्लिकन पार्टी के सीनेट उम्मीदवार माइकल व्हाटली के समर्थन में रैली को संबोधित कर रहे थे।
यह रैली ग्रीन्सबोरो के कौरी कन्वेंशन सेंटर में हुई। वेंस नॉर्थ कैरोलाइना से अमेरिकी सीनेट के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार माइकल व्हाटली के समर्थन में पहुंचे थे। व्हाटली का मुकाबला डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार और नॉर्थ कैरोलाइना के पूर्व गवर्नर रॉय कूपर से है।
वेंस ने अपने भाषण में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों पर निशाना साधते हुए कहा, “डेमोक्रेटिक पार्टी कांग्रेस के लिए ऐसे उम्मीदवार उतार रही है, जिन्होंने...” इतना कहते ही फॉक्स न्यूज ने लाइव प्रसारण से उनका भाषण हटा दिया।
इसके बाद चैनल की एंकर ने कहा कि दर्शक मिडटर्म चुनाव से पहले बैटलग्राउंड राज्य नॉर्थ कैरोलाइना में उपराष्ट्रपति वेंस को मतदाताओं से बात करते हुए सुन रहे थे। उन्होंने कहा कि अगर वेंस कोई “न्यूज” बनाते हैं, तो चैनल इस रैली पर दोबारा लौटेगा।
वेंस ने मतदाताओं से मांगा ‘एक और मौका’
इससे कुछ समय पहले वेंस ने मिडटर्म चुनावों को देखते हुए मतदाताओं से रिपब्लिकन पार्टी को “एक और मौका” देने की अपील की थी। वेंस ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान काफी काम हुआ है, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। उन्होंने मतदाताओं से रिपब्लिकन पार्टी को कुछ और साल देने की अपील की।
वेंस ने डेमोक्रेटिक पार्टी पर भी कई आरोप लगाए और कहा कि दूसरा पक्ष “पागलपन” में डूबा हुआ है। उन्होंने अवैध प्रवासियों और अपराध को लेकर भी डेमोक्रेट्स पर निशाना साधा।
फॉक्स न्यूज के कदम पर सोशल मीडिया पर चर्चा
फॉक्स न्यूज के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर भी इसकी चर्चा हुई। कुछ यूजर्स ने वेंस के भाषण की आलोचना की, जबकि कुछ ने चैनल द्वारा लाइव प्रसारण रोकने पर प्रतिक्रिया दी। ये टिप्पणियां सोशल मीडिया यूजर्स की राय थीं, न कि फॉक्स न्यूज का आधिकारिक बयान।
व्हाटली के समर्थन में वेंस की रैली
वेंस ने रैली में माइकल व्हाटली के समर्थन में लोगों से वोट देने की अपील की। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी व्हाटली के समर्थन में प्रचार कर चुके हैं। नॉर्थ कैरोलाइना की सीनेट सीट के लिए व्हाटली और पूर्व गवर्नर रॉय कूपर के बीच मुकाबला है।
मिडटर्म चुनाव से पहले तेज हुआ प्रचार
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव नजदीक आने के साथ दोनों प्रमुख पार्टियों का चुनाव प्रचार तेज हो गया है। नॉर्थ कैरोलाइना की सीनेट सीट भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। वेंस और ट्रंप जैसे रिपब्लिकन नेता व्हाटली के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं।
फॉक्स न्यूज की ओर से वेंस के भाषण को बीच में रोकने का कारण एंकर ने प्रसारण के दौरान यह बताया कि अगर भाषण में कोई “न्यूज” बनती है, तो चैनल वापस रैली पर आएगा।
व्हाइट हाउस के मुताबिक, TRUMP TV पर प्रशासन के प्रमुख वीडियो, राष्ट्रपति के महत्वपूर्ण संबोधन, घोषणाएं और अन्य खास पलों के फुटेज एक ही जगह पर दिखाए जाएंगे।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ‘TRUMP TV: The Essentials Station’ नाम से 24/7 डिजिटल वीडियो स्ट्रीम लॉन्च की है। व्हाइट हाउस ने इसे 21 सितंबर 2026 को शुरू किया। यह स्ट्रीम व्हाइट हाउस की आधिकारिक वेबसाइट और यूट्यूब पर उपलब्ध है।
व्हाइट हाउस के मुताबिक, TRUMP TV पर प्रशासन के प्रमुख वीडियो, राष्ट्रपति के महत्वपूर्ण संबोधन, घोषणाएं और अन्य खास पलों के फुटेज एक ही जगह पर दिखाए जाएंगे। स्ट्रीम को 24 घंटे और रियल टाइम में अपडेट किया जाएगा। इसमें पहले के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और भाषणों के वीडियो भी शामिल किए जाएंगे।
TRUMP TV को फिलहाल पारंपरिक केबल या ब्रॉडकास्ट टीवी चैनल के बजाय डिजिटल स्ट्रीमिंग सेवा के तौर पर देखा जा रहा है। इसकी लाइव फीड व्हाइट हाउस के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर देखी जा सकती है।
Launched.
— The White House (@WhiteHouse) September 22, 2026
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