ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (BBC) के स्कॉटलैंड टीवी चैनल को बंद कर ऑनलाइन करने की योजना पर विवाद शुरू हो गया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (BBC) के स्कॉटलैंड टीवी चैनल को बंद कर ऑनलाइन करने की योजना पर विवाद शुरू हो गया है। स्कॉटलैंड की संस्कृति सचिव मैरी मैकएलन (Màiri McAllan) ने इस फैसले की समीक्षा करने के लिए ब्रिटेन के प्रसारण नियामक Ofcom से अपील की है। उन्होंने चैनल को बंद करने की योजना को पूरी तरह अस्वीकार्य बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया है।
BBC ने पिछले सप्ताह घोषणा की थी कि खर्च में कटौती की योजना के तहत BBC Scotland के पारंपरिक टीवी चैनल के साथ BBC Three और Radio 4 Extra को भी ऑनलाइन किया जाएगा। प्रसारक का लक्ष्य 2028 तक 50 करोड़ पाउंड की बचत करना है।
मैकएलन ने Ofcom के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मेलानी डॉव्स और स्कॉटलैंड के निदेशक ग्लेन प्रेस्टन को लिखे पत्र में कहा कि BBC Scotland के टीवी चैनल को बंद करने से ब्रिटेन के प्रसारण क्षेत्र में स्कॉटलैंड की पहचान और प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में हुई प्रगति पीछे जा सकती है।
उन्होंने कहा कि स्कॉटलैंड सरकार इस प्रस्ताव का कड़े शब्दों में विरोध करती है और Ofcom को इसके फैसले तथा दर्शकों पर पड़ने वाले असर की जांच करनी चाहिए।
ऑनलाइन होने से दर्शकों पर पड़ सकता है असर
मैकएलन ने माना कि दर्शकों की देखने की आदतों में बदलाव के साथ प्रसारकों को भी बदलना पड़ता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि सार्वजनिक सेवा प्रसारकों की खास जिम्मेदारी है कि उनकी सेवाएं सभी दर्शकों के लिए उपलब्ध और प्रासंगिक बनी रहें।
उनके मुताबिक, कई दर्शक अब भी पारंपरिक टीवी चैनलों पर निर्भर हैं। ऐसे में कार्यक्रमों को केवल ऑनलाइन उपलब्ध कराने से उन लोगों पर ज्यादा असर पड़ सकता है, जिनके लिए इंटरनेट के जरिए सामग्री देखना आसान नहीं है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि BBC Scotland के पारंपरिक चैनल को बंद करने की योजना ब्रिटेन में लंदन से बाहर के क्षेत्रों तक अधिकार और फैसले पहुंचाने के उद्देश्य के साथ कैसे मेल खाएगी, जबकि इस सेवा के लिए दर्शक लाइसेंस शुल्क भी देते हैं।
‘News at Seven’ बंद करने पर भी आपत्ति
स्कॉटलैंड की संस्कृति सचिव ने BBC के रात के समाचार कार्यक्रम ‘News at Seven’ को बंद करने की योजना पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे स्कॉटलैंड से जुड़ी अहम पत्रकारिता में अस्वीकार्य कटौती बताया।
इस कार्यक्रम के बंद होने से करीब 10 पदों में कटौती होने की आशंका है। यह उन 60 पदों के अलावा होगी, जिनमें कटौती की घोषणा BBC Scotland ने इस साल की शुरुआत में की थी।
मैकएलन ने स्थानीय भाषाओं में प्रसारण के बीच असमानता का मुद्दा भी उठाया। इसके अलावा, उन्होंने BBC One Scotland पर राष्ट्रमंडल खेलों के कवरेज पूरी तरह न होने पर भी सवाल किया।
BBC ने क्या कहा?
BBC के मुताबिक, उसके कई ऐसे कार्यक्रम, जो फिलहाल BBC Scotland के पारंपरिक टीवी चैनल पर दिखाए जाते हैं, आगे ऑनलाइन या स्कॉटलैंड में BBC One और BBC Two पर उपलब्ध होंगे।
इन कार्यक्रमों में ‘Scotland's Home of the Year’, ‘Murder Case’, ‘Inside Barlinnie’, ‘Scottish Cup Final’ और ‘Hogmanay’ शामिल हैं।
हालांकि, मौजूदा योजना के तहत BBC One पर प्रसारित होने वाले स्कॉटलैंड के मुख्य समाचार कार्यक्रम ‘Reporting Scotland’ में बदलाव नहीं किया जाएगा। BBC की रेडियो और ऑनलाइन सेवाओं में भी इस घोषणा के तहत बदलाव की बात नहीं कही गई है।
BBC Scotland की निदेशक हेले वैलेंटाइन ने घोषणा के बाद संकेत दिया था कि आगे और कटौती हो सकती है।
BBC में 2,000 तक नौकरियां घटाने की योजना
BBC ने अगले दो वर्षों में 50 करोड़ पाउंड की बचत करने के लिए 1,800 से 2,000 नौकरियां घटाने की योजना पहले ही घोषित की थी। यह संख्या उसके कुल कर्मचारियों के लगभग दसवें हिस्से के बराबर है।
जून में कटौती के पहले चरण के तहत समाचार, क्षेत्रीय सेवाओं और टीवी-रेडियो सामग्री से जुड़े विभागों में 550 पद खत्म करने की घोषणा की गई थी।
हाल के महीनों में BBC ने ‘Blankety Blank’, ‘Celebrity Mastermind’, ‘Live At The Apollo’ और ‘Football Focus’ जैसे कार्यक्रमों को बंद करने की भी घोषणा की है। रेडियो कार्यक्रमों में कटौती के फैसले भी सामने आए हैं।
BBC में करीब 21,500 पूर्णकालिक कर्मचारी हैं। उसकी आय का बड़ा हिस्सा टीवी लाइसेंस शुल्क से आता है, लेकिन हाल के वर्षों में बेचे जाने वाले टीवी लाइसेंस की संख्या में गिरावट आई है।
Ofcom ने क्या कहा?
Ofcom के प्रवक्ता ने कहा कि किसी सेवा को बंद करने का फैसला BBC बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में आता है। हालांकि, नियामक की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि BBC अपने उद्देश्य और सार्वजनिक सेवा से जुड़ी जिम्मेदारियों को पूरा करे।
प्रवक्ता के मुताबिक, Ofcom प्रस्तावित बदलावों के बाद ब्रिटेन के अलग-अलग हिस्सों के दर्शकों की जरूरतें पूरी करने की BBC की योजना को समझने के लिए उससे बातचीत करेगा। इसके बाद वह संबंधित कैबिनेट सचिव को जवाब देगा।
BBC एक सार्वजनिक सेवा प्रसारक है। उसका घोषित उद्देश्य निष्पक्ष, उच्च गुणवत्ता वाली और अलग पहचान रखने वाली सामग्री के जरिए सभी दर्शकों को जानकारी देना, शिक्षित करना और उनका मनोरंजन करना है। अब BBC Scotland चैनल को ऑनलाइन करने की योजना पर अंतिम स्थिति और Ofcom की समीक्षा पर आगे की नजर रहेगी।
नॉर्वे के प्रमुख मीडिया संस्थानों ने फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा के नए यूजर नियमों को लागू होने से रोकने के लिए कानूनी कदम उठाया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
नॉर्वे के प्रमुख मीडिया संस्थानों ने फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा के नए यूजर नियमों को लागू होने से रोकने के लिए कानूनी कदम उठाया है। मीडिया संस्थानों का कहना है कि इन नियमों से उनके समाचार लेखों, तस्वीरों और वीडियो पर अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्हें यह भी आशंका है कि मेटा उनके कंटेंट का इस्तेमाल अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उत्पादों को विकसित करने के लिए कर सकती है।
मीडिया संस्थानों के मुताबिक, मेटा के नए नियम 20 नवंबर से लागू होने वाले हैं। इन नियमों के तहत कंपनी को मीडिया संस्थानों के लेख, फोटो और वीडियो जुटाने और उनका इस्तेमाल करने का अधिकार मिल सकता है। इसमें पेवॉल के पीछे मौजूद सामग्री भी शामिल है, यानी ऐसा कंटेंट जिसे पढ़ने या देखने के लिए पाठकों को पैसे देने पड़ते हैं।
10 मीडिया संस्थानों ने मिलकर उठाया कदम
इस मामले में नॉर्वे के 10 मीडिया संगठनों ने कानूनी कार्रवाई की है। इनमें सार्वजनिक प्रसारक एनआरके (NRK), मीडिया समूह शिब्स्टेड (Schibsted), अमीडिया (Amedia), पोलारिस (Polaris) और एलर (Aller) के साथ नॉर्वे की समाचार एजेंसी एनटीबी (NTB) भी शामिल हैं।
नॉर्वेजियन मीडिया बिजनेस एसोसिएशन (MBL) की प्रमुख लेने एल्टविक विंडफेल्ड ने कहा कि मीडिया संस्थानों को डर है कि कंपनी अपने नए नियमों के जरिए पत्रकारिता से जुड़ी सामग्री पर अधिकार हासिल करने की कोशिश कर सकती है।
उनके मुताबिक, मीडिया संस्थान अपने पत्रकारों, रिपोर्टरों और दूसरे संसाधनों पर निवेश करके खबरें और दूसरी सामग्री तैयार करते हैं। यदि मेटा इसी सामग्री का इस्तेमाल अपने एआई उत्पादों को विकसित करने में करती है, तो वह ऐसे उत्पाद बना सकती है जो उन्हीं मीडिया संस्थानों की सेवाओं से सीधे मुकाबला करें।
उन्होंने इसे प्रतिस्पर्धा के लिहाज से अनुचित बताया।
नियम नहीं मानने पर अकाउंट हटाने का विकल्प?
मीडिया संस्थानों का कहना है कि मेटा के नए नियम सभी पेशेवर अकाउंट चलाने वालों पर लागू होंगे। इनमें मीडिया संस्थानों के अलावा कंपनियां और खुदरा कारोबार करने वाले व्यवसाय भी शामिल हैं।
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, इन नियमों पर आपत्ति जताने का उनके पास कोई प्रभावी विकल्प नहीं बचेगा। उनके अनुसार, नियमों को स्वीकार नहीं करने की स्थिति में अकाउंट हटाना ही एकमात्र विकल्प रह सकता है।
इसी वजह से मीडिया संगठनों ने ओस्लो जिला अदालत में अंतरिम रोक लगाने की मांग की है। वे चाहते हैं कि मामले के गुण-दोष पर अंतिम फैसला आने तक नए नियम लागू न किए जाएं।
मेटा ने क्या कहा?
समाचार एजेंसी एएफपी (AFP) के सवालों के जवाब में मेटा ने कहा कि उसने नए यूजर नियमों को लागू करने की तारीख बढ़ाकर 20 नवंबर कर दी है।
कंपनी के मुताबिक, इस देरी का उद्देश्य अपने साझेदारों और अन्य संबंधित पक्षों को यह समझाने के लिए अतिरिक्त समय देना है कि नए नियमों में क्या बदलाव हो रहे हैं और क्या नहीं बदल रहा है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मेटा ने इस विवाद पर अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है।
पहले भी मेटा को मुकदमे की चेतावनी दे चुके हैं मीडिया संस्थान
यह पहली बार नहीं है, जब नॉर्वे के मीडिया संगठनों ने मेटा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही है। 14 अक्टूबर को एमबीएल और एनआरके ने कंपनी को मुकदमा करने की चेतावनी दी थी।
उस समय मीडिया संस्थानों ने आरोप लगाया था कि मेटा ऐसे भ्रामक विज्ञापनों से कमाई कर रही है, जिनमें उनके नाम और पहचान का इस्तेमाल करके इंटरनेट यूजर्स को धोखा दिया जा रहा है।
ताजा विवाद पत्रकारिता सामग्री के इस्तेमाल और एआई उत्पादों के विकास में मीडिया संस्थानों के कंटेंट की भूमिका को लेकर है। अब इस मामले में अदालत का फैसला यह तय करने में अहम हो सकता है कि नए नियमों को लागू करने की मेटा की योजना पर क्या असर पड़ेगा।
गौरतलब है कि फिलहाल मीडिया संस्थानों ने नए नियमों को लागू होने से रोकने के लिए कानूनी कदम उठाया है। उपलब्ध जानकारी में अदालत की ओर से नियमों पर रोक लगाए जाने का कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।
तुर्किये में मीडिया पर बढ़ते दबाव के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। शनिवार को इस्तांबुल और अंकारा में हुए प्रदर्शनों में पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं ने हिस्सा लिया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
तुर्किये में स्वतंत्र मीडिया पर बढ़ते दबाव के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। शनिवार को इस्तांबुल और अंकारा में हुए प्रदर्शनों में पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने पत्रकारों की गिरफ्तारी, खबरों पर सेंसरशिप और मीडिया संस्थानों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ने का विरोध किया। साथ ही, जेल में बंद पत्रकारों को रिहा करने और प्रेस की आजादी सुनिश्चित करने की मांग की।
समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, अंकारा में पुलिस ने प्रदर्शन में करीब 3,000 लोगों के शामिल होने का अनुमान लगाया। यहां प्रदर्शनकारियों ने ‘बस बहुत हुआ’ और ‘अब हमारा दम घुट रहा है’ जैसे नारे लगाए। वहीं, इस्तांबुल में प्रदर्शनकारियों ने जेल में बंद पत्रकारों की तस्वीरें दिखाईं और कहा कि वे दबाव के आगे नहीं झुकेंगे।
दो महीने में 11 पत्रकार जेल में बंद
तुर्किये में मीडिया की आजादी को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। तुर्किश जर्नलिस्ट्स यूनियन के मुताबिक, पिछले दो महीनों में अधिकारियों ने 11 पत्रकारों को जेल में डाल दिया है। इसके अलावा, कई मीडिया संस्थानों को भी बंद किया गया है।
इस महीने की शुरुआत में पुलिस ने तुर्किये के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले न्यूज चैनलों में शामिल हॉक टीवी (Halk TV) के कार्यालय पर छापा मारा था। चैनल का प्रसारण रोक दिया गया और वहां सरकार की ओर से नियुक्त प्रशासक बैठा दिया गया।
इसके अलावा, डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म टी24 (T24) की वेबसाइट और सोशल मीडिया अकाउंट भी बंद कर दिए गए। अधिकारियों ने इसके लिए ‘एलजीबीटी प्रचार’ से जुड़ी सामग्री का हवाला दिया।
ये कदम उन मीडिया संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई के तौर पर देखे जा रहे हैं, जिन्हें राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन और उनकी सरकार का आलोचक माना जाता है।
‘पत्रकारों के साथ जनता के सूचना पाने के अधिकार की भी लड़ाई’
इस्तांबुल में हुए प्रदर्शन के बाद वरिष्ठ पत्रकार जफर अरापकिरली ने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ पत्रकारों की आजादी के लिए नहीं, बल्कि आम लोगों के सूचना पाने के अधिकार की रक्षा के लिए भी है।
एएफपी से बातचीत में उन्होंने कहा कि पत्रकारों की गिरफ्तारी, मीडिया संस्थानों पर कब्जा, खबरों पर रोक और सोशल मीडिया तक पहुंच बाधित करने जैसे कदमों से लोगों को डराने और उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।
अरापकिरली ने कहा कि समाज को यह दिखाना जरूरी है कि वह इस तरह के दबाव को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि उनके खिलाफ खुद कई मुकदमे चल रहे हैं।
तुर्किश जर्नलिस्ट्स यूनियन के अध्यक्ष गोकहान दुरमुस ने कहा कि हाल के दिनों में बड़े प्रसारण संस्थानों और लोकप्रिय न्यूज प्लेटफॉर्म को निशाना बनाया जा रहा है। उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति बन रही है, जहां खबरों के लिए एक ही आवाज और एक ही स्रोत रह जाए।
जेल में बंद पत्रकार का संदेश भी पढ़ा गया
अंकारा में प्रदर्शन के दौरान बंद किए गए न्यूज प्लेटफॉर्म टी24 के पत्रकार गोकसेर ताहिनजियोग्लू ने कहा कि यह आंदोलन पत्रकारों के अधिकारों के साथ-साथ आम जनता के सूचना पाने के अधिकार की रक्षा के लिए भी है।
प्रदर्शन में जेल में बंद अखबार बिरगुन (BirGün) के पत्रकार इस्माइल अरी का पत्र भी पढ़ा गया। अरी को इस महीने सात महीनों के भीतर दूसरी बार गिरफ्तार किया गया था।
जेल से भेजे गए अपने पत्र में उन्होंने कहा कि उन्हें सिर्फ पत्रकारिता करने की वजह से जेल में रखा गया है। उन्होंने अधिकारियों से पत्रकारों के काम में दखल नहीं देने, संविधान का पालन करने और उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने देने की मांग की।
अरी पर एक सरकारी अधिकारी का अपमान करने और भ्रामक जानकारी सार्वजनिक रूप से फैलाने के आरोप हैं। उनके खिलाफ शिकायत तुर्किये के प्रसारण नियामक प्रमुख एबुबेकिर शाहिन ने की थी।
2016 के बाद से बढ़ीं मीडिया पर पाबंदियां
तुर्किये में 2016 में तख्तापलट की नाकाम कोशिश के बाद से पत्रकारिता पर पाबंदियों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। पत्रकारों को मुकदमों, गिरफ्तारियों और डिजिटल सेंसरशिप का सामना करना पड़ा है। वहीं, सरकार मीडिया प्रोफेशनल पर फर्जी खबरें फैलाने के आरोप भी लगाती रही है।
हालांकि, तुर्किये की सरकार बार-बार इन आरोपों से इनकार करती रही है कि पत्रकारों को सिर्फ अपना काम करने के कारण गिरफ्तार या जेल में बंद किया जाता है।
इस्तांबुल और अंकारा में हुए ताजा प्रदर्शनों ने एक बार फिर देश में स्वतंत्र पत्रकारिता, मीडिया की आजादी और जनता के सूचना पाने के अधिकार को लेकर बहस तेज कर दी है।
फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा को डेटा प्राइवेसी से जुड़े मामले में बड़ा झटका लगा है। अमेरिका के न्यू मैक्सिको राज्य की एक अदालत ने कंपनी पर 25 अरब डॉलर का जुर्माना लगाने का आदेश दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा को डेटा प्राइवेसी से जुड़े मामले में बड़ा झटका लगा है। अमेरिका के न्यू मैक्सिको राज्य की एक अदालत ने कंपनी पर 25 अरब डॉलर का जुर्माना लगाने का आदेश दिया है। अदालत ने माना कि मेटा ने यूजर्स को उनकी निजी जानकारी की सुरक्षा और दूसरे मामलों को लेकर गुमराह किया था। हालांकि, कंपनी ने इस फैसले को चुनौती देने की बात कही है।
न्यू मैक्सिको के जज फ्रांसिस मैथ्यू ने बुधवार को यह आदेश दिया। इससे तीन सप्ताह से कुछ अधिक समय पहले जूरी ने पाया था कि मेटा ने डेटा प्राइवेसी, नफरत फैलाने वाली सामग्री और अन्य मुद्दों पर 26 भ्रामक बयान दिए थे। जूरी के मुताबिक, इन बयानों की पहुंच लाखों लोगों तक हो सकती थी और इनके चलते राज्य के उपभोक्ता संरक्षण कानून का 4.3 करोड़ से अधिक बार उल्लंघन हुआ।
219 अरब डॉलर से ज्यादा हो सकता था जुर्माना
जज ने कहा कि राज्य के कानून के तहत मेटा पर 219 अरब डॉलर से अधिक का जुर्माना लगाया जा सकता था, लेकिन उन्होंने इसे घटाकर 25 अरब डॉलर कर दिया। इसके बावजूद यह रकम अमेरिका में किसी कंपनी पर लगाए गए सबसे बड़े आर्थिक दंडों में से एक मानी जा रही है।
यह फैसला मेटा के लिए आर्थिक नुकसान के साथ उसकी छवि के लिहाज से भी बड़ा झटका है। कंपनी का कारोबार काफी हद तक यूजर्स के डेटा के इस्तेमाल और उसी के आधार पर उन्हें उनकी पसंद के मुताबिक विज्ञापन दिखाने पर निर्भर करता है।
फैसले को चुनौती देगी मेटा
मेटा ने इस फैसले को स्वीकार करने के बजाय इसके खिलाफ अपील करने की बात कही है। कंपनी का कहना है कि उसे भरोसा है कि अपील में वह इस फैसले को पलटने में सफल होगी।
मेटा के मुख्य कानूनी अधिकारी सी.जे. महोनी ने कहा कि इस फैसले और राज्य के अटॉर्नी जनरल के रवैये के कारण न्यू मैक्सिको में कारोबार करना लगभग असंभव हो जाएगा। उनका आरोप है कि इस मुकदमे के जरिए ऑनलाइन मंचों पर लोगों की बातचीत को नियंत्रित करने वाले नए नियम लागू करने की कोशिश की गई है।
महोनी ने कहा कि कंपनी ऐसा मंच बनाने के लिए काम करती रहेगी, जहां लोग सुरक्षित तरीके से अपनी बात रख सकें। उनके मुताबिक, मेटा लाखों अमेरिकी लोगों को आपस में जोड़ने, छोटे कारोबारों की मदद करने और अमेरिका की प्रतिस्पर्धी क्षमता को मजबूत करने में भी भूमिका निभाती है।
दूसरी ओर, न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेज ने इस जुर्माने को अमेरिका के कॉरपोरेट इतिहास में किसी कंपनी पर लगाए गए सबसे बड़े आर्थिक दंडों में से एक बताया।
कैम्ब्रिज एनालिटिका मामले के बाद शुरू हुआ था विवाद
मेटा के खिलाफ यह मुकदमा साल 2021 में दायर किया गया था। इसकी पृष्ठभूमि में कैम्ब्रिज एनालिटिका से जुड़ा मामला था। यह ब्रिटेन की एक राजनीतिक सलाहकार कंपनी थी, जिसने एक थर्ड-पार्टी ऐप के जरिए करीब 8.7 करोड़ फेसबुक यूजर्स का निजी डेटा उनकी सहमति के बिना हासिल किया था।
इस डेटा का इस्तेमाल मतदाताओं की पसंद और व्यवहार का आकलन करने तथा उन्हें निशाना बनाकर राजनीतिक संदेश पहुंचाने के लिए किया गया था। इस खुलासे के बाद फेसबुक की डेटा सुरक्षा व्यवस्था पर दुनियाभर में सवाल उठे थे।
न्यू मैक्सिको प्रशासन का आरोप था कि मेटा को पता था कि बाहरी पक्षों को यूजर्स की निजी जानकारी तक व्यापक पहुंच मिल रही है, फिर भी कंपनी ने लोगों को यह नहीं बताया कि उनके डेटा का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है। राज्य ने यह आरोप भी लगाया कि कंपनी ने अपने कारोबार को फायदा पहुंचने की स्थिति में नफरत फैलाने वाली सामग्री और गलत जानकारी को लेकर पर्याप्त सख्ती नहीं दिखाई।
हालांकि, मेटा ने इन आरोपों से इनकार किया। कंपनी ने अदालत में कहा कि वह यूजर्स का डेटा बेचती नहीं है और राज्य यह साबित करने में नाकाम रहा कि उपभोक्ताओं को वास्तव में गुमराह किया गया था। मेटा ने जुर्माने की सीमा 3.45 अरब डॉलर तय करने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इससे कहीं अधिक रकम का आदेश दिया।
पहले भी लग चुका है 5 अरब डॉलर का जुर्माना
कैम्ब्रिज एनालिटिका विवाद के बाद मेटा पर पहले भी बड़ी कार्रवाई हो चुकी है। साल 2019 में अमेरिका के संघीय व्यापार आयोग ने कंपनी पर 5 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया था। यह कार्रवाई फेसबुक यूजर्स के निजी डेटा के इस्तेमाल से जुड़े मामले में की गई थी।
न्यू मैक्सिको का मौजूदा फैसला एक बार फिर इस बात पर ध्यान खींचता है कि सोशल मीडिया कंपनियों को यूजर्स की निजी जानकारी सुरक्षित रखने और उसके इस्तेमाल में कितनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी कानूनी मुश्किलें
मेटा को सिर्फ डेटा प्राइवेसी के मामले में ही कानूनी चुनौतियों का सामना नहीं करना पड़ रहा है। कंपनी के सोशल मीडिया मंचों पर बच्चों और किशोरों की सुरक्षा को लेकर भी कई मामले चल रहे हैं।
इस साल की शुरुआत में न्यू मैक्सिको में दो मुकदमों के बाद मेटा पर कुल 94.2 करोड़ डॉलर का आर्थिक दंड लगाया गया था। इन मामलों में आरोप था कि कंपनी के मंचों के जरिए युवाओं के यौन शोषण को बढ़ावा मिला और मेटा ने अपने मंचों की सुरक्षा को लेकर उपभोक्ताओं को गुमराह किया।
इसके अलावा, इंस्टाग्राम और फेसबुक के किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर को लेकर भी कंपनी को हजारों मुकदमों और अमेरिकी सांसदों की जांच का सामना करना पड़ रहा है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, इस सिलसिले में एक और मुकदमा अगले सप्ताह शुरू होने वाला था।
अगस्त में छह अन्य अमेरिकी राज्यों ने भी मेटा के साथ एक समझौता किया था। इसके तहत किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर कंपनी के मंचों के कथित नुकसान से जुड़े दावों को निपटाने के लिए कुल 45.92 करोड़ डॉलर का भुगतान तय किया गया था।
अपील के बाद तय होगा जुर्माने का भविष्य
मेटा पर लगाया गया 25 अरब डॉलर का जुर्माना अंतिम फैसला साबित होगा या नहीं, यह अपील की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। अपील के दौरान इस रकम में बदलाव हो सकता है या फैसला पलटा भी जा सकता है।
फिलहाल, यह मामला सोशल मीडिया कंपनियों के लिए एक अहम चेतावनी है। यूजर्स का डेटा किस तरह जुटाया जाता है, उसका इस्तेमाल कैसे होता है, मंचों पर हानिकारक सामग्री को कैसे रोका जाता है और बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं- इन सभी मुद्दों पर कंपनियों की जवाबदेही बढ़ रही है। मेटा के लिए अब अगली चुनौती अदालत में इस फैसले को चुनौती देना और अपनी डेटा सुरक्षा व्यवस्था का बचाव करना है।
अमेरिकी न्यूज नेटवर्क CNN की पत्रकार बियाना गोलोड्रिगा (Bianna Golodryga) ने नौ साल बाद नेटवर्क छोड़ने का फैसला किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अमेरिकी न्यूज नेटवर्क CNN की पत्रकार बियाना गोलोड्रिगा (Bianna Golodryga) ने नौ साल बाद नेटवर्क छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि वह एक ऐसे नए अवसर की ओर बढ़ रही हैं, जिसे वह छोड़ना नहीं चाहती थीं। हालांकि, उन्होंने अपने अगले कदम के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी है।
गोलोड्रिगा ने CNN में अपने सफर के दौरान साथ काम करने वाले सहकर्मियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्हें सहकर्मियों का समर्थन मिला और कई अच्छी दोस्ती भी हुईं। उन्होंने यह भी कहा कि वह जल्द ही अपने अगले कदम के बारे में जानकारी साझा करेंगी।
गोलोड्रिगा CNN International पर जैन आशेर (Zain Asher) के साथ ‘वन वर्ल्ड’ (One World) शो की सह-एंकरिंग करती रही हैं। इससे पहले वह नेटवर्क में ग्लोबल अफेयर्स एनालिस्ट की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं। शो में उनका आखिरी दिन शुक्रवार होगा।
उनका यह फैसला ऐसे समय आया है, जब CNN ने कुछ दिन पहले ही घोषणा की थी कि क्रिस्टियाने अमनपोर (Christiane Amanpour) अपने रोजाना प्रसारित होने वाले CNN International शो की जिम्मेदारियां धीरे-धीरे कम करेंगी और अगले साल नेटवर्क छोड़ देंगी।
CNN में पूर्णकालिक रूप से जुड़ने से पहले, गोलोड्रिगा ‘CBS This Morning’ की सह-होस्ट रह चुकी हैं। साल 2019 में CNN से पूर्णकालिक रूप से जुड़ने से पहले वह CBS News और CNN, दोनों के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर रही थीं।
दुनिया के बड़े उद्योगपतियों में शामिल एलन मस्क ने मीडिया कंपनी स्काईडांस (Skydance) में करीब एक बिलियन डॉलर का निवेश किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दुनिया के बड़े उद्योगपतियों में शामिल एलन मस्क ने मीडिया कंपनी स्काईडांस (Skydance) में करीब एक बिलियन डॉलर (एक अरब डॉलर) का निवेश किया है। CNBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने यह जानकारी दी है। हालांकि, मस्क और स्काईडांस की ओर से इस निवेश की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
रॉयटर्स ने इस मामले पर मस्क और स्काईडांस के प्रतिनिधियों से प्रतिक्रिया मांगी, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला था। ऐसे में फिलहाल इस निवेश की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
यह खबर ऐसे समय आई है, जब कुछ सप्ताह पहले ही पैरामाउंट स्काईडांस (Paramount Skydance) ने वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी (Warner Bros. Discovery) का 110 अरब डॉलर का अधिग्रहण पूरा किया था। इस सौदे के बाद संयुक्त कंपनी ने स्काईडांस नाम अपनाया। इस विलय से पैरामाउंट पिक्चर्स, वार्नर ब्रदर्स, HBO, CNN और CBS जैसे बड़े मीडिया ब्रैंड्स के साथ उनके स्ट्रीमिंग कारोबार भी एक समूह के अंतर्गत आ गए हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मस्क का यह निवेश स्काईडांस की इक्विटी निवेश जुटाने की बड़ी योजना का हिस्सा है। इससे पहले सेमाफोर (Semafor) ने भी इस बारे में खबर दी थी। इक्विटी निवेश का मतलब है कि कंपनी में हिस्सेदारी के बदले पैसा लगाया जाता है।
लैरी एलिसन परिवार से पुराने संबंध
मस्क का स्काईडांस में कथित निवेश ओरेकल (Oracle) के सह-संस्थापक लैरी एलिसन के परिवार के साथ उनके पुराने संबंधों को भी दिखाता है। लैरी एलिसन के बेटे डेविड एलिसन स्काईडांस का नेतृत्व करते हैं।
साल 2022 में लैरी एलिसन ने ट्विटर के अधिग्रहण के लिए मस्क को 1 अरब डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई थी। ट्विटर का नाम अब X है। ऐसे में स्काईडांस में मस्क के कथित निवेश को दोनों परिवारों के कारोबारी संबंधों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
SpaceX के बड़े निवेश की भी हुई थी चर्चा
इस खबर से पहले मीडिया क्षेत्र के अनुभवी निवेशक जॉन मेलोन ने भी स्काईडांस में संभावित बड़े निवेश को लेकर चर्चा की थी। उन्होंने अनुमान जताया था कि मस्क की अंतरिक्ष कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) भविष्य में स्काईडांस में 8 अरब से 10 अरब डॉलर तक का निवेश कर सकती है। इसके साथ ही दोनों कंपनियों के बीच कंटेंट से जुड़ी बड़ी साझेदारी की संभावना भी जताई गई थी।
हालांकि, स्पेसएक्स के संभावित निवेश और ऐसी किसी साझेदारी की अभी पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल एक संभावना और अनुमान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
टेक्नोलॉजी आधारित मीडिया कंपनी बनने की तैयारी
वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के अधिग्रहण के बाद स्काईडांस खुद को टेक्नोलॉजी पर ज्यादा ध्यान देने वाली मीडिया कंपनी के रूप में आगे बढ़ा रही है। कंपनी लागत घटाने और कारोबार के लिए नई इक्विटी पूंजी जुटाने की दिशा में भी काम कर रही है।
मीडिया उद्योग के लिए मस्क का कथित निवेश इसलिए अहम है, क्योंकि इससे भविष्य में कंटेंट के वितरण, टेक्नोलॉजी और X जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच कारोबारी अवसर पैदा हो सकते हैं। हालांकि, फिलहाल इक्विटी निवेश की खबर के अलावा ऐसी किसी अतिरिक्त साझेदारी या समझौते की पुष्टि नहीं हुई है।
Meta Platforms आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बढ़ते खर्च के बीच पूंजी जुटाने, कर्मचारियों को शेयर देने और दूसरी कंपनियों के अधिग्रहण के लिए नए तरह के शेयर लाने जा रही है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी Meta Platforms आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बढ़ते खर्च के बीच पूंजी जुटाने, कर्मचारियों को शेयर देने और दूसरी कंपनियों के अधिग्रहण के लिए नए तरह के शेयर लाने जा रही है। कंपनी ने बिना मतदान अधिकार वाले Class C कॉमन शेयर बनाने की योजना को मंजूरी दे दी है। यह व्यवस्था 19 जनवरी, 2027 से प्रभावी होने वाली है।
Meta के मुताबिक, हर मौजूदा Class A और Class B शेयर के बदले एक नया Class C शेयर लाभांश के रूप में दिया जाएगा। हालांकि, इन नए शेयरों के साथ मतदान का अधिकार नहीं मिलेगा। कंपनी का कहना है कि इस व्यवस्था से उसे कारोबार बढ़ाने और AI में निवेश के लिए पूंजी जुटाने के नए विकल्प मिलेंगे, जबकि कंपनी में CEO मार्क जुकरबर्ग का मतदान नियंत्रण भी बना रहेगा।
कंपनी ने यह कदम अक्टूबर 2026 में Zuckerberg के साथ हुए Founder Alignment Agreement के तहत उठाया है। इस समझौते में नए Class C शेयरों की बिक्री से जुड़ी शर्तें तय की गई हैं।
नए शेयरों का इस्तेमाल कहां होगा?
Meta ने अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) में दाखिल जानकारी में बताया है कि नए Class C शेयरों का इस्तेमाल पूंजी जुटाने, कर्मचारियों को मुआवजे के तौर पर शेयर देने, दूसरी कंपनियों का अधिग्रहण करने और अन्य कारोबारी जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जा सकेगा।
कंपनी के लिए यह व्यवस्था इसलिए अहम है, क्योंकि AI से जुड़े बुनियादी ढांचे और तकनीक पर उसका खर्च लगातार बढ़ रहा है। नए शेयरों के जरिए Meta कर्मचारियों को शेयर देने और अधिग्रहण जैसे काम कर सकेगी। साथ ही, इन शेयरों से नए मतदान अधिकार पैदा नहीं होंगे।
Meta के मौजूदा Class A शेयर Nasdaq पर पहले की तरह कारोबार के लिए उपलब्ध रहेंगे। नए Class C शेयर जारी होने के बाद Nasdaq पर सूचीबद्ध होने के योग्य होंगे।
मार्क जुकरबर्ग के पास कितना नियंत्रण है?
फिलहाल मार्क जुकरबर्ग के पास Meta की करीब 13.4% हिस्सेदारी है, लेकिन कंपनी में उनके मतदान अधिकार लगभग 60.6% हैं। इसकी प्रमुख वजह यह है कि उनके पास मुख्य रूप से Class B शेयर हैं, जिनमें सामान्य Class A शेयरों के मुकाबले अधिक मतदान अधिकार होते हैं।
नए Class C शेयरों में मतदान का अधिकार नहीं होगा। ऐसे में इन्हें जारी करने से अपने-आप Zuckerberg के मतदान अधिकारों में बढ़ोतरी नहीं होगी। कंपनी की योजना है कि नए शेयरों का इस्तेमाल पूंजी जुटाने और कारोबार बढ़ाने के लिए किया जाए, लेकिन इससे Zuckerberg का बहुमत नियंत्रण प्रभावित न हो।
यह व्यवस्था Zuckerberg के लिए इसलिए भी अहम है, क्योंकि उन्हें अपनी हिस्सेदारी से जुड़े वित्तीय दायित्वों को पूरा करने के लिए कुछ शेयर बेचने की जरूरत पड़ सकती है। नई व्यवस्था में उन्हें बिना मतदान अधिकार वाले शेयरों का एक हिस्सा बेचने की सुविधा मिलेगी, जबकि ज्यादातर शेयरों की बिक्री पर शर्तें लागू रहेंगी।
20% शेयर बेचने की छूट, बाकी 80% पर पाबंदी
Zuckerberg और उनसे जुड़े समूह को मिलने वाले नए Class C शेयरों में से 20% शेयर स्वतंत्र रूप से बेचे जा सकेंगे। बाकी 80% शेयरों पर बिक्री और हस्तांतरण से जुड़ी शर्तें लागू होंगी।
इन 80% शेयरों को बेचने के लिए सामान्य तौर पर Zuckerberg के समूह को उतने ही मतदान अधिकार वाले Class A या Class B शेयर भी बेचने होंगे या उन्हें Class A शेयरों में बदलना होगा। इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बड़े पैमाने पर नए शेयर बेचने से Zuckerberg के मतदान नियंत्रण में भी उसी के अनुरूप बदलाव हो।
यह 20% और 80% का बंटवारा Zuckerberg से जुड़े समूह को मिलने वाले Class C शेयरों के लिए है, न कि कंपनी के सभी शेयरधारकों को मिलने वाले नए शेयरों पर लागू सामान्य बिक्री प्रतिबंध।
शेयरधारकों को क्या मिलेगा?
Meta की योजना के तहत हर मौजूदा Class A और Class B शेयर के बदले एक Class C शेयर दिया जाएगा। कंपनी के अनुसार, इस लाभांश के बाद Class A शेयरों की बाजार कीमत पर दो-के-बदले-एक शेयर विभाजन जैसा असर पड़ने की उम्मीद है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि शेयरधारकों की कुल आर्थिक हिस्सेदारी अपने-आप दोगुनी हो जाएगी। शेयरों की संख्या बढ़ेगी, लेकिन बाजार कीमत में भी इसका असर दिख सकता है। कंपनी ने कहा है कि नए शेयरों के लाभांश की रिकॉर्ड तारीख और भुगतान की तारीख बाद में तय की जाएगी।
AI पर भारी खर्च के बीच फैसला
Meta का यह कदम ऐसे समय आया है, जब कंपनी AI से जुड़े बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। कंपनी ने 2026 की तीसरी तिमाही में पूंजीगत खर्च के तौर पर 34.91 अरब डॉलर खर्च किए। इस दौरान उसका फ्री कैश फ्लो 2.12 अरब डॉलर नकारात्मक रहा। फ्री कैश फ्लो का मतलब है कि कारोबारी गतिविधियों से आया नकद पैसा और पूंजीगत खर्च घटाने के बाद कितना पैसा बचा।
Meta को उम्मीद है कि 2026 में उसका कुल पूंजीगत खर्च 135 अरब डॉलर से 145 अरब डॉलर के बीच रह सकता है। AI से जुड़ी तकनीक, डेटा सेंटर और अन्य बुनियादी सुविधाओं में निवेश बढ़ने के कारण कंपनी को पूंजी जुटाने के नए विकल्पों की जरूरत है।
नए Class C शेयर कंपनी को कर्मचारियों को शेयर देने और अधिग्रहण के सौदों में शेयरों का इस्तेमाल करने का विकल्प भी देंगे। इससे कंपनी को हर जरूरत के लिए केवल मतदान अधिकार वाले शेयर जारी करने पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
घोषणा के बाद शेयर में गिरावट
मूल रिपोर्ट के मुताबिक, घोषणा के बाद गुरुवार को प्री-मार्केट कारोबार में Meta के शेयर 3.07% गिरकर 676.10 डॉलर पर आ गए थे। यह आंकड़ा उस समय के प्री-मार्केट कारोबार का है, मौजूदा शेयर कीमत का नहीं।
नए Class C शेयर जनवरी 2027 में जारी होने के बाद सूचीबद्ध होने के योग्य होंगे। इनके बाजार भाव का निर्धारण कारोबार शुरू होने पर बाजार की मांग और आपूर्ति के आधार पर होगा।
नए शेयरों से जुड़े संभावित जोखिम
नए Class C शेयरों में मतदान अधिकार नहीं होंगे। मूल रिपोर्ट के मुताबिक, इनकी कीमत मतदान अधिकार वाले शेयरों की तुलना में कम रह सकती है। भविष्य में अगर Meta पूंजी जुटाने के लिए और शेयर जारी करती है, तो मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी पर असर पड़ सकता है।
इसके अलावा, कुछ अधिग्रहण सौदों में मतदान अधिकार वाले शेयरों से जुड़ी शर्तें लागू हो सकती हैं। ऐसे मामलों में बिना मतदान अधिकार वाले Class C शेयरों का इस्तेमाल सीमित हो सकता है।
कुल मिलाकर, Meta की नई शेयर व्यवस्था का मकसद AI में बढ़ते निवेश और कारोबारी विस्तार के लिए पूंजी जुटाने के विकल्प बढ़ाना है। साथ ही, कंपनी ने नए शेयरों की बिक्री से जुड़ी शर्तें इस तरह तय की हैं कि मार्क जुकरबर्ग का मतदान नियंत्रण बरकरार रहे।
सिडनी में दिए एक इंटरव्यू में संचार मंत्री अनिका वेल्स ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इन पांचों प्लेटफॉर्म के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ऑस्ट्रेलिया सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर लगाए गए प्रतिबंध का पालन नहीं करने के आरोप में फेसबुक, टिकटॉक और दूसरी बड़ी डिजिटल कंपनियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की तैयारी कर रही है। देश की संचार मंत्री अनिका वेल्स ने एक इंटरव्यू में यह जानकारी दी।
ऑस्ट्रेलिया के ऑनलाइन सुरक्षा नियामक ई-सेफ्टी कमिश्नर ने मार्च में फेसबुक और इंस्टाग्राम की मालिक कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स, टिकटॉक, स्नैपचैट और यूट्यूब के खिलाफ जांच शुरू की थी। इन कंपनियों पर कानून का सही तरीके से पालन नहीं करने का संदेह है।
इस कानून के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसे उचित कदम उठाने होते हैं, जिनसे 16 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया अकाउंट न बना सकें और न ही उनका इस्तेमाल जारी रख सकें। सरकार का मकसद बच्चों को इंटरनेट पर मौजूद नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट से बचाना है।
सोमवार को सिडनी में दिए एक इंटरव्यू में संचार मंत्री अनिका वेल्स ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इन पांचों प्लेटफॉर्म के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
जांच में सामने आईं उम्र की जांच से जुड़ी खामियां
ई-सेफ्टी कमिश्नर की जुलाई में जारी एक रिपोर्ट में सामने आया कि 16 साल से कम उम्र के ज्यादातर सोशल मीडिया यूजर्स अपने अकाउंट इस्तेमाल करते रहे या नए अकाउंट बनाने में कामयाब रहे। रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी एक बड़ी वजह प्लेटफॉर्म पर उम्र की सही जांच करने की प्रभावी व्यवस्था का अभाव था।
ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर प्रतिबंध करीब एक साल पहले लागू हुआ था। इसके बाद सरकार ने कानून का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर लगने वाले अधिकतम जुर्माने को दोगुना कर 10.92 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब 7.6 करोड़ अमेरिकी डॉलर) कर दिया है।
सरकार ने ई-सेफ्टी कमिश्नर जूली इनमैन ग्रांट को जांच से जुड़े अधिक अधिकार भी दिए हैं। अब वह सोशल मीडिया कंपनियों से दस्तावेज मांग सकती हैं। इसके अलावा, मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों को सवालों के जवाब देने के लिए बुलाने का अधिकार भी उनके पास है।
अनिका वेल्स ने कहा कि इन अतिरिक्त अधिकारों से कमिश्नर को जरूरी सबूत जुटाने में मदद मिलेगी, ताकि पांचों कंपनियों के खिलाफ संघीय अदालत में मामला ले जाया जा सके। उन्होंने कहा कि कमिश्नर अब इन अधिकारों का इस्तेमाल कर अपना मामला तैयार कर रही हैं।
कंपनियों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं
मंत्री के बयान पर मेटा और ई-सेफ्टी कमिश्नर के प्रवक्ताओं ने तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की। वहीं, स्नैपचैट की मालिक कंपनी स्नैप इंक., टिकटॉक और उसकी मालिक कंपनी बाइटडांस लिमिटेड तथा यूट्यूब की मूल कंपनी गूगल के प्रतिनिधियों ने भी ईमेल से भेजे गए सवालों का तुरंत जवाब नहीं दिया।
ई-सेफ्टी कमिश्नर एक स्वतंत्र नियामक संस्था है। हालांकि, यह सरकार का हिस्सा है और संचार मंत्री के माध्यम से ऑस्ट्रेलियाई संसद के प्रति जवाबदेह है। फिलहाल यह जिम्मेदारी अनिका वेल्स के पास है।
पिछले सप्ताह भी वेल्स ने कहा था कि सोशल मीडिया कंपनियां उम्र से जुड़ी पाबंदियों का पालन करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रही हैं।
15 अक्टूबर को नेशनल प्रेस क्लब में दिए गए भाषण में उन्होंने कहा था कि कानून में कोई कमी नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उसका पालन करने में नाकाम हो रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार तकनीकी कंपनियों को उनके जवाबदेह ठहराने से पीछे नहीं हटेगी।
अमेरिकी न्यूज नेटवर्क CNN की चीफ इंटरनेशनल एंकर क्रिस्टियन अमनपोर जून 2027 में नेटवर्क छोड़ देंगी। इसके साथ ही CNN के साथ उनका 43 साल पुराना जुड़ाव खत्म हो जाएगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अमेरिकी न्यूज नेटवर्क CNN की चीफ इंटरनेशनल एंकर क्रिस्टियन अमनपोर जून 2027 में नेटवर्क छोड़ देंगी। इसके साथ ही CNN के साथ उनका 43 साल पुराना जुड़ाव खत्म हो जाएगा। अमनपोर ने खुद इसकी घोषणा की है। वह दुनिया भर के संघर्षों, राजनीति और बड़े नेताओं के इंटरव्यू के लिए जानी जाती हैं।
CNN की ओर से साझा किए गए बयान में अमनपोर ने कहा कि उन्होंने कई महीनों तक सोच-विचार करने के बाद यह फैसला लिया है। उन्होंने कहा, “कई महीनों तक सोचने और कुछ रातों की नींद उड़ने के बाद मैंने CNN से अलग होने का फैसला किया है। CNN के साथ मेरा 43 शानदार साल का सफर रहा है।”
1983 में CNN से शुरू किया था सफर
क्रिस्टियन अमनपोर ने 1983 में CNN के अटलांटा मुख्यालय में इंटरनेशनल असाइनमेंट डेस्क पर शुरुआती स्तर की सहायक के तौर पर अपना करियर शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने नेटवर्क के न्यूयॉर्क ब्यूरो में रिपोर्टर के रूप में काम किया। धीरे-धीरे वह CNN की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संवाददाताओं में शामिल हो गईं।
अमनपोर ने दुनिया के कई अहम संघर्षों और राजनीतिक घटनाक्रमों की रिपोर्टिंग की है। वह अपनी बेबाक पत्रकारिता और विश्व नेताओं तथा प्रभावशाली हस्तियों से सीधे सवाल पूछने के लिए पहचानी जाती हैं।
फिलहाल वह CNN International के प्रमुख वैश्विक मामलों के कार्यक्रम Amanpour की एंकर हैं। इसके अलावा वह The Amanpour Hour की भी मेजबानी करती हैं।
CNN के मालिकाना हक में बदलाव के कुछ हफ्ते बाद आया ऐलान
अमनपोर के CNN छोड़ने का ऐलान ऐसे समय में आया है, जब नेटवर्क के मालिकाना हक में बड़ा बदलाव हुआ है। यह घोषणा Skydance, जिसे पहले Paramount Skydance के नाम से जाना जाता था, द्वारा Warner Bros. Discovery का 110 अरब डॉलर का अधिग्रहण पूरा करने के कुछ हफ्ते बाद हुई है।
इस अधिग्रहण के बाद CNN और CBS News एक ही मालिकाना समूह के तहत आ गए हैं।
अमनपोर के जाने के साथ CNN के साथ उनका चार दशक से भी ज्यादा लंबा सफर समाप्त हो जाएगा। हालांकि, उनके बयान में नेटवर्क छोड़ने के फैसले के पीछे किसी खास वजह का उल्लेख नहीं किया गया है।
TikTok ने एलन मस्क पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘Musk’ के प्रचार के लिए इस्तेमाल किए जा रहे विज्ञापन अकाउंट को स्थायी रूप से निलंबित कर दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
TikTok ने एलन मस्क पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘Musk’ के प्रचार के लिए इस्तेमाल किए जा रहे विज्ञापन अकाउंट को स्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। कंपनी ने यह फैसला राजनीतिक कंटेंट से जुड़ी अपनी नीतियों के उल्लंघन का हवाला देते हुए लिया है। इस कदम से फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर Bleecker Street के लिए TikTok पर पैसे देकर डॉक्यूमेंट्री का प्रचार करना मुश्किल हो गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब फिल्म को उत्तरी अमेरिका के कई शहरों में सिनेमाघरों तक पहुंचाया जा रहा है।
द हॉलीवुड रिपोर्टर के मुताबिक, Bleecker Street को शुक्रवार दोपहर इस प्रतिबंध की जानकारी दी गई। डिस्ट्रीब्यूटर ने पुष्टि की कि TikTok के प्रतिनिधियों ने उसे फैसले के बारे में बताया है। कंपनी ने प्रतिबंध लगाए जाने के समय पर निराशा जताई है और इसके खिलाफ अपील भी की है।
फिल्म का TikTok अकाउंट अभी भी सक्रिय है और वहां बिना पैसे खर्च किए पोस्ट किए जा सकते हैं। लेकिन विज्ञापन अकाउंट पर प्रतिबंध के कारण डिस्ट्रीब्यूटर पोस्ट को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए भुगतान नहीं कर सकता। इससे सिनेमाघरों में फिल्म के प्रदर्शन के दौरान उसके प्रचार पर असर पड़ सकता है, क्योंकि दर्शकों को फिल्म के बारे में जानकारी पहुंचाने में सोशल मीडिया की अहम भूमिका होती है।
TikTok ने प्रचार से जुड़ी कई कंटेंट को भी किया था खारिज
अकाउंट पर स्थायी प्रतिबंध लगाने से पहले TikTok ने फिल्म के प्रचार से जुड़ी कई सामग्रियों को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था। इनमें फिल्म का ट्रेलर और द न्यू यॉर्कर के एक कथन वाला प्रचार पोस्ट शामिल था। इस कथन में अमेरिकियों से डॉक्यूमेंट्री देखने की अपील की गई थी। TikTok ने इस पोस्ट को इसलिए खारिज किया क्योंकि इसमें एक स्थिर तस्वीर का इस्तेमाल किया गया था।
इसके अलावा, प्रचार से जुड़ी दूसरी पोस्ट पर भी पाबंदियां लगाई गईं। एक पोस्ट में मजाकिया अंदाज में बताया गया था कि करीब चार घंटे लंबी फिल्म के बीच के अंतराल में दर्शक क्या कर सकते हैं। इसमें अपने X अकाउंट डिलीट करने और राजनीतिक हालात पर चर्चा करने जैसी बातें शामिल थीं। एक अन्य पोस्ट में दर्शकों से अपील की गई थी कि वे डॉक्यूमेंट्री को प्लेटफॉर्म से हटाए जाने से पहले देख लें।
पिछले कुछ दिनों में Bleecker Street अपनी करीब छह प्रचार कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए भुगतान नहीं कर पाया।
द हॉलीवुड रिपोर्टर की रिपोर्ट के अनुसार, TikTok की ओर से डिस्ट्रीब्यूटर को भेजे गए संदेश में नीतियों के उल्लंघन को गंभीर बताया गया था। संदेश में कहा गया था कि कुछ उल्लंघनों के मामलों में अकाउंट को तुरंत निलंबित किया जा सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इस मामले में किन खास उल्लंघनों के कारण प्रतिबंध लगाया गया। TikTok ने इस फैसले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
Meta और YouTube ने पहले खारिज किए विज्ञापनों को बाद में दी मंजूरी
TikTok का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब डॉक्यूमेंट्री ‘Musk’ को दूसरे बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी विज्ञापन मंजूर कराने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। Meta और YouTube ने शुरुआत में फिल्म के ट्रेलर के प्रचार वाले विज्ञापनों को खारिज कर दिया था, लेकिन बाद में दोनों प्लेटफॉर्म उन्हें चलाने के लिए तैयार हो गए। Meta ने अपनी शुरुआती अस्वीकृति को तकनीकी या प्रक्रियागत गलती बताया था।
ऑस्कर पुरस्कार जीत चुके फिल्मकार Alex Gibney के निर्देशन में बनी यह डॉक्यूमेंट्री एलन मस्क की कारोबारी गतिविधियों, Twitter के अधिग्रहण और राजनीति में उनकी भूमिका की पड़ताल करती है। इसमें सरकारी विभाग Department of Government Efficiency (DOGE) के साथ उनके कामकाज का भी जिक्र है।
Gibney ने इस फिल्म के लिए तीन साल से ज्यादा समय तक जांच-पड़ताल की। डॉक्यूमेंट्री के दूसरे हिस्से में मस्क की राजनीतिक गतिविधियों पर खासा ध्यान दिया गया है। हालांकि, द हॉलीवुड रिपोर्टर के मुताबिक, फिल्म किसी खास राजनेता, उम्मीदवार या राजनीतिक विचारधारा का समर्थन नहीं करती।
उत्तरी अमेरिका में बढ़ रहा है फिल्म का प्रदर्शन
विज्ञापन को लेकर यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब डॉक्यूमेंट्री का सिनेमाघरों में प्रदर्शन लगातार बढ़ाया जा रहा है। फिल्म की शुरुआत न्यूयॉर्क और लॉस एंजिलिस के चार सिनेमाघरों में हुई थी। पहले सप्ताहांत में इसने 70,000 डॉलर की कमाई की थी।
अब यह डॉक्यूमेंट्री दर्जनों शहरों में दिखाई जा रही है। इसकी रिलीज का दायरा बढ़ाकर उत्तरी अमेरिका के 470 से ज्यादा सिनेमाघरों तक पहुंचाने की योजना है। ऐसे में TikTok पर विज्ञापन अकाउंट के निलंबन से फिल्म के प्रचार और दर्शकों तक पहुंच बनाने की कोशिशों पर असर पड़ सकता है।
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Vogue, GQ और Vanity Fair जैसी मशहूर मैगजीन प्रकाशित करने वाली कंपनी Condé Nast की ब्रिटेन इकाई के मुनाफे में पिछले साल 36% की गिरावट दर्ज की गई।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
Vogue, GQ और Vanity Fair जैसी मशहूर मैगजीन प्रकाशित करने वाली कंपनी Condé Nast की ब्रिटेन इकाई के मुनाफे में पिछले साल 36% की गिरावट दर्ज की गई। कंपनी के नए वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक, ब्रिटेन में उसका राजस्व भी 7% घट गया। यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब कंपनी के मालिक न्यूहाउस परिवार ने हाल ही में इसे बेचने की संभावनाओं से इनकार किया है।
कंपनी के वित्तीय खातों के मुताबिक, असाधारण मदों को छोड़कर उसका प्री-टैक्स मुनाफा 2024 में 2.8 करोड़ पाउंड था, जो पिछले साल घटकर करीब 1.8 करोड़ पाउंड रह गया। वहीं, ब्रिटेन से होने वाली कमाई 7% गिरकर 7.59 करोड़ पाउंड से 7.06 करोड़ पाउंड पर आ गई।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कारोबार से मिलने वाले राजस्व में बढ़ोतरी ने कंपनी की कुल कमाई को लगभग स्थिर बनाए रखने में मदद की। अंतरराष्ट्रीय राजस्व 18% बढ़कर 2.97 करोड़ पाउंड हो गया। इससे कंपनी का कुल राजस्व करीब 10 करोड़ पाउंड रहा।
खर्च बढ़ने से भी मुनाफे पर असर
Condé Nast ने कहा कि ब्रिटेन में उसका कारोबार लगातार मुनाफे में है। कंपनी के प्रवक्ता के मुताबिक, मुनाफे में बदलाव की एक वजह ग्राहकों की जरूरत के मुताबिक नई सेवाओं और समाधानों में किया गया नियोजित निवेश है।
कंपनी के पुनर्गठन से जुड़े खर्च भी बढ़े हैं। ये खर्च 2024 के 19 लाख पाउंड से बढ़कर पिछले साल 43 लाख पाउंड हो गए। कंपनी के मुताबिक, इस खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के बदले दिए गए भुगतान का था।
हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया कि 2025 में ब्रिटेन के कारोबार में बड़े स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी नहीं हुई। कुछ जगहों पर कर्मचारियों को हटाया गया, लेकिन नए लोगों की भर्ती जारी रहने के कारण कुल कर्मचारियों की संख्या लगभग स्थिर रही।
कंपनी में कर्मचारियों की संख्या 2024 के 466 से घटकर पिछले साल 461 रह गई। प्रवक्ता ने यह भी बताया कि पेंशन योजना के अनुमान में बदलाव और वेतन में बढ़ोतरी का असर भी मुनाफे पर पड़ा।
Vogue House की बिक्री से 2024 में हुई थी बड़ी कमाई
Condé Nast के लिए 2024 अच्छा साल रहा था। उस साल कंपनी ने लंदन स्थित अपने पूर्व मुख्यालय Vogue House की बिक्री से 6.4 करोड़ पाउंड की रकम हासिल की थी। इस बिक्री से कंपनी को उस साल अतिरिक्त वित्तीय फायदा हुआ था। हालांकि, पिछले साल ब्रिटेन के कारोबार से होने वाली कमाई में गिरावट और पुनर्गठन पर बढ़ते खर्च ने मुनाफे को प्रभावित किया।
Condé Nast के पोर्टफोलियो में Vogue, GQ, The New Yorker, Wired, Vanity Fair, Architectural Digest, Condé Nast Traveler, House & Garden और Tatler जैसे प्रमुख ब्रैंड शामिल हैं।
कंपनी को बेचने की चर्चाओं पर लगा विराम
पिछले सप्ताह Condé Nast को नियंत्रित करने वाली न्यूहाउस परिवार की होल्डिंग कंपनी Advance के चेयरमैन स्टीवन न्यूहाउस ने कंपनी को बेचने की संभावनाओं से इनकार किया था। इससे पहले ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि Amazon के संस्थापक जेफ बेजोस इस मीडिया समूह को खरीद सकते हैं। बेजोस के पास अमेरिकी अखबार The Washington Post भी है।
स्टीवन न्यूहाउस ने Financial Times से बातचीत में कहा कि कुछ ऐसे लोगों के लिए मीडिया कंपनियों का मालिक होना प्रतिष्ठा की बात हो सकती है, जो पहले से मीडिया कारोबार में नहीं हैं। लेकिन उनका परिवार करीब 100 साल से मीडिया कारोबार में है और उसके लिए यह केवल प्रतिष्ठा का मामला नहीं है।
कंपनी में यह बयान ऐसे समय आया, जब मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रोजर लिंच ने अचानक पद छोड़ दिया। उन्हें 2019 में कंपनी के कारोबार को बेहतर स्थिति में लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब वह खिलौने बनाने वाली कंपनी Mattel के प्रमुख बन गए हैं।
Google के AI फीचर से मीडिया कारोबार को चुनौती
Condé Nast के सामने डिजिटल माध्यमों से जुड़ी चुनौतियां भी हैं। कंपनी के पूर्व CEO रोजर लिंच ने इस साल Google के AI Summaries फीचर को पारंपरिक ऑनलाइन सर्च और मीडिया वेबसाइटों तक पहुंचने के तरीके के लिए बड़ा झटका बताया था।
इस फीचर में Google खोज के नतीजों के ऊपर ही सवालों के जवाब का सार दिखा देता है। ऐसे में कई बार उपयोगकर्ताओं को पूरी जानकारी पढ़ने के लिए संबंधित वेबसाइट पर जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
लिंच के मुताबिक, Google सर्च अब Condé Nast के कारोबार के लिए पहले जितना महत्वपूर्ण माध्यम नहीं रह गया है। पिछले साल कंपनी की वेबसाइटों पर आने वाले कुल लोगों में से करीब एक चौथाई Google सर्च के जरिए पहुंचे थे।
यह बदलाव उन मीडिया कंपनियों के लिए चुनौती बन रहा है, जो अपनी वेबसाइटों पर पाठकों की संख्या बढ़ाने और डिजिटल विज्ञापन से कमाई करने के लिए सर्च इंजन पर निर्भर रही हैं।
विज्ञापन से होती है ज्यादातर कमाई
Condé Nast के वित्तीय खातों के मुताबिक, कंपनी की कुल कमाई में विज्ञापन और अन्य सेवाओं का हिस्सा करीब 86% है। वहीं, पत्रिकाओं की बिक्री और दूसरी सदस्यताओं से लगभग 14% राजस्व आता है।
कंपनी के सात बड़े अंतरराष्ट्रीय ब्रैंड- Vogue, GQ, The New Yorker, Wired, Vanity Fair, Architectural Digest और Condé Nast Traveler मिलकर उसके कुल राजस्व का करीब 85% हिस्सा देते हैं।
कंपनी के खातों के अनुसार, अमेरिका के बाहर उसके सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल रहीं नतालिया गामेरो डेल कास्टिलो कालेखा को 13 लाख पाउंड से अधिक का भुगतान मिला। उन्होंने पिछले साल अगस्त में इस्तीफा दे दिया था।
इस साल Condé Nast ने अपनी महिला स्वास्थ्य पत्रिका Self को बंद करने की योजना भी घोषित की थी। यह पत्रिका 47 साल से प्रकाशित हो रही थी। कुल मिलाकर, ब्रिटेन में घटता मुनाफा, पुनर्गठन पर बढ़ता खर्च और डिजिटल माध्यमों में बदलाव Condé Nast के सामने प्रमुख चुनौतियां हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कारोबार से बढ़ती कमाई ने कंपनी के कुल राजस्व को स्थिर रखने में मदद की है।