गूगल कनाडा मेंं मीडिया संस्थानों को करेगा ब्लॉक, सर्च करने पर नहीं दिखाएगा खबरें

गूगल ने ऐलान किया है कि वह कनाडा के मीडिया हाउस को अब ब्लॉक कर देगा।

Last Modified:
Friday, 30 June, 2023
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गूगल ने ऐलान किया है कि वह कनाडा के मीडिया हाउस को अब ब्लॉक कर देगा। गूगल ने कहा है कि वह सर्च इंजन पर अब देश की मीडिया हाउस की खबरों को नहीं दिखाएगा। कनाडा सरकार ने देश में एक नया कानून पेश किया है, जिसके बाद यह फैसला लिया गया है।

कनाडा में खबरों को लेकर यह कानून अगले छह महीनों में लागू हो जाएगा, जिसके तहत कनाडा में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को अब कंटेंट के लिए न्यूज पब्लिसर्स को पैसे चुकाने पड़ेंगे। यह कानून ऑस्ट्रेलिया में साल 2021 में लागू किया गया था।

गूगल ने गुरुवार को कहा कि वह गूगल न्यूज और गूगल डिस्कवर से कनाडा से जुड़ी सभी खबरों के लिंक हटाएगा। ये दोनों ही मंच लोगों को अपनी पसंद के हिसाब से स्थानीय खबरें व अन्य ऑनलाइन कंटेंट हासिल करने की सुविधा प्रदान करते हैं। 

गूगल ने कहा कि उसने प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व वाली लिबरल पार्टी की सरकार को अपने फैसले से अवगत करा दिया है। हालांकि, उसने यह नहीं बताया कि वह अपने मंचों से कनाडा से जुड़ी खबरों के लिंक हटाना कब शुरू करेगा। उसने कहा कि साल के अंत में उक्त कानून के प्रभाव में आने से पहले ऐसा कर दिया जाएगा। यह कानून पिछले हफ्ते पारित हुआ था।

गूगल ने स्पष्ट किया कि उसके मंचों पर सिर्फ कनाडा से जुड़ी खबरें ब्लॉक की जाएंगी, जिसका मतलब है कि कनाडाई उपयोगकर्ता फॉक्स न्यूज और बीबीसी सहित अन्य वैश्विक मीडिया संगठनों द्वारा जारी सामग्री को देखने-पढ़ने में सक्षम होंगे। 

फेसुबक ने भी इसी तरह का फैसला पिछले सप्ताह लिया है। कनाडा में बिल सी-18 पास हुआ है जो कि समाचार को लेकर सोशल मीडिया कंपनियों के लिए है। कनाडा के कई मीडिया हाउस का कहना है कि फेसबुक और गूगल जैसे प्लेटफॉर्म उनकी खबरों से कमाई कर रहे हैं, लेकिन उन्हें पैसे नहीं दे रहे। 

फेसबुक और गूगल ने कहा कि यह प्रस्ताव उनके व्यवसायों के लिए अस्थिर थे और जब तक अधिनियम में संशोधन नहीं किया जाएगा, तब तक कनाडा में खबरों को गूगल या मेटा प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं कराया जाएगा।

कनाडा ने ये अनुमान लगाया है कि पिछले साल न्यूज बिजनेस को कानून के तहत 330 मिलियन डॉलर यानि लगभग 20,436 करोड़ रुपए प्राप्त हो सकते थे। हेरिटेज मंत्री पाब्लो रोड्रिग्ज ने पिछले साल बिल पेश किया था और कहा था कि इंटरनेट प्लेटफॉर्म के पास अधिनियम के तहत तुरंत कोई दायित्व नहीं है और सरकार नियामक और कार्यान्वयन प्रक्रिया पर उनके साथ परामर्श करने के लिए तैयार है।

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बीबीसी के कुछ चैनल और रेडियो स्टेशन हो सकते हैं बंद, ऑन-डिमांड सेवाओं पर बढ़ेगा फोकस

बीबीसी के डायरेक्टर जनरल मैट ब्रिटिन ने कहा है कि बीबीसी की आर्थिक स्थिति और लोगों के कंटेंट देखने-सुनने के बदलते तरीके को देखते हुए कुछ चैनल और रेडियो स्टेशन बंद किए जा सकते हैं।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 26 September, 2026
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Saturday, 26 September, 2026
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बीबीसी के डायरेक्टर जनरल मैट ब्रिटिन ने कहा है कि बीबीसी की आर्थिक स्थिति और लोगों के कंटेंट देखने-सुनने के बदलते तरीके को देखते हुए कुछ चैनल और रेडियो स्टेशन बंद किए जा सकते हैं। इससे बचाए गए संसाधनों को ऑन-डिमांड सेवाओं में लगाया जा सकेगा।

बीबीसी करीब 500 मिलियन पाउंड की बचत करने की कोशिश कर रहा है। मैट ब्रिटिन ने बीबीसी वन के कार्यक्रम ‘संडे विद लॉरा कुइन्सबर्ग’ में कहा कि यह गारंटी नहीं दी जा सकती कि कोई भी कार्यक्रम या चैनल हमेशा चलता रहेगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है और इसी वजह से कुछ फैसलों पर उनकी उम्मीद से पहले विचार करना पड़ रहा है।

 मैट ब्रिटिन ने कहा कि दर्शकों का व्यवहार भी तेजी से बदल रहा है। अगर ज्यादातर लोग कंटेंट ऑन-डिमांड देख रहे हैं, तो बीबीसी को अपनी अलग-अलग सेवाओं की लागत और उनकी उपयोगिता पर विचार करना होगा।

‘हम अभी भी पुराने मॉडल में फंसे हुए हैं’

ब्रिटिन ने कहा कि बचत करते समय उनका मुख्य ध्यान दर्शकों पर पड़ने वाले असर को कम करने पर है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हो सकता है किसी चैनल के प्रसारण कार्यक्रम को करीब 1 लाख लोग टीवी पर देख रहे हों, जबकि उसी कार्यक्रम को 5 लाख लोग आईप्लेयर पर देख रहे हों। ऐसे में सवाल यह है कि उस सेवा को पूरी तरह ऑन-डिमांड करने का सही समय क्या है।

उन्होंने कहा कि उनकी जिम्मेदारी लाइसेंस फीस देने वाले लोगों के पैसे की सही कीमत सुनिश्चित करना भी है। ब्रिटिन के मुताबिक, बीबीसी को दर्शकों तक पहुंचने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाने होंगे। उन्होंने कहा कि लोग कंटेंट देखने के तरीके में आगे बढ़ चुके हैं, जबकि बीबीसी अभी भी पुराने मॉडल से जुड़ा हुआ है।

पिछले कुछ महीनों में बीबीसी ने कई नौकरियों और कार्यक्रमों को बंद करने की घोषणा की है। इनमें ‘ब्लैंकेटी ब्लैंक’, ‘सेलिब्रिटी मास्टरमाइंड’, ‘लाइव एट द अपोलो’ और ‘फुटबॉल फोकस’ शामिल हैं। आने वाले समय में और कटौती की उम्मीद है।

मैट ब्रिटिन ने मई में बीबीसी के महानिदेशक का पद संभाला था। इससे पहले वह करीब एक दशक तक यूरोप, मध्य पूर्व और अफ्रीका में गूगल के अध्यक्ष रहे थे।

AI को लेकर भी बोले ब्रिटिन

जब लॉरा कुइन्सबर्ग ने उनसे पूछा कि क्या वह AI से किसी कार्यक्रम को बनाने और प्रस्तुत करने की अनुमति देंगे, तो ब्रिटिन ने कहा कि वह कुछ तय नियमों और सीमाओं के तहत ऐसा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बीबीसी इस तकनीक के साथ प्रयोग करना और यह समझना चाहता है कि AI क्या कर सकता है और क्या नहीं। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह मानव रचनात्मकता में विश्वास करते हैं।

ब्रिटिन ने कहा कि बीबीसी के किसी भी काम को AI से पूरी तरह बदला नहीं जाना चाहिए। उनके मुताबिक, AI कई जगहों पर लाइसेंस फीस के पैसे का बेहतर इस्तेमाल करने, फैसले लेने और रचनात्मक काम में मदद कर सकता है, लेकिन यह इंसानों का विकल्प नहीं है।

छह बड़ी टेक कंपनियों के हाथ में जानकारी जाने का खतरा

ब्रिटिन ने भविष्य में कुछ बड़ी टेक कंपनियों के हाथ में जानकारी पर बहुत ज्यादा नियंत्रण होने के खतरे की भी बात कही।

उन्होंने कहा कि AI तेजी से आगे बढ़ रहा है और ऐसी स्थिति बन सकती है, जहां छह कंपनियां भविष्य में लोगों की जानकारी तक पहुंच और नई जानकारी व गलत जानकारी के निर्माण पर नियंत्रण कर लें। उन्होंने कहा कि इन छह कंपनियों में कोई भी यूरोप या ब्रिटेन की नहीं है।

ब्रिटिन ने कहा कि ऐसी स्थिति में बीबीसी की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि आधे अरब से ज्यादा लोग बीबीसी को भरोसेमंद संस्था मानते हैं।

बड़ी टेक कंपनियों पर भरोसे के सवाल पर उन्होंने कहा कि कई प्लेटफॉर्म मौजूद हैं और वह किसी भी प्लेटफॉर्म पर अपने आप भरोसा नहीं करेंगे। उनके मुताबिक, यह लगातार देखते रहना जरूरी है कि ये प्लेटफॉर्म कैसे काम करते हैं और बीबीसी का कंटेंट सही जगह पर पहुंच रहा है या नहीं।

उन्होंने कहा कि बीबीसी और उसकी ऐप्स व सेवाएं ‘एल्गोरिदम का विकल्प’ होनी चाहिए। उनके मुताबिक, बाकी जगहों पर कंटेंट अक्सर किसी न किसी व्यावसायिक हित से प्रभावित होता है।

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ट्रंप प्रशासन को झटका, इन मीडिया संस्थानों को व्हाइट हाउस में फिर प्रवेश देने का आदेश

अमेरिका की एक संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन को आदेश दिया है कि पिछले हफ्ते व्हाइट हाउस में प्रवेश पर रोक लगाए गए तीन मीडिया संस्थानों को तुरंत फिर से वहां पहुंच दी जाए।

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Published - Friday, 25 September, 2026
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Friday, 25 September, 2026
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अमेरिका की एक संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन को आदेश दिया है कि पिछले हफ्ते व्हाइट हाउस में प्रवेश पर रोक लगाए गए तीन मीडिया संस्थानों को तुरंत फिर से वहां पहुंच दी जाए।

जज के आदेश के मुताबिक CNN, MS NOW और Politico को 14 दिनों के लिए व्हाइट हाउस में प्रवेश की अनुमति बहाल करनी होगी। जज ने कहा कि इन मीडिया संस्थानों पर लगाया गया प्रतिबंध संभवत: उनके संवैधानिक अधिकारों और उचित कानूनी प्रक्रिया (Due Process) का उल्लंघन करता है।

तीनों मीडिया संस्थानों के कुछ पत्रकारों ने बताया कि गुरुवार सुबह उन्हें व्हाइट हाउस में प्रवेश करने से रोक दिया गया था। इसके बाद इन तीनों संस्थानों ने कानूनी कार्रवाई शुरू की थी। ट्रंप प्रशासन ने अदालत में इस कार्रवाई का बचाव करते हुए आरोप लगाया था कि इन मीडिया संस्थानों ने गलत जानकारी प्रकाशित की और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा किया।

जज टिमोथी केली ने अपने फैसले में कहा कि CNN, Politico और MS NOW इस बात को साबित करने में सफल होने की संभावना रखते हैं कि व्हाइट हाउस ने प्रतिबंध लागू करते समय उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। जज ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े ट्रंप प्रशासन के तर्कों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रतिबंध की शुरुआती घोषणा करते समय राष्ट्रीय सुरक्षा का कोई जिक्र नहीं किया था।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को प्रतिबंध की घोषणा करते हुए इन तीनों मीडिया संस्थानों पर उनके और उनकी टीम की कवरेज में 'फेक न्यूज', 'काल्पनिक बातें और झूठ' लिखने का आरोप लगाया था।

जज के आदेश में कहा गया कि रिकॉर्ड में ऐसा पर्याप्त तथ्यात्मक आधार नहीं है, जिससे यह साबित हो कि पत्रकारों के हार्ड पास रद्द करने से वास्तव में राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा होगी या मुकदमे के दौरान पास बहाल करने से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा होगा।

ट्रंप प्रशासन ने मंगलवार को अदालत में दाखिल अपने जवाब में इन मीडिया संस्थानों की प्रकाशित कई खबरों का हवाला दिया था। इनमें व्हाइट हाउस में निर्माण कार्य और नए बॉलरूम से जुड़ी खबरें भी शामिल थीं।

जज ने कहा कि ज्यादातर मामलों में जिन खबरों पर व्हाइट हाउस ने आपत्ति जताई, उन्हें ऐसे पत्रकारों ने लिखा था जिनके पास हार्ड पास थे ही नहीं। बाकी मामलों में भी ट्रंप प्रशासन यह साबित नहीं कर सका कि संबंधित पत्रकार के पास हार्ड पास होना उन खबरों के लिए जरूरी था।

ट्रंप प्रशासन ने अपने शुरुआती जवाब में रक्षा विभाग के अधिकारियों के बयान भी पेश किए थे। हालांकि, जज ने कहा कि इन अधिकारियों को इस बात की सीधी जानकारी नहीं थी कि व्हाइट हाउस में पत्रकार कैसे काम करते हैं या इस मामले से जुड़े तथ्यों की उन्हें प्रत्यक्ष जानकारी थी।

मीडिया संस्थानों की ओर से अदालत में पैरवी कर रहे वकील टेड बूट्रोस ने CNN से कहा कि यह फैसला प्रेस की स्वतंत्रता, उचित कानूनी प्रक्रिया और कानून के शासन के पक्ष में एक मजबूत फैसला है।

सोमवार को अमेरिका के कई बड़े टीवी नेटवर्क ने प्रतिबंध के विरोध में व्हाइट हाउस की पूल ड्यूटी से हटने का फैसला किया था। इस व्यवस्था के तहत कई मीडिया संस्थान राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की कवरेज से जुड़ी सामग्री आपस में साझा करते हैं, जिससे लागत और जगह दोनों की बचत होती है। इसके अलावा CBS News, The New York Times और Fox News समेत 49 मीडिया संस्थानों ने भी CNN, MS NOW और Politico की कानूनी याचिका के समर्थन में अदालत में अपनी दलीलें पेश की थीं।

ट्रंप अक्सर मीडिया संस्थानों की आलोचना करते रहे हैं। उनके प्रशासन ने The New York Times, The Wall Street Journal और BBC समेत कई मीडिया संस्थानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की है। इनमें से कुछ मामलों में मीडिया संस्थानों ने करोड़ों डॉलर के समझौते किए हैं। BBC के खिलाफ ट्रंप का मुकदमा अभी जारी है।

 

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UN में CNN की कवरेज पर भड़के ट्रंप, एंकर से कहा- ‘आपको यहां नहीं होना चाहिए’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र (UN) में उनकी कवरेज कर रही CNN की एंकर कैटलिन कॉलिन्स को फटकार लगाई।

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Published - Wednesday, 23 September, 2026
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Wednesday, 23 September, 2026
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र (UN) में उनकी कवरेज कर रही CNN की एंकर कैटलिन कॉलिन्स को फटकार लगाई। ट्रंप ने यह टिप्पणी ऐसे समय की, जब वह पहले ही CNN समेत दो अन्य मीडिया संस्थानों को व्हाइट हाउस से प्रतिबंधित कर चुके हैं।

मंगलवार को कैटलिन कॉलिन्स ने ट्रंप से पूछा कि ईरान युद्ध कब खत्म होगा। उन्होंने एक सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि करीब दो-तिहाई अमेरिकी मानते हैं कि अमेरिका यह युद्ध नहीं जीत रहा है।

इस पर ट्रंप ने कहा, “यहां होना सम्मान की बात है। मुझे हैरानी है कि CNN यहां मेरी कवरेज कर रहा है।” इसके बाद उन्होंने कॉलिन्स से कहा, “आपको यहां मेरी कवरेज नहीं करनी चाहिए। आपने कहा था कि आप मेरी कवरेज नहीं करेंगी। आपको यहां नहीं होना चाहिए।”

कॉलिन्स ने ट्रंप को बताया कि संयुक्त राष्ट्र ने उनकी संस्था CNN को महासभा की कवरेज के लिए प्रवेश की अनुमति दी है। इस मामले पर द गार्जियन ने CNN से प्रतिक्रिया मांगी है।

पिछले हफ्ते ट्रंप ने CNN, Politico और MS Now को व्हाइट हाउस से प्रतिबंधित करने का ऐलान किया था। उन्होंने बिना कोई सबूत दिए इन मीडिया संस्थानों पर लगातार “झूठी और काल्पनिक खबरें” लिखने और रिपोर्ट करने का आरोप लगाया था। शनिवार को इन तीनों मीडिया संस्थानों के रिपोर्टरों और दूसरे कर्मचारियों को व्हाइट हाउस में प्रवेश नहीं दिया गया।

CNN ने शनिवार को कहा था कि वह सरकार और अन्य सार्वजनिक संस्थाओं को जवाबदेह ठहराने की अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेगा। नेटवर्क ने कहा कि वह बिना किसी डर या पक्षपात के ट्रंप प्रशासन के कामकाज और फैसलों की रिपोर्टिंग जारी रखेगा।

इसके बाद CNN, Politico और MS Now ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। इन संस्थानों ने प्रतिबंध हटाने और अपने रिपोर्टरों के उन हार्ड पास को बहाल करने की मांग की है, जिनसे उन्हें व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश मिलता है। इस मामले में एक संघीय जज के बुधवार को सुनवाई करने की उम्मीद है।

ट्रंप के इस कदम की दूसरे मीडिया संगठनों और प्रेस की स्वतंत्रता के समर्थन में काम करने वाले संगठनों ने आलोचना की है। उनका आरोप है कि अमेरिकी राष्ट्रपति स्वतंत्र प्रेस के अधिकार को सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं।

वहीं, ट्रंप ने अपने फैसले का बचाव किया है। उनका कहना है कि यह कदम “स्वतंत्र प्रेस पर हमला” नहीं है, बल्कि “राष्ट्रीय सुरक्षा” से जुड़े खतरों से निपटने के लिए उठाया गया है। ट्रंप ने हाल में व्हाइट हाउस में एक विजय स्मारक जैसे आर्च और एक बॉलरूम बनाने को लेकर भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया है।

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ट्रंप के व्हाइट हाउस बैन के खिलाफ CNN, MS NOW और Politico ने किया मुकदमा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से व्हाइट हाउस में प्रवेश पर रोक लगाए जाने के बाद CNN, MS NOW और Politico ने अमेरिकी संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया है।

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Published - Wednesday, 23 September, 2026
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Wednesday, 23 September, 2026
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से व्हाइट हाउस में प्रवेश पर रोक लगाए जाने के बाद CNN, MS NOW और Politico ने अमेरिकी संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया है। तीनों मीडिया संस्थानों ने सोमवार को यह कदम उठाया। उनका कहना है कि उनके पत्रकारों की मान्यता रद्द करने का फैसला उनके कवरेज पर आपत्ति के कारण लिया गया।

तीनों संस्थानों ने अदालत से इस रोक को तुरंत हटाने और अपने पत्रकारों की व्हाइट हाउस तक पहुंच बहाल करने की मांग की है। मामले की सुनवाई वॉशिंगटन डीसी की संघीय अदालत में होनी है। मौजूदा जानकारी के मुताबिक, पहली सुनवाई बुधवार को हो सकती है।

CNN, MS NOW और Politico ने संयुक्त बयान में कहा कि उनके पत्रकारों की मान्यता बिना किसी पूर्व सूचना या प्रक्रिया के रद्द की गई। उनका आरोप है कि सरकार ने उनकी रिपोर्टिंग से असहमति के कारण यह कदम उठाया। तीनों संस्थानों ने इसे अमेरिकी संविधान के फर्स्ट अमेंडमेंट में दी गई प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़ा मामला बताया है।

ट्रंप ने क्या कहा?

ट्रंप ने इस आरोप को खारिज किया है कि यह प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि कार्रवाई ‘फेक न्यूज’ के खिलाफ है। ट्रंप का आरोप है कि इन मीडिया संस्थानों की खबरें गलत और पक्षपातपूर्ण हैं तथा उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जोड़ा है।

व्हाइट हाउस ने भी कहा है कि मामला मीडिया को खबरें करने से रोकने का नहीं, बल्कि व्हाइट हाउस के अंदर विशेष पहुंच देने का है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इसी तरह का तर्क दिया है।

पत्रकारों को प्रवेश नहीं मिला

ट्रंप की घोषणा के बाद शनिवार को तीनों संस्थानों के पत्रकारों को व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश नहीं दिया गया और उनके प्रेस पास भी ले लिए गए। CNN पर व्हाइट हाउस टीवी पूल की जिम्मेदारी भी नहीं रही।

दूसरे टीवी नेटवर्क भी हुए शामिल

CNN के अलावा ABC, CBS, NBC और Fox News ने भी सोमवार को राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की साझा टीवी कवरेज यानी टीवी पूल को रोक दिया। टीवी पूल में अलग-अलग नेटवर्क बारी-बारी से राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की कैमरा कवरेज करते हैं और उसका वीडियो दूसरे मीडिया संस्थानों को उपलब्ध कराते हैं।

CNN को सोमवार को राष्ट्रपति की न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान इस पूल की जिम्मेदारी संभालनी थी, लेकिन रोक के बाद बाकी नेटवर्कों ने भी उस कवरेज में हिस्सा नहीं लिया।

मामले की कानूनी पृष्ठभूमि

इस मामले में ‘व्यू पॉइंट डिस्क्रिमिनेशन’ यानी किसी संस्था के विचार या रिपोर्टिंग के आधार पर उसके साथ अलग व्यवहार किए जाने का मुद्दा उठाया गया है। CNN के वकील टेड बौट्रस ने इस मामले में फिर से पैरवी शुरू की है। वे इससे पहले 2018 में CNN के पत्रकार जिम एकोस्टा के व्हाइट हाउस प्रेस पास के मामले में भी जुड़े थे। मौजूदा केस की सुनवाई जज टिमोथी जे. केली कर रहे हैं, जिन्होंने 2018 में एकोस्टा का प्रेस पास बहाल करने का आदेश दिया था।

मामला अब अदालत में है और व्हाइट हाउस तथा तीनों मीडिया संस्थानों के दावों पर आगे सुनवाई होगी। 

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अमेरिकी रैली में जेडी वेंस का भाषण फॉक्स न्यूज ने बीच में रोका, कहा- न्यूज बने तो लौटेंगे

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का भाषण फॉक्स न्यूज ने नॉर्थ कैरोलाइना में एक चुनावी रैली के दौरान बीच में ही रोक दिया।

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Published - Wednesday, 23 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 23 September, 2026
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अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का भाषण फॉक्स न्यूज ने नॉर्थ कैरोलाइना में एक चुनावी रैली के दौरान बीच में ही रोक दिया। वेंस रिपब्लिकन पार्टी के सीनेट उम्मीदवार माइकल व्हाटली के समर्थन में रैली को संबोधित कर रहे थे।

यह रैली ग्रीन्सबोरो के कौरी कन्वेंशन सेंटर में हुई। वेंस नॉर्थ कैरोलाइना से अमेरिकी सीनेट के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार माइकल व्हाटली के समर्थन में पहुंचे थे। व्हाटली का मुकाबला डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार और नॉर्थ कैरोलाइना के पूर्व गवर्नर रॉय कूपर से है।

वेंस ने अपने भाषण में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों पर निशाना साधते हुए कहा, “डेमोक्रेटिक पार्टी कांग्रेस के लिए ऐसे उम्मीदवार उतार रही है, जिन्होंने...” इतना कहते ही फॉक्स न्यूज ने लाइव प्रसारण से उनका भाषण हटा दिया।

इसके बाद चैनल की एंकर ने कहा कि दर्शक मिडटर्म चुनाव से पहले बैटलग्राउंड राज्य नॉर्थ कैरोलाइना में उपराष्ट्रपति वेंस को मतदाताओं से बात करते हुए सुन रहे थे। उन्होंने कहा कि अगर वेंस कोई “न्यूज” बनाते हैं, तो चैनल इस रैली पर दोबारा लौटेगा।

वेंस ने मतदाताओं से मांगा ‘एक और मौका’

इससे कुछ समय पहले वेंस ने मिडटर्म चुनावों को देखते हुए मतदाताओं से रिपब्लिकन पार्टी को “एक और मौका” देने की अपील की थी। वेंस ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान काफी काम हुआ है, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। उन्होंने मतदाताओं से रिपब्लिकन पार्टी को कुछ और साल देने की अपील की।

वेंस ने डेमोक्रेटिक पार्टी पर भी कई आरोप लगाए और कहा कि दूसरा पक्ष “पागलपन” में डूबा हुआ है। उन्होंने अवैध प्रवासियों और अपराध को लेकर भी डेमोक्रेट्स पर निशाना साधा।

फॉक्स न्यूज के कदम पर सोशल मीडिया पर चर्चा

फॉक्स न्यूज के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर भी इसकी चर्चा हुई। कुछ यूजर्स ने वेंस के भाषण की आलोचना की, जबकि कुछ ने चैनल द्वारा लाइव प्रसारण रोकने पर प्रतिक्रिया दी। ये टिप्पणियां सोशल मीडिया यूजर्स की राय थीं, न कि फॉक्स न्यूज का आधिकारिक बयान।

व्हाटली के समर्थन में वेंस की रैली

वेंस ने रैली में माइकल व्हाटली के समर्थन में लोगों से वोट देने की अपील की। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी व्हाटली के समर्थन में प्रचार कर चुके हैं। नॉर्थ कैरोलाइना की सीनेट सीट के लिए व्हाटली और पूर्व गवर्नर रॉय कूपर के बीच मुकाबला है।

मिडटर्म चुनाव से पहले तेज हुआ प्रचार

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव नजदीक आने के साथ दोनों प्रमुख पार्टियों का चुनाव प्रचार तेज हो गया है। नॉर्थ कैरोलाइना की सीनेट सीट भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। वेंस और ट्रंप जैसे रिपब्लिकन नेता व्हाटली के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं।

फॉक्स न्यूज की ओर से वेंस के भाषण को बीच में रोकने का कारण एंकर ने प्रसारण के दौरान यह बताया कि अगर भाषण में कोई “न्यूज” बनती है, तो चैनल वापस रैली पर आएगा।

 

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व्हाइट हाउस ने लॉन्च किया ‘TRUMP TV’, यूट्यूब पर 24/7 होगी डिजिटल स्ट्रीमिंग

व्हाइट हाउस के मुताबिक, TRUMP TV पर प्रशासन के प्रमुख वीडियो, राष्ट्रपति के महत्वपूर्ण संबोधन, घोषणाएं और अन्य खास पलों के फुटेज एक ही जगह पर दिखाए जाएंगे।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 22 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 22 September, 2026
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ‘TRUMP TV: The Essentials Station’ नाम से 24/7 डिजिटल वीडियो स्ट्रीम लॉन्च की है। व्हाइट हाउस ने इसे 21 सितंबर 2026 को शुरू किया। यह स्ट्रीम व्हाइट हाउस की आधिकारिक वेबसाइट और यूट्यूब पर उपलब्ध है।

व्हाइट हाउस के मुताबिक, TRUMP TV पर प्रशासन के प्रमुख वीडियो, राष्ट्रपति के महत्वपूर्ण संबोधन, घोषणाएं और अन्य खास पलों के फुटेज एक ही जगह पर दिखाए जाएंगे। स्ट्रीम को 24 घंटे और रियल टाइम में अपडेट किया जाएगा। इसमें पहले के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और भाषणों के वीडियो भी शामिल किए जाएंगे।

TRUMP TV को फिलहाल पारंपरिक केबल या ब्रॉडकास्ट टीवी चैनल के बजाय डिजिटल स्ट्रीमिंग सेवा के तौर पर देखा जा रहा है। इसकी लाइव फीड व्हाइट हाउस के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर देखी जा सकती है।

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'पैरामाउंट ग्लोबल' का बड़ा कदम, वार्नर ब्रदर्स के साथ प्रस्तावित मर्जर की राह बनाएगी आसान

पैरामाउंट ग्लोबल (Paramount Globa) अपने खिलाफ चल रहे लंबित मुकदमों को निपटाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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Published - Tuesday, 22 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 22 September, 2026
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पैरामाउंट ग्लोबल (Paramount Globa) अपने खिलाफ चल रहे लंबित मुकदमों को निपटाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। कंपनी का यह कदम वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी (Warner Bros Discovery) के साथ प्रस्तावित मर्जर के रास्ते में आ रही कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए उठाया जा रहा है।

मुकदमों के निपटारे से मर्जर की मंजूरी से जुड़ी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। कंपनी कानूनी विवादों को सुलझाने के साथ-साथ नियामकीय चिंताओं को दूर करने की कोशिश कर रही है।

इससे पहले आई रिपोर्टों के मुताबिक, पैरामाउंट ग्लोबल ने कैलिफोर्निया में 1.5 अरब डॉलर के निवेश पर भी चर्चा की थी। इस वित्तीय प्रतिबद्धता का उद्देश्य राज्य स्तर पर नियामकीय चिंताओं को दूर करना और मर्जर की प्रक्रिया के दौरान स्थानीय विरोध को कम करना था।

मर्जर की राह में कानूनी और नियामकीय अड़चनें

लंबित मुकदमों को सुलझाने की कोशिश मर्जर की प्रक्रिया में एक अहम कदम मानी जा रही है। कानूनी विवादों का समाधान होने से Paramount Global मर्जर की मंजूरी के लिए जरूरी दूसरी प्रक्रियाओं पर भी आगे बढ़ सकेगा।

इससे पहले The Wall Street Journal ने बताया था कि कंपनी ने कैलिफोर्निया में बड़े पूंजी निवेश की प्रतिबद्धता पर विचार किया था। इसका मकसद नियामकों को यह दिखाना था कि इस सौदे से राज्य को आर्थिक फायदा हो सकता है।

इस तरह कानूनी मामलों को सुलझाने और कैलिफोर्निया में निवेश की प्रतिबद्धता, दोनों के जरिए Paramount Global बड़े मीडिया मर्जर के रास्ते में आने वाली अलग-अलग अड़चनों को दूर करने की कोशिश कर रहा है।

 

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ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट को लेकर Meta की Ofcom के खिलाफ नई कानूनी चुनौती

मेटा (Meta) ने ब्रिटेन के मीडिया नियामक Ofcom के खिलाफ नई कानूनी चुनौती दी है। यह मामला ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट (Online Safety Act) लागू करने को लेकर सामने आया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 21 September, 2026
Last Modified:
Monday, 21 September, 2026
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मेटा (Meta) ने ब्रिटेन के मीडिया नियामक Ofcom के खिलाफ एक नई कानूनी चुनौती शुरू की है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब कई सोशल मीडिया कंपनियों पर ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट (Online Safety Act)  को लागू करने की प्रक्रिया को अदालतों के जरिए धीमा करने की कोशिश करने के आरोप लग रहे हैं।

फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा के वकीलों ने इस सप्ताह अपील की जानकारी दी है। यह अपील वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम को ऐसी श्रेणी में रखने के फैसले के खिलाफ है, जिसके तहत इन प्लेटफॉर्म्स पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां लागू होती हैं। इन अतिरिक्त जिम्मेदारियों में ज्यादा पारदर्शिता, यूजर्स को अधिक नियंत्रण देना, फर्जी विज्ञापनों से यूजर्स की सुरक्षा के उपाय और गैरकानूनी कंटेंट की ज्यादा रिकॉर्डिंग जैसे प्रावधान शामिल हैं।

मेटा की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिकी टेक कंपनियों और डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से Ofcom की फीस और जुर्माने की व्यवस्था को लेकर विरोध देखने को मिला है। यह व्यवस्था ब्रिटेन के डिजिटल सुरक्षा कानून के तहत लागू की जा रही है।

मेटा ने मई में लंदन में Ofcom के खिलाफ एक और कानूनी चुनौती दी थी। कंपनी का कहना था कि Ofcom द्वारा फीस तय करने का तरीका सही नहीं है और इसकी गणना कंपनी के वैश्विक राजस्व के आधार पर नहीं की जानी चाहिए।

ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट के उल्लंघन पर अधिकतम जुर्माना कंपनी के योग्य वैश्विक राजस्व (QWR) का 10 प्रतिशत या 1.8 करोड़ पाउंड, इनमें से जो भी ज्यादा हो, लगाया जा सकता है। Ofcom अपने ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े कामकाज का खर्च इसी राजस्व के एक हिस्से से पूरा कर रहा है।

इस बीच, TikTok और X भी कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं। इन मामलों का संबंध इस बात से है कि अपनी सेवाओं की निगरानी के लिए Ofcom को इन कंपनियों से कितनी जानकारी लेने का अधिकार होना चाहिए।

Ofcom के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को हाउस ऑफ लॉर्ड्स की एक समिति के सामने कहा कि नियामक इस समय एक ऐसे माहौल में काम कर रहा है, जहां लगातार कानूनी मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि मेटा की ओर से दो मामले चल रहे हैं और कई अन्य डिजिटल सेवाएं भी डेटा जुटाने की Ofcom की कोशिशों के खिलाफ न्यायिक समीक्षा की मांग कर रही हैं।

Ofcom के ऑनलाइन सेफ्टी ग्रुप डायरेक्टर ओलिवर ग्रिफिथ्स ने ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट पर सबूत देते हुए कहा कि नियामक इस कानून के जरिए बदलाव लाने की पूरी कोशिश कर रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर अनावश्यक कानूनी जोखिम उठाए जाते हैं तो आर्थिक रूप से मजबूत कंपनियों और लोगों की ओर से कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

मेटा के प्रवक्ता ने नई कानूनी चुनौती पर कहा कि TikTok, Roblox, X और Quora समेत उद्योग की कई अन्य कंपनियां भी कानून को लागू करने के कुछ खास पहलुओं को चुनौती दे रही हैं।

प्रवक्ता के मुताबिक, ये मामले कानून को ही चुनौती नहीं दे रहे हैं, बल्कि Ofcom ने कानून की जिस तरह व्याख्या की है, उससे जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि नए नियामक ढांचे के लागू होने के दौरान इस तरह की कानूनी प्रक्रिया सामान्य बात है और इससे प्रक्रिया, दायरे और कानून को लागू करने के तरीके से जुड़े सवालों को स्पष्ट करने में मदद मिलती है, ताकि कानून को सही और एक समान तरीके से लागू किया जा सके।

वहीं, डिजिटल, संस्कृति, मीडिया और खेल मंत्री लिसा नैंडी ने पिछले सप्ताह इंटरनेट को नियंत्रित करने के लिए आगे भी कानून लाने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि सरकार को इंटरनेट के क्षेत्र में ज्यादा तेजी से और ज्यादा हस्तक्षेप के साथ काम करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है, इसलिए कानून में भी नियमित रूप से बदलाव करने की जरूरत पड़ सकती है। 

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ट्रंप ने इन मीडिया घरानों को व्हाइट हाउस से किया बैन, बोले- फेक न्यूज रिपोर्टिंग से परेशान

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने CNN, MS NOW और Politico को व्हाइट हाउस से तुरंत प्रभाव से बैन करने का ऐलान किया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 19 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 19 September, 2026
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अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने CNN, MS NOW और Politico को व्हाइट हाउस से तुरंत प्रभाव से बैन करने का ऐलान किया है। यह कदम ट्रंप और अमेरिकी मीडिया के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद को और बढ़ाता है।

ट्रंप ने शुक्रवार को Truth Social पर एक पोस्ट में कहा कि ये मीडिया संस्थान उनके प्रशासन के बारे में लगातार ऐसी खबरें लिखते या प्रसारित करते हैं, जिन्हें वह “फिक्शन और झूठ” मानते हैं। हालांकि, उन्होंने ऐसी किसी खास खबर या रिपोर्ट का उदाहरण नहीं दिया, जिसकी वजह से यह कदम उठाया गया।

बाद में Oval Office में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने इसे “बहुत आसान बैन” बताया। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि इसे किस तरह लागू किया जाएगा और क्या इन संस्थानों के पत्रकारों को व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश करने से भी रोका जाएगा। शुक्रवार को घोषणा के कुछ समय बाद तक CNN, Politico और अन्य संबंधित मीडिया के पत्रकार व्हाइट हाउस परिसर में काम करते दिखाई दिए।

ट्रंप ने यह भी कहा कि कुछ और मीडिया संस्थानों पर भी इसी तरह की कार्रवाई हो सकती है, लेकिन उन्होंने किसी अन्य संस्थान का नाम नहीं बताया।

CNN ने बैन को बताया ‘गैरकानूनी हमला’

CNN ने ट्रंप के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि अगर बैन लागू किया जाता है तो यह अमेरिकी संविधान के तहत मीडिया की स्वतंत्रता के अधिकार पर “गैरकानूनी हमला” होगा।

CNN ने कहा कि उसके पास सरकार की किसी रुकावट या हस्तक्षेप के बिना रिपोर्टिंग करने का संवैधानिक अधिकार है। नेटवर्क ने यह भी कहा कि वह व्हाइट हाउस में अपनी टीम और उसकी निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग के साथ पूरी तरह खड़ा है।

Politico ने भी कहा कि वह इस व्हाइट हाउस और आने वाले प्रशासन की भी निष्पक्ष रिपोर्टिंग करता रहेगा। संस्थान ने कहा कि वह अपने First Amendment अधिकारों को सीमित करने की किसी भी कोशिश का कानूनी तौर पर विरोध करेगा। MS NOW, जो पहले MSNBC के नाम से जाना जाता था, ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया।

प्रेस संगठनों ने भी जताई आपत्ति

White House Correspondents’ Association की अध्यक्ष Jacqui Heinrich ने कहा कि वे उन पत्रकारों के साथ खड़े हैं जिन्हें अपना काम करने के लिए निशाना बनाया जा रहा है। 

उन्होंने कहा कि मामला सिर्फ पत्रकारों के अधिकारों का नहीं है, बल्कि अमेरिकी लोगों के उस अधिकार का भी है जिसके तहत उन्हें राष्ट्रपति और सरकार की गतिविधियों, नीतियों और फैसलों की पूरी और स्वतंत्र जानकारी मिलनी चाहिए।

अमेरिका में प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़े कई संगठनों ने भी ट्रंप के ऐलान की आलोचना की है। Knight First Amendment Institute ने कहा कि अगर व्हाइट हाउस के प्रेस पूल से इन संस्थानों को बाहर किया जाता है, तो इससे First Amendment से जुड़े सवाल उठते हैं। Reporters Committee for Freedom of the Press ने भी कहा कि इस तरह का बैन अदालत में चुनौती का सामना कर सकता है।

ट्रंप और मीडिया के बीच पहले भी रहा है विवाद

जनवरी 2025 में दूसरी बार राष्ट्रपति पद संभालने के बाद से ट्रंप और व्हाइट हाउस प्रेस कॉर्प्स के बीच कई बार टकराव हुआ है। ट्रंप प्रशासन ने प्रेस रूम में conservative bloggers, influencers और दूसरे मीडिया संस्थानों को भी जगह देने की कोशिश की है। प्रशासन का कहना रहा है कि इससे अमेरिकी जनता को अलग-अलग नजरिए मिलेंगे।

फरवरी में व्हाइट हाउस ने उस Press Pool पर नियंत्रण अपने हाथ में लेने की घोषणा की थी, जो राष्ट्रपति के कार्यक्रमों को कवर करता है। इससे पहले यह व्यवस्था एक सदी से ज्यादा समय से White House Correspondents’ Association के जरिए संचालित होती थी।

इसी महीने प्रशासन ने Associated Press (AP) के पत्रकारों और फोटोग्राफरों को कुछ सीमित पहुंच वाले स्थानों, जैसे Oval Office और Air Force One, से दूर रखा था। इसकी वजह AP द्वारा “Gulf of America” की जगह “Gulf of Mexico” शब्द का इस्तेमाल करना बताया गया था। AP ने इसके खिलाफ अदालत का रुख किया था और मामला अभी जारी है।

पहले भी CNN पत्रकार पर लगाया था बैन

ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी CNN के पत्रकार Jim Acosta को व्हाइट हाउस से प्रतिबंधित किया गया था। बाद में CNN की ओर से कानूनी कार्रवाई किए जाने के बाद उनकी प्रेस मान्यता बहाल कर दी गई थी।

CNN अमेरिका के उन चुनिंदा मीडिया संस्थानों में शामिल है जो राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की वीडियो कवरेज के लिए Press Pool का हिस्सा हैं। प्रेस पूल में एक मीडिया संस्थान या पत्रकार किसी राष्ट्रपति कार्यक्रम की सामग्री दूसरे मीडिया संस्थानों के साथ साझा करता है।

कानूनी चुनौती की संभावना

ट्रंप के ताजा ऐलान के बाद कानूनी चुनौती की संभावना जताई जा रही है। First Amendment अमेरिकी संविधान का वह प्रावधान है जो अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता की सुरक्षा करता है। हालांकि, इस मामले में बैन किस तरह लागू किया जाएगा और इसकी कानूनी स्थिति क्या होगी, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

ट्रंप का मीडिया संस्थानों के साथ विवाद नया नहीं है। वह पहले भी कई अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर चुके हैं, जिनमें The Wall Street Journal, The New York Times और BBC शामिल हैं। कुछ मामलों में मीडिया संस्थानों ने करोड़ों डॉलर के समझौते किए हैं, जबकि BBC से जुड़ा मामला अभी जारी है।

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वॉरेन बफेट ने Berkshire Hathaway के चेयरमैन पद से दिया इस्तीफा, बेटे को सौंपी जिम्मेदारी

दिग्गज निवेशक Warren Buffet ने Berkshire Hathaway के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है। अब यह जिम्मेदारी उनके बेटे Howard Buffett संभालेंगे।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 19 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 19 September, 2026
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दिग्गज निवेशक वॉरेन बफे (Warren Buffet) ने 'बार्कशायर हैथवे' (Berkshire Hathaway) के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है। अब यह जिम्मेदारी उनके बेटे हॉवर्ड बफे (Howard Buffett) संभालेंगे। 96 साल के वॉरेन बफे अब अमेरिकी कंपनी में सलाहकार की भूमिका में रहेंगे।

शेयरधारकों को भेजे गए एक पत्र के मुताबिक, वॉरेन बफे अब Chairman Emeritus बनेंगे और 'बार्कशायर हैथवे' के बोर्ड में भी बने रहेंगे। वह कंपनी को अपना “judgement and perspective”, यानी अपना अनुभव, समझ और सलाह देते रहेंगे।

यह बदलाव वॉरेन बफे के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) पद से हटने के करीब नौ महीने बाद हुआ है। उनके बाद ग्रेग एबेल (Greg Abel) ने CEO की जिम्मेदारी संभाली थी। वहीं, हॉवर्ड बफे 1993 से 'बार्कशायर हैथवे' के बोर्ड में शामिल हैं। अब वह कंपनी के नॉन-एग्जिक्यूटिव चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालेंगे।

कई दशकों से वॉरेन बफे के हर साल आने वाले शेयरहोल्डर लेटर्स और 'बार्कशायर हैथवे' की सालाना बैठकों ने उन्हें दुनियाभर के निवेश समुदाय में एक प्रभावशाली शख्सियत बनाया है।

वॉरेन बफे का जन्म 1930 में Omaha, Nebraska में हुआ था। उन्हें उनकी वित्तीय समझ और निवेश के लिए अक्सर “Oracle of Omaha” कहा जाता है। दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल होने के बावजूद वह अपनी सादगी, कम खर्च वाली जीवनशैली और परोपकार के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने अपनी ज्यादातर संपत्ति दान करने का संकल्प लिया है। इसके लिए उन्होंने Bill और Melinda Gates के साथ मिलकर Giving Pledge अभियान शुरू किया था।

'बार्कशायर हैथवे' एक बड़ी Holding Company है, जिसका नेतृत्व लंबे समय तक वॉरेन बफे ने किया है। कंपनी के पास कई अलग-अलग कारोबार पूरी तरह से हैं, जिनमें GEICO, BNSF Railway और Dairy Queen शामिल हैं। इसके अलावा 'बार्कशायर हैथवे' ने Apple, Bank of America और Coca-Cola जैसी कंपनियों में भी बड़ी हिस्सेदारी रखी हुई है।

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