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जानिए, फिर सुर्खियों में क्यों छायी 'शार्ली हेब्दो' मैगजीन
फ्रांस की व्यंग्य पत्रिका 'शार्ली हेब्दो' (Charlie Hebdo) एक बार फिर सुर्खियों में है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
फ्रांस की व्यंग्य पत्रिका (मैगजीन) 'शार्ली हेब्दो' (Charlie Hebdo) एक बार फिर सुर्खियों में है। दरअसल इस बार 'शार्ली हेब्दो' ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातोल्ला अली खामेनी के आपत्तिजनक कार्टून प्रकाशित किए है, जिसकी वजह से बुधवार को फ्रांसीसी राजदूत निकोलस रोश को तलब किया गया है। ईरान ने इसे अपमानजनक बताते हुए फ्रांस को परिणाम भुगतने की चेतावनी तक दे डाली है।
'शार्ली हेब्दो' ने ईरान में चल रहे हिजाब विवाद को लेकर अयातोल्ला अली खामेनी के खिलाफ कार्टून प्रकाशित किए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस सप्ताह पत्रिका ने अपने पेरिस कार्यालयों पर घातक 2015 के आतंकवादी हमले की वर्षगांठ मनाने के लिए 'जनवरी 7' शीर्षक वाला संस्करण जारी किया, जिसका विषय 'बीट द मुल्लाज' था। इसके तहत ईरान के सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक व्यक्ति अयातुल्ला अली खामेनेई का मजाक उड़ाते हुए दर्जनों कार्टून प्रकाशित किए थे।
ईरान के विदेश मंत्री होसैन अमीर-अब्दुल्लाहियान ने ट्वीट किया, ' कार्टून प्रकाशित करने में एक फ्रांसीसी प्रकाशन ने धार्मिक और राजनीतिक सत्ता के खिलाफ अपमानजनक और अशोभनीय कृत्य किया है, जिसे बर्दाशत नहीं किया जा सकता है।'
ईरान के विदेश मंत्री ने आगे कहा कि, 'फ्रांस सरकार अपनी हद में रहे। फ्रांस की सरकार ने निश्चित रूप से गलत रास्ता चुन लिया है। इससे पहले भी हम इस पब्लिकेशन को प्रतिबंधित लिस्ट में शामिल कर चुके हैं।'
ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया के बावजूद ‘शार्ली हेब्दो’ पत्रिका ने झुकने से इनकार कर कर दिया है। पत्रिका की ओर से कहा गया है कि यह सिर्फ ईरान में चल रहे प्रदर्शनों की सच्चाई दिखाने की एक कोशिश है।
विवादित कार्टून को लेकर पत्रिका के पब्लिकेशन डायरेक्टर की ओर से कहा गया कि, ‘1979 से ईरान में जो विचारधारा लोगों को प्रताड़ित कर रही है, उससे आजादी पाने के लिए जो लोग अपनी जान हथेली पर लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें समर्थन देने का यह हमारा एक तरीका है।’
‘शाली हेब्दो’ पत्रिका का विवादों से पुराना नाता रहा है। यह पत्रिका मोहम्मद साहब से लेकर हिंदू देवी देवताओं पर भी वह विवादित कार्टून छाप चुकी है। सबसे ज्यादा विवाद उस समय हुआ था, जब पत्रिका में इस्लाम के आखिरी नबी कहे जाने वाले पैगंबर मोहम्मद का विवादित कार्टून छापा गया था। इस मामले में ना सिर्फ इस्लामिक राष्ट्रों ने विरोध और नाराजगी जताई थी बल्कि दुनिया भर के कई देशों में मुस्लिम लोगों ने जमकर प्रदर्शन भी किया था। उसी समय काफी देशों ने इस पत्रिका को प्रतिबंधित लिस्ट में डाल दिया था।
इसके बाद फ्रांस में जन्मे अल-कायदा के दो आतंकवादियों ने 7 जनवरी 2015 में अखबार के दफ्तर पर हमला करके 12 कार्टूनिस्ट की हत्या कर दी थी।
वहीं, इस पत्रिका ने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान भारत में कोविड संकट और ऑक्सीजन की कमी पर तंज कसा था। इसमें प्रकाशित कार्टून में ऑक्सीजन के लिए तरसते भारतीयों को जमीन पर लेटे हुए दिखाया गया था। साथ ही इस कार्टून में हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाया गया।
कार्टून के कैप्शन में लिखा था कि 33 मिलियन देवी-देवता, पर एक भी ऑक्सीजन का उत्पादन करने में सक्षम नहीं हैं।
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