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कैसा पत्रकार और कैसी पत्रकारिता दिवस
जमीन बदल गई तो मायने बदल गए। मायने बदले तो चेहरा बदल गया, रहन-सहन और जीवन की शर्तें बदल गईं। वैश्विक अर्थशास्त्र की इस बाढ़ के चलते खासा बदलाव आ गया है समाज में। तो फिर कैसा पत्रकार और कैसा पत्रकारिता दिवस। मौजूदा हालातों में तो यह सवाल ही बेमानी हो जाते हैं। अब तो एड्स डे है, वेलंटाइन डे है, वगैरह-वगैरह। इंतजार कीजिए, अभी तो और ना जाने कितने नए
समाचार4मीडिया ब्यूरो 13 years ago
जमीन बदल गई तो मायने बदल गए। मायने बदले तो चेहरा बदल गया, रहन-सहन और जीवन की शर्तें बदल गईं। वैश्विक अर्थशास्त्र की इस बाढ़ के चलते खासा बदलाव आ गया है समाज में। तो फिर कैसा पत्रकार और कैसा पत्रकारिता दिवस। मौजूदा हालातों में तो यह सवाल ही बेमानी हो जाते हैं। अब तो एड्स डे है, वेलंटाइन डे है, वगैरह-वगैरह। इंतजार कीजिए, अभी तो और ना जाने कितने नए-नए डे और यह नए आगंतुक डे, हमारे अतीत के सारे दिवसों को सुरसा की तरह निगलते दिखेंगे। नामोनिशान मिट जाएगा इन दिवसों का। मुझे याद है 26 साल पहले का वह दौर, जब मेरे पिता स्वार्गीय सियाराम शरण त्रिपाठी जी, पत्रकारिता दिवस और मजदूर दिवस जैसे अवसरों पर बेहद मसरूफ हो जाया करते थे। हफ्तों तैयारियां चलती थीं। नौकरी से अवकाश लेकर वे हर जिलों-कस्बों के पत्रकारों को एकजुट किया करते थे। वे लखनऊ में तब के सर्वाधिक शक्तिशाली अखबार स्वकतंत्र भारत में मुख्यक उप संपादक थे। उनमें एक दर्शन था, जुझारूपन था, जिसके चलते यूपी के ज्यादातर जिलों में उन्न्होंने पत्रकारों का संगठन खड़ा किया। अब है किसी में वह जज्बा। न पत्रकारों में रहा और न ही पत्रकारों की एकता की बात करने वाले संगठनों में। यह तो होना ही था। तब पत्रकार अपनी कलम से पहचाना जाता था, अब पत्रकार क्या, संपादक तक इस बात के लिए अपनी तनख्वाहें मोटी करवाते घूमते हैं, कि उनकी पहुंच फलां नौकरशाह या मंत्री तक है और वे जब चाहेंगे, मालिक का कोई भी काम सेकेंडों में करा देंगे। मालिक भी खुश पत्रकार भी खुश। दसियों लाख रुपए की मोटी तनख्वाह पाने वालों से आप क्यां उम्मीद करते हैं कि उनमें जनपक्षधरता आ जाए, या वे पत्रकारों और पत्रकारिता के लिए खुद को बलि चढ़ा दें। अरे अब तो वह दौर आ चुका है कि पैसे के लिए वे अपने ही किसी साथी की बलि बहुत ही संयत भाव से चढ़ा सकते हैं। तो विदा कीजिए हिंदी पत्रकारिता दिवस को। श्रद्धांजलियां दीजिए। और जुट जाइए इस दिवस को मर्सिया पढ़ने के लिए। आमीन। समाचार4मीडिया देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया.कॉम में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं।
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