फिल्मी पत्रकार उज्ज्वल त्रिवेदी ने थामा अब इस मीडिया समूह का हाथ...

अलीबाबा समूह की ऑनलाइन मीडिया कंपनी ‘यूसी न्यूज’ से पत्रकारों के जुड़ने का सिलसिला लगातार जारी है...

Last Modified:
Tuesday, 11 July, 2017


समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

अलीबाबा समूह की ऑनलाइन मीडिया कंपनी ‘यूसी न्यूज’ से पत्रकारों के जुड़ने का सिलसिला लगातार जारी है और इसी क्रम में समूह से एक और नाम जुड़ गया है उज्जवल त्रिवेदी का। फिल्म और टीवी पत्रकारिता के चर्चित नाम उज्ज्वल त्रिवेदी को यहां एंटरटेनमेंट डेस्क का हेड बनाया गया है।

उज्जवल इसके पहले मुंबई में ‘92.7 बिग एफएम’ के असोसिएट क्रिएटिव डायरेक्टर थे। वे इस पद पर मई, 2015 से जून, 2017 तक रहे। यहां वे टाइम्स समूह के बॉलिवुड चैनल ‘जूम टीवी’ से आए थे। वे यहां सीनियर प्रड्यूसर के तौर पर कार्यरत थे। उज्ज्वल ने करीब चार साल तक (मई, 2011-2015) जूम के साथ काम किया।

पत्रकारिता में करीब 17 साल का अनुभव रखने वाले उज्ज्वल ने अपने करियर की शुरुआत बॉलिवुड रिपोर्टर के तौर पर की थी। उन्होंने ‘जी न्यूज’, ‘स्टार न्यूज’ (अब एबीपी न्यूज), ‘एनडीटीवी’, ‘सीएनबीसी’, ‘ई24’ जैसे बड़े चैनलों के लिए बॉलिवुड और टीवी की दुनिया की कवरेज की है। ‘जूम’ में उन्होंने तीन शो भी लॉन्च किए थे, जिसमें एक डेली और एक वीकली शो ने खासी चर्चा बटोरीं।    

मूल रूप से यूपी के बरेली जिले के रहने वाले उज्जवल ने 1994 से लेकर 1999 तक फ्रीलॉन्स जर्नलिस्ट के तौर पर काम किया।


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भारत में पत्रकारिता का भविष्य: खबरें ज्यादा, भरोसा बड़ी चुनौती

भारत में खबरें पाना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। किसी रिपोर्टर के फोन से कोई खबर कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों की स्क्रीन तक पहुंच सकती है।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 28 September, 2026
Last Modified:
Monday, 28 September, 2026
RahulMahajan874

राहुल महाजन, हेड ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स, ‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’।।

भारत में खबरें पाना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। किसी रिपोर्टर के फोन से कोई खबर कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों की स्क्रीन तक पहुंच सकती है। वहीं, कोई दर्शक टीवी की बहस देखने के बाद उसी मुद्दे पर किसी स्वतंत्र पत्रकार की यूट्यूब पर जानकारी भी देख सकता है। लेकिन खबरों की इतनी ज्यादा उपलब्धता का मतलब यह नहीं है कि लोगों को हर बात आसानी से समझ भी आ रही है।

भारतीय पत्रकारिता के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब दर्शक और विज्ञापन दोनों तेजी से ऑनलाइन जा रहे हैं, तब पत्रकारिता अपनी स्वतंत्रता, भरोसे और सही तरीके से खबर करने की क्षमता को कैसे बनाए रखेगी।

डिजिटल विज्ञापन की ओर बढ़ रहा पैसा

पैसों के मामले में मीडिया इंडस्ट्री में बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। एफआईसीसीआई-ईवाई की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री 2025 में बढ़कर 2.78 लाख करोड़ रुपये का हो गया। हालांकि, इस बढ़त का फायदा मीडिया के हर हिस्से को बराबर नहीं मिला।

डिजिटल विज्ञापन 26 फीसदी बढ़कर 94,700 करोड़ रुपये हो गया और कुल विज्ञापन आय में इसकी हिस्सेदारी 63 फीसदी रही। इसके मुकाबले लीनियर टेलीविजन विज्ञापन में 10 फीसदी की गिरावट आई। प्रीमियम फॉर्मेट में प्रिंट विज्ञापन 2 फीसदी बढ़ा, जबकि प्रिंट सब्सक्रिप्शन में 1 फीसदी की कमी आई।

ये आंकड़े सिर्फ समाचार कारोबार के नहीं, बल्कि पूरे मीडिया बाजार के हैं। फिर भी इनसे यह पता चलता है कि विज्ञापनदाता अपना पैसा किस दिशा में ले जा रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विज्ञापनदाताओं को सही ऑडियंस तक पहुंचने और उसके रिस्पॉन्स को तुरंत मापने की सुविधा मिलती है। ऐसे में न्यूजरूम के सामने उस विज्ञापन खर्च में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने की चुनौती है।

विज्ञापन खत्म नहीं हुआ, उसका रास्ता बदल गया

न्यूज ऑर्गनाइजेशंस की समस्या सिर्फ यह नहीं है कि विज्ञापन कम हो रहा है। असली बदलाव यह है कि विज्ञापन का पैसा अब ऐसे सिस्टम के जरिए जा रहा है, जिसे पब्लिशर्स खुद नियंत्रित नहीं करते। कोई डिजिटल प्लेटफॉर्म किसी न्यूज क्लिप के साथ टारगेटेड विज्ञापन दिखा सकता है, लेकिन उस खबर को तैयार करने वाली पत्रकारिता के लिए सीधे भुगतान जरूरी नहीं है। पब्लिशर्स बड़ी ऑनलाइन ऑडियंस तो बना सकते हैं, लेकिन उन व्यूज को भरोसेमंद कमाई में बदलना अब भी मुश्किल है।

सब्सक्रिप्शन, डोनेशन, इवेंट्स और ब्रैंडेड कंटेंट से कुछ मदद मिल रही है, लेकिन ज्यादातर मीडिया संस्थानों के लिए इनमें से कोई भी मॉडल अभी पुराने विज्ञापन मॉडल जितनी कमाई नहीं दे पाया है।

टीवी न्यूज में बढ़ी ध्यान खींचने की होड़

टेलीविजन न्यूज भी इस दबाव को रोजाना महसूस कर रहा है। दर्शकों का ध्यान खींचने की होड़ में तेज बहस और नाटकीय टकराव कई बार शांत तरीके से की गई रिपोर्टिंग से ज्यादा आसानी से बिकते हैं। कई कार्यक्रमों में नेताओं को एक-दूसरे पर आरोप लगाने का काफी समय मिलता है, जबकि रिपोर्टरों के लिए यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि वास्तव में हुआ क्या और उसका महत्व क्या है।

यह सिर्फ प्रस्तुति की शैली का मामला नहीं है। जब खबर की जांच-पड़ताल से ज्यादा जोर प्रदर्शन पर होने लगे, तो दर्शक के लिए खबर की उपयोगिता कम हो सकती है। रॉयटर्स इंस्टीट्यूट ने 2025 में भारत के टेलीविजन न्यूज क्षेत्र को काफी ध्रुवीकृत बताया था। इसी साल के इंडस्ट्री आंकड़ों में लीनियर टीवी विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन से होने वाली आय में गिरावट भी दिखाई गई।

न्यूज पर भरोसे की तस्वीर एक जैसी नहीं

इसका असर दर्शकों और न्यूज ब्रैंड्स के बीच रिश्ते पर भी दिखाई देता है। हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि हर जगह न्यूज पर भरोसा कम हो रहा है। 

रॉयटर्स इंस्टीट्यूट के 2025 के सर्वे में भारत के 43 फीसदी लोगों ने कहा कि वे ज्यादातर समय ज्यादातर खबरों पर भरोसा करते हैं। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 2 फीसदी ज्यादा था। लेकिन इसका मतलब यह भी है कि बहुमत ने यह नहीं कहा कि उन्हें ज्यादातर खबरों पर भरोसा है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अलग-अलग न्यूज ब्रैंड्स को लेकर भरोसे का स्तर अलग रहा।

पुराने प्रिंट ब्रैंड्स और सार्वजनिक प्रसारकों को आम तौर पर बेहतर भरोसा मिला, जबकि कुछ ऐसे मीडिया संस्थानों पर भरोसा कम रहा जिन्हें दर्शक राजनीति के किसी एक पक्ष के साथ ज्यादा जुड़ा हुआ मानते हैं। इसलिए मुद्दा पूरे भारतीय मीडिया को लेकर एक ही फैसला देने का नहीं है। असल स्थिति यह है कि ऑडियंस बंटी हुई है और कई बार उसे लगता है कि कोई चैनल या प्रकाशन तथ्य देखने से पहले ही अपना पक्ष चुन चुका है।

सर्वे के आंकड़ों को समझना भी जरूरी

इन आंकड़ों को संदर्भ के साथ देखना जरूरी है। रॉयटर्स इंस्टीट्यूट का सर्वे मुख्य रूप से अंग्रेजी बोलने वाले ऑनलाइन न्यूज यूजर्स के बीच किया गया था। भारत की कुल आबादी और न्यूज ऑडियंस की तुलना में यह एक छोटा हिस्सा है।

इंस्टीट्यूट खुद कहता है कि इसके नतीजे पूरे देश का प्रतिनिधित्व नहीं करते और इनमें टेलीविजन व प्रिंट की लगातार बनी हुई अहमियत कम दिखाई दे सकती है। यह सर्वे हर भाषा, राज्य या आय वर्ग की स्थिति नहीं बताता। फिर भी यह इस बात को समझने में मदद करता है कि इंटरनेट से जुड़े लोग अपनी न्यूज की आदतें कैसे बदल रहे हैं और उन्हें मिलने वाली खबरों को किस तरह देखते हैं।

लोग अब सीधे न्यूज चैनल नहीं, प्लेटफॉर्म के जरिए खबर देखते हैं

अब लोग हमेशा सीधे किसी अखबार या न्यूज चैनल की वेबसाइट या ऐप पर जाकर खबर नहीं देखते। वे अक्सर किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए खबर तक पहुंचते हैं। रॉयटर्स इंस्टीट्यूट के 2025 के भारत से जुड़े सैंपल में 55 फीसदी लोगों ने खबरों के लिए यूट्यूब का इस्तेमाल किया। 46 फीसदी ने व्हाट्सऐप, 37 फीसदी ने इंस्टाग्राम और 36 फीसदी ने फेसबुक का इस्तेमाल किया।

इन प्लेटफॉर्म्स को लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी के साथ आसानी से जोड़ लेते हैं। सफर के दौरान छोटा वीडियो देखना, परिवार के ग्रुप में कोई लिंक मिलना या दोस्त का कोई वीडियो भेजना अब आम बात है। इसका एक फायदा यह है कि दर्शक अपनी पसंद के ऐसे प्रेजेंटर को चुन सकते हैं जो उनकी भाषा में बात करता हो, किसी मुद्दे पर ज्यादा समय देता हो या ऐसे सवाल पूछता हो जिन्हें वे पारंपरिक मीडिया में कम देखते हैं।

स्वतंत्र न्यूज क्रिएटर्स का बढ़ता असर

यही वजह है कि स्वतंत्र न्यूज क्रिएटर्स तेजी से सामने आ रहे हैं। इनमें कुछ ऐसे हैं जो उन मुद्दों पर रिपोर्टिंग और संदर्भ देते हैं जिन्हें दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर ज्यादा जगह नहीं मिलती। हालांकि, कुछ लोग रिपोर्टर के बजाय कमेंटेटर होते हैं और दर्शकों के लिए दोनों के बीच अंतर हमेशा साफ नहीं होता।

किसी व्यक्ति के बहुत ज्यादा फॉलोअर्स होने का मतलब यह नहीं है कि उसकी हर बात की जांच भी की गई है। स्वतंत्र क्रिएटर्स को न्यूजरूम की तुलना में ज्यादा आजादी मिल सकती है, लेकिन उनके पास संपादकों की टीम, सुधार की तय प्रक्रिया या हर जानकारी की जांच करने के लिए पर्याप्त समय और संसाधन हमेशा नहीं होते।

इसके अलावा, डिजिटल प्लेटफॉर्म उन वीडियो को ज्यादा आगे बढ़ाते हैं जो लोगों का ध्यान बनाए रखते हैं। ऐसे में गुस्सा और पूरी तरह निश्चित अंदाज में कही गई बातें कई बार सावधानी से रखी गई जानकारी से ज्यादा तेजी से फैल सकती हैं।

रॉयटर्स इंस्टीट्यूट के मुताबिक, 38 फीसदी लोगों ने सोशल और वीडियो प्लेटफॉर्म्स पर न्यूज के लिए क्रिएटर्स या इन्फ्लुएंसर्स पर नियमित रूप से ध्यान देने की बात कही। वहीं 34 फीसदी लोग वहां नियमित रूप से न्यूज ब्रैंड्स या पत्रकारों को फॉलो करते थे। यह आंकड़ा लोगों के ध्यान में बदलाव दिखाता है। इसका मतलब यह नहीं है कि क्रिएटर्स ने रिपोर्टरों की जगह ले ली है या लोग उनकी हर बात पर भरोसा करते हैं।

यहां एक मौका भी है। पत्रकार सीधे दर्शकों से जुड़ सकते हैं और किसी ब्रॉडकास्टर के तय शेड्यूल से बाहर भी जांच-पड़ताल कर सकते हैं। लेकिन खतरा यह है कि किसी व्यक्ति पर आधारित न्यूज फीड में रिपोर्टिंग, राय और प्रमोशन के बीच अंतर धुंधला हो सकता है।

अखबारों के सामने भी चुनौती

अखबार भी मुश्किल बाजार के हिसाब से खुद को बदल रहे हैं। हालांकि, उनके जल्द खत्म हो जाने की बातें उपलब्ध आंकड़ों से पूरी तरह साबित नहीं होतीं।

ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशंस के जनवरी से जून 2022 के ऑडिट में रिपोर्ट की गई सर्कुलेशन संख्या पिछले ऑडिट के मुकाबले 20 से 30 फीसदी कम थी। लेकिन इस तुलना को सावधानी से देखना जरूरी है। महामारी के बाद कुछ पब्लिशर्स ने अपनी कुछ एडिशन की जानकारी जमा नहीं की थी। इसलिए इस गिरावट को पूरे भारत में पाठकों की संख्या में सीधी गिरावट नहीं माना जा सकता।

2025 की पहली छमाही के लिए एबीसी की रिपोर्ट में हिंदी और दक्षिण भारतीय भाषाओं समेत कई क्षेत्रीय एडिशन की सर्कुलेशन में गिरावट दिखाई दी। हालांकि, कुछ अखबार और बाजार बेहतर स्थिति में भी रहे हैं। प्रिंट अब भी महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका भविष्य पहले की तरह तय नहीं माना जा सकता।

प्रेस रजिस्ट्रार जनरल की सालाना 'प्रेस इन इंडिया' रिपोर्ट भी सर्कुलेशन से जुड़ा आंकड़ा देती है। हालांकि, इसके आंकड़े काफी हद तक पब्लिशर्स की ओर से दी गई जानकारी पर आधारित होते हैं। इनमें से सिर्फ कुछ आंकड़ों की प्रेस सूचना ब्यूरो द्वारा पुष्टि की जाती है।

इस सीमा को ध्यान में रखना जरूरी है, खासकर तब जब अलग-अलग वर्षों या पाठकों की संख्या की व्यापक तुलना की जा रही हो।

डिजिटल पाठकों के बावजूद कमाई की चुनौती

कुछ खास एडिशन की बिक्री में गिरावट और लोगों का डिजिटल पढ़ने की ओर बढ़ना पब्लिशर्स के लिए वास्तविक चिंता है। अखबारों ने वेबसाइट, ऐप, वीडियो, इवेंट्स और पेड एक्सेस जैसे कई रास्ते अपनाए हैं। लेकिन ऑनलाइन पाठकों की संख्या बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि प्रिंट से होने वाली कमाई भी उसी तरह वापस आ जाएगी।

इसकी एक वजह यह भी है कि डिजिटल विज्ञापन का बड़ा हिस्सा ऐसे प्लेटफॉर्म्स के पास जा रहा है, जिन्हें न्यूज पब्लिशर्स नियंत्रित नहीं करते।

मालिकाना हक और राजनीतिक प्रभाव का सवाल

कमाई का दबाव मीडिया के मालिकाना हक और राजनीतिक प्रभाव के सवाल को भी महत्वपूर्ण बनाता है। मीडिया मालिकों के कारोबारी हित, सरकारी रिश्ते और राजनीतिक विचार हो सकते हैं। ये चीजें बिना किसी सीधे निर्देश के भी न्यूजरूम के काम को प्रभावित कर सकती हैं। कोई खबर देर से प्रकाशित हो सकती है, उसे कम जगह मिल सकती है या उस पर काम करने के लिए कम संसाधन लगाए जा सकते हैं।

सरकारें भी नियमों और सरकारी विज्ञापन के जरिए प्रभाव डाल सकती हैं। छोटे मीडिया संस्थान कई बार सरकारी विज्ञापन पर ज्यादा निर्भर होते हैं।

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने चिंता जताई है कि सरकारी विज्ञापन न्यूज ऑर्गनाइजेशंस को दबाव के प्रति संवेदनशील बना सकता है। यह एक प्रेस-फ्रीडम संगठन का आकलन है। लेकिन इससे एक सीधा सवाल जरूर उठता है- अगर कोई ताकतवर विज्ञापनदाता या मालिक किसी खबर से असहमत हो, तो क्या मीडिया संस्थान उस पर खुलकर रिपोर्टिंग कर पाएगा?

कुछ बड़े कारोबारी समूहों के हाथों में मीडिया का नियंत्रण

मीडिया के मालिकाना हक का एक और मुद्दा इसका बढ़ता केंद्रीकरण है। रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स की 2025 की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में मीडिया का नियंत्रण कुछ बड़े कारोबारी समूहों के हाथों में ज्यादा केंद्रित हो रहा है और संगठन ने इसे राजनीतिक प्रभाव से भी जोड़ा है।

यह उस संगठन का आकलन है। इसका मतलब यह नहीं है कि किसी बड़े कारोबारी समूह के स्वामित्व वाले हर मीडिया संस्थान की संपादकीय लाइन एक जैसी है। व्यापक चिंता यह है कि जब मालिकाना हक, वितरण और विज्ञापन कुछ ही हाथों में ज्यादा केंद्रित हो जाएं, तो स्वतंत्र आवाजों के लिए बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचना और ताकतवर हितों को चुनौती देना मुश्किल हो सकता है।

भारत में न्यूज का भविष्य एक ही माध्यम का नहीं होगा

भारत में न्यूज का भविष्य किसी एक फॉर्मेट तक सीमित नहीं रहेगा। टेलीविजन लाखों लोगों तक पहुंचता रहेगा। प्रिंट कई पाठकों के लिए भरोसेमंद रिपोर्टिंग का माध्यम बना रहेगा। वहीं डिजिटल क्रिएटर्स उन लोगों को आकर्षित करते रहेंगे जो अलग आवाज या किसी प्रेजेंटर से ज्यादा सीधा जुड़ाव चाहते हैं।

असल चुनौती यह है कि ये सभी माध्यम ऐसी पत्रकारिता को बनाए रख पाएं जो दावों की जांच करे, गलतियों को सुधारे और सिर्फ उन खबरों पर ध्यान न दे जो सबसे ज्यादा क्लिक ला सकती हैं। इसके लिए मजबूत संपादकीय मानकों और कमाई के कई स्रोतों की जरूरत होगी। इसमें सब्सक्रिप्शन, मेंबरशिप, डोनेशन और ऐसा विज्ञापन शामिल हो सकता है जो किसी एक ताकतवर स्रोत पर निर्भर न हो।

मीडिया संस्थानों के लिए मालिकाना हक और गलतियों को सुधारने की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता भी जरूरी होगी। दर्शकों की भी इसमें भूमिका है। उन्हें यह देखना चाहिए कि खबर किसने तैयार की है, उसके पीछे क्या सबूत हैं और सामने रखी गई बात न्यूज है या राय।

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने खबर प्रकाशित करना आसान और उसे लोगों तक पहुंचाना तेज जरूर कर दिया है। लेकिन इससे सावधानी से की जाने वाली पत्रकारिता की जरूरत कम नहीं हुई है। बल्कि खबरों की बढ़ती संख्या के बीच सही जानकारी की जरूरत पहले की तरह महत्वपूर्ण बनी हुई है। 

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e4m रियल टाइम प्रोग्रामैटिक कॉन्फ्रेंस: DOOH व प्रोग्रामेटिक विज्ञापन पर होगी चर्चा

प्रोग्रामेटिक विज्ञापन के बढ़ते चलन से आउट-ऑफ-होम (OOH) सेक्टर के लिए नए मौके खुल रहे हैं।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 28 September, 2026
Last Modified:
Monday, 28 September, 2026
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प्रोग्रामेटिक विज्ञापन के बढ़ते चलन से आउट-ऑफ-होम (OOH) सेक्टर के लिए नए मौके खुल रहे हैं। इसमें डिजिटल आउट-ऑफ-होम (DOOH) विज्ञापनदाताओं और ब्रैंड्स के लिए खास दिलचस्पी वाला क्षेत्र बनकर सामने आ रहा है। इसी विषय पर चर्चा के लिए इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स 30 सितंबर को e4m Real Time Programmatic Conference के पांचवें एडिशन में एक साथ आएंगे और कई अहम मुद्दों पर अपनी राय साझा करेंगे।

इस कॉन्फ्रेंस का एक प्रमुख आकर्षण ‘Programmatic DOOH: Bridging Digital & Physical’ विषय पर होने वाला पैनल डिस्कशन होगा। इसमें पैनलिस्ट चर्चा करेंगे कि प्रोग्रामेटिक टेक्नोलॉजी किस तरह OOH विज्ञापन खरीदने के तरीके को बदल रही है। इससे विज्ञापनदाताओं को ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी और ऑडियंस को ज्यादा सटीक तरीके से टारगेट करने की सुविधा मिल रही है।

चर्चा में यह भी देखा जाएगा कि रियल-टाइम टारगेटिंग और डायनेमिक क्रिएटिव्स किस तरह DOOH कैंपेन को ज्यादा प्रासंगिक और जरूरत के हिसाब से तुरंत बदलाव करने वाला बना रहे हैं।

पैनल में सुमन पाल, हेड ऑफ मीडिया, एनालिटिक्स एंड पार्टनरशिप्स, विप्रो कंज्यूमर केयर एंड लाइटनिंग; डॉली दावड़ा, हेड-मार्केटिंग, बुकमायशो; मिखिल राज, सीपीओ, ब्लूस्टोन; रवींद्र शर्मा, ईवीपी और चीफ ऑफ ब्रैंड, कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस एंड सीएसआर, एसबीआई लाइफ और प्रियंका बिसेन शाह, हेड ऑफ डिजिटल मार्केटिंग, बजाज ऑटो लिमिटेड शामिल हैं।

इस पैनल का संचालन हरेश नायक, फाउंडर एंड सीईओ, कनेक्ट नेटवर्क इंक. करेंगे।

DOOH कैंपेन की प्रभावशीलता मापना अहम

DOOH का इकोसिस्टम जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे मेजरमेंट और एट्रिब्यूशन भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं। पैनलिस्ट इस बात पर चर्चा करेंगे कि ब्रैंड्स और एजेंसियां अपने कैंपेन की प्रभावशीलता को किस तरह माप सकती हैं, सही एट्रिब्यूशन फ्रेमवर्क कैसे तैयार किया जा सकता है और OOH एक्सपोजर को कंज्यूमर के एक्शन से किस तरह जोड़ा जा सकता है।

इस चर्चा में मोबाइल और लोकेशन डेटा का इस्तेमाल भी एक अहम मुद्दा होगा। इससे ऑडियंस की आवाजाही को समझने, बेहतर टारगेटिंग करने और DOOH व डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच ज्यादा जुड़ा हुआ एक्सपीरियंस तैयार करने में मदद मिल सकती है।

पैनल में अलग-अलग सेक्टर्स में DOOH के नए इस्तेमाल के तरीकों पर भी चर्चा होगी। इसके साथ ही यह देखा जाएगा कि भारत में कैंपेन को बड़े स्तर पर चलाने में प्रोग्रामेटिक टेक्नोलॉजी की क्या भूमिका हो सकती है।

चर्चा में यह भी समझने की कोशिश की जाएगी कि प्रोग्रामेटिक OOH इकोसिस्टम को बड़े स्तर पर विकसित करने के लिए किन चीजों की जरूरत है और विज्ञापनदाता जब ज्यादा एफिशिएंसी, फ्लेक्सिबिलिटी और मापने योग्य नतीजे चाहते हैं, तो आने वाले समय में यह माध्यम किस तरह बदल सकता है। 

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MRUCI के चेयरमैन बने रहेंगे विक्रम सखूजा, ध्रुब मुखर्जी फिर होंगे वाइस चेयरमैन

मेडिसन वर्ल्ड के पार्टनर और डायरेक्टर विक्रम सखूजा और ABP प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ ध्रुब मुखर्जी अपने-अपने पदों पर बने रहेंगे।

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Published - Monday, 28 September, 2026
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Monday, 28 September, 2026
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मेडिसन वर्ल्ड के पार्टनर और डायरेक्टर विक्रम सखूजा और ABP प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ ध्रुब मुखर्जी अपने-अपने पदों पर बने रहेंगे। विक्रम सखूजा MRUCI के चेयरमैन और ध्रुब मुखर्जी वाइस चेयरमैन के तौर पर काम जारी रखेंगे।

दोनों को MRUCI की बोर्ड बैठक में सर्वसम्मति से दोबारा चुना गया। यह बोर्ड बैठक कंपनी की एजीएम के तुरंत बाद हुई।

इसके साथ ही बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में नए सदस्यों की नियुक्ति भी की गई है। इनमें शामिल हैं:

  1. समुद्र भट्टाचार्य, सीईओ – प्रिंट एंड रेडियो, एचटी मीडिया लिमिटेड
  2. जान्हवी अभिजीत पवार, डायरेक्टर, सकाल मीडिया प्राइवेट लिमिटेड
  3. कार्तिक शर्मा, सीईओ, ओम्निकॉम मीडिया, इंडिया
  4. नवीन खेमका, प्रेसिडेंट, क्लाइंट सॉल्यूशंस, डब्ल्यूपीपी मीडिया साउथ एशिया

IRS की वापसी अहम समय पर: विक्रम सखूजा

विक्रम सखूजा ने कहा कि IRS की वापसी भारतीय मीडिया इंडस्ट्री के लिए बेहद अहम समय पर हो रही है। नया IRS एक आधुनिक और मजबूत मापन व्यवस्था उपलब्ध कराएगा, जो सिर्फ पहुंच यानी रीच तक सीमित नहीं रहेगा।

उन्होंने कहा कि यह बदलते मीडिया माहौल को ध्यान में रखेगा, जिसमें ट्रस्ट, अटेंशन और डिजिटल कंजम्पशन भी शामिल हैं।

सखूजा ने कहा कि वह इसके लॉन्च को लेकर उत्साहित हैं और इससे मीडिया बजट को ज्यादा जानकारी और संतुलन के साथ इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी। साथ ही, हर मीडिया माध्यम को एक भरोसेमंद और साझा करेंसी से फायदा मिल सकेगा।

IRS को दोबारा शुरू करना इंडस्ट्री का सामूहिक प्रयास: ध्रुब मुखर्जी

ध्रुब मुखर्जी ने वोट ऑफ थैंक्स देते हुए MRUCI बोर्ड, टेक्निकल कमेटी और सभी सदस्यों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि नए IRS के लिए अप्रोच तैयार करने में सभी ने लगातार मेहनत और प्रतिबद्धता दिखाई है।

उन्होंने कहा कि IRS को दोबारा शुरू करना पूरी इंडस्ट्री का सामूहिक मिशन है। यह प्रगति MRUCI के सदस्यों के उस साझा विश्वास और संकल्प के बिना संभव नहीं होती कि एक भरोसेमंद, आधुनिक और क्रॉस-मीडिया करेंसी की जरूरत है।

उन्होंने सभी स्टेकहोल्डर्स का भी आभार जताया।

38 साल से मीडिया इंडस्ट्री में हैं विक्रम सखूजा

मेडिसन वर्ल्ड के पार्टनर और डायरेक्टर विक्रम सखूजा को मीडिया इंडस्ट्री में 38 साल का अनुभव है। वह इससे पहले मैक्सस वर्ल्डवाइड के ग्लोबल सीईओ, ग्रुपएम साउथ एशिया के सीईओ और माइंडशेयर साउथ एशिया के सीईओ रह चुके हैं।

उन्होंने पीएंडजी, कोका-कोला और स्टार टीवी में मार्केटिंग, मीडिया और मार्केट रिसर्च से जुड़े वरिष्ठ पदों पर भी काम किया है।

विक्रम सखूजा ने एएससीआई, एबीसी, आरएससीआई, बार्क, फिक्की, एसोचैम और एएएआई जैसी कई इंडस्ट्री संस्थाओं के बोर्ड और कमेटियों में भी काम किया है। उन्होंने आईएसए, आईएनएस और आईबीडीएफ की कमेटियों के साथ भी काम किया है।

वह फिलहाल बार्क की टेक्निकल कमेटी के चेयरमैन, एबीसी के बोर्ड सदस्य और एड क्लब के पूर्व प्रेसिडेंट हैं। उन्हें इकनॉमिक टाइम्स की ओर से भारतीय मीडिया के सबसे प्रभावशाली लोगों में लगातार शामिल किया गया है।

दो दशक से ज्यादा समय से ABP से जुड़े हैं ध्रुब मुखर्जी

ABP प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ ध्रुब मुखर्जी 1997 में कंपनी से जुड़े थे। उन्होंने मैनेजमेंट ट्रेनी के तौर पर अपना करियर शुरू किया।

ABP में दो दशक से ज्यादा के अपने करियर के दौरान उन्होंने ब्रांड मैनेजमेंट, ऑडियंस डेवलपमेंट, एडवर्टाइजमेंट सेल्स और प्रोडक्शन से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। इसके बाद उन्होंने कंपनी के सीईओ का पद संभाला।

 

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HT Media के समुद्र भट्टाचार्य MRUCI के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में शामिल

HT Media Ltd. के सीईओ (Print and Radio) समुद्र भट्टाचार्य को मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल इंडिया (MRUCI) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में शामिल किया गया है।

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Published - Monday, 28 September, 2026
Last Modified:
Monday, 28 September, 2026
Samudra Bhattacharya

HT Media Ltd. के सीईओ (Print and Radio) समुद्र भट्टाचार्य को मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल इंडिया (MRUCI) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में शामिल किया गया है।

समुद्र भट्टाचार्य के साथ बोर्ड में तीन अन्य नए सदस्यों की भी नियुक्ति की गई है। इनमें Sakal Media Pvt. Ltd. की डायरेक्टर जान्हवी अभिजीत पवार, Omnicom Media, India के सीईओ कार्तिक शर्मा और WPP Media South Asia के प्रेजिडेंट (Client Solutions) नवीन खेमका शामिल हैं।

ये नियुक्तियां ऐसे समय हुई हैं, जब MRUCI इंडियन रीडरशिप सर्वे (IRS) को फिर से शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है। संगठन के अनुसार, नया IRS मीडिया खपत के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए एक आधुनिक क्रॉस-मीडिया मेजरमेंट फ्रेमवर्क उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा।

बता दें कि समुद्र भट्टाचार्य पूर्व में Pepsi में वरिष्ठ नेतृत्व की भूमिकाओं में रह चुके हैं।

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जान्हवी अभिजीत पवार एमआरयूसीआई बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में नियुक्त

सकाल मीडिया की निदेशक जान्हवी अभिजीत पवार को एमआरयूसीआई बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में नियुक्त किया गया है। एजीएम में तीन अन्य सदस्य भी शामिल हुए, जबकि विक्रम सखूजा और ध्रुबा मुखर्जी फिर चुने गए।

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Published - Monday, 28 September, 2026
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Monday, 28 September, 2026
mruci

सकाल मीडिया (Sakal Media) की निदेशक जान्हवी अभिजीत पवार (Janhavi Abhijit Pawar) को मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल इंडिया (Media Research Users Council India) यानी एमआरयूसीआई (MRUCI) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (Board of Governors) में नियुक्त किया गया है। यह घोषणा सोमवार, 28 सितंबर को आयोजित एमआरयूसीआई की 32वीं वार्षिक आम बैठक (Annual General Meeting) में की गई।

जान्हवी पवार के साथ तीन अन्य सदस्यों को भी बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में शामिल किया गया है। इनमें एचटी मीडिया लिमिटेड (HT Media Ltd.) के प्रिंट और रेडियो के सीईओ समुद्र भट्टाचार्य (Samudra Bhattacharya), ओम्निकॉम मीडिया इंडिया (Omnicom Media, India) के सीईओ कार्तिक शर्मा (Kartik Sharma) और डब्ल्यूपीपी मीडिया साउथ एशिया (WPP Media South Asia) के प्रेसिडेंट, क्लाइंट सॉल्यूशंस नवीन खेमका (Navin Khemka) शामिल हैं।

बैठक में यह भी घोषणा की गई कि मैडिसन वर्ल्ड (Madison World) के पार्टनर और निदेशक विक्रम सखूजा (Vikram Sakhuja) तथा एबीपी प्राइवेट लिमिटेड (ABP Pvt. Ltd.) के सीईओ ध्रुबा मुखर्जी (Dhruba Mukherjee) एमआरयूसीआई के क्रमशः चेयरमैन (Chairman) और वाइस चेयरमैन (Vice Chairman) के पद पर बने रहेंगे। एजीएम के तुरंत बाद हुई एमआरयूसीआई की बोर्ड बैठक में दोनों को उनके पदों पर सर्वसम्मति से फिर से चुना गया।

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WPP Media के नवीन खेमका को MRUCI के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में मिली जगह

मैडिसन वर्ल्ड के पार्टनर व डायरेक्टर विक्रम सखूजा, और एबीपी प्रा. लि. के सीईओ ध्रुब मुखर्जी अपने-अपने पदों पर बने रहेंगे। दोनों को MRUCI के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के रूप में दोबारा चुना गया है।

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Published - Monday, 28 September, 2026
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Monday, 28 September, 2026
Navin Khemka

जानी-मानी मीडिया रिसर्च संस्था मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल इंडिया (MRUCI) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में नवीन खेमका को नियुक्त किया गया है। खेमका फिलहाल WPP Media South Asia में प्रेजिडेंट (क्लाइंट सॉल्यूशंस) के पद पर कार्यरत हैं। उनकी नियुक्ति की घोषणा 28 सितंबर को आयोजित MRUCI की 32वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में की गई।

नवीन खेमका जुलाई 2025 से WPP Media South Asia में प्रेजिडेंट, क्लाइंट सॉल्यूशंस की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इससे पहले वह EssenceMediacom में सीईओ (South Asia) के पद पर थे। उन्हें मीडिया और मार्केटिंग क्षेत्र में 25 साल से अधिक का अनुभव है।

नवीन खेमका के साथ तीन अन्य सदस्यों को भी MRUCI के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में नियुक्त किया गया है। इनमें एचटी मीडिया के CEO (Print and Radio) समुद्र भट्टाचार्य; Omnicom Media, India के सीईओ कार्तिक शर्मा, सकाल मीडिया की डायरेक्टर जान्हवी अभिजीत पवार शामिल हैं।

AGM के दौरान MRUCI के मौजूदा नेतृत्व को लेकर भी घोषणा की गई। मैडिसन वर्ल्ड के पार्टनर व डायरेक्टर विक्रम सखूजा और एबीपी प्रा. लि. के सीईओ ध्रुब मुखर्जी अपने-अपने पदों पर बने रहेंगे। दोनों को MRUCI के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के रूप में दोबारा चुना गया है। यह चुनाव AGM के तुरंत बाद हुई MRUCI बोर्ड की बैठक में सर्वसम्मति से हुआ।

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वरिष्ठ पत्रकार आशिफ एकबाल के नेतृत्व में जल्द लॉन्च होगा BIG24 न्यूज

समाचार4मीडिया से बातचीत में आशिफ एकबाल ने बताया कि नोएडा के सेक्टर-63 के एच ब्लॉक में चैनल का कार्यालय और न्यूजरूम तैयार किया जा रहा है।

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Published - Monday, 28 September, 2026
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Monday, 28 September, 2026
Big 24

वरिष्ठ पत्रकार आशिफ एकबाल के नेतृत्व में जल्द नया डिजिटल हिंदी नेशनल न्यूज चैनल BIG24 न्यूज लॉन्च होने जा रहा है। समाचार4मीडिया से बातचीत में आशिफ एकबाल ने बताया कि नोएडा के सेक्टर-63 के एच ब्लॉक में चैनल का कार्यालय और न्यूजरूम तैयार किया जा रहा है। हाई-टेक इक्विपमेंट्स के साथ चैनल से जुड़े काम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

एकबाल ने बताया कि BIG24 न्यूज का विधिवत उद्घाटन केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और सत्ता-पक्ष व विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी में होगा, इसके लिए तैयारियां चल रही हैं। आशिफ एकबाल ने बताया कि वह इस चैनल में सीईओ और एडिटर-इन-चीफ की दोहरी जिम्मेदारी निभाएंगे।

बता दें कि मीडिया जगत में दो दशकों से ज्यादा का अनुभव रखने वाले आशिफ एकबाल पूर्व में हिंदी न्यूज चैनल ‘जनतंत्र टीवी’ (JANTANTRA TV) और नेशनल चैनल ‘न्यूज इंडिया’ (News India) समेत तमाम चैनल्स में अहम भूमिका निभा चुके हैं।

अपने खास साप्ताहिक शो हॉट सीट और डेली शो 8 PM के जरिए टीवी पर अपनी अलग पहचान बनाने वाले आशिफ एकबाल को अपनी बेहतरीन टीवी रिपोर्ट्स के लिए अब तक तमाम अवॉर्ड्स से सम्मानित किया जा चुका है। BIG24 न्यूज को लॉन्च करने की तैयारियों के बीच चैनल में बड़े चेहरों के जुड़ने की भी खबर है। देश के कई राज्यों में रिपोर्टरों की टीम तैयार की जा रही है, ताकि चैनल के नेटवर्क को विस्तार दिया जा सके।

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वरिष्ठ पत्रकार एनके कुरुप का निधन : 72 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

वरिष्ठ पत्रकार और ‘द हिंदू बिजनेसलाइन’ के पूर्व संपादक एनके कुरुप का 26 सितंबर 2026 को केरल में निधन हो गया। वह 72 वर्ष के थे और 2014 में रिटायर हुए थे।

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Published - Monday, 28 September, 2026
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Monday, 28 September, 2026
nkkurup

वरिष्ठ पत्रकार और द हिंदू बिजनेसलाइन (The Hindu BusinessLine) के पूर्व संपादक करुणाकरा कुरुप (Karunakara Kurup), जिन्हें एनके कुरुप (NK Kurup) के नाम से जाना जाता था, का 26 सितंबर 2026 को केरल में निधन हो गया। वह 72 वर्ष के थे।

एनके कुरुप ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत द इकोनॉमिक टाइम्स (The Economic Times) और द फाइनेंशियल एक्सप्रेस (The Financial Express) के मुंबई ब्यूरो से की थी। इसके बाद वह द हिंदू ग्रुप (The Hindu Group) से जुड़े और बिजनेस जर्नलिज्म (Business Journalism) में लंबा करियर बनाया।

कुरुप ने द हिंदू बिजनेसलाइन के संपादक के तौर पर भी जिम्मेदारी संभाली। वह 2014 में रिटायर हुए थे। अपने करियर के दौरान वह कई युवा पत्रकारों के मेंटर (Mentor) भी रहे।

सहकर्मियों और दोस्तों ने उन्हें उनके संपादकीय फैसलों (Editorial Judgement) और ईमानदारी के लिए याद किया। उनके करीबियों के मुताबिक, उनका स्वभाव गर्मजोशी भरा और देखभाल करने वाला था। उन्हें उनके खुशमिजाज व्यक्तित्व के लिए भी याद किया जाता है।

एनके कुरुप अपने पीछे पत्नी सुखदा कुरुप (Sukhada Kurup), बेटे शरत कुरुप (Sarat Kurup) और बहू उर्वशी नेगी (Urvashi Negi) को छोड़ गए हैं। उनका अंतिम संस्कार 27 सितंबर को सुबह 11:30 बजे किया गया।

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मुंबई में 29 सितंबर को होगा ब्रॉडकास्ट एंड मीडिया टेक्नोलॉजी सेमिनार

मुंबई में 29 सितंबर को ब्रॉडकास्ट एंड मीडिया टेक्नोलॉजी सेमिनार आयोजित होगा। इसमें डॉ. अनुराग बत्रा मुख्य वक्तव्य देंगे और विशेषज्ञ मीडिया के भविष्य पर चर्चा करेंगे।

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Published - Monday, 28 September, 2026
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Monday, 28 September, 2026
besseminar

ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग सोसाइटी (इंडिया) (Broadcast Engineering Society (India)) के मुंबई चैप्टर की ओर से 29 सितंबर 2026 को मुंबई के दूरदर्शन केंद्र, वर्ली में ‘ब्रॉडकास्ट एंड मीडिया टेक्नोलॉजी सेमिनार 2026’ का आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष सेमिनार की थीम ‘ब्रॉडकास्टिंग बियॉन्ड बाउंड्रीज’ रखी गई है।

सेमिनार में प्रसारण और मीडिया क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों, तकनीकी विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और अन्य हितधारकों की भागीदारी होगी। इसमें उभरती तकनीकों और प्रसारण के भविष्य पर चर्चा की जाएगी।

एक दिवसीय सेमिनार में प्रसारण व्यवस्था में तेजी से हो रहे बदलाव और पारंपरिक प्रसारण तकनीकों के कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), आईपी आधारित वर्कफ्लो (IP-based workflows), क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर (Cloud Infrastructure), इमर्सिव ऑडियो (Immersive Audio), रिमोट प्रोडक्शन (Remote Production), डिजिटल रेडियो (Digital Radio), वर्चुअल प्रोडक्शन (Virtual Production), इंटेलिजेंट आर्काइव्स (Intelligent Archives) और कंटेंट सिक्योरिटी (Content Security) के साथ हो रहे मेल पर विचार किया जाएगा।

सेमिनार की शुरुआत उद्घाटन सत्र ‘विजन 2026: नेविगेटिंग द न्यू ब्रॉडकास्टिंग फ्रंटियर’ से होगी। इसमें ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग सोसाइटी (इंडिया) मुंबई के चेयरमैन और एडीजी (ई) आर. कृष्णदास स्वागत भाषण देंगे। इसके बाद सम्मानित अतिथि प्रवीण कुमार कावड़े, जोनल हेड (डब्ल्यूजेड), सुनील, प्रेसिडेंट एमेरिटस, प्रेसिडेंट-आईईटीई और चेयरमैन, इंजीनियरिंग काउंसिल ऑफ इंडिया तथा विशेष आमंत्रित राजत निगम, सीटीओ एवं हेड ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मीडिया ऑपरेशंस, जियोस्टार इंडिया अपने विचार रखेंगे।

बीडब्ल्यू बिजनेसवर्ल्ड के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा मुख्य वक्तव्य देंगे। वह बदलते प्रसारण परिदृश्य और इसके भविष्य को प्रभावित करने वाले अवसरों और चुनौतियों पर अपने विचार साझा करेंगे।

सेमिनार में प्रसारण तकनीक से जुड़े तीन तकनीकी सत्र होंगे। पहला सत्र ‘नेक्स्ट-एरा वीडियो आर्किटेक्चर्स: फ्रॉम कैमरा टू स्क्रीन’ होगा। इसमें इमर्सिव ऑडियो, रिमोट प्रोडक्शन, लो-लेटेंसी लाइव कंट्रीब्यूशन, एआई आधारित ब्रॉडकास्टिंग और एसएमपीटीई एसटी 2110 तथा आईपी आधारित प्रोडक्शन वर्कफ्लो पर चर्चा होगी।

दूसरे सत्र ‘डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ नेटवर्क: इंटेलिजेंट साउंड एंड मॉडर्न आर्काइव्स’ में डिजिटल युग में पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टिंग, डिजिटल रेडियो, कम्युनिटी रेडियो, एआई आधारित ऑडियो प्रोसेसिंग, एलईओ सैटेलाइट ब्रॉडकास्टिंग एवं कम्युनिकेशन तथा मीडिया एसेट मैनेजमेंट और इंटेलिजेंट आर्काइव्स जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

तीसरे और अंतिम तकनीकी सत्र ‘ब्रॉडकास्टिंग: क्लाउड प्लेआउट, सिक्योरिटी एंड वर्चुअल स्टूडियोज’ में आधुनिक ओटीटी आर्किटेक्चर, वर्चुअल प्रोडक्शन, क्लाउड-नेटिव ब्रॉडकास्टिंग और कंटेंट प्रोटेक्शन पर चर्चा होगी। इसमें डीआरएम और वॉटरमार्किंग तकनीक भी शामिल होगी।

प्रत्येक तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों की प्रस्तुतियां, चर्चा और ज्ञान साझा करने के साथ दर्शकों के सवाल-जवाब का सत्र होगा। इससे प्रतिभागियों को विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने और उभरती तकनीकों, उद्योग की कार्यप्रणाली तथा प्रसारण व्यवस्था में हो रहे बदलावों को समझने का अवसर मिलेगा।

ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग सोसाइटी (इंडिया) के मुंबई चैप्टर द्वारा आयोजित यह सेमिनार पेशेवर संवाद, तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान और प्रसारण की बदलती भूमिका पर सार्थक चर्चा के लिए एक मंच के रूप में आयोजित किया जा रहा है। तकनीक आधारित और तेजी से जुड़ती मीडिया दुनिया में प्रसारण के बदलते स्वरूप पर भी यहां व्यापक विचार-विमर्श होगा।

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कुणाल बिस्वास ABP Digital में ब्रैंड व मार्केटिंग के बने कंसल्टेंट

कुणाल बिस्वास ने ABP Digital में ब्रैंड व मार्केटिंग के कंसल्टेंट के तौर पर जॉइन किया है।

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Published - Monday, 28 September, 2026
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Monday, 28 September, 2026
KunalBiswas41

कुणाल बिस्वास ने ABP Digital में ब्रैंड व मार्केटिंग के कंसल्टेंट के तौर पर जॉइन किया है। उन्हें ब्रैंडेड कंटेंट, ब्रैंड सॉल्यूशंस, मार्केटिंग कम्युनिकेशन और इंटीग्रेटेड मार्केटिंग के क्षेत्र में 14 साल से ज्यादा का अनुभव है।

ABP Digital में दोबारा लौटने से पहले बिस्वास Jagran New Media में जनरल मैनेजर - ब्रैंडेड कंटेंट के पद पर काम कर रहे थे। इससे पहले वह Amarujala.com में सीनियर ब्रैंड मैनेजर रह चुके हैं। उन्होंने इससे पहले ABP Digital में ब्रैंडिंग और ब्रैंड सॉल्यूशंस से जुड़ी जिम्मेदारी भी संभाली थी।

अपने करियर के दौरान बिस्वास Madison World में स्ट्रैटेजी प्लानिंग के लिए बिजनेस डायरेक्टर के तौर पर काम किया और जागरण प्रकाशन लिमिटेड की यूनिट Jagran Solutions में स्ट्रैटेजिक प्लानिंग के मैनेजर के पद पर भी काम किया है। इसके अलावा उन्होंने कई अन्य भूमिकाओं में भी काम किया है।

 

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