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भूपेंद्र चौबे, नीलांजना भादुड़ी (HT), सुनेत्रा चौधरी(NDTV) बोलीं- रोज जूझते हैं इस समस्या से...
भूपेंद्र चौबे, नीलांजना भादुड़ी (HT), सुनेत्रा चौधरी(NDTV) बोलीं- रोज जूझते हैं इस समस्या से...
‘इंडियन पीआर एंड कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस कॉन्फ्रेंस 2018’ गुरुगाम के होटल लीला एंबियंस में 13 दिसंबर को...
समाचार4मीडिया ब्यूरो
7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो।।
‘इंडियन पीआर एंड कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस कॉन्फ्रेंस’ (IPRCCC) 13 दिसंबर को गुरुगाम के होटल लीला एंबियंस में आयोजित की गई। इस दौरान मीडिया इंडस्ट्री के तीन दिग्गज-‘NDTV 24/7’ की पॉलिटिकल एडिटर सुनेत्रा चौधरी, ‘CNN News18’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर भूपेंद्र चौबे और ‘HT Digital’ की चीफ कंटेंट ऑफिसर नीलांजना भादुड़ी झा एक मंच पर आए। तीनों दिग्गजों ने एंकर, एक्टर और यूट्यूबर चार्ल्स थॉमसन के साथ ‘Media penetration and how to ensure authenticity and credibility of information’ सब्जेक्ट पर चर्चा की।
इस दौरान NDTV 24/7 के शो ‘Reality check’ की एंकर सुनेत्रा चौधरी ने कहा, ‘हम जो काम करते हैं, उसमें फेक न्यूज की चर्चा बहुत प्रासंगिक है। आजकल यह एक बहुत बड़ी समस्या बन गई है। सच तो ये है कि आजकल सभी लोग फेक न्यूज से लड़ने का प्रयास कर रहे हैं।’
फेक न्यूज से मीडिया संस्थान किस तरह निपट सकते हैं? इसके बारे में सुनेत्रा चौधरी ने कहा, ‘फेक न्यूज से लड़ने के लिए तथ्यों की जांच के लिए आपको किसी बड़ी टीम की जरूरत नहीं है। साधारण उपाय आपके लिए मददगार साबित हो सकते हैं। उदाहरण के लिए- यदि कोई नेता किसी रैली में यह दावा करता है कि गांव के सभी घरों में बिजली पहुंचा दी गई है, तो इसमें ज्यादा कुछ नहीं करना है। इसे जांचने का सीधा सा उपाय है कि एक रिपोर्टर गांव में जाकर वहां के लोगों से बातचीत करे और उसके बाद व्युअर्स को बताए कि वहां के लोगों ने क्या कहा। फेक न्यूज से निपटने के लिए पत्रकारिता की पुरानी शैली को काफी लंबा रास्ता तय करना पड़ता है।’
इस बारे में भूपेंद्र चौबे ने कहा, ‘परंपरागत पत्रकारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये है कि पारंपरिक पीआर और सच्चाई के बीच का अंतर तेजी से घट रहा है। फेक न्यूज से निपटने का एक ही तरीका है कि लोगों को खुद ही और ज्यादा जागरूक होना पड़ेगा। अभी क्या होता है कि सरकार द्वारा जो डाटा दिए जाते हैं, उसकी व्याख्या कई तरह से की जा सकती है। ऐसे में यदि डाटा में कोई भी गड़बड़ होगी तो आप कैसे रियल और फेक न्यूज में अंतर कर सकते हैं।‘
इसके साथ ही भूपेंद्र चौबे ने कहा, ‘यदि अपनी बात करूं तो मैं वॉट्सऐप और ट्विटर से मिलने वाली इंफॉर्मेशन और डाटा पर कभी भरोसा नहीं करता हूं। या तो मैं खुद अथवा रिपोर्टर के द्वारा इसकी सत्यता की पुष्टि करता हूं। स्टोरी को पहले ब्रेक करने के चक्कर में कई बार रिपोर्टर भी फेक न्यूज के शिकार बन जाते हैं।’
वहीं, नीलांजना भादुड़ी झा का कहना था, ‘फेक न्यूज से निपटने के लिए जरूरी है कि न्यूज की पहले पुष्टि कर ली जाए। उदाहरण के लिए-कई बार हम देखते है कि चेकोस्लोवाकिया अथवा दुनिया के किसी अन्य हिस्से में कोई बिल्डिंग गिर जाती है और उसे इस तरह फैलाया जाता है कि मुंबई में इमारत गिर गई। न्यूजरूम में काम करने वाला मेरे जैसा प्रत्येक पत्रकार इस बात को सुनिश्चित करता है कि खबर जांच-पड़ताल के बाद ही आगे बढ़े।’
उन्होंने कहा, ‘हम अपने रिपोर्टर्स के साथ ही विश्वसनीय न्यूज एजेंसियों पर भरोसा करते हैं। यदि किसी भी न्यूज अथवा विडियो की हमारे पत्रकार पुष्टि नहीं करते हैं तो हम उसे नहीं चलाते हैं। हमने कई मौकों पर देखा है कि हम कोई न्यूज चलाते हैं तो देखादेखी दूसरे पोर्टल्स भी आंख मूंदकर उसे चलाने लगते हैं। हालांकि, इससे हमारे ऊपर ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है। इससे उन पोर्टल्स की क्रेडिबिलिटी जरूर प्रभावित होती है।’
वैसे अगर आप ये पूरा पैनल डिस्कशन देखना और सुनना चाहते हैं तो नीचे विडियो पर क्लिक कर सकते हैं। मीडिया के तीनों दिग्गजों ने इसमें कई इंटरेस्टिंग बातें भी कही है। साथ ही कुछ टिप्स भी दिए है कि कैसे आप फेक न्यूज का पता लगा सकते हैं....
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