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रोहित सरदाना की आशुतोष को शनि पूजा की सलाह, मिला ये जवाब...
पत्रकारों के बीच सोशल मीडिया पर विचारों का द्वंद्व आजकल आम बात हो...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो।।
पत्रकारों के बीच सोशल मीडिया पर विचारों का द्वंद्व आजकल आम बात हो गई है। विभिन्न मुद्दों पर अलग-अलग विचार रखने वाले पत्रकार अपनी-अपनी बात कहते हैं और फिर बहस का सिलसिला शुरू हो जाता है। फ़िलहाल ‘आजतक’ के रोहित सरदाना और सियासत की गलियों में घूमकर पत्रकारिता में वापसी करने वाले आशुतोष के बीच शब्दबाण चल रहे हैं। वैसे, इससे पहले भी दोनों पत्रकार विचारों के द्वंद्व का हिस्सा रह चुके हैं, लेकिन इस बार बात काफी दूर तक निकल गई है। दोनों के समर्थक भी उनका भरपूर साथ दे रहे हैं, हालांकि, दोनों यानी आशुतोष और रोहित ने एक-दूसरे को सवालों के जवाब तर्कों के साथ दिए।
दरअसल, इस बहस की शुरुआत हुई रोहित सरदाना के उस ट्वीट से जिसमें उन्होंने टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक खबर पर टिप्पणी की। खबर में जिक्र था कि कोच्चि यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के कुलपति ने उत्तर भारत के छात्रों को सरस्वती पूजा की इजाज़त नहीं दी। कुलपति का कहना था कि सेक्युलर कैंपस में ऐसी गतिविधियां नहीं हो सकती। इस पर रोहित ने टिप्पणी करते हुए लिखा ‘भारत में वसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजन से सेक्युलरिज़्म ख़तरे में आता है? लानत है!’ जैसा कि स्वाभाविक है, यह ट्वीट देखते ही देखते वायरल हो गया। इसे 20 हजार से ज्यादा लाइक मिले, लगभग 10 हजार बार रीट्वीट किया गया और कमेंट के तो कहने ही किया।
जैसे ही आशुतोष की नज़र रोहित के इस ट्वीट पर गई, वे खुद को व्यक्त करने से नहीं रोक सके। उन्होंने भी तपाक से सवाल दाग दिया। आशुतोष ने लिखा ‘तो फिर कैंपस में नमाज़ की भी इजाज़त हो, ईसू के प्रेयर की भी इजाज़त हो। सिर्फ सरस्वती पूजा ही क्यों शनि महाराज की भी हो! भाई मेरे भगवान अल्लाह ईसू को घर में रहने दो’।
इसके बाद तो दोनों की शब्द रूपी तलवारें म्यानों से बाहर आ गईं। दोनों ने एक के बाद एक कई ट्वीट किया और उन्हें समर्थकों का साथ भी मिलता रहा। विचारों के द्वंद्व को आगे बढ़ाते हुए रोहित ने कहा ‘नमाज़ और ईशू की प्रार्थना साप्ताहिक है, वसंत पंचमी साल में एक बार। शिक्षण संस्थान में विद्या की देवी को पूजने से सेक्युलरिज़म ख़तरे में आता है? बाक़ी शनि महाराज की पूजा तो कर ही लिया कीजिए,सत्य.कॉम के लिए अच्छा रहेगा! शुभकामनाएँ’! रोहित की यह टिप्पणी थोड़ी व्यक्तिगत हो गई, क्योंकि आशुतोष ने अपनी वेबसाइट सत्यहिंदी.कॉम से ही पत्रकारिता में वापसी की है। हालांकि, उन्होंने इसे ज्यादा तवज्जो नहीं दी और बात को विचारों की सीमित रखा।
पर आशुतोष भी कहां चुप बैठने वालों में से थे, उन्होंने इस बार जवाब दिया, धर्म एक ख़ूबसूरत चश्मा है। धर्म की आड़ वो ले रहे है जो सरस्वती पूजा कैंपस में करना चाहते हैं। वो लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं। इस राजनीति की निंदा होनी चाहिये वैसे ही जैसे पार्क में नमाज़ बढ़ने की। घर में नमाज़ पढ़ो, घर में सरस्वती पूजा करो। सार्वजनिक स्पेस को बख़्शो।
आशुतोष द्वारा पब्लिक स्पेस के वास्ता दिए जाने पर रोहित सरदाना ने कहा कि स्कूल, कॉलेज हमारे यहाँ विद्यालय और महाविद्यालय कहे जाते हैं. विद्या का आलय यानि घर. सरस्वती के घर में ही पूजा की ‘अनुमति’ माँगी गई थी, किसी पार्क चौराहे पे बिना इजाज़त हर हफ़्ते बैठ जाने की तुलना फिर बेवजह कर रहे हैं आप....
आप दोनों के बीच का पूरी ट्विवटर चैट नीचे पढ़े सकते हैं...
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