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खबरों की कभी न खत्म होने वाली ‘भूख’ का नाम है राजदीप सरदेसाई
टीवी टुडे ग्रुप के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई को पत्रकारिता जगत में...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो।।
टीवी टुडे ग्रुप के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई को पत्रकारिता जगत में तीस साल पूरे हो गए हैं। इसके बावजूद न्यूज को लेकर उनका जज्बा आज भी किसी नौजवान से बेहतर है। उनके अंदर खबरों की कभी न समाप्त होने वाली भूख है, जो आजकल कम ही दिखाई देती है।
वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई का जन्म 24 मई, 1965 को गुजरात के अहमदाबाद में हुआ। पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने 1988 में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ से की। 26 साल की उम्र में ही वे ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के मुंबई एडिशन के बतौर सिटी एडिटर बन गए थे। उन्होंने 6 वर्षों तक यहां काम किया।
1994 में एक पॉलिटिकल एडिटर के तौर पर उन्होंने NDTV से टेलिविजन की दुनिया में कदम रखा। यहां उन्होंने विभिन्न पदों पर काम किया। राजदीप सरदेसाई ने बाद में अमेरिकी दिग्गज CNN और राघव बहल के TV18 के साथ मिलकर अपनी खुद की कंपनी ग्लोबल ब्रॉडकास्ट न्यूज़ (GBN) शुरू की और इसके लिए उन्होंने NDTV का साथ छोड़ दिया और तब उन्होंने CNN-IBN की शुरुआत की। हालांकि बाद में इस चैनल का नाम बदलकर CNN-NEWS18 कर दिया गया। वहीं राजदीप सरदेसाई भी CNN-IBN से अलग हो गए और सितंबर, 2014 में इंडिया टुडे ग्रुप से बतौर कंसल्टिंग एडिटर जुड़ गए और आज भी वे यहीं अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
पिछले 30 सालों से राजदीप सरदेसाई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मसलों को कवर करते आ रहे हैं। देश पर राजनीति पर उनकी जबरदस्त पकड़ है। पत्रकारिता करियर में उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है, लेकिन सबसे बड़ा सम्मान उन्हें साल 2008 में पद्मश्री के रूप में मिला। राजदीप सरदेसाई को 2002 के गुजरात दंगा को कवर करने के लिए ‘इंटरनेशनल ब्रॉडकास्टर्स अवॉर्ड’ भी मिल चुका है। वहीं साल 2007 में उन्हें पत्रकारिता में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए ‘रामनाथ गोयनका एक्सलेंस’ अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। वे टॉक शो के लिए ‘एशियन टेलिविजन अवॉर्ड’ भी जीत चुके हैं।
राजदीप सरदेसाई एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके साथ ही वे वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम द्वारा ‘ग्लोबल लीडर फॉर टुमॉरो’(Global Leader for Tomorrow) चुने जा चुके हैं।
इतने वर्षों तक खबरों पर अपनी पैनी नजर और सटीक टिप्पणियों के लिए मीडिया में छाये रहने वाले सरदेसाई आज के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत कहे जा सकते हैं। उनके इस जज्बे को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनके अंदर कितनी ऊर्जा और खबरों को लेकर पैशन है, जो उन्हें लगातार सक्रिय रखता है। यही कारण है कि समाज के हर तबके से जुड़ी खबरों पर उनकी पकड़ रहती है। उनके अंदर वे सारे गुण हैं, जो एक आदर्श एडिटर और आदर्श रिपोर्टर के अंदर होने चाहिए।
पत्रकारिता के प्रति उनकी दीवानगी का ही आलम है कि जब भी कोई बड़ी खबर आती है, तो वे न दिन देखते हैं, न रात़ और पूरी मुस्तैदी से अपने काम को अंजाम देने में जुटे रहते हैं। राजदीप के नजदीकी लोग ये बात बेहतर तरीके से जानते हैं कि आज जब खबरों और पत्रकारिता के गिरते स्तर को लेकर तमाम बातें होती हैं, तो वे काफी बेचैन हो जाते हैं। यही कारण है कि वे समय-समय पर अपने न्यूजरूम को इसके बारे में सचेत करते रहते हैं। तमाम खबरों के बीच भी वह ऐसी खबरें तलाशते रहते हैं, जो लोगों के चेहरे पर मुस्कुराहट ला सके। विभिन्न विषयों पर राजदीप का नजरिया और टिप्पणियां ऐसी होती हैं, जो पत्रकारिता के छात्रों और आज की पत्रकार पीढ़ी के लिए अनुकरणीय साबित हो सकती हैं।
पत्रकारिता के अलावा वह विभिन्न विषयों पर कई किताबें भी लिख चुके हैं। पिछले दिनों ही उनकी किताब ‘न्यूजमैन: ट्रैकिंग इंडिया इन द मोदी एरा’ (Newsman: Tracking India in the Modi Era) ने मार्केट में दस्तक दी है। यह किताब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और इनसे जुड़े अन्य राजनीतिक घटनाक्रम को समेटे हुए है। इतना ही नहीं, इसमें 2019 में होने वाले आम चुनाव की बड़ी लड़ाई में कौन जीतेगा, इसका भी विश्लेषण किया गया है। यही नहीं, इस किताब में इन दिनों सबसे चर्चित मुद्दा जो कि भारतीय मीडिया से जुड़ा हुआ है, यानी उसकी विश्वसनीयता पर संकट, किताब में इसका भी जिक्र है। इस बात से आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि मीडिया को लेकर उनके अंदर कितनी दीवानगी है।
इसके अलावा उन्होंने क्रिकेट पर भी 'Democracy’s XI: The Great Indian Cricket Story' नाम से किताब लिखी है। मीडिया के साथ ही विभिन्न विषयों पर राजदीप की कितनी गहरी पकड़ है, इसे इस किताब से आसानी से समझा जा सकता है। इस किताब को लॉर्ड्स के 'MCC Book Of The Year Award 2018' के लिए नॉमिनेट किया गया था।
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