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40 वर्ष पुराना अखबार बंद, बीजेपी सरकार पर लगा ये आरोप
40 वर्ष पुराने दैनिक अखबार की मान्यता रद्द कर दी गई है....
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
त्रिपुरा में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के 40 वर्ष पुराने दैनिक अखबार 'देशारकथा' की मान्यता रद्द कर दी गई है। बता दें कि आरएनआई के पत्र के अनुसार, पश्चिम त्रिपुरा के जिला मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट के आधार पर ‘देशारकथा’ का रजिस्ट्रेशन रद्द किया गया है। पंजीकरण रद्द करने की सिफारिश करने के लिए कथित तौर पर स्वामित्व के अनधिकृत परिवर्तन को आधार बनाया गया है।
आरएनआई द्वारा सोमवार को समाचार पत्र को नोटिस दिया गया। चार दशकों में ऐसा पहली बार हुआ जब मंगलवार को इस अखबार का प्रकाशन नहीं हो सका।
माकपा पोलित ब्यूरो ने मंगलवार को इस बारे में बयान जारी कर कहा, ‘त्रिपुरा की भाजपा सरकार का यह कदम निंदनीय है। माकपा ने इसे प्रेस की आजादी पर हमला बताया और राज्य की भाजपा सरकार पर 'अवैध' कार्य करने का आरोप लगाया। पार्टी ने कहा कि राज्य में पिछले 40 सालों से प्रकाशित हो रहा यह अखबार त्रिपुरा का दूसरा सर्वाधिक पढ़ा जाने वाला अखबार है।
वहीं माकपा नेता और अखबार के संस्थापक गौतम दास ने कहा कि पश्चिमी त्रिपुरा जिले के जिलाधिकारी ने निरर्थक और मनगढ़ंत आधार पर अखबार की मान्यता रद्द कर दी है। इसके आधार पर अखबारों के पंजीयक ने भी इसके पंजीकरण का प्रमाणपत्र वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ भाजपा ने 'जिलाधिकारी पर अवैध कार्य करने का दबाव बनाया क्योंकि अखबार का राज्य सरकार के कुशासन और अलोकतांत्रिक तरीके पर आलोचनात्मक रुख रहा है।'
सीपीआई (एम) ने इस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी का आरोप है कि बीजेपी के सत्ता में आने के बाद लेफ्ट के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है।
गौरतलब है कि जिलाधिकारी और आयुक्त संदीप महात्मे ने 12 सितम्बर से एक अक्टूबर के बीच चार सुनवाई के बाद सोमवार रात को अखबार के प्रकाशन को बंद करने का आदेश दिया. अखबार का प्रकाशन 1978 से हो रहा था।
इस अखबार का वास्तविक मालिकाना हक माकपा के पास था. 2012 में, इसका मालिकाना हक एक पंजीकृत सोसाइटी को दे दिया गया. पिछले महीने इसे नवगठित ट्रस्ट को स्थानांतरित कर दिया गया था. दास ने कहा, 'सभी प्रक्रियाओं को अपनाया गया और जिला मजिस्ट्रेट के जरिए रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स को इसकी सूचना दी गई.'
अखबार पर की गई कार्रवाई को भारतीय मीडिया के लिए 'काला दिवस' करार देते हुए दास ने कहा कि यहां तक कि 1975-77 में आपातकाल के दौरान भी किसी भी अखबार को जबरदस्ती बंद नहीं किया गया था.
वाम नेता ने कहा, 'भाजपा के आदेश पर, डीएम ने सबसे ज्यादा अलोकतांत्रिक व अवैध कार्य किया है। डीएम ने न्यायिक प्रक्रिया का भी उल्लंघन किया है।' उन्होंने कहा कि अखबार का प्रबंधन जल्द ही उचित मंच पर न्याय की मांग करेगा।
दास ने बताया कि 'देशारकथा' का प्रसार 45,000 प्रति दिन है। इस आदेश के बाद अब 200 पत्रकार व गैर-पत्रकार और 1000 वेंडर व हॉकर बेरोजगार हो जाएंगे।
इस अखबार का वास्तविक मालिकाना हक माकपा के पास था। 2012 में, इसका मालिकाना हक एक पंजीकृत सोसाइटी को दे दिया गया। पिछले महीने इसे नवगठित ट्रस्ट को स्थानांतरित कर दिया गया था। दास ने कहा, 'सभी प्रक्रियाओं को अपनाया गया और जिला मजिस्ट्रेट के जरिए रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स को इसकी सूचना दी गई थी।'
अखबार पर की गई कार्रवाई को भारतीय मीडिया के लिए 'काला दिवस' करार देते हुए दास ने कहा कि यहां तक कि 1975-77 में आपातकाल के दौरान भी किसी भी अखबार को जबरदस्ती बंद नहीं किया गया था।
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