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प्रिंट मीडिया का 'प्राइस वार' एक बहुत बड़ी साजिश का हिस्सा

समाचार4मीडिया.कॉम आए दिन कोई नया अखबार लॉन्च हो रहा है या अखबारों का नया संस्करण। प्रिंट के विस्तार के इस क्रम में अखबार समूह एक दूसरे के क्षेत्र में सेंध लगाने की कयावद में लगे हैं। लिहाजा बाजार पर कब्जे को लेकर अखबारों के बीच प्राइस वार छिड़ गया है जो रुकने का नाम नहीं ले रहा है। यह प्राइस वार अब झारखंड से होते हुए छतीसगढ़ पहुंच गया है। छतीसगढ

समाचार4मीडिया ब्यूरो 15 years ago

समाचार4मीडिया.कॉम आए दिन कोई नया अखबार लॉन्च हो रहा है या अखबारों का नया संस्करण। प्रिंट के विस्तार के इस क्रम में अखबार समूह एक दूसरे के क्षेत्र में सेंध लगाने की कयावद में लगे हैं। लिहाजा बाजार पर कब्जे को लेकर अखबारों के बीच प्राइस वार छिड़ गया है जो रुकने का नाम नहीं ले रहा है। यह प्राइस वार अब झारखंड से होते हुए छतीसगढ़ पहुंच गया है। छतीसगढ़ में 'पत्रिका' (राजस्थान पत्रिका) के पहुंचने की खबर से वहां नईदुनिया, नवभारत और दैनिक भास्कर ने अपनी कीमत कम कर दी है। लिहाजा यह प्राइस वार आने वाले दिनों में कौन सा मोड़ लेगा और किसको फायदा और नुकसान होगा इसी विषय पर मीडिया दिग्गजो से समाचार4मीडिया ने राय जानने की कोशिश की। उमेश त्रिवेदी, ग्रुप एडिटर, नईदुनिया, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ प्रिंट मीडिया में चल रहा प्राइस वार एक बहुत बड़ी साजिश का हिस्सा है। इसके तहत बड़े ग्रुप कीमत का खेल खेलकर छोटे अखबारों को बाजार से हटाना चाहते है। छोटे अखबार क्षेत्रीय स्तर की समस्याओं को लेकर आवाज उठाते हैं लिहाजा उनके बंद होने का मतलब है लोकतंत्र में एक बड़े तबके की आवाज बंद करना। अब अखबार मनी बेस्ड हो गया है। अब वैल्यू सिस्टम खत्म होता जा रहा है। विश्वसनीयता कम हो गयी है। अखबारों में भी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश(एफडीआई ) के तहत पैसा आने लगा है लेकन यह केवल बड़े समूहो में ही आ रहा है। ये समूह तो पहले से ही काफी पैसे वाले थे अब उसमें और इजाफा हो गया है। अब अगर ये अपने अखबारों को कम कीमत पर बेंचें तो भी कुछ फर्क पड़ने वाला नहीं हैं, लेकिन इनसे मुकाबला करने के लिए छोटे अखबारों को भी अपनी कीमत कम करनी पड़ती है लेकिन ऐसा वे कब तक कर पाएंगे? लिहाजा छोटे अखबार बंद हो जाएंगें। लोकतंत्र के लिए यह बहुत खतरनाक प्रवृति है। पिछले दस सालों में मीडिया में बहुत बदलाव आया है। बहुत अनाप-शनाप पैसा इसमें आया है। बिल्डर और ठेकेदार अब मीडिया का धंधा करने लगें है जहां मुनाफा ही सबकुछ है। लिहाजा मीडिया से विचार और जिम्मेदारी गायब हो गयी है। श्रवण गर्ग, समूह संपादक, दैनिक भास्कर प्राइस वार आज पूरी दुनिया में चल रहा है। अमेरिका में भी चल रहा है। यह शॉर्ट टर्म के लिए तो फायदेमंद है, आप अपने अखबार की कुछ कॉपी बढ़ा सकते हैं लेकिन लॉन्ग टर्म के लिहाज से यह सही नहीं है। लॉन्ग टर्म में कंटेंट ही निर्णायक होता है। कंटेट के माध्यम से ही लोग जुड़ते हैं। एक ओर अखबारों का प्रिटिंग खर्च बढ़ता जा रहा है वहीं दूसरी ओर उनकी कीमत कम करने का दौर शुरु हो गया तो क्या यह माना जाय कि मीडिया जगत मंदी से बाहर निकल चुका है? उन्होंने जोर देकर कहा कि मीडिया अभी मंदी से बाहर नहीं निकला है बल्कि निकल रहा है लिहाजा लॉन्ग टर्म में प्राइस वार फायदेमंद नहीं है। लेकिन शॉर्ट टर्म में कुछ फायदा देखकर ही मैनेजमेंट इस तरह का निर्णय लेता है। बाजार की जानकारी के बाद मैनेजमेंट यह तय करता है कि उसे कितना पैसा बाजार से मिल सकता है और अगर कीमतें कम की जाती है तो कितना फायदा और कितना नुकशान हो सकता है। भुवनेश जैन, गुप डिप्टी एडिटर, राजस्थान पत्रिका कीमत कम करना तो सेल्स टीम की स्ट्रेटजी है लेकिन जहां तक प्राइस वार का सवाल है तो यह शॉर्ट टर्म के लिहाज से फायदेमंद हो सकता है लेकिन लॉन्ग टर्म के लिहाज से सही नहीं है। यह जंग अगर कंटेंट में हो तो ज्यादा बेहतर है। यह पूछे जाने पर कि छतीसगढ़ में 'पत्रिका' (राजस्थान पत्रिका) के पहुंचने की खबर से वहां के अन्य अखबारों ने अपनी कीमत कम कर दी इसे आप किस रुप में देखते हैं? तो उन्होने कहा कि इससे इतना तो तय है कि अन्य समूह अब हमें गंभीरता से ले रहे हैं। शुरुआती दौर में मध्य प्रदेश में लोगों ने हमें गंभीरता से नही लिया लेकिन लोगों के बीच हमारी बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए अब नजरिया बदल गया है। हम जहां भी जाते है एक अलग कॉन्सेप्ट के साथ जाते हैं और बदलाव का वाहक बनते हैं । हम जिस शहर में जाते है वहां जन सरोकार से जुड़े मुद्दो को लेकर एक मुहिम चलाते हैं और उसे अंजाम तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं। लिहाजा लोग हमसे जुड़ने लगते है। मध्य प्रदेश में पत्रिका के आने के बाद अन्य समूहों ने भी कई बदलाव किया है। समाचार4मीडिया देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया.कॉम में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं।  


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