‘अखबार-चैनल पत्रकारों को पर्याप्त वेतन नहीं देते हैं, जिससे वे...’

52वें राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर के मौके पर भारतीय प्रेस परिषद की ओर से पत्रकारिता...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 17 November, 2018
Last Modified:
Saturday, 17 November, 2018
Chandramouli Kumar Prasad

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

52वें राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर के मौके पर भारतीय प्रेस परिषद की ओर से पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्टत योगदान देने वालों को सम्मानित करने के लिए नई दिल्ली में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली भी मौजूद रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति चंद्रमौलि कुमार प्रसाद ने कहा कि प्रेस परिषद ने मर्यादित, तथ्यपूर्ण और सही पत्रकारिता सुनिश्चित करने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। प्रेस परिषद फर्जी खबरों और धन देकर गलत मकसद से फैलाई जा रही खबरों की चुनौती से मुकाबला करने के लिए सजग है, लेकिन मीडिया के सदस्यों के मौलिक अधिकारों का बड़े पैमाने पर हनन किया जा रहा है।

न्यायमूर्ति प्रसाद ने कहा कि अखबार और चैनल पत्रकारों को पर्याप्त वेतन नहीं देते हैं, जिससे उन्हें येन केन प्रकारेण कहीं ना कहीं से कमाना पड़ रहा है। अधिकतर मामलों में यह कमाई ईमानदारी की नहीं होती है। पत्रकार केवल अपने पेशे से गरिमा हासिल नहीं कर सकते, उन्हें अच्छा जीवन स्तर बनाए रखने के लिए समुचित वेतन चाहिए।

उन्होंने कहा कि श्रमजीवी पत्रकार कानून का पालन कम, उल्लंघन ज्यादा हो रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि यह समझना बहुत जरूरी है कि पत्रकार एक मनुष्य भी होता है। उसकी सुरक्षा और उसके अधिकारों का सम्मान बहुत आवश्यक है तभी मीडिया लोकतंत्र का सार्थक एवं सशक्त चौथा स्तंभ बन सकता है।

भारतीय प्रेस परिषद ने वर्ष 2018 के लिए प्रतिष्ठित राजा राममोहन राय अवॉर्ड के लिए वरिष्ठ पत्रकार व हिन्दू प्रकाशन समूह के चेयरमैन एन. राम को चुना है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद जेटली से उन्हें यह अवॉर्ड प्रदान किया। वहीं ‘देशबंधु’ भोपाल की मुख्य संवाददाता रूबी सरकार और मराठी दैनिक ‘पुढ़ारी’ के राजेश परशुराम जोष्टे को ग्रामीण पत्रकारिता का पुरस्कार दिया गया। जबकि विकास पत्रकारिता का अवॉर्ड ‘केरल कौमुदी’ के उप संपादक वी.एस. राजेश को दिया गया। फोटो पत्रकारिता के लिए ‘राष्ट्रीय सहारा’ के सुभाष पॉल और ‘पंजाब केसरी’ के मिहिर सिंह और कार्टून के लिए ‘नव तेलंगाना’ के लिए पी. नरसिंह को सम्मानित किया गया।

 

 

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NBA ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का किया स्वागत

‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ ने इस बात पर सहमति जताई है कि मीडिया को काफी जिम्मेदारी से अपनी भूमिका निभानी चाहिए

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 01 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 01 April, 2020
NBA

फेक न्यूज को फैलने से रोकने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों का निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) ने स्वागत किया है। ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ ने इस बात पर सहमति जताई है कि मीडिया को काफी जिम्मेदारी से अपनी भूमिका निभानी चाहिए। इसके साथ ही कोरोनावायरस (कोविड-19) के संकट के दौरान किसी भी न्यूज को टेलिकास्ट करते समय सोशल मीडिया पर चल रहीं तमाम ‘फेक न्यूज’ से बचना चाहिए और तथ्यों की जांच कर लेनी चाहिए।

‘एनबीए’ के वाइस प्रेजिडेंट और इंडिया टीवी के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा की ओर से जारी एक पत्र में इस बात पर भी प्रसन्नता जताई गई है कि सोशल मीडिया समेत विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सरकार की ओर से एक डेली बुलेटिन भी चलाया जाएगा, ताकि लोगों में फैल रहीं तमाम आशंकाओं को दूर किया जा सके। इससे मीडिया को भी तमाम संदेहों को स्पष्ट करने और उन्हें सटीक रिपोर्टिंग करने में सक्षम बनाने में मदद मिलेगी।

पत्र में ‘एनबीए’ ने इस बात के लिए भी सुप्रीम कोर्ट की सराहना की है, जिसमें कोर्ट ने कहा है कि इस महामारी को लेकर मीडिया में होने वाली चर्चाओं, डिबेट और कवरेज में हस्तक्षेप करने का उसका कोई इरादा नहीं है।

गौरतलब है कि देशभर में जारी लॉकडाउन के दौरान लाखों लोगों के पलायन के लिए फेक न्यूज तथा भ्रम फैलाने वाले संदेशों को जिम्मेदार ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च को ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के आदेश दिए हैं। 

इसके साथ ही चीफ जस्टिस एसए बोब्डे और जस्टिस नागेश्वर राव की खंडपीठ ने सरकार से फेक न्यूज फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करने के लिए भी कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया को भी जिम्मेदारी दर्शाने के निर्दश दिए थे। कोर्ट का कहना था कि मीडिया संस्थान तथ्यपूर्ण खबरों को ही प्रकाशित/प्रकाशित करें।

 

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कोरोना की चपेट में आया यह न्यूज एंकर, ट्वीट कर खुद दी जानकारी

दुनिया भर के लिए जानलेवा बन चुका कोरोना वायरस अभी भी तबाही मचा रहा है। यह तबाही चीन के बाद इटली, स्पेन, फ्रांस और अमेरिका जैसे देशों में ज्यादा देखने को मिल रही हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 01 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 01 April, 2020
Corona

दुनिया भर के लिए जानलेवा बन चुका कोरोना वायरस अभी भी तबाही मचा रहा है। यह तबाही चीन के बाद इटली, स्पेन, फ्रांस और अमेरिका जैसे देशों में ज्यादा देखने को मिल रही हैं। अमेरिका में प्रतिदिन मरने वाले लोगों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। वहीं इससे संक्रमित लोगों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। अमेरिकी न्यूज चैनल ‘सीएनएन’ के एंकर क्रिस्टोफर कूमो (Christopher Cuomo) भी अब कोरोना का शिकार हो गए है। उनकी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आयी है।  

खास बात ये है कि पॉजिटिव पाए जाने के बाद भी क्रिस्टोफर अपने शो को घर से होस्ट करेंगे। मंगलवार को उन्होंने खुद ही एक ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने लिखा कि उनके कोरोना का टेस्ट पॉजिटिव पाया गया है। उन्होंने कहा, ‘हालात बहुत मुश्किल हैं और हर दिन ये बिगड़ते ही जा रहे हैं। मैं भी संक्रमित हो गया हूं, पिछले दिनों मैं कई लोगों से मिला, उनमें से कुछ संक्रमित थे। मुझे बुखार और सांस लेने में दिक्कत है। आशा है कि बच्चों और पत्नी तक संक्रमण नहीं पहुंचेगा।’ बता दें कि कि सीएनएन के एंकर न्यूयॉर्क के गवर्नर एंड्रयू क्‍यूमो के भाई हैं।

 

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पत्रकारोंं की सुरक्षा को लेकर हाई कोर्ट में उठी ये मांग

सरकार द्वारा लॉकडाउन के दौरान मीडिया कर्मियों को छूट दी गई है ताकि वे कोरोना वायरस से जुड़ी खबरों को समाज में रह रहे लोगों तक सही और सटीक जानकारी पहुंचाते रहें

Last Modified:
Tuesday, 31 March, 2020
Journalist

कोरोना से जंग लड़ रही आशा कार्यकर्ताओं, स्वच्छता कर्मचारियों, मेडिकल और पैरा-मेडिकल स्टाफ के लिए 50 लाख रुपए के बीमा कवर का ऐलान किया है, जिसका फायदा 20 लाख मेडिकल स्टाफ और कोरोना वॉरियर्स को मिलेगा। लेकिन अपनी जान जोखिम में डालकर ग्राउंड रिपोर्टर के जरिए देश को जागरूक करने वाले पत्रकारों को इस बीमा कवर से दूर रखा गया है। लिहाजा, ऐसे में उनकी सुरक्षा के मद्देनजर दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें पत्रकारों के लिए स्वास्थ्य सुविधा और प्रत्येक पत्रकार के लिए 50 लाख रुपए बीमा कराने की मांग की गई है।

बता दें कि इस याचिका पर तत्काल सुनवाई का आग्रह किया गया, लेकिन कोर्ट ने कहा कि इस याचिका पर सुनवाई की अभी कोई जल्दी नहीं है। लॉकडाउन के खत्म होने के बाद सुनवाई की जाएगी।  यह याचिका वकील अर्पित भार्गव की ओर से हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार के समक्ष दायर की गई है।

याचिका में मांग की गई है कि कोरोना वायरस महामारी के बावजूद फील्ड में रिपोर्टिंग कर रहे प्रत्येक रिपोर्टर को स्वास्थ्य और जीवन बीमा देने के लिए केन्द्र सरकार को निर्देश दिए जाएं। याचिका में यह भी कहा गया है कि रिपोर्टर चाहे कांट्रैक्चुअल हों, एडहोक पर हों या स्थायी हों, सभी को यह सुविधा प्रदान की जाए। याचिका में ये मांग की गई है कि प्रत्येक रिपोर्टर को कम से कम 50 लाख रुपए का स्वास्थ्य और जीवन बीमा मुहैया करवाया जाए।

याचिका में कहा गया है कि सरकार द्वारा लॉकडाउन के दौरान मीडिया कर्मियों को छूट दी गई है ताकि वे कोरोना वायरस से जुड़ी खबरों को समाज में रह रहे लोगों तक सही और सटीक जानकारी पहुंचाते रहें, इसलिए रिपोर्टरों के लिए यह कदम उठाया जाना बेहद जरूरी है। हालांकि हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार ने कहा कि लॉकडाउन की स्थिति सामान्य हो जाने के बाद ही इस याचिका पर विचार किया जा सकता है।

गौरतलब है कि इससे पहले भारत सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकारों की संस्था  प्रेस एसोसिएशन ने कोरोना महामारी को देखते हुए पीएम मोदी को पत्र लिखकर पत्रकारों के लिए भी 50 लाख रुपए के बीमा की मांग की है। उन्होंने कहा कि पत्रकार भी महामारी के खिलाफ लड़ाई में योगदान दे रहे हैं, जिस तरह वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मचारियों आदि के लिए 50 लाख बीमे की घोषणा की उसी तरह यह सुविधा पत्रकारों को भी मिलनी चाहिए।

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BCCL से आई बड़ी खबर, एस. शिवकुमार को मिली ये जिम्मेदारी

‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ (BCCL) से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है।

Last Modified:
Tuesday, 31 March, 2020
S. Sivakumar

जानी-मानी मीडिया कंपनी ‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ (BCCL) से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। खबर यह है कि एस. शिवकुमार को ‘बीसीसीएल’ में एग्जिक्यूटिव कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। उनकी यह नियुक्ति एक अप्रैल से प्रभावी होगी। नई भूमिका में ‘बीसीसीएल’ से संबंधित सभी कार्य शिवकुमार के जिम्मे होंगे।

बता दें कि एस. शिवकुमार चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और कॉस्ट एंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के फेलो मेंबर हैं। वह ‘बीसीसीएल’ के साथ करीब तीस वर्षों से जुड़े हुए हैं। जुलाई 2016 में उन्हें प्रेजिडेंट (रेवेन्यू) की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। 

इसके साथ ही शिवकुमार और मोहित जैन ‘बीसीसीएल’ के बोर्ड में एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर्स की भूमिका में भी रहेंगे। वहीं, ‘बीसीसीएल’ के सीईओ के रूप में राज जैन का कार्यकाल खत्म होने जा रहा है, वह इस संस्थान से करीब पांच वर्षों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने नवंबर 2014 में इस समूह को जॉइन किया था। इससे पहले वह 'भारती रिटेल' में अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।  

 

 

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PIB ने Corona से जुड़ी इन दो खबरों को बताया गलत

कोरोनावायरस (Coronavirus) के संक्रमण को लेकर जितना डर फैला हुआ है, उससे कहीं ज्यादा इससे जुड़ी निरधार खबरें।

Last Modified:
Monday, 30 March, 2020
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कोरोनावायरस (Coronavirus) के संक्रमण को लेकर जितना डर फैला हुआ है, उससे कहीं ज्यादा इससे जुड़ी निरधार खबरें। कोरोनावायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने देश में 21 दिन का लॉकडाउन किया है। सोमवार को लॉकडाउन का छठा दिन है। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा किया जा रहा है कि लॉकडाउन की समयसीमा बढ़ सकती है।

तो यहां बता दें कि यह खबर पूरी तरह से गलत है, क्योंकि 21 दिनों के लॉकडाउन को आगे बढ़ाने वाली खबरों का केंद्र सरकार ने खंडन करते हुए इसे अफवाह करार दिया है। सरकार का कहना है कि इन खबरों को कोई आधार नहीं है।

पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर ये जानकारी दी है। पीआईबी ने अपने पहले ट्वीट में कहा कि अफवाह पर ध्यान न दें। अफवाहें और मीडिया रिपोर्ट के माध्यम से यह दावा किया जा रहा है कि सरकार #Lockdown21 की अवधि समाप्त होने के बाद इसे बढ़ा देगी। कैबिनेट सचिव ने इन रिपोर्टों का खंडन किया है और कहा है कि वे निराधार हैं।

पीआईबी ने एक अन्य ट्वीट में कैबिनेट सचिव ने क्या कहा, इसकी जानकारी दी। ट्वीट में लिखा, ‘राजीव गौबा ने इन खबरों खंडन किया है और कहा है इस तरह की खबरें आधारहीन हैं। उन्होंने कहा कि अफवाहों और मीडिया में चल रही खबरों में यह दावा किया जा रहा है कि सरकार लॉकडाउन की अवधि समाप्त होने के बाद इसे बढ़ा देगी। कैबिनेट सचिव ने इन रिपोर्टों का खंडन किया है और कहा है कि वे निराधार हैं।’

वहीं सोशल मीडिया पर फैलायी जा रही एक अन्य खबर को भी पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) ने गलत बताया है। दरअसल, इस खबर में यह झूठ फैलाया जा रहा है कि गृह मंत्रालय के प्रमुख सचिव रवि नायक के कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कोरोना वायरस से सम्बंधित कोई भी पोस्ट को दंडनीय अपराध घोषित कर दिया गया है। गलत पोस्ट या मैसेज करने पर ग्रुप एडमिन सहित पूरे ग्रुप के सदस्यों पर आईटी एक्ट के अन्तर्गत मुकदमा पंजीकृत कर कार्यवाही की जाएगी, इसलिए ध्यान रखें, सतर्क रहें, सुरक्षित रहे।

इस खबर को लेकर पीआईबी ने ट्वीट कर कहा कि गृह मंत्रालय द्वारा ऐसा कोई भी निर्देश सोशल मीडिया को लेकर नहीं जारी किया गया है।

 

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कोरोना का खौफ: प्रशासन की कार्रवाई से पत्रकारों में नाराजगी

शासकीय आदेशों का उल्लंघन करने पर थाना श्यामला हिल्स ने कोरोना पॉजिटिव पाए गए पत्रकार केके सक्सेना के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

नीरज नैयर by
Published - Saturday, 28 March, 2020
Last Modified:
Saturday, 28 March, 2020
corona-virus

वरिष्ठ पत्रकार केके सक्सेना के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद से भोपाल प्रशासन सकते में है। प्रशासन द्वारा पत्रकारों के घर पर ‘Covid19 डू नॉट विजिट’ पोस्टर चस्पा किये जा रहे हैं। ताज्जुब की बात यह है कि इनमें वह पत्रकार भी शामिल हैं, जो पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद नहीं थे। इसी बात को लेकर प्रशासन और पत्रकारों में ठन गई है। पोस्टर लगाने पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम से कई पत्रकारों का विवाद भी हुआ। पत्रकारों का कहना है कि सरकार बिना वजह दहशत फैला रही है। हमने खुद आगे बढ़कर टेस्ट कराने को कहा है, लेकिन वह पोस्टर चिपकाने तक सीमित है। जो पत्रकार प्रेस कांफ्रेंस में गए भी नहीं थे, उनके भी नाम संदिग्धों की सूची में डाल दिए गए हैं। आखिर ऐसा किस आधार पर किया जा रहा है?

शुक्रवार को भी स्वास्थ्य विभाग की टीम कुछ पत्रकारों के घर पोस्टर लगाने गई थी। इस दौरान उनका पत्रकारों से विवाद भी हुआ। पत्रकारों ने प्रेस कांफ्रेंस में न होने का हवाला भी दिया, लेकिन कर्मचारी कुछ सुनने को तैयार नहीं थे। हालांकि, कड़े विरोध को देखते हुए उन्हें बिना पोस्टर लगाये ही वापस लौटना पड़ा।

कर्मचारियों का कहना है कि वह सिर्फ कलेक्टर के आदेश की तालीम कर रहे हैं। उन्हें जिन पत्रकारों की सूची सौंपी गई है, उसी के आधार पर पोस्टर लगाये जा रहे हैं।

सोशल मीडिया पर एक विडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें पत्रकार को पोस्टर लगाने पहुंचे स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को भगाते हुए दिखाया गया है। विडियो में पत्रकार पूछता है कि क्या कमलनाथ या शिवराज सिंह के घर पर पोस्टर लगाये हैं? नहीं, तो फिर यहां कैसे आये’? इस विडियो के सामने आने के बाद जहां कुछ पत्रकारों उक्त पत्रकार के बर्ताव पर नाराजगी जाता रहे हैं। वहीं कुछ की नजर में यह प्रशासन की बेवकूफी से उपजा गुस्सा है। नाराजगी जताने वालों का कहना है कि भले ही प्रशासन ने गलती की, लेकिन अधिकारियों का गुस्सा कर्मचारियों पर नहीं निकाला जाना चाहिए।
केके सक्सेना के खिलाफ केस दर्ज

वहीं, शासकीय आदेशों का उल्लंघन करने पर थाना श्यामला हिल्स ने कोरोना पॉजिटिव पाए गए पत्रकार केके सक्सेना के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। सक्सेना के खिलाफ धारा 188, 269, 270 भा.द.वि. के तहत अपराध पंजीबद्ध कर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। सक्सेना ने न केवल कोरोना संक्रमित होकर लापरवाही की बल्कि इलाज के लिये गए सरकारी डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार भी किया था।

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IBF की बड़ी पेशकश, मुफ्त में देख सकेंगे ये चार टीवी चैनल्स

कोरोनावायरस (कोविड-19) के खिलाफ लड़ाई में सरकार के सपोर्ट के लिए ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ भी आगे आया है।

Last Modified:
Saturday, 28 March, 2020
Channel

कोरोनावायरस (कोविड-19) के खिलाफ लड़ाई में सरकार के सपोर्ट के लिए ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ (Indian Broadcasting Foundation) भी आगे आया है। इसके तहत ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ के सदस्यों ने सोनी के चैनल ‘सोनी पल’, स्टार इंडिया के चैनल ‘स्टार उत्सव’ जी टीवी के चैनल ‘जी अनमोल’ और ‘वायकॉम18’ के कलर्स बुके (bouquet) में शामिल चैनल ‘कलर्स रिश्ते’ को दो माह तक मुफ्त में प्रसारित करने की पेशकश की है। ये सभी चैनल पे चैनल्स (pay channels) हैं।

इस पेशकश के तहत अब ये चारों चैनल देश भर में सभी ‘डायरेक्ट टू होम’ (DTH) और केबल नेटवर्क्स पर दो महीने के लिए मुफ्त में देखने को मिलेंगे। यानी देश भर के दर्शकों को इन चारों चैनल्स को देखने के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ेगा।     

दरअसल, इन सभी ब्रॉडकास्टर्स का मानना है कि जब लॉकडाउन के कारण लोगों को 21 दिनों तक अपने घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है, ऐसे मे इस कदम से लोगों को थोड़ा एंटरटेनमेंट और स्फूर्तिदायक कंटेंट मिल सकेगा, जो लोगों को काफी राहत प्रदान करेगा।   

बता दें कि कोरोनावायरस के प्रकोप को देखते हुए सरकार ने लोगों से सोशल डिस्टिंग अपनाने के साथ ही घरों पर ही रहने को कहा है। ऐसे में इन चारों ब्रॉडकास्टर्स ने भी आगे आकर इन चारों चैनल्स के लिए दो महीने तक अपने सभी तरह के टैरिफ और शुल्क को दर्शकों के लिए मुफ्त करने का निर्णय कर कोरोना से ‘जंग’ में अपना साथ दिया है।

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पत्रकारों के लिए सरकार ने शुरू की ये योजना, इस तरह मिलेगा लाभ

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के पत्रकारों को एक बड़ी सौगात दी है

Last Modified:
Saturday, 28 March, 2020
Journalist

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के पत्रकारों को एक बड़ी सौगात दी है। दरअसल, मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को बिहार पत्रकार सम्मान पेंशन योजना की शुरुआत की है। इसके तहत बिहार के पत्रकारों को हर महीने 6000 रुपए की पेंशन दी जाएगी। फिलहाल राज्य के 48 पत्रकारों को यह पेंशन मिलेगी। यह योजना 14 नवंबर 2019 से प्रभावी की गई है और पेंशन पाने वाले पत्रकारों को एरियर का भुगतान भी किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुक्रवार को 40 पत्रकारों के खाते में पेंशन की राशि स्थानांतरित कर दी गयी। इन 40 पत्रकारों के अतिरिक्त पांच पत्रकारों को 6 मार्च 2020 तथा तीन पत्रकारों को 16 मार्च 2020 के प्रभाव से पेंशन का लाभ मिलेगा।

जिन 40 पत्रकारों को नवंबर 2019 से लाभ मिलना है, उनके लिए 1.36 लाख रुपए का भुगतान किया गया है। वहीं, जिन पत्रकारों के पेंशन की स्वीकृति मार्च से दी गयी है, उनके खाते में पेंशन की राशि अगले महीने स्वीकृति के एक माह पूरा होने के बाद जाएगी।

राज्य में पेंशन योजना को स्वीकृत किए जाने के मौके पर उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय. कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार, जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा, मुख्य सचिव दीपक कुमार, डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सचिव अनुपम कुमार आदि वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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प्रेस एसोसिएशन ने पीएम को लिखा पत्र, पत्रकारों के लिए मांगी ये सुविधा

एसोसिएशन ने पीएम से गुहार लगाई है कि कोरोना की खबर देने के लिए पत्रकार फील्ड से रिपोर्ट भेज रहे है और लोगों से मिलकर जानकारी ग्रहण कर रहे है, इसलिए वह खतरे का सामना कर रहे हैं।

Last Modified:
Friday, 27 March, 2020
Journalist

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कोरोना से जंग लड़ रही आशा कार्यकर्ताओं, स्वच्छता कर्मचारियों, मेडिकल और पैरा-मेडिकल स्टाफ के लिए 50 लाख रुपए के बीमा कवर का ऐलान किया है, जिसका फायदा 20 लाख मेडिकल स्टाफ और कोरोना वॉरियर्स को मिलेगा। लेकिन अपनी जान जोखिम में डालकर देश को जागरूक करने वाले पत्रकारों को इस बीमा कवर से दूर रखा गया है। लिहाजा, मान्यताप्राप्त पत्रकारों के एक संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पत्रकारों को उस विशेष बीमा योजना में शामिल करने का अनुरोध किया है जिसकी घोषणा सरकार ने गुरुवार को की।

बता दें कि प्रेस एसोसिएशन ने कोरोना महामारी को देखते हुए पीएम मोदी को पत्र लिखकर पत्रकारों के लिए भी 50 लाख रुपए के बीमा की मांग की है। एसोसिएशन ने अपने पत्र में पीएम से गुहार लगाई है कि कोरोना की खबर देने के लिए देश के पत्रकार फील्ड से रिपोर्ट भेज रहे है और लोगों से मिलकर जानकारी ग्रहण कर रहे है, इसलिए वह खतरे का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पत्रकार भी महामारी के खिलाफ लड़ाई में योगदान दे रहे हैं, जिस तरह वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मचारियों आदि के लिए 50 लाख बीमे की घोषणा की उसी तरह यह सुविधा पत्रकारों को भी मिलनी चाहिए। उन्होंने मोदी से अपील की कि सरकार अपनी स्कीम में पत्रकारों को शामिल करें, जिससे पत्रकार निर्भीक होकर अपना काम कर सके।

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‘उस’ प्रेस कांफ्रेंस में नहीं जाने वाले खुद को मान रहे खुशनसीब

भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार के.के. सक्सेना के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद से यहां हड़कंप मच गया है। सक्सेना मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ की आखिरी प्रेस कांफ्रेंस में भी मौजूद थे

Last Modified:
Thursday, 26 March, 2020
PC

भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार के.के. सक्सेना के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद से यहां हड़कंप मच गया है। सक्सेना मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ की आखिरी प्रेस कांफ्रेंस में भी मौजूद थे, लिहाजा अन्य पत्रकार भी खौफ में हैं।

बताया जा रहा है कि के.के. सक्सेना कांग्रेस नेता रवि सक्सेना के भाई हैं, ऐसे में उनके के भी संक्रमित होने की आशंका जताई जा रही है। पत्रकार होने के नाते सक्सेना का हर रोज काफी लोगों से मिलना रहता था। वह अकसर सघन बसावट वाले पुराने भोपाल भी जाया करते थे, इस वजह से लोगों में घबराहट का माहौल है। वहीं, प्रशासन भी स्थिति की गंभीरता को समझ रहा है।

कुछ स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि संक्रमित सक्सेना के कांग्रेस नेता भाई की भी जांच कराई जानी चाहिए और यदि वह पॉजिटिव आती है, तो स्थिति बहुत ही भयानक हो जाएगी, क्योंकि उनका बड़ी संख्या में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से मिलना-जुलना रहता है।

वहीं, मामला सामने आने के बाद करीब 30 पत्रकारों की स्क्रीकिंग करवाई गई है। अच्छी बात यह है कि एक भी पत्रकार में कोरोना के लक्षण नहीं पाए गए। फिर भी इन पत्रकारों को अगले कुछ दिनों तक होम क्वॉरेंटाइन रहने को कहा गया है।

गौरतलब है कि खुद का अखबार चलाने वाले के.के. सक्सेना भोपाल में कोरोना की पहली महिला मरीज के पिता हैं। उनकी बेटी 18 मार्च को ही लंदन से भोपाल आई थी और उसके नमूनों की जांच में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है। लंदन से लौटने के बाद पत्रकार की बेटी 2 दिन तक अपने परिवार के साथ रही थी। स्थानीय पत्रकारों में सक्सेना को लेकर इसलिए नाराजगी है कि उन्होंने सरकार के बार-बार कहने के बावजूद भी विदेश से आई अपनी बेटी के बारे में सूचना नहीं दी, जिसकी वजह से अब कई लोगों पर कोरोना का खतरा मंडरा रहा है।

कुछ पत्रकारों की मांग है कि के.के. सक्सेना के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए, क्योंकि उन्होंने कई लोगों की जान को खतरे में डाला है। वहीं, कुछ को उनके प्रति सहानुभूति भी है, लेकिन वह अपने को खुशनसीब मान रहे हैं कि वो कमलनाथ की आखिरी प्रेस कांफ्रेंस में नहीं थे।

एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा, ‘मैंने आखिरी वक्त पर पूर्व मुख्यमंत्री की प्रेस कांफ्रेंस में न जाने का फैसला लिया और अब मुझे इसकी खुशी है। इतना ही नहीं, उसी रात सक्सेना मुझे भोपाल बाजार में भी दिखाई दिए, लेकिन बातचीत नहीं हो सकी। मेरे लिए तो दोनों ही संयोग बेहद अच्छे रहे’। इससे पहले बुधवार को स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम जब सक्सेना के आवास पर पहुंची तो उन्होंने एम्स चलने से इनकार कर दिया। बाद में जब कलेक्टर ने फटकार लगाई तब कहीं जाकर वह एम्स में भर्ती हुए।

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