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इस रिपोर्ट को पढ़कर खुशी से चमका मीडिया इंडस्ट्री का ‘चेहरा’
भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट (M&E) सेक्टर के लिए काफी राहत भरी...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो।।
भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट (M&E) सेक्टर के लिए काफी राहत भरी खबर है। दरअसल, मुंबई में हुए ‘भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ’ (FICCI) फ्रेम्स 2019 के मौके पर ‘EY-FICCI’ की रिपोर्ट ‘A billion screens of opportunity’ भी जारी की गई। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2017 के मुकाबले भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर में वर्ष 2018 में 13.4 प्रतिशत की ग्रोथ हुई है और यह 1.67 ट्रिलियन रुपए (US$23.9 billion) का हो गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, माना जा रहा है कि यह सेक्टर वर्ष 2021 तक 11.6 प्रतिशत सीएजीआर (Compound annual growth rate) के साथ 2.35 ट्रिलियन रुपए (US$33.6 billion) का हो जाएगा। इस रिपोर्ट के अनुसार टीवी ने सबसे बड़े सेगमेंट के रूप में अपना स्थान बरकरार रखा है, जबकि डिजिटल में ग्रोथ की उम्मीद जताई जा रही है। डिजिटल के बारे में माना जा रहा है कि यह फिल्म एंटरटेनमेंट को वर्ष 2019 में और प्रिंट को वर्ष 2021 तक पार कर जाएगा।
आइए, जानते हैं कि इस रिपोर्ट में टीवी, प्रिंट और डिजिटल के बारे में क्या शामिल किया गया है।
टेलिविजन:
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017 में जहां टीवी इंडस्ट्री 660 बिलियन रुपए की थी, वहीं वर्ष 2018 में इसमें 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और यह अब 740 बिलियन रुपए की हो गई है। 14 प्रतिशत इजाफे के साथ टीवी एडवर्टाइजिंग 305 बिलियन रुपए, जबकि सबस्क्रिप्शन में 11 प्रतिशत इजाफे के साथ यह 435 बिलियन रुपए हो गया है। टीवी देखने वाले घरों की संख्या भी बढकर 197 मिलियन हो गई है और वर्ष 2016 के मुकाबले इसमें 7.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। नेशनल ब्रैंड्स नॉन मेट्रो मार्केट के विस्तार पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं। ऐसे में क्षेत्रीय एडवर्टाइजिंग की ग्रोथ नेशनल एडवर्टाइजिंग से आगे निकल गई है। वहीं, जीएसटी ने भी नेशनल और रीजनल ब्रैंड्स के बीच की दूरी को पाटने का काम किया है। टेलिविजन देखने में लोगों ने जितना समय बिताया, उसमें 77 प्रतिशत समय जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स और फिल्मी चैनल्स के नाम रहा।
अपनी प्रमुख प्रॉपर्टीज से ज्यादा कमाई के लिए और डिजिटल इंवेंट्री का उपयोग बढ़ाने के लिए ब्रॉडकास्टर्स ने ‘ओवर द टॉप’ (OTT) और ‘लिनियर प्लेटफॉर्म्स’ (linear platforms) पर एक साथ विज्ञापन देना शुरू कर दिया है। टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया' (TRAI) के नए टैरिफ ऑर्डर का प्रभाव कुल व्युअरशिप के साथ ही फ्री टेलिविजन, चैनल के एमआरपी रेट्स और एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू पर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, यह भी कहा गया है कि लोकसभा चुनाव और क्रिकेट वर्ल्ड कप के कारण यह सेगमेंट और आगे बढ़ेगा। 10 प्रतिशत एडवर्टाइजिंग ग्रोथ और 8 प्रतिशत सबस्क्रिप्शन ग्रोथ के साथ टेलिविजन सेगमेंट 955 बिलियन रुपए तक पहुंच सकता है।
प्रिंट:
वर्ष 2018 में 0.7 प्रतिशत की ग्रोथ के साथ 305.5 बिलियन रुपए की प्रिंट इंडस्ट्री का भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट (M&E) सेक्टर में दूसरा सबसे ज्यादा शेयर है। इसका एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू जहां 217 बिलियन रुपए है, वहीं सबस्क्रिप्शन रेवेन्यू में 1.2 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ यह वर्ष 2018 में 88.3 बिलियन रुपए हो गया है। अखबारों का विज्ञापन 1 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि मैगजीन के विज्ञापन में 10 प्रतिशत की कमी आई है। विज्ञापन में जो कमी आई है, उसका कारण विज्ञापनों की संख्या कम होने के साथ-साथ कीमतों का दबाव भी है। कुल विज्ञापनों की बात करें तो 37 प्रतिशत के साथ इसमें हिंदी अखबार सबसे आगे बने हुए हैं, जबकि अंग्रेजी अखबारों का शेयर 25 प्रतिशत है। न्यूजप्रिंट की बढ़ती कीमतों के साथ ही भारतीय रुपए के मूल्य में आई कमी के कारण भी वर्ष 2018 में प्रिंट सेक्टर के मार्जिन पर काफी दबाव पड़ा है।
वर्ष 2017 मुकाबले 2018 में डिजिटल न्यूज कंज्यूमर्स की संख्या 26 प्रतिशत बढ़ी है। 222 मिलियन लोगों ने ऑनलाइन न्यूज को प्राथमिकता दी है। पेज व्यूज भी 2017 के बाद से 59 प्रतिशत बढ़े हैं और प्रिंट पर बिताया गया औसत समय भी वर्ष 2018 में लगभग सौ प्रतिशत बढ़कर दिन में आठ मिनट हो गया है।
डिजिटल मीडिया:
डिजिटल मीडिया के लिए भी वर्ष 2018 काफी अच्छा रहा है। इस रिपोर्ट की मानें तो वर्ष 2018 में 42 प्रतिशत वृद्धि के साथ यह इंडस्ट्री 169 बिलियन रुपए की हो गई है। डिजिटल के इस्तेमाल में हुई इस वृद्धि में इंफ्रॉस्ट्रक्चर ने भी काफी भूमिका निभाई है। डिजिटल पर विज्ञापन खर्च भी 34 प्रतिशत बढ़कर 154 बिलियन रुपए हो गया है और विज्ञापन मार्केट में इसका शेयर करीब 21 प्रतिशत है। डिजिटल सबस्क्रिप्शन भी बढ़कर 14 बिलियन हो गया है। वर्ष 2018 में विडियो सबस्क्रिप्शन रेवेन्यू में भी करीब तीन गुना इजाफा हुआ है और यह 13.4 बिलियन हो गया है। इसमें नए और री-लॉन्च हुए विडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स, स्मार्टफोन में बढ़ोतरी के साथ ही ब्रॉडबैंड के बढ़ते इस्तेमाल आदि ने अहम भूमिका निभाई है।
डाटा प्लान और कंटेंट के कारण डिजिटल का सबस्क्रिप्शन 14 बिलियन हो गया है। दिसंबर 2017 में जहां वायरलेस सबस्क्राइबर्स की संख्या 1167 मिलियन थी, वह बढ़कर नवंबर 2018 में 1171 मिलियन हो गई है। इस बढ़ोतरी के पीछे ग्रामीण क्षेत्रों के सबस्क्राइबर्स ने भी बड़ी भूमिका निभाई है, जो इस अवधि के दौरान 499 मिलियन से बढ़कर 526 मिलियन हो गई है।
नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर आप पूरी रिपोर्ट पढ़ सकते हैं-
टैग्स उदय शंकर फिक्की भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री फिक्की फ्रेम्स