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पूरी हुई वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर की आखिरी इच्छा...
वरिष्ठ भारतीय पत्रकार कुलदीप नैयर की इच्छा इस स्थान से...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वरिष्ठ भारतीय पत्रकार कुलदीप नैयर की अस्थियां पाकिस्तान में रावी नदी में विसर्जित कर दी गई। उनकी पोती और पत्रकार मंदिरा नैयर ने रावी नदी में अस्थियां विसर्जित कीं। नैयर का 23 अगस्त को दिल्ली में निधन हो गया था।
मंदिरा नैयर ने अपने परिवार के सदस्यों, दोस्तों और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में उनकी इस इच्छा का पूरा किया। मंदिरा ने कहा, 'मेरे दादा नई दिल्ली प्रेस क्लब के सदस्य नहीं थे लेकिन लाहौर प्रेस क्लब के थे। हालांकि वह दिल्ली में रहते थे लेकिन वह आध्यात्मिक रूप से लाहौर से जुड़े थे। लाहौर में रावी नदी में अस्थियां विसर्जित करने की उनकी इच्छा इस स्थान से उनके आध्यात्मिक जुड़ाव की गवाह है।'
बता दें कि यह पहली बार नहीं था कि किसी भारतीय की अस्थियां पाकिस्तान की किसी नदी में विसर्जित की गईं। साल 2008 में भारतीय शांति और मानवाधिकार कार्यकर्ता निर्मला देशपांडे की अस्थियां भी पाकिस्तान की नदी में विसर्जित की गई थीं। दरअसल, उन्होंने विभिन्न एशियाई देशों में अपनी अस्थियां विसर्जित करने की इच्छा व्यक्त की थी क्योंकि वह हमेशा दक्षिण एशिया को परमाणु हथियारों से मुक्त क्षेत्र बनाना चाहते थी।
गौरतलब है कि कुलदीप नैयर 95 वर्ष के अपने आखिरी समय तक वे लेखन और पत्रकारिता से जुड़े रहे। उनका जन्म 14 अगस्त, 1923 को पाकिस्तान के सियालकोट में हुआ था। नैयर कई किताबें लिख चुके हैं। उनकी आत्मकथा भी काफी चर्चित रही थी। उनकी आत्मकथा 'बियांड द लाइंस' अंग्रेजी में छपी थी। बाद में उसका हिंदी में अनुवाद, एक जिंदगी काफी नहीं नाम से प्रकाशित हुआ। उन्होंने इसके अतिरिक्त कई किताबें 'बिटवीन द लाइं,', 'डिस्टेंट नेवर: ए टेल ऑफ द सब कान्टिनेंट', ‘इंडिया आफ्टर नेहरू', ‘वाल एट वाघा, इंडिया पाकिस्तान रिलेशनशिप', 'इंडिया हाउस' जैसी कई किताबें भी लिखीं।
बता दें कि शुरुआती दिनों में कुलदीप नैय्यर एक उर्दू प्रेस रिपोर्टर थे। भारत सरकार के प्रेस सूचना अधिकारी के पद पर कई वर्षों तक कार्य करने के बाद वे यूएनआई ‘द स्टैट्समैन', ‘इंडियन एक्सप्रेस' के साथ लंबे समय तक जुड़े रहे थे। वे पच्चीस वर्षों तक ‘द टाइम्स' लंदन के संवाददाता भी रहे हैं। 1996 में वे संयुक्त राष्ट्र के लिए भारत के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी रहे। 1990 में उन्हें ग्रेट ब्रिटेन में उच्चायुक्त नियुक्त किया गया था। पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के कारण 1997 में उन्हें राज्यसभा के लिए भी मनोनीत किया गया था। नैयर डेक्कन हेराल्ड (बेंगलुरु), द डेली स्टार, द संडे गार्जियन, द न्यूज, द स्टेट्समैन, द एक्सप्रेस ट्रिब्यून पाकिस्तान, डॉन पाकिस्तान, सहित 80 से अधिक समाचार पत्रों के लिए 14 भाषाओं में कॉलम लिखते रहे।
आपातकाल के दौरान नैयर को सरकार के खिलाफ लेख लिखने के कारण जेल भी जाना पड़ा था।
पत्रकारिता की दुनिया में कुलदीप नैयर पत्रकारिता अवॉर्ड भी दिया जाता है। 23 नवम्बर, 2015 को वरिष्ठ पत्रकार और लेखक कुलदीप नैयर को पत्रकारिता में आजीवन उपलब्धि के लिए रामनाथ गोयनका स्मृ़ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें यह पुरस्कार दिल्ली में आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में केद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने प्रदान किया था।
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