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हैप्पी बर्थडे: रस्किन बॉन्ड बोले, क्यों लेखक बनने का फैसला समझदारी का था...
विख्यात लेखक रस्किन बांड अपनी अद्भुत लेखन शैली के लिए पहचाने जाते हैं...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
विख्यात लेखक रस्किन बॉन्ड अपनी अद्भुत लेखन शैली के लिए पहचाने जाते हैं। 'फ्लाइट ऑफ पिजन्स' (कबूतरों की उड़ान) और 'एंग्री रिवर' (अप्रसन्न नदी) जैसी रचनाओं के जन्मदाता रस्किन बॉन्ड का आज यानी 19 मई को जन्मदिन है। उनके प्रशंसकों की ओर से सोशल मीडिया के जरिए जन्मदिन की बधाई देने का सिलसिला बुधवार से ही शुरू हो गया है। वह पिछले 50 सालों से अपने परिवार के साथ मसूरी में रहते हैं और मसूरी में ही आज परिवार के साथ वह अपना जन्मदिन सादगी से मनाएंगे।
19 मई 1934 को हिमाचाल प्रदेश के कसौली में जन्मे बॉन्ड पहली पुस्तक ‘द रूम ऑन द रूफ’ 1956 में प्रकाशित हुई थी और 1957 में उन्हें इंग्लैंड में जॉन लेवन राइस मेमोरियल पुरस्कार से नवाजा गया था। लेखन के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों को देखते हुए 1992 में भारतीय साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1999 में रस्किन बॉन्ड पद्मश्री और 2014 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। वे अब तक सौ से अधिक पुस्तक, लघु कहानियां, एंथोलॉजी लिख चुके हैं। उनके उपन्यास 'सुसैनाज सेवन हजबेंड' पर विशाल भारद्वाज ने ‘सात खून माफ’ फिल्म भी बनाई थी और श्याम बेनेगल ने हिंदी सीरियल ‘एक था रस्टी’ का निर्माण किया था।
कुछ वर्षों पहले एक कार्यक्रम में जब उनसे यह सवाल पूछा गया कि विदेशी मूल के होने के कारण क्या उन्हें कभी हिन्दुस्तान में भेदभाव का सामना करना पड़ा, इसके उन्होंने कहा, ‘एक बार ऐसा हुआ था। मैं इसे भेदभाव नहीं कहूंगा बल्कि ये एक बड़ा मजाकिया वाकया है। कुछ साल पहले मैं एक हवाई अड्डे पर होटल में ठहरा हुआ था। होटल में चेक इन करने के दौरान काउंटर पर बैठे अधिकारी ने मुझसे पूछा कि मैं किस देश से हूं और हिन्दुस्तान कैसे आया? वो बार बार पूछता रहा कि किस देश से आया हूं। मैंने मजाक में कहा कि मैं सामान के साथ डिलीवर हो गया हूं। उसको मेरी कोई बात समझ नहीं आई, वह जानना चाहता था कि मैं किस तरह का इंडियन हूं तो मैंने कहा कि मैं रेड इंडियन हूं और उसने मेरी बात का यकीन भी कर लिया।’
रस्किन बॉन्ड का लेखन राजनीतिक टिप्पणियों से अछूता है। इस बारे में वे कहते हैं कि ‘सही मायने में कहूं तो किसी राजनीतिक दल में मेरी कभी कोई रुचि नहीं रही। मैंने कभी इस बात की परवाह नहीं की कि कौन सा राजनीतिक दल सत्ता में है। मेरी निष्ठा और वफादारी हमेशा देश के लिए रही है और इसीलिए मैंने कभी इस बात की परवाह नहीं की कि कौन सा राजनीतिक दल सत्ता में है। जो भी पार्टी सत्ता में आयी, मैं हमेशा इस बात के लिए सतर्क रहा कि मैं एक अच्छा नागरिक बनूं। मैं मूल रूप से देश के लिए समर्पित रहूं।
रस्किन बॉन्ड ऐसे लेखक हैं जो कभी अपने लेखन को दूसरों से श्रेष्ठ साबित करने का प्रयास नहीं करते। उनका मानना है कि लगभग सभी लेखकों ने सामाजिक परिस्थितियों को अपने लेखन का आधार बनाया है। चार्ल्स डिकन्स ने ब्रिटेन की वर्ग व्यवस्था को दुनिया के सामने रखा था। भारतीय लेखकों ने भी वर्ग भेद और वर्ग संघर्ष के बारे में लिखा है। रस्किन को बचपन में 'नर्सरी राइम्स' बहुत अच्छी लगती थी। उनका कहना है कि 'नर्सरी राइम' आपको लय सिखाती है, कल्पना करना सिखाती है। इसके अलावा 'ऐलिस इन वंडरलैंड', 'ट्रेजर आयलैंड' भी उनकी पसंदीदा कहानी थी। हर लेखक के जीवन में कुछ ऐसे क्षण आते हैं जब वह लेखन छोड़ देना चाहता है, लेकिन रस्किन कहते हैं, ऐसा कभी नहीं हुआ क्योंकि मुझे लिखने का जुनून है, आज भी मैं कहानियां लिख रहा हूं और रोजाना सुबह डेढ़ दो घंटे लेखन करता हूं। 60 के दशक की बात है, उस समय मेरी कहानियां बहुत अधिक नहीं छप रही थीं, लेकिन तब भी मेरा लिखने का उत्साह कम नहीं हुआ।
रस्किन बचपन से ही लेखक बनना चाहते थे। हालांकि आम बच्चों की तरह उनकी इच्छाएं भी समय-समय पर बदलती रहीं। एक समय ऐसा भी आया जब टैप डांसर बनने का फैसला लिया, लेकिन कुछ वक्त बाद ही उन्होंने यह फैसला टालकर फुटबॉलर बनने का सपना बुनना शुरू कर दिया और अंत में लेखक बनने की राह पर आगे चल निकले। रस्किन अपने भारी वजन और बचपन के सपनों पर चुटकी लेते हुए यह कहना भी नहीं भूलते कि अब लगता है कि लेखन बनने का फैसला समझदारी थी, क्योंकि मैं इस उम्र में भी कहानियां लिख रहा हूं लेकिन इस उम्र में टैप डांस या फुटबाल नहीं खेल सकता था।
लेखक का परिचय-
जन्म - 19 मई 1934, जामनगर कसौली, हिमाचाल प्रदेश
शिक्षा-दीक्षा - जॉन विशप कॉटन शिमला, हेम्पटनकोर्ट मसूरी
पहली पुस्तक - द रूम ऑन द रूफ वर्ष 1956 में प्रकाशित हुई। और 1957 में इंग्लैंड में जॉन लेवन राइस मेमोरियल पुरस्कार
सम्मान -
वर्ष 1992 में भारतीय साहित्य अकादमी पुरस्कार
वर्ष 1999 में पद्मश्री से सम्मानित किए गए।
वर्ष 2003 में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय ने डाक्ट्रेट की मानद उपाधि से विभूषित किया।
वर्ष 2014 में पद्मभूषण से सम्मानित किए गए
प्रसिद्ध रचनाएं-
रूम ऑफ द रूफ, द ब्लू अंब्रेला, द हिडेन पूल, द एडवेंचर ऑफ रस्टी, रोड्स टू मसूरी, मसूरी एंड लंढौर, डेज ऑफ वाइन एंड रोजेज, अ पैसेज थ्रू इंडिया, हिमालयन लीफ एंड फ्लॉवर, मसूरी ज्वैल ऑफ द हिल्स, एंग्री रिवर, हनुमान टू द रेस्क्यू, स्ट्रेंज मैन-स्ट्रेंज प्लेसेज, टेल्स एंड लीजेंड्स ऑफ इंडिया, द इंडिया आई लव, द रोड टू द बाजार।
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