'मीडिया पर सेंसरशिप' को लेकर अरुण जेटली का बड़ा बयान...

वित्त मंत्री अरुण जेटली का मीडिया पर सेंसरशिप को लेकर ऐसे समय पर एक बड़ा बयान आया है...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 17 November, 2018
Last Modified:
Saturday, 17 November, 2018
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

वित्त मंत्री अरुण जेटली का मीडिया पर सेंसरशिप को लेकर ऐसे समय पर एक बड़ा बयान आया है, जब विपक्षी पार्टियां आए दिन मीडिया पर सेंसरशिप लगाए जाने को लेकर मोदी सरकार को घेरती दिखाई देती हैं। दरअसल,नई दिल्ली में नेशनल प्रेस डे पर आयोजित एक कार्यक्रमको संबोधित करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि मौजूदा समय में तकनीक प्रेस सेंसरशिप की इजाजत नहीं देती। इसलिए अगर देश में कभी आपातकाल लागू भी हुआ तो वह स्वतंत्र प्रेस के कारण असफल साबित हो जाएगा।

जेटली ने कहा, वाणी की स्वतंत्रता पर खतरे की कोई गंभीर शिकायत न होना दर्शाता है कि प्रेस स्वतंत्र रूप से कार्य कर रहा है, लेकिन मीडिया के सामने अपनी प्रतिष्ठा को खुद बनाए रखने की चुनौती है। उन्होंने कहा कि अगर मीडिया की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है तो उसके लिए वह खुद जिम्मेदार होता है।

52वें राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर भारतीय प्रेस परिषद द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि  पत्रकारों को सम्मानजनक वेतन और काम के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ उनके काम की विश्वसनीयता बरकरार रखना भी मीडिया के लिए प्रमुख चुनौती है। 

उन्होंने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक समाज में जनता की राय का बड़ा महत्व होता है। इसलिए मीडिया की जिम्मेदारी है कि वह जनता के बीच अपने लिए सकारात्मक राय को कायम रखे।

जेटली ने कहा कि मीडिया के बहुविध माध्यमों की उपलब्धता के कारण प्रत्येक राजनीतिक विचार को मीडिया में जगह मिली हुई है।

जेटली ने कहा, हर राजनीतिक विचारधारा को मीडिया में जगह पाने का अधिकार है। मीडिया के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी ने बहुत से नए आयाम जोड़ दिए हैं। अब मीडिया के कई प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि इतने विकल्प होने के कारण ही आज कोई यह शिकायत नहीं कर सकता है कि अभिव्यक्ति की आजादी खतरे में हैं और उसे मीडिया में स्थान नहीं मिलता है। ऐसी शिकायत न प्रिंट मीडिया की ओर से आई और न ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तरफ से। सभी के लिए विकल्प मौजूद हैं। जेटली ने कुछ मामलों में शिकायतों का कारण राजनीति या लॉबी या व्यक्ति आधारित होने का जिक्र किया।

सन 1950 में नेहरू सरकार की ओर से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार पर लाए गए संशोधन का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने कहा, विदेशों से संबंधों में बाधा डालने की स्थिति में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाने का नियम बना। ऐसा जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली के बीच हुए एक समझौते के चलते हुए। बाद में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में इसका विरोध किया गया। मीडिया स्वतंत्र रहे, यह हमारी मूलभावना है।

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