वे राजीव गांधी थे, उस रात उन्होंने अपना पश्चाताप साथियों से बार-बार साझा किया...

1983 की उस खुशनुमा सुबह हम राजीव गांधी के सामने बैठे थे। स्थान था....

Last Modified:
Monday, 20 August, 2018
Rajiv Gandhi

'हुकूमत उस काजल की कोठरी का दूसरा रूप है, जिसमें कदम रखने पर दामन बेदाग रह ही नहीं सकता। संसार के समस्त सत्तानायकों को इसका दंश भोगना पड़ा है। राजीव गांधी भी इसका अपवाद न थे। इस वक्त अगर वह जिंदा होते, तो कल अपने जीवन के 75वें वर्ष में प्रवेश कर रहे होते।' हिंदी दैनिक हिन्दुस्तान में छपे अपने लेख के जरिए ये कहा वरिष्ठ पत्रकार व हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर ने। उनका पूरा लेख आप यहां पढ़ सकते हैंं-

राजीव गांधी तब तक खरा सोना बन चुके थे 

1983 की उस खुशनुमा सुबह हम राजीव गांधी के सामने बैठे थे। स्थान था उनके संसदीय क्षेत्र अमेठी में स्थित गौरीगंज का डाक बंगला। सुबह सात बजे के आस-पास का वक्त और डाइनिंग टेबल पर बैठे राजीव ने टोस्ट पर मक्खन लगाते हुए नफासत से पूछा कि आप क्या पसंद करेंगे? अनौपचारिकता के रस में  सराबोर वह एक औपचारिक ‘इंटरव्यू’ था। मेरे प्रश्न जितने सीधे थे, उनके जवाब उतने ही सरल और स्पष्ट। 

बाद में गौरीगंज से इलाहाबाद का रास्ता तय करते वक्त मैं और मेरे छायाकार साथी देर तक उनके बारे में बात करते रहे। हम एकमत थे कि देश में एक भला और नौजवान नेता उभर रहा है। यदि उन्हें परिपक्व होने का समय मिला, तो एक अच्छे प्रधानमंत्री साबित होंगे। उन दिनों नेहरू-गांधी परिवार का सितारा हिन्दुस्तानी राजनीति के फलक पर बीचोबीच चमक रहा था। पौने दो साल के अंतराल को छोड़ दें, तो इंदिरा गांधी डेढ़ दशक से प्रधानमंत्री थीं। देश की राजनीति उनके इर्द-गिर्द घूमती और ऐसे में उनके राजनीतिक वारिस के लिए इसके अलावा कुछ और सोचना नामुमकिन था। 

हम लोगों के मन में राजीव गांधी को जानने-समझने की उत्कंठा इसलिए भी ज्यादा थी, क्योंकि वह राजनीति के लिए अपनी मां की पहली पसंद नहीं थे। संजय गांधी ने सियासत की शुरुआत 1970 के दशक से ही कर दी थी। कांग्रेस की रीति-नीति में उनका खासा दखल था, पर एक हवाई दुर्घटना उनको असमय लील गई थी। राजीव उन दिनों इंडियन एयरलाइन्स में पायलट थे। आम मध्यवर्गीय भारतीयों जैसी सहज-सरल जिंदगी उन्हें और उनके छोटे से परिवार को रास आती थी। हालात ऐसे बने कि उन्हें राजनीति के गंदे तालाब में कूदना पड़ा। इसके साथ ही संजय और राजीव की मूल प्रकृति में बड़ा फर्क था। हमारे कौतूहल की असली वजह भी यही थी। 

क्या पता था कि कुछ महीने बाद इंदिरा गांधी भी हादसे की शिकार हो जाएंगी और राजीव अचानक प्रधानमंत्री बन जाएंगे? क्या आपको नहीं लगता कि राजीव गांधी के जीवन में संयोगों से ज्यादा दुर्योगों की भूमिका थी? एक दुर्घटना ने उन्हें राजनीति में ला दिया, दूसरी ने प्रधानमंत्री की कुरसी तक पहुंचाया और तब किसी को अंदाज न था कि काल का क्रूर चक्र उन्हें इसी दृष्टि से देख रहा है। मुझे अच्छी तरह याद है कि 21 मई, 1991 की उस रात जब श्रीपेरंबदूर से उनकी क्रूर हत्या की खबर आई, तो आगरा स्थित हमारे अखबार के किसी भी कर्मचारी को उसकी सत्यता पर भरोसा नहीं हो रहा था। 

कुछ ही दिन पहले तो वह ताजनगरी आए थे और वहां खबरनवीसों को उनका नया रूप दिखाई पड़ा था। हुआ यह था कि रामलीला मैदान की चुनावी जनसभा के बाद वह जनता से मिलने के लिए मंच से नीचे उतर आए थे। खुफिया ‘अलर्ट’ था कि उनकी जान को खतरा है। उत्तर प्रदेश पुलिस के लोग उनकी सुरक्षा के लिए दिल्ली से प्रदीप गुप्ता की अगुवाई में आए अंगरक्षकों के साथ जद्दोजहद कर रहे थे। उसी दौरान राजीव ने देखा कि एक बुजुर्ग महिला उन तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, पर पुलिस का दारोगा उसे रोक रहा है। उन्हें गुस्सा आ गया था और वह उत्तर प्रदेश पुलिस के उस उप-निरीक्षक से अपेक्षा के विपरीत कड़ा बर्ताव कर गए थे। आज के नेताओं की छोड़िए, उन दिनों भी राजनीतिज्ञों द्वारा ऐसी हरकतें आम थीं, पर वह राजीव गांधी थे। उस रात उन्होंने अपना पश्चाताप साथियों से बार-बार साझा किया। सहयोगियों ने कहा- जो हो गया, सो हो गया। जाने दीजिए। पर नहीं, उन्होंने उस दारोगा को अगली सुबह सर्किट हाउस बुलाया और निजी तौर पर क्षमा याचना की। इस बड़प्पन से वह दारोगा अभिभूत हो गया था। बाद में, आंखों से छलकते आंसुओं और रुंधे गले के साथ उसने पत्रकारों से कहा था कि काश! हर नेता इन जैसा हो जाए। 

वह यकीनन औरों से अलग थे, इसीलिए सतर्कता बरतने की खुफिया सूचनाओं के बावजूद ‘अपने लोगों’ से मिलने के लिए उतावले रहते और इसी वजह से उन्होंने जान गंवाई। जो भूल गए, उन्हें याद दिला दूं। उस समय देश में आम चुनाव हो रहे थे। केंद्र और विभिन्न राज्यों की एजेंसियों के पास ‘इनपुट’ था कि उन पर लिट्टे अथवा खालिस्तान समर्थक आतंकवादी हमला कर सकते हैं। हर जनसभा से पहले उन्हें चेताया जाता कि आप खुद को अधिक ‘एक्सपोज’ न करें। तमिलनाडु में खतरा कुछ अधिक था। वह इस तथ्य को जानते थे, फिर भी उन्होंने वहां का दौरा टालने की कोशिश नहीं की। उस समय ‘स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप’ (एसपीजी) सिर्फ प्रधानमंत्री की सुरक्षा मुहैया कराती थी। उनकी हत्या के बाद सरकार ने इसका दायरा बढ़ाया। अब यह प्रधानमंत्री, पूर्व प्रधानमंत्रियों, उनके परिजनों और गांधी परिवार की हिफाजत करती है। यह एक बेहतरीन सुरक्षा इकाई है और इसके अस्तित्व में आने के बाद किसी प्रधानमंत्री पर कोई बड़ा हमला नहीं हुआ है।

राजीव गांधी पर मंडरा रहे खतरे के मद्देनजर उनकी सुरक्षा के समुचित इंतजाम क्यों नहीं किए गए? इस सवाल का आज तक सटीक उत्तर नहीं मिल सका है।

यह तो राजीव गांधी के व्यक्तित्व का निजी पहलू था, पर बतौर प्रधानमंत्री उन्होंने कई ऐसे काम किए, जो उनके बेहतरीन हुक्मरां होने की मुनादी करते रहेंगे। पंजाब में अमन, उत्तर-पूर्व में शांति और देश की दूरसंचार तथा कंप्यूटर क्रांति उन्हीं की देन है। सियासत उनकी मूल प्रकृति का हिस्सा नहीं थी, इसीलिए उन्हें समझने में देर लगी कि राजनीति वंचनाओं का दुर्ग होती है। यही वजह है कि उनके सलाहकारों ने उन्हें प्रेस पर पाबंदी अथवा श्रीलंका में जरूरत से ज्यादा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्हें दूसरों से ज्यादा अपनों से दुख मिला। अगर उनमें सियासी शातिरपना होता, तो शायद बोफोर्स की दलदल में भी न फंसते, मगर ऐसा कौन सा राजनेता है, जिस पर दाग नहीं लगे? 

हुकूमत उस काजल की कोठरी का दूसरा रूप है, जिसमें कदम रखने पर दामन बेदाग रह ही नहीं सकता। संसार के समस्त सत्तानायकों को इसका दंश भोगना पड़ा है। राजीव गांधी भी इसका अपवाद न थे। इस वक्त अगर वह जिंदा होते, तो कल अपने जीवन के 75वें वर्ष में प्रवेश कर रहे होते। उन्हें उस दौर में असमय जाना पड़ा, जब वह संघर्षों की आग में तपकर खरा सोना बन चुके थे और देश को उनकी जरूरत थी।

 

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इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी के प्रेजिडेंट चुने गए के. राजा प्रसाद रेड्डी

तेलुगू दैनिक ‘साक्षी’ से जुड़े के. राजा प्रसाद रेड्डी शुक्रवार को इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी (आईएनएस) के प्रेजिडेंट चुने गए

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 24 September, 2022
Last Modified:
Saturday, 24 September, 2022
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तेलुगू दैनिक ‘साक्षी’ से जुड़े के. राजा प्रसाद रेड्डी शुक्रवार को इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी (आईएनएस) के प्रेजिडेंट चुने गए। मीडिया संगठन ने यह जानकारी दी।

एक बयान में बताया गया है कि आईएनएस की 83वीं वार्षिक आम बैठक में समाचार पत्र ‘आज समाज’ के राकेश शर्मा को आईएनएस (INS) का ‘डिप्टी प्रेजिडेंट’ और मातृभूमि आरोग्य मासिक के एम.वी.एस. कुमार को ‘वाइस प्रेजिडेंट’ चुना गया।

बयान के अनुसार, ‘अमर उजाला’ समाचार पत्र के तन्मय माहेश्वरी को आईएनएस का ट्रेजरर (कोषाध्यक्ष) चुना गया है।

इसमें कहा गया है, ‘आईएनएस की आज वार्षिक आम बैठक वीडियो कांफ्रेंस और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिये हुई।’

आईएनएस की 41 सदस्यीय कार्यकारिणी समिति में मोहित जैन (द इकोनॉमिक टाइम्स), विवेक गोयनका (द इंडियन एक्सप्रेस), जयंत एम. मैथ्यू (मलयाला मनोरमा), अतिदेब सरकार (द टेलीग्राफ) और के.एन. तिलक कुमार (डेक्कन हेराल्ड और प्रजावाणी) शामिल हैं

अन्य सदस्यों की सूची यहां देखें:

गिरीश अग्रवाल (दैनिक भास्कर, भोपाल)
समहित बल (प्रगतिवादी)
समुद्र भट्टाचार्य (हिन्दुस्तान टाइम्स, पटना)
होर्मसजी एन. कामा (बॉम्बे समाचार)
गौरव चोपड़ा (फिल्म दुनिया)
विजय कुमार चोपड़ा (पंजाबी केसरी, जालंधर)
करण राजेंद्र दर्डा (लोकमत, औरंगाबाद)
विजय जवाहरलाल दर्डा (लोकमत, नागपुर)
जगजीत सिंह दर्दी (चारदीकला डेली)
विवेक गोयनका (द इंडियन एक्सप्रेस, मुंबई)
महेंद्र मोहन गुप्ता (दैनिक जागरण)
प्रदीप गुप्ता (डेटाक्वेस्ट)
संजय गुप्ता (दैनिक जागरण, वाराणसी)
शिवेंद्र गुप्ता (बिजनेस स्टैंडर्ड)
विवेक गुप्ता (संमार्ग)
सर्विंदर कौर (अजीत)
लक्ष्मीपति (दिनमलर)
विलास ए मराठे (दैनिक हिन्दुस्तान, अमरावती)
नरेश मोहन (रविवार स्टेट्समैन)
अनंत नाथ (गृहशोभिका, मराठी)
प्रताप जी. पवार (साकाल)
राहुल राजखेवा (द सेंटिनल)
आर एम आर रमेश (दिनाकरन)
अतिदेब सरकार (द टेलीग्राफ)
पार्थ पी सिन्हा (नवभारत टाइम्स)
प्रवीण सोमेश्वर (द हिन्दुस्तान टाइम्स)
किरण डी ठाकुर (तरुण भारत, बेलगाम)
बीजू वर्गीस (मंगलम साप्ताहिक)
आई वेंकट (अन्नदाता)
कुंदन आर व्यास (व्यापार, मुंबई)
रवींद्र कुमार (द स्टेट्समैन)
किरण बी वडोदरिया (संभव मेट्रो)
पी वी चंद्रन (गृहलक्ष्मी)
सोमेश शर्मा (राष्ट्रदूत सप्तहिक)
शैलेश गुप्ता (मिड-डे)
एल आदिमूलम (स्वास्थ्य और एंटीसेप्टिक)

बता दें कि आईएनएस देश में समाचार पत्रों और पत्रिकाओं का शीर्ष संगठन है।

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सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का अब होगा सीधा प्रसारण, चैनल शुरू करने को लेकर उठी मांग

अब आप कोर्ट में चल रही सुनवाई को लाइव देख सकेंगे। फिर चाहे वह जनहित का मामला हो या देशहित व संविधान से जुड़े मामले सबकी सुनवाइयों का सीधा प्रसारण किया जाएगा।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 22 September, 2022
Last Modified:
Thursday, 22 September, 2022
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देश में ऐसे कई मामले होते हैं जिनकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही होती है, जिन्हें निष्पक्ष न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट भेजा जाता है। ऐसे में जनता की निगाहें भी इनके फैसले पर होती हैं, लेकिन अब एक अच्छी खबर सामने आई है। अब आप कोर्ट में चल रही सुनवाई को लाइव देख सकेंगे। फिर चाहे वह जनहित का मामला हो या देशहित व संविधान से जुड़े मामले सबकी सुनवाइयों का सीधा प्रसारण किया जाएगा। यह ऐतिहासिक फैसला मंगलवार को लिया गया।

बता दें कि पिछले काफी समय से इस पर काम चल रहा था, जिसके बाद अब जाकर सारी चीजें तय हुई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने अगले सप्ताह यानी 27 सितंबर से सभी संवैधानिक बेंच की सुनवाइयों का लाइव स्ट्रीमिंग यानी सीधा प्रसारण करने का निर्णय लिया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) उदय उमेश ललित ने मंगलवार शाम को इसे लेकर शीर्ष अदालत के सभी जजों की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया।

बता दें कि लाइव स्ट्रीमिंग (Live Streaming) की शुरुआत संविधान पीठ में चल रहे मामलों से होगी, बाद में इसे दूसरे मामलों के लिए भी शुरू किया जाएगा।

हाल में ही सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने इस बारे में चीफ जस्टिस समेत सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों को लिखकर सूचित किया था। इसमें उन्होंने जनहित व संवैधानिक महत्व वाले मामलों की सुनवाई के सीधा प्रसारण की बात तो कही ही साथ ही इस दौरान वकीलों के बहस का भी रिकॉर्ड रखने पर जोर दिया था।

सीनियर एडवोकेट ने कहा कि EWS, हिजाब मामला, नागरिकता संशोधन विधेयक जैसे देश हित के मामलों की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हो रही है, जिसका सीधा प्रसारण होना चाहिए। उन्होंने इसके लिए 2018 के फैसले का हवाला दिया जिसके अनुसार हर नागरिक का मूल अधिकार है कि उसे सूचना या जानकारी पाने की आजादी मिले। साथ ही सभी को न्याय पाने का भी अधिकार है।

सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट का एक अपना चैनल होने की भी सलाह दी है। साथ ही उन्होंने कहा कि तब तक शीर्ष कोर्ट अपनी वेबसाइट के साथ-साथ यूट्यूब पर लाइव स्ट्रीमिंग की शुरुआत कर सकता है। कई मौकों पर सुप्रीम कोर्ट ने लाइव स्ट्रीमिंग किया भी है। इसका जिक्र करते हुए सीनियर एडवोकेट ने कहा कि कोर्ट के पास इसके लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है। इस क्रम में उन्होंने पूर्व चीफ जस्टिस एन वी रमना की रिटायरमेंट की तारीख पर हुए लाइव स्ट्रीमिंग के बारे में बताया। उन्होंने गुजरात, ओडिशा, कर्नाटक, झारखंड, पटना और मध्य प्रदेश के हाई कोर्ट में यू ट्यूब के जरिए होने वाले लाइव स्ट्रीमिंग की भी चर्चा की।

गौरतलब है कि 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग का फैसला दिया था। कोरोनाकाल में भी सुप्रीम कोर्ट में मामलों की वीडियो कांफ्रेसिंग के द्वारा सुनवाई की गई थी। हालांकि तब आम लोगों को यह सुनवाई देखने की व्यवस्था नहीं थी। इस साल 26 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने तत्कालीन चीफ जस्टिस एन.वी. रमना को विदाई देने के लिए बैठी सेरेमोनियल बेंच की कार्रवाई का सीधा प्रसारण किया था। अब शुरुआत में यह प्रसारण यूट्यूब पर किया जाएगा, बाद में सुप्रीम कोर्ट इसके लिए अपनी वेब भी सेवा शुरू करेगा। 

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सुप्रीम कोर्ट ने न्यूज चैनलों को लगाई फटकार, कहा- तय हो न्यूज एंकर्स की जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट ने न्यूज चैनलों में होने वाली बहस की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए नाराजगी व्यक्त की है और टीवी चैनलों को फटकार लगाई है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 September, 2022
Last Modified:
Wednesday, 21 September, 2022
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सुप्रीम कोर्ट ने न्यूज चैनलों में होने वाली बहस की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए नाराजगी व्यक्त की है और टीवी चैनलों को फटकार लगाई है।  कोर्ट ने कहा कि न्यूज चैनल भड़काऊ बयानबाज़ी का प्लेटफार्म बन गए हैं। प्रेस की आजादी अहमियत रखती है लेकिन बिना रेगुलेशन के टीवी चैनल हेट स्पीच का जरिया बन गए हैं। जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस ऋषिकेश रॉय की बेंच ने बुधवार को यह बात कही।

कोर्ट ने कहा कि राजनेताओं ने इसका सबसे अधिक फायदा उठाया है और टेलीविजन चैनल उन्हें इसके लिए मंच देते हैं। इस पर सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े ने कहा कि चैनल और राजनेता ऐसी हेट स्पीच से ही चलते हैं। चैनलों को पैसा मिलता है इसलिए वे दस लोगों को बहस में रखते हैं।

कोर्ट ने कहा कि मेनस्ट्रीम मीडिया या सोशल मीडिया चैनल बिना रेगुलेशन के हैं। न्यूज एंकर्स की जिम्मेदारी पर सवाल उठाते हुए कोर्ट ने कहा कि एंकर की जिम्मेदारी कि बहस में कोई भड़काऊ बात न हो, लेकिन एंकर ऐसा नहीं करते। इससे सख्ती से निपटा नहीं जा रहा है। एंकर की जिम्मेदारी तय होनी। अगर किसी एंकर के कार्यक्रम में भड़काऊ कंटेंट होता है, तो उसको ऑफ एयर किया जाना चहिए और जुर्माना लगाना चहिए। कोर्ट ने पूछा कि इस मामले में सरकार मूकदर्शक क्यों बनी हुई है? क्या यह एक मामूली मुद्दा है?

कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, लेकिन हमें पता होना चाहिए कि रेखा कहां खींचनी है। हेट स्पीच का हमारे दिमाग पर गंभीर प्रभाव पड़ता। यहां की मीडिया को अमेरिका जितनी आजादी नहीं है, लेकिन यह पता होना चाहिए कि सीमा रेखा कहां खींचनी है। लिहाजा टीवी पर अभद्र भाषा बोलने की आजादी नहीं दी जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करने वाले यूनाइटेड किंगडम के एक टीवी चैनल पर भारी जुर्माना लगाया गया था। लेकिन हमारे यहां ऐसा नहीं है। उनसे सख्ती नहीं हो रही है। अगर मंजूरी मिलती है तो हम जुर्माना लगा सकते हैं या उन्हें ऑफ एयर कर सकते हैं।

नफरत फैलाने वाले शो दर्शकों को क्यों पसंद आते हैं, इस पर कोर्ट ने कहा कि किसी रिपोर्ट में नफरत से भरी भाषा कई लेवल पर होती है। ठीक वैसे, जैसे किसी को मारना। आप इसे कई तरह से अंजाम दे सकते हैं। चैनल हमें कुछ विश्वासों के आधार पर बांधे रखते हैं। लेकिन, सरकार को प्रतिकूल रुख नहीं अपनाना चाहिए। उसे कोर्ट की मदद करनी चाहिए।

हरिद्वार में पिछले साल आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए भड़काऊ भाषण मामले पर सुनवाई के दौरान न्यूज चैनलों पर होने वाली डिबेट की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए सुनवाई करने वाली बेंच के जज जस्टिस के एम जोसेफ ने कहा कि टीवी पर दस लोगों को डिबेट में बुलाया जाता है। जो अपनी बात रखना चाहते है, उन्हें म्यूट कर दिया जाता है। उन्हें अपनी बात रखने का मौका ही नहीं मिलता।

टीवी चैनलों की हेट स्पीच वाली रिपोर्ट वाली याचिकाओं पर अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया है कि वह ये स्पष्ट करे कि क्या वह हेट स्पीच पर अंकुश लगाने के लिए विधि आयोग की सिफारिशों पर कार्रवाई करने का इरादा रखती है।

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कोविड से जान गंवाने वाले पत्रकारों के परिजनों को CM योगी ने दी आर्थिक सहायता

कोरोना वायरस की वजह से जान गंवाने वाले प्रदेश के पत्रकारों के परिवारों को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 10 लाख रुपए की सहायता राशि जारी की है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 September, 2022
Last Modified:
Wednesday, 21 September, 2022
Journalists

कोरोना वायरस (कोविड-19) की वजह से जान गंवाने वाले प्रदेश के पत्रकारों के परिवारों को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 10-10 लाख रुपए की सहायता राशि जारी की है।

यह सूचना उत्तर प्रदेश के सूचना एवं जनसंचार विभाग की ओर से 20 सितंबर को जारी की गई। इस योजना के तहत कुल 53 पत्रकारों के परिवारों को यह धनराशि दी जाएगी। इस योजना को राज्यपाल की अनुमति के बाद लागू किया गया, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार कुल 5.30 करोड़ रुपए खर्च करेगी।

गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ ने इस साल हिंदी पत्रकारिता दिवस (30 मई) पर कोरोनावायरस (कोविड-19) की वजह से जान गंवाने वाले प्रदेश के पत्रकारों के परिवारों को 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया था। मुख्यमंत्री का निर्देश मिलने के बाद प्रदेश का सूचना विभाग कोविड-19 की वजह से जान गंवाने वाले पत्रकारों का ब्यौरा जुटाने में लग गया था, ताकि उनके परिवारों को जल्द से जल्द आर्थिक सहायता प्रदान की जा सके। इसके लिए पीड़ित परिवारों से प्रार्थना पत्र मांगे गए थे।

इस योजना के तहत आर्थिक सहायता पाने के लिए मृतक पत्रकार का मान्यता प्राप्त होना जरूरी नहीं था, यानी किसी भी पेशेवर पत्रकार की मौत कोरोना संक्रमण से होने की परिस्थिति में उसके परिवार को आर्थिक सहायता दी जाएगी।

इस घोषणा के बाद, 31 जुलाई को लखनऊ के लोक भवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में, मुख्यमंत्री योगी ने दिवंगत मीडियाकर्मियों के परिजनों को सहायता राशि का चेक सौंपा था। इसकी धनराशि 20 सितम्बर 2022 को सरकार द्वारा पत्रकार कल्याण कोष में डाली गई है, जिसे अब सभी परिवारों को सौंप दिया जाएगा।

बता दें कि कोरोना काल में कवरेज के दौरान कई पत्रकार कोरोना से संक्रमित हो गए थे, जिनमें कई का निधन हो गया है। ऐसे में उनके परिजनों के सामने भरण-पोषण की मुश्किल आ गई है। इसे देखते हुए ही योगी सरकार ने यह फैसला किया है।  

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अनुराग ठाकुर ने यूं समझाया 'वास्तविक पत्रकारिता' का अर्थ, मीडिया को लेकर कही ये बात

दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में सूचना प्रसारण मंत्री ने कहा कि मेनस्ट्रीम मीडिया के लिए सबसे बड़ा खतरा नए जमाने के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से नहीं, बल्कि खुद मुख्यधारा के मीडिया चैनलों से है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 September, 2022
Last Modified:
Wednesday, 21 September, 2022
Anurag Thakur

सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर का कहना है कि वास्तविक पत्रकारिता का मतलब है कि बिना तोड़े-मरोड़े खबरों को दिखाया जाए और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नई दिल्ली में ‘एशिया पैसिफिक इंस्टीट्यूट फॉर ब्रॉडकास्टिंग डेवलपमेंट’ (AIBD) के एक कार्यक्रम में अनुराग ठाकुर ने कहा कि असली पत्रकारिता तथ्यों का सामना करने, सच्चाई पेश करने और सभी पक्षों को अपने विचार रखने के लिए मंच देने के बारे में है।

अनुराग ठाकुर के अनुसार, ‘मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है कि मेनस्ट्रीम मीडिया के लिए सबसे बड़ा खतरा नए जमाने के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से नहीं, बल्कि खुद मुख्यधारा के मीडिया चैनलों से है। यदि आप अपने चैनल पर उन मेहमानों को आमंत्रित करने का निर्णय लेते हैं जो ध्रुवीकरण कर रहे हैं, जो झूठी खबरें फैलाते हैं और जो काफी चीखते- चिल्लाते हैं, तो आपके चैनलों की विश्वसनीयता कम हो जाती है।’  अनुराग ठाकुर ने कहा कि ऐसे में आपका शो देखने के लिए दर्शक एक मिनट के लिए रुक तो सकते हैं, लेकिन खबरों के विश्वसनीय और पारदर्शी स्रोत के रूप में कभी भी आपके एंकर, आपके चैनल अथवा ब्रैंड पर भरोसा नहीं करेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सूचना प्रसारण मंत्री का यह भी कहना था कि ब्रॉडकास्टर्स यह तय कर सकते हैं कि कंटेंट को कैसे सही तरीके से पेश किया जाए। खबरों में तटस्थता वापस लाने की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि तीखी बहसों से टीवी चैनल्स को व्युअरशिप तो मिल सकती है, लेकिन विश्वसनीयता नहीं।

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‘9X मीडिया’ ने भूपेंद्र माखी को किया प्रमोट, बनाया CEO

‘9X मीडिया’ ने भूपेंद्र माखी को चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (सीईओ) के रूप में प्रमोट किया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 20 September, 2022
Last Modified:
Tuesday, 20 September, 2022
BhupendraMakhi458433

‘9X मीडिया’ ने भूपेंद्र माखी को चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (सीईओ) के रूप में प्रमोट किया है। 9X मीडिया में लंबे समय तक माखी कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) रहे हैं और अभी इसी पद पर कार्यरत थे। इसके पहले वे फाइनेंस के वाइस प्रेजिडेंट थे। वह 2007 से इस ऑर्गनाइजेशन के साथ जुड़े हुए हैं।

भूपेंद्र अब अपनी नई भूमिका में कंपनी के लिए स्ट्रैटजिक बिजनेस डेवलपमेंट का नेतृत्व करेंगे, यानी भारत में कंपनी के बिजनेस की ग्रोथ को और मजबूत बनाने की रणनीति पर काम करेंगे।

माखी को फाइनेंशियल सेक्टर की गहरी समझ है और मीडिया व एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में एक प्रभावशाली ट्रैक-रिकॉर्ड है।  

सीईओ के रूप में प्रमोट किए जाने पर टिप्पणी करते हुए भूपेंद्र माखी ने कहा, ‘मैं अपने निवेशकों और बोर्ड का आभारी हूं कि उन्होंने मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी। 9X मीडिया एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गया है और सकारात्मक प्रदर्शन कर रहा है। हम अत्यधिक उत्साहित हैं और मैं कंपनी के फायदे के लिए सभी टीमों के साथ मिलकर काम करना जारी रखूंगा और अपने सभी स्टेकहोल्डर्स की वैल्यू को बनाए रखूंगा।

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अरविंद केजरीवाल ने PM के मीडिया सलाहकार पर संपादकों को धमकाने का लगाया आरोप

दिल्ली को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मीडिया सलाहकार पर पत्रकारों व संपादकों को धमकाने का आरोप लगाया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 20 September, 2022
Last Modified:
Tuesday, 20 September, 2022
ArvindKejriwal5482

आम आदमी पार्टी के संयोजक व दिल्ली को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मीडिया सलाहकार पर पत्रकारों व संपादकों को धमकाने का आरोप लगाया है दरअसल, 18 सितंबर को अरविंद केजरीवाल ने पार्टी के पहले राष्ट्रीय जनप्रतिनिधि सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान ही उन्होंने प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार पर मीडिया को धमकाने का आरोप लगाया।

अरविंद केजरीवाल ने अपने भाषण में कहा कि मुझे बड़े-बड़े न्यूज चैनलों के एडिटर और मालिकों ने गंदी गालियां और धमकी भरे नोट दिखाए हैं कि पीएमओ में कार्यरत मीडिया सलाहकार कैसे-कैसे मैसेज उन्हें भेजते हैं। वे लिखकर भेजते हैं कि केजरीवाल को दिखाया तो ये कर देंगे, केजरीवाल को दिखाया तो वो कर देंगे। ‘आप’ को दिखाने की जरूरत नहीं है, आप अपने चैनल का दुरुपयोग कर रहे हों, क्या धमकियां दे रहे हैं वो, ऐसे देश चलाएंगे, फोन कर के धमकियां देते हैं।’

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मैं उन मीडिया सलाहकार को एक ही बात कहना चाहता हूं कि आप जो मैसेज और धमकियां देते हो, यदि किसी ने उसका स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर डाल दिया, तो आप और प्रधानमंत्री जी शक्ल दिखाने लायक नहीं बचोगे। आपकी धमकियों को कई लोगों ने रिकॉर्ड करके रखा है, अगर सोशल मीडिया पर डाल दी तो चेहरा नहीं दिखा पाओगे, बंद करो इस तरह से मीडिया को धमकाना।

बता दें कि पहली बार रविवार को राष्ट्रीय जनप्रतिनिधि सम्मेलन में देशभर से आप पार्टी के सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। पार्टी ने संगठन को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए बैठक बुलाई गई थी।

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NBDA ने टीवी रेटिंग जारी करने वाली संस्था BARC को दिए ये सुझाव

न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन (NBDA) ने ब्रॉडकास्टर्स ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) इंडिया को यह सुझाव दिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 20 September, 2022
Last Modified:
Tuesday, 20 September, 2022
NBDA

न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन (NBDA) ने ब्रॉडकास्टर्स ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) इंडिया को यह सुझाव दिया है कि उसे टीवी + डिजिटल मीजरमेंट सिस्टम शुरू करने से पहले मौजूदा टीवी व्युरअरशिप मीजरमेंट सिस्टम में सुधार करना चाहिए।

एनबीडीए ने पिछले साल सूचना-प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) को यह सुझाव दिया था कि टेलीविजन रेटिंग का पता लगाने के लिए मौजूदा सैम्पल साइज को बढ़ाया जाना चाहिए, जोकि 44,000 है, ताकि डेटा और अधिक अच्छा और विश्वसनीय हो जाए। वित्तीय वर्ष 2022 के लिए अपनी वार्षिक रिपोर्ट में एमआईबी ने एनबीडीए के सुझावों की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख किया था।

बता दें कि नवंबर 2021 में, एमआईबी ने 'भारत में टीवी रेटिंग एजेंसियों पर दिशानिर्देश’ की समीक्षा करने वाली रिपोर्ट पर एनबीडीए सहित कई अन्य उद्योग निकायों से सुझाव/टिप्पणियां मांगीं थी। एमआईबी ने मौजूदा टीवी रेटिंग प्रणाली में किस तरह के सुधार किए जाएं, इस पर सुझाव देने के लिए प्रसार भारती के पूर्व सीईओ शशि शेखर की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। समिति ने जनवरी 2021 में अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी।

गौरतलब है कि इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स (आईएसए) के अध्यक्ष सुनील कटारिया ने हाल ही में कहा था कि एसोसिएशन ‘यूनिफाइड क्रॉस-मीडिया मीजरमेंट मेथड’ को लाने पर बार्क के साथ मिलकर काम कर रहा है, जिसकी 2023 की पहली छमाही में शुरू होने की उम्मीद है। बता दें कि आईएसए बार्क में एक स्टेक होल्डर है।

एनबीडीए ने यह भी सुझाव दिया कि बार्क के बोर्ड स्तर पर मजबूत कॉर्पोरेट गवर्नेंस की जरूरत है। एनबीडीए ने सुझाव दिया कि बार्क की तकनीकी और निगरानी समितियों में न केवल स्वतंत्र सदस्य शामिल होने चाहिए, बल्कि सभी स्टेकहोल्डर्स के सदस्यों को भी शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि स्टेकहोल्डर्स भी बार्क से पारदर्शिता और सही डेटा की उम्मीद कर रहे हैं और इसे लेकर वे भी चितिंत हैं।

टीवी न्यूज निकाय ने यह भी कहा कि कुछ ऐसा हो कि उसे भी बार्क बोर्ड के समझ अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए, चूंकि 'न्यूज' एक बहुत ही महत्वपूर्ण जॉनर है, लिहाजा एनबीडीए को बोर्ड में प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलना चाहिए, ताकि वह न्यूज चैनलों की रेटिंग से संबंधित किसी भी मुद्दे पर बार्क को महत्वपूर्ण जानकारी दे सके।

एनबीडीए ने रिटर्न पाथ डेटा (आरपीडी) प्रक्रिया के उपयोग को लेकर जारी की गई सिफारिशों का समर्थन किया, जबकि आरपीडी को कैसे लागू किया जाएगा, इस बारे में अपनी आशंका व्यक्त की है। एनबीडीए ने सुझाव दिया कि आरपीडी को बहुत सारी खामियों से भरे पैनल डेटा को सीधे तौर पर एक्सट्रप्लेशन नहीं करना चाहिए।

एनबीडीए ने अपने सुझाव में कहा कि इसके बजाय दो इंडिपेंडेंट स्ट्रीम शुरू की जानी चाहिए और आरपीडी को सही समय पर लागू किया जाना चाहिए। एनबीडीए ने यह भी सुझाव दिया कि लैंडिंग यूजर्स बिहेवियर और ड्यूल एलसीएन बिहेवियर के लिए एक पैटर्न रिकॉगनाजेशन को भी जोड़ा जाना चाहिए।

एनबीडीए का यह भी विचार था कि जब तक रिसर्च डिजाइन को सरल नहीं बनाया जाता, तब तक व्युअरशिप डेटा की क्राउडसोर्सिंग भी आरपीडी प्रक्रिया जैसी ही समस्याओं से जूझती रहेगी, जिसमें  लागत, अशुद्धि, डेटा के हेरफेर की संभावना और डेटा की गोपनीयता की चिंता बनी रहती है। इसलिए, ऑडियंस व्युरशिप सिस्टम पर काम करने के लिए पहला फोकस रिसर्च डिजाइन और इनपुट स्तर के डेटा के संग्रह पर होना चाहिए।

एसोसिएशन ने सुझाव दिया कि बार्क को ड्यूल एलसीएन (LCN), लैंडिंग पेज या किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ जैसे अनुचित तरीकों से बनाए गए स्पाइक्स को हटाने के लिए एक मैकेनिज्म (तंत्र) विकसित करना चाहिए। साथ ही यह भी कहा गया है कि बार्क के निवेश वॉटरमार्क के दायरे से बाहर होने चाहिए। वास्तव में ड्यूल और लैंडिंग फीड खोजने का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि इस तरह के नए तरीके को प्रोत्साहित करने और इस क्षेत्र में स्टार्ट-अप को विकसित करने की जरूरत है।

 

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NBDA का प्रेजिडेंट बनने पर जानिए क्या बोले अविनाश पांडेय

एबीपी नेटवर्क के सीईओ अविनाश पांडेय ने न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन के नए अध्यक्ष (प्रेजिडेंट) पद की जिम्मेदारी संभाल ली है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 17 September, 2022
Last Modified:
Saturday, 17 September, 2022
Avinash Pandey

एबीपी नेटवर्क (ABP Network) के सीईओ अविनाश पांडेय (Avinash Pandey) ने न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन (NBDA) के नए अध्यक्ष (प्रेजिडेंट) पद की जिम्मेदारी संभाल ली है। बता दें कि इससे पहले अविनाश पांडेय एनबीडीए के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

इसी के साथ एमवी श्रेयम्स कुमार (MV Shreyams Kumar) एनबीडीए के उपाध्यक्ष (वाइस प्रेजिडेंट) का पद संभालेंगे और अनुराधा प्रसाद शुक्ला ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन की नई कोषाध्यक्ष (ट्रेजरर) नियुक्त की गई हैं। ये नियुक्तियां शुक्रवार को एनबीडीए की बोर्ड बैठक के दौरान हुईं, जहां एनबीडीए की 14वीं वार्षिक रिपोर्ट पेश की गई। 

एनबीडीए का अध्यक्ष नियुक्त होने पर अविनाश पांडेय ने कहा, ‘हमारी न्यूज इंडस्ट्री जिस रणनीतिक परिवर्तन बिंदु से गुजर रही है, उसे देखते हुए यह एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। मैं रजत जी को उनके बेदाग नेतृत्व और कड़ी मेहनत के साथ वीयूसीए के समय से हमारा नेतृत्व करने के लिए धन्यवाद देता हूं। मुझे विश्वास है कि एनबीडीए के सदस्य और इसका बोर्ड हमारी इंडस्ट्री और समाज में बदलाव लाना जारी रखेगा।'

वहीं, इस बदलाव पर टिप्पणी करते हुए रजत शर्मा ने कहा, ‘पिछले कुछ साल न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहे हैं, मुझे खुशी है कि एनबीडीए ने एक टीम के रूप में हर संकट से लड़ाई लड़ी और हर लड़ाई जीती। अविनाश को अध्यक्ष पद सौंपते हुए मुझे प्रसन्नता हो रही है, जिन्होंने एनबीडीए में मेरे साथ मिलकर काम किया है। उन्हें उस विरासत को आगे बढ़ाना है, जिसे हमने सामूहिक रूप से वर्षों से बनाया है।’

2005 से विभिन्न भूमिकाओं में काम करते हुए अविनाश पांडेय ने जनवरी 2019 में एबीपी नेटवर्क के सीईओ का पद संभाला था। अविनाश पांडे के पास मीडिया में काम करने का 26 वर्षों से ज्यादा का शानदार अनुभव है। वह इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप और टीवी टुडे ग्रुप के साथ भी काम कर चुके हैं। वह इंटरनेशनल एडवरटाइजिंग एसोसिएशन के इंडियन चैप्टर के बोर्ड में भी हैं। 

इस वर्ष जुलाई में इंटरनेशनल एडवरटाइजिंग एसोसिएशन (IAA) ने एबीपी न्यूज के सीईओ अविनाश पांडेय को 'मीडिया पर्सन ऑफ द ईयर' पुरस्कार से नवाजा था। अविनाश पांडे ने इस अवॉर्ड को एबीपी नेटवर्क की टीम के शानदार काम को समर्पित किया था। इससे पहले ईनबीए (ENBA) की ओर अविनाश पांडेय को बेस्ट सीईओ का पुरस्कार मिला था। इसके अलावा भी एबीपी न्यूज को कई कैटेगरी में कई अवॉर्ड मिले थे।

जानिए, क्या है एनबीडीए-

एनबीडीए न्यूज ब्रॉडकास्टर्स का भारत का सबसे बड़ा निजी संगठन है। यह संगठन प्राइवेट न्यूज चैनलों और डिजिटल ब्रॉडकास्टर्स का प्रतिनिधित्व करता है। यह पूरी तरह से अपने सदस्यों द्वारा वित्त पोषित संगठन है। पहले इसे ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ के नाम से जाना जाता था। 13 अगस्त 2021 को इस संगठन का नाम बदलकर ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन’ कर दिया गया था। इसमें देश के लगभग सभी प्रमुख न्यूज नेटवर्क शामिल हैं।

बताते चलें कि एनबीडीए संपादकीय मानकों में विश्वास रखता है, जिससे रिपोर्टिंग में उद्देश्यपरक मूल्य, तटस्थता,  निष्पक्षता और सटीकता सुनिश्चित होती है। 3 जुलाई 2007 को भारत के प्रमुख न्यूज ब्रॉडकास्टर्स द्वारा इस संगठन की स्थापना की गई थी। 

न्यूज चैनलों की नीति, कामकाज, नियामक, तकनीकी और कानूनी संबंधी मामलों को लेकर इस संगठन की स्थापना की गई थी। वर्तमान में 26 प्रमुख न्यूज व करेंट अफेयर्स मामलों के ब्रॉडकास्टर्स इस संगठन के सदस्य हैं और 119 न्यूज व करेंट अफेयर्स मामलों के चैनल इससे जुड़े हैं। संगठन में शामिल होने वाले आवेदक को एक वार्षिक सदस्यता शुल्क देनी होती है। इसकी सदस्यता के लिए दिशा-निर्देशों का पालन करना होता है। इसे भारत में न्यूज, करेंट अफेयर्स और डिजिटल ब्रॉडकास्टर्स की सामूहिक आवाज के रूप में जाना जाता है।

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‘सहारा इंडिया’ में सुमित रॉय को मिली अब ये अतिरिक्त जिम्मेदारी

कंपनी की ओर से जारी स्टेटमेंट के अनुसार इस पद पर उनकी नियुक्ति फिलहाल पांच साल के लिए की गई है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 16 September, 2022
Last Modified:
Friday, 16 September, 2022
Sahara India

वरिष्ठ पत्रकार सुमित रॉय को ‘सहारा इंडिया’ (Sahara India) की मीडिया और एंटरटेनमेंट डिवीजन का नया हेड नियुक्त किया गया है। इस बारे में कंपनी की ओर से एक स्टेटमेंट भी जारी किया गया है।  इस स्टेटमेंट में कहा गया है, ‘सुमित रॉय हमारी मीडिया और एंटरटेनमेंट डिवीजन के हेड होंग। फिलहाल इस पद पर उनका कार्यकाल पांच साल के लिए होगा। जरूरत पड़ने पर इस कार्यकाल को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।’

स्टेटमेंट के अनुसार, इस बात को ध्यान में रखते हुए कि एक मजबूत प्रशासन, एक सुरक्षित और सकारात्मक माहौल की कुंजी है और मीडिया के सभी स्तरों पर सक्रिय शासन में भी योगदान देगा, सुमित रॉय को वर्तमान में उनकी कॉरपोरेट एचआर हेड की भूमिका के साथ-साथ अतिरिक्त रूप से यह नई जिम्मेदारी दी जा रही है। उपेंद्र राय सहित सभी संबंधित सुमित रॉय को रिपोर्ट करेंगे और संस्थान के हित में उनका पूरा सहयोग करेंगे।

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