वे राजीव गांधी थे, उस रात उन्होंने अपना पश्चाताप साथियों से बार-बार साझा किया...

1983 की उस खुशनुमा सुबह हम राजीव गांधी के सामने बैठे थे। स्थान था....

Last Modified:
Monday, 20 August, 2018
Rajiv Gandhi


'हुकूमत उस काजल की कोठरी का दूसरा रूप है, जिसमें कदम रखने पर दामन बेदाग रह ही नहीं सकता। संसार के समस्त सत्तानायकों को इसका दंश भोगना पड़ा है। राजीव गा...
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