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गूगल ने क्रोम के प्रचार के लिए प्रिंट माध्यम को चुना
<div>समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो </div> <div>सर्च इंजन गूगल उनमें से नहीं है जो बड़े पैमाने पर अपन
समाचार4मीडिया ब्यूरो 10 years ago
समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो
सर्च इंजन गूगल उनमें से नहीं है जो बड़े पैमाने पर अपना प्रचार करते हैं। वास्तव में, गूगल की सफलता की सारी कहानियों का तथ्य यह है कि वे वैसे लोगों को पकड़ने में कामयाब रहे हैं जो व्यावहारिक रूप से शून्य या सीमांत खर्च पर विज्ञापन करते हैं। इसलिए, टाइम्स ऑफ इंडिया में 29 सितंबर, 2010 को गूगल क्रोम का एक पूरे पेज का विज्ञापन देख कर आश्चर्य होना ही था। विज्ञापन में गूगल के ‘डब्ल्यू.डब्ल्यू.डब्ल्यू.क्रोम’ को आसान, सुरक्षित और तेज बताया गया है। यह नया ब्राउजर तेजी से कार्य करता है और सभी के लिए है। क्रिएटिव को ‘अंतर्राष्ट्रीय क्रोम कैंपेन’ से लिया गया है। यह पहला अवसर नहीं है जब गूगल ने प्रिंट माध्यम का सहारा लिया है इससे पहले गूगल ने आईपीएल की यूट्यूब पर स्ट्रीमिंग को बड़े पैमाने पर मीडिया में कैंपेन किया था। लेकिन यह सब बदलते समय का संकेत है?
जब गूगल से प्रिंट में विज्ञापन देने का कारण पूछा गया तो गुगल के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम हमेशा नए रास्तों की तलाश करते हैं जिससे ब्राउजर के महत्व के बारे में लोगों को पता चले और क्रोम को फायदा पहुंचे। इसमें उपयोगकर्ताओं का फीडबैक के साथ-साथ, नई सुविधाओं जैसे अनुवाद, विभिन्न एक्सटेंशन, सूचनाप्रद वीडियो बनाने की सुविधा, विभिन्न विज्ञापन के प्रारूपों पर प्रयोग, प्रिंट विज्ञापन में जिस तरह आपने देखा के जैसा होगा। गूगल क्रोम के उपयोगकर्ताओं को लाभ पहुंचाने के लिए हम लगातार कार्य कर रहे हैं।”
तो, क्या इसे गूगल की मार्केटिंग रणनीति में बदलाव समझा जाये? प्रवक्ता ने कहा, बिल्कुल नहीं? हम हमेशा विभिन्न मीडिया रूपों के माध्यम से अपने उपभोक्ताओं को दी जा रही सुविधा के बारे में विज्ञापन करते रहते हैं, यहां तक कि, आईपीएल की यूट्यूब पर स्ट्रीमिंग के बारे में भी हमने बड़े पैमाने पर प्रिंट और ओओएच माध्यम में विज्ञापन किया था। हम हमेशा अपने उत्पाद और सुविधाओं के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए नए माध्यमों की तलाश में रहते हैं और प्रिंट उन्हीं में से एक है?
‘हरीश बिजूर सलाह इंक’ के संस्थापक, हरीश बिजूर ने कहा, इसमें कोई आश्चर्य नहीं है? किसी भी बड़े ब्रांड की तरह, गूगल और याहू के लिए भारत एक प्रतिद्वंदी बाजार है। जबकि, ऑनलाइन लोगों की संख्या 4 करोड़ 60 लाख के लगभग है। जो अभी तक ऑनलाइन नहीं है वे गूगल की तरफ आकर्षित हो सकते हैं। यह काफी बड़ा वर्ग है, चाहे आप द्वितीय श्रेणी या तृतीय श्रेणी के शहरों में रहते हों और यहां तक कि बड़े शहरों में इंटरनेट का विस्तार की काफी संभावना है। वास्तव में, हाल ही में आए ‘कॉमस्कोर’ से पता चलता है कि याहू और गूगल भारत में कड़े प्रतिद्वंदी हैं, इस प्रकार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए यह शानदार अवसर है। मुझे लगता है कि गूगल ने अपने प्रतिद्वंदी याहू से बढ़त लेने के लिए प्रिंट माध्यम का सहारा लिया है और प्रिंट में विज्ञपन उसी रणनीति का एक हिस्सा है।
उन्होंने आगे कहा, जागरूकता फैलाने से ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच बढ़ेगी और भारत में जहां लोग कम संख्या में ऑनलाइन हैं। हां, नेट कनेक्टिविटी सीमित संख्या में हैं लेकिन जो लोग ऑफलाइन हैं उन्हें ऑनलाइन में परिवर्तित करने की विशाल क्षमता है। सफलतापूर्वक कैंपेन के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन लोगों तक पहुंचना है। और गुगल जैसे बड़े ब्रांड के लिए, जो ऑनलाइन विज्ञापन करते हैं, जब उन्होंने ऑफलाइन होने का निर्णय लिया तो यह संदेश बड़े पैमाने पर गया। इसलिए, पूरे पेज का विज्ञापन करना जरूरी था या अभिनव प्रयोग करना। उससे कम का वास्तव में कुछ मतलब नहीं होता।
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