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बिहार जनादेश - मीडिया सर्वेक्षण पर मुहर
<div><span style=font-size: small>रण विजय प्रताप सिंह/ आरिफ खान मंसूरी</span></div> <div><span style
समाचार4मीडिया ब्यूरो 10 years ago
रण विजय प्रताप सिंह/ आरिफ खान मंसूरी
समाचार4मीडिया.कॉम
मीडिया ने बिहार में विकास कार्यों को महत्व देकर भले ही लोकतंत्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई हो और सकारात्मक पत्रकारिता का उदाहरण दिया हो, लेकिन चुनाव के मद्देनजर मीडिया की भूमिका को लेकर विपक्ष की ओर से सवाल उठाये जाते रहे। यह विरोध ‘मतदान पूर्व सर्वेक्षण’ और बाद में कराये गए एक्ज़िट पोल में नीतीश की वापसी को दिखाए जाने को लेकर भी था। लेकिन विपक्ष ने इसे एकतरफा फैसले के तौर पर देखा। अब परिणाम सामने है तो सवाल उठता है कि आखिर यह किसकी जीत है? नीतीश की, विकास की या फिर मीडिया की। समाचार4मीडिया ने मीडिया दिग्गजों से इन्ही सवालों का जवाब जानने की कोशिश की।
शशि शेखर, संपादक,‘दैनिक हिन्दुस्तान’
यह पिछले ‘पांच साल के विकास और सुशासन की’, उसके ‘पहले के 15 साल के कुशासन’ पर जीत है। मीडिया ने बिहार के विकास के मुद्दे को ठीक ढंग से समझा और सही तरीके से रिपोर्टिंग की, हालांकि इसके लिए मीडिया को विपक्ष का विरोध भी झेलना पड़ा। इसके बावजूद मीडिया ने लोकतंत्र के प्रति पूरी ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।
नीतीश ने विकास की बात को गंभीरता से लिया जो जाहिर तौर पर यह उनके सुशासन, उनकी टीम और उनकी चुनाव रणनीति की जीत है। इस विकास में भी वह समाजिक न्याय को नहीं भूले। लेकिन नीतीश की चुनौती अब शुरू होती है। अब तक उनका विकास दिखाई पड़ता था, अब महसूस होना चाहिए, लिहाजा अब उनके लिए लड़ाई बड़ी हो गई है। लोगों के सपने जो ‘जेपी आंदोलन’ के बाद टूटे उन्हें जोड़ना होगा। अब ‘ढांचागत विकास और महिला सशक्तिकरण’ पर जोर देना होगा।
हरिवंश, संपादक, प्रभात खबर
मीडिया अगर नीतीश की जीत का दावा कर रही थी, तो चुनाव परिणाम के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मीडिया ‘सच के बिल्कुल करीब’ थी। मीडिया ने ‘समय के साथ परिवर्तन की आहट’ को सुना और देखा। दरअसल दिल्ली की मीडिया में बैठे कुछ लोगों को लेकर विपक्ष ने जरूर हल्ला मचाया।
मतदाताओं ने नीतीश के विकास पर मुहर लगाया है और यह ऐतिहासिक फैसला है। नीतीश ने पांच साल के कार्यकाल में कई कठोर फैसले लिए और चुनाव के दौरान उन्होंने कहा, ‘अबकी बारी भ्रष्टाचारी’ लिहाजा इस जनादेश का बहुत बड़ा मायने है।
अब सरकार के सामने चुनौतियां पहले से कहीं ज्यादा है। अब, ‘रोजगार और ढांचागत विकास’ पर और अधिक काम करना होगा।
एन के सिंह, एडिटर, साधना न्यूज़
मीडिया ने महज सच को सामने रखा। नब्ज और धड़कन साफ दिखाई दे रही थी और इसे कोई भी देख सकता था, तीन चौथाई बहुमत एक आंधी है, ‘इंदिरा लहर की तरह’।
अगर बिहार के चुनाव में, मतदान प्रतिशत को देखें तो यह साफ नजर आता है कि बिहार ने पहली बार जाति को नकारा है। पिछली बार के मुकाबले इस बार मतदान प्रतिशत भी बढ़ा है। इस बार 52 प्रतिशत मतदान हुआ है, जबकि पिछले बार 46 प्रतिशत रहा था। यह 6 प्रतिशत का अंतर नीतीश की ओर शिफ्ट हुआ है और बड़े अंतर का कारक बना है। पिछड़ी जातियों ने विकास के नाम पर वोट तो दिया ही। गौरतलब है कि ‘भूमि सुधार का डर’ और शुरुआती विरोध के बावजूद अगड़ी जातियों ने भी विकास के नाम पर नीतीश का साथ दिया है। यह सरकार में विश्वसनीयता को दर्शाता है। इसमें विकास की बड़ी भूमिका है।
अब नीतीश को विकास पर पहले से कहीं अधिक जोर देना होगा। उन्हें ‘ढ़ांचागत विकास सहित’, ‘उर्जा’, ‘रोजगार’, और ‘भूमि सुधार’ जो जनता से सीधे तौर पर जुड़े हैं, उनको बढ़ावा देना होगा।
सुधीर चौधरी, सीईओ और एडिटर इन चीफ, लाइव इंडिया
मेरा मानना है कि एक्जिट पोल को कभी भी एकदम सही नहीं मानना चाहिए। यह केवल एक संकेत देता है। वैसे देखा जाए, तो जितना एक्जिट पोल में दिखाया गया था, उसी के हिसाब से चुनाव के फाइनल रिजल्ट रहे हैं। एक्जिट पोल ने दिखाया था कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बनेंगे और वहीं बनें। इसके पीछे वोटर्स की भूमिका है। नीतीश कुमार ने बिहार में जो काम किए हैं उनकी भूमिका है। एक बात और है, जब एक्जिट पोल गलत हो जाते हैं, तो लोग मीडिया के पीछे पड़ जाते हैं, लेकिन जब एक दम सही अंदाजा गया है, तो कम से कम शाबासी देनी चाहिए।
नवेन्दु शाह, पॉलिटिकल एडिटर, मौर्य टीवी
नवेन्दु शाह, पॉलिटिकल एडिटर, मौर्य टीवी
अगर चैनलों के द्वारा जो एक्जिट पोल दिखाया गया था उसे देखें, तो उसमें दिखाया गया था कि बीजेपी को ज्यादा सीट नहीं मिलेगी, उसमें अंदाजा था कि करीब 40 सीटें बीजेपी को मिलेंगी लेकिन बीजेपी को 91 सीटें मिली हैं। और आरजेडी को 50 सीटों के करीब का अंदाजा दिखाया गया था, जो कि केवल 22 पर ही रहा। वैसे अगर सारा देखें तो एक्जिट पोल में यह दर्शाया गया था कि नीतीश सरकार का बहुमत आयेगा और वही हुआ है। नीतीश की जीत में मीडिया की बहुत बड़ी भूमिका रही है। मीडिया ने नीतीश के हर एक काम को जो उन्होंने किया है बहुत ही सकारात्मकता से दिखाया है, और नीतीश कुमार ने भी बिहार का विकास करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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