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आईआरएस के मुताबिक रीजनल अखबारों की ग्रोथ संतोषजनक नहीं
<p>समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो</p> <div> </div> <div>अंग्रेजी और हिंदी प्रकाशनों के पाठकों का रुझा
समाचार4मीडिया ब्यूरो 10 years ago
समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो
अंग्रेजी और हिंदी प्रकाशनों के पाठकों का रुझान देखकर भले ही यह अनुमान लगा लिया जाए कि इंडिया क्या पढ़ना चाहता है, लेकिन भारत क्या पढ़ना चाहता है इसे समझने के लिए हमें भाषायी प्रकाशनों के आईआरएस रिपोर्ट कार्ड को समझना होगा। हमने इंडियन रीडरशिप सर्वे में शामिल सभी 11 क्षेत्रीय दैनिकों के पाठकों का रुझान पर नजर डाली और पाया कि क्षेत्रीय दैनिकों के लिए पाठकों की रुचि आशाजनक नहीं है।
वे भाषाई समाचारपत्र जिनके पाठकों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई:
कन्नड़:
कन्नड़ भाषा के प्रकाशनों के लिए आईआरएस का रुझान अच्छी खबर लेकर आया है। एवरेज इश्यू रीडरशिप के अनुसार, अधिकांश कन्नड़ समाचारपत्रों के पाठकों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एवरेज इश्यू रीडरशिप के अनुसार, विजय कर्नाटक के पाठकों की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।विजय कर्नाटक के पाठकों की संख्या नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 34 लाख 40 हजार है और इस तरह से वह कन्नड़ भाषा के समाचारपत्रों में नंबर वन के पायदान पर कायम है।
तेलुगू:
पिछली तिमाही की तुलना में, तेलुगू के तीन टॉप दैनिकों के पाठकों की संख्या में आईआरएस2011 की दूसरी तिमाही में 2 लाख की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, पिछले साल की तुलना में तेलुगू के पाठकों की संख्या में उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। एक तरफ जहां, पिछले वर्ष की तुलना में साक्षी के पाठकों की संख्या में 4 लाख 68 हजार की बढ़ोतरी दर्ज की गई है वहीं दूसरी ओर, ‘इनाडू’ और ‘आंध्र ज्योति’ ने संयुक्त रूप से, एक वर्ष में 3 लाख 63 हजार पाठकों को खोया है।
गुजराती:
गुजराती दैनिकों में अधिकांश समाचारपत्रों के पाठकों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, आईआरएस 2011 की दूसरी तिमाही एवं पहली तिमाही के अनुसार, गुजराती प्रकाशनों के पाठकों के रुझान में उतार-चढ़ाव देखा गया है। एवरेज इश्यू रीडरशिप के अनुसार, टॉपलेवल के तीन गुजराती समाचारपत्रों –‘गुजरात समाचार’, ‘दिव्य भास्कर’ और ‘संदेश’ के पाठकों की संख्या या तो स्थिर रही है या पिछले वर्ष की तुलना में कुछ वृद्धि देखी गई है।
मलयालम:
एआईआर रिपोर्ट में थोड़े-बहुत उतार-चढ़ाव के बावजूद, अधिकांश मलयालम प्रकाशनों ने अपने पाठकों की संख्या में वृद्धि दर्ज करने में कामयाबी हासिल की है। एक वर्ष के दौरान, टॉपलेवल के चार मलयालम दैनिकों – ‘मलयाला मनोरमा’, ‘मातृभूमि’, ‘मध्यमाम’और ‘मंगलम’ के पाठकों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
वे भाषाई समाचारपत्र जिनके पाठकों की संख्या में कमी देखी गई:
तमिल:
तमिल समाचारपत्रों के लिए यह अच्छा वर्ष नहीं रहा। एवरेज इश्यू रीडरशिप के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में, टॉप लेवल के छह दैनिकों की तुलना में, पांच तमिल दैनिकों के पाठकों की संख्या में कमी देखने को मिली है। हालांकि, पिछली तिमाही की तुलना में, सभी तमिल दैनिकों के पाठकों की संख्या में एवरेज इश्यू रीडरशिप के अनुसार, बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
उड़िया:
एक ओर जहां सभी चारों उड़िया दैनिकों के पाठकों की संख्या में आईआरएस2011 की दूसरी तिमाही में, एवरेज इश्यू रीडरशिप के अनुसार, कमी देखने को मिली है वहीं, अपवाद के रूप में ‘धारित्री’के पाठकों की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
उर्दू
हंसा रिसर्च द्वारा सर्वे किए गए सभी चार उर्दू दैनिकों के पाठकों की संख्या में, पिछली तिमाही की तुलना में, एवरेज इश्यू रीडरशिप के अनुसार, कमी दर्ज की गई है। हालांकि, पिछले वर्ष की तुलना में, ‘सियासत’ और ‘द मुंसिफ’ के पाठकों की संख्या में कुछ वृद्धि दर्ज की गई है।
पंजाबी:
इंडियन रीडरशिप सर्वे 2011 की दूसरी तिमाही के अनुसार, अधिकांश पंजाबी दैनिकों के पाठकों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। पंजाबी दैनिकों में, ‘अजित’ के पाठकों की संख्या में, पिछली तिमाही की तुलना में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है वहीं अन्य दो दैनिकों – ‘जग बाणी’ और ‘पंजाबी ट्रिब्यून’ के पाठकों की संख्या में एवरेज इश्यू रीडरशिप के अनुसार, कमी देखने को मिली है।
बंगाली:
बंगाली दैनिकों के पाठकों की संख्या में, इस तिमाही में गंभीर रूप से कमी दर्ज की गई है। 2010 की दूसरी तिमाही की तुलना में, बंगाली दैनिकों के पाठकों की संख्या में 9 लाख 39 हजार की कमी दर्ज की गई है और इस तरह से, बंगाली दैनिकों के पाठकों की संख्या में 6.89 प्रतिशत की कमी आई है।
मराठी:
अधिकांश मराठी समाचारपत्रों के पाठकों की संख्या में एवरेज इश्यू रीडरशिप के अनुसार, कमी दर्ज की गई है। हालांकि, मराठी समाचारपत्रों में टॉपलेवल के दो दैनिकों – ‘लोकमत’ और ‘डेली सकाल’ के पाठकों की संख्या में एक वर्ष के दौरान संयुक्त रूप से 4 लाख 39 हजार की बढ़ोतरी देखने को मिली है।
असमिया:
असमिया भाषा के सभी छह दैनिकों के पाठकों की संख्या में, एक वर्ष के दौरान 3 लाख 36 हजार की कमी दर्ज की गई है।‘असोमिया प्रतिदिन’ के पाठकों की संख्या में, एवरेज इश्यू रीडरशिप के अनुसार, एक वर्ष के दौरान 5 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। ‘असोमिया प्रतिदिन’ के पाठकों की संख्या नवीनतम एआईएर आंकड़ों के अनुसार, 11 लाख 20 हजार है और यह अपने क्षेत्र में नंबर वन के पायदान पर कायम है।
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