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‘एनडीटीवी’ और ‘टैम’ मुद्दे पर ‘आईबीएफ’ के प्रेसिडेंट उदयशंकर की टिप्पणी
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समाचार4मीडिया ब्यूरो 10 years ago
समाचार4मीडिया.कॉम ब्यूरो
‘एनडीटीवी’ के द्वारा ‘टैम मीडिया रिसर्च कंपनी’ के खिलाफ ‘टैम’ और इसकी पैरेंट कंपनी ‘नीलसन’ और ‘कंतार’ पर ‘न्यूयॉर्क’ की अदालत में 25 जुलाई 2012 को मुकदमा दायर करने से भारत में रेटिंग/मूल्यांकन की प्रणाली पर असर जरूर पड़ेगा। इंडस्ट्री इस ओर पहले से कदम बढ़ा चुकी है जिससे टेलीविजन मीजरमेंट के क्षेत्र में सुधार हो सके। इसके लिए, इंडस्ट्री ने पहली बार 2006-07 में ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (बार्क) का गठन किया गया था।
‘एनडीटडीवी’ के द्वारा कानूनी लड़ाई पर ‘स्टार इंडिया’ के सीईओ और ‘इंडियन ब्रॉडकास्ट फेडरेशन’ के प्रेसिडेंट, उदयशंकर ने कहा, “एनडीटीवी एक गंभीर ब्रॉडकास्टर है और इस तरह के कदम उठाने से पहले उसे जरूर काफी नुकसान हुआ है। मेरा मानना है कि, ‘एनडीटीवी’ ने ‘टैम’ और उसके पैरेंट कंपनी के खिलाफ कोर्ट में जाने से पहले पर्याप्त सबूत एकत्र कर लिया होगा। कोर्ट का फैसला भारत में रेटिंग सिस्टम पर प्रभाव डालेगा। लेकिन इंडियन ब्रॉडकास्ट के लिहाज से हम लंबे समय से अधिक मजबूत, अधिक पारदर्शी और अधिक विश्वसनीय मूल्यांकन तंत्र की आवश्यकता महसूस कर रहे हैं।”
ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल के शेयरधारक
वर्षों से, ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ के स्वरूप में काफी परिवर्तन देखने को मिला है। वर्तमान में, ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फेडरेशन’ की इसमें 60 प्रतिशत भागीदारी है, ‘इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवरटाइजर्स’ की 20 प्रतिशत हिस्सेदारी है और ‘एडवरटाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’, जो हाल तक ‘बार्क’ का हिस्सा नहीं था के पास 20 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
‘बार्क’ के नए अवतार की घोषणा मार्च में की गई थी और आशा थी कि जुलाई 2012 से यह काम करने लगेगा। लेकिन ‘बार्क’ एक बार फिर से अपने समय सीमा पर काम नहीं कर सका है।
शंकर ने टिप्पणी करते हुए कहा, “इंडियन ब्रॉडकास्ट फेडरेशन इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है और सचूना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इस परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए काफी सहयोग किया लेकिन ‘एडवरटाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ और ‘इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवरटाइजर्स’ दोनों सहयोग नहीं कर रहे हैं। कभी-कभी हमें आश्चर्य होता है ऐसा क्यों हो रहा है? ‘एडवरटाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ और ‘इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवरटाइजर्स’ का रवैया ‘बार्क’ के कार्य में देरी कर रहा है।”
‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ के जुलाई 2012 से कार्य करने की आशा थी। कंपनी एक टीम का गठन करके कार्य शुरू कर देती और इसके द्वारा टेलीविजन इंडस्ट्री के लिए ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस मीजरमेंट’ मुद्दे पर रिक्वेस्ट फॉर प्रस्ताव दिया जाता।
‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ के लिए कौन जिम्मेदार है?
क्या ‘इंडियन ब्रॉडकास्ट फेडरेशन’ की यह जिम्मेदरी नहीं बनती है, नए समझौते के अनुसार, जिसकी सबसे ज्यादा हिस्सेदारी है? इस पर शंकर ने कहा, “यह होगा और हम इसे काफी गंभीरता से ले रहे हैं। हमने संस्था का पंजीकरण कराया, निदेशकों की नियुक्ति की और यहां तक कि आईबीएफ के लिए शुरुआती फंडिंग की भी व्यवस्था की लेकिन हम दूसरों को मजबूर नहीं कर सकते कि वे भी इसी तरह से रूचि लें। हमकिसी का हाथ पकड़कर डॉक्यूमेंट्स पर हस्ताक्षर के लिए मजबूर नहीं कर सकता।”
‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ अभी के समझौते से पहले, ‘इंडियन ब्रॉडकास्ट फेडरेशन’ और ‘आईएसए’ से मिलकर बना था। लेकिन ‘एडवरटाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ के नहीं होने से ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ उच्च स्तरीय समिति का गठन नहीं कर पा रहा था और तकनीकि समिति जिसे ‘एमआईबी’ ‘टीआरपी कमिटी’ के चेयरमैन- डॉ. अमित मित्रा ने जनवरी 2011 में प्रस्तावित किया था। यह सुझाव दिया गया था कि विभिन्न क्षेत्रों से प्रख्यात सदस्यों को रखा जाए।
शंकर ने कहा कि इंडस्ट्री के सभी लोगों को इसमें रूचि लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “यह एक पहल है, जहां हम सभी एक साथ होकर कार्य कर सकते हैं। और इस क्षेत्र में ब्रॉडकास्ट, एडवरटाइजिंग और एजेंसी को एक साथ आने की जरूरत है। भारतीय टेलीविजन इंडस्ट्री को बार्क की गठन की जरूरत है जिससे आज की जरूरतों को पूरा किया जा सके, क्योंकि वर्तमान में कार्य कर रही मीजरमेंट प्रणाली प्रभावी तरीके से कार्य नहीं कर रही है। बार्क टेलीविजन मीजरमेंट इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा करेगा।”
एमआईबी रिपोर्ट के अनुसार, ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल में विभिन्न क्षेत्रों से प्रख्यात लोगों को रखा जाएगा।
बार्क 2011 के जून में समिति के गठन की समय सीमा को पार कर चुका है और वास्तव में इसकी प्रगति के लिए कोई घोषणा एमआईबी के द्वारा नहीं किया गया था।
लेकिन बार्क अब उच्च स्तरीय समिति के साथ काम कर रही है जिसे एमआईबी के द्वारा स्वीकार कर लिया गया है। यहां तक कि, बार्क के द्वारा पिछले कुछ महीनों में लिए गए निर्णयों को नए बोर्ड के समकक्ष लाया जाएगा जिसमें 6 सदस्य इंडियन ब्रॉडकास्ट फेडरेशन और दो-दो सदस्य आईएसए और एएएआई के होंगे, जिसकी घोषणा मार्च में की गई है।
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