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पत्रकारों की अपनी राय हो सकती है, लेकिन हमेशा रखें इस बात का ध्यान: राहुल शिवशंकर

‘ई4एम इंग्लिश जर्नलिज्म 40अंडर40’ समिट एंड अवॉर्ड्स के मौके पर ‘एक्सचेंज4मीडिया’ समूह के सीनियर एडिटर रुहैल अमीन के साथ बातचीत के दौरान ’टाइम्स नाउ’ के राहुल शिवशंकर ने खुलकर अपने विचार रखे

समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago

‘टाइम्स नाउ’ के एडिटोरियल डायरेक्टर और एडिटर-इन-चीफ राहुल शिवशंकर का कहना है कि पत्रकार सही दिशा में आगे जा रहे हैं। आज के युवा पत्रकार कुछ अभूतपूर्व कार्य कर रहे हैं। जब तक हमें तथ्यों और कल्पना के बीच का अंतर पता है, तब तक हम सभी सुरक्षित हाथों में हैं।‘

‘ई4एम इंग्लिश जर्नलिज्म 40अंडर40’ समिट एंड अवॉर्ड्स के मौके पर ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) ग्रुप के सीनियर एडिटर रुहैल अमीन के साथ बातचीत के दौरान ‘Unfiltered’ टॉपिक पर राहुल शिवशंकर ने खुलकर अपने विचार रखे।

इस दौरान डिजिटल जर्नलिज्म के उद्भव और विकास के बारे में राहुल शिवशंकर ने कहा कि यह काफी अच्छा समय है, क्योंकि डिजिटल माध्यम पत्रकारों को एक आवाज और एक माध्यम देता है, जहां वे बहुत सी ऐसी चीजें रख सकते हैं, जिन्हें मुख्यधारा का मीडिया अक्सर छोड़ देता है।

उन्होंने कहा, ‘मुख्यधारा के मीडिया में किसी न किसी तरह का नियमन (regulation) होता है जो निश्चित रूप से स्व-प्रवर्तित (self-enforced) होता है। इसमें हम एक निश्चित मानक का पालन करते हैं, जो एक कठिन प्रक्रिया के माध्यम से निर्धारित किया गया है। इसमें लोगों को उम्मीद होती है कि हम तथ्यों की जांच करते हैं और गलत सूचनाएं नहीं देते हैं।’

तेजी से बढ़ रही खबरों के बीच आज के दौर में खबरों में पहले से कहीं ज्यादा रायशुमारी (opinionated) शामिल होती जा रही है। ऐसे में रुहैल अमीन द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या न्यूज और व्यूज को मिलाना एक खतरनाक कॉकटेल है? राहुल शिवशंकर ने कहा, ‘आप एक एंकर के रूप में अपनी राय रख सकते हैं, मुझे नहीं लगता कि यह एक खतरनाक कॉकटेल है। आपको सिर्फ प्राइमटाइम के नजरिये से अलग जाकर टीवी देखना होगा। समस्या तब उत्पन्न होती है जब आप तथ्यों को कल्पना के साथ मिलाना शुरू करते हैं। जब तक आपके द्वारा प्रस्तुत राय तथ्यों द्वारा समर्थित है और आप विरोधियों की आवाजों को नहीं दबा कर रहे हैं, मेरा मानना ​​है कि टीवी अभी भी काफी लोकतांत्रिक है।’  

ऐसे दौर में जब इंटरनेट पर ट्रोलिंग और कैंसिल कल्चर एक अनिवार्य हिस्सा सा बन गया है, शिवशंकर ने कहा, ‘ट्रोल्स मेरे लिए वास्तव में कोई मायने नहीं रखते, क्योंकि यदि कोई तर्कों द्वारा आपके तर्क का जवाब नहीं दे सकता है तो मैं इसे परेशान होने के योग्य भी नहीं मानता। मेरा मानना ​​​​है कि हम एक राष्ट्र के रूप में इसलिए ज्यादा असहिष्णु नहीं हो रहे हैं कि हमारी अलग-अलग राय है या हम एक-दूसरे पर चिल्लाते हैं, बल्कि इसलिए कि हम दूसरे के दृष्टिकोण को स्वीकार नहीं कर रहे हैं और यही कारण है कि बड़े पैमाने पर कैंसल करने का कल्चर बढ़ रहा है।’


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