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सत्ता में बैठे लोगों को खुश करना पत्रकार का काम नहीं: IWPC
इंडियन वीमन्स प्रेस कॉर्प्स’ (IWPC) ने त्रिपुरा में एक पत्रकार और करीब सौ अन्य लोगों पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत राज्य पुलिस द्वारा मामला दर्ज किए
समाचार4मीडिया ब्यूरो 4 years ago
‘इंडियन वीमन्स प्रेस कॉर्प्स’ (IWPC) ने त्रिपुरा में एक पत्रकार और करीब सौ अन्य लोगों पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत राज्य पुलिस द्वारा मामला दर्ज किए जाने पर हैरानी जतायी और निराशा व्यक्त की है। साथ ही मामला फौरन वापस लिए जाने की भी मांग की।
सोमवार को राज्य पुलिस की आलोचना करते हुए वीमन्स प्रेस कॉर्प्स ने कहा कि यह मीडिया को डराने व खामोश करने की कोशिश है और पत्रकार श्याम मीरा सिंह के साथ अन्य पर UAPA के तहत मामला दर्ज करने की त्रिपुरा पुलिस की कार्रवाई से वह स्तब्ध है।
बता दें कि त्रिपुरा पुलिस ने शनिवार 6 नवंबर को 102 सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ UAPA, आपराधिक साजिश रचने और फर्जीवाड़ा करने के आरोपों के तहत मामला दर्ज किया था। इनमें 68 ट्विटर अकाउंट्स, 32 फेसबुक अकाउंट्स और दो यू-ट्यूब अकाउंट्स शामिल थे। इसके अतिरिक्त ट्विटर, फेसबुक और यू-ट्यूब के अधिकारियों को नोटिस जारी कर उनके अकाउंट को बंद करने और उन लोगों की सभी सामग्री से अवगत कराने को कहा था।
इस मामले में श्याम मीरा सिंह, आरिफ शाह और सीजे वर्लेमन आदि पत्रकारों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एफआईआर की कॉपी में कहा गया है कि इन अकाउंट्स के जरिए मनगढ़ंत पोस्ट, कमेंट और बयानों को दो धार्मिक समूहों और समुदायों में दुश्मनी को बढ़ाने और सार्वजनिक शांति को भंग करने के लिए प्रयोग किया गया है।
पत्रकार संगठन ने कहा, ‘त्रिपुरा जल रहा है’, ट्वीट करने को लेकर श्याम मीरा सिंह पर मामला दर्ज किया गया। घटनाओं के बारे में सूचना देना और उसकी सही तस्वीर प्रस्तुत करना एक पत्रकार का कर्तव्य है। सत्ता में बैठे लोगों को खुश करना पत्रकार का काम नहीं है।’
IWPC ने सिंह के खिलाफ त्रिपुरा पुलिस की कार्रवाई की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि UAPA लगाना कानून का दुरुपयोग करते हुए पत्रकारों को डरा कर उन्हें खामोश करने की एक स्पष्ट कोशिश है।
पत्रकार संगठन ने कहा, ‘IWPC यह मांग करती है कि इस तरह के सभी मामले फौरन वापस लिए जाए और मीडिया को स्वतंत्र रूप से अपना काम करने दिया जाए।’
वहीं इससे पहले, ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (Editors Guild of India) ने भी त्रिपुरा में पुलिस द्वारा पत्रकारों सहित 102 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की निंदा करते हुए अपना विरोध दर्ज किया है। ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ की ओर से जारी एक स्टेटमेंट में कहा गया है कि त्रिपुरा सांप्रदायिक हिंसा के बारे में लिखने पर और रिपोर्टिंग करने पर पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने से उसे गहरा धक्का लगा है।
एडिटर्स गिल्ड ने कहा है कि सरकार इस तरह सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं पर रिपोर्टिंग को दबाने के लिए कड़े कानून का उपयोग नहीं कर सकती है। गिल्ड ने एक बयान में कहा कि वह पत्रकारों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई से स्तब्ध है और यह त्रिपुरा सरकार द्वारा बहुसंख्यक हिंसा को नियंत्रित करने में अपनी विफलता से ध्यान हटाने का एक प्रयास है।
एडिटर्स गिल्ड ने यह भी कहा, ‘यह एक बेहद परेशान करने वाली प्रवृत्ति है, जहां इस तरह के कठोर कानून, जिसमें जांच और जमानत आवेदनों की प्रक्रिया बेहद कठोर और भारी है, का इस्तेमाल केवल सांप्रदायिक हिंसा पर रिपोर्ट करने और विरोध करने के लिए किया जा रहा है।’
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