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टीवी न्यूज इंडस्ट्री में टॉप लेवल पर क्यों मची है इतनी उथल-पुथल?

देश का टीवी न्यूज इंडस्ट्री इस समय अपने टॉप लेवल पर अभूतपूर्व उथल-पुथल से गुजर रहा है। पिछले दो साल में कम से कम चार से पांच बड़े न्यूज नेटवर्क्स में CEO, एडिटर-इन-चीफ या सीनियर एग्जिक्यूटिव बदले हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago

चहनीत कौर, सीनियर कॉरेस्पोंडेंट, एक्सचेंज4मीडिया ।।

देश का टीवी न्यूज इंडस्ट्री इस समय अपने टॉप लेवल पर अभूतपूर्व उथल-पुथल से गुजर रहा है। पिछले दो साल में कम से कम चार से पांच बड़े न्यूज नेटवर्क्स में सीईओ, एडिटर-इन-चीफ या सीनियर एग्जिक्यूटिव बदले हैं और कुछ जगहों पर यह बदलाव एक से ज्यादा बार हुआ है। जो सेक्टर कभी लंबे कार्यकाल और मजबूत कॉर्नर ऑफिस के लिए जाना जाता था वही अब कम समय की नियुक्तियों, अचानक विदाई और बार-बार रीसेट का गवाह बन रहा है।

'एबीपी' में यह बदलाव पहले ही देखने को मिल चुका है। करीब 20 महीने पहले और फिर 12 महीने पहले नए सीईओ की एंट्री हुई। मई 2024 में लंबे समय तक जुड़े रहे अविनाश पांडे ने 'एबीपी' को अलविदा कहा। इसके बाद नॉन-न्यूज बैकग्राउंड से आने वाले सुमंत दत्ता को नया सीईओ बनाया गया।

'नेटवर्क18' भी इस समय रीसेट के दौर से गुजर रहा है। हाल ही में अविनाश कौल ने इस्तीफा दिया। वह करीब 11 साल तक 'नेटवर्क18' से जुड़े रहे। हालांकि उनके बॉस राहुल जोशी, जो 'नेटवर्क18' के MD और ग्रुप एडिटर-इन-चीफ हैं पिछले 8 साल से ज्यादा समय से मजबूती से नेतृत्व कर रहे हैं।

'जी मीडिया' ने महज 16 महीने में दो सीईओ बदले। 'एनडीटीवी' में भी नया सीईओ व एडिटर-इन-चीफ आ चुका है। यह सब केवल ऊपर से दिखने वाली तस्वीर है। इसके नीचे पूरी इंडस्ट्री में कहीं ज्यादा गहरा बदलाव चल रहा है।

कार्तिकेय शर्मा द्वारा प्रमोटेड ITV Group में भी बड़ा बदलाव देखा गया जहां अभय ओझा एक साल से भी कम समय में ITV Group से आगे बढ़ गए जबकि इससे पहले वह 'जी मीडिया' में लंबा कार्यकाल निभा चुके थे। वहीं News X के एडिटर-इन-चीफ रिषभ गुलाटी को उनकी एडिटोरियल जिम्मेदारी के साथ-साथ सीईओ भी बना दिया गया।

अप्रैल 2025 में जब राहुल कंवल लगभग 22 साल 'इंडिया टुडे' ग्रुप में बिताने के बाद 'एनडीटीवी' में सीईओ और एडिटर-इन-चीफ बने तो यह सिर्फ एक जॉब चेंज नहीं था। इसने यह साफ कर दिया कि टीवी न्यूज में अब लंबे कार्यकाल कितने दुर्लभ हो चुके हैं।

लगभग एक हफ्ते पहले अविनाश कौल ने 'नेटवर्क18' ब्रॉडकास्ट के सीईओ और A+E Networks के मैनेजिंग डायरेक्टर पद से इस्तीफा दिया। वह करीब 11 साल से ज्यादा समय तक इस ग्रुप के साथ थे।

राहुल शिवशंकर पहले 'टाइम्स नाउ' के एडिटर-इन-चीफ और एडिटोरियल डायरेक्टर रहे हैं। इसके बाद उन्होंने 'न्यूज X' (NewsX) में भी एडिटर-इन-चीफ की भूमिका निभाई। अपनी ऑन-स्क्रीन मौजूदगी और एडिटोरियल रणनीतिकार के तौर पर उन्होंने भारतीय टीवी न्यूज में खुद को एक सम्मानित एंकर और संपादक के रूप में स्थापित किया है।

सितंबर 2023 में वे CNN-News18 से एडिटोरियल कंसल्टेंट के रूप में जुड़े। बाद में नेटवर्क ने उन्हें कंसल्टेंट से फुल-टाइम एडिटोरियल लीडरशिप रोल में नियुक्त कर दिया।

इस नियुक्ति से यह संकेत मिला कि Network18 ग्रुप, राहुल कंवल के NDTV में एडिटर-इन-चीफ और ग्रुप CEO बनने के बाद, टीवी न्यूज की प्रतिस्पर्धा में NDTV को कड़ी टक्कर देने के लिए अपनी टीम मजबूत करना चाहता है।

राहुल जोशी द्वारा CNN-News18 की कमान राहुल शिवशंकर को सौंपना ऐसा कदम माना जा रहा है जिससे चैनल को एक अनुभवी और मजबूत नेतृत्व मिल सके, क्योंकि इस समय अंबानी समूह और अडानी समूह के न्यूज चैनलों के बीच टीवी न्यूज की प्रतिस्पर्धा तेज होती जा रही है, ऐसे में यह फैसला CNN-News18 को मुकाबले में मजबूत बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

'एबीपी' के सीनियर लीडर अविनाश पांडे, जो 2005 से नेटवर्क से जुड़े थे 2024 में बाहर आए। जनवरी 2025 में उन्होंने Laqshya Media Group में डायरेक्टर के रूप में जॉइन किया। इसके बाद वह IBDF के सेक्रेटरी जनरल बने। उनके जाने के बाद सुमंत दत्ता ने 'एबीपी' में सीईओ की जिम्मेदारी संभाली।

'जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड' एक और अहम उदाहरण है। करण अभिषेक सिंह जुलाई 2024 में सीईओ बने थे लेकिन करीब 15 महीने में ही इस पद से आगे बढ़ गए। इससे पहले वह नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट में पांच साल से ज्यादा समय तक अहम भूमिका में थे। नवंबर 2025 में 'जी मीडिया' ने 'टीवी9' के रक्तिम दास को नया सीईओ और की मैनेजेरियल पर्सन नियुक्त किया जो एक और बड़ा रीसेट माना गया। करण अभिषेक सिंह से पहले अभय ओझा काफी समय तक 'जी नेटवर्क' के सीईओ रहे थे।

सुधीर चौधरी, जो पहले 'जी न्यूज' के सीईओ व एडिटर-इन-चीफ थे, उसके बाद 'आजतक' चैनल में गए और वहां प्राइम-टाइम शो होस्ट किया। फिर उन्होंने नौकरी छोड़कर खुद का प्रोडक्शन कंपनी शुरू की, यानी वह उद्यमी (Entrepreneur) बन गए। इसके बाद उन्होंने दूरदर्शन के लिए भी एक प्राइम-टाइम शो बनाया, जिससे 'दूरदर्शन' को नए दर्शक मिले और चैनल की दर्शक संख्या बढ़ी।  

इस पूरे बदलाव में अगर कोई अपवाद रहा है तो वह है 'इंडिया टुडे' ग्रुप। राहुल कंवल और राहुल शॉ जैसे एक-दो सीनियर एग्जिक्यूटिव्स को छोड़ दें तो यहां बड़े स्तर पर एग्जिट नहीं हुए। रजत उप्पल, जो रेडियो और लाइव इवेंट्स के हेड थे वह 'एबीपी' नेटवर्क में जाकर नया इवेंट्स बिजनेस शुरू करने के लिए जुड़े।

कली पुरी के नेतृत्व में और 'इंडिया टुडे' ग्रुप की मजबूत संस्थागत संस्कृति के चलते 'इंडिया टुडे' ग्रुप और 'आजतक' ने अच्छा प्रदर्शन किया है। पिछले 50 सालों में 'इंडिया टुडे' ग्रुप और 25 सालों में 'आजतक' के लिए अरुण पुरी द्वारा बनाई गई एडिटोरियल विरासत आज भी ग्रुप को मजबूती दे रही है। सच तो यह है कि इस बदलाव ने कली पुरी को ग्रुप को फ्रेश करने और भविष्य के लिए रीसेट करने का मौका दिया है।

'इंडिया टुडे' के सीईओ दिनेश भाटिया अपने छठे साल में हैं। उन्होंने करीब 20 साल पहले CFO के रूप में ग्रुप जॉइन किया था। यह ग्रुप की मजबूत संस्कृति और सिस्टम को दिखाता है।

यह उथल-पुथल सिर्फ एक नेटवर्क तक सीमित नहीं है। Times Group ने भी अपनी लीडरशिप में बदलाव किया है। आशीष सहगल को 'टाइम्स टीवी नेटवर्क' का सीईओ और Times Media and Entertainment का चीफ ग्रोथ ऑफिसर  बनाया गया। वह इससे पहले करीब दो दशक तक 'जी एंटरटेनमेंट' में थे। यह बदलाव दिखाता है कि तेजी से बदलते माहौल में इंडस्ट्री लीडरशिप प्रोफाइल पर नए सिरे से सोच रही है।

सितंबर 2025 में 'भारत एक्सप्रेस' ने वरुण कोहली की डायरेक्टर और ग्रुप सीईओ के रूप में वापसी की घोषणा की। 2024 में भारत एक्सप्रेस छोड़ने के बाद वह Times Network में COO बने थे जहां उन्होंने करीब 15 महीने तक काम किया। इससे पहले वह 8 साल ITV Group में रह चुके थे।

अभय ओझा अगस्त 2025 में 9 महीने के छोटे कार्यकाल के बाद iTV Network से बाहर हुए। वह ITV में TV, प्रिंट, डिजिटल और स्पोर्ट्स लीग बिजनेस के सीईओ थे।

हर्ष भंडारी ने जुलाई 2025 में Republic TV के सीईओ पद से इस्तीफा दिया। वह करीब 8 साल से ज्यादा समय तक नेटवर्क के साथ थे। उन्होंने विकास खनचंदानी की जगह ली थी। विकास खनचंदानी जनवरी 2017 से अप्रैल 2022 तक करीब 7 साल Republic Network में सीईओ रहे।

रबिन्द्र नारायण ने 2025 में PTC Network के प्रेजिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर पद से इस्तीफा दिया। करीब दो दशक तक पंजाबी मीडिया हाउस का नेतृत्व करने के बाद उन्होंने नया ग्लोबल मीडिया कांग्लोमेरेट शुरू करने की योजना बताई।

ये फैसले अलग-अलग नहीं हैं। ये साफ तौर पर दिखाते हैं कि टीवी न्यूज इंडस्ट्री में संरचनात्मक बदलाव चल रहा है।

न्यूजरूम से बोर्डरूम तक बढ़ता दबाव

कई दशकों तक न्यूज चैनलों में नेतृत्व की ताकत एडिटोरियल पकड़, राजनीतिक प्रभाव और डिस्ट्रीब्यूशन पर टिकी रहती थी। अब यह समीकरण तेजी से बदल रहा है।

एक इंडस्ट्री HR एक्सपर्ट के मुताबिक, सीनियर लेवल पर बढ़ती विदाई अचानक नहीं है। बिजनेस पर भारी दबाव है। TRP, विज्ञापन कमाई और कुल प्रदर्शन पहले से कहीं ज्यादा कड़ी निगरानी में हैं। सीईओ सीधे निशाने पर हैं और बचाव की गुंजाइश बहुत कम है।

पिछले दो-तीन सालों में सबसे बड़ा बदलाव ओनरशिप और गवर्नेंस में आया है। नए कारोबारी परिवारों और कॉरपोरेट बोर्ड्स के आने से बातचीत एडिटोरियल से हटकर कड़े फाइनेंशियल नंबरों पर आ गई है।

अब बात P&L, टॉप लाइन, बॉटम लाइन और कॉस्ट कंट्रोल की है। पुराने सिस्टम में पले-बढ़े कई लीडर्स के लिए यह बदलाव आसान नहीं है। बोर्ड लेवल की सख्त पूछताछ और नया मैनेजमेंट स्टाइल थकान को बढ़ा रहा है।

कई मामलों में एग्जिट असफलता नहीं बल्कि बोर्ड की उम्मीदों और बाजार की हकीकत के बीच तालमेल न बैठ पाने का नतीजा है।

बुलेटिन के पीछे का विज्ञापन संकट

पिछले तीन साल में विज्ञापन बाजार में बड़ा बदलाव आया है। जो स्टार्टअप कभी टीवी न्यूज के बड़े विज्ञापनदाता थे उन्होंने खर्च काफी घटा दिया है। गेमिंग कंपनियों ने भी विज्ञापन से दूरी बना ली है।

2024 के चुनावी साल और उसके बाद के राज्य चुनावों ने विज्ञापन फ्लो को अस्थायी रूप से प्रभावित किया लेकिन स्थायी ग्रोथ नहीं मिली। साथ ही विज्ञापन बजट तेजी से Meta और Google जैसे प्लेटफॉर्म्स की ओर जा रहे हैं। डिजिटल और कनेक्टेड TV बढ़ रहा है जिससे पारंपरिक TV ऑडियंस और बंट रही है।

ऊपर से टीवी न्यूज का बिजनेस मॉडल पहले से ही महंगा है जहां खर्च ज्यादा और कमाई की साफ तस्वीर कमजोर होती जा रही है।

सीईओ या Chief Everything Officer?

अब लीडरशिप की परिभाषा भी बदल गई है। एक बड़े मीडिया हाउस के CHRO के मुताबिक, न्यूज ऑर्गनाइजेशन के अंदर पुराने विभागीय बंटवारे खत्म हो रहे हैं। प्रोडक्ट, टेक्नोलॉजी, वीडियो और एडिटोरियल सब कुछ टॉप लीडरशिप को जवाबदेह बना रहे हैं। आज का सीईओ सिर्फ कंटेंट नहीं बल्कि रेटिंग, कमाई, डिजिटल ग्रोथ, टेक ट्रांसफॉर्मेशन और न्यूजरूम की साख सबका जिम्मेदार है और वह भी लगातार निगरानी में।

AI और डिजिटल फर्स्ट भविष्य के लिए कंपनियां अपनी संरचना दोबारा देख रही हैं। 2026 में कदम रखते हुए यह प्रक्रिया और तेज होगी और इसका असर सीनियर लेवल एग्जिट्स के रूप में दिखेगा।

एग्जिट नहीं रीसेट का दौर

इंडस्ट्री के सीनियर लोग मानते हैं कि यह एग्जिट नहीं बल्कि रीसेट का समय है। खर्च कम होंगे और बिजनेस मॉडल बदले जाएंगे। 'नेटवर्क18' में लीडरशिप बदली है और आगे भी बदलाव होंगे। 'एबीपी' बदलाव के दौर में है। 'जी मीडिया' सीईओ बदल चुका है। बाकी नेटवर्क्स में भी यही चल रहा है।

आगे लीडरशिप फैसले दो बातों पर आधारित होंगे– साख और बिजनेस की टिकाऊ क्षमता। फिलहाल एक बात साफ है। भारतीय टीवी न्यूज में कॉर्नर ऑफिस अब सुरक्षित नहीं रहा। यह बेहद दबाव वाला रोल बन चुका है जहां गलती की गुंजाइश बहुत कम है।


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