उदय शंकर ने बताई वजह, क्यों करनी पड़ी पहले से आधी सैलरी पर नौकरी

‘स्टार’ और ‘डिज्नी इंडिया’ के चेयरमैन और ‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी, एशिया पैसिफिक’ के प्रेजिडेंट उदय शंकर ने ‘एएएआई-सुभाष घोषाल मेमोरियल लेक्चर’ में बताईं अपने जीवन से जुड़ी कई घटनाएं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 12 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 12 November, 2019
Uday Shankar

‘स्टार’ (Star) और ‘डिज्नी इंडिया’ (Disney India) के चेयरमैन और ‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी, एशिया पैसिफिक’ (The Walt Disney Company, Asia Pacific) के प्रेजिडेंट उदय शंकर ने मुंबई में 11 नवंबर को ‘एएएआई-सुभाष घोषाल मेमोरियल लेक्‍चर’ (AAAI-Subhas Ghosal Memorial Lecture) 2019 को संबोधित किया।  

कार्यक्रम का आयोजन ‘एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (AAAI)  और सुभाष घोषाल फाउंडेशन ने मिलकर किया था। मीडिया, एडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग की दुनिया की जानी-मानी हस्तियों के बीच उदय शंकर ने मीडिया इंडस्ट्री में अपने करियर के साथ ही बिजनेस चलाने के दौरान सामने आईं चुनौतियों का भी जिक्र किया।

उदय शंकर का कहना था, ‘करीब तीन दशक पहले जब मैंने एक अखबार में बतौर पत्रकार अपना करियर शुरू किया था, तो उस समय मैंने कल्पना भी नहीं की थी कि किसी दिन मुझे इस मंच पर इतने प्रतिष्ठित लोगों को संबोधित करने का मौका मिलेगा। तब मुझे इस बात का अंदाजा नहीं था कि मैं आजीविका के लिए सिर्फ यह शुरुआत नहीं कर रहा हूं, बल्कि मैं ऐसे भारत की तलाश शुरू करने जा रहा हूं, जिससे मुझे इस देश को एक नए रूप में जानने का मौका मिलेगा, जो शायद किसी और प्रोफेशन में संभव नहीं होता। करियर के शुरुआती दौर में बतौर पत्रकार और बाद में एक मीडिया प्रोफेशनल के रूप में सक्रिय उदय शंकर ने बताया कि कैसे उन्हें इस देश को गहराई से जानने-समझने का मौका मिला।

इस दौरान उदय शंकर ने यहां तक के सफर में अपने जीवन में घटी कुछ घटनाओं के बारे में भी बताया। एक घटना का जिक्र करते हुए उदय शंकर ने बताया कि यह उन दिनों की बात है, जब उन्हें ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ को जॉइन किए मुश्किल से कुछ हफ्ते ही हुए थे। एक दिन संपादक ने उनसे सरकार द्वारा चलाई जा रही टीकाकरण योजना का रिव्यू करने के लिए कहा। लोगों को बीमारियों से बचाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लोगों के लिए टीकाकरण अभियान शुरू किया गया था।  उदय शंकर को इस बात की पड़ताल करनी थी कि सरकार की इस टीकाकरण योजना का आम लोगों की जीवन पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।     

उदय शंकर के अनुसार, ‘उस समय मैंने सोचा था कि पत्रकारिता में करियर के दौरान मुझे बड़े-बड़े लोगों से जुड़ने का मौका मिलेगा, लेकिन यहां तो मेरे संपादक के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था।’ शंकर ने बताया कि टीकाकरण अभियान की वास्तविकता जानने के लिए उन्हें बिहार के पूर्णिया में भेजा गया, जहां उन्होंने अत्यधिक गरीबी में रह रहे लोगों के बीच एक हफ्ता गुजारा और वहां उन्होंने जो देखा, उससे दुनिया को देखने का उनका नजरिया हमेशा के लिए बदल गया।

उन्होंने कहा, ‘वहां मैंने देखा कि दिल्ली में मैंने एक रेस्टोरेंट में खाने के लिए जितना भुगतान किया, उससे कम कीमत में कैसे एक वैक्सीन किसी बच्चे अथवा किसी परिवार का भविष्य बचा सकती है। वहां के लोग बहुत गरीब थे और ऐसे एक-दो परिवार नहीं थे, बल्कि मैंने ऐसे कई गांव देखे। मैंने देखा कि उन ग्रामीणों तक वैक्सीन पहुंचाना कितना मुश्किल था, जिससे किसी की जिंदगी बदल सकती थी। यहां मुझे ऐसे कुछ समर्पित स्वास्थ्य कर्मी भी दिखे, जो निस्वार्थ भाव से काम कर रहे थे। जेएनयू में पढ़ने वाले मेरे जैसे फायरब्रैंड स्टूडेंट और एक्टिविस्ट के लिए यहां के हालात बिल्कुल नई बात थी।’ उदय शंकर ने बताया कि इस अनुभव ने देश को देखने का उनका नजिरया ही बदल दिया।

एक और घटना का जिक्र करते हुए उदय शंकर ने बताया कि यह बात करीब 20 साल पुरानी है, जब वह ‘आजतक’ में थे। उदय शंकर के अनुसार, ‘हमने नोएडा में एक स्कूल बस के एक्सीडेंट के बारे में न्यूज ब्रेक की थी। यह जानकारी थोड़ी सही थी। दरअसल, एक्सीडेंट की बात तो सही थी, लेकिन हमने जिस स्कूल का जिक्र किया था, उसकी कई ब्रांच थीं और हमने गलत ब्रांच का जिक्र कर दिया था। हमने अपनी गलती पकड़ भी ली और इसे 20-30 मिनट में ठीक कर दिया। इस पूरे दिन मुझे एक महिला के फोन आते रहे। मेरी सहायक ने मुझे बताया कि वह महिला मुझसे बात करने के लिए काफी इच्छुक थी। कई घंटे बाद मैंने उस महिला की कॉल का जवाब दिया। उसने मुझे धन्यवाद दिया और काफी अच्छे से बात की।

उदय शंकर के अनुसार, ‘उस महिला ने मुझे जो बात बताई, वह मुझे अभी भी परेशान करती है। वह महिला एक सैनिक की विधवा थी, जिसके दोनों बच्चे उसी स्कूल में पढ़ते थे, जिसकी बस के एक्सीडेंट के बारे में हमसे गलती हुई थी। वह एक्सीडेंट उस महिला के घर के पास ही हुआ था। महिला ने मुझे बताया कि कारगिल में पति की शहादत के बाद से उसे हमेशा कहीं न कहीं कुछ ऐसा घटित होने का डर लगा रहता था, जिससे उसकी बची हुई दुनिया छिन सकती थी। उसने बताया कि वह अपने घर पर हमेशा ‘आजतक’ चैनल को चलाकर रखती थी, क्योंकि उसका मानना था कि कहीं भी कुछ होने पर  चैनल के माध्यम से उसे हमेशा जानकारी मिलती रहेगी।’

उदय शंकर का कहना था, ‘महिला ने मुझे बताया कि एक पल के लिए उसे लगा कि आजतक ने उसकी दुनिया उजाड़ दी है। कुछ मिनट के लिए उसे लगा कि इस दुनिया में जिस चैनल पर वह सबसे ज्यादा भरोसा करती है, उसी ने उसकी दुनिया को खराब कर दिया। महिला का यह भी कहना था कि उसे लगा था कि यह चैनल हमेशा भरोसेमंद और सही जानकारी देने वाला है, लेकिन इस गलती से हमने उसका यह भरोसा तोड़ दिया और वह दोबारा हम पर कभी भरोसा नहीं कर सकेगी। थोड़ी देर के लिए तो मुझे लगा कि वह महिला ओवररिएक्ट कर रही है, आखिर हम भी तो इंसान हैं, हमसे भी तो गलती हो सकती है, लेकिन फिर मेरी समझ में आ गया कि आखिर उसके कहने का क्या मतलब था।‘

‘उस महिला ने मुझे अपने बिजनेस में विश्वास और क्रेडिबिलिटी के बारे में एक बहुमूल्य सबक दे दिया था। हालांकि, वह न्यूज के बारे में बात कर रही थी, लेकिन एंटरटेनमेंट और एडवर्टाइजिंग के साथ-साथ हमारे बिजनेस का कोई अन्य पार्ट भी इससे अलग नहीं है। पिछले बीस सालों से उसके शब्द आज भी मेरे कानों में गूंज रहे हैं और आज भी उसकी आवाज मुझे सतर्क करती रहती है। मुझे लगता है कि क्या मैं अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने अथवा अपने निजी हित के लिए किसी के भरोसे को तोड़ रहा हूं। मुझे उम्मीद है कि मैं उसे दोबारा निराश नहीं करूंगा।‘   

यही नहीं, इस कार्यक्रम के दौरान उदय शंकर ने उस घटना के बारे में भी बताया, जिसने उनकी जिंदगी ही बदलकर रख दी। उदय शंकर ने बताया, ‘अखबार में रिपोर्टर होने के बाद भी मैं टीवी में काम करने के लिए इच्छुक था। वर्ष 1991 में CNN पर खाड़ी युद्ध का प्रसारण किया जा रहा था। मैं भी टीवी न्यूज के लिए काम करना चाहता था। एक दिन मेरी पत्नी ने कहा कि इस बारे में अवसर मिलने के बारे में सोचने के बजाय मैं इसके लिए कोई कदम क्यों नहीं उठाता हूं। मैं उस समय अच्छी तरह से सैटल्ड हो चुका था और ‘Down To Earth’  नामक एक पब्लिकेशन में सीनियर एडिटर था, लेकिन मेरी पत्नी के शब्दों ने मुझ पर ऐसा प्रभाव डाला कि अगले दिन मैंने नौकरी छोड़ दी।’

उदय शंकर का यह भी कहना था कि छह महीने तक उन्हें कहीं से रेगुलर इनकम नहीं हुई और पत्नी की कमाई से किसी तरह घर का खर्च चला। काफी भटकने के बाद उन्हें ‘जी’ (Zee)  द्वारा लॉन्च किए जा रहे एक न्यूज बुलेटिन में नौकरी मिली, लेकिन वहां एक अलग तरह की समस्या हो गई। पहले के मुकाबले उनकी सैलरी में आधी से ज्यादा कमी हो गई थी। उदय शंकर के अनुसार, ‘एक पत्रकार की सैलरी वैसे भी ज्यादा नहीं थी, लेकिन पचास प्रतिशत की कटौती तो बेहद कम थी। लेकिन मैंने वहां पर काम किया। इसके बाद करीब पांच साल तक तमाम आर्थिक चुनौतियों से जूझना पड़ा। इसके बाद ‘आजतक’ आया और स्थिति में भी काफी सुधार हुआ।

उदय शंकर का कहना था, ‘संघर्ष के इस दौर में मुझे पर्सनल और प्रोफेशनल तौर पर काफी कुछ सीखने को मिला। हालांकि, मैंने जो सबसे अच्छा सबक सीखा, वह है कि हमेशा अपने अंतरात्मा की आवाज सुननी चाहिए, अपने दिल की माननी चाहिए और परिणामों के बारे में ज्यादा नहीं सोचना चाहिए, जब आपको पता हो कि आप सही कर रहे हैं। मैंने तब से हमेशा इन सबक का पालन किया है और यह मेरे लिए काफी अच्छा भी रहा है।’

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वरिष्ठ पत्रकार रजनी शंकर ने किया नए सफर का आगाज

पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 साल से ज्यादा की पारी के दौरान तीन राज्यों में ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी भी निभा चुकी हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Friday, 06 December, 2019
Last Modified:
Friday, 06 December, 2019
Rajni Shankar

बहुभाषी न्यूज एजेंसी ‘हिन्दुस्थान समाचार’, देहरादून से खबर है कि यहां बतौर ब्यूरो चीफ कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार रजनी शंकर ने संस्थान को बाय बोल दिया है। उन्होंने अब अपनी नई पारी की शुरुआत ‘यूएनआई’ न्यूज एजेंसी से की है। उन्हें पटना में स्पेशल करेसपॉन्डेंट (प्रोजेक्ट) की जिम्मेदारी दी गई है।

‘यूएनआई’ के साथ रजनी शंकर की यह दूसरी पारी है। रजनी शंकर 25 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता से जुड़ी हैं और तीन राज्यों में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर चुकी हैं। रजनी शंकर ने वर्ष 1993 में यूएनआई के साथ अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की थी। यहां विभिन्न पदों पर उन्होंने 2016 तक अपनी जिम्मेदारी निभाई। एजेंसी ने वर्ष 2011 में रजनी शंकर को बिहार और फिर वर्ष 2014 में महाराष्ट्र के नागपुर में ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी सौंपी।

इसके बाद यहां से अलविदा कहकर रजनी शंकर ने अक्टूबर 2016 में ‘हिन्दुस्थान समाचार’ को जॉइन कर लिया था। यहां उन्हें बिहार में स्टेट हेड की जिम्मेदारी दी गई थी। वर्ष 2019 में संस्थान ने उन्हें उत्तराखंड में ब्यूरो चीफ की कमान सौंपी थी।

मूल रूप से नालंदा की निवासी रजनी शंकर ने केमिस्ट्री में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने प्रयाग संगीत समिति से तबला में प्रवीण जैसी कठिन डिग्री भी प्राप्त की हैं। कई आयोजनों में उन्होंने अपने तबला वादन का प्रस्तुतिकरण भी दिया है। रजनी शंकर भाषाई पकड़ के चलते रेडियो व टीवी पत्रकारिता से भी जुड़ी रही हैं। 1994-96 तक पटना में एआईआर में समाचार वाचक के रूप में प्राइम न्यूज बुलेटिन, प्रादेशिक समाचार वाचन के साथ-साथ दूरदर्शन में कई कार्यक्रमों की एंकरिंग व विभिन्न मुद्दों पर पैनल डिस्कशन में भाग लेती रही हैं।

उन्होंने करीब सात सालों तक ‘वॉइस ऑफ अमेरिका’ हिंदी सर्विस में भारत के प्रतिनिधि के रूप में काम करते हुए अंतर्राष्ट्रीय ब्रॉडकास्टर के रूप में समाचार लेखन तथा वाचन किया। वह ‘वॉइस आफ अमेरिका’ के लिए कई गंभीर विषयों पर ऑडियो डॉक्युमेंट्री का प्रोडक्शन करने के साथ ही प्रस्तुतीकरण भी दे चुकी हैं।

शुरुआती दौर में रजनी शंकर ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के अलावा कुछ स्थानीय अखबारों के लिए फ्रीलांसिंग भी कर चुकी हैं। सरकार, सचिवालय व राजनैतिक-प्रशासनिक बीट पर इनकी विशेष पकड़ मानी जाती है। ‘डेवलपिंग इंडिया मिरर’ और ‘युगवार्ता’ जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में इनके नियमित आलेख छपते रहे हैं।

रजनी शंकर को उनकी नई पारी के लिए समाचार4मीडिया की ओर से शुभकामनाएं।

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गंभीर आरोपों में घिरा प्रेस क्लब का सचिव, पुलिस ने दिखाया हवालात का रास्ता

गिरफ्तारी के साथ ही सचिव पद से हटाने की उठ रही थी मांग, जांच पूरी होने तक किया निलंबित

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Friday, 06 December, 2019
Last Modified:
Friday, 06 December, 2019
Arrest

महिला पत्रकार और उनके पुरुष दोस्त पर हमला करने के आरोप में केरल पुलिस ने गुरुवार को तिरुवनंतपुरम प्रेस क्लब के सचिव एम. राधाकृष्णन को गिरफ्तार किया है। महिला पत्रकार ने राधाकृष्णन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत के आधार पर कई महिला पत्रकारों ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए राधाकृष्णन को सचिव पद से हटाने के साथ ही उसकी गिरफ्तारी की मांग की थी। ‘नेटवर्क ऑफ वूमेन इन मीडिया’ (एनडब्ल्यूएमआई), इंडिया ने भी मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और केरल महिला आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हुए राधाकृष्णन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद पुलिस ने प्रेस क्लब परिसर से राधाकृष्णन को गिरफ्तार कर लिया।

वहीं, गिरफ्तारी के बाद राधाकृष्णन ने खुद पर लगे मारपीट और हमला करने के आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया कि उन्होंने तो वास्तव में महिला पत्रकार और उनके परिवार की रक्षा करने की कोशिश की थी। केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट (केयूडब्ल्यूजे) ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय पैनल गठित किया है। जांच पूरी होने तक राधाकृष्णन को निलंबित कर दिया गया है।

दरअसल, तीन दिसंबर को पुलिस में दर्ज कराई शिकायत में महिला पत्रकार का कहना था कि 30 नवंबर को उनका दोस्त घर पर आया हुआ था। इस दौरान उनके पति जो खुद भी पेशे से पत्रकार हैं, अपने काम पर गए हुए थे। देर शाम उनके संस्थान में ही काम करने वाला और प्रेस क्लब का सचिव राधाकृष्णन कुछ लोगों के साथ उनके घर में घुस आया और उन्हें धक्का देते हुए बच्चों के सामने उनके दोस्त से मारपीट की। महिला पत्रकार की शिकायत पर पुलिस ने राधाकृष्णन के खिलाफ बंधक बनाने और घर में घुसकर चोट पहुंचाने का मामला दर्ज किया था।  तभी से राधाकृष्णन की गिरफ्तारी की मांग उठ रही थी।  

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कश्मीर में महिला पत्रकार कर बैठी कुछ ऐसा, अब बढ़ सकती हैं मुश्किलें

अमेरिकी पत्रकार ने मैगजीन में लेख लिखकर पूरे मामले से उठाया पर्दा, महिला पत्रकार की जमकर की तारीफ

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 05 December, 2019
Last Modified:
Thursday, 05 December, 2019
Female Journalist

कश्मीर के हालातों पर मीडिया में खबरें अक्सर आती रहती हैं, लेकिन अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद से मीडिया के लिए यह कुछ समय तक हॉट टॉपिक रहा। अब अमेरिकी पत्रिका ‘न्यू यॉर्कर’ में प्रकाशित एक लेख से यह मुद्दा फिर गर्मा गया है। हालांकि इस बार फोकस कश्मीर से ज्यादा अपने बयानों के लिए सुर्खियों में रहने वालीं पत्रकार राणा अयूब पर है। इस लेख को अमेरिकी पत्रकार डेक्स्टर फिकिंस (Dexter Filkins) ने लिखा है, जो इराक और अफगानिस्तान युद्ध कवर कर चुके हैं। अपने लेख में फिकिंस ने मोदी राज में भारत की स्थिति और कश्मीर सहित कई मुद्दों को रेखांकित किया है। लेकिन उन्होंने अयूब के साथ अपनी कश्मीर यात्रा को लेकर जो बातें बताई हैं, उन पर बवाल होना लाजमी है।

‘BLOOD AND SOIL IN NARENDRA MODI’S INDIA’ शीर्षक वाले इस लेख की शुरुआत कश्मीर में मोदी सरकार द्वारा अतिरिक्त जवानों की तैनाती और उसे लेकर कुछ भारतीय न्यूज चैनलों की कवरेज से होती है। जो आगे चलकर राणा अयूब के बुलावे पर डेक्स्टर फिकिंस के भारत आने और छिपते-छिपाते कश्मीर में दाखिल होने पर पहुंचती है।

फिकिंस ने लिखा है, ‘कश्मीर पर भारतीय मीडिया की ऑल इज वैल वाली रिपोर्टिंग के बीच अयूब ने मुझे फोन किया और कहा कि घाटी में स्थिति वैसी नहीं है, जैसी दिखाई जा रही है। अयूब को नहीं पता था कि उन्हें कश्मीर में क्या मिलेगा, लेकिन वह जनता से बात करना चाहती थीं और उन्होंने मुझे भी इसके लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि वो मुझसे मुंबई में मिलेंगी और वहां से हम कश्मीर जाएंगे। हालांकि उस दौरान कश्मीर में विदेशी पत्रकारों के जाने पर प्रतिबंध था।’

अमेरिकी पत्रकार ने आगे लिखा है, ‘जब मैं मुंबई पहुंचा तो अयूब ने मुझे स्कार्फ देते हुए कुर्ता खरीदने के लिए कहा। उन्होंने हंसते हुए यह भी कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि तुम पकड़े जाओगे, लेकिन फिर भी तुम्हें मेरे साथ आना चाहिए। बस अपना मुंह बंद रखियेगा।’

डेक्स्टर फिकिंस ने अपने लेख में अयूब राणा की जमकर तारीफ लिखी है। अपनी कश्मीर यात्रा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने उल्लेख किया है, ‘मोदी सरकार के फैसले के दो हफ्ते बाद जब हम श्रीनगर हवाई अड्डे पहुंचे तो वहां सिर्फ सेना और पुलिस के जवान नजर आ रहे थे। एयरपोर्ट पर ‘विदेशियों के लिए पंजीकरण’ डेस्क थी, लेकिन अयूब ने मुझे धकेलते हुए खमोशी से आगे बढ़ने को कहा। आखिरकार हम किसी तरह बाहर निकले और टैक्सी में बैठकर शहर का हाल जानने के लिए रवाना हो गए। कार में होने के बावजूद यह साफ नजर आ रहा था कि कश्मीर की जैसी तस्वीर भारत का मुख्यधारा का मीडिया प्रस्तुत कर रहा था, हालात वैसे नहीं थे। सड़कें वीरान थीं, केवल हथियारों से लैस जवान दिखाई दे रहे थे।’

अमेरिकी पत्रकार ने कश्मीर में क्या देखा और क्या नहीं, बात अब केवल यहीं तक सीमित नहीं रही है, बल्कि मुद्दा यह बन गया है कि राणा अयूब आखिरकार एक विदेशी पत्रकार को बिना अनुमति कश्मीर क्यों ले गईं? भारतीय कानून के अनुसार,  विदेशी नागरिकों, पर्यटकों के साथ-साथ विदेशी पत्रकारों को भी ‘प्रतिबंधित क्षेत्रों’ या ‘संरक्षित क्षेत्रों’ में प्रवेश के पूर्व सरकार की अनुमति लेना जरूरी है। इन क्षेत्रों में मणिपुर, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, के साथ-साथ जम्मू- और कश्मीर, राजस्थान और उत्तराखंड के कुछ हिस्से शामिल हैं।

अनुच्छेद 370 की समाप्ति के वक्त तो सरकार कश्मीर से जुड़ी रिपोर्टिंग को लेकर बेहद गंभीर थी। लिहाजा, अयूब का इस तरह विदेशी पत्रकार को वहां ले जाना कई सवाल खड़े करता है। वैसे, राणा अयूब मोदी सरकार की नीतियों की धुर विरोधी मानी जाती हैं। इसके लिए उन्हें समय-समय पर निशाना भी बनाया जाता है। अब यह मामला सामने आने के बाद उनकी परेशानियां बढ़ सकती हैं। 

डेक्स्टर फिकिंस का पूरा लेख आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

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केटीयू: कुलपति की रेस में सबसे आगे हैं ये वरिष्ठ पत्रकार

10 मार्च को कुलपति के इस्तीफा देने के बाद से इस पद पर की जानी है नई नियुक्ति

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 05 December, 2019
Last Modified:
Thursday, 05 December, 2019
KTU

छत्तीसगढ़ स्थित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय (केटीयू) के कुलपति की रेस में वरिष्ठ पत्रकार और राज्यसभा टीवी के पूर्व कार्यकारी निदेशक उर्मिलेश उर्मिल समेत पांच नामों पर मंथन चल रहा है। बताया जाता है कि जनवरी तक विश्वविद्यालय को नया कुलपति मिल जाएगा। फिलहाल इस दौड़ में  उर्मिलेश उर्मिल सबसे आगे नजर आ रहे हैं। हालांकि, नगरीय निकाय चुनावों के कारण आचार संहिता की वजह से नए कुलपति की तलाश अटक गई हे। नए कुलपति की तलाश के लिए गठित कमेटी ने नवंबर में हुई बैठक के बाद सभी दावेदारों का नाम राज्यपाल को भेज दिया है, जहां से इस बारे में निर्णय होना है।

बताया जाता है कि इस बैठक में ‘नेशनल बुक ट्रस्ट’ (एनबीटी) के अध्यक्ष बलदेव भाई शर्मा के नाम पर भी चर्चा हुई थी, लेकिन सभी सदस्यों में सहमति नहीं बन पाई। कुलपति के लिए जिन नामों पर चर्चा हो रही है, उनमें उर्मिलेश उर्मिल और बलदेव भाई शर्मा के साथ ही  चंडीगढ़ की चितकारा यूनिवर्सिटी में मॉस कॉम के डीन डॉ. आशुतोष मिश्रा, दूरदर्शन के पूर्व एंकर डॉ. मुकेश कुमार और पत्रकार निशिद त्यागी का नाम शामिल है।

बता दें कि 10 मार्च को मानसिंह परमार ने विश्वविद्यालय के कुलपति पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से नए कुलपति की तलाश शुरू हुई है। रायपुर संभाग के कमिश्नर जीआर चुरेंद्र फिलहाल कुलपति का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं।

कुलपति की तलाश के लिए राज्यपाल द्वारा 12 सितंबर को तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। कमेटी के सदस्यों को कुलपति पद के दावेदारों के आवेदन पत्रों की जांच कर नामों का पैनल तैयार करना है। तय समय में नामों का पैनल तैयार नहीं होने के कारण 23 अक्टूबर को कमेटी को चार सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया गया था।

केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के कुलपति प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री की अध्यक्षता में गठित इस कमेटी में कार्यपरिषद की ओर से हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय जयपुर के कुलपति ओम थानवी और राज्य सरकार की ओर से पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. के सुब्रमण्यम को शामिल किया गया है।

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संसद में उठा पत्रकारों से जुड़ा ये बड़ा मुद्दा

एमपी सुप्रिया सुले ने पिछले महीने सोशल मीडिया पर एक फोटो शेयर किया था, जिसमें दो पत्रकार स्कूटर पर नेताओं की कार का पीछा कर रहे थे

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 05 December, 2019
Last Modified:
Thursday, 05 December, 2019
Parliament

पत्रकारों को खबरों के लिए आए दिन तमाम तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद कभी उन पर पक्षपाती होने के आरोप लगाये जाते हैं तो कभी अपने काम के लिए उन्हें निशाना बनाया जाता है। हालांकि, महाराष्ट्र के बारामती से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सांसद और शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने पत्रकारों की तकलीफों को समझने का प्रयास किया है। उन्होंने पत्रकारों के लिए सामाजिक सुरक्षा की मांग करते हुए संसद में इस मुद्दे को उठाया है।

शून्यकाल के दौरान सुप्रिया सुले ने संसद में कहा, आज के ब्रेकिंग न्यूज के जमाने में पत्रकारों को विषम परिस्थितियों में लंबे समय तक काम करना होता है। महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट के समय मैंने स्कूटर पर सवार दो पत्रकारों को नेताओं की कार का पीछा करते हुए देखा था, ये काफी खतरनाक है।‘

महिला पत्रकारों की समस्याओं को रेखांकित करते हुए सुले ने कहा कि कई महिला पत्रकारों को भी नेताओं के घरों के बाहर भूखे-प्यासे घंटों खड़े रहना पड़ा, उनके लिए टॉयलेट की भी सुविधा नहीं थी। सुप्रिया सुले ने पत्रकारों के लिए सामाजिक सुरक्षा पर लोकसभा सदस्यों से अपने विचार प्रकट करने को कहा, ताकि इस दिशा में आगे कुछ किया जा सके।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के सियासी संग्राम के दौरान पत्रकारों को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। सुले ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक फोटो शेयर किया था, जिसमें दो पत्रकार स्कूटर पर नेताओं की कार का पीछा कर रहे हैं, जिसमें से पीछे बैठे पत्रकार के हाथों में कैमरा है और वो खतरनाक तरीके से रिकॉर्डिंग कर रहा है। साथ ही उन्होंने पत्रकारों को अपना ध्यान रखने की सलाह देते हुए लिखा था, ‘मैं समझती हूं यह ब्रेकिंग न्यूज है, लेकिन कृपया अपना ख्याल रखें। मीडिया सुरक्षा सबसे पहले, मुझे ड्राइवर और कैमरापर्सन की चिंता है।’

पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर पिछले महीने सुप्रिया सुले द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीन शॉट आप यहां देख सकते हैं।

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प्रसार भारती ने DD और AIR कर्मियों पर लगाई कड़ी 'पाबंदी'

‘प्रसार भारती’ के सीईओ शशि शेखर वेम्पती ने इन आदेशों को सामान्य कदम बताया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 05 December, 2019
Last Modified:
Thursday, 05 December, 2019
Prasar bharati

पब्लिक ब्रॉडकास्ट कंपनी ‘प्रसार भारती’ (Prasar Bharati) ने ‘दूरदर्शन’ (DD) और ‘ऑल इंडिया रेडियो’ (AIR) के कर्मचारियों व अधिकारियों को बिना अनुमति के मीडिया से बातचीत न करने के आदेश दिए हैं। ‘प्रसार भारती’ के सीईओ शशि शेखर वेम्पती का कहना है कि यह कदम व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए उठाया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वेम्पती का कहना है कि किसी भी कॉरपोरेट सेक्टर में मीडिया से बातचीत के लिए एक तय पॉलिसी होती है, यह सब उसी के तहत किया जा रहा है और इसमें कुछ भी असामान्य बात नहीं है।  

रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रसार भारती द्वारा पिछले महीने कई आदेश जारी किए गए थे. ये आदेश भी उन्हीं का हिस्सा हैं। इन आदेशों के अनुसार, ‘दूरदर्शन’ अथवा ‘आकाशवाणी’ के अधिकारियों को मीडिया से बातचीत अथवा प्रेस ब्रीफिंग के लिए ‘प्रसार भारती’ के अतिरिक्त महानिदेशक (मार्केटिंग) से अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा मीडिया से जुड़ी अन्य गतिविधियों जैसे- ऑनलोकेशन शूट, प्रेस रिलीज जारी करना, एवर्टाइजिंग अथवा होर्डिंग्स के लिए भी अनुमति जरूरी होगी।

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मानवाधिकार आयोग पहुंचा दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ से जुड़ा ये मामला

सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ ‘सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) की ओर से आयोग को लिखा गया है पत्र

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 05 December, 2019
Last Modified:
Thursday, 05 December, 2019
Dainik Jagran

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में 'दैनिक जागरण' के ब्यूरो चीफ धर्मेंद्र मिश्र के खिलाफ नगर कोतवाली पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने का मामला शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। अब यह मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ ‘सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) की ओर से एक पत्र लिखकर मानवाधिकार आयोग को पूरे मामले से अवगत कराया है।

पत्र में कहा गया है कि धर्मेंद्र मिश्र सुल्तानपुर में बढ़ते अपराधों और इनकी तफ्तीश में पुलिस की नाकामियों को अपने अखबार के माध्यम से लगातार उजागर कर रहे थे। पत्र के अनुसार, इसी बात का बदला लेने के लिए पुलिस ने धर्मेंद्र मित्र के खिलाफ यह एफआईआर दर्ज की है। पत्र में आयोग से इस मामले में दखल देने की मांग की गई है।

बता दें कि सितंबर 2018 में 'दैनिक जागरण' ने अमेठी जिले के निवासी धर्मेंद्र मिश्र को सुल्तानपुर में ब्यूरो चीफ के पद पर तैनात किया था। धर्मेंद्र मिश्र के खिलाफ इस साल 16 नवंबर को जो एफआईआर दर्ज की गई है, उसमें लूट का आरोप लगाते हुए घटना की तारीख दिसंबर 2018 बताई गई है। एक साल बाद इस मामले में दर्ज एफआईआर को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं, अपने खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद धर्मेंद्र मिश्र ने सोशल मीडिया पर इस मामले को उठाते हुए पुलिस पर कई आरोप लगाए हैं।

धर्मेंद्र मिश्र का आरोप है कि सुल्तानपुर एसपी हिमांशु कुमार उनके द्वारा पुलिस की नाकामियों को उजागर करने वाले खबरों से नाराज हैं। धर्मेंद्र मिश्र के अनुसार, एसपी हिमांशु कुमार ने सच्चाई की आवाज दबाने के लिए उनके ऊपर लूट का फर्जी मुकदमा दर्ज किया है। धर्मेंद्र मिश्र ने मीडिया की आवाज को दबाने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया है।

इधर, कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी ने भी अपने ट्विटर हैंडल पर इस मामले को उठाते हुए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर मीडिया की आवाज को दबाने का आरोप लगाया है।

‘CJP’ द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजे गए पत्र की कॉपी आप यहां क्लिक कर देख सकते हैं।

धर्मेंद्र मिश्र के अनुसार, करीब दो महीने पहले ही इस बारे में उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को शिकायत भेजकर हिमांशु कुमार पर उन्हें जेल भेजने की धमकी देने का आरोप लगाया था, जिसकी कॉपी आप नीचे देख सकते हैं।

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मीडिया संस्थानों ने नहीं रखा इस बात का ध्यान, अब कोर्ट में देना होगा जवाब

दिल्ली निवासी वकील की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट में दायर की गई है याचिका, लगाए गए हैं कई आरोप

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 04 December, 2019
Last Modified:
Wednesday, 04 December, 2019
Media

बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों में पीड़िता की पहचान उजागर नहीं की जाती, लेकिन हैदराबाद बलात्कार पीड़िता से जुड़ी हर जानकारी इंटरनेट पर मौजूद है। यहां तक कि मृतका का नाम और फोटो भी सार्वजनिक कर दिया गया है। इस संबंध में अब दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने कई मीडिया संस्थानों पर कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।

दिल्ली निवासी वकील यशदीप चहल ने अपनी याचिका में कहा है कि आईपीसी की धाराओं और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को नजरअंदाज करते हुए पीड़िता की पहचान और अन्य विवरण को कुछ व्यक्तियों सहित कई मीडिया संस्थानों द्वारा उजागर किया जा रहा है, जिसपर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए। 

चहल का कहना है कि विभिन्न ऑनलाइन और ऑफलाइन पोर्टल पर हैदराबाद कांड की पीड़िता और आरोपितों की पहचान का खुलासा करने वाली विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित करके कई मीडिया संस्थानों ने भारतीय दंड संहिता की धारा 228A का घोर उल्लंघन किया है। आईपीसी की धारा 228A कुछ अपराधों के शिकार व्यक्तियों की पहचान का खुलासा करने पर रोक लगाती है, जिसमें बलात्कार भी शामिल है।

याचिकाकर्ता द्वारा वकील चिराग मदान और साई कृष्ण कुमार के माध्यम से दायर याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि पीड़ित और आरोपितों की पहचान गुप्त रखने के मामले में राज्य पुलिस और उसकी साइबर सेल नाकाम रही है।

गौरतलब है कि 27 नवंबर को हैदराबाद में एक वेटनर डॉक्टर की गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। वारदात के सामने आने के बाद से ही इंटरनेट पर पीड़िता का फोटो और नाम वायरल होना शुरू हो गया था। आरोपितों की पहचान के बाद उनका विवरण भी सार्वजनिक कर दिया गया।

पहले भी कई बार इस तरह के मामलों में मीडिया संस्थान सवालों में घिरते रहे हैं। कठुआ बलात्कार और हत्या मामले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला था। इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने 12 मीडिया संस्थानों पर पीड़िता की पहचान उजागर करने के लिए 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था। इन संस्थानों में न्यूज चैनल ‘एनडीटीवी’, ‘द रिपब्लिक’ सहित ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’, ‘द वीक’ और ‘द हिंदू’ जैसे अखबार शामिल थे। इन सभी ने पीड़िता की पहचान उजागर करने के लिए अदालत से माफी भी मांगी थी।

सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी मीडिया हाउस या व्यक्ति को इस तरह के मामलों में पीड़िता के नाम को सार्वजनिक करने की अनुमति नहीं है। यहां तक कि वह किसी भी ऐसे तथ्य का खुलासा नहीं कर सकते, जिससे पीड़िता को पहचाना जा सके। इसके अलावा, पुलिस को भी यह निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे मामलों में एफआईआर सार्वजनिक न हो और समान दस्तावेजों का एक अलग सेट बनाया जाए, जहां पीड़ित की पहचान उजागर न की गई हो। मूल रिपोर्ट को केवल जांच एजेंसी या अदालत को सीलबंद कवर में भेजा जाना चाहिए।

हैदराबाद के इस मामले में शव मिलने के कुछ घंटों बाद तक पुलिस ने गैंगरेप की पुष्टि नहीं की थी। लिहाजा मीडिया हाउस दावा कर सकते हैं कि उन्होंने इस खुलासे से पहले नाम और तस्वीर प्रकाशित की, लेकिन कई मीडिया संस्थान गैंगरेप के खुलासे के बाद भी पीड़िता की पहचान उजागर करते रहे।

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IIMC तक पहुंची ये 'चिंगारी', धरने पर बैठे छात्र-छात्राएं

प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने ‘आईआईएमसी’ प्रबंधन पर लगाया आंखें मूंदे रखने का आरोप

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 04 December, 2019
Last Modified:
Wednesday, 04 December, 2019
IIMC

‘जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी’ (जेएनयू) में फीस वृद्धि को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन अब देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन’ (IIMC) तक पहुंच गया है। शिक्षण शुल्क, हॉस्टल और मेस चार्ज में बढ़ोतरी के खिलाफ ‘आईआईएमसी’ के विद्यार्थियों ने मंगलवार को संस्थान परिसर में हड़ताल शुरू कर दी। इन विद्यार्थियों का आरोप है कि उनके मामलों पर ‘आईआईएमसी’ प्रबंधन ने आंखें मूंद रखी हैं।   

‘आईआईएमसी’ में विरोध प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का कहना था कि पिछले तीन सालों में यहां करीब 30 प्रतिशत तक फीस बढ़ चुकी है। संस्थान में फीस बढ़ोतरी के कारण गरीब और मध्यवर्गीय परिवारों के बच्चों के सामने काफी मुश्किल आती है। इन विद्यार्थियों के अनुसार, महंगी फीस के कारण कई छात्र-छात्राओं को पहले सेमेस्टर के बाद ही पढ़ाई छोड़नी पड़ जाती है।

बताया जाता है कि रेडियो और टीवी जर्नलिज्म कोर्स के लिए 168500 रुपए फीस ली जा रही है। एडवर्टाइजिंग और पीआर कोर्स की फीस 131500 रुपए है। हिंदी और अंग्रेजी पत्रकारिता की फीस 95000 रुपए है। वहीं, उर्दू पत्रकारिता की फीस 55000 रुपए है। इसके अलावा हॉस्टल और मेस का खर्च अलग है। हॉस्टल और मेस के नाम पर हर महीने लड़कियों से 6,500 रुपए और लड़कों से 5,250 रुपए लिए जाते हैं। प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का यह भी कहना था कि हॉस्टल की सुविधा भी प्रत्येक विद्यार्थी को नहीं मिल पाती है।  

इन विद्यार्थियों का कहना था, ‘पिछले एक हफ्ते से हम बातचीत के द्वारा अपने इन मुद्दों के निस्तारण का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन संस्थान प्रबंधन ध्यान नहीं दे रहा है। संस्थान प्रबंधन का कहना है कि फीस में कटौती करना उनके हाथ में नहीं है। ऐसे में अब हमारे पास प्रदर्शन के अलावा कोई विकल्प नहीं रह गया है।’  

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पत्रकारों के लिए 1 लाख व 51000 का राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार

कार्यक्रम में देश भर से बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी जुटेंगे, दो राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कारों के तहत एक लाख 11 हजार और 51 हजार रुपए भी दिए जाएंगे

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 04 December, 2019
Last Modified:
Wednesday, 04 December, 2019
Awards

‘भारतीय पत्रकार संघ’ (AIJ) की ओर से मध्यप्रदेश में धार जिले के मनावर में आठ दिसंबर को 'नेशनल मेगा मीडिया अवार्ड सेरेमनी' का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत ‘राष्ट्रीय महासंवाद’ तथा ‘राष्ट्रीय अलंकरण महासमारोह’ का आयोजन होगा। इस मौके पर दो राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार भी शुरू किए जाएंगे। इसके तहत हिंदी पत्रकारिता के शिखर पुरुषों में से एक स्व. राजेंद्र माथुर की स्मृति में 'राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार' शुरू किया जाएगा। इस पुरस्कार से देश के अति प्रतिभावान पत्रकार को सम्मानित किया जाएगा। इस पुरस्कार के साथ एक लाख ग्यारह हजार रुपए भी सम्मानस्वरूप भेंट किए जाएंगे।

वहीं, वरिष्ठ पत्रकार स्व.अरविंद जी काशिव की स्मृति में 'कबीर भाव पत्रकारिता सम्मान' शुरू किया जाएगा। इस पुरस्कार से प्रदेश के अति सक्रिय पत्रकार को सम्मानित किया जाएगा। इस पुरस्कार के साथ सम्मान स्वरूप 51 हजार रुपए भी दिए जाएंगे।

संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रम सेन के अनुसार, समारोह में मध्यप्रदेश समेत लगभग 15 राज्यों के 2000 पत्रकार साथियों को 'एक्सीलेंट जर्नलिस्ट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया जाएगा। इसके तहत शील्ड, स्पेशल गोल्ड मेडल तथा प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस समारोह में सक्रिय व विशिष्ट शैली की ईमानदार और साहसिक पत्रकारिता के लिए समर्पित 40 पत्रकारों को भी विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा।

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