उदय शंकर ने बताई वजह, क्यों करनी पड़ी पहले से आधी सैलरी पर नौकरी

‘स्टार’ और ‘डिज्नी इंडिया’ के चेयरमैन और ‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी, एशिया पैसिफिक’ के प्रेजिडेंट उदय शंकर ने ‘एएएआई-सुभाष घोषाल मेमोरियल लेक्चर’ में बताईं अपने जीवन से जुड़ी कई घटनाएं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 12 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 12 November, 2019
Uday Shankar

‘स्टार’ (Star) और ‘डिज्नी इंडिया’ (Disney India) के चेयरमैन और ‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी, एशिया पैसिफिक’ (The Walt Disney Company, Asia Pacific) के प्रेजिडेंट उदय शंकर ने मुंबई में 11 नवंबर को ‘एएएआई-सुभाष घोषाल मेमोरियल लेक्‍चर’ (AAAI-Subhas Ghosal Memorial Lecture) 2019 को संबोधित किया।  

कार्यक्रम का आयोजन ‘एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (AAAI)  और सुभाष घोषाल फाउंडेशन ने मिलकर किया था। मीडिया, एडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग की दुनिया की जानी-मानी हस्तियों के बीच उदय शंकर ने मीडिया इंडस्ट्री में अपने करियर के साथ ही बिजनेस चलाने के दौरान सामने आईं चुनौतियों का भी जिक्र किया।

उदय शंकर का कहना था, ‘करीब तीन दशक पहले जब मैंने एक अखबार में बतौर पत्रकार अपना करियर शुरू किया था, तो उस समय मैंने कल्पना भी नहीं की थी कि किसी दिन मुझे इस मंच पर इतने प्रतिष्ठित लोगों को संबोधित करने का मौका मिलेगा। तब मुझे इस बात का अंदाजा नहीं था कि मैं आजीविका के लिए सिर्फ यह शुरुआत नहीं कर रहा हूं, बल्कि मैं ऐसे भारत की तलाश शुरू करने जा रहा हूं, जिससे मुझे इस देश को एक नए रूप में जानने का मौका मिलेगा, जो शायद किसी और प्रोफेशन में संभव नहीं होता। करियर के शुरुआती दौर में बतौर पत्रकार और बाद में एक मीडिया प्रोफेशनल के रूप में सक्रिय उदय शंकर ने बताया कि कैसे उन्हें इस देश को गहराई से जानने-समझने का मौका मिला।

इस दौरान उदय शंकर ने यहां तक के सफर में अपने जीवन में घटी कुछ घटनाओं के बारे में भी बताया। एक घटना का जिक्र करते हुए उदय शंकर ने बताया कि यह उन दिनों की बात है, जब उन्हें ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ को जॉइन किए मुश्किल से कुछ हफ्ते ही हुए थे। एक दिन संपादक ने उनसे सरकार द्वारा चलाई जा रही टीकाकरण योजना का रिव्यू करने के लिए कहा। लोगों को बीमारियों से बचाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लोगों के लिए टीकाकरण अभियान शुरू किया गया था।  उदय शंकर को इस बात की पड़ताल करनी थी कि सरकार की इस टीकाकरण योजना का आम लोगों की जीवन पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।     

उदय शंकर के अनुसार, ‘उस समय मैंने सोचा था कि पत्रकारिता में करियर के दौरान मुझे बड़े-बड़े लोगों से जुड़ने का मौका मिलेगा, लेकिन यहां तो मेरे संपादक के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था।’ शंकर ने बताया कि टीकाकरण अभियान की वास्तविकता जानने के लिए उन्हें बिहार के पूर्णिया में भेजा गया, जहां उन्होंने अत्यधिक गरीबी में रह रहे लोगों के बीच एक हफ्ता गुजारा और वहां उन्होंने जो देखा, उससे दुनिया को देखने का उनका नजरिया हमेशा के लिए बदल गया।

उन्होंने कहा, ‘वहां मैंने देखा कि दिल्ली में मैंने एक रेस्टोरेंट में खाने के लिए जितना भुगतान किया, उससे कम कीमत में कैसे एक वैक्सीन किसी बच्चे अथवा किसी परिवार का भविष्य बचा सकती है। वहां के लोग बहुत गरीब थे और ऐसे एक-दो परिवार नहीं थे, बल्कि मैंने ऐसे कई गांव देखे। मैंने देखा कि उन ग्रामीणों तक वैक्सीन पहुंचाना कितना मुश्किल था, जिससे किसी की जिंदगी बदल सकती थी। यहां मुझे ऐसे कुछ समर्पित स्वास्थ्य कर्मी भी दिखे, जो निस्वार्थ भाव से काम कर रहे थे। जेएनयू में पढ़ने वाले मेरे जैसे फायरब्रैंड स्टूडेंट और एक्टिविस्ट के लिए यहां के हालात बिल्कुल नई बात थी।’ उदय शंकर ने बताया कि इस अनुभव ने देश को देखने का उनका नजिरया ही बदल दिया।

एक और घटना का जिक्र करते हुए उदय शंकर ने बताया कि यह बात करीब 20 साल पुरानी है, जब वह ‘आजतक’ में थे। उदय शंकर के अनुसार, ‘हमने नोएडा में एक स्कूल बस के एक्सीडेंट के बारे में न्यूज ब्रेक की थी। यह जानकारी थोड़ी सही थी। दरअसल, एक्सीडेंट की बात तो सही थी, लेकिन हमने जिस स्कूल का जिक्र किया था, उसकी कई ब्रांच थीं और हमने गलत ब्रांच का जिक्र कर दिया था। हमने अपनी गलती पकड़ भी ली और इसे 20-30 मिनट में ठीक कर दिया। इस पूरे दिन मुझे एक महिला के फोन आते रहे। मेरी सहायक ने मुझे बताया कि वह महिला मुझसे बात करने के लिए काफी इच्छुक थी। कई घंटे बाद मैंने उस महिला की कॉल का जवाब दिया। उसने मुझे धन्यवाद दिया और काफी अच्छे से बात की।

उदय शंकर के अनुसार, ‘उस महिला ने मुझे जो बात बताई, वह मुझे अभी भी परेशान करती है। वह महिला एक सैनिक की विधवा थी, जिसके दोनों बच्चे उसी स्कूल में पढ़ते थे, जिसकी बस के एक्सीडेंट के बारे में हमसे गलती हुई थी। वह एक्सीडेंट उस महिला के घर के पास ही हुआ था। महिला ने मुझे बताया कि कारगिल में पति की शहादत के बाद से उसे हमेशा कहीं न कहीं कुछ ऐसा घटित होने का डर लगा रहता था, जिससे उसकी बची हुई दुनिया छिन सकती थी। उसने बताया कि वह अपने घर पर हमेशा ‘आजतक’ चैनल को चलाकर रखती थी, क्योंकि उसका मानना था कि कहीं भी कुछ होने पर  चैनल के माध्यम से उसे हमेशा जानकारी मिलती रहेगी।’

उदय शंकर का कहना था, ‘महिला ने मुझे बताया कि एक पल के लिए उसे लगा कि आजतक ने उसकी दुनिया उजाड़ दी है। कुछ मिनट के लिए उसे लगा कि इस दुनिया में जिस चैनल पर वह सबसे ज्यादा भरोसा करती है, उसी ने उसकी दुनिया को खराब कर दिया। महिला का यह भी कहना था कि उसे लगा था कि यह चैनल हमेशा भरोसेमंद और सही जानकारी देने वाला है, लेकिन इस गलती से हमने उसका यह भरोसा तोड़ दिया और वह दोबारा हम पर कभी भरोसा नहीं कर सकेगी। थोड़ी देर के लिए तो मुझे लगा कि वह महिला ओवररिएक्ट कर रही है, आखिर हम भी तो इंसान हैं, हमसे भी तो गलती हो सकती है, लेकिन फिर मेरी समझ में आ गया कि आखिर उसके कहने का क्या मतलब था।‘

‘उस महिला ने मुझे अपने बिजनेस में विश्वास और क्रेडिबिलिटी के बारे में एक बहुमूल्य सबक दे दिया था। हालांकि, वह न्यूज के बारे में बात कर रही थी, लेकिन एंटरटेनमेंट और एडवर्टाइजिंग के साथ-साथ हमारे बिजनेस का कोई अन्य पार्ट भी इससे अलग नहीं है। पिछले बीस सालों से उसके शब्द आज भी मेरे कानों में गूंज रहे हैं और आज भी उसकी आवाज मुझे सतर्क करती रहती है। मुझे लगता है कि क्या मैं अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने अथवा अपने निजी हित के लिए किसी के भरोसे को तोड़ रहा हूं। मुझे उम्मीद है कि मैं उसे दोबारा निराश नहीं करूंगा।‘   

यही नहीं, इस कार्यक्रम के दौरान उदय शंकर ने उस घटना के बारे में भी बताया, जिसने उनकी जिंदगी ही बदलकर रख दी। उदय शंकर ने बताया, ‘अखबार में रिपोर्टर होने के बाद भी मैं टीवी में काम करने के लिए इच्छुक था। वर्ष 1991 में CNN पर खाड़ी युद्ध का प्रसारण किया जा रहा था। मैं भी टीवी न्यूज के लिए काम करना चाहता था। एक दिन मेरी पत्नी ने कहा कि इस बारे में अवसर मिलने के बारे में सोचने के बजाय मैं इसके लिए कोई कदम क्यों नहीं उठाता हूं। मैं उस समय अच्छी तरह से सैटल्ड हो चुका था और ‘Down To Earth’  नामक एक पब्लिकेशन में सीनियर एडिटर था, लेकिन मेरी पत्नी के शब्दों ने मुझ पर ऐसा प्रभाव डाला कि अगले दिन मैंने नौकरी छोड़ दी।’

उदय शंकर का यह भी कहना था कि छह महीने तक उन्हें कहीं से रेगुलर इनकम नहीं हुई और पत्नी की कमाई से किसी तरह घर का खर्च चला। काफी भटकने के बाद उन्हें ‘जी’ (Zee)  द्वारा लॉन्च किए जा रहे एक न्यूज बुलेटिन में नौकरी मिली, लेकिन वहां एक अलग तरह की समस्या हो गई। पहले के मुकाबले उनकी सैलरी में आधी से ज्यादा कमी हो गई थी। उदय शंकर के अनुसार, ‘एक पत्रकार की सैलरी वैसे भी ज्यादा नहीं थी, लेकिन पचास प्रतिशत की कटौती तो बेहद कम थी। लेकिन मैंने वहां पर काम किया। इसके बाद करीब पांच साल तक तमाम आर्थिक चुनौतियों से जूझना पड़ा। इसके बाद ‘आजतक’ आया और स्थिति में भी काफी सुधार हुआ।

उदय शंकर का कहना था, ‘संघर्ष के इस दौर में मुझे पर्सनल और प्रोफेशनल तौर पर काफी कुछ सीखने को मिला। हालांकि, मैंने जो सबसे अच्छा सबक सीखा, वह है कि हमेशा अपने अंतरात्मा की आवाज सुननी चाहिए, अपने दिल की माननी चाहिए और परिणामों के बारे में ज्यादा नहीं सोचना चाहिए, जब आपको पता हो कि आप सही कर रहे हैं। मैंने तब से हमेशा इन सबक का पालन किया है और यह मेरे लिए काफी अच्छा भी रहा है।’

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कोरोना पीड़ित महिला पत्रकार से अंजाने में हो गई बड़ी 'गलती', खामियाजा भुगत रहे कई लोग

दुनियाभर में कोरोनावायरस (कोविड-19) का संक्रमण फैलता ही जा रहा है। इसकी वजह से जहां कई लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं संक्रमित मरीजों की संख्या भी रोजाना बढ़ती जा रही है।

Last Modified:
Monday, 06 April, 2020
Cororna Virus

दुनियाभर में कोरोनावायरस (कोविड-19) का संक्रमण फैलता ही जा रहा है। इसकी वजह से जहां कई लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं संक्रमित मरीजों की संख्या भी रोजाना बढ़ती जा रही है। ऐसा ही एक मामला अमेरिका के न्यूजर्सी का सामने आया है, जहां कोरोना संक्रमित महिला पत्रकार की वजह से कम से कम सात लोग इस बीमारी से संक्रमित हो गए, जिनमें से तीन लोगों की मौत भी चुकी है। दरअसल, ये सभी लोग पत्रकार की मां की बर्थडे पार्टी में शामिल हुए थे और वहीं से पत्रकार द्वारा यह संक्रमण उनमें फैल गया।

‘डेली मेल’ की रिपोर्ट के अनुसार, पत्रकार ने इस बात को खुद स्वीकार किया है। हालांकि, पत्रकार का यह भी कहना है कि यह सब ‘अनजाने’ में हुआ। इस बारे में महिला पत्रकार का कहना है कि घटना के वक्त उन्हें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि न्यूयॉर्क में कोरोना के मामलों की रिपोर्टिंग करने के दौरान वह खुद इस महामारी से संक्रमित हो चुकी हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, न्यूयॉर्क में बतौर रेडियो रिपोर्टर काम करने वाली इस पत्रकार ने अपनी 90 साल की मां का बर्थडे मनाने के लिए आठ मार्च को पार्टी आयोजित की थी। चर्च में हुई इस पार्टी में कुल 25 लोग शामिल हुए थे। पार्टी के अगले दिन पत्रकार की मां बीमार हो गई थीं, हालांकि, उन्हें कुछ दिन बाद अस्पताल में भर्ती किया गया। इसके बाद जब पत्रकार का कोरोना वायरस टेस्ट किया गया तो वह पॉजिटिव निकला। बाद में पता चला कि उस पार्टी में शामिल तीन लोगों की मौत हो गई है और कम से कम 4 अन्य लोग पॉजिटिव निकले हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पत्रकार के माता-पिता और 56 वर्षीय एक अन्य रिश्तेदार भी कोरोनावायरस से संक्रमित हो चुका है। हालांकि, यह रिश्तेदार बर्थडे पार्टी में शामिल नहीं हुआ था।

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मोरारी बापू ने पीएम की मुहिम के लिए मांगा जनसहयोग, NewsX ने शेयर किया विडियो

महामारी कोरोनावायरस (कोविड-19) को हराने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा की जा रही कोशिशों का प्रसिद्ध राम कथाकार और धार्मिक गुरु मोरारी बापू ने समर्थन किया है।

Last Modified:
Saturday, 04 April, 2020
MORARI BAPU PM MODI

महामारी कोरोनावायरस (कोविड-19) को हराने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा की जा रही कोशिशों का प्रसिद्ध राम कथाकार और धार्मिक गुरु मोरारी बापू ने समर्थन किया है। उन्होंने लोगों से भी प्रधानमंत्री की इस मुहिम में शामिल होने और रविवार पांच अप्रैल को रात नौ बजे नौ मिनट तक अपने घर की सभी लाइटें बंद कर बॉलकनी में खड़े होकर दीया, मोमबत्ती अथवा मोबाइल की फ्लैशलाइट से रोशनी करने की अपील की है।

इस बारे में अंग्रेजी न्यूज चैनल न्यूजएक्स (NewsX) ने अपने ट्विटर हैंडल पर मोरारी बापू का विडियो शेयर किया है। इस विडियो में मोरारी बापू का कहना है, ‘मैं आपसे एक विनय करना चाहता हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि रविवार पांच अप्रैल की रात ठीक नौ बजे नौ मिनट के लिए अपने आंगन में, अपनी बालकनी में यानी जहां और जैसी स्थिति उपयुक्त हो, घर की सभी लाइटें बंद करके दीप जलाएं, मोमबत्ती जलाएं। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि इस राष्ट्रीय बात को सभी लोग स्वीकार करके बिना चूके करें। यह एक साधु की भी विनती है, श्रद्धा है। सब ऐसा करेंगे।’

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ट्वीट पर रिट्वीट कर कहा है कि पूज्य मोरारी बापू के इस संदेश में देशवासियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।  

 

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कमलनाथ की प्रेस कांफ्रेंस में शामिल होने वाले पत्रकार ने दी कोरोना को मात

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की 20 मार्च को हुई प्रेस कांफ्रेंस में शामिल होने वाले पत्रकार व उनकी बेटी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

Last Modified:
Saturday, 04 April, 2020
kk-saxena

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की 20 मार्च को हुई प्रेस कांफ्रेंस में शामिल होने वाले पत्रकार व उनकी बेटी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। दूसरी बार किए गए कोरोना वायरस के टेस्ट में दोनों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। दोनों ही भोपाल के एम्स अस्पताल में भर्ती थे, जहां शुक्रवार रात उन्हें घर भेज दिया गया है।

बता दें कि पत्रकार की बेटी जब ब्रिटेन से लौटी थीं, तो वे संक्रमित थीं। 21 मार्च को किए गए टेस्ट में उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी और उन्हीं से यह वायरस उनके पत्रकार पिता में भी आया था। चार दिन बाद उनके 62 वर्षीय पिता भी कोरोना पॉजिटिव निकले थे।

पत्रकार की बेटी पोस्ट-ग्रेजुएट कानून की छात्रा हैं जो 18 मार्च को लंदन से भोपाल लौटी थीं। उन्हें होम-क्‍वारंटाइन रहने का आदेश दिया गया था, लेकिन उनके घर आने के दो दिन बाद ही पत्रकार कमलनाथ की अंतिम प्रेस कांफ्रेंस में शामिल होने के लिए चले गए। इसी के चलते प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के शामिल सभी पत्रकारों में दहशत फैल गई और सभी को क्‍वारंटाइन किया गया।

पत्रकार पर कोरोना वायरस महामारी से संबंधित सरकार के प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन करने के लिए मामला भी दर्ज किया गया है। श्यामला हिल्स पुलिस स्टेशन में पत्रकार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 (सरकारी सेवक के कानूनी आदेश की अवहेलना), धारा 269 (उपेक्षापूर्ण कार्य जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रमण फैलना संभाव्य हो), धारा 270 (परिद्वेषपूर्ण कार्य, जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रमण फैलना संभाव्य हो) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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इस मामले में NDTV को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत

एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मीडिया कंपनी ‘एनडीटीवी’ (NDTV) के हक में फैसला सुनाया है

Last Modified:
Saturday, 04 April, 2020
NDTV

टैक्स से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मीडिया कंपनी ‘एनडीटीवी’ (NDTV) के हक में फैसला सुनाया है। इस मामले में एनडीटीवी पर वर्ष 2007में  अपने नॉन न्यूज बिजनेस के लिए विदेशी निवेश जुटाने के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया गया था।

इस मामले में रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने असेसमेंट को फिर से खोलने की इजाजत मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने यह इजाजात देने से इनकार कर दिया है। वर्ष 2015 में  टैक्स अधिकारियों ने एनडीटीवी पर तथ्य छिपाने और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया था।

इसे लेकर एनडीटीवी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, जिसके बाद इस केस को लेकर सुनवाई चल रही थी। केस को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एनडीटीवी के पक्ष में फैसला सुनाया और रेवेन्यू डिपार्टमेंट को केस दोबारा से खोलने की इजाजत देने से इनकार कर दिया। 

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प्रसार भारती ने जारी की डीडी फ्रीडिश पर मौजूद चैनल्स की लिस्ट, लिया ये फैसला

नेशनल पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘प्रसार भारती’ ने ‘दूरदर्शन’ के डायरेक्ट टू होम (DTH) प्ले‘टफॉर्म ‘फ्रीडिश’ पर अपने ‘MPEG-2’ टीवी चैनल्स के बारे में जानकारी दी है।

Last Modified:
Friday, 03 April, 2020
Prasar Bharati

नेशनल पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘प्रसार भारती’ (Prasar Bharati) ने ‘दूरदर्शन’ के डायरेक्ट टू होम (DTH) प्‍लेटफॉर्म ‘फ्रीडिश’ पर अपने ‘MPEG-2’ टीवी चैनल्स के बारे में जानकारी दी है। इस जानकारी के अनुसार, इस डीटीएच प्लेटफॉर्म पर कुल 88 चैनल्स हैं। इनमें पब्लिक और प्राइवेट चैनल्स शामिल हैं।  

प्रसार भारती ने 28 फरवरी को हुई 44वीं ई-नीलामी के दौरान डीडी फ्रीडिश के MPEG-2 स्लॉट की बिक्री से 53 चैनलों के लिए 594.25 करोड़ रुपए की कमाई की थी।

बता दें कि इस पब्लिक ब्रॉडकास्टर ने कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने की दिशा में एहतियाती कदम उठाए हुए हाल ही में MPEG-2 की ई-नीलामी को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। प्रसार भारती ने एक अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 के लिए डीडी फ्रीडिश डीटीएच प्लेटफॉर्म पर खाली पड़े MPEG-2 स्लॉट्स को भरने के लिए निजी टीवी चैनल्स से आवेदन आमंत्रित किए थे। आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 30 मार्च अपराह्न तीन बजे तक रखी गई थी।

इस बारे में प्रसार भारती के डायरेक्टर (डीटीएच) इंद्रजीत ग्रेवाल का कहना है, ‘कोविड-19 का संक्रमण फैलने से रोकने की दिशा में उठाए गए कई एहतियाती कदमों को ध्यान में रखते हुए टीवी चैनल्स से आवेदन पाने और आवंटन की प्रक्रिया को फिलहाल के लिए रोक दिया गया है।’

 

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एडिटर्स गिल्ड ने सरकार की इस बात पर जताई हैरानी, यूं की मीडिया की वकालत

संपादकों की संस्था ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष केंद्र सरकार द्वारा दिए गए बयान पर काफी हैरानी जताई है

Last Modified:
Friday, 03 April, 2020
Editors Guild

संपादकों की संस्था  ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (Editors Guild Of India) सरकार के उस बयान पर काफी क्षुब्ध है, जिसमें सरकार ने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के समक्ष देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान बड़े पैमाने पर पलायन करने वाले प्रवासी कामगारों के बीच डर का माहौल पैदा करने के लिए सोशल मीडिया के साथ-साथ मीडिया को भी दोषी ठहराया था।

इस बारे में अब गिल्ड ने एक बयान जारी कर कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में कही गईं इस तरह की बातों से उसे व्याकुलता और हैरानी हुई है। इसके साथ ही गिल्ड का यह भी कहना है कि वर्तमान हालातों में अपने काम में मुस्तैदी से जुटी मीडिया को दोषी ठहराना केवल उसे कमजोर करना है। अभूतपूर्व संकट के दौरान मीडिया पर लगे इस तरह के आरोप देश के सामने खबरों के प्रसार की प्रक्रिया में भी बाधा डाल सकते हैं। दुनिया में किसी भी देश में कोई भी लोकतंत्र अपने मीडिया का मुंह बंद करके इस महामारी के खिलाफ नहीं लड़ रहा है।

गिल्ड ने वेबसाइट ‘द वायर’ (The Wire) के एडिटर-इन-चीफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के मामले को भी संज्ञान में लिया है। गिल्ड का मानना ​​है कि मीडिया को स्वतंत्र और निष्पक्ष होना चाहिए, लेकिन इस तरह के हस्तक्षेप मीडिया को उसके उद्देश्य को हासिल करने में बाधा पैदा करेंगे। गौरतलब है कि देशभर में जारी लॉकडाउन के दौरान लाखों लोगों के पलायन के लिए फेक न्यूज तथा भ्रम फैलाने वाले संदेशों को जिम्मेदार ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च को ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के आदेश दिए थे।

इसके साथ ही चीफ जस्टिस एसए बोब्डे और जस्टिस नागेश्वर राव की खंडपीठ ने सरकार से फेक न्यूज फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करने के लिए भी कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया को भी जिम्मेदारी दर्शाने के निर्दश दिए थे। कोर्ट का कहना था कि मीडिया संस्थान तथ्यपूर्ण खबरों को ही प्रकाशित/प्रकाशित करें। कोर्ट ने यह भी कहा था कि इस महामारी को लेकर मीडिया में होने वाली चर्चाओं, डिबेट और कवरेज में हस्तक्षेप करने का उसका कोई इरादा नहीं है।

‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ की ओर से जारी बयान को आप यहां देख सकते हैं।

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कोरोना संकट के बीच कई मैगजींस हुईं बंद, वहीं अरुण पुरी ने दिलाया ये भरोसा

कोरोना के खौफ ने मीडिया इंडस्ट्री को भी हिलाकर रख दिया है। भारत सहित पूरी दुनिया में स्थिति खराब है और आने वाले दिनों में इसके ज्यादा खराब होने की आशंका जताई जा रही है

Last Modified:
Thursday, 02 April, 2020
Aroon Purie

कोरोना के खौफ ने मीडिया इंडस्ट्री को भी हिलाकर रख दिया है। भारत सहित पूरी दुनिया में स्थिति खराब है और आने वाले दिनों में इसके ज्यादा खराब होने की आशंका जताई जा रही है। कोरोना को लेकर फैली अफवाहों के चलते लोगों के दिलोदिमाग में यह बात घर कर गई है कि अखबार भी वायरस फैला सकता है। इस वजह से अखबारों के सर्कुलेशन में तो कमी आई ही है, साथ ही उन्हें मिलने वाले विज्ञापन भी घटे हैं।

अकेले मध्य प्रदेश में 300 से अधिक छोटे और मझोले अखबार मालिकों ने अस्थायी रूप से प्रकाशन बंद कर दिया है। वहीं, मैगज़ीन भी इससे अछूती नहीं हैं। न्यूज़ीलैंड के विख्यात मैगज़ीन प्रकाशन ‘बाऊर मीडिया’ ने इस संकट की घड़ी में अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। बाऊर मीडिया ‘द लिसनर, वुमन डे, न्यूजीलैंड वुमन वीकली, नॉर्थ एंड साउथ और नेक्स्ट’ नामक पत्रिकाओं का प्रकाशन करता है। इस संबंध में कंपनी के मुख्य कार्यकारी ब्रेंडन हिल का कहना है कि COVID-19 से मुकाबले के लिए चल रहे लॉकडाउन से मैगजींस के प्रकाशन पर रोक लगी हुई है और इससे व्यवसाय अस्थिरता की स्थिति में पहुंच गया है। लिहाजा, हमें मज़बूरी में प्रकाशन बंद करने का फैसला लेना पड़ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि पत्रिकाएं विज्ञापन पर निर्भर करती हैं और मौजूदा हालातों को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कब तक सब कुछ ठीक हो पाएगा।

बाऊर मीडिया ने अपनी मैगजींस के खरीदारों की तलाश करने के लिए व्यावसायिक सलाहकार फर्म EY को नियुक्त किया है। कंपनी ने इस फैसले के बारे में कर्मचारियों को आज सुबह ही जानकारी दी है। हालांकि, ब्रेंडन हिल का कहना है कि कर्मचारियों को उनका वाजिब हक दिया जाएगा। बाऊर मीडिया के इस फैसले ने जहां मीडिया जगत को हिला दिया है, वहीं ‘इंडिया टुडे’ समूह के चेयरमैन अरुण पुरी की तरफ से मीडियाकर्मियों के लिए एक राहत देने वाला समाचार आया है। अरुण पुरी ने साफ किया है कि 'इंडिया टुडे' मैगजीन पहले की तरह ही प्रकाशित होती रहेगी और हम कोरोना वायरस को जीतने नहीं देंगे।

उन्होंने ट्वीट के जरिये इसकी जानकारी देते हुए लिखा है, ‘पिछले 44 सालों से 'इंडिया टुडे' का हर अंक समय पर आया है और हम COVID-19 को अपना रिकॉर्ड खराब करने नहीं देंगे। हम हर हफ्ते बेहतरीन विश्लेषण प्रदान करना जारी रखेंगे।’ उन्होंने आगे लिखा है, ‘इस हफ्ते की शुरुआत से हमने मैगजीन के ऑनलाइन और प्रिंट दोनों संस्करण प्रकाशित करने का फैसला लिया है। 21 दिनों के लॉकडाउन पर हमारी विशेष कवरेज पढ़ने के लिए तैयार रहें। साथ ही हम कोरोना वायरस संकट पर रोजाना एक न्यूजलेटर भी प्रकाशित कर रहे हैं।’ 

 

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ABP न्यूज नेटवर्क ने जुल्फिया वारिस को अपनी इस नई इकाई का बनाया बिजनेस हेड

एबीपी न्यूज नेटवर्क (ABP News Network) ने जुल्फिया वारिस को नियुक्त किया है

Last Modified:
Thursday, 02 April, 2020
zulfia

'एबीपी न्यूज नेटवर्क' (ABP News Network) ने जुल्फिया वारिस को ‘एबीपी न्यूज नेटवर्क कंटेंट स्टूडियो’ (ABP News Network Content Studio) का बिजनेस हेड नियुक्त किया है। जुल्फिया की जिम्मेदारी कंपनी की नई सहायक इकाई  ‘एएनएन कंटेंट स्टूडियो’ (ANN Content Studio) के साथ-साथ सभी प्लेटफार्म्स के लिए कंटेंट प्रड्यूस करने की होगी।

जुल्फिया को मीडिया इंडस्ट्री में 20 सालों से भी ज्यादा का अनुभव है। इससे पहले वे डिस्कवरी इंडिया (Discovery India) में प्रीमियम हेड और डिजिटल नेटवर्क की वीपी-प्रॉडक्ट हेड थीं। अपनी इस भूमिका में जुल्फिया डिस्कवरी इंडिया चैनल्स के लिए फैक्चुअल और लाइफ स्टाइल कैटेगरी में अपना योगदान देती थीं। उन्होंने इसके अलावा ‘टीवी18 इंडिया’ (TV18 India Ltd), ‘एमटीवी इंडिया’ (M.T.V India), ‘चैनल वी इंडिया’ (Channel V India), ‘स्टार टीवी नेटवर्क’ (Star TV Network) और जी एंटरटेनमेंट (Star TV Network) जैसी कंपनियों के साथ काम किया है।

जुल्फिया ने 1998 में सोफिया कॉलेज मुंबई से इंग्लिश लिट्रेचर में ग्रेजुएशन किया और इसके बाद 1999 में सोफिया पॉलिटेक्निक मुंबई से सोशल कम्युनिकेशंस एंड मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है।

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लॉकडाउन की कवरेज कर रहे पत्रकार के साथ पुलिस ने ये किया सलूक

पूरा देश 21 दिनों के लॉकडाउन का पालन कर रहा है। कोरोना से बचने व लोगों में जागरूकता फैलाने को लेकर देश की मीडिया भी अपना बड़ा योगदान दे रही है।

Last Modified:
Thursday, 02 April, 2020
journalist

पूरा देश 21 दिनों के लॉकडाउन का पालन कर रहा है। कोरोना से बचने व लोगों में जागरूकता फैलाने को लेकर देश की मीडिया भी अपना बड़ा योगदान दे रही है। लिहाजा मीडिया को काम करने में परेशानी न हो इसके लिए पीएम मोदी ने मीडिया को इमरजेंसी जरूरत में शामिल किया है। लेकिन फिर अलग-अलग जगहों से पुलिस के द्वारा पत्रकारों के साथ बर्बरता के मामले सामने आ रहे हैं। ताजा मामला ग्वालियर से सामने आया है।

बता दें कि घटना ग्वालियर के चेतकपुरी गेट की है। यहां शहर में लगे लॉकडाउन की रिपोर्टिंग कर रहे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के युवा पत्रकार चेतन सेठ के साथ पुलिसकर्मियों ने दुर्व्यवहार करते हुए न सिर्फ उन्हें गालियां दीं, बल्कि विरोध करने पर पत्रकार के साथ मारपीट भी की, जिसमें चोटिल हो गया है। पत्रकार का जेएएच अस्पताल में इलाज कराया गया।

दरअसल, पुलिसकर्मियों ने पत्रकार को रिर्पोटिंग करने से मना किया, जिसका विरोध करने पर रिर्पोटर को पुलिसकर्मियों ने यह कहते हुए गालियां दी कि तुम मीडिया वाले ज्यादा परेशान कर रह हो। इसके बाद, पुलिसकर्मियों ने बर्बरता दिखाते हुए पत्रकार पर लाठियों से हमला कर दिया, जिससे पत्रकार के बायां हाथ फ्रेक्चर हो गया।

इसके बाद शहर के प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के तमाम पत्रकारों ने फूलबाग चौराहे पर अपने कैमरा बैग सड़क पर रख लग पुलिसकर्मियों के गलत व्यवहार का विरोध किया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद एसपी नवनीत भसीन ने तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है, जिनमें एएसआई के.के शाक्य, आकक्षक गौरव शर्मा और आरक्षक बालेंद्र शर्मा के नाम शामिल है।

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CNBC Awaaz की एंकर मुग्धा मिश्रा ने लिया ये फैसला

जानी-मानी न्यूज एंकर मुग्धा मिश्रा इस चैनल के साथ एक दशक से ज्यादा समय से जुड़ी हुई थीं और एसोसिएट एडिटर की भूमिका निभा रही थीं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 01 April, 2020
Last Modified:
Wednesday, 01 April, 2020
Mugdha Mishra

हिंदी के बिजनेस न्यूज चैनल ‘सीएनबीसी आवाज’ (CNBC Awaaz) से खबर है कि मुग्धा मिश्रा ने ग्रुप को अलविदा कह दिया है। जानी-मानी न्यूज एंकर मुग्धा मिश्रा यहां एसोसिएट एडिटर की भूमिका निभा रही थीं। वे पिछले एक दशक से ज्यादा समय से चैनल के साथ थीं।

हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) से इस खबर की पुष्टि करते हुए मुग्धा ने कहा, ‘हां मैंने ‘सीएनबीसी आवाज’ को बाय बोल दिया है और अब मैं एक प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए ऑटो सेक्शन को कवर करूंगी।

मुग्धा ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2005 में ‘सीएनबीसी आवाज’ में एडिटेरियल डेस्क पर बतौर सीनियर रिसर्च एनालिस्ट के रूप में शुरू की थी। यहां वह 10 एनालिस्ट की टीम का नेतृत्व करती थीं, जो 24x7 आधार पर रिसर्च इनपुट्स उपलब्ध कराती थी।

2008 में उन्होंने ब्लूमबर्ग-यूटीवी (यूटीवी समूह और ब्लूमबर्ग के बीच एक जॉइंट वेंचर, जिसे बाद में BTVi  के नाम से जाना गया) को जॉइन कर लिया था। यहां उन्होंने सीनियर रिसर्च एनालिस्ट के तौर पर काम किया और एडिटोरियल डेस्क पर भी अपना योगदान दिया।

वर्ष 2009 में मुग्धा ने ‘सीएनबीसी आवाज’ को जॉइन कर लिया और यहां अपने करियर की सबसे लंबी पारी खेली। यहां उन्होंने ‘आवाजओवर ड्राइव’ (Awaaz Overdrive) शो की एंकरिंग की। इस साप्ताहिक शो में वह कार और मोटरसाइकिलों के बारे में बात करती थीं।

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