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पत्रकार की मौत, परिजनों का आरोप- 40,000 एडवांस न जमा करने पर अस्पताल ने की लापरवाही
महाराष्ट्र के पुणे शहर में बुधवार को एक निजी चैनल के पत्रकार की कोरोना से मौत हो गई। पत्रकार का नाम पांडुरंग रायकर था
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
महाराष्ट्र के पुणे शहर में बुधवार को एक निजी चैनल के पत्रकार की कोरोना से मौत हो गई। पत्रकार का नाम पांडुरंग रायकर था और वे मराठी न्यूज चैनल ‘टीवी9 मराठी’ में कॉरेस्पोंडेंट थे।
पत्रकार के परिजनों का आरोप है कि पांडुरंग को जम्बो कोविड सेंटर से पुणे के ही दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में भर्ती करना था, लेकिन न तो समय पर कार्डियक एंबुलेंस उपलब्ध हुई और न ही अस्पताल में बेड उपलब्ध हुआ, जिसके चलते उनकी मौत हुई है। इस घटना ने पुणे शहर की व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने पांडुरंग रायकर की मौत के मामले में जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन वह पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए बिना ही निकल गए। वहीं दूसरी तरफ पुणे शहर के महापौर ने यह स्वीकार किया है कि प्रशासन की दुर्व्यवस्था की वजह से पांडुरंग की मौत हुई।
पांडुरंग 42 वर्ष के थे और बुधवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। पांडुरंग के परिवार में उनकी पत्नी एक बेटा, बेटी और मां- बाप हैं। पांडुरंग के मौत के लिए सरकारी कार्यप्रणाली सबसे ज्यादा जिम्मेदार है।
पांडुरंग 20 अगस्त को ठंडी और बुखार की शिकायत के बाद डॉक्टर से मिले। उनकी 27 अगस्त को कोरोना की जांच की गई जिसकी रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। दूसरे ही दिन 28 अगस्त को पांडुरंग रायकर अहमदनगर जिले के कोपरगांव अपने गांव गए थे। गांव में उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी। लिहाजा उन्होंने कोपरगांव में ही एंटीजन टेस्ट करवाया, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। रविवार 30 अगस्त की रात एम्बुलेंस की सहायता से उन्हें इलाज के लिए पुणे लाया गया। पुणे के पत्रकारों ने पांडुरंग के परिवार के साथ बातचीत करने के बाद उन्हें इलाज के लिए कोविड सेंटर में भर्ती करवाया। पुणे के जंबो हॉस्पिटल के आईसीयू में पांडुरंग का इलाज चल रहा था, लेकिन उनकी तबीयत में कोई सुधार नहीं था। बीते मंगलवार 1 सितंबर के दिन उनका ऑक्सीजन लेवल घटकर 78 तक पहुंच गया। जंबो हॉस्पिटल से दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए कार्डियक एम्बुलेंस की जरूरत थी। लिहाजा उन्हें कोविड सेंटर से दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में ले जाने के लिए समय पर कार्डियक ऐम्बुलेंस नहीं मिली। रात में एक एम्बुलेंस मिली भी, तो उसका वेंटिलेटर ही खराब था। कुछ समय बाद जब दूसरी एम्बुलेंस मिली तो उसमें डॉक्टर नहीं थे, तब तक उनकी तबियत ज्यादा खराब हो चुकी थी।
अस्पताल में भर्ती कराने के लिए जो देरी हुई उसके कारण उनका निधन हुआ। परिजनों का कहना है कि निजी अस्पताल ने उन्हें 40,000 रुपए एडवांस जमा करने तक भर्ती करने से मना कर दिया। बहुत कोशिशों के बाद जिला कलेक्टर और तहसीलदार से संपर्क साधा गया, जिनके हस्तक्षेप के बाद पांडुरंग को निजी अस्पताल में भर्ती किया गया। हालांकि इसमें दो घंटे लग गए। इस दौरान उनकी तबियत और बिगड़ गई। हालांकि इस बीच इलाज में देरी के कारण पत्रकार ने दम तोड़ दिया। फिलहाल महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
वहीं, टीवी जर्नलिस्ट एसोसिएशन मुंबई ने सरकार से मांग की है कि दिवंगत पत्रकार पांडुरंग रायकर के परिजनों को सरकार की ओर से 50 लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान की जाए। 4 जून 2020 को स्वस्थ मंत्री राजेश टोपे ने खामगांव में एक कोविड सेंटर के उद्घाटन के वक्त कहां था कि सरकार ने पत्रकारों को भी बीमा कवच के दायरे में रखा है, जिस किसी भी पत्रकार की मौत कोरोना से होगी उनके परिवार को यह राशि दी जाएगी।
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