TRAI की नई सिफारिशें: इंटरनेट पर टीवी चैनल दिखाने वाले ऐप्स के लिए बनेगा अलग नियम

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने इंटरनेट के जरिए टीवी चैनल दिखाने वाले ऐप्स के लिए अलग नियम बनाने की सिफारिश की है।

Vikas Saxena by
Published - Monday, 26 October, 2026
Last Modified:
Monday, 26 October, 2026
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भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने इंटरनेट के जरिए टीवी चैनल दिखाने वाले ऐप्स के लिए अलग नियम बनाने की सिफारिश की है। इसके तहत फ्री एड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टेलीविजन (FAST) सेवाओं समेत ऐप आधारित टीवी चैनल डिस्ट्रीब्यूशन सेवाओं के लिए एक अलग मंजूरी व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया गया है। इसका मकसद इस क्षेत्र में काम करने वाली सेवाओं के लिए नियम तय करने के साथ उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना और कारोबार को आसान बनाना है।

TRAI ने इन सेवाओं को एप्लिकेशन-बेस्ड लीनियर टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन (ALTD) नाम दिया है। इसमें ऐसे ऐप शामिल हैं, जो इंटरनेट के जरिए दर्शकों को तय कार्यक्रम के अनुसार चलने वाले टीवी चैनल उपलब्ध कराते हैं। ये ऐप स्मार्ट टीवी में पहले से मौजूद हो सकते हैं या मोबाइल, स्मार्ट टीवी और वेबसाइट के जरिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

ALTD सेवाओं के लिए अलग मंजूरी व्यवस्था का सुझाव

TRAI ने सिफारिश की है कि ALTD सेवाओं को दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत प्रसारण सेवाओं की मंजूरी व्यवस्था में टीवी चैनल डिस्ट्रीब्यूशन सेवाओं की एक अलग श्रेणी के रूप में शामिल किया जाए। इसके लिए मंजूरी लेने और सेवा चलाने से जुड़े नियम तय किए जाने चाहिए।

प्राधिकरण के मुताबिक, इस व्यवस्था में ऐप के जरिए टीवी चैनल उपलब्ध कराने वाली सेवाओं के साथ टीवी निर्माता कंपनियों, ऑपरेटिंग सिस्टम उपलब्ध कराने वाली कंपनियों और प्रसारकों की जिम्मेदारियां भी तय होंगी।

TRAI ने मंजूरी की प्रक्रिया को आसान रखने का सुझाव दिया है। इसके तहत सेवा का दायरा पूरे देश में होगा और शुरुआती मंजूरी 20 साल के लिए देने की सिफारिश की गई है। इसे आगे हर बार 10 साल के लिए बढ़ाया जा सकेगा।

आवेदन और एंट्री फीस कितनी होगी?

TRAI की सिफारिशों के मुताबिक, ALTD सेवा के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी करने की फीस 10,000 रुपये और एकमुश्त एंट्री फीस 1 लाख रुपये रखी जानी चाहिए। साथ ही, इसके लिए अलग से मंजूरी शुल्क, बैंक गारंटी या सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं लेने का सुझाव दिया गया है।

ये फिलहाल TRAI की सिफारिशें हैं। इन्हें लागू करने के लिए संबंधित नियमों और मंजूरी प्रक्रिया को अधिसूचित करना होगा।

केवल अधिकृत ऐप ही उपलब्ध कराने का सुझाव

TRAI ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) को ALTD ऐप्स का एक केंद्रीय रिकॉर्ड यानी ‘मास्टर ALTD ऐप रिपॉजिटरी’ बनाए रखने की सिफारिश की है। इसके तहत टीवी बनाने वाली कंपनियों और ऑपरेटिंग सिस्टम उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को अपने उपकरणों और ऐप स्टोर पर केवल अधिकृत ALTD ऐप उपलब्ध कराने होंगे। उन्हें मंत्रालय को हर साल अनुपालन रिपोर्ट भी देनी होगी।

सिफारिशों के मुताबिक, इन ऐप्स के जरिए वही टीवी चैनल वितरित किए जा सकेंगे, जिन्हें केंद्र सरकार से जरूरी अनुमति या पंजीकरण मिला हो। इसके अलावा, इंटरनेट पर ही शुरू हुए लीनियर टीवी चैनलों के लिए आसान पंजीकरण व्यवस्था बनाने का भी सुझाव दिया गया है।

हालांकि, ऐसे प्रसारक-स्वामित्व वाले प्लेटफॉर्म, जो केवल अपने या अपनी होल्डिंग अथवा सहायक कंपनी के चैनल दिखाते हैं, इस प्रस्तावित व्यवस्था के दायरे से बाहर रखे गए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर होने वाली लाइव स्ट्रीमिंग को भी इसमें शामिल नहीं किया गया है।

शिकायतों के लिए ऐप उपलब्ध कराने वाली कंपनी जिम्मेदार

TRAI ने सिफारिश की है कि ALTD सेवा से जुड़ी उपभोक्ताओं की शिकायतों और उनके समाधान के लिए ऐप उपलब्ध कराने वाली कंपनी मुख्य संपर्क बिंदु होगी। इससे दर्शकों को अपनी शिकायत दर्ज कराने और उसका समाधान पाने के लिए जिम्मेदार पक्ष की पहचान करने में मदद मिल सकती है।

टीवी दर्शक संख्या मापने की व्यवस्था में भी शामिल होंगी ये सेवाएं

TRAI ने यह भी सुझाव दिया है कि ALTD ऐप्स के जरिए देखे जाने वाले टीवी चैनलों की दर्शक संख्या को टेलीविजन ऑडियंस मेजरमेंट व्यवस्था में शामिल किया जाए। अधिकृत ऐप प्रदाताओं को टीवी रेटिंग नीति, 2026 के अनुसार, दर्शक संख्या से जुड़े पहचान-रहित आंकड़े समय-समय पर जारी करने की अनुमति देने की भी सिफारिश की गई है।

इससे इंटरनेट आधारित ऐप्स पर टीवी चैनलों की दर्शक संख्या को मापने और पारंपरिक टीवी डिस्ट्रीब्यूशन सेवाओं के साथ उसे समझने का रास्ता खुल सकता है।

207 टिप्पणियों और 11 जवाबी टिप्पणियों के बाद तैयार हुईं सिफारिशें

TRAI ने बताया कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 15 दिसंबर 2025 को इस विषय पर नियामकीय ढांचा तैयार करने के लिए प्राधिकरण से सुझाव मांगे थे। इसके बाद TRAI ने 6 अप्रैल 2026 को इस मुद्दे पर एक परामर्श पत्र जारी किया था।

इस प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग पक्षों से 207 टिप्पणियां और 11 जवाबी टिप्पणियां मिलीं। जून 2026 में इस विषय पर खुली चर्चा भी हुई। इन सुझावों और अपने अध्ययन के आधार पर TRAI ने अब अपनी सिफारिशें जारी की हैं।

इन सिफारिशों का उद्देश्य इंटरनेट के जरिए टीवी चैनल देखने की सेवाओं के लिए स्पष्ट नियम बनाना, उपभोक्ताओं की सुरक्षा करना और इस क्षेत्र में कारोबार के लिए आसान व भविष्य को ध्यान में रखने वाली व्यवस्था तैयार करना है। 

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डेल्टा एक्सचेंज बना भारत-न्यूजीलैंड सीरीज का सह-प्रायोजक

डेल्टा एक्सचेंज भारत-न्यूजीलैंड टी20 अंतरराष्ट्रीय और वनडे सीरीज का सह-प्रायोजक बना है। साझेदारी के तहत कंपनी की ब्रांडिंग मैदान और प्रसारण से जुड़े प्रमुख स्थानों पर दिखाई देगी।

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Published - Monday, 26 October, 2026
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Monday, 26 October, 2026
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डेल्टा एक्सचेंज (Delta Exchange) भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेली जा रही टी20 अंतरराष्ट्रीय और वनडे सीरीज का सह-प्रायोजक बन गया है। इसके साथ ही क्रिप्टोकरेंसी डेरिवेटिव प्लेटफॉर्म ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के साथ अपनी साझेदारी को आगे बढ़ाया है।

भारत-न्यूजीलैंड सीरीज की शुरुआत 22 अक्टूबर से हुई है। इसमें पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय और पांच वनडे मुकाबले खेले जाएंगे। सीरीज 15 नवंबर तक चलेगी। साझेदारी के तहत डेल्टा एक्सचेंज की ब्रांडिंग मैदान और प्रसारण से जुड़े कई प्रमुख स्थानों पर दिखाई देगी। इसमें स्थिर और हाई-डेफिनिशन डिजिटल पेरिमीटर बोर्ड, डिजिटल साइट स्क्रीन और विकेट के पीछे वर्चुअल पिच मैट शामिल हैं।

मैच प्रेजेंटेशन, मैदान के बीच होने वाली चर्चाओं और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस्तेमाल होने वाले साझा बैकड्रॉप पर भी कंपनी की ब्रांडिंग नजर आएगी। इस साझेदारी का उद्देश्य क्रिकेट दर्शकों के बीच डेल्टा एक्सचेंज की पहचान मजबूत करना और उसके प्रोडक्ट्स के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।

डेल्टा एक्सचेंज खुद को एफआईयू-इंडिया (FIU-India) में पंजीकृत क्रिप्टोकरेंसी डेरिवेटिव एक्सचेंज के तौर पर पेश करता है।

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भास्कर रावत बने डिश टीवी के वाइस प्रेसिडेंट, ग्रोथ

भास्कर रावत डिश टीवी में वाइस प्रेसिडेंट, ग्रोथ बने हैं। इससे पहले वह ओटीटीप्ले में हेड ऑफ ग्रोथ थे और ग्रोथ, एनालिटिक्स, मार्केटिंग तथा कस्टमर एक्विजिशन पर काम करते रहे हैं।

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Published - Monday, 26 October, 2026
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Monday, 26 October, 2026
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भास्कर रावत (Bhaskar Rawat) ने डिश टीवी (DishTV) में वाइस प्रेसिडेंट, ग्रोथ (Vice President, Growth) के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी साझा की।

डिश टीवी से जुड़ने से पहले रावत एचटी मीडिया ग्रुप (HT Media Group) के ओटीटीप्ले (OTTplay) में हेड ऑफ ग्रोथ (Head of Growth) थे।

नई भूमिका में रावत ग्रोथ और एनालिटिक्स (Analytics) से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालेंगे। उनका फोकस कंज्यूमर बिजनेस के लिए स्केलेबल ग्रोथ सिस्टम तैयार करने पर रहेगा। उनके काम में मार्केटिंग, एनालिटिक्स, लाइफसाइकिल मैनेजमेंट, कस्टमर एक्विजिशन पार्टनरशिप और बिजनेस आउटकम्स शामिल हैं।

करियर के शुरुआती दौर में रावत ने आरपी-संजीव गोयनका ग्रुप (RP-Sanjiv Goenka Group), जियो (Jio), एयरटेल (Airtel) और लावा इंटरनेशनल (Lava International) समेत कई संस्थानों के साथ काम किया है।

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स्पॉटिफाई का मजबूत प्रदर्शन, राजस्व 5 अरब यूरो पहुंचा

स्पॉटिफाई ने तीसरी तिमाही में 16 फीसदी राजस्व वृद्धि दर्ज की। कंपनी का राजस्व 5 अरब यूरो, पेड सब्सक्राइबर 30.6 करोड़ और मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता 78.8 करोड़ पहुंच गए।

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Published - Monday, 26 October, 2026
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Monday, 26 October, 2026
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स्पॉटिफाई (Spotify) ने तीसरी तिमाही में सालाना आधार पर राजस्व में 16 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की है। कंपनी का राजस्व बढ़कर 5 अरब यूरो हो गया। इस दौरान भुगतान करने वाले ग्राहकों की संख्या 9 फीसदी बढ़कर 30.6 करोड़ पहुंच गई, जबकि मासिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं (Monthly Active Users) की संख्या 11 फीसदी बढ़कर 78.8 करोड़ हो गई।

कंपनी अब म्यूजिक से आगे बढ़कर पॉडकास्ट, क्रिएटर्स और ऑडियोबुक जैसे क्षेत्रों में भी अपनी पहुंच बढ़ा रही है। स्पॉटिफाई की योजना 2026 के अंत तक ऑडियोबुक की उपलब्धता 22 बाजारों से बढ़ाकर 180 से ज्यादा बाजारों तक करने की है। इससे दुनिया भर में 75 करोड़ से अधिक लोगों को स्ट्रीमिंग या खरीद के जरिए ऑडियोबुक उपलब्ध हो सकेंगी।

स्पॉटिफाई का पार्टनर प्रोग्राम (Partner Program) भी 35 से ज्यादा नए बाजारों तक पहुंचाया जा रहा है। इससे पात्र पॉडकास्ट क्रिएटर्स के लिए कमाई के नए अवसर खुलेंगे। कंपनी ने 34 बाजारों में क्रिएटर मेंबरशिप (Creator Membership) की शुरुआत भी की है। इसके तहत पात्र क्रिएटर्स अपने प्रशंसकों को विशेष सामग्री और अनुभव उपलब्ध करा सकेंगे।

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नेटवर्क18 में होगा न्यूज18 मराठी का विलय, NCLT ने दी मंजूरी

नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड में उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी न्यूज18 मराठी प्राइवेट लिमिटेड का विलय होगा।

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Published - Monday, 26 October, 2026
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Monday, 26 October, 2026
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नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड में उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी न्यूज18 मराठी प्राइवेट लिमिटेड का विलय होगा। मुंबई स्थित नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने 22 अक्टूबर 2026 के अपने आदेश में इस विलय योजना को मंजूरी दे दी है।

कंपनी ने 23 अक्टूबर को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में यह बताया। यह जानकारी सेबी के लिस्टिंग नियमों के तहत साझा की गई है।

हालांकि, विलय की प्रक्रिया आदेश के साथ ही प्रभावी नहीं होगी। कंपनी के मुताबिक, यह योजना तब प्रभावी होगी, जब इसमें तय की गई सभी जरूरी शर्तें पूरी हो जाएंगी।

नेटवर्क18 ने इससे पहले 25 मार्च 2026 को भी इस विलय योजना के बारे में जानकारी दी थी। ताजा सूचना में कंपनी ने बताया है कि एनसीएलटी की मुंबई पीठ ने अब इस योजना को मंजूरी दे दी है। 

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इस बड़े पद पर ‘दैनिक भास्कर’ की टीम में शामिल हुए वरिष्ठ पत्रकार अनुराग द्वारी

अनुराग द्वारी (Anurag Dwary) ने कुछ दिनों पूर्व ही ‘एनडीटीवी’ (NDTV) से इस्तीफा दे दिया था। वह करीब दो दशक से इस संस्थान के साथ जुड़े हुए थे।

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Published - Sunday, 25 October, 2026
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Sunday, 25 October, 2026
Anurag Dwary Dainik Bhaskar

वरिष्ठ पत्रकार अनुराग द्वारी (Anurag Dwary) अब दैनिक भास्कर (Dainik Bhaskar) की टीम में शामिल हो गए हैं। यहां उन्होंने बतौर सोशल मीडिया एडिटर जॉइन किया है। वह भोपाल से अपना कामकाज देखेंगे।

बता दें कि अनुराग द्वारी (Anurag Dwary) ने कुछ दिनों पूर्व ही ‘एनडीटीवी’ (NDTV) से इस्तीफा दे दिया था। वह करीब दो दशक से इस संस्थान के साथ जुड़े हुए थे।

मूल रूप से देवघर (झारखंड) के रहने वाले अनुराग द्वारी को मीडिया में काम करने का करीब ढाई दशक का अनुभव है। NDTV में वह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के एग्जिक्यूटिव एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। पिछले करीब 10 वर्षों से वह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, शासन, सामाजिक मुद्दों और जमीनी बदलावों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

पत्रकारिता में उनके काम को रामनाथ गोयनका अवॉर्ड और रेड इंक अवॉर्ड जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। उनकी पहचान गहरी फील्ड रिपोर्टिंग और जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग के लिए रही है।

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी संभालने से पहले अनुराग द्वारी ने करीब एक दशक महाराष्ट्र में रिपोर्टिंग की। इस दौरान उन्होंने चुनाव, आतंकी हमले, हाईकोर्ट, राजनीति और सामाजिक आंदोलनों को कवर किया। उन्होंने गुजरात, पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड समेत कई राज्यों के चुनावों की भी रिपोर्टिंग की है।

अनुराग द्वारी ने देश की कई बड़ी खबरों के साथ अंतरराष्ट्रीय असाइनमेंट भी कवर किए हैं। उन्होंने श्रीलंका में क्रिकेट वर्ल्ड कप की रिपोर्टिंग की। NDTV की ‘मॉनसून एक्सप्रेस’ जैसी सीरीज के दौरान उन्होंने करीब दो महीने तक नॉर्थ ईस्ट से पंजाब तक सड़क यात्रा की और देश के अलग-अलग हिस्सों से रिपोर्टिंग की। उन्होंने अमिताभ बच्चन और मनोज बाजपेयी जैसे अभिनेताओं पर NDTV के कई विशेष कार्यक्रमों की स्क्रिप्ट भी लिखी है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बात करें तो उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के AJK Mass Communication Research Centre से Development Communication में मास्टर डिग्री हासिल की है। पूर्व में वह PTI, Star News और BBC जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ भी काम कर चुके हैं।

समाचार4मीडिया की ओर से अनुराग द्वारी को उनके नए सफर के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।

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सनी देओल की फिल्म ‘Suryaa’ के प्रोमो पर IMA को आपत्ति, MIB से की समीक्षा की मांग

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने अभिनेता सनी देओल और संजय दत्त की फिल्म ‘सूर्या- अंत से आरंभ तक’ के प्रचार वीडियो पर आपत्ति जताई है।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 24 October, 2026
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Saturday, 24 October, 2026
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने अभिनेता सनी देओल और संजय दत्त की फिल्म ‘सूर्या- अंत से आरंभ तक’ के प्रचार वीडियो पर आपत्ति जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि फिल्म का प्रोमो चिकित्सा पेशे में भ्रष्टाचार को व्यापक रूप में दिखाता है और डॉक्टरों व अस्पताल के कर्मचारियों के खिलाफ हिंसा को इस तरह पेश करता है, जिससे लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है। IMA ने इस मामले में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से प्रचार सामग्री की समीक्षा करने की मांग की है।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, IMA के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार जे. नायक ने 22 अक्टूबर को सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर फिल्म की प्रचार सामग्री की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। एसोसिएशन ने फिल्म निर्माताओं से जरूरी सुधार करने को भी कहा है। साथ ही, उसने कहा है कि लागू कानूनों के तहत जरूरत पड़ने पर प्रतिबंध या दूसरी उचित कार्रवाई पर विचार किया जाए।

यह पत्र केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अध्यक्ष को भी भेजा गया है।

डॉक्टरों की छवि को लेकर जताई चिंता

IMA का कहना है कि फिल्म में कुछ लोगों के भ्रष्टाचार या गलत कामों को इस तरह दिखाए जाने की आशंका है, जिससे पूरे चिकित्सा समुदाय की छवि प्रभावित हो सकती है। एसोसिएशन ने कहा कि अगर कोई डॉक्टर गलत काम करता है, तो उसके खिलाफ जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर सजा भी मिलनी चाहिए। लेकिन कुछ लोगों के गलत कामों के लिए पूरे डॉक्टर समुदाय को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।

स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा पर भी आपत्ति

एसोसिएशन ने फिल्म के उन दृश्यों पर भी चिंता जताई है, जिनमें डॉक्टरों, नर्सों और अस्पताल के कर्मचारियों पर शारीरिक हमला दिखाया गया है। IMA के मुताबिक, अगर ऐसी हिंसा को बहादुरी या जायज कार्रवाई के रूप में पेश किया जाता है, तो इससे स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा को सामान्य मानने की सोच बढ़ सकती है।

IMA ने कहा कि अस्पतालों में डॉक्टरों और दूसरे स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा पहले से ही चिंता का विषय है। ऐसे में फिल्मों और उनकी प्रचार सामग्री में हिंसा को सही ठहराने वाले चित्रण से स्थिति और मुश्किल हो सकती है।

मरीजों और डॉक्टरों के बीच भरोसे पर असर की आशंका

IMA ने अपने पत्र में यह भी आशंका जताई कि इस तरह का चित्रण मरीजों और डॉक्टरों के बीच अविश्वास बढ़ा सकता है। इलाज के दौरान दोनों के बीच भरोसा और सहयोग जरूरी होता है। एसोसिएशन के अनुसार, चिकित्सा पेशे की नकारात्मक छवि मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों का मनोबल भी प्रभावित कर सकती है और युवाओं को इस पेशे में आने से हतोत्साहित कर सकती है।

हालांकि, IMA ने रचनात्मक स्वतंत्रता के महत्व को स्वीकार किया है। उसका कहना है कि फिल्मों और दूसरी रचनात्मक सामग्री को बनाने की आजादी जरूरी है, लेकिन जहां स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा और जरूरी सार्वजनिक सेवाओं पर लोगों के भरोसे का सवाल हो, वहां इस स्वतंत्रता का जिम्मेदारी से इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

फिलहाल, IMA ने मंत्रालय से फिल्म के प्रचार वीडियो की समीक्षा करने और लागू नियमों के तहत उचित कदम उठाने की मांग की है। 

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टीवी रेटिंग पर रोक के बीच GTPL Hathway ने शुरू किया व्युअरशिप डेटा जारी करना

टीवी रेटिंग जारी करने की व्यवस्था में रुकावट के बीच केबल टीवी और ब्रॉडबैंड सेवा देने वाली कंपनी GTPL Hathway ने टेलीविजन दर्शकों से जुड़ा डेटा जारी करना शुरू कर दिया है।

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Published - Saturday, 24 October, 2026
Last Modified:
Saturday, 24 October, 2026
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टीवी रेटिंग जारी करने की व्यवस्था में रुकावट के बीच केबल टीवी और ब्रॉडबैंड सेवा देने वाली कंपनी GTPL Hathway ने टेलीविजन दर्शकों से जुड़ा डेटा जारी करना शुरू कर दिया है। कंपनी इसके लिए रिटर्न पाथ डेटा (RPD) तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। फिलहाल इस व्यवस्था के तहत 10 हजार से ज्यादा ऐसे सेट-टॉप बॉक्स से डेटा जुटाया जा रहा है, जो इस तकनीक से जुड़े हैं। कंपनी आने वाले कुछ महीनों में इस दायरे को बढ़ाकर करीब 50 हजार घरों तक पहुंचाना चाहती है।

कंपनी के मुताबिक, यह पहल सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की टेलीविजन रेटिंग पॉलिसी, 2026 के अनुरूप है। GTPL ने अपनी वेबसाइट पर सबसे ज्यादा देखे जाने वाले टीवी चैनलों और सेट-टॉप बॉक्स पर उपलब्ध डिजिटल विज्ञापन माध्यमों से जुड़ी जानकारी के सारांश भी जारी करने शुरू कर दिए हैं।

GTPL के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, एक औसत घर में रोजाना साढ़े सात घंटे से ज्यादा समय तक पारंपरिक टीवी देखा जाता है। कंपनी का कहना है कि यह आंकड़ा भारतीय घरों में लीनियर टेलीविजन यानी तय कार्यक्रमों और प्रसारण समय के अनुसार टीवी देखने की आदत को दिखाता है।

यह पहल ऐसे समय में आई है, जब टीवी रेटिंग व्यवस्था में जारी रुकावट के बीच प्रसारकों, विज्ञापनदाताओं और मीडिया एजेंसियों को दर्शकों की पसंद और विज्ञापनों की पहुंच समझने के लिए दूसरे स्रोतों की जरूरत है। हालांकि, GTPL का यह प्लेटफॉर्म आधारित डेटा मौजूदा उद्योग-स्तरीय टीवी रेटिंग व्यवस्था से अलग है।

50 हजार घरों तक सैंपल बढ़ाने की योजना

GTPL फिलहाल 200 से ज्यादा शहरों और कस्बों के साथ करीब 3,000 पिन कोड क्षेत्रों में मौजूद 10 हजार से अधिक RPD-सक्षम सेट-टॉप बॉक्स से डेटा जुटा रही है। इस सैंपल में महानगरों, शहरी, अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों को शामिल किया गया है।

कंपनी का लक्ष्य अगले कुछ महीनों में इस सैंपल को बढ़ाकर लगभग 50 हजार घरों तक पहुंचाना है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में टीवी देखने के तौर-तरीकों को समझने और आंकड़ों का अधिक बारीकी से विश्लेषण करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

कंपनी के मुताबिक, इस व्यवस्था के लिए शुरुआती अध्ययन एक स्वतंत्र तीसरी पार्टी की रिसर्च एजेंसी ने किया है। इसमें अलग-अलग बाजारों में दर्शकों की देखने की आदतों को समझने के लिए सांख्यिकीय और वैज्ञानिक सैंपलिंग तरीकों का इस्तेमाल किया गया है।

GTPL के पास 1.1 करोड़ से ज्यादा सक्रिय डिजिटल टीवी घरों का ग्राहक आधार है और कंपनी का अनुमानित दर्शक आधार करीब 5 करोड़ है। कंपनी का कहना है कि सैंपल बढ़ने से उसके ग्राहक आधार में टीवी देखने के रुझानों की बेहतर जानकारी मिल सकती है।

हालांकि, इन आंकड़ों की सटीकता और व्यापकता इस बात पर निर्भर करेगी कि सैंपल में किस तरह के घर शामिल हैं, उन्हें कैसे चुना गया है और उनके आंकड़ों के आधार पर बड़े ग्राहक आधार के अनुमान किस तरीके से तैयार किए जाते हैं। इसलिए इस डेटा को पूरे भारत के टीवी दर्शकों की पसंद का प्रतिनिधि मानने से पहले इसकी कार्यप्रणाली को समझना जरूरी होगा।

RPD तकनीक से कैसे मिलेगी जानकारी?

रिटर्न पाथ डेटा यानी RPD तकनीक के जरिए टीवी देखने से जुड़ी गतिविधियों का डेटा सीधे इससे जुड़े सेट-टॉप बॉक्स से मिलता है। सर्वे में लोगों से उनकी टीवी देखने की आदतों के बारे में पूछने के बजाय यह तकनीक अपने आप देखने की गतिविधियों का रिकॉर्ड तैयार करती है।

GTPL के मुताबिक, इस डेटा से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि लोग कितनी देर टीवी देखते हैं, किन चैनलों को पसंद करते हैं, किस समय और किस तरह के कार्यक्रम ज्यादा देखते हैं और अलग-अलग बाजारों में दर्शकों की पसंद कैसे बदलती है।

इस व्यवस्था के जरिए दर्शकों की पहुंच, विज्ञापनों के अनुमानित इम्प्रेशन, चैनलों की लोकप्रियता, क्षेत्रीय देखने के रुझान, कार्यक्रमों की श्रेणी और अलग-अलग समय के हिसाब से टीवी देखने की आदतों का विश्लेषण किया जा सकता है। कंपनी लंबे समय में दर्शकों की पसंद में होने वाले बदलावों और विज्ञापनों की प्रभावशीलता को समझने के लिए भी इसका इस्तेमाल करना चाहती है।

कंपनी के अनुसार, यह व्यवस्था उसके प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करीब 1,000 टीवी चैनलों के देखने से जुड़े डेटा को कवर करती है। इसमें पे चैनल और फ्री-टू-एयर चैनल, राष्ट्रीय और क्षेत्रीय चैनल के साथ सैटेलाइट और प्लेटफॉर्म के जरिए उपलब्ध कराए जाने वाले चैनल भी शामिल हैं।

इससे छोटे, क्षेत्रीय और नए प्रसारकों को भी अपने कार्यक्रमों की पहुंच और दर्शकों की पसंद समझने में मदद मिल सकती है। प्रसारक इस जानकारी के आधार पर कार्यक्रमों और उनके प्रसारण के समय से जुड़े फैसलों का आकलन कर सकते हैं। वहीं, विज्ञापनदाता और मीडिया एजेंसियां इसका इस्तेमाल विज्ञापन की योजना बनाने और दर्शकों के रुझान समझने के लिए कर सकती हैं।

सेट-टॉप बॉक्स पर डिजिटल विज्ञापनों का भी होगा आकलन

GTPL ने टीवी देखने के आंकड़ों के अलावा सेट-टॉप बॉक्स पर उपलब्ध डिजिटल विज्ञापन माध्यमों के प्रदर्शन को मापने की व्यवस्था भी तैयार की है।

कंपनी के मुताबिक, सैंपल में शामिल घरों के देखने के व्यवहार से मिलने वाले आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा और सांख्यिकीय तरीकों से इनके आधार पर अपने व्यापक ग्राहक आधार के लिए अनुमान तैयार किए जाएंगे।

इससे विज्ञापनदाताओं को यह समझने में मदद मिल सकती है कि सेट-टॉप बॉक्स पर मौजूद डिजिटल विज्ञापन माध्यम कितने लोगों तक पहुंचे और उन्हें देखने में कितना समय बिताया गया। इसके लिए विज्ञापनों की अनुमानित पहुंच और औसत देखने के समय जैसे मानकों का इस्तेमाल किया जाएगा।

कंपनी विज्ञापनदाताओं को इन डिजिटल माध्यमों पर तय डिजिटल मानकों के आधार पर विज्ञापन खरीदने का विकल्प देने की योजना बना रही है। इनमें प्रति हजार इम्प्रेशन की लागत यानी CPM के आधार पर विज्ञापन खरीदने की व्यवस्था भी शामिल होगी। डिजिटल विज्ञापन जगत में गूगल और मेटा जैसे प्लेटफॉर्म पर भी इस तरह के मॉडल का इस्तेमाल किया जाता है।

इस पहल से GTPL को अपने सेट-टॉप बॉक्स आधारित विज्ञापन माध्यमों के लिए एक नया कारोबारी विकल्प मिल सकता है। विज्ञापनदाता भी टीवी और डिजिटल माध्यमों पर अपनी पहुंच का आकलन करने के लिए इन आंकड़ों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

हालांकि, कंपनी ने अभी इस विज्ञापन सुविधा की व्यावसायिक शर्तों और उपलब्ध विज्ञापन माध्यमों का विस्तृत ब्योरा साझा नहीं किया है।

डेटा की गोपनीयता पर कंपनी का क्या कहना है?

GTPL का कहना है कि उसने इस व्यवस्था में डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता का ध्यान रखा है। कंपनी के मुताबिक, इस प्रक्रिया में ग्राहकों की व्यक्तिगत पहचान बताने वाली जानकारी एकत्र नहीं की जाती। डेटा को प्रोसेस करने से पहले उसकी पहचान छिपाई जाती है और जानकारी को घरों के स्तर पर एकत्रित रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

कंपनी ने डेटा जुटाने और उसके विश्लेषण को सुरक्षित रखने के लिए स्वचालित प्रणालियों के इस्तेमाल की भी बात कही है।

टीवी रेटिंग व्यवस्था के लिए क्यों अहम है यह पहल?

टीवी रेटिंग का डेटा प्रसारकों, विज्ञापनदाताओं और मीडिया एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण होता है। इससे उन्हें चैनलों और कार्यक्रमों की लोकप्रियता समझने, विज्ञापन की योजना बनाने और अपने निवेश से जुड़े फैसले लेने में मदद मिलती है।

ऐसे में GTPL की यह पहल टीवी देखने के रुझानों को समझने के लिए एक अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध करा सकती है। आने वाले महीनों में सैंपल को 50 हजार घरों तक बढ़ाने से कंपनी के अपने ग्राहक आधार से मिलने वाले आंकड़ों का दायरा बढ़ सकता है।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि GTPL का डेटा उसके प्लेटफॉर्म से जुड़े सेट-टॉप बॉक्स और चुने गए घरों के सैंपल पर आधारित है। इसे अपने आप पूरे भारत की टीवी व्युअरशिप का आधिकारिक या सार्वभौमिक माप नहीं माना जा सकता। इसके निष्कर्षों को समझने के लिए सैंपल के चयन, आंकड़ों के विश्लेषण और अनुमान तैयार करने की प्रक्रिया को देखना होगा।

कुल मिलाकर, GTPL Hathway की इस पहल से टीवी दर्शकों की पसंद और सेट-टॉप बॉक्स पर उपलब्ध विज्ञापन माध्यमों के प्रदर्शन को समझने का एक नया रास्ता खुल सकता है। इसकी उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि उद्योग के दूसरे पक्ष इन आंकड़ों और उनकी कार्यप्रणाली का आकलन किस तरह करते हैं।

 

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Zee Learn में राकेश चतुर्वेदी को बड़ी जिम्मेदारी, 9 नवंबर से बनेंगे होल-टाइम डायरेक्टर

शिक्षा क्षेत्र की कंपनी जी लर्न (Zee Learn Ltd) ने राकेश चतुर्वेदी को होल-टाइम डायरेक्टर (पूर्णकालिक निदेशक) नियुक्त किया है।

Vikas Saxena by
Published - Saturday, 24 October, 2026
Last Modified:
Saturday, 24 October, 2026
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शिक्षा क्षेत्र की कंपनी जी लर्न (Zee Learn Ltd) ने राकेश चतुर्वेदी को होल-टाइम डायरेक्टर (पूर्णकालिक निदेशक) नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 9 नवंबर, 2026 से प्रभावी होगी। वह कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) की जिम्मेदारी भी संभालते रहेंगे।

कंपनी के निदेशक मंडल ने 23 अक्टूबर, 2026 को हुई बैठक में इस नियुक्ति को मंजूरी दी। यह फैसला नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी की सिफारिश पर लिया गया है। हालांकि, उनकी नियुक्ति के लिए कंपनी के सदस्यों की मंजूरी भी जरूरी होगी। यह मंजूरी अगली आम बैठक में या नियुक्ति की तारीख से तीन महीने के भीतर, जो भी पहले हो, ली जानी है।

मीडिया और टेक्नोलॉजी क्षेत्र में 30 साल का अनुभव

राकेश चतुर्वेदी को विभिन्न कॉरपोरेट क्षेत्रों में करीब 30 साल का अनुभव है। इसमें मीडिया और टेक्नोलॉजी क्षेत्र भी शामिल हैं। उनके पास कॉमर्स और बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री, कानून में स्नातक (LL.B.) और फाइनेंस में डॉक्टरेट (Ph.D.) की डिग्री है।

जी लर्न में नई जिम्मेदारी मिलने से पहले वह जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Zee Entertainment Enterprises Ltd) में एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट के पद पर कार्यरत थे। वहां वह जोखिम प्रबंधन, आंतरिक ऑडिट और वित्तीय नियंत्रण से जुड़े काम संभालते थे।

इसके अलावा, वह इंडिया वेब पोर्टल प्राइवेट लिमिटेड (India.com) में मुख्य वित्तीय अधिकारी और नियामक मामलों के प्रमुख की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। उनके अनुभव में वित्तीय योजना तैयार करना, जोखिम प्रबंधन, नियमों का पालन, पूंजी के इस्तेमाल की योजना और कंपनियों के विलय एवं अधिग्रहण जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

सेबी के नियमों के तहत दी गई जानकारी

कंपनी ने शेयर बाजारों को दी गई जानकारी में स्पष्ट किया है कि सेबी या किसी अन्य प्राधिकरण के आदेश के तहत राकेश चतुर्वेदी पर निदेशक का पद संभालने की कोई रोक नहीं है।

यह जानकारी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के लिस्टिंग नियमों के विनियमन 30 के तहत साझा की गई है। कंपनी के अनुसार, 23 अक्टूबर को बोर्ड की बैठक शाम 4 बजे शुरू हुई और शाम 6:30 बजे समाप्त हुई। 

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Affle 3i ने प्रमोटर कंपनी को आवंटित किए 12.77 लाख शेयर, पूंजी बढ़कर हुई ₹28.78 करोड़

डिजिटल विज्ञापन और मोबाइल मार्केटिंग टेक्नोलॉजी कंपनी Affle 3i लिमिटेड ने अपनी प्रमोटर कंपनी Affle Holdings Pte. Ltd. को 12,77,155 नए इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं।

Vikas Saxena by
Published - Saturday, 24 October, 2026
Last Modified:
Saturday, 24 October, 2026
affle4120

डिजिटल विज्ञापन और मोबाइल मार्केटिंग टेक्नोलॉजी कंपनी Affle 3i लिमिटेड ने अपनी प्रमोटर कंपनी Affle Holdings Pte. Ltd. को 12,77,155 नए इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं। कंपनी ने ये शेयर वारंट को इक्विटी शेयरों में बदलने पर जारी किए हैं। हर शेयर का अंकित मूल्य 2 रुपये है, जबकि इश्यू प्राइस 1,487 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है।

कंपनी ने 21 अक्टूबर, 2026 को शेयर बाजारों को दी गई जानकारी में बताया कि यह आवंटन प्रेफरेंशियल आधार पर किया गया है। इससे पहले 19 अक्टूबर को कंपनी ने प्रमोटर कंपनी को 17,04,324 इक्विटी शेयर आवंटित करने की जानकारी दी थी।

अब तक 30.16 लाख शेयर आवंटित

Affle 3i के मुताबिक, प्रमोटर कंपनी को कुल 74 लाख वारंट आवंटित किए गए थे। इनमें से अब तक 30,16,443 वारंट को इक्विटी शेयरों में बदला जा चुका है। इसके बदले कंपनी को कुल 6,115.04 मिलियन रुपये यानी करीब 611.50 करोड़ रुपये मिले हैं।

कंपनी ने बताया कि 74 लाख वारंट के लिए कुल 11,003.80 मिलियन रुपये यानी करीब 1,100.38 करोड़ रुपये की राशि तय है। इसमें वारंट आवंटन के समय मिलने वाली 25 फीसदी शुरुआती राशि और वारंट को शेयरों में बदलने के लिए दी जाने वाली बाकी रकम शामिल है।

1,487 रुपये प्रति शेयर है इश्यू प्राइस

कंपनी ने वारंट को शेयरों में बदलने के लिए प्रति शेयर 1,487 रुपये का इश्यू प्राइस तय किया है। इसमें से 25 फीसदी यानी 371.75 रुपये प्रति वारंट की राशि पहले ही मिल चुकी थी। बाकी 75 फीसदी यानी 1,115.25 रुपये प्रति वारंट का भुगतान वारंट को शेयरों में बदलने के समय किया गया।

इस प्रक्रिया के बाद कंपनी की जारी, सब्सक्राइब्ड और पूरी तरह चुकता शेयर पूंजी बढ़कर 28,77,91,654 रुपये हो गई है। यह पूंजी 2 रुपये अंकित मूल्य वाले कुल 14,38,95,827 इक्विटी शेयरों में बंटी है।

 

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राजेंद्र तिवारी ने LENS में संभाली एग्जिक्यूटिव एडिटर की जिम्मेदारी

राजेंद्र तिवारी पूर्व में दैनिक भास्कर, हिंदुस्तान, अमर उजाला और प्रभात खबर जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों में वरिष्ठ संपादकीय पदों पर काम कर चुके हैं।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 23 October, 2026
Last Modified:
Friday, 23 October, 2026
Rajendra Tiwari

वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र तिवारी ने लाइव आई न्यूज सर्विस (LENS) में एग्जिक्यूटिव एडिटर के रूप में नई पारी शुरू की है। प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव रखने वाले तिवारी यहां न्यूजरूम का नेतृत्व करेंगे। उनकी जिम्मेदारी में खबरों की पुष्टि, न्यूजरूम की कार्यप्रणाली और संपादकीय मानकों की देखरेख शामिल होगी।

राजेंद्र तिवारी पूर्व में दैनिक भास्कर, हिंदुस्तान, अमर उजाला और प्रभात खबर जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों में वरिष्ठ संपादकीय पदों पर काम कर चुके हैं। प्रभात खबर में उन्होंने कॉरपोरेट एडिटर के रूप में भी काम किया है।

उनके पत्रकारिता अनुभव का दायरा दिल्ली, लखनऊ, पटना, चंडीगढ़, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, भोपाल, इंदौर, रायपुर, रांची और कोलकाता तक फैला रहा है। अलग-अलग शहरों और क्षेत्रों में काम करने का उनका अनुभव उनके लंबे पत्रकारिता करियर का हिस्सा रहा है।

हाल के वर्षों में तिवारी डिजिटल पत्रकारिता से भी जुड़े रहे हैं। वह यूट्यूब आधारित न्यूज और राजनीतिक विश्लेषण मंच अनब्रेकिंग (UnBreaking) से जुड़े रहे हैं। इसके अलावा, वह द वायर (The Wire) पर ‘बात दरअसल ये है’ नाम से राजनीतिक विश्लेषण कार्यक्रम भी प्रस्तुत करते हैं।

दरअसल, LENS एक ऐसा मंच विकसित कर रहा है, जो रिपोर्टरों और स्ट्रिंगरों के वीडियो फुटेज को ब्रॉडकास्टर्स और डिजिटल पब्लिशर्स से जोड़ने का काम करेगा। इसका उद्देश्य खबरों से जुड़े वीडियो फुटेज की पुष्टि करना, उनके अधिकारों को स्पष्ट रखना और एक व्यवस्थित लाइसेंसिंग व्यवस्था के जरिए उपलब्ध कराना है। इस व्यवस्था में योगदान देने वाले लोगों को पारदर्शी तरीके से भुगतान सुनिश्चित करने पर भी जोर है।

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