यह इस कार्यक्रम का चौथा एडिशन है। इस बार अवॉर्ड्स कार्यक्रम 20 दिसंबर 2023 को कोलकाता स्थित आईटीसी सोनार, सुंदरबन लॉन में आयोजित किया जा रहा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो
पूर्वी भारत के प्रमुख अखबार ‘सन्मार्ग’ द्वारा बिजनेस और इंडस्ट्री लीडर्स की उपलब्धियों का जश्न मनाने, उन्हें प्रोत्साहन देने और सम्मानित करने के लिए ‘सन्मार्ग बिजनेस अवार्ड्स’ का एक बार फिर आयोजन किया जा रहा है। यह इस कार्यक्रम का चौथा एडिशन है। इस बार अवॉर्ड्स कार्यक्रम इंडस्ट्री से जुड़े तमाम दिग्गजों की मौजूदगी में 20 दिसंबर 2023 को कोलकाता स्थित आईटीसी सोनार, सुंदरबन लॉन में आयोजित किया जा रहा है।
बताया जाता है कि इस वर्ष इस अवॉर्ड के तहत इंडस्ट्री लीडर्स को 'कर्म योगी' के रूप में सम्मानित किया जाएगा, जो अटूट प्रतिबद्धता के साथ अपने धर्म का पालन करते हैं और जिन्होंने देश की अर्थव्यवस्था पर अपना प्रभाव डाला है। इस अवॉर्ड कार्यक्रम का उद्देश्य बिजनेस हाउसेस की विनम्र भावनाओं, नवीन रणनीतियों, सामुदायिक पहलों के प्रति उनकी चिंता और अंततः उनकी समग्र वित्तीय उपलब्धियों के लिए उन्हें प्रेरित करना है।
इस अवॉर्ड के तहत विजेताओं का चुनाव करने के लिए जूरी का गठन किया गया, जिसमें ममता बिनानी, नेशनल प्रेजिडेंट (2016), ICSI and a Practising Lawyer; विष्णु कुमार भंडारी, मैनेजिंग डायरेक्टर, Supertron Electronics, उत्सव पारेख, चेयरमैन, SMIFS Capital Services और दीपक जालान, मैनेजिंग डायरेक्टर, Linc शामिल रहे।
इस बारे में ‘सन्मार्ग’ की प्रेजिडेंट रुचिका गुप्ता का कहना है, ‘हम कम्युनिटीज के उत्थान के लिए बिजनेस की परिवर्तनकारी शक्ति में विश्वास करते हैं। सन्मार्ग बिजनेस अवार्ड्स ऐसा प्लेटफॉर्म है, जो बंगाल के बिजनेस लीडर्स के उल्लेखनीय प्रयासों की पहचान कर उन्हें सामने लाता है। इन अवॉर्ड्स के माध्यम से हम न केवल उन लोगों का सम्मान करते हैं जो बॉटम लाइन में योगदान देते हैं बल्कि हमारी कम्युनिटी की भावना और जीवन शक्ति में भी योगदान देते हैं।’
कंपनी सिर्फ फिल्मों की स्क्रीनिंग तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि अपने सिनेमाघरों को स्पोर्ट्स, म्यूजिक, स्टैंड-अप कॉमेडी और अन्य लाइव एंटरटेनमेंट का बड़ा केंद्र बनाना चाहती है।
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Samachar4media Bureau
देश की सबसे बड़ी मल्टीप्लेक्स चेन PVR INOX अब अपने कारोबार का दायरा बढ़ाने की तैयारी में है। कंपनी सिर्फ फिल्मों की स्क्रीनिंग तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि अपने सिनेमाघरों को स्पोर्ट्स, म्यूजिक, स्टैंड-अप कॉमेडी और अन्य लाइव एंटरटेनमेंट का बड़ा केंद्र बनाना चाहती है।
कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर अजय बिजली ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजों के बाद हुई कॉन्फ्रेंस कॉल में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि PVR INOX का लक्ष्य अपने थिएटर नेटवर्क को सिर्फ फिल्में दिखाने वाली जगह नहीं, बल्कि लोगों के लिए आउट-ऑफ-होम एंटरटेनमेंट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करना है।
अजय बिजली ने कहा कि कंपनी पूरे साल अपने सिनेमाघरों की स्क्रीन, लोकेशन और बड़े दर्शक वर्ग का इस्तेमाल अलग-अलग तरह के मनोरंजन कार्यक्रमों के लिए करना चाहती है।
उन्होंने बताया कि आईपीएल और फीफा वर्ल्ड कप के लाइव प्रसारण को दर्शकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली थी। इससे कंपनी को यह भरोसा मिला कि लोग बड़े खेल आयोजनों को भी बड़े पर्दे पर देखने में दिलचस्पी रखते हैं।
स्पोर्ट्स इवेंट्स की स्क्रीनिंग के व्यावसायिक फायदे पर पूछे गए सवाल के जवाब में अजय बिजली ने कहा कि यह केवल प्रचार का हिस्सा नहीं है, बल्कि इससे कंपनी को वास्तविक कमाई भी हुई है। उन्होंने बताया कि फीफा वर्ल्ड कप फाइनल, जो आधी रात के बाद शुरू हुआ था, उसे देखने के लिए भी करीब 64,000 दर्शक PVR INOX के सिनेमाघरों में पहुंचे। इससे कंपनी की आय में भी योगदान मिला।
उन्होंने कहा कि फिल्मों का कारोबार आगे भी PVR INOX की सबसे बड़ी ताकत बना रहेगा, लेकिन इसके साथ-साथ कंपनी अपने सिनेमाघरों में खेल प्रतियोगितियां, म्यूजिक प्रोग्राम, स्टैंड-अप कॉमेडी और अन्य लाइव इवेंट्स आयोजित करने के अवसर भी लगातार बढ़ा रही है।
अजय बिजली के मुताबिक, कंपनी का प्रयास है कि फिल्मों को अपने कारोबार का केंद्र बनाए रखते हुए धीरे-धीरे ऐसे नए मनोरंजन विकल्प जोड़े जाएं, जो लंबे समय तक टिकाऊ साबित हों।
माना जा रहा है कि PVR INOX की यह रणनीति ऐसे समय में आई है, जब मल्टीप्लेक्स कंपनियां बॉक्स ऑफिस पर निर्भरता कम कर अपने थिएटरों का उपयोग सालभर अलग-अलग तरह के आयोजनों के लिए करना चाहती हैं। इससे दर्शकों को भी सिनेमाघरों में मनोरंजन के नए विकल्प मिलेंगे और कंपनी के लिए कमाई के नए रास्ते खुलेंगे।
दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि जंतर-मंतर पर चल रहे CJP (Cockroach Janata Party) के प्रदर्शन से जुड़ी भ्रामक और फर्जी जानकारियां सोशल मीडिया पर तेजी से फैलाई जा रही हैं।
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Samachar4media Bureau
दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि जंतर-मंतर पर चल रहे CJP (Cockroach Janata Party) के प्रदर्शन से जुड़ी भ्रामक और फर्जी जानकारियां सोशल मीडिया पर तेजी से फैलाई जा रही हैं। पुलिस का कहना है कि इनमें से कई पोस्ट पाकिस्तान से संचालित सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए भी शेयर की जा रही थीं। ऐसे 400 से अधिक सोशल मीडिया हैंडल की पहचान कर उन्हें ब्लॉक कर दिया गया है।
शनिवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सेंट्रल दिल्ली के डीसीपी रोहित राजबीर सिंह ने कहा कि छात्र-नेतृत्व वाले इस प्रदर्शन में सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम, का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई पोस्ट, वीडियो और तस्वीरें झूठी, भ्रामक और लोगों को गुमराह करने वाली हैं।
डीसीपी ने कहा कि पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर Cockroach Janata Party के बैनर तले प्रदर्शन चल रहा है। आज के युवाओं के लिए सोशल मीडिया, विशेषकर इंस्टाग्राम, खबरों और अपडेट का बड़ा माध्यम बन चुका है। लेकिन हर वायरल पोस्ट या वीडियो सही हो, यह जरूरी नहीं है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने या उसे आगे साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच (फैक्ट-चेक) जरूर करें। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कोई भी जानकारी बहुत तेजी से वायरल हो जाती है और यदि वह गलत हो, तो इसका कानून-व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार नजर बनाए हुए है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन से जुड़े फेक न्यूज, एआई से तैयार किए गए वीडियो (AI-generated videos), डीपफेक और एडिट किए गए वीडियो का जवाब देने के लिए पुलिस अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए लगातार तथ्यात्मक जानकारी साझा कर रही है।
पुलिस का कहना है कि उसका उद्देश्य लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों तथा भ्रामक दावों पर रोक लगाना है, ताकि किसी तरह की गलतफहमी या कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा न हो।
सविता राज हीरेमठ ने 25 वर्षों में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। फिल्मों, सामाजिक अभियानों और ब्रांड निर्माण के जरिए उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है।
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सविता राज हीरेमठ भारतीय विज्ञापन, मार्केटिंग, मीडिया और सिनेमा जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं, जिन्होंने पिछले 25 वर्षों में कई ऐसे कार्य किए हैं, जिन्होंने उद्योग के साथ-साथ समाज पर भी गहरी छाप छोड़ी है।
वह उषाकाल कम्युनिकेशंस लिमिटेड (Ushakkaal Communications Ltd.) की सह-संस्थापक रही हैं और उन्होंने एमवे (Amway), सुजुकी (Suzuki), स्वारोवस्की (Swarovski), श्वार्जकोफ (Schwarzkopf), डाबर (Dabur) और हिंदुस्तान मोटर्स (Hindustan Motors) जैसे कई बड़े ब्रांड्स के लिए सफल विज्ञापन अभियान तैयार किए। उनके नेतृत्व में एजेंसी को 160 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले।
सविता ने केवल विज्ञापन तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि भारतीय सिनेमा में भी अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म 'खोसला का घोसला' (Khosla Ka Ghosla) का निर्माण किया, जिसने आम मध्यमवर्गीय परिवार की कहानी को बड़े पर्दे पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
यह फिल्म हिंदी की सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने में सफल रही और आज भी भारतीय सिनेमा की यादगार फिल्मों में गिनी जाती है। अब वह 'खोसला का घोसला–पार्ट 2' पर भी काम कर रही हैं।
इसके अलावा उन्होंने अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) अभिनीत फिल्म 'झुंड' (JHUND) का निर्माण किया, जो सामाजिक समानता, युवाओं के सशक्तिकरण और अवसरों पर आधारित एक महत्वपूर्ण फिल्म मानी जाती है। उनकी फिल्मों की खासियत यह रही है कि उन्होंने मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक संदेश को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
सविता राज हीरेमठ ने सामाजिक और राष्ट्रीय अभियानों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से जुड़े कई संचार अभियानों में भूमिका निभाई। उन्होंने 'इंडिया अनलिमिटेड' (India Unlimited) जैसे सांस्कृतिक अभियान की परिकल्पना की, जिसमें देशभर के कलाकारों ने शांति और एकता का संदेश दिया।
इसके अलावा उन्होंने एड्स जागरूकता, बालिका गोद लेने, दिव्यांगों के समर्थन और सामाजिक समावेशन जैसे कई विषयों पर अभियान चलाए। वर्ष 2020 में उन्होंने दृष्टिबाधित खिलाड़ियों के लिए आयोजित टी-20 क्रिकेट टूर्नामेंट के उद्घाटन, समापन समारोह और एंथम के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सराहना की।
वर्तमान में तांडव फिल्म एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड (Tandav Film Entertainment Pvt. Ltd.) की सह-संस्थापक और सीईओ के रूप में सविता राज हीरेमठ नई फिल्मों और वैश्विक स्तर की कहानियों पर काम कर रही हैं। उनका करियर इस बात का उदाहरण है कि दूरदर्शिता, रचनात्मक सोच और सामाजिक सरोकारों के साथ काम करके विज्ञापन, मीडिया और सिनेमा के क्षेत्र में लंबे समय तक प्रभावशाली पहचान बनाई जा सकती है।
वरिष्ठ पत्रकार सावन सेन ने करीब एक दशक तक रिपब्लिक टीवी के साथ काम करने के बाद संस्थान छोड़ दिया है।
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वरिष्ठ पत्रकार सावन सेन ने करीब एक दशक तक रिपब्लिक टीवी के साथ काम करने के बाद संस्थान छोड़ दिया है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, अब वह CNN-News18 में एग्जिक्यूटिव एडिटर– एंटरप्राइज एंड स्पेशल इन्वेस्टिगेशंस के पद पर नई जिम्मेदारी संभालेंगे।
नई भूमिका में शावन सेन प्राइम-टाइम शो के साथ-साथ दोपहर का एक कार्यक्रम भी एंकर करेंगे। इसके अलावा रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा पर केंद्रित एक वीकेंड शो भी तैयार किया जा रहा है।
सावन सेन वर्ष 2017 में रिपब्लिक टीवी से जुड़े थे। यहां उन्होंने डिप्टी एडिटर के रूप में विशेष परियोजनाओं (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) की जिम्मेदारी संभाली और कई प्रमुख राष्ट्रीय घटनाओं की कवरेज में अहम भूमिका निभाई।
CNN-News18 में यह सावन सेन की दूसरी पारी है। इससे पहले वह सितंबर 2012 से जुलाई 2016 तक उस समय के CNN-IBN में सीनियर कॉरेस्पोंडेंट रहे थे। इस दौरान उन्होंने अपराध, रक्षा और खुफिया एजेंसियों से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग की।
CNN-IBN से पहले सावन सेन द टाइम्स ऑफ इंडिया में सिविक रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। इसके अलावा उनका कार्यकाल द इंडियन एक्सप्रेस में भी रहा है। वर्ष 2016 में उन्होंने टाइम्स नेटवर्क में स्पेशल कॉरेस्पोंडेंट के रूप में रक्षा और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्टिंग की और इसके बाद 2017 में रिपब्लिक टीवी से जुड़ गए।
सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट की कार्यवाही के ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग के दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट की कार्यवाही के ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग के दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा कि बिना अनुमति कोर्ट की कार्यवाही के आधिकारिक वीडियो या ऑडियो को काट-छांटकर (एडिट), सोशल मीडिया पर शेयर, अपलोड, दोबारा पोस्ट या उससे कमाई (Monetisation) नहीं की जा सकेगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह आदेश मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति या संस्था कोर्ट की कार्यवाही की आधिकारिक रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल तभी कर सकेगी, जब उसे संबंधित हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल या सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल से पहले अनुमति मिल जाए।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस आदेश का खबरों की रिपोर्टिंग पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मीडिया पहले की तरह कोर्ट की कार्यवाही की खबरें प्रकाशित और प्रसारित कर सकेगा। यह रोक केवल आधिकारिक ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के इस्तेमाल और प्रसार पर लागू होगी।
यह आदेश पत्रकार हर्षिता ग्रोवर द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो क्लिप्स को एडिट कर सोशल मीडिया पर फैलाने और उनसे कमाई करने को लेकर नियम बनाने की मांग की गई थी।
याचिका में कहा गया था कि सोशल मीडिया पर अक्सर कोर्ट की कार्यवाही के छोटे-छोटे एडिटेड वीडियो शेयर किए जाते हैं, जिनमें न्यायाधीशों की टिप्पणियों को पूरे संदर्भ से अलग दिखाया जाता है। इससे लोगों तक गलत संदेश पहुंचता है और कई बार संबंधित पक्षों की छवि भी प्रभावित होती है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाई कोर्ट्स को भी पक्षकार बनाया और उनसे पूछा कि कोर्ट की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन किस तरह हो रहा है। कोर्ट ने हाई कोर्ट्स से यह भी रिपोर्ट मांगी कि लगातार लाइव स्ट्रीमिंग का क्या प्रभाव पड़ा है और क्या मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी निर्देश दिया कि यदि भविष्य में इस संबंध में कोई नियामक व्यवस्था बनाई जाती है, तो उसे लागू करने की जिम्मेदारी किन मंत्रालयों की होगी, इसकी जानकारी दी जाए।
इसके अलावा, कोर्ट ने Meta और X समेत प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी नोटिस जारी किया है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कोर्ट को बताया कि उनकी मांग कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग बंद करने की नहीं है। उनका कहना था कि समस्या तब पैदा होती है, जब कार्यवाही के छोटे-छोटे एडिटेड क्लिप्स सोशल मीडिया पर वायरल किए जाते हैं और वे पूरे कानूनी संदर्भ को बदल देते हैं।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि डिजिटल कंटेंट को नियंत्रित करना न्यायपालिका के सामने एक बड़ी चुनौती बन गया है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा व्यवस्था में कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग पर दोबारा विचार करने की जरूरत पड़ सकती है।
वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से अब वीडियो और ऑडियो में इस तरह बदलाव किया जा सकता है कि असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाए। ऐसे में कोर्ट की कार्यवाही के फर्जी या भ्रामक वीडियो फैलने का खतरा बढ़ गया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी कहा कि कई बार कोर्ट की टिप्पणियों को मीडिया और सोशल मीडिया पर गलत संदर्भ में पेश किया जाता है, जिससे लोगों के बीच न्यायिक कार्यवाही को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है।
फिलहाल, यह अंतरिम आदेश है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे भी सुनवाई करेगा और भविष्य में कोर्ट की कार्यवाही के ऑडियो-वीडियो के इस्तेमाल को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कॉपीराइट को लेकर चल रही भारत की सबसे चर्चित कानूनी लड़ाई में फिलहाल OpenAI को बड़ी राहत मिली है
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Samachar4media Bureau
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कॉपीराइट को लेकर चल रही भारत की सबसे चर्चित कानूनी लड़ाई में फिलहाल OpenAI को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली हाई कोर्ट ने समाचार एजेंसी ANI की उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने ChatGPT को ट्रेनिंग देने के लिए अपने प्रकाशित समाचारों के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगाने की अपील की थी।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायमूर्ति अमित बंसल ने शुक्रवार को दिए अंतरिम आदेश में कहा कि किसी बड़े भाषा मॉडल (LLM) को ट्रेन करने के लिए प्रकाशित सामग्री को स्टोर करना, पहली नजर में कॉपीराइट कानून का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि यह कॉपीराइट एक्ट की धारा 52(1)(a) के तहत 'फेयर डीलिंग' के दायरे में आता है।
कोर्ट ने यह भी माना कि ChatGPT द्वारा दिए गए जवाब ANI की मूल खबरों की हूबहू नकल नहीं हैं। अदालत के अनुसार, ANI यह साबित नहीं कर सकी कि ChatGPT ने उसकी कॉपीराइट सामग्री को याद करके या सीधे दोहराकर जवाब दिए हैं।
इसी आधार पर हाई कोर्ट ने फिलहाल OpenAI को ANI की प्रकाशित सामग्री के इस्तेमाल से रोकने से इनकार कर दिया।
अदालत ने यह भी कहा कि यदि इस स्तर पर OpenAI के खिलाफ अंतरिम रोक लगाई जाती है, तो इससे न केवल कंपनी को बल्कि व्यापक जनहित को भी नुकसान हो सकता है। कोर्ट के मुताबिक, ANI पहली नजर में अपना मामला मजबूत तरीके से साबित नहीं कर सकी और अंतरिम राहत देने के पक्ष में परिस्थितियां भी नहीं थीं।
गौरतलब है कि ANI ने वर्ष 2024 में OpenAI के खिलाफ यह मुकदमा दायर किया था। यह AI और कॉपीराइट को लेकर किसी भारतीय मीडिया संस्थान द्वारा दायर किया गया पहला बड़ा मामला है। ANI का आरोप था कि OpenAI ने उसकी प्रकाशित खबरों का बिना अनुमति इस्तेमाल कर ChatGPT को ट्रेन किया और उसका संचालन किया। एजेंसी ने अदालत से OpenAI को ऐसा करने से रोकने की मांग की थी।
ANI का कहना था कि किसी खबर का सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होना यह अधिकार नहीं देता कि उसे AI मॉडल की ट्रेनिंग के लिए कॉपी या स्टोर किया जाए।
वहीं, OpenAI ने अदालत में दलील दी कि समाचारों में मौजूद तथ्यों पर किसी का कॉपीराइट नहीं हो सकता। कंपनी ने यह भी कहा कि यदि कोई प्रकाशक नहीं चाहता कि उसकी सामग्री AI सिस्टम तक पहुंचे, तो वह अपनी वेबसाइट को OpenAI की ब्लॉकलिस्ट में शामिल करा सकता है।
नवंबर 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में कई अहम कानूनी सवाल तय किए थे। इनमें यह शामिल था कि क्या AI ट्रेनिंग के लिए सामग्री स्टोर करना कॉपीराइट का उल्लंघन है, क्या ChatGPT के जवाब कॉपीराइट का हनन करते हैं, क्या यह 'फेयर डीलिंग' के दायरे में आता है और क्या OpenAI के सर्वर अमेरिका में होने के बावजूद भारतीय अदालतों को इस मामले की सुनवाई का अधिकार है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता आदर्श रामानुजन और नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. अरुल जॉर्ज स्कारिया को एमिकस क्यूरी (अदालत के सहयोगी) भी नियुक्त किया था।
कई दौर की सुनवाई और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 27 मार्च को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को सुनाया गया यह आदेश मामले का अंतिम फैसला नहीं है, लेकिन इसे OpenAI के लिए शुरुआती दौर की बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है। साथ ही, यह मामला भारत में AI और कॉपीराइट कानून से जुड़े भविष्य के कई महत्वपूर्ण फैसलों की दिशा भी तय कर सकता है।
मुंबई में शुक्रवार, 24 जुलाई को exchange4media Group ने इंडियन डिजिटल मार्केटिंग अवॉर्ड्स (IDMA) के 17वें संस्करण का शानदार आयोजन किया।
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Samachar4media Bureau
मुंबई में शुक्रवार, 24 जुलाई को exchange4media Group ने इंडियन डिजिटल मार्केटिंग अवॉर्ड्स (IDMA) के 17वें संस्करण का शानदार आयोजन किया। इस खास समारोह में डिजिटल मार्केटिंग की दुनिया में बेहतरीन काम करने वाले ब्रांड्स और एजेंसियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में इंडस्ट्री के कई बड़े बिजनेस लीडर्स, मार्केटिंग एक्सपर्ट्स और क्रिएटिव प्रोफेशनल्स मौजूद रहे।
इस साल के अवॉर्ड्स में UltraTech और Wavemaker India सबसे बड़े विजेता बनकर उभरे। UltraTech को 'Best Digital and Social Media Advertiser of the Year' का खिताब मिला, जबकि Wavemaker India ने 'Best Digital, Social Media & Mobile Media Agency of the Year' का सम्मान अपने नाम किया।
यदि मेडल की बात करें तो UltraTech ने कुल 13 मेडल जीते। इनमें 5 गोल्ड, 4 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज शामिल हैं। वहीं, Wavemaker India ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 45 मेडल हासिल किए, जिनमें 15 गोल्ड, 21 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं।
अन्य प्रमुख विजेताओं में Mindshare India ने 24 मेडल अपने नाम किए, जिनमें 10 गोल्ड, 7 सिल्वर और 7 ब्रॉन्ज शामिल हैं। Amazon Ads ने भी 24 मेडल जीते, जिनमें 10 गोल्ड, 9 सिल्वर और 5 ब्रॉन्ज मेडल रहे। वहीं, Mondelez (Cadbury) ने 12 मेडल हासिल किए, जिनमें 5 गोल्ड, 2 सिल्वर और 5 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं।
इस साल IDMA की जूरी की कमान Marico Limited के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ सौगत गुप्ता ने संभाली। वहीं, BW बिजनेसवर्ल्ड और एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा को-चेयर रहे। जूरी में इंडस्ट्री के कई अनुभवी विशेषज्ञ और सीनियर प्रोफेशनल्स शामिल थे।
IDMA का उद्देश्य डिजिटल मार्केटिंग में उत्कृष्टता, नवाचार और रचनात्मकता को बढ़ावा देना है। यह पुरस्कार उन अभियानों को सम्मानित करता है, जिन्होंने अपने प्रभावशाली कंटेंट, नई सोच और बेहतर परिणामों के जरिए डिजिटल मीडिया में अलग पहचान बनाई है। साथ ही यह मंच ब्रांड्स और एजेंसियों के उल्लेखनीय योगदान को भी सम्मान देता है।
IDMA 2026 के सभी विजेताओं की पूरी सूची यहां देखें-
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सरकार ने राज्यसभा में बताया कि 'Television Rating Policy 2026' के तहत अब तक किसी टीवी रेटिंग एजेंसी का पंजीकरण नहीं हुआ है और नई व्यवस्था में एजेंसियों की संख्या पर कोई सीमा नहीं है।
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Samachar4media Bureau
केंद्र सरकार ने गुरुवार को राज्यसभा (Rajya Sabha) में बताया कि टेलीविजन रेटिंग पॉलिसी 2026 (Television Rating Policy, 2026) के तहत अब तक किसी भी टेलीविजन रेटिंग एजेंसी (Television Ratings Agency) का पंजीकरण नहीं हुआ है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि नई नीति के तहत टीवी ऑडियंस मापन सेवाएं देने वाली एजेंसियों की संख्या पर कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है।
सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री (Minister of State for Information and Broadcasting) डॉ. एल. मुरुगन (Dr. L. Murugan) ने राज्यसभा सांसद (Rajya Sabha MP) डॉ. जॉन ब्रिटास (Dr. John Brittas) के एक लिखित प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत में टीवी ऑडियंस मापन का कार्य करने वाली प्रत्येक संस्था को Television Rating Policy, 2026 के तहत पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
सरकार के अनुसार, नई नीति ने 2014 की टीवी रेटिंग एजेंसियों संबंधी गाइडलाइंस (TV Rating Agencies Guidelines, 2014) का स्थान लिया है। इसके तहत न्यूनतम नेटवर्थ (Net Worth) की सीमा 20 करोड़ रुपये से घटाकर 5 करोड़ रुपये कर दी गई है।
साथ ही टीवी मापन पैनल (Television Measurement Panel) को 50,000 से बढ़ाकर 80,000 मीटर्ड घरों तक विस्तारित किया गया है तथा कनेक्टेड टीवी (Connected TV) और ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध टीवी चैनलों की ऑडियंस मापने के लिए तकनीक-निरपेक्ष व्यवस्था अपनाई गई है।
नई नीति में हर तीन वर्ष में एस्टैब्लिशमेंट सर्वे (Establishment Survey), लैंडिंग पेज (Landing Page) व्यूअरशिप को रेटिंग से बाहर रखने, वार्षिक स्वतंत्र ऑडिट (Independent Audit), क्रॉस-होल्डिंग (Cross-holding) पर प्रतिबंध, बोर्ड में कम-से-कम एक-तिहाई स्वतंत्र निदेशकों (Independent Directors) की अनिवार्यता और हितों के टकराव से बचने के लिए कड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
फिलहाल ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल इंडिया (Broadcast Audience Research Council India-BARC) देश की एकमात्र टीवी ऑडियंस मापन संस्था है। नई नीति के लागू होने के बाद मौजूदा और नई एजेंसियों को संशोधित पात्रता और गवर्नेंस मानकों का पालन करना होगा।
वैश्विक मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी Paramount Skydance Corporation ने अपने शेयरधारकों के लिए तिमाही नकद डिविडेंड (Quarterly Cash Dividend) का ऐलान किया है।
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Vikas Saxena
ग्लोबल मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी Paramount Skydance Corporation ने अपने शेयरधारकों के लिए तिमाही नकद डिविडेंड (Quarterly Cash Dividend) का ऐलान किया है। कंपनी के निदेशक मंडल (Board of Directors) ने 21 जुलाई 2026 को हुई बैठक में क्लास A और क्लास B के प्रत्येक शेयर पर 0.05 डॉलर (5 सेंट) का डिविडेंड देने को मंजूरी दी।
कंपनी के मुताबिक, यह डिविडेंड 1 अक्टूबर 2026 को उन निवेशकों को दिया जाएगा, जिनका नाम 15 सितंबर 2026 तक कंपनी के रिकॉर्ड में शेयरधारक के रूप में दर्ज होगा।
डिविडेंड से जुड़ी अहम जानकारी
मीडिया और मनोरंजन की बड़ी कंपनी
Paramount Skydance Corporation दुनिया की प्रमुख मीडिया और मनोरंजन कंपनियों में शामिल है। कंपनी का कारोबार मुख्य रूप से तीन प्रमुख क्षेत्रों में फैला है- स्टूडियोज (Studios), डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (Direct-to-Consumer) और टीवी मीडिया (TV Media)।
इसके पोर्टफोलियो में Paramount Pictures, CBS, Nickelodeon, MTV और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Paramount+ जैसे लोकप्रिय ब्रैंड शामिल हैं।
कंपनी का कहना है कि तिमाही डिविडेंड की यह घोषणा शेयरधारकों को नियमित रिटर्न देने की उसकी नीति का हिस्सा है। इससे निवेशकों को उनके निवेश पर नकद लाभ मिलेगा।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (PCI) ने नई दिल्ली में चल रहे युवा प्रदर्शन की कवरेज कर रहे पत्रकारों पर हुए हमलों और हिंसा की कड़ी निंदा की है।
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Samachar4media Bureau
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (PCI) ने नई दिल्ली में चल रहे युवा प्रदर्शन की कवरेज कर रहे पत्रकारों पर हुए हमलों और हिंसा की कड़ी निंदा की है। प्रेस क्लब ने कहा है कि हाल के दिनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें प्रदर्शन स्थल के आसपास मौजूद लोगों के साथ-साथ पुलिस और सुरक्षा बलों की ओर से भी पत्रकारों के साथ हिंसा की गई।
प्रेस क्लब ने अपने बयान में कहा कि कई पत्रकारों का दावा है कि उन्होंने अपना प्रेस आईडी कार्ड दिखाने के बावजूद उन्हें नहीं बख्शा गया। क्लब के मुताबिक, ऐसी घटनाएं प्रेस की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं और पत्रकारों के लिए सुरक्षित माहौल में अपना काम करना मुश्किल बना देती हैं।
प्रेस क्लब ने विशेष रूप से 'आउटलुक मैगजीन' की उस रिपोर्ट पर चिंता जताई है, जिसमें दावा किया गया है कि उसके एक पत्रकार पर पैलेट गन जैसी दिखने वाली हथियार से फायर किया गया, जिससे उसके हाथ में गंभीर चोट आई। इसके अलावा, पैलेट जैसी चोट लगने के कम से कम तीन और मामलों की भी जानकारी सामने आई है।
क्लब ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने ऐसे हथियारों के इस्तेमाल से इनकार किया है। ऐसे में अन्य सुरक्षा एजेंसियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या उन्होंने इस तरह के हथियारों का इस्तेमाल किया था। साथ ही यह भी जवाब देना चाहिए कि आखिर एक पत्रकार इस तरह कैसे घायल हुआ।
प्रेस क्लब ने मीडिया संस्थानों से भी जिम्मेदार पत्रकारिता की अपील की है। बयान में कहा गया है कि पक्षपातपूर्ण और सनसनीखेज रिपोर्टिंग हालात को और बिगाड़ सकती है। संपादकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी रिपोर्टिंग किसी तनावपूर्ण स्थिति को और अधिक भड़काने वाली न हो। साथ ही उन्हें यह भी समझना होगा कि ऐसी रिपोर्टिंग उनके अपने फील्ड रिपोर्टरों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकती है।
बयान में यह भी कहा गया है कि जंतर-मंतर और उसके आसपास लगातार चौथे दिन मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद रहने से पत्रकारों को अपने सहयोगियों से संपर्क बनाए रखने, खबरें भेजने और समय पर काम करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने पुलिस, सुरक्षा बलों और प्रदर्शन में शामिल लोगों से अपील की है कि वे कवरेज कर रहे पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। इसके साथ ही क्लब ने सरकार से जंतर-मंतर क्षेत्र में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं जल्द बहाल करने की भी मांग की है, ताकि मीडिया अपने काम को बिना किसी बाधा के पूरा कर सके।