सरकार पर भड़के सुदर्शन न्यूज के संपादक सुरेश चव्हाण, दे डाली ये 'चेतावनी'

अपने शो में सुरेश चव्हाण ने एआईएमआईएम के टिकट पर संसद पहुंचने वाले इम्तियाज जलील का मजाक उड़ाया

Last Modified:
Tuesday, 28 May, 2019
Suresh Chauhan

लोकसभा चुनाव के दौरान पत्रकारों पर हमले की कई घटनाएँ हुईं और अब हाल ही में औरंगाबाद में राष्ट्रवादी चैनल सुदर्शन न्यूज चैनल के संवाददाता को भी निशाना बनाया गया। इस हमले को लेकर प्रशासन ने क्या कदम उठाया, यह तो नहीं पता, लेकिन चैनल के संपादक और चेयरमैन सुरेश चव्हाण ने ज़रूर अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं। चव्हाण ने एक तरह से राज्य सरकार को धमकी भी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो सुदर्शन को पता है कि उसे क्या करना है।

अपने शो में सुरेश चव्हाण ने पहले औरंगाबाद से ‘ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन’ (एआईएमआईएम) के टिकट पर संसद पहुँचने वाले इम्तियाज जलील का मजाक उड़ाया और फिर सरकार को चेतावनी दी। गौरतलब है कि जलील महाराष्ट्र से लोकसभा पहुंचने वाले पहले गैर-कांग्रेसी मुसलमान सदस्य हैं।

चव्हाण ने कहा, ‘औरंगाबाद जिसे मैं संभाजीनगर बोलता हूं, वहां से एआईएमआईएम का एक इम्तियाज जलील नाम का सांसद चुनकर आया है। ये नाम भी कैसे-कैसे होते हैं...जलील। वो जीत कर आया, जीतने के बाद उसमें इतनी मस्ती आ गई है कि सुदर्शन के औरंगाबाद के रिपोर्टर बाबूलाल की गाड़ी पर कल रात को पथराव करवाया।’

इसके बाद सुरेश चव्हाण ने राज्य सरकार से चेतावनी भरे लहजे में कहा, ‘मैं मुख्यमंत्री से कहता हूँ कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार ने कई अच्छे कानून बनाये हैं। हमारे पत्रकार पर एआईएमआईएम के गुंडों ने जो हमला किया है, उन पर तुरंत कार्रवाई कीजिये, नहीं तो एक शीशा तोड़ने का जवाब कितने शीशे तोड़कर दिया जाता है, सुदर्शन अच्छे से जानता है।’ सुरेश चव्हाण के इस अंदाज़ को जायज या नाजायज कुछ भी कहा जा सकता है, लेकिन अपने रिपोर्टर के लिए इस तरह राज्य सरकार को चेताना मामूली बात नहीं है।

सुरेश चव्हाण का विडियो आप यहां देख सकते हैं-

आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो करने के लिए यहां क्लिक कीजिए

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

यूपी में पत्रकार पर कातिलाना हमला, हालत नाजुक

उत्तर प्रदेश के शाहंजहापुर जिले से आ रही खबर के मुताबिक वहां एक अखबार के पत्रकार पर कातिलाना हमला हुआ है

by पंकज शर्मा
Published - Wednesday, 19 June, 2019
Last Modified:
Wednesday, 19 June, 2019
attack-final


उत्तर प्रदेश के शाहंजहापुर जिले से आ रही खबर के मुताबिक वहां एक अखबार के पत्रकार पर कातिलाना हमला हुआ है। मिली जानकारी के मुताबिक यूपी के बड़े अखबार अमर उजाला में कार्यरत राजेश तोमर पर कुछ गुंडों ने जानलेवा हमला किया है।

उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है। उपचार के लिए उन्हें बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया गया है कि राजेश ने साप्ताहिक बाजार से वसूली करने वाले दबंगों के खिलाफ लगातार मुहिम चलाई हुई है। 
 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

जानें, क्यों आजकल पत्रकारों से खूब मिल रही हैं बॉलिवुड एक्ट्रेस कृति सेनन?

कृति ने पत्रकारों की कार्यशैली के बारे में गहराई से जानना शुरू कर दिया है

by पंकज शर्मा
Published - Wednesday, 19 June, 2019
Last Modified:
Wednesday, 19 June, 2019
Kriti Sanon

फिल्मी सितारे रियल लाइफ में भले ही मीडियाकर्मियों पर किसी न किसी बात को लेकर भड़कते रहते हों, लेकिन रील लाइफ में पत्रकारों का किरदार निभाना उन्हें ज्यादा पसंद आ रहा है। अभिनेत्री कृति सेनन एक बार फिर से बड़े पर्दे पर पत्रकार की भूमिका में नजर आएंगी। डायरेक्टर राहुल ढोलकिया की अगली फिल्म में वह रिपोर्टर बन रही हैं। इस फिल्म का टाइटल अब तक तय नहीं हो सका है, लेकिन यह एक थ्रिलर है।

शब्बीर खान की फिल्म 'हीरोपंती' से बॉलिवुड में एंट्री करने वाली कृति सेनन अपने शानदार अभिनय के लिए जानी जाती हैं। फिल्म में अपने किरदार में जान डालने के लिए कृति ने पत्रकारों की कार्यशैली के बारे में गहराई से जानना शुरू कर दिया है। इसके लिए वह पत्रकारों से मिलकर उनके अनुभव भी जान रही हैं। इससे पहले कृति 'लुकाछुपी' में भी पत्रकार का रोल निभा चुकी हैं।

राहुल ढोलकिया की फिल्म के अलावा भी कृति सेनन एक और फिल्म में पत्रकार बन रही हैं। इस फिल्म में उनके साथ दिलजीत दोसांज भी नजर आएंगे। फिल्म का नाम ‘अर्जुन पटियाला’ है। फिल्म में कृति 'लुकाछुपी' की तरह सामान्य न्यूज कवर नहीं करेंगी, बल्कि वह क्राइम रिपोर्टर का किरदार निभाएंगी। इस बारे में उनका कहना है, ‘मैं पहली बार क्राइम जर्नलिस्ट का रोल कर रहीं हूँ, जो अपने पेशे को लेकर बहुत गंभीर है।’

आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो करने के लिए यहां क्लिक कीजिए

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

दसवीं सालगिरह को ET NOW ने यूं किया सेलिब्रेट, की ये घोषणा

अंग्रेजी बिजनेस न्यूज चैनल ‘ईटी नाउ’ ने अपनी सफलता के 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं

Last Modified:
Wednesday, 19 June, 2019
ET NOW

टाइम्स नेटवर्क के अंग्रेजी बिजनेस न्यूज चैनल ‘ईटी नाउ’ (ET NOW) के लिए यह बहुत ही खुशी का मौका है। दरअसल, इस चैनल ने अपनी सफलता के 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस मौके पर चैनल ने ‘राइज विद इंडिया’ (Rise with India) के बाद अब नए प्राइम टाइम बैंड ‘राइज विद इंडिया प्राइमटाइम’ (Rise with India Primetime) की घोषणा की है। यह प्रोग्रामिंग 24 जून से वीकडेज (सोमवार से शुक्रवार) में शाम पांच बजे से सात बजे तक शुरू होगी।

बताया जाता है कि ‘Rise with India Primetime’ के तहत शाम पांच से सात बजे के बीच दो घंटे की प्रोग्रामिंग में चैनल अपने दो लोकप्रिय शो ‘द मनी शो’ (The Money Show) और ‘स्टार्टअप सेंट्रल’ (StartUp Central) पर जोर देगा। इसके तहत ‘द मनी शो’ को वीकडेज में शाम पांच से छह बजे तक प्रसारित किया जाएगा। इसमें फाइनेंस से जुड़े पहलुओं पर फोकस होगा। इसके अलावा शाम को छह से सात बजे के बीच ‘स्टार्टअप सेंट्रल’ के तहत स्टार्टअप्स, टेक्नोलॉजी और एंटरप्रिन्योरशिप पर पूरा फोकस दिया जाएगा।

इस बारे में ‘टाइम्स नेटवर्क’ के एमडी और सीईओ एमके आनंद का कहना है, ‘हम अपनी 10वीं सालगिरह मना रहे हैं और देश के विकास की कहानी में अपने योगदान को और मजबूती देना चाहते हैं। लोगों को हम ऐसा प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना चाहते हैं, जो देश के साथ ही देशवासियों के विकास में काफी मददगार हो।’

वहीं, ‘ईटी नाउ’ के मैनेजिंग एडिटर निकुंज डालमिया का कहना है, ‘चैनल के लिए पिछले 10 साल काफी शानदार रहे हैं। इस दौरान चैनल ने देशवासियों के लिए ऐसे कई अवसर और संभावनाएं प्रदान की हैं, जो देश की ग्रोथ में काफी सहायक रही हैं। अपने प्रभावशाली कंटेंट और मजबूत एडिटोरियल टीम की बदौलत चैनल अंग्रेजी बिजनेस न्यूज कैटेगरी में अगले पड़ाव के लिए तैयार है। वर्ष 2017 में ‘Rise with India’ के बाद अब चैनल ने यह नई शुरुआत की है।’

आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो करने के लिए यहां क्लिक कीजिए

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

NDTV:  प्रणॉय-राधिका रॉय को कुछ यूं मिली राहत

पिछले हफ्ते सेबी द्वारा एनडीटीवी को दिए झटके के बाद अब समूह के लिए राहत वाली खबर आई है

by पंकज शर्मा
Published - Wednesday, 19 June, 2019
Last Modified:
Wednesday, 19 June, 2019
prannoy-roy-and-radhika-roy

पिछले हफ्ते सेबी द्वारा एनडीटीवी को दिए झटके के बाद अब समूह के लिए राहत वाली खबर आई है। Securities Appellate Tribunal (SAT) ने अपने हालिया आदेश में एनडीटीवी समूह के प्रमोटर्स प्रणॉय रॉय, राधिका रॉय और उनकी होल्डिंग कंपनी पर दो वर्ष के लिए लगे बैन को स्थगित कर दिया है। गौरतलब है कि ये प्रतिबंध पिछले हफ्ते सेबी ने लगाया था।  

बताया गया है कि सेट ने कहा कि इस तरह का प्रतिबंध न शेयरधारकों के हित में है और न ही एनडीटीवी के निदेशको के। इसलिए इस बैन पर रोक लगाई जा रही है। सेट ने अगली अपील की सुनवाई के डेट 16 सितंबर 2019 तय की है। सेट ने ये भी कहा है कि इस दौरान अपील दायर करने वाले एनडीटीवी का अपना हिस्सा बेचने की कोशिश नहीं कर सकते हैं।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

पत्रकार सुधीर बिश्नोई को मिली बड़ी जिम्मेदारी, अहम पद पर हुई नियुक्ति

राजस्थान में प्रकाशित होने वाले हिंदी समाचार पत्र ‘नमस्ते राजस्थान’ को नया प्रबंधक संपादक सुधीर बिश्नोई के रूप में मिला है

Last Modified:
Wednesday, 19 June, 2019
Sudhir

राजस्थान में प्रकाशित होने वाले हिंदी समाचार पत्र ‘नमस्ते राजस्थान’ को नया प्रबंधक संपादक सुधीर बिश्नोई के रूप में मिला है। सुधीर बिश्नोई अब नए प्रबंधक संपादक के रूप में अपना पदभार ग्रहण कर लिया है।

सुधीर बिश्नोई इससे पहले राजस्थान में चलने वाले News Tv India न्यूज़ चैनल में बतौर सीनियर एडिटर और एंकर के रूप में कार्यरत थे। सुधीर बिश्नोई पिछले 5 साल से मीडिया क्षेत्र में काम कर रहे हैं ।

जनरल व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर से जनरलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में एम. ए. करने के बाद सुधीर बिश्नोई ने 2014 में प्राइम न्यूज़ से रिपोर्टिंग से अपना करियर शुरू किया था।

सुधीर बिश्नोई अपना खुद का मीडिया मंथन (Media Manthan Sudhir Bishnoi) नाम से एक यूट्यूब चैनल भी चलाते हैं जिनमें मीडिया के क्षेत्र से जुड़ी हुई हर छोटी बड़ी खबरें प्रमुखता से दिखाई जाती हैं।

मीडिया में एंट्री करने से पहले सुधीर बिश्नोई ने हरियाणवी फिल्म इंडस्ट्री में बतौर एक्टर के काम किया है। उनकी एल्बम ‘मेरा लड्डू’, ‘बोतल पर बोतल’ जैसे रिलीज हो चुके हैं जिन्हें दर्शकों काफी पसंद किया था

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

महीना भी नहीं हुआ सांसद बने, महिला पत्रकार के साथ किया ऐसा बर्ताव

अभी लोकसभा चुनाव के नतीजों को आए महीनाभर भी नहीं बीता है, पर नए सांसद साहब अपने बुरे बर्ताव के चलते सुर्खियों का हिस्सा बन गए हैं

Last Modified:
Tuesday, 18 June, 2019
female-journalist

अभी लोकसभा चुनाव के नतीजों को आए महीनाभर भी नहीं बीता है, पर नए सांसद साहब अपने बुरे बर्ताव के चलते सुर्खियों का हिस्सा बन गए हैं। मामला ओडिशा के बीजू जनता दल के सांसद अनुभव महांती का है। सांसद महोदय एक्टर भी है। ऐसे में हीरो से वे सोशल मीडिया पर आजकर विलेन के तौर पर नजर आ रहे हैं। 


महिला पत्रकार सस्मिता ने उन पर आरोप लगाया कि उनका भाई उसे पर कमेंट और छींटाकशी कर उसे परेशान करता था इसलिए वे सांसद महोदय के पास उसकी शिकायत लेकर गई, पर सांसद ने उल्टा ये बात सुनकर उसके साथ दुर्व्यवहार किया और उसे धक्का दे दिया। महिला पत्रकार ने कहा कि 2017 में वे एक अखबार में इंटर्नशिप कर रही थीं तब झांझरीमंगला, चौधरी बाजार होते हुए जाना पड़ता था। उस समय अनुभव के भाई अनुप्रास आते-जाते समय कमेंट मारा करते थे। दो साल में कई बार इस तरह की घटना कई बार हुई, इससे परेशान होकर ही वे सांसद से मिलने गई थी। महिला पत्रकार की शिकायत पर पुलिस ने सांसद और उसके भाई के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।


वहीं सांसद का कहना है, 12 जून को समिस्ता मेरे निवास स्थान पर आई थी और मेरे साथ अभद्र भाषा में बात करने लगी। वे मेरे घर के बाहर शोर-शराबा मचाने लगी तो मैंने पुलिस को बुलाकर कहा कि इस महिला को इसके घर ले जाए। 


 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

टीवी पत्रकारों के लिए पुलिस ने बिछाया ऐसा ‘जाल’  

एक जालसाज को पत्रकार के रूप में पुलिसवाले को ब्लैकमेल करना बहुत भारी पड़ा

Last Modified:
Tuesday, 18 June, 2019
arrested

एक जालसाज को पत्रकार के रूप में पुलिसवाले को ब्लैकमेल करना बहुत भारी पड़ा। पुलिस ने आरोपी सुधीर को उसकी सही जगह यानी सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। सुधीर खुद को वरिष्ठ टीवी पत्रकार बताकर ट्रैफिक पुलिसकर्मी से दो लाख रुपए की मांग कर रहा था। पुलिस का कहना है कि आरोपी नरेला का रहने वाला है और उस गैंग का हिस्सा है जो दुकान मालिकों और पुलिसकर्मियों को किसी न किसी कारण से ब्लैकमेल करता है। सुधीर को पुलिस ने नरेला के पास से गिरफ्तार किया, जबकि उसका एक साथी भाग निकलने में कामयाब रहा। आरोपी सुधीर के बारे में पुलिस को तब पता चला जब कुछ ट्रैफिक पुलिस के जवानों ने शिकायत दर्ज कराई कि एक लोकप्रिय मीडिया हाउस का पत्रकार उन्हें ब्लैकमेल कर रहा है। 
 
सुधीर खुद को वरिष्ठ पत्रकार बताता था और पुलिसकर्मियों को धमकी देता था कि यदि उन्होंने पैसे नहीं दिए थे वो उनके गलत कार्यों के विडियो अपने चैनल पर वायरल कर देगा। इसी तरह की शिकायतें पुलिस को कुछ दुकान मालिकों से भी मिली थीं। पीड़ितों की तरफ से पुलिस को बताया गया था कि पत्रकारों का एक समूह उन्हें ब्लैकमेल कर रहा है। इन शिकायतों के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी थी, लेकिन उसे सफलता तब मिली जब मंगोलपुरी सर्किल में तैनात कांस्टेबल ने 2 लाख रुपए मांगे जाने की शिकायत दर्ज कराई। अब चूंकि मामले में पत्रकारों का नाम लिया जा रहा था, इसलिए पुलिस ने बड़ी सूझबूझ से काम लिया। 

शिकायतकर्ता को आरोपियों की बताई जगह पर भेजा गया और पुलिसकर्मी भी वहां घात लगाकर बैठ गए। जैसे ही बाइक सवार दो आरोपी वहां पहुंचे, पुलिसकर्मियों ने उन्हें घेर लिया। जब आरोपियों से प्रेस कार्ड दिखाने को कहा गया, तो वो घबरा गए। इस बीच मौका पाकर एक आरोपी भाग निकला, जबकि सुधीर पुलिस के हत्थे चढ़ गया।    

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

महिला पत्रकार का दर्द: किसी पुरुष संपादक ने नहीं स्वीकारी गर्भपात से जुड़ी स्टोरी

गर्भपात जैसे संवेदनशील और गंभीर मामलों पर मीडिया और खासकर पुरुष संपादकों का क्या रुख रहता है

Last Modified:
Tuesday, 18 June, 2019

गर्भपात जैसे संवेदनशील और गंभीर मामलों पर मीडिया और खासकर पुरुष संपादकों का क्या रुख रहता है, यह अमेरिकी पत्रकार ने अपने एक लेख में रेखांकित किया है। कोलंबिया जर्नलिज्म रिव्यु नामक वेबसाइट पर प्रकाशित इस लेख में मेगन विंटर ने अपने अनुभवों को साझा किया है। गौरतलब है कि अमेरिका के अलबामा में पिछले महीने गर्भपात पर प्रतिबंध को लेकर बिल पारित किया गया है। इसी तरह लुइसियाना, मिसिसिपी, ओहियो और जॉर्जिया भी इस राह पर चल निकले हैं। मिसौरी भी जल्द ही देश का पहला ऐसा राज्य बन सकता है, जहां गर्भपात की सुविधा प्रदान नहीं की जाएगी। इन ख़बरों के बीच मेगन विंटर उस दौर से लोगों को रूबरू करा रही हैं, जब उनकी एक के बाद एक गर्भपात से जुड़ी कई स्टोरियों को किसी भी मीडिया हाउस ने जगह नहीं दी थी। लिहाजा मेगन का मानना है कि जब तक इस मुद्दे की गंभीरता को नहीं समझा जाएगा, तब तक स्थिति बदलने वाली नहीं है।


अपने लेख में मेगन ने लिखा है ‘2016 में मैंने मिसौरी राज्य की राजधानी जेफर्सन सिटी की यात्रा की। मैं उस वक़्त एक फ्रीलांस पत्रकार के रूप में कई राज्यों में घूमकर गर्भपात-विरोधी आंदोलन पर रिपोर्टिंग कर रही थी, और मैंने मिसौरी को केस स्टडी के रूप में चुना। जब मैंने इस विषय में गहराई से उतरना शुरू किया, तो आभास हुआ कि मैं जितना समझ रही थी स्थिति उससे ज्यादा भयावह है। मिसौरी में जो कुछ हो रहा था, उसका राष्ट्रीय स्तर पर दूरगामी प्रभाव पड़ने वाला था। इसलिए मैंने तुरंत इस पर काम शुरू किया, लेकिन उस मीडिया हाउस की तलाश बेहद मुश्किल साबित हुई जो गर्भपात से जुड़ी मेरी स्टोरी को जगह देने का साहस दिखा सके। 

कई महीनों की मशक्कत के बाद रोलिंग स्टोन, बज़फीड, द न्यू रिपब्लिक, हार्पर, हैफिंगटन पोस्ट हाइलाइन और अटलांटिक के संपादकों ने या तो मेरे स्टोरी आईडिया को सिरे से खारिज कर दिया या प्रारंभिक उत्तरों के बाद मुझे जवाब देने में विफल रहे। मेरे लिए चौंकाने वाली बात तो यह रही कि उन संपादकों में से कुछ तो महिलाएं थीं और और हफ़पोस्ट के संपादक को छोड़कर सभी पुरुष चीफ एडिटर के अधीन कार्यरत थीं। मैंने लगातार कई महीनों तक सभी प्रमुख संपादकों को यहाँ की स्थिति से अवगत कराया, मगर किसी ने मेरी स्टोरी को गंभीरता से नहीं लिया, जैसे उनके लिए यह कोई मुद्दा ही नहीं था। प्रजनन-स्वास्थ्य पर मेरी पांच सालों की रिपोर्टिंग में किसी भी पुरुष संपादक ने गर्भपात से जुड़ी मेरी स्टोरी को स्वीकार नहीं किया। मीडिया का या रुख दर्शाता है कि महिलाओं के हित की बात करना और उसके लिए खड़े रहना दोनों अलग-अलग बातें हैं’।

मेगन के मुताबिक, उन्होंने अब तक केवल एक पुरुष संपादक के लिए महिलाओं की स्वास्थ्य देखभाल विषय पर लिखा है, वो भी इसलिए कि उक्त संपादक की पत्नी के साथ मेगन ने काम किया था और उन्होंने ही मेगन का नाम अपने पति को सुझाया था। हालांकि, मेगन मानती हैं कि भले ही महिला संपादकों ने गर्भपात से संबंधित मेरी स्टोरियों को स्वीकार न किया हो, लेकिन उन्होंने मेरे काम की सराहना की, अपने सहकर्मियों से मेरी अन्य ख़बरों के लिए ज्यादा पैसे देने की सिफारिश की। मेगन की नज़र में पुरुष संपादकों का पूरा ध्यान राजनीतिक मुद्दों पर रहता है और इस वजह से महिलाओं से जुड़े मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। 

मेगन के अनुसार, 2012 में, द कट के संपादक ने मुझे गुमनाम रूप से महिलाओं से उनके गर्भपात के विषय में सवाल जवाब करने का मौका दिया, जो न्यूयॉर्क मैगज़ीन की कवर स्टोरी बन गई। कॉस्मोपॉलिटन के लिए मेरे द्वारा गर्भपात विरोधी आंदोलन पर लिखा गया एक फीचर 2016 के नेशनल मैगज़ीन अवार्ड के लिए नामांकित किया गया था। मेगन का कहना है कि सियासी ख़बरों के चलते गर्भपात जैसे विषयों को नज़रंदाज़ करना पूरी तरह गलत है। अब मीडिया संस्थानों को यह फैसला लेना होगा कि क्या महिलाओं की हित की बातें सिर्फ बातों तक ही सीमित हैं।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

पत्रकार बोला, पहले मंत्री ने मारा थप्पड़ फिर दी धमकी

देश में तो लगातार पत्रकारों की शोषण की खबरें सामने आ ही रही थी

Last Modified:
Tuesday, 18 June, 2019
slap


देश में तो लगातार पत्रकारों की शोषण की खबरें सामने आ ही रही थी, अब पाकिस्तान से भी ऐसी ही एक खबर सामने आई है।  मामला पाकिस्तान के एक टीवी पत्रकार और वहां के विज्ञान-प्रोद्योगिकी मंत्री के बीच का है। टीवी चैनल बोल न्यूज के पत्रकार समी इब्राहिम ने मंत्री चौधरी इमरान खान पर आरोप लगाते हुए कहा कि फैसलाबाद में एक शादी समारोह के दौरान उन्हें मंत्री ने सिर्फ थप्पड़ जड़ दिया बल्कि उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी।

इन आरोपों पर मंत्री ने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए था, पर ये दुर्भाग्यपूर्ण घटना है।  पत्रकार मुझसे बदतमीजी कर रहा था और उसने मुझे ‘भारतीय जासूस’ भी कहा। 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

सरकार द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्तियों को लेकर लिया गया ये फैसला

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अब जारी होने वाली सरकारी प्रेस विज्ञप्तियों को लेकर एक बड़ा निर्णय लिया है

Last Modified:
Tuesday, 18 June, 2019
Press

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अब जारी होने वाली सरकारी प्रेस विज्ञप्तियों को लेकर एक बड़ा निर्णय लिया है। यूपी के सूचना विभाग को आदेश दिया गया है कि वे अब प्रदेश सरकार द्वारा जारी होने वाली प्रेस रिलीज को संस्कृत भाषा में भी जारी करेगा। अभी तक प्रेस रिलीज अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू भाषा में ही जारी की जाती थी।  

योगी के आदेश को अमली जामा पहनाते हुए इसकी शुरुआत भी सोमवार से कर दी गई है। सूचना विभाग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीति आयोग के साथ हुई बैठक का प्रेस नोट संस्कृत भाषा में जारी किया। सूचना विभाग के निदेशक शिशिर ने बताया कि इससे संस्कृत भाषा को बढ़ावा मिलेगा और संस्कृत के छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन भी होगा।
 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए