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पुलिस की मीडिया ब्रीफिंग पर पॉलिसी बनाने को SC का आदेश, राज्यों को तीन महीने का समय
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे पुलिस द्वारा मीडिया को दी जाने वाली जानकारी को लेकर एक साफ और तय नीति बनाएं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे पुलिस द्वारा मीडिया को दी जाने वाली जानकारी को लेकर एक साफ और तय नीति (पॉलिसी) बनाएं। यह नीति सुप्रीम कोर्ट के एमीकस क्यूरी (न्याय मित्र) और वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन द्वारा तैयार किए गए एक विशेष मैनुअल के आधार पर बनाई जाएगी।
यह आदेश जस्टिस एम.एम. सुंदरेश की अगुवाई वाली बेंच ने दिया है। यह मामला पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) की याचिकाओं से जुड़ा है। इसी संगठन की याचिका पर साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस एनकाउंटर और कथित फर्जी मुठभेड़ों को लेकर 16 जरूरी दिशानिर्देश तय किए थे।
शुरुआत में कोर्ट ने गृह मंत्रालय को पुलिस की मीडिया ब्रीफिंग से जुड़ा मैनुअल बनाने की जिम्मेदारी दी थी, लेकिन बाद में यह काम एमीकस क्यूरी गोपाल शंकरनारायणन को सौंपा गया। उन्होंने केंद्र सरकार की राय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जा रही प्रक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए ‘पुलिस मीडिया ब्रीफिंग मैनुअल’ तैयार किया।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि बार-बार मौका देने के बावजूद राज्य सरकारों ने इस प्रक्रिया में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई। कोर्ट ने साफ कहा कि वह अब इस मामले को और लंबित नहीं रखना चाहता।
कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे एमीकस क्यूरी द्वारा तैयार किए गए मैनुअल को ध्यान में रखते हुए तीन महीने के भीतर पुलिस की मीडिया ब्रीफिंग को लेकर अपनी नीति तय करें। यह आदेश 15 जनवरी को दिया गया था, जिसे 21 जनवरी 2026 को सार्वजनिक किया गया।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अपने रजिस्ट्रार को निर्देश दिया है कि इस मैनुअल को दो हफ्ते के भीतर सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया जाए।
मैनुअल में कहा गया है कि पुलिस को जनता तक समय पर और सही जानकारी देना जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही पीड़ितों, गवाहों और आरोपियों की गरिमा, निजता और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही अहम है।
मैनुअल के मुताबिक, पुलिस की मीडिया से बातचीत का मकसद नुकसान से बचाव करना, अफवाहों को रोकना, लोगों का सहयोग लेना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना होना चाहिए। खासकर सोशल मीडिया के इस दौर में पुलिस को सिर्फ सही, पुख्ता और जरूरी जानकारी ही साझा करनी चाहिए, क्योंकि गलत सूचना से कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा रहता है।
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