दक्षिण भारतीय सिनेमा की कहानियां अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं हैं। तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ भाषा की फिल्मों और सीरीज को दुनिया के अलग-अलग देशों में भी दर्शक मिल रहे हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दक्षिण भारतीय सिनेमा की कहानियां अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं हैं। तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ भाषा की फिल्मों और सीरीज को दुनिया के अलग-अलग देशों में भी दर्शक मिल रहे हैं। Netflix India की कंटेंट वाइस प्रेसिडेंट मोनिका शेरगिल ने CII Big Picture Summit 2026 में बताया कि इस साल दक्षिण भारतीय कंटेंट ने Netflix की टॉप-10 सूची में 60 देशों में जगह बनाई है। पिछले साल यह संख्या 20 से भी कम थी। यह बदलाव दिखाता है कि क्षेत्रीय भाषाओं की कहानियां अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना रही हैं।
‘Into the Southverse: Dissecting the South Indian Content Boom’ नाम के इस सत्र में फिल्मकारों और कलाकारों ने चर्चा की कि दक्षिण भारतीय कहानियों की लोकप्रियता क्यों बढ़ रही है और वे भाषा व भौगोलिक सीमाओं को पार कर दुनिया भर के दर्शकों तक कैसे पहुंच रही हैं। रेडियो प्रेजेंटर ऋषिकेश कन्नन ने इस चर्चा का संचालन किया। इसमें निर्माता सौंदर्या रजनीकांत, तमिल अभिनेता और फिल्मकार एलन, अभिनेता अर्जुन दास और अभिनेत्री प्रियंका मोहन शामिल हुईं। प्रियंका मोहन कोरिया पर्यटन की ब्रांड एंबेसडर भी हैं।
यह चर्चा ऐसे समय हुई, जब Netflix भारत में अपने 10 साल पूरे कर रहा है। कंपनी ने जनवरी 2016 में भारत में अपनी सेवाएं शुरू की थीं। Netflix में पिछले सात साल से काम कर रहीं मोनिका शेरगिल ने बताया कि इन वर्षों में कंपनी के काम करने के तरीके में काफी बदलाव आया है। शुरुआत में कंपनी भारतीय दर्शकों के लिए अंतरराष्ट्रीय कंटेंट लाने पर ध्यान दे रही थी, लेकिन अब वह स्थानीय रचनाकारों के साथ मिलकर भारतीय कहानियों को दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचाने पर काम कर रही है।
भारत में शुरुआत से लेकर स्थानीय कहानियों तक का सफर
जब Netflix ने भारत में कदम रखा था, तब उसकी शुरुआती ओरिजिनल फिल्मों और सीरीज को अमेरिका स्थित कार्यालय के जरिए तैयार किया जाता था। उस समय भारत में कंपनी का कोई स्थानीय कार्यालय नहीं था। धीरे-धीरे Netflix ने भारतीय दर्शकों की पसंद को समझना शुरू किया। शुरुआती दो से तीन साल तक कंपनी ने अलग-अलग तरह के कंटेंट के साथ प्रयोग किए। इसके बाद उसने दर्शकों के सामने ज्यादा विविधता वाली कहानियां पेश करने की दिशा में काम किया।
शेरगिल के मुताबिक, अब कंपनी का मकसद सिर्फ ऐसी कहानियां दिखाना नहीं है, जिन्हें दर्शक पहले से पसंद करते हैं। वह ऐसी कहानियां भी सामने लाना चाहती है, जिन्हें देखकर दर्शकों को महसूस हो कि वे भी इस तरह का कंटेंट देखना चाहते थे, लेकिन उन्हें इसका पहले अंदाजा नहीं था।
दक्षिण भारतीय कंटेंट के लिए इस बदलाव ने नए मौके खोले हैं। पहले कई दशकों तक दक्षिण भारतीय फिल्मों की कहानियों को दूसरी भाषाओं में दोबारा बनाया जाता रहा। लेकिन अब स्थिति बदल रही है। तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ की मूल कहानियां हिंदी समेत भारत की दूसरी भाषाओं के दर्शकों और विदेशों में रहने वाले लोगों तक अपनी अलग पहचान के साथ पहुंच रही हैं।
शेरगिल ने कहा कि दक्षिण भारत के फिल्मकार लंबे समय से अलग-अलग तरह की और अपनी खास पहचान रखने वाली कहानियां बना रहे हैं। हालांकि, पहले इन कहानियों को ज्यादा दर्शकों तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती थी। स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने इस कमी को दूर करने में मदद की है। अब ऐसे दर्शक भी इन कहानियों को देख सकते हैं, जिन्हें पहले इनके बारे में पता नहीं था।
‘मेड इन कोरिया’ ने दुनिया भर में बनाई पहचान
इस चर्चा में Netflix की तमिल फिल्म ‘Made in Korea’ का उदाहरण दिया गया। प्रियंका मोहन की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म की कहानी तमिलनाडु के एक गांव की युवती के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका सफर उसे दक्षिण कोरिया के सियोल शहर तक ले जाता है। फिल्म में स्थानीय परिवेश के साथ दो अलग-अलग संस्कृतियों के बीच जुड़ाव दिखाया गया है।
शेरगिल ने बताया कि फिल्म का विचार देखने में काफी सरल था, लेकिन यह Netflix के लिए बड़ी सफलता साबित हुई। जब इस परियोजना पर चर्चा हो रही थी, तब कुछ सहयोगियों ने सवाल उठाया था कि क्या भारत की कहानी किसी दूसरी संस्कृति से जुड़े परिवेश में भी दर्शकों को पसंद आएगी। भाषा और सांस्कृतिक अंतर को देखते हुए इस पर संदेह जताया गया था।
इसके बावजूद Netflix की दक्षिण भारतीय टीम ने इस विचार के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया। शेरगिल के अनुसार, फिल्म बाद में Netflix की दुनिया भर की गैर-अंग्रेजी कंटेंट की टॉप-10 सूची में पहले स्थान पर पहुंच गई। साथ ही, इसने 53 देशों की टॉप-10 सूची में भी जगह बनाई।
इस सफलता से प्रियंका मोहन को भी व्यापक पहचान मिली। शेरगिल ने बताया कि दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान आयोजित राजकीय रात्रिभोज में प्रियंका मोहन को आमंत्रित किया गया था। उन्हें कोरिया पर्यटन की मानद एंबेसडर भी बनाया गया।
Netflix के लिए यह फिल्म इस बात का उदाहरण बनी कि किसी खास जगह और संस्कृति से जुड़ी कहानी भी अपने घरेलू बाजार से बाहर बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंच सकती है। फिल्म की सफलता के लिए उसकी तमिल पहचान को हटाने की जरूरत नहीं पड़ी। इसके बजाय, तमिलनाडु से सियोल तक का सफर ही अलग-अलग संस्कृतियों के दर्शकों को कहानी से जोड़ने का जरिया बना।
‘मिन्नल मुरली’ और ‘आरआरआर’ का भी दिया उदाहरण
शेरगिल ने दक्षिण भारतीय सिनेमा की अंतरराष्ट्रीय पहुंच समझाने के लिए मलयालम फिल्म ‘Minnal Murali’ का भी जिक्र किया। सुपरहीरो पर आधारित इस फिल्म को भारत के बाहर भी ध्यान मिला था। यहां तक कि अभिनेता टॉम हॉलैंड ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए इस किरदार में दिलचस्पी दिखाई थी।
उन्होंने तेलुगु फिल्म ‘RRR’ का भी उल्लेख किया। इस फिल्म को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान ने तेलुगु सिनेमा और उससे जुड़े कलाकारों को दुनिया भर में होने वाली चर्चाओं में जगह दिलाने में मदद की।
शेरगिल ने यह भी कहा कि दक्षिण भारतीय सिनेमा को एक जैसी कहानियां बनाने वाले उद्योग के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इस क्षेत्र की हर फिल्म इंडस्ट्री की अपनी कहानी कहने की शैली और दर्शकों की पसंद है।
उनके मुताबिक, मलयालम सिनेमा की शैली तमिल सिनेमा से अलग है। तेलुगु फिल्मों में अक्सर बड़े पैमाने पर फिल्म निर्माण के साथ एक्शन या कॉमेडी पर जोर दिया जाता है। वहीं, तमिल सिनेमा में कई बार ऐसे विचारों पर आधारित कहानियां देखने को मिलती हैं, जिनका आधार अपने आप में खास और नया होता है।
इस तरह की विविधता और लगातार बन रहे नए कंटेंट की वजह से स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के पास दुनिया भर के दर्शकों को दिखाने के लिए कई तरह की कहानियां मौजूद हैं।
सबटाइटल और डबिंग से भाषा की बाधा हो रही कम
क्षेत्रीय कहानियों के लिए भाषा हमेशा एक अहम पहचान रही है, लेकिन अब यह दर्शकों तक पहुंचने में पहले जैसी बड़ी बाधा नहीं रह गई है। शेरगिल ने बताया कि Netflix पर होने वाली कुल व्यूइंग का 70 प्रतिशत हिस्सा सबटाइटल और डबिंग के जरिए देखा जाता है।
सबटाइटल के जरिए दर्शक अपनी भाषा में लिखे संवाद पढ़ सकते हैं, जबकि डबिंग में फिल्म या सीरीज के संवाद दूसरी भाषा में सुनाई देते हैं। इससे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की कहानियां देखना आसान हो जाता है, भले ही दर्शक मूल भाषा न समझते हों।
सत्र में पेश किया गया यह आंकड़ा बताता है कि दर्शक अब अपनी भाषा और सांस्कृतिक दायरे से बाहर का कंटेंट देखने के लिए भी तैयार हैं। इससे क्षेत्रीय फिल्मकारों को उन दर्शकों तक पहुंचने का मौका मिलता है, जिन्हें किसी कहानी की संस्कृति, जगह या सामाजिक परिवेश के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती।
दर्शकों की पसंद में बदलाव से फिल्मकारों को मिल रही आजादी
इस बदलाव का असर दर्शकों की पसंद पर भी पड़ रहा है। एलन ने कहा कि बीते वर्षों में अंतरराष्ट्रीय फिल्मों तक दर्शकों की पहुंच बढ़ी है। पहले इंटरनेट के जरिए और फिर स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के आने से लोगों को घर बैठे दुनिया भर के सिनेमा को देखने का मौका मिला।
इससे दर्शकों की सोच और पसंद में बदलाव आया है। अब फिल्मकारों के लिए अलग-अलग विधाओं और कहानी कहने के नए तरीकों के साथ प्रयोग करने की गुंजाइश बढ़ी है।
अपने शुरुआती करियर को याद करते हुए एलन ने बताया कि उन्होंने ‘The Silence of the Lambs’ और ‘Memories of Murder’ जैसी फिल्मों से प्रेरित एक थ्रिलर बनाने के लिए 100 से ज्यादा निर्माताओं से संपर्क किया था। लेकिन उस समय उन्हें इस परियोजना के लिए कोई तैयार नहीं हुआ।
निर्माताओं को संदेह था कि भारतीय दर्शक इस तरह की कहानी को समझ पाएंगे या पसंद करेंगे। एलन के मुताबिक, अब माहौल बदल चुका है। आज ऐसी फिल्मों और थ्रिलर कहानियों को भी दर्शक मिल रहे हैं, जिन्हें पहले व्यावसायिक रूप से जोखिम भरा माना जा सकता था।
इस बदलाव से फिल्मकारों को नए विचारों और अलग तरह की कहानियों पर काम करने की ज्यादा आजादी मिल रही है। साथ ही, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ऐसी फिल्मों को दर्शकों तक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं, जो पारंपरिक सिनेमाघरों की व्यावसायिक उम्मीदों पर पूरी तरह खरी न उतरती हों।
सौंदर्या रजनीकांत ने बताया, सीरीज बनाने का अनुभव फिल्मों से अलग
निर्माता सौंदर्या रजनीकांत ने कहा कि मनोरंजन उद्योग में अलग-अलग माध्यमों के साथ काम करने से नए अवसर सामने आ रहे हैं। वह एनीमेशन, परफॉर्मेंस कैप्चर, लाइव-एक्शन फिल्मों और अब स्ट्रीमिंग सीरीज के साथ काम कर चुकी हैं।
उन्होंने बताया कि Netflix के लिए तमिल भाषा में लंबे प्रारूप का प्रोजेक्ट बनाना फीचर फिल्म बनाने से अलग अनुभव था। इसमें लेखन, संपादन और कहानी को दर्शकों के सामने पेश करने का तरीका भी अलग रखना पड़ा।
उनकी सीरीज ‘#Love’ का निर्देशन बालाजी मोहन ने किया है। चेन्नई की पृष्ठभूमि पर बनी यह सीरीज दो ऐसे लोगों के रिश्ते की कहानी दिखाती है, जिनकी प्यार में आपसी तालमेल और एक-दूसरे से जुड़ाव को लेकर सोच अलग-अलग है। शेरगिल ने इसे युवाओं से जुड़ी, नई और ऐसी प्रेम कहानी बताया, जिससे अलग-अलग जगहों के दर्शक जुड़ सकते हैं, जबकि इसकी जड़ें तमिल परिवेश में हैं।
रजनीकांत ने कहा कि यह परियोजना लंबे प्रारूप वाले कंटेंट की दुनिया में उनके लिए एक अहम कदम रही है और वह आगे भी ऐसी और सीरीज बनाना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि तमिल दर्शक पारंपरिक रूप से फिल्मों को देखने के ज्यादा आदी रहे हैं। ऐसे में एपिसोड के रूप में कहानी पेश करना दर्शकों से लंबे समय तक जुड़ने का एक नया अवसर है।
रचनाकारों को भरोसा देना प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी
चर्चा में इस बात पर भी जोर दिया गया कि स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म को फिल्मकारों और रचनाकारों को नए प्रयोग करने का भरोसा देना चाहिए।
सौंदर्या रजनीकांत के मुताबिक, किसी भी मंच की ओर से कहानीकार को दिया जाने वाला सबसे अहम सहयोग भरोसा है। रचनाकार को यह विश्वास होना चाहिए कि उसके विचार में दम है और उसकी कहानी बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंच सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि पूरी प्रक्रिया के दौरान एक ऐसे सहयोगी का होना जरूरी है, जो परियोजना को समझे और उसके साथ खड़ा रहे। साथ ही, रचनाकारों को यह भी समझना चाहिए कि दर्शक किसी कहानी को उस नजरिए से न देखें, जिस नजरिए से उसे बनाते समय सोचा गया था।
उनकी बातों से स्ट्रीमिंग कारोबार से जुड़ा एक अहम सवाल सामने आया कि प्लेटफॉर्म रचनाकारों की अलग पहचान को बनाए रखते हुए उनका समर्थन कैसे कर सकते हैं, बिना हर परियोजना को एक ही तरह के ढांचे में ढाले।
क्षेत्रीय कहानियां जब बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचने की कोशिश करती हैं, तो फिल्मकारों के लिए यह जरूरी है कि वे अपनी कहानी की खासियत और स्थानीय पहचान को बनाए रखें। साथ ही, कहानी में ऐसा जुड़ाव भी होना चाहिए, जिससे दूसरी जगहों के दर्शक भी उससे खुद को जोड़ सकें।
क्या दक्षिण भारतीय कलाकारों को कोरियाई सितारों जैसा प्यार मिल सकता है?
इस चर्चा में यह सवाल भी उठा कि क्या दक्षिण भारतीय कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैसी लोकप्रियता मिल सकती है, जैसी कोरियाई ड्रामा के सितारों को मिलती है।
‘#Love’ में नजर आने वाले अभिनेता अर्जुन दास ने कहा कि भारतीय कलाकारों की तुलना सीधे कोरियाई ड्रामा के सितारों से करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने भारतीय संस्कृति, भावनाओं और पारिवारिक रिश्तों से जुड़ी कहानियों की ताकत पर जोर दिया।
यह सवाल भारत में कोरियाई मनोरंजन की बढ़ती लोकप्रियता और दक्षिण भारतीय कलाकारों के लिए दूसरे देशों में प्रशंसक वर्ग तैयार होने की संभावना को भी दिखाता है।
शेरगिल ने कहा कि क्षेत्रीय कंटेंट की सफलता से पता चलता है कि अगर कहानी दर्शकों से जुड़ने में सफल रहती है, तो वे अनजान जगहों और संस्कृतियों के किरदारों को भी पसंद कर सकते हैं।
यह अवसर सिर्फ प्रेम कहानियों तक सीमित नहीं है। दक्षिण भारतीय कंटेंट में थ्रिलर, एक्शन फिल्में, सुपरहीरो की कहानियां और अलग-अलग संस्कृतियों के बीच आगे बढ़ने वाले किरदारों की कहानियां भी शामिल हैं। इस विविधता से स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म को दर्शकों के सामने दक्षिण भारतीय सिनेमा पेश करने के कई रास्ते मिलते हैं। इसके लिए किसी एक भाषा या शैली पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है।
स्थानीय पहचान बनाए रखते हुए दुनिया तक पहुंचने की चुनौती
पूरी चर्चा में बार-बार यह बात सामने आई कि किसी कहानी को उसकी स्थानीय पहचान से अलग किए बिना दूसरे देशों के दर्शकों तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती है।
स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म फिल्मों और सीरीज को दुनिया भर में दिखाने और नए दर्शकों तक पहुंचाने का मौका दे सकते हैं। लेकिन अंत में कहानी का दमदार होना जरूरी है। किरदार असली लगने चाहिए, कहानी का विचार दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखने वाला होना चाहिए और उसमें कुछ ऐसा होना चाहिए, जिससे अलग-अलग जगहों के लोग भी जुड़ सकें।
Netflix भारत में अपने दूसरे दशक में प्रवेश कर रहा है। ऐसे में ‘Southverse’ पर हुई यह चर्चा दिखाती है कि क्षेत्रीय कहानियां भारत की वैश्विक मनोरंजन महत्वाकांक्षाओं का एक बड़ा हिस्सा बनती जा रही हैं।
इस साल दक्षिण भारतीय फिल्मों और सीरीज का Netflix की टॉप-10 सूची में 60 देशों तक पहुंचना इस बदलाव का संकेत है। अब आगे की चुनौती यह है कि फिल्मकार और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म इस पहुंच को कैसे बढ़ाते हैं, नए विचारों के साथ और प्रयोग कैसे करते हैं और एक सफल अंतरराष्ट्रीय कहानी के बाद ऐसी कई दूसरी कहानियों के लिए भी दुनिया भर में दर्शक कैसे तैयार करते हैं।
इप्सिता जौहरी राणे डायरेक्टएक्स से सीनियर वाइस प्रेसिडेंट-रणनीति और हेड-ब्रांड सॉल्यूशंस के तौर पर जुड़ी हैं। वह रणनीति, ब्रांड निर्माण और तकनीक के जरिए कारोबार से जुड़े बेहतर नतीजों पर काम करेंगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इप्सिता जौहरी राणे (Ipsita Johri Rane) डायरेक्टएक्स (DirectX) से सीनियर वाइस प्रेसिडेंट-रणनीति और हेड-ब्रांड सॉल्यूशंस (Senior Vice President-Strategy and Head-Brand Solutions) के तौर पर जुड़ी हैं। उन्हें मार्केटिंग, कम्युनिकेशंस, ब्रांड निर्माण और उद्यमिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
डायरेक्टएक्स में इप्सिता जौहरी राणे कंपनी की रणनीति और ब्रांड सॉल्यूशंस को मजबूत करने पर काम करेंगी। उनकी भूमिका में कंज्यूमर इनसाइट, एक्सपीरियंस और टेक्नोलॉजी को एक साथ जोड़कर ब्रांड की चुनौतियों के समाधान तैयार करने और कारोबार से जुड़े बेहतर नतीजे हासिल करने पर जोर रहेगा।
अपनी नई जिम्मेदारी को लेकर इप्सिता जौहरी राणे ने कहा कि ब्रांड्स के लिए स्थानीय बाजारों में केवल लोगों तक पहुंचना या उनकी भागीदारी बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। उन्हें यह समझना जरूरी है कि उपभोक्ताओं के व्यवहार को कौन-सी चीज प्रभावित करेगी, अवसर कहां मौजूद है और उस अवसर को प्रभावी कार्रवाई में कैसे बदला जा सकता है।
उन्होंने कहा कि डायरेक्टएक्स में उनका फोकस रणनीतिक सोच को और मजबूत करने तथा लोगों, संस्कृति और परिस्थितियों की गहरी समझ को समाधान तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल करने पर रहेगा। इसका उद्देश्य ग्राहकों को केवल किसी कैंपेन की योजना बनाने से आगे ले जाकर उनकी वास्तविक ब्रांड या कारोबारी समस्या का समाधान करने में मदद करना होगा।
अपने करियर के शुरुआती दौर में इप्सिता जौहरी राणे द वॉल्ट डिज्नी कंपनी इंडिया (The Walt Disney Company India), सोनी पिक्चर्स (Sony Pictures) और टीबीडब्ल्यूए इंडिया (TBWA India) समेत कई प्रमुख कंपनियों के साथ भी काम कर चुकी हैं।
महादेव ऑनलाइन बेटिंग मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि Ebix Inc. के अमेरिका स्थित मुख्यालय को 1.26 करोड़ डॉलर (12.6 मिलियन डॉलर) के कर्ज के बदले गिरवी रखा गया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
महादेव ऑनलाइन बेटिंग मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एबिक्स इंक. (Ebix Inc.) के अमेरिका स्थित मुख्यालय को 1.26 करोड़ डॉलर (12.6 मिलियन डॉलर) के कर्ज के बदले गिरवी रखा गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब एबिक्स और एराया लाइफस्पेसेज (Eraaya Lifespaces) से जुड़े कारोबारी विकास गर्ग प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हिरासत में हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के अटलांटा के पास जॉन्स क्रीक में स्थित एबिक्स का 17 एकड़ में फैला कॉरपोरेट मुख्यालय इस कर्ज के लिए गिरवी रखा गया है। मामला इसलिए अहम है, क्योंकि भारतीय जांच एजेंसी ने पहले ही एराया की एबिक्स में हिस्सेदारी समेत करीब 940.77 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क करने का आदेश जारी किया था।
प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि नैस्डैक में सूचीबद्ध अमेरिकी कंपनी एबिक्स को महादेव बेटिंग नेटवर्क से जुड़े कथित अवैध धन के जरिये खरीदा गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस धन को हवाला नेटवर्क के माध्यम से इधर-उधर भेजा गया था। एराया लाइफस्पेसेज भारत में सूचीबद्ध कंपनी है और विकास गर्ग से जुड़ी हुई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईडी ने उसकी संपत्तियां भी कुर्क की हैं।
5 जून 2026 को जारी अस्थायी कुर्की आदेश संख्या 16/2026 के तहत 940.77 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर कार्रवाई की गई थी। इसमें एबिक्स में एराया की हिस्सेदारी भी शामिल थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि एबिक्स के अधिग्रहण में इस्तेमाल किया गया पैसा स्काईएक्सचेंज (SkyExchange) से जुड़े कथित अवैध सट्टेबाजी कारोबार से आया और दुबई के हवाला नेटवर्क के जरिये आगे भेजा गया।
अमेरिका में कर्ज का समझौता कैसे हुआ?
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय एजेंसियों ने एबिक्स के प्रबंधन को लिखित निर्देश देकर कहा था कि संबंधित संपत्तियों की बिक्री, हस्तांतरण, उन पर किसी दूसरे पक्ष का अधिकार बनाने या पहले से मौजूद अधिकारों में बदलाव की अनुमति न दी जाए।
इसके बावजूद, 4 अगस्त 2026 को एबिक्स के अमेरिकी अध्यक्ष गगन सेठी ने कैलिफोर्निया की कर्ज देने वाली कंपनी वेलोसिटी कमर्शियल कैपिटल एलएलसी (Velocity Commercial Capital LLC) के साथ कर्ज सुरक्षित करने के लिए एक कानूनी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। यह तारीख विकास गर्ग की दिल्ली स्थित आवास से गिरफ्तारी के करीब तीन सप्ताह बाद की बताई गई है।
जॉर्जिया के भूमि रिकॉर्ड में यह दस्तावेज 12 अगस्त को दर्ज किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, एबिक्स ने अपने '1 एबिक्स वे' (1 Ebix Way) परिसर को कर्ज के बदले गिरवी रखा। दस्तावेज में कंपनी ने कर्जदाता को यह भरोसा भी दिया कि उसे संपत्ति गिरवी रखने का पूरा अधिकार है।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि दस्तावेज में भारत में लागू संपत्ति कुर्की से जुड़ी रोक का उल्लेख नहीं किया गया। हालांकि, इस लेन-देन और संबंधित दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
संपत्ति से होने वाली कमाई भी कर्जदाता को मिलेगी
रिपोर्ट के मुताबिक, 1.26 करोड़ डॉलर के इस कर्ज से जुड़ा समझौता 2056 तक प्रभावी रहेगा। इसके तहत इमारत से मिलने वाला किराया भी कर्जदाता को सौंप दिया गया है।
इस घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि कर्ज से मिले 1.15 करोड़ डॉलर का इस्तेमाल पहले से मौजूद कर्ज चुकाने में किया गया। यह बकाया वॉच हिल (Watch Hill) और मेलानी लेन (Melanie Lane) से जुड़ा बताया गया है। इन निवेशकों ने एबिक्स और एराया, दोनों कंपनियों में निवेश किया था।
भारतीय जांचकर्ताओं के लिए यह घटनाक्रम चिंता का विषय हो सकता है, क्योंकि संपत्ति को गिरवी रखकर कर्ज लेने से भविष्य में उससे वसूली की जा सकने वाली रकम प्रभावित हो सकती है। यदि भारतीय अदालतें आगे चलकर संपत्तियों को जब्त करने का आदेश देती हैं, तो अमेरिका स्थित मुख्यालय पर पहले से बने कर्ज और दूसरे वित्तीय अधिकार वसूली की प्रक्रिया को जटिल बना सकते हैं।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि एबिक्स का यह परिसर बिक्री के लिए रखा गया है। रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी क्रेसा (Cresa) के जरिये इसकी बिक्री की प्रक्रिया चलने की बात कही गई है। यह भी दावा है कि पास में स्थित जॉन्स क्रीक अस्पताल का संचालन करने वाली स्वास्थ्य सेवा कंपनी एमोरी हेल्थकेयर (Emory Healthcare) इस संपत्ति को खरीदने में दिलचस्पी रखती है। हालांकि, इस संभावित सौदे की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
भारतीय शेयर बाजार में जानकारी नहीं देने का आरोप
रिपोर्ट के मुताबिक, एराया लाइफस्पेसेज ने भारतीय शेयर बाजारों को अमेरिका में हुए 1.26 करोड़ डॉलर के इस गिरवी समझौते की जानकारी नहीं दी। आरोप है कि कंपनी ने भारतीय नियामकों और सार्वजनिक निवेशकों के सामने इस कर्ज का खुलासा नहीं किया, जबकि ऐसी जानकारी देना उसके लिए जरूरी हो सकता था।
इस मामले में एक और कानूनी पेच सामने आया है। अमेरिका में हुए कर्ज समझौते के अनुसार, किसी सरकारी एजेंसी की ओर से संपत्ति कुर्क करने या इसी तरह की कानूनी कार्रवाई को कर्ज चूक यानी डिफॉल्ट की स्थिति माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में वेलोसिटी कमर्शियल कैपिटल को कर्ज की पूरी रकम वापस मांगने का अधिकार मिल सकता है।
यदि ईडी अमेरिका में स्थित परिसर को कुर्क करने के अपने आदेश को लागू कराने की कोशिश करती है, तो भारतीय एजेंसी की कार्रवाई और अमेरिकी कर्जदाता के अधिकारों के बीच कानूनी विवाद खड़ा हो सकता है। इससे भारत और अमेरिका में लंबी कानूनी प्रक्रिया की आशंका पैदा हो सकती है।
विकास गर्ग, जिन्हें दिल्ली भाजपा के आर्थिक प्रकोष्ठ का पूर्व संयोजक बताया गया है, फिलहाल जमानत पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जमानत पर फैसला करते समय अदालतें इस बात पर भी विचार करती हैं कि आरोपी सबूतों को प्रभावित कर सकता है या संपत्तियों को बेचकर अथवा उनका स्वरूप बदलकर जांच और वसूली की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा सकता है।
रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि कुर्क की गई संपत्तियों पर कर्ज लेने से गर्ग की जमानत की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। हालांकि, जमानत पर अंतिम फैसला अदालत संबंधित तथ्यों और कानूनी दलीलों के आधार पर करेगी।
भारतीय ईडी का आदेश अपने आप अमेरिका के जॉर्जिया राज्य के भूमि रिकॉर्ड में किसी लेन-देन को रोक नहीं सकता। ऐसे में भारत को संपत्ति पर अपने दावे को लागू कराने के लिए पारस्परिक कानूनी सहायता संधि (Mutual Legal Assistance Treaty यानी MLAT) जैसे अंतरराष्ट्रीय कानूनी माध्यमों का सहारा लेना पड़ सकता है।
लंदन में हुई बैठकों से जुड़ा कथित नेटवर्क
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एबिक्स के अधिग्रहण की योजना के पीछे लंदन में हुई कुछ गोपनीय बैठकें थीं। इन बैठकों में दिल्ली के कारोबारी विकास गर्ग और दुबई में रहने वाले हरि शंकर तिबरेवाल के बीच बातचीत होने का आरोप लगाया गया है। तिबरेवाल को महादेव ऑनलाइन बुक नेटवर्क से जुड़ा एक प्रमुख हवाला कारोबारी बताया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, तिबरेवाल को कई बार समन भेजे जाने के बावजूद उनके पेश नहीं होने की जानकारी ईडी के रिकॉर्ड में दर्ज है। उन्हें कोलकाता में जन्मा कारोबारी बताया गया है, जिसकी भूमिका कथित सट्टेबाजी से हासिल धन को कंपनियों तक पहुंचाने में जांच के दायरे में है।
आरोप है कि लंदन में हुई रणनीतिक बैठकों के दौरान गर्ग और तिबरेवाल ने स्काईएक्सचेंज से आने वाले कथित अवैध धन का इस्तेमाल कर अमेरिका की नैस्डैक में सूचीबद्ध एक बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनी को खरीदने की योजना बनाई थी। इस योजना के जरिये सट्टेबाजी से कमाए गए धन को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय कारोबारी सौदे में लगाने का आरोप है।
स्काईएक्सचेंज और हवाला नेटवर्क का कथित कारोबार
रिपोर्ट के अनुसार, स्काईएक्सचेंज एक बड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी मंच के रूप में काम करता था। इसके जरिये छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों के लोगों से रोजाना बड़ी रकम जुटाए जाने का आरोप है।
ईडी की अभियोजन शिकायतों में स्काईएक्सचेंज को तिबरेवाल के साथ सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल से जुड़ा हुआ बताया गया है। ये दोनों महादेव ऑनलाइन बुक मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल हैं।
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक:
रिपोर्ट के मुताबिक, इन गतिविधियों को मिलाकर इस कथित नेटवर्क का सालाना कारोबार 4,000 से 5,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता था। यह रकम किसी वैध मध्यम आकार की सूचीबद्ध कंपनी के कारोबार के बराबर बताई गई है।
आरोप है कि दुबई से संचालित शेल कंपनियों, एक-दूसरे से जुड़े बैंक खातों और ऐसे वित्तीय रिकॉर्ड के जरिये धन के वास्तविक स्रोत को छिपाया गया, जिनका पता लगाना मुश्किल था। इसके बाद इस रकम को वैध कारोबारी पूंजी के रूप में दिखाकर कंपनियों में निवेश किए जाने का दावा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि धन को भारत में वापस लाने और सूचीबद्ध कंपनियों में लगाने के लिए योग्य संस्थागत निवेश (Qualified Institutional Placements यानी QIPs), विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (Foreign Portfolio Investments यानी FPIs) और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investments यानी FDIs) जैसे माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि इस तरह का निवेश गर्ग से जुड़ी कंपनियों में पहुंचाया गया।
13 रुपये के शेयर से 36.1 करोड़ डॉलर के अधिग्रहण तक का सफर
इस पूरे मामले में जस्टराइड एंटरप्राइजेज (Justride Enterprises) का नाम भी सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह कंपनी पहले एक छोटी कंपनी थी, जिसके शेयर की कीमत करीब 13 रुपये थी। बाद में इसका नाम बदलकर एराया लाइफस्पेसेज कर दिया गया।
दावा किया गया है कि 2024 में कंपनी के शेयर में असाधारण तेजी आई और अगस्त 2024 तक इसकी कीमत करीब 800 रुपये प्रति शेयर पहुंच गई। रिपोर्ट इस तेजी को एक साल में लगभग 6,000 प्रतिशत की बढ़ोतरी बताती है। आरोप है कि बाद में कंपनी का इस्तेमाल कथित अवैध धन को निवेश करने और बड़े कारोबारी सौदे को पूरा करने के लिए किया गया।
इसके बाद एराया ने अमेरिका की दिवालियापन अदालत में एबिक्स इंक. की संपत्तियों की नीलामी में 36.1 करोड़ डॉलर (361 मिलियन डॉलर) की बोली जीतने का दावा किया। एबिक्स बीमा क्षेत्र के लिए सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी रही है, जो वित्तीय संकट में फंस गई थी।
रिपोर्ट इस अधिग्रहण को कथित अवैध सट्टेबाजी से हासिल धन को बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनी के अधिग्रहण में लगाने की कोशिश के रूप में पेश करती है। इसके मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क का कथित रास्ता रायपुर से शुरू होकर दुबई के हवाला कारोबार और फिर अमेरिका के अटलांटा स्थित कॉरपोरेट मुख्यालय तक पहुंचा।
मामले में आगे क्या?
अमेरिका में एबिक्स के मुख्यालय को गिरवी रखने, उससे जुड़े कर्ज की शर्तों और संपत्ति की संभावित बिक्री को लेकर सामने आए दावों से महादेव बेटिंग मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी जटिलताएं बढ़ सकती हैं। यदि भारतीय एजेंसियों की कुर्की और अमेरिकी कर्जदाता के अधिकारों के बीच टकराव होता है, तो संपत्ति पर दावे को लेकर दोनों देशों में कानूनी कार्रवाई की जरूरत पड़ सकती है।
हालांकि, इन आरोपों और लेन-देन से जुड़े सभी दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि, संबंधित कंपनियों का पक्ष और अदालतों के अंतिम निष्कर्ष इस मामले की वास्तविक स्थिति तय करने के लिए महत्वपूर्ण होंगे। जांच में लगाए गए आरोपों को अदालत द्वारा दोष सिद्ध किए जाने के बराबर नहीं माना जा सकता।
Prime Focus Limited ने अपनी सहयोगी कंपनियों Brahma AI Holdings Limited और Brahma AI Services India Limited पर नियंत्रण छोड़ने के प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए शेयरधारकों की बैठक बुलाई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र की कंपनी Prime Focus Limited ने अपनी सहयोगी कंपनियों Brahma AI Holdings Limited और Brahma AI Services India Limited पर नियंत्रण छोड़ने के प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए शेयरधारकों की बैठक बुलाई है। कंपनी की एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EOGM) 7 नवंबर, 2026 को दोपहर 12:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी। कंपनी ने इस बैठक में शेयरधारकों की मंजूरी के लिए चार प्रमुख प्रस्ताव रखे हैं। इनमें Brahma AI पर नियंत्रण छोड़ना, संबंधित पक्षों के बीच लेनदेन और एआई प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से जुड़ा समझौता शामिल है।
कंपनी ने 16 अक्टूबर को स्टॉक एक्सचेंजों को दी जानकारी में बताया कि बैठक में शेयरधारकों से इन प्रस्तावों पर मतदान कराया जाएगा। बैठक का नोटिस कंपनी की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है।
Brahma AI में 10 करोड़ डॉलर का निवेश
Prime Focus के नोटिस के मुताबिक, निवेश से जुड़े प्रस्ताव के तहत Multiples Private Equity के दो फंड Brahma AI Holdings और Brahma AI Services India में कुल 10 करोड़ डॉलर का निवेश करेंगे। इसमें Multiples Private Equity Gift Fund IV की ओर से Brahma AI Holdings में 5.44 करोड़ डॉलर और Multiples Private Equity Fund IV की ओर से Brahma AI Services India में करीब 4.56 करोड़ डॉलर के बराबर निवेश प्रस्तावित है। यह निवेश अनिवार्य रूप से इक्विटी शेयरों में बदलने वाले प्रेफरेंस शेयरों के जरिए किया जाना है।
कंपनी ने बताया कि Multiples के नेतृत्व में होने वाली इस व्यापक फंडिंग प्रक्रिया का लक्ष्य कुल 15 करोड़ डॉलर जुटाना है। इसमें Multiples के दोनों फंडों का प्रस्तावित निवेश 10 करोड़ डॉलर है।
कंपनी को यह जानकारी भी दी गई थी कि 23 सितंबर, 2026 तक Brahma AI Holdings में निवेश के लिए दुनियाभर के निवेशकों से अतिरिक्त 15 करोड़ डॉलर से अधिक की मांग के संकेत और ऑर्डर की पुष्टि मिली थी। हालांकि, कंपनी ने साफ किया है कि ये संकेत और ऑर्डर निवेश पूरा होने के बराबर नहीं हैं। इनके लिए अंतिम आवंटन, जरूरी दस्तावेज और अन्य शर्तें पूरी होना बाकी है। अतिरिक्त निवेश की यह संभावित राशि Multiples के 10 करोड़ डॉलर के निवेश का हिस्सा नहीं है और न ही उस निवेश को पूरा करने की शर्त है।
65.67% हिस्सेदारी के बावजूद नियंत्रण नहीं रहेगा
इस प्रस्ताव का सबसे अहम पहलू यह है कि Prime Focus की Brahma AI में आर्थिक हिस्सेदारी 50% से अधिक रहने के बावजूद उसका नियंत्रण समाप्त हो जाएगा।
कंपनी के मुताबिक, प्रस्तावित सौदा पूरा होने के बाद Prime Focus की सहयोगी कंपनी Double Negative Holdings Limited के जरिए Brahma AI Holdings में उसकी हिस्सेदारी 65.67% रहेगी। Brahma AI Services India में भी उसकी अप्रत्यक्ष आर्थिक हिस्सेदारी 65.67% बनी रहेगी।
हालांकि, Brahma AI Holdings में उसके वोटिंग अधिकार मौजूदा 89.27% से घटकर 24.99% रह जाएंगे। इसके अलावा, Prime Focus को Brahma AI Holdings के छह सदस्यों वाले बोर्ड में केवल एक निदेशक नियुक्त करने का अधिकार होगा, बशर्ते उसकी संबंधित Class C शेयरों में हिस्सेदारी 50% से अधिक बनी रहे।
इसके विपरीत, Brahma AI Holdings के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Prabhu Narasimhan को छह में से तीन निदेशक नियुक्त करने का अधिकार होगा।
इस बदलाव के बाद Brahma AI Holdings और Brahma AI Services India, कंपनी की सहायक कंपनियां नहीं रहेंगी। इसके बजाय वे Prime Focus की एसोसिएट कंपनियां बन जाएंगी। यानी Prime Focus की आर्थिक हिस्सेदारी तो बनी रहेगी, लेकिन कंपनी उन पर पहले की तरह नियंत्रण नहीं रख सकेगी। इस प्रस्ताव के लिए शेयरधारकों की विशेष मंजूरी जरूरी है। इसलिए कंपनी ने इसे विशेष प्रस्ताव के रूप में बैठक में रखा है।
DNEG और Brahma AI के बीच क्षतिपूर्ति समझौता
बैठक में दूसरा प्रस्ताव DNEG S.à.r.l. और Brahma AI Holdings के बीच प्रस्तावित संबंधित पक्ष लेनदेन से जुड़ा है। इस व्यवस्था के तहत DNEG S.à.r.l. एक फ्रेमवर्क समझौते में शामिल होगी। इसमें Brahma AI समूह से जुड़ी कुछ देनदारियों के लिए क्षतिपूर्ति की जिम्मेदारी लेने का प्रावधान है। समझौते के मुताबिक, तय शर्तों और सीमाओं के अधीन उन देनदारियों के लिए भुगतान करना पड़ सकता है, जिनकी जानकारी समझौते की तारीख से सात साल के भीतर DNEG S.à.r.l. को दी जाएगी।
कंपनी ने बताया कि इस व्यवस्था के तहत संभावित भुगतान की कुल राशि अभी तय नहीं की जा सकती। यह इस बात पर निर्भर करेगी कि किस तरह की देनदारी सामने आती है और उसके लिए भुगतान की जिम्मेदारी बनती है या नहीं।
इस प्रस्ताव को ऑडिट कमेटी की मंजूरी मिल चुकी है और निदेशक मंडल ने भी इसे शेयरधारकों के सामने रखने की सिफारिश की है। इस पर साधारण प्रस्ताव के जरिए मंजूरी मांगी जाएगी।
DNEG Holdings के लिए भी मंजूरी जरूरी
तीसरा प्रस्ताव Double Negative Holdings Limited और Brahma AI Holdings के बीच शेयरधारक समझौते से संबंधित है। इस समझौते के तहत Double Negative Holdings सहित संबंधित शेयरधारकों को कुछ कर संबंधी देनदारियों के लिए क्षतिपूर्ति की जिम्मेदारी लेनी होगी। इसमें लागू कानून के तहत रोके जाने, काटे जाने या भुगतान किए जाने वाले कर के साथ उससे जुड़े ब्याज, जुर्माने और लागत भी शामिल हो सकते हैं।
यह जिम्मेदारी समझौते में तय शर्तों के अनुसार लागू होगी। कंपनी ने बताया कि संभावित भुगतान की राशि अभी निर्धारित नहीं की जा सकती, क्योंकि यह भविष्य में सामने आने वाली कर संबंधी देनदारियों पर निर्भर करेगी।
इस प्रस्ताव को भी शेयरधारकों की साधारण मंजूरी के लिए रखा गया है। संबंधित पक्षों को नियमों के अनुसार इस तरह के महत्वपूर्ण संबंधित पक्ष लेनदेन से जुड़े प्रस्ताव पर मतदान करने की अनुमति नहीं होगी।
Brahma AI प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल का प्रस्ताव
चौथा प्रस्ताव DNEG S.à.r.l. और Brahma AI Holdings के बीच एआई प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से जुड़े लाइसेंस समझौते का है।
इस व्यवस्था के तहत DNEG S.à.r.l. को Brahma AI प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने का अधिकार मिलेगा और इसके बदले Brahma AI Holdings को सालाना शुल्क दिया जाएगा। कंपनी के नोटिस के मुताबिक, यह शुल्क तीन में से सबसे अधिक राशि के आधार पर तय होगा। इसमें साल के दौरान औसत उपयोगकर्ता सीटों की संख्या को 3,500 डॉलर से गुणा करने पर मिलने वाली राशि, 2.8 करोड़ डॉलर या DNEG S.à.r.l. के सालाना सकल राजस्व का 4% शामिल है। सकल राजस्व की गणना में उसी साल की फिजिकल प्रोडक्शन और निवेश से होने वाली आय शामिल नहीं होगी।
यह व्यवस्था कुल 10 साल की अवधि के लिए प्रस्तावित है। कंपनी ने इस लेनदेन को संबंधित पक्ष लेनदेन बताया है और इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी मांगी है।
दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि Brahma AI को अलग रखने के बाद DNEG समूह के लिए यह व्यवस्था लागत के लिहाज से तटस्थ होगी।
31 अक्टूबर तक के शेयरधारक कर सकेंगे मतदान
Prime Focus ने बताया कि 31 अक्टूबर, 2026 कट-ऑफ तारीख होगी। इस तारीख तक कंपनी के शेयर रखने वाले पात्र शेयरधारक मतदान कर सकेंगे। दूरस्थ ई-वोटिंग की सुविधा 3 नवंबर को सुबह 9 बजे से 6 नवंबर को शाम 5 बजे तक उपलब्ध रहेगी।
शेयरधारक 7 नवंबर को होने वाली बैठक के दौरान भी मतदान कर सकेंगे, लेकिन जो शेयरधारक पहले ही दूरस्थ ई-वोटिंग के जरिए अपना वोट दे चुके होंगे, वे दोबारा मतदान नहीं कर पाएंगे।
कंपनी ने ई-वोटिंग और बैठक में ऑनलाइन भाग लेने की सुविधा के लिए Central Depository Services (India) Limited (CDSL) की सेवाएं ली हैं। बैठक में शामिल होने वाले शेयरधारकों की उपस्थिति को कोरम की गणना में शामिल किया जाएगा।
कंपनी ने शेयरधारकों से यह भी कहा है कि यदि वे बैठक में सवाल पूछना या अपनी बात रखना चाहते हैं, तो उन्हें बैठक से कम से कम 10 दिन पहले कंपनी के ईमेल ir.india@primefocus.com पर अनुरोध भेजना होगा। इसके लिए नाम, डीमैट खाता या फोलियो नंबर, ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर देना होगा।
ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) में सुरुचि पोपली को सीनियर डायरेक्टर-फैशन की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।इससे पहले सुरुचि पोपली फ्लिपकार्ट में डायरेक्टर-फैशन के पद पर कार्यरत थीं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) में सुरुचि पोपली को सीनियर डायरेक्टर-फैशन की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने लिंक्डइन पर पोस्ट शेयर कर इस नई भूमिका की जानकारी दी है। अक्टूबर 2026 से वह इस पद पर काम कर रही हैं।
इससे पहले सुरुचि पोपली फ्लिपकार्ट में डायरेक्टर-फैशन के पद पर कार्यरत थीं। दिसंबर 2025 में उन्होंने यह भूमिका संभाली थी और सितंबर 2026 तक इस पद पर रहीं। इस दौरान वह फैशन की सभी कैटेगरी में रेवेन्यू, कस्टमर, ग्रोथ और मार्केटिंग से जुड़े काम देख रही थीं।
फ्लिपकार्ट में इससे पहले वह डायरेक्टर-होम एंड फर्नीचर के पद पर भी काम कर चुकी हैं। अगस्त 2024 से दिसंबर 2025 तक उन्होंने इस भूमिका में अपनी सेवाएं दीं।
फ्लिपकार्ट के साथ सुरुचि पोपली पहले भी काम कर चुकी हैं। जनवरी 2019 में उन्होंने कंपनी में सीनियर मैनेजर-I, रेफ्रिजरेटर के तौर पर काम शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने सीनियर मैनेजर-II, लार्ज अप्लायंसेज और एसोसिएट डायरेक्टर, लार्ज अप्लायंसेज जैसी भूमिकाएं निभाईं। लार्ज अप्लायंसेज कैटेगरी में उन्होंने 14 सदस्यों की टीम का नेतृत्व किया और कारोबार की ग्रोथ से जुड़े काम संभाले।
फ्लिपकार्ट के अलावा सुरुचि पोपली एमेजॉन में भी काम कर चुकी हैं। दिसंबर 2023 से अगस्त 2024 तक वह वहां कैटेगरी हेड, कलर कॉस्मेटिक्स के पद पर रहीं। इससे पहले मार्च 2022 से दिसंबर 2023 तक उन्होंने लक्जमबर्ग में प्रोडक्ट एंड मार्केटिंग लीड, ईयू ऑटोमोटिव की भूमिका निभाई।
अपने करियर के शुरुआती दौर में सुरुचि पोपली महिंद्रा ग्रुप से भी जुड़ी रही हैं। यहां उन्होंने बिजनेस प्लानिंग, इंटरनेशनल मार्केट्स, सीईओ ऑफिस और स्पेशल प्रोजेक्ट्स से जुड़ी भूमिकाओं में काम किया।
सुरुचि पोपली ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM), कोझिकोड से जनरल मैनेजमेंट, फाइनेंस और स्ट्रैटेजी में पीजीडीएम किया है। वह इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) से चार्टर्ड अकाउंटेंट भी हैं।
कंज्यूमर हेल्थकेयर, पोषण, ब्रैंड रणनीति और कारोबार में बदलाव से जुड़े कामों का अनुभव रखने वाले दीप माल्दे ने Haleon में एक्सपर्ट मार्केटिंग व ट्रांसफॉर्मेशन के हेड के पद पर नई जिम्मेदारी संभाली है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
कंज्यूमर हेल्थकेयर, पोषण, ब्रैंड रणनीति और कारोबार में बदलाव से जुड़े कामों का अनुभव रखने वाले दीप माल्दे ने Haleon में एक्सपर्ट मार्केटिंग व ट्रांसफॉर्मेशन के हेड के पद पर नई जिम्मेदारी संभाली है।
दीप माल्दे ने LinkedIn पर इस नियुक्ति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह कंपनी के प्रतिष्ठित ब्रैंड्स को आगे बढ़ाने और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य देने के Haleon के उद्देश्य को पूरा करने में योगदान देने के लिए उत्साहित हैं। कंपनी का उद्देश्य है कि लोगों को मानवीय संवेदनाओं के साथ रोजमर्रा की जिंदगी में बेहतर स्वास्थ्य मिल सके।
Haleon में शामिल होने से पहले दीप माल्दे Mega LifeSciences में बिजनेस हेड के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने जनवरी 2025 से मई 2026 तक इस जिम्मेदारी को संभाला। इस दौरान वह कारोबार के प्रदर्शन, मुनाफे और नुकसान से जुड़े नतीजों (P&L), बिक्री और मार्केटिंग टीमों के कामकाज के साथ-साथ संचालन की कार्यक्षमता बेहतर बनाने के लिए जिम्मेदार थे।
इससे पहले दीप माल्दे ने Danone India में आठ साल से ज्यादा समय तक मार्केटिंग से जुड़ी नेतृत्वकारी भूमिकाओं में काम किया। यहां उनकी आखिरी जिम्मेदारी Global Brands Portfolio में मार्केटिंग हेड की थी। इस भूमिका में वह कंपनी के वैश्विक ब्रैंड पोर्टफोलियो से जुड़े मार्केटिंग कार्यों का नेतृत्व कर रहे थे।
दीप माल्दे इससे पहले Abbott Nutrition International में भी तीन साल से ज्यादा समय तक काम कर चुके हैं। यहां वह PediaSure ब्रैंड पोर्टफोलियो से जुड़े थे। उनकी जिम्मेदारियों में ब्रैंड रणनीति तैयार करना, उपभोक्ता मार्केटिंग, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ जुड़ाव और डिजिटल माध्यमों से मार्केटिंग गतिविधियों को आगे बढ़ाना शामिल था।
दीप माल्दे का अनुभव कंज्यूमर हेल्थकेयर, पोषण, ब्रैंड निर्माण और कारोबार में बदलाव जैसे क्षेत्रों में रहा है। Haleon में उनकी नई भूमिका में एक्सपर्ट मार्केटिंग और ट्रांसफॉर्मेशन से जुड़े कामों पर ध्यान रहेगा।
अलिफिया हिरानी पब्लिसिस ग्रुप इंडिया से एसोसिएट डायरेक्टर-कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस के तौर पर जुड़ी हैं। वह साची एंड साची इंडिया, बीबीएच इंडिया और प्रोपेगेट इंडिया की कम्युनिकेशंस संभालेंगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अलिफिया हिरानी पब्लिसिस ग्रुप इंडिया (Publicis Groupe India) से एसोसिएट डायरेक्टर-कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस (Associate Director-Corporate Communications) के तौर पर जुड़ी हैं। नई भूमिका में वह साची एंड साची इंडिया (Saatchi & Saatchi India), बीबीएच इंडिया (BBH India) और प्रोपेगेट इंडिया (Propagate India) के लिए कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस की जिम्मेदारी संभालेंगी।
इससे पहले अलिफिया हिरानी ने डेंट्सू इंडिया (Dentsu India) के साथ करीब सात साल तक काम किया। वहां उनकी आखिरी जिम्मेदारी सीनियर मैनेजर-कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस (Senior Manager-Corporate Communications) की थी।
भारत की मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को 2030 के दशक की शुरुआत तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लिए हर साल करीब 15% की दर से बढ़ना होगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत की मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को 2030 के दशक की शुरुआत तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लिए हर साल करीब 15% की दर से बढ़ना होगा। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की एक नई रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर इस क्षेत्र की मौजूदा 9% सालाना विकास दर बनी रहती है, तो 2033 तक इसका आकार करीब 64 अरब डॉलर ही पहुंच पाएगा। ऐसे में 100 अरब डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए 36 अरब डॉलर का अंतर रह जाएगा।
CII ने यह रिपोर्ट ‘द न्यू इकोनॉमिक्स ऑफ मीडिया एंड एंटरटेनमेंट’ (The New Economics of Media & Entertainment) शीर्षक से जारी की है। इसे मुंबई में गुरुवार को आयोजित CII बिग पिक्चर समिट 2026 के दौरान जारी किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए टीवी प्रसारण कारोबार को बाजार के हिसाब से चलाने, पाइरेसी यानी कंटेंट की गैरकानूनी नकल और डिस्ट्रीब्यूशन के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने और क्षेत्रीय बाजारों के साथ नए कारोबार में निवेश बढ़ाने की जरूरत है।
टीवी की कीमतों और पैकेजिंग में ज्यादा आजादी की मांग
समिट के चेयरमैन और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स के एमडी एवं सीईओ गौरव बनर्जी ने कहा कि भारत ने दर्शकों की बड़ी संख्या तक पहुंच बनाने में कामयाबी हासिल की है। अब अगला लक्ष्य इस दर्शक वर्ग से ज्यादा आर्थिक मूल्य पैदा करना, उसे हासिल करना और लंबे समय तक बनाए रखना है।
उन्होंने कहा कि CII टेलीविजन की कीमतें तय करने और चैनलों के पैकेज बनाने में कंपनियों को ज्यादा आजादी देने की मांग कर रहा है। इसके साथ ही कैरेज फीस यानी चैनलों को डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने के लिए दी जाने वाली फीस खत्म करने, दर्शकों की संख्या मापने की व्यवस्था बहाल करने और अलग-अलग स्क्रीन पर पारदर्शी मानक लागू करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
रिपोर्ट में टीवी, ओटीटी और म्यूजिक सब्सक्रिप्शन पर जीएसटी घटाकर 5% करने की भी मांग की गई है। इसके अलावा, इंडस्ट्री के अलग-अलग क्षेत्रों के हिसाब से नियम बनाने और कंपनियों को खुद अपने लिए नियम एवं मानक तय करने की व्यवस्था को बढ़ावा देने की बात कही गई है।
AI और नई तकनीकों से बढ़ेगा कारोबार
रिपोर्ट के मुताबिक, मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की अगली विकास यात्रा में नई तकनीकों और कारोबार के नए तरीकों की अहम भूमिका होगी। इसमें जिम्मेदारी के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल, वर्चुअल प्रोडक्शन, कनेक्टेड टीवी और क्रिएटर्स के जरिए तैयार होने वाले कंटेंट जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
वर्चुअल प्रोडक्शन में डिजिटल तकनीक की मदद से फिल्म और वीडियो बनाने की प्रक्रिया को बेहतर किया जाता है। वहीं, कनेक्टेड टीवी इंटरनेट से जुड़ा टेलीविजन है, जिस पर ओटीटी और दूसरी ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय स्टूडियो के लिए एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से बाहर के क्षेत्रों में भी कारोबार बढ़ाने के मौके हैं। एनिमेशन, गेमिंग, एक्सटेंडेड रियलिटी (XR) और डिजिटल मैपिंग जैसी क्षमताओं का इस्तेमाल दूसरे इंडस्ट्रीों की जरूरतों को पूरा करने में किया जा सकता है। इससे भारतीय कंपनियों को नए ग्राहक और कमाई के नए स्रोत मिल सकते हैं।
बिहार और उत्तर प्रदेश में सिनेमा स्क्रीन की कमी
CII की रिपोर्ट में देश में सिनेमा स्क्रीन की कम संख्या को भी एक बड़ी चुनौती बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर 10 लाख लोगों पर करीब 6.8 सिनेमा स्क्रीन हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश उन राज्यों में शामिल हैं, जहां आबादी के मुकाबले सिनेमा स्क्रीन की संख्या सबसे कम है।
इस स्थिति को देखते हुए CII ने 2030 के दशक की शुरुआत तक देश में 16 हजार से अधिक नई सिनेमा स्क्रीन स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। इससे ज्यादा लोगों तक फिल्मों की पहुंच बढ़ाने और सिनेमाघरों के कारोबार को विस्तार देने में मदद मिल सकती है।
रिपोर्ट में क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों और कंटेंट को बढ़ावा देने, बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने और स्थानीय रचनात्मक प्रतिभाओं में निवेश करने पर भी जोर दिया गया है। इससे छोटे शहरों और क्षेत्रीय बाजारों में एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के विकास के अवसर बढ़ सकते हैं।
100 अरब डॉलर के लक्ष्य के लिए जरूरी हैं कई बदलाव
CII की रिपोर्ट का मुख्य संदेश है कि भारत के मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लिए केवल मौजूदा विकास दर के भरोसे नहीं रहा जा सकता। इसके लिए टीवी कारोबार के नियमों और कीमतों से जुड़े बदलाव, पाइरेसी पर कार्रवाई, नई तकनीकों में निवेश और क्षेत्रीय बाजारों का विस्तार जरूरी होगा।
इसके साथ ही सिनेमा स्क्रीन की संख्या बढ़ाने और भारतीय स्टूडियो की तकनीकी क्षमताओं का दूसरे इंडस्ट्रीों में इस्तेमाल करने से भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर इन क्षेत्रों में तेजी से काम किया जाता है, तो इंडस्ट्री के लिए अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य की ओर बढ़ना आसान हो सकता है।
मीडिया व एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को सिर्फ बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंच बनाने पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि अपने खुद के कंटेंट, कमाई के टिकाऊ तरीकों और दुनिया के बाजारों में विस्तार पर भी काम करना चाहिए।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत की मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को अब सिर्फ बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंच बनाने पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि अपने खुद के कंटेंट, कमाई के टिकाऊ तरीकों और दुनिया के बाजारों में विस्तार पर भी काम करना चाहिए। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव चंचल कुमार ने गुरुवार को यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया में रचनात्मक कंटेंट, तकनीक और प्रतिभा के एक बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए ऐसी मीडिया कंपनियां तैयार करनी होंगी, जो वैश्विक बाजार में मुकाबला कर सकें।
चंचल कुमार मुंबई में आयोजित दो दिवसीय CII बिग पिक्चर समिट 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस साल समिट की थीम ‘द न्यू इकोनॉमिक्स ऑफ मीडिया एंड एंटरटेनमेंट: बिल्डिंग इंडियाज फ्यूचर ग्लोबल मीडिया कंपनीज’ रखी गई है। इसका मकसद भारत की मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के लिए कारोबार के नए अवसरों और विकास के रास्तों पर चर्चा करना है।
कुमार ने कहा कि भारत के पास कहानी सुनाने की समृद्ध परंपरा, सांस्कृतिक विविधता और रचनात्मक प्रतिभा है। जरूरत इस बात की है कि इन खूबियों को लंबे समय तक आर्थिक और सांस्कृतिक लाभ देने वाले अवसरों में बदला जाए।
‘क्रिएट इन इंडिया, क्रिएट फॉर द वर्ल्ड’ पर जोर
चंचल कुमार ने समिट की थीम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के WAVES 2025 के विजन ‘क्रिएट इन इंडिया, क्रिएट फॉर द वर्ल्ड’ से जोड़ते हुए कहा कि इस क्षेत्र में नए प्रयोगों के साथ भरोसे को भी अहमियत देनी होगी।
उन्होंने कहा कि भारत को ऐसा माहौल तैयार करना होगा, जहां देश में कंटेंट और तकनीक तैयार हो, उसके अधिकार भी भारतीय कंपनियों के पास रहें और फिर उसे दुनिया के बाजारों तक पहुंचाया जा सके।
कुमार ने सरकार की ओर से भारत के रचनात्मक उद्योग को मजबूत करने के लिए शुरू की गई पहलों का भी जिक्र किया। इनमें WAVES, WAVES Bazaar, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज (IICT) और इंडिया सिने हब शामिल हैं।
उन्होंने पाइरेसी यानी फिल्मों, कार्यक्रमों और दूसरे कंटेंट की गैरकानूनी नकल और वितरण रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, रचनात्मक काम और उससे जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा जरूरी है, ताकि कंटेंट बनाने वालों और कंपनियों को उनके काम का सही लाभ मिल सके।
150 से ज्यादा निवेशक और कारोबारी WAVES बैठक में शामिल
समिट के दौरान चंचल कुमार ने WAVES ग्लोबल इन्वेस्टर एंड इन्वेस्टी मीट का भी उद्घाटन किया। इस आयोजन में 150 से ज्यादा निवेशकों और निवेश पाने की इच्छुक कंपनियों व कारोबारियों ने हिस्सा लिया।
इस पहल के जरिए WAVES से जुड़े मंच WaveX और WAVES Bazaar के करीब 20 प्रतिभागियों को भी जोड़ा गया। इसका मकसद निवेश उपलब्ध कराने वालों और उभरते रचनात्मक कारोबारों के बीच संपर्क बढ़ाना है, ताकि नए कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए निवेश और दूसरे अवसर मिल सकें।
मीडिया इंडस्ट्री के लिए 100 अरब डॉलर का लक्ष्य
समिट में भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की श्वेत पत्र रिपोर्ट ‘द न्यू इकोनॉमिक्स ऑफ मीडिया एंड एंटरटेनमेंट’ भी जारी की गई। इसमें भारत के मीडिया और एंटरटेनमेंट क्षेत्र को 2030 के दशक की शुरुआत तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का रोडमैप दिया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सुधारों में तेजी लाने, क्षेत्रीय बाजारों को मजबूत करने और प्रस्तावित कदमों को प्रभावी तरीके से लागू करने की जरूरत है।
इसका उद्देश्य उद्योग की विकास दर बढ़ाने के साथ नए कारोबार और कमाई के अवसर तैयार करना है।
‘बड़ा दर्शक वर्ग होना अपने आप में कारोबार का मॉडल नहीं’
समिट के चेयरमैन और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया के एमडी एवं सीईओ गौरव बनर्जी ने कहा कि मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनियों को अपने कारोबार के तरीकों पर नए सिरे से विचार करना होगा।
उन्होंने कहा, “दर्शकों की बड़ी संख्या आखिरकार सिर्फ शुरुआत है। यह अपने आप में कोई बिजनेस मॉडल नहीं है।”
गौरव बनर्जी के मुताबिक, कंपनियों को यह समझने की जरूरत है कि वे अपने दर्शकों से कितना मूल्य हासिल कर पा रही हैं, विज्ञापन देने वालों को उनके खर्च के बदले कितना मापने योग्य फायदा मिल रहा है और निवेशकों को लंबे समय तक कितना टिकाऊ रिटर्न मिल सकता है।
उनकी बात का मुख्य जोर इस पर था कि सिर्फ ज्यादा दर्शक या अधिक पहुंच होना काफी नहीं है। मीडिया कंपनियों को अपनी पहुंच को मजबूत कमाई और टिकाऊ कारोबार में बदलने के तरीके भी विकसित करने होंगे।
AI और डिजिटल तकनीक से क्रिएटर्स को मिलेगा मौका
समिट की सह-अध्यक्ष और YouTube India की कंट्री मैनेजिंग डायरेक्टर गुंजन सोनी ने कहा कि भारत की रचनात्मकता और संस्कृति उसकी आर्थिक ताकत हैं। ये देश को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से युवा क्रिएटर्स अपने विचारों और स्थानीय पहचान को बड़े स्तर के कारोबार में बदल सकते हैं। इससे देश के अलग-अलग हिस्सों में काम करने वाले क्रिएटर्स को अपने कंटेंट को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने और नए कारोबारी अवसर तलाशने में मदद मिल सकती है।
कुल मिलाकर, समिट में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत की मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के लिए सिर्फ दर्शकों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए मौलिक कंटेंट तैयार करने, उसके अधिकार अपने पास रखने, कमाई के टिकाऊ तरीके विकसित करने, निवेश आकर्षित करने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार करने पर भी ध्यान देना होगा।
उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। पंकज राय का अगला कदम क्या होगा, फिलहाल इस बारे में जानकारी नहीं मिल सकी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया और विज्ञापन जगत से जुड़े पंकज राय ने Huella से इस्तीफा दे दिया है। वह कंपनी में सीनियर वाइस प्रेजिडेंट-एड सेल्स, इंडिया के पद पर कार्यरत थे। उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। पंकज राय का अगला कदम क्या होगा, फिलहाल इस बारे में जानकारी नहीं मिल सकी है।
मार्च 2026 में पंकज राय को सीनियर वाइस प्रेजिडेंट-एड सेल्स के पद पर पदोन्नत किया गया था। इस भूमिका में वह कंपनी के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञापन बिक्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इनमें NEXad, NewsroomAI और AIgnite शामिल हैं।
NEXad कंपनी का इंटरैक्टिव कनेक्टेड टीवी (CTV) प्लेटफॉर्म है। वहीं, NewsroomAI और AIgnite भी कंपनी के उत्पाद पोर्टफोलियो का हिस्सा हैं।
बता दें कि Huella ने जुलाई 2025 में पंकज राय को वाइस प्रेजिडेंट-एड सेल्स के पद पर नियुक्त किया था। इस भूमिका में उनकी जिम्मेदारी NewsroomAI के मुद्रीकरण यानी मोनेटाइजेशन से जुड़े प्रयासों का नेतृत्व करना था। इसके साथ ही उन्हें कंपनी के संस्थापकों के साथ मिलकर साझेदारियों, उत्पादों की बाजार में स्थिति और मार्केटिंग स्ट्रैटेजी पर काम करना था।
पंकज राय को ब्रॉडकास्ट और डिजिटल मीडिया क्षेत्र में 18 साल से अधिक का अनुभव है। Huella से पहले वह जी मीडिया (Zee Media) में WION और Zee Business के बिजनेस हेड के रूप में कार्यरत थे। इसके अलावा, वह Qyou Media में नेशनल सेल्स हेड की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
पूर्व में वह Zee TV, Zee Cinema और Zee Bollywood जैसे चैनलों के लिए उत्तर और पूर्वी भारत में व्यावसायिक जिम्मेदारियां भी संभाल चुके हैं।
एनआईआईटी ने अनिश सरकार को नया सीईओ नियुक्त किया है। वह पंकज जठार की जगह जिम्मेदारी संभालेंगे। इससे पहले अनिश प्लक्स़ी, मर्सर इंडिया और कैपजेमिनी में वरिष्ठ नेतृत्व भूमिकाओं में रहे हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एनआईआईटी लिमिटेड (NIIT Limited) ने अनिश सरकार (Anish Sarkar) को अपना नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। वह कंपनी के मौजूदा सीईओ पंकज जठार (Pankaj Jathar) की जगह जिम्मेदारी संभालेंगे।
एनआईआईटी के मैनेजिंग डायरेक्टर और वाइस चेयरमैन विजय कुमार थडानी (Vijay Kumar Thadani) ने कहा कि अनिश अपने साथ कारोबार को आगे बढ़ाने का अनुभव, टेक्नोलॉजी लीडरशिप और ग्रोथ को गति देने की क्षमता लेकर आए हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग तरह के कारोबार में अनिश का अनुभव एनआईआईटी के लिए उपयोगी साबित होगा, क्योंकि कंपनी पिछले कुछ वर्षों में तैयार की गई मजबूत नींव पर आगे बढ़ते हुए विकास के अगले चरण की ओर बढ़ रही है।
विजय कुमार थडानी ने पंकज जठार के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि पंकज ने संगठन को मजबूत करने और एनआईआईटी को भविष्य के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
एनआईआईटी में शामिल होने से पहले अनिश सरकार प्लक्स़ी (Pluxee), जिसे पहले सोडेक्सो बीआरएस (Sodexo BRS) के नाम से जाना जाता था, में मैनेजिंग डायरेक्टर-इंडिया और इंडिया, फिलीपींस तथा इंडोनेशिया क्लस्टर के डायरेक्टर थे।
इससे पहले वह मर्सर इंडिया (Mercer India) के सीईओ रह चुके हैं। अनिश ने कैपजेमिनी ग्रुप (Capgemini Group) के साथ भी कई वर्षों तक वरिष्ठ नेतृत्व भूमिकाओं में काम किया है। वहां उनका अनुभव मैनेजमेंट कंसल्टिंग (Management Consulting), सेल्स और टेक्नोलॉजी ट्रांसफॉर्मेशन (Technology Transformation) जैसे क्षेत्रों में रहा है।