सोहम भगनारी ने उबर एडवरटाइजिंग में स्ट्रैटेजिक वर्टिकल्स प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली है। वह सीपीजी, फार्मा और ऑटोमोटिव सेगमेंट देखेंगे। इससे पहले वह चार साल से अधिक समय तक अमेजन से जुड़े थे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सोहम भगनारी (Soham Bhagnari) ने उबर एडवरटाइजिंग (Uber Advertising) में स्ट्रैटेजिक वर्टिकल्स प्रमुख (Head of Strategic Verticals) की जिम्मेदारी संभाली है। उनकी नई भूमिका में कंज्यूमर पैकेज्ड गुड्स (CPG), फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोटिव सेगमेंट शामिल होंगे।
नई जिम्मेदारी में भगनारी इन रणनीतिक क्षेत्रों पर काम करेंगे। इन सेगमेंट में ब्रांड्स डिजिटल विज्ञापन के जरिए उपभोक्ताओं तक पहुंच बनाने और उनके साथ जुड़ाव मजबूत करने पर फोकस करते हैं।
भगनारी ने अपनी पोस्ट में कहा कि वह उबर एडवरटाइजिंग में स्ट्रैटेजिक वर्टिकल्स यानी सीपीजी, फार्मा और ऑटो के प्रमुख के तौर पर नई जिम्मेदारी शुरू करने को लेकर उत्साहित हैं। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब विज्ञापन प्लेटफॉर्म ब्रांड्स को सही ऑडियंस तक पहुंचाने और उपभोक्ताओं के साथ बेहतर एंगेजमेंट बनाने के लिए नए अवसर तलाश रहे हैं।
इससे पहले भगनारी अमेजन (Amazon) के साथ चार साल से अधिक समय तक जुड़े रहे। वहां उन्होंने अपनी पिछली भूमिका सीनियर बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर (Senior Business Development Manager) के तौर पर निभाई।
बालाजी टेलीफिल्म्स ने अपने एम्प्लॉयीज को कंपनी में हिस्सेदारी पाने का मौका देने के लिए 10.20 लाख स्टॉक ऑप्शन देने की मंजूरी दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
बालाजी टेलीफिल्म्स ने अपने एम्प्लॉयीज को कंपनी में हिस्सेदारी पाने का मौका देने के लिए 10.20 लाख स्टॉक ऑप्शन देने की मंजूरी दी है। कंपनी ने 27 अक्टूबर को शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि नामांकन और पारिश्रमिक समिति ने बालाजी टेलीफिल्म्स कर्मचारी स्टॉक ऑप्शन योजना, 2023 के तहत पात्र एम्प्लॉयीज को ये ऑप्शन देने की मंजूरी दी है।
कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, प्रत्येक स्टॉक ऑप्शन को कंपनी के 2 रुपये अंकित मूल्य वाले एक इक्विटी शेयर में बदला जा सकता है। इसके लिए प्रति शेयर 62.86 रुपये का एक्सरसाइज प्राइस तय किया गया है। कंपनी के अनुसार, यह कीमत 26 अक्टूबर 2026 को एनएसई पर शेयर के अंतिम बंद भाव में 25 फीसदी की छूट देने के आधार पर तय की गई है।
12 महीने बाद मिलेंगे ऑप्शन के अधिकार
योजना के तहत दिए गए सभी स्टॉक ऑप्शन ग्रांट की तारीख से 12 महीने पूरे होने पर वेस्ट होंगे। यानी निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद कर्मचारी इन ऑप्शन का इस्तेमाल करने के पात्र होंगे। ऑप्शन वेस्ट होने की अंतिम तारीख से तीन साल के भीतर इनका इस्तेमाल किया जा सकेगा।
स्टॉक ऑप्शन योजना के तहत एम्प्लॉयीज को भविष्य में तय कीमत पर कंपनी के शेयर हासिल करने का अधिकार मिलता है। हालांकि, ऑप्शन मिलने का मतलब यह नहीं है कि एम्प्लॉयीज को तुरंत शेयर मिल गए हैं। इसके लिए उन्हें निर्धारित शर्तें पूरी करनी होंगी और ऑप्शन का इस्तेमाल करना होगा।
कंपनी ने बताया कि यह योजना भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के शेयर आधारित कर्मचारी लाभ और स्वेट इक्विटी से जुड़े 2021 के नियमों के अनुरूप है।
संख्या को लेकर जरूरी स्पष्टीकरण: कंपनी की मुख्य सूचना में 10,20,000 ऑप्शन यानी 10.20 लाख का उल्लेख है, जबकि साथ में दिए गए परिशिष्ट में ऑप्शन और उनसे जुड़े शेयरों की संख्या 10,20,00,000 लिखी गई है। दोनों आंकड़ों में बड़ा अंतर है। इसलिए सही संख्या की पुष्टि कंपनी से होने के बाद ही इसे अंतिम रूप से प्रकाशित करना उचित होगा।
समाचार4मीडिया से बातचीत में लाबण्या ने बताया कि वह फिलहाल नोटिस पीरियड पर हैं और 31 अक्टूबर इस संस्थान में उनका आखिरी कार्यदिवस है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
पत्रकार लाबण्या ज्योति मासान्त ने टाइम्स नेटवर्क (Times Network) में अपनी पारी को विराम दे दिया है। वह करीब तीन साल से ईटी नाउ स्वदेश (ET Now Swadesh) में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रही थीं। समाचार4मीडिया से बातचीत में लाबण्या ने बताया कि वह फिलहाल नोटिस पीरियड पर हैं और 31 अक्टूबर इस संस्थान में उनका आखिरी कार्यदिवस है।
लाबण्या ने बताया कि वह जल्दी ही अपनी नई पारी शुरू करेंगी और फिर उसके बारे में अपडेट देंगी।
लाबण्या ने अपने करियर में बिजनेस, इंफ्रास्ट्रक्चर और राष्ट्रीय खबरों के संपादन के साथ डिजिटल कंटेंट तैयार करने का काम किया है। ET Now Swadesh में उनकी भूमिका में खबरों का संपादन और प्रकाशन, SEO के अनुकूल हेडलाइन तैयार करना और ब्रेकिंग न्यूज डेस्क के कामकाज का प्रबंधन शामिल रहा है।
लाबण्या ने अपने करियर की शुरुआत हिंदी दैनिक सन्मार्ग से की थी। यहां उन्होंने 2009 से 2012 तक बतौर क्राइम रिपोर्टर अपनी भूमिका निभाई। इसके बाद वह नवभारत प्रेस से जुड़ गईं, जहां उन्होंने 2012 से 2019 तक बतौर सब-एडिटर स्थानीय अपराध से जुड़ी खबरों के संपादन के साथ क्राइम और बिजनेस रिपोर्टिंग तथा स्थानीय पेजों की प्रूफरीडिंग का काम किया।
2019 में नवभारत को बाय बोलकर वह ओडिशा टेलीविजन लिमिटेड (OTV) से जुड़ गईं और 2021 तक काम किया। बाद में 2021 से 2023 तक उन्होंने कंटेंट एडिटर के तौर पर ईटीवी भारत (ETV Bharat) जॉइन कर लिया और फिर 2023 में टाइम्स नेटवर्क आ गईं, जहां से अब उन्होंने इस्तीफा दे दिया है।
लाबण्या ने उत्कल विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री की पढ़ाई की है। समाचार4मीडिया की ओर से लाबण्या को उनके नए सफर के लिए अग्रिम शुभकामनाएं।
हिंदुस्तान यूनिलीवर ने दूसरी तिमाही में विज्ञापन और प्रमोशन पर 3,138 करोड़ रुपये खर्च किए। कंपनी का समेकित कारोबार 18,071 करोड़ रुपये और EBITDA 8 फीसदी बढ़कर 4,089 करोड़ रुपये रहा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (Hindustan Unilever Limited) ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में विज्ञापन और प्रमोशन (Advertising and Promotion) पर 3,138 करोड़ रुपये खर्च किए। पिछले साल की समान तिमाही में यह खर्च 2,765 करोड़ रुपये था। यानी सालाना आधार पर इसमें 13.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इस दौरान कंपनी का समेकित कारोबार 18,071 करोड़ रुपये रहा।
कंपनी की अंतर्निहित बिक्री वृद्धि (USG) 15 फीसदी और अंतर्निहित मात्रा वृद्धि (UVG) 7 फीसदी रही। सितंबर तिमाही में विज्ञापन और प्रमोशन पर हुआ खर्च कंपनी के समेकित कारोबार का 17.4 फीसदी रहा, जबकि एक साल पहले यह 17.5 फीसदी था।
होम केयर और ब्यूटी एंड वेलबीइंग कारोबार में मात्रा के आधार पर दोहरे अंक की ग्रोथ दर्ज की गई। वहीं, पर्सनल केयर और फूड्स कारोबार में अंतर्निहित बिक्री वृद्धि 9 फीसदी रही।
30 सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही में कंपनी की कुल समेकित आय बढ़कर 18,386 करोड़ रुपये हो गई। पिछले साल की समान अवधि में यह 16,066 करोड़ रुपये थी। असाधारण मदों और टैक्स से पहले का लाभ 3,814 करोड़ रुपये रहा, जबकि एक साल पहले यह 3,702 करोड़ रुपये था। असाधारण मदों से पहले टैक्स के बाद लाभ में सालाना आधार पर 9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
कंपनी का समेकित टैक्स के बाद लाभ 2,796 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही में 2,694 करोड़ रुपये था। रिपोर्ट किए गए मुनाफे पर असाधारण मदों का असर पड़ा। इसके अलावा, पिछले साल की आधार अवधि में 273 करोड़ रुपये का एकमुश्त टैक्स संबंधी लाभ भी शामिल था।
तिमाही में कंपनी का कुल समेकित खर्च बढ़कर 14,574 करोड़ रुपये हो गया, जबकि वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में यह 12,580 करोड़ रुपये था। विज्ञापन और प्रमोशन खर्च में सालाना आधार पर 373 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। अन्य खर्च भी 4,064 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,464 करोड़ रुपये हो गया।
कंपनी का समेकित ईबीआईटीडीए (EBITDA) सालाना आधार पर 8 फीसदी बढ़कर 4,089 करोड़ रुपये रहा। ईबीआईटीडीए मार्जिन 22.6 फीसदी रहा, जो कंपनी की तय गाइडेंस रेंज के भीतर है।
इससे पहले वह कंपनी में इंटीग्रेटेड मीडिया मैनेजर, मीडिया लैब, एपीएसी (Integrated Media Manager, Media Lab, APAC) के पद पर कार्यरत थीं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दुनिया की जानी-मानी टेक्नोलॉजी कंपनी गूगल (Google) ने अपराजिता सक्सेना को गूगल मार्केटिंग में स्ट्रैटेजिक अलायंस लीड (Strategic Alliances Lead) की जिम्मेदारी सौंपी है। इससे पहले वह कंपनी में इंटीग्रेटेड मीडिया मैनेजर, मीडिया लैब, एपीएसी (Integrated Media Manager, Media Lab, APAC) के पद पर कार्यरत थीं।
अपराजिता सक्सेना ने लिंक्डइन पर अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि वह गूगल मार्केटिंग में स्ट्रैटेजिक अलायंस लीड के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
अपराजिता सक्सेना को मार्केटिंग के क्षेत्र में 14 साल से अधिक का अनुभव है। उन्हें स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप, कंटेंट और टैक्टिकल मीडिया प्लानिंग एवं बाइंग के क्षेत्र में अनुभव हासिल है। उन्होंने अलग-अलग आकार के विज्ञापनदाताओं के साथ काम किया है।
गूगल से पहले अपराजिता सक्सेना मेटा (Meta), पब्लिसिस ग्रुप (Publicis Groupe) और ओम्निकॉम मीडिया ग्रुप (Omnicom Media Group) जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में काम कर चुकी हैं।
याशिका शर्मा ने मैकडॉनल्ड्स इंडिया नॉर्थ एंड ईस्ट में डिप्टी मैनेजर पीआर और कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस की जिम्मेदारी संभाली है, इससे पहले वह कम्युनिकेशंस कंसल्टेंसी वेबर शैंडविक से जुड़ी थीं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
याशिका शर्मा (Yashika Sharma) ने मैकडॉनल्ड्स इंडिया – नॉर्थ एंड ईस्ट (McDonald’s India – North and East) में डिप्टी मैनेजर, पीआर एंड कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस (PR & Corporate Communications) के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है।
शर्मा इससे पहले कम्युनिकेशंस कंसल्टेंसी वेबर शैंडविक (Weber Shandwick) से जुड़ी थीं। लिंक्डइन (LinkedIn) पर अपडेट साझा करते हुए शर्मा ने कहा कि बचपन से पसंदीदा ब्रांड मैकडॉनल्ड्स के साथ काम करने का मौका मिलना उनके लिए बेहद खास है।
उन्होंने लिखा, “अगर आपने बचपन की मुझे बताया होता कि एक दिन मुझे मैकडॉनल्ड्स के साथ काम करने का मौका मिलेगा, तो शायद मैंने कहा होता, ‘आई एम लविन’ इट!’” नई भूमिका में शर्मा मैकडॉनल्ड्स इंडिया – नॉर्थ एंड ईस्ट के पीआर और कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस फंक्शन का हिस्सा होंगी।
पेटीएम की सितंबर तिमाही में टैक्स के बाद मुनाफा बढ़कर 225 करोड़ रुपये पहुंच गया। कंपनी का राजस्व 28 फीसदी बढ़ा, जबकि ईबीआईटीडीए 90 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड 270 करोड़ रुपये रहा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वन97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड (One 97 Communications Ltd), जो पेटीएम (Paytm) का संचालन करती है, ने वित्त वर्ष 2027 की सितंबर तिमाही में टैक्स के बाद मुनाफे में दस गुना से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की है। कंपनी का मुनाफा बढ़कर 225 करोड़ रुपये हो गया, जबकि एक साल पहले की समान तिमाही में यह 21 करोड़ रुपये था।
तिमाही के दौरान कंपनी का राजस्व भी सालाना आधार पर 28 फीसदी बढ़कर 2,648 करोड़ रुपये पहुंच गया। कंपनी का ब्याज, टैक्स, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले का लाभ यानी ईबीआईटीडीए (EBITDA) सालाना आधार पर 90 फीसदी बढ़कर 270 करोड़ रुपये हो गया।
यह कंपनी का अब तक का सबसे ऊंचा तिमाही ईबीआईटीडीए स्तर है। ईबीआईटीडीए मार्जिन भी बढ़कर 10 फीसदी हो गया, जो पहली बार दोहरे अंक में पहुंचा है। कंपनी के मुताबिक, दिसंबर 2025 तक मिले पेमेंट्स इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (PIDF) प्रोत्साहन को हटाकर तुलना करने पर परिचालन राजस्व में 33 फीसदी की बढ़ोतरी रही, जबकि ईबीआईटीडीए करीब चार गुना हो गया।
पेटीएम ने बेहतर परिचालन प्रदर्शन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से मिली दक्षता को भी अहम बताया। इसके चलते अप्रत्यक्ष खर्च कुल राजस्व के 52 फीसदी से घटकर 46 फीसदी रह गया। कंपनी ने उपभोक्ता यूपीआई भुगतान में अपनी बाजार हिस्सेदारी भी बढ़ाना जारी रखा।
पेटीएम का यूपीआई सकल लेनदेन मूल्य यानी जीटीवी (GTV) उद्योग की वृद्धि दर के मुकाबले दोगुने से ज्यादा तेजी से बढ़ा। सितंबर तिमाही पेटीएम के लिए लगातार छठी मुनाफे वाली तिमाही रही। कंपनी के अनुसार, कारोबार में लगातार गति, बेहतर कमाई और मर्चेंट तथा उपभोक्ता कारोबार में एआई के बढ़ते इस्तेमाल से प्रदर्शन को मजबूती मिली।
भुगतान कारोबार भी कंपनी की वृद्धि में अहम योगदान देता रहा। भुगतान सेवाओं से राजस्व सालाना आधार पर 25 फीसदी बढ़कर 1,434 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, तुलनात्मक आधार पर शुद्ध भुगतान राजस्व 21 फीसदी बढ़कर 644 करोड़ रुपये रहा।
उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पत्रकार और इस मामले में याचिकाकर्ता रहे आशुतोष नेगी को पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पत्रकार और इस मामले में याचिकाकर्ता रहे आशुतोष नेगी को पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया है। उन्हें मंगलवार को दिल्ली स्थित CBI मुख्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है। इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, जांच एजेंसी ने उनसे मामले से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों के बारे में पूछताछ करने की बात कही है।
‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ से बातचीत में आशुतोष नेगी ने कहा कि वीआईपी की भूमिका की जांच करने के बजाय CBI उन लोगों से पूछताछ कर रही है, जो अंकिता के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह दिल्ली पहुंच गए हैं और मंगलवार सुबह CBI मुख्यालय जाएंगे।
CBI की ओर से भेजे गए समन में कहा गया है कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों का पता लगाने के लिए उनसे पूछताछ करना जरूरी है।
2022 से CBI जांच की मांग कर रहे थे नेगी
आशुतोष नेगी वर्ष 2022 से ही अंकिता भंडारी हत्याकांड की CBI जांच की मांग उठा रहे थे। मार्च 2024 में उत्तराखंड पुलिस ने उन्हें इस मामले की जांच से जुड़ी रिपोर्टिंग के सिलसिले में गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।
अंकिता भंडारी पौड़ी गढ़वाल के वनंत्रा रिजॉर्ट में काम करती थीं। नौकरी शुरू करने के करीब तीन सप्ताह बाद, 18 सितंबर 2022 को वह लापता हो गई थीं। कुछ दिन बाद उनका शव एक नहर से बरामद हुआ था। इस घटना के बाद उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। मामले की शुरुआती जांच को लेकर भी सवाल उठे थे।
बढ़ते जनदबाव के बीच उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने इस साल जनवरी में मामले की CBI जांच के आदेश दिए थे।
क्या है वीआईपी की भूमिका का मामला?
अंकिता के परिवार ने हत्याकांड में कथित तौर पर किसी वीआईपी की भूमिका की गहन जांच की मांग की है। हाल में यह मांग उस समय फिर तेज हो गई, जब अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने एक ऑडियो क्लिप जारी की। उर्मिला का दावा है कि वह पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की पत्नी हैं।
जारी ऑडियो में कथित तौर पर राठौर और एक अन्य व्यक्ति के बीच बातचीत होने का दावा किया गया। इस बातचीत में एक भाजपा नेता का नाम इस मामले से जोड़ने की बात सामने आई। इसके बाद उत्तराखंड में फिर विरोध प्रदर्शन हुए और प्रदर्शनकारियों ने कथित वीआईपी की भूमिका की CBI जांच की मांग की।
हालांकि, किसी वीआईपी की भूमिका या ऑडियो में किए गए दावों की पुष्टि को लेकर उपलब्ध जानकारी में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया है। इसलिए इन आरोपों को जांच का विषय और कथित दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
तीन दोषियों को मिल चुकी है उम्रकैद
CBI के जांच संभालने से पहले उत्तराखंड पुलिस ने इस मामले की जांच की थी और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। कोटद्वार की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने 30 मई 2025 को पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराते हुए कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
अब CBI की एक टीम उत्तराखंड में रहकर मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही है। आशुतोष नेगी को समन भेजना इसी जांच का हिस्सा है। हालांकि, उनसे पूछताछ के बाद जांच में क्या सामने आता है और कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं, यह आगे की जांच से ही स्पष्ट होगा।
कर्नाटक की एक अदालत ने कन्नड़ न्यूज चैनल BTV News को कर्नाटक बैंक को एक लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
कर्नाटक की एक अदालत ने कन्नड़ न्यूज चैनल BTV News को कर्नाटक बैंक को एक लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया है। अदालत ने चैनल को बैंक से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और बैंक तथा उसके अधिकारियों के खिलाफ इस विवाद से जुड़े मानहानिकारक बयान दोबारा प्रकाशित या प्रसारित नहीं करने का निर्देश भी दिया है।
बेंगलुरु के अतिरिक्त सिटी सिविल एवं सेशंस जज आरवाई शशिधर ने 1 अक्टूबर को दिए फैसले में कहा कि चैनल ने भरोसेमंद स्रोतों से जानकारी की पुष्टि किए बिना बैंक के खिलाफ आरोप प्रसारित किए। अदालत के मुताबिक, चैनल ने भारतीय प्रेस परिषद (Press Council of India) की ओर से तय पत्रकारिता के आचरण संबंधी मानकों और नैतिक सिद्धांतों का पालन नहीं किया।
बैंक के एमडी और सीईओ के इस्तीफे के बाद शुरू हुआ विवाद
यह मामला कर्नाटक बैंक के तत्कालीन प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD एवं CEO) श्रीकृष्णन हरि हरा शर्मा के इस्तीफे के बाद शुरू हुआ था। उन्होंने 29 जून 2025 को इस्तीफा दिया था।
बैंक के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 के ऑडिट में सामने आया था कि शर्मा ने सलाहकारों और अन्य राजस्व खर्चों पर अपने निर्धारित अधिकारों से अधिक 1.16 करोड़ रुपये खर्च किए थे। इसके बाद बैंक के बोर्ड ने ऑडिट के निष्कर्षों पर विचार किया और संबंधित राशि की वसूली की सिफारिश की। बैंक ने इन घटनाक्रमों की जानकारी 14 मई 2025 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को दी थी।
इसके बाद शर्मा ने व्यक्तिगत कारणों और मुंबई स्थानांतरित होने की इच्छा का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया।
बैंक की वित्तीय स्थिति को लेकर प्रसारण पर आपत्ति
कर्नाटक बैंक ने अदालत में आरोप लगाया कि BTV News ने इस्तीफे से जुड़े घटनाक्रमों की पुष्टि किए बिना बैंक की वित्तीय स्थिति, आंतरिक कामकाज और ग्राहकों की जमा राशि की सुरक्षा को लेकर सनसनीखेज और मानहानिकारक दावे प्रसारित किए।
बैंक के अनुसार, चैनल पर ऐसी बातें कही गईं जिनसे जमाकर्ताओं के पैसे के गलत इस्तेमाल की आशंका जताई गई और लोगों को बैंक में खाता खोलने से पहले सावधानी बरतने की सलाह दी गई। चैनल ने कथित तौर पर बैंक में वित्तीय गड़बड़ियों और निदेशकों के बीच विवाद होने की बातें भी प्रसारित कीं।
बैंक ने दावा किया कि इन प्रसारणों से निवेशकों और जमाकर्ताओं के बीच चिंता पैदा हुई और बैंक के निदेशकों को कई सवालों के जवाब देने पड़े।
शेयर की कीमत गिरने का भी किया था दावा
बैंक ने अपनी याचिका में कहा कि प्रसारणों से उसकी प्रतिष्ठा और कारोबारी हितों को नुकसान पहुंचा। बैंक के मुताबिक, 26 जून 2025 को कारोबार बंद होने के समय उसके शेयर की कीमत करीब 207 रुपये थी और प्रसारणों के बाद इसमें तेज गिरावट आई।
हालांकि, शेयर की कीमत में गिरावट से जुड़ी बात बैंक की ओर से अदालत में किया गया दावा था।
कर्नाटक बैंक ने 30 जून 2025 को मानहानि का मुकदमा दायर किया था। इसमें बैंक ने 1 लाख रुपये के हर्जाने, सार्वजनिक माफी और भविष्य में ऐसे मानहानिकारक प्रसारणों पर स्थायी रोक लगाने की मांग की थी।
अदालत में पेश नहीं हुआ न्यूज चैनल
मामले की सुनवाई के दौरान BTV News समन मिलने के बावजूद अदालत में पेश नहीं हुआ। इसके बाद अदालत ने चैनल की अनुपस्थिति में मामले की सुनवाई आगे बढ़ाई।
अदालत ने बैंक के मुख्य कारोबार अधिकारी चंद्रशेखर की गवाही के साथ ऑडिट किए गए वित्तीय विवरण, तत्कालीन एमडी के इस्तीफे का पत्र, टीवी प्रसारणों की तस्वीरों और संबंधित सामग्री वाली सीडी की जांच की।
इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने माना कि चैनल ने बैंक के प्रबंधन से विश्वसनीय जानकारी हासिल किए बिना आरोप प्रसारित किए। अदालत के मुताबिक, इन प्रसारणों से बैंक की प्रतिष्ठा और कारोबारी हितों को नुकसान पहुंचा, जिसके लिए चैनल हर्जाना देने के लिए जिम्मेदार है।
हर्जाना, माफी और प्रसारण पर स्थायी रोक
अदालत ने कर्नाटक बैंक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए BTV News को 1 लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया। साथ ही, चैनल को बैंक से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और बैंक तथा उसके अधिकारियों के खिलाफ इस विवाद से संबंधित मानहानिकारक बयान प्रकाशित या प्रसारित करने से स्थायी रूप से रोक दिया।
अदालत ने मुकदमे का खर्च भी बैंक को देने का आदेश दिया।
यह फैसला मीडिया संस्थानों के लिए खबरों की पुष्टि, विश्वसनीय स्रोतों के इस्तेमाल और पत्रकारिता के पेशेवर मानकों के पालन के महत्व को रेखांकित करता है।
भारत के डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून को लेकर मीडिया जगत में नई कानूनी बहस शुरू हो गई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत के डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून को लेकर मीडिया जगत में नई कानूनी बहस शुरू हो गई है। मुकेश अंबानी और गौतम अडानी से जुड़ी मीडिया कंपनियों समेत 21 समाचार प्रकाशकों ने इस कानून के कुछ प्रावधानों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। प्रकाशकों का कहना है कि कानून में पत्रकारों को स्पष्ट छूट नहीं मिलने से खोजी पत्रकारिता और खबरों के गोपनीय सूत्रों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) और अन्य मीडिया समूहों ने 6 अक्टूबर को याचिका दायर की थी। इस मामले की सुनवाई 27 अक्टूबर को होने की संभावना है। यह कानून के खिलाफ अब तक की प्रमुख कानूनी चुनौतियों में से एक है।
किन मीडिया कंपनियों ने उठाए सवाल?
इस चुनौती में शामिल प्रकाशकों में मुकेश अंबानी की कंपनी नेटवर्क18, गौतम अडानी के मीडिया समूह से जुड़ा एनडीटीवी, इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स इंटरनेट जैसे नाम शामिल हैं। टाइम्स इंटरनेट, टाइम्स ऑफ इंडिया समूह का हिस्सा है।
प्रकाशकों की मुख्य आपत्ति यह है कि कानून में मीडिया संस्थानों और पत्रकारों के लिए स्पष्ट लिखित छूट नहीं दी गई है। DNPA का कहना है कि अगस्त में सरकार के साथ हुई बैठक में मीडिया कंपनियों को आश्वासन दिया गया था कि कानून प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करेगा। हालांकि, संगठन के मुताबिक, केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं है और पत्रकारों के लिए लिखित सुरक्षा प्रावधान जरूरी हैं।
DNPA ने अपनी याचिका में कानून के उन प्रावधानों को रद्द करने की मांग की है, जिन्हें वह पत्रकारिता के काम में बाधा डालने वाला मानता है।
पत्रकारिता की जांच प्रक्रिया पर क्या है आपत्ति?
प्रकाशकों की सबसे बड़ी चिंता व्यक्तिगत डेटा के इस्तेमाल के लिए सहमति लेने से जुड़े प्रावधानों को लेकर है। उनका तर्क है कि अगर किसी व्यक्ति के बारे में खोजी रिपोर्ट तैयार करने से पहले पत्रकार को उस व्यक्ति को सूचना देनी पड़े या उसकी सहमति लेनी पड़े, तो जांच प्रभावित हो सकती है।
DNPA का कहना है कि ऐसी स्थिति में जांच के दायरे में आया व्यक्ति सबूत मिटा सकता है या गवाहों पर दबाव डाल सकता है। इससे भ्रष्टाचार, कारोबारी गड़बड़ियों और चुनाव से जुड़े मामलों की पड़ताल करना मुश्किल हो सकता है।
प्रकाशकों ने यह भी चिंता जताई है कि कानून के तहत कोई व्यक्ति अपनी सहमति वापस लेकर अपने व्यक्तिगत डेटा को मिटाने की मांग कर सकता है। DNPA के मुताबिक, जनहित में प्रकाशित किसी खबर को सुरक्षित रखने के लिए स्पष्ट प्रावधान नहीं होने से मीडिया संस्थानों पर खबर हटाने या उसमें बड़े बदलाव करने का दबाव बन सकता है।
हालांकि, ये प्रकाशकों की ओर से अदालत में रखी गई दलीलें हैं। इनका अंतिम कानूनी अर्थ और कानून के अलग-अलग मामलों में लागू होने का तरीका अदालत के फैसले तथा संबंधित प्रावधानों की व्याख्या पर निर्भर करेगा।
पत्रकारों के सूत्रों की पहचान उजागर होने का डर
मीडिया समूहों ने सरकार को कुछ संगठनों से जानकारी मांगने के अधिकार से जुड़े प्रावधानों पर भी सवाल उठाए हैं। DNPA के मुताबिक, कानून के तहत संबंधित सरकारी प्राधिकरण कुछ मामलों में जानकारी मांग सकता है और नियमों का पालन नहीं करने पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
प्रकाशकों को आशंका है कि सरकार के पास जानकारी मांगने की व्यापक शक्तियां होने से पत्रकारों को अपने गोपनीय सूत्रों से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
खोजी पत्रकारिता में कई बार लोग भ्रष्टाचार, कंपनियों की कथित गड़बड़ियों या चुनावी अनियमितताओं से जुड़ी जानकारी पत्रकारों को गोपनीय तरीके से देते हैं। DNPA का कहना है कि अगर ऐसे लोगों की पहचान उजागर होने का डर बढ़ता है, तो वे पत्रकारों के साथ जानकारी साझा करने से बच सकते हैं।
संगठन ने यह भी कहा है कि कानून में सरकार को कुछ परिस्थितियों में छूट दी गई है, लेकिन पत्रकारों के लिए वैसी स्पष्ट सुरक्षा नहीं है। उसने यूरोपीय संघ, सिंगापुर और ब्रिटेन में पत्रकारिता से जुड़े सुरक्षा प्रावधानों का हवाला दिया है।
मई 2027 से लागू होने हैं कई प्रावधान
प्रकाशकों ने कानून के उन विवादित प्रावधानों को चुनौती दी है, जिन्हें मई 2027 से लागू किया जाना है। वे चाहते हैं कि अदालत कानून के अधिकांश विवादित हिस्सों को रद्द करे।
यह मामला डिजिटल व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता के बीच संतुलन से जुड़ा है। सरकार ने यह कानून लोगों के डिजिटल व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के उद्देश्य से लागू करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इससे मेटा और गूगल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी डेटा के इस्तेमाल और अनुपालन से जुड़ी जिम्मेदारियां बढ़ती हैं।
दूसरी ओर, मीडिया समूहों का कहना है कि पत्रकारिता के लिए स्पष्ट छूट के अभाव में कानून का इस्तेमाल खबरों की जांच और प्रकाशन को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है।
सरकार का पक्ष भी महत्वपूर्ण
रॉयटर्स के मुताबिक, DNPA, संबंधित मीडिया समूहों और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने उसकी टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया। इसलिए इस मामले में सरकार की विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
सरकार पहले कह चुकी है कि वह प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान करती है और भारत में बड़ी संख्या में अखबारों तथा टीवी चैनलों वाला व्यापक मीडिया तंत्र मौजूद है। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता रैंकिंग पर भी आपत्ति जताई है।
अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से यह स्पष्ट होने की दिशा में अहम कदम उठ सकता है कि व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों और खोजी पत्रकारिता की जरूरतों के बीच कानूनी संतुलन कैसे तय किया जाए। फिलहाल, प्रकाशकों की आपत्तियां याचिका में दर्ज दलीलें हैं और अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है।
मीडिया संस्थान मिंट (LiveMint) में पॉलिटिकल डेस्क एडिटर के तौर पर काम कर रहे गुलाम जिलानी ने संस्थान से विदाई ले ली है। वह फरवरी 2024 से अक्टूबर 2026 तक इस संस्थान से जुड़े रहे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया संस्थान मिंट (LiveMint) में पॉलिटिकल डेस्क एडिटर के तौर पर काम कर रहे गुलाम जिलानी ने संस्थान से विदाई ले ली है। वह फरवरी 2024 से अक्टूबर 2026 तक इस संस्थान से जुड़े रहे। इस दौरान उन्होंने राजनीति और शासन से जुड़ी खबरों की कवरेज की जिम्मेदारी संभाली।
समाचार4मीडिया से बातचीत में जिलानी ने बताया कि इस दौरान उन्होंने बिहार व बंगाल चुनाव की ग्राउंड कवरेज भी की। जिलानी का कहना था कि वह जल्द ही अपनी नई पारी शुरू करेंगे और फिर उसके बारे में बताएंगे।
पत्रकारिता में 17 साल का अनुभव रखने वाले गुलाम जिलानी ने मिंट में ब्रेकिंग न्यूज, विस्तृत साक्षात्कार और विश्लेषणात्मक खबरों के जरिए राजनीतिक घटनाक्रमों को कवर किया। उन्होंने चुनाव, विरोध प्रदर्शनों और अन्य प्रमुख घटनाओं के दौरान मौके पर जाकर रिपोर्टिंग भी की। इसके अलावा, उन्होंने वीडियो इंटरव्यू और एक्सप्लेनर तैयार करने का काम किया।
मिंट से पहले गुलाम जिलानी एसोसिएटेड ब्रॉडकास्टिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (टीवी9) में सीनियर असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत थे। अगस्त 2022 से फरवरी 2024 तक यहां काम करते हुए उन्होंने News9Plus ऐप के लिए राजनीति पर 10 से 12 मिनट की वीडियो डॉक्यूमेंट्री तैयार कीं। साथ ही, News9Live वेबसाइट के लिए लेख लिखे और News9 Live के यूट्यूब लाइवस्ट्रीमिंग चैनल के लिए रिपोर्टिंग की।
इससे पहले वह मनीकंट्रोल में अगस्त 2020 से जुलाई 2022 तक असिस्टेंट एडिटर रहे। यहां उन्होंने राजनीति और शासन से जुड़े विषयों पर ब्रेकिंग न्यूज, साक्षात्कार और विश्लेषणात्मक लेख लिखे। उन्होंने विभिन्न स्रोतों और प्रतिस्पर्धी मीडिया संस्थानों की खबरों का चयन कर प्रकाशन के लिए तैयार करने का काम भी किया।
गुलाम जिलानी ने दिसंबर 2018 से अगस्त 2020 तक इंडिया टुडे ग्रुप के मेल टुडे में असिस्टेंट एडिटर के रूप में काम किया। यहां उन्होंने रिपोर्टरों की टीम का नेतृत्व करने के साथ कवर स्टोरीज के संपादन और चयन की जिम्मेदारी संभाली।
जनवरी 2017 से दिसंबर 2018 तक वह हिंदुस्तान टाइम्स में स्पेशल कॉरेस्पॉन्डेंट रहे। इस दौरान उन्होंने दिल्ली में राजनीति और शासन से जुड़े मुद्दों को कवर किया। उत्तर प्रदेश और पंजाब के विधानसभा चुनावों की रिपोर्टिंग के अलावा, उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दंगों तथा मांस और चमड़ा उद्योग पर कार्रवाई के प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी काम किया।
अपने करियर में गुलाम जिलानी हिंदुस्तान टाइम्स, सीएनएन-न्यूज18, कश्मीर रीडर और द पायनियर जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं। सीएनएन-न्यूज18 में उन्होंने उत्तर प्रदेश के स्टेट कॉरेस्पॉन्डेंट के तौर पर लखनऊ से रिपोर्टिंग की। वहीं, द पायनियर में उन्होंने शिक्षा से जुड़ी खबरों पर काम किया।
अप्रैल से सितंबर 2018 के बीच उन्होंने अमेरिका के मिनियापोलिस स्थित स्टार ट्रिब्यून में अल्फ्रेड फ्रेंडली प्रेस पार्टनर्स फेलो के रूप में भी काम किया। यहां उन्होंने खोजपरक रिपोर्टिंग और स्थानीय खबरों पर काम किया। गुलाम जिलानी ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई की है। इसके साथ ही उन्होंने यहीं से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की है।