गूगल ने अपराजिता सक्सेना को सौंपी नई जिम्मेदारी, बनाया स्ट्रैटेजिक अलायंस लीड

इससे पहले वह कंपनी में इंटीग्रेटेड मीडिया मैनेजर, मीडिया लैब, एपीएसी (Integrated Media Manager, Media Lab, APAC) के पद पर कार्यरत थीं।

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Tuesday, 27 October, 2026
Aparajita Saxena


दुनिया की जानी-मानी टेक्नोलॉजी कंपनी गूगल (Google) ने अपराजिता सक्सेना को गूगल मार्केटिंग में स्ट्रैटेजिक अलायंस लीड (Strategic Alliances Lead) की जिम्मेदारी सौंपी है। इससे पहले वह कंपनी में इंटीग्रेटेड मीडिया मैनेजर, मीडिया लैब, एपीएसी (Integrated Media Manager, Media Lab, APAC) के पद पर कार्यरत थीं।

अपराजिता सक्सेना ने लिंक्डइन पर अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि वह गूगल मार्केटिंग में स्ट्रैटेजिक अलायंस लीड के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

अपराजिता सक्सेना को मार्केटिंग के क्षेत्र में 14 साल से अधिक का अनुभव है। उन्हें स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप, कंटेंट और टैक्टिकल मीडिया प्लानिंग एवं बाइंग के क्षेत्र में अनुभव हासिल है। उन्होंने अलग-अलग आकार के विज्ञापनदाताओं के साथ काम किया है।

गूगल से पहले अपराजिता सक्सेना मेटा (Meta), पब्लिसिस ग्रुप (Publicis Groupe) और ओम्निकॉम मीडिया ग्रुप (Omnicom Media Group) जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में काम कर चुकी हैं।

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मैकडॉनल्ड्स इंडिया में डिप्टी मैनेजर नियुक्त हुई याशिका शर्मा

याशिका शर्मा ने मैकडॉनल्ड्स इंडिया नॉर्थ एंड ईस्ट में डिप्टी मैनेजर पीआर और कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस की जिम्मेदारी संभाली है, इससे पहले वह कम्युनिकेशंस कंसल्टेंसी वेबर शैंडविक से जुड़ी थीं।

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Tuesday, 27 October, 2026
yashika

याशिका शर्मा (Yashika Sharma) ने मैकडॉनल्ड्स इंडिया – नॉर्थ एंड ईस्ट (McDonald’s India – North and East) में डिप्टी मैनेजर, पीआर एंड कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस (PR & Corporate Communications) के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है।

शर्मा इससे पहले कम्युनिकेशंस कंसल्टेंसी वेबर शैंडविक (Weber Shandwick) से जुड़ी थीं। लिंक्डइन (LinkedIn) पर अपडेट साझा करते हुए शर्मा ने कहा कि बचपन से पसंदीदा ब्रांड मैकडॉनल्ड्स के साथ काम करने का मौका मिलना उनके लिए बेहद खास है।

उन्होंने लिखा, “अगर आपने बचपन की मुझे बताया होता कि एक दिन मुझे मैकडॉनल्ड्स के साथ काम करने का मौका मिलेगा, तो शायद मैंने कहा होता, ‘आई एम लविन’ इट!’” नई भूमिका में शर्मा मैकडॉनल्ड्स इंडिया – नॉर्थ एंड ईस्ट के पीआर और कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस फंक्शन का हिस्सा होंगी।

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पेटीएम का राजस्व 28 फीसदी बढ़कर 2,648 करोड़ रुपये हुआ

पेटीएम की सितंबर तिमाही में टैक्स के बाद मुनाफा बढ़कर 225 करोड़ रुपये पहुंच गया। कंपनी का राजस्व 28 फीसदी बढ़ा, जबकि ईबीआईटीडीए 90 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड 270 करोड़ रुपये रहा।

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Tuesday, 27 October, 2026
paytm

वन97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड (One 97 Communications Ltd), जो पेटीएम (Paytm) का संचालन करती है, ने वित्त वर्ष 2027 की सितंबर तिमाही में टैक्स के बाद मुनाफे में दस गुना से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की है। कंपनी का मुनाफा बढ़कर 225 करोड़ रुपये हो गया, जबकि एक साल पहले की समान तिमाही में यह 21 करोड़ रुपये था।

तिमाही के दौरान कंपनी का राजस्व भी सालाना आधार पर 28 फीसदी बढ़कर 2,648 करोड़ रुपये पहुंच गया। कंपनी का ब्याज, टैक्स, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले का लाभ यानी ईबीआईटीडीए (EBITDA) सालाना आधार पर 90 फीसदी बढ़कर 270 करोड़ रुपये हो गया।

यह कंपनी का अब तक का सबसे ऊंचा तिमाही ईबीआईटीडीए स्तर है। ईबीआईटीडीए मार्जिन भी बढ़कर 10 फीसदी हो गया, जो पहली बार दोहरे अंक में पहुंचा है। कंपनी के मुताबिक, दिसंबर 2025 तक मिले पेमेंट्स इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (PIDF) प्रोत्साहन को हटाकर तुलना करने पर परिचालन राजस्व में 33 फीसदी की बढ़ोतरी रही, जबकि ईबीआईटीडीए करीब चार गुना हो गया।

पेटीएम ने बेहतर परिचालन प्रदर्शन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से मिली दक्षता को भी अहम बताया। इसके चलते अप्रत्यक्ष खर्च कुल राजस्व के 52 फीसदी से घटकर 46 फीसदी रह गया। कंपनी ने उपभोक्ता यूपीआई भुगतान में अपनी बाजार हिस्सेदारी भी बढ़ाना जारी रखा।

पेटीएम का यूपीआई सकल लेनदेन मूल्य यानी जीटीवी (GTV) उद्योग की वृद्धि दर के मुकाबले दोगुने से ज्यादा तेजी से बढ़ा। सितंबर तिमाही पेटीएम के लिए लगातार छठी मुनाफे वाली तिमाही रही। कंपनी के अनुसार, कारोबार में लगातार गति, बेहतर कमाई और मर्चेंट तथा उपभोक्ता कारोबार में एआई के बढ़ते इस्तेमाल से प्रदर्शन को मजबूती मिली।

भुगतान कारोबार भी कंपनी की वृद्धि में अहम योगदान देता रहा। भुगतान सेवाओं से राजस्व सालाना आधार पर 25 फीसदी बढ़कर 1,434 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, तुलनात्मक आधार पर शुद्ध भुगतान राजस्व 21 फीसदी बढ़कर 644 करोड़ रुपये रहा।

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अंकिता भंडारी हत्याकांड: पत्रकार आशुतोष नेगी को CBI ने भेजा समन, आज करेगी पूछताछ

उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पत्रकार और इस मामले में याचिकाकर्ता रहे आशुतोष नेगी को पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया है।

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Tuesday, 27 October, 2026
AnkitaBhandari542

उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पत्रकार और इस मामले में याचिकाकर्ता रहे आशुतोष नेगी को पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया है। उन्हें मंगलवार को दिल्ली स्थित CBI मुख्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है। इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, जांच एजेंसी ने उनसे मामले से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों के बारे में पूछताछ करने की बात कही है।

‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ से बातचीत में आशुतोष नेगी ने कहा कि वीआईपी की भूमिका की जांच करने के बजाय CBI उन लोगों से पूछताछ कर रही है, जो अंकिता के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह दिल्ली पहुंच गए हैं और मंगलवार सुबह CBI मुख्यालय जाएंगे।

CBI की ओर से भेजे गए समन में कहा गया है कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों का पता लगाने के लिए उनसे पूछताछ करना जरूरी है।

2022 से CBI जांच की मांग कर रहे थे नेगी

आशुतोष नेगी वर्ष 2022 से ही अंकिता भंडारी हत्याकांड की CBI जांच की मांग उठा रहे थे। मार्च 2024 में उत्तराखंड पुलिस ने उन्हें इस मामले की जांच से जुड़ी रिपोर्टिंग के सिलसिले में गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।

अंकिता भंडारी पौड़ी गढ़वाल के वनंत्रा रिजॉर्ट में काम करती थीं। नौकरी शुरू करने के करीब तीन सप्ताह बाद, 18 सितंबर 2022 को वह लापता हो गई थीं। कुछ दिन बाद उनका शव एक नहर से बरामद हुआ था। इस घटना के बाद उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। मामले की शुरुआती जांच को लेकर भी सवाल उठे थे।

बढ़ते जनदबाव के बीच उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने इस साल जनवरी में मामले की CBI जांच के आदेश दिए थे।

क्या है वीआईपी की भूमिका का मामला?

अंकिता के परिवार ने हत्याकांड में कथित तौर पर किसी वीआईपी की भूमिका की गहन जांच की मांग की है। हाल में यह मांग उस समय फिर तेज हो गई, जब अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने एक ऑडियो क्लिप जारी की। उर्मिला का दावा है कि वह पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की पत्नी हैं।

जारी ऑडियो में कथित तौर पर राठौर और एक अन्य व्यक्ति के बीच बातचीत होने का दावा किया गया। इस बातचीत में एक भाजपा नेता का नाम इस मामले से जोड़ने की बात सामने आई। इसके बाद उत्तराखंड में फिर विरोध प्रदर्शन हुए और प्रदर्शनकारियों ने कथित वीआईपी की भूमिका की CBI जांच की मांग की।

हालांकि, किसी वीआईपी की भूमिका या ऑडियो में किए गए दावों की पुष्टि को लेकर उपलब्ध जानकारी में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया है। इसलिए इन आरोपों को जांच का विषय और कथित दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

तीन दोषियों को मिल चुकी है उम्रकैद

CBI के जांच संभालने से पहले उत्तराखंड पुलिस ने इस मामले की जांच की थी और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। कोटद्वार की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने 30 मई 2025 को पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराते हुए कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

अब CBI की एक टीम उत्तराखंड में रहकर मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही है। आशुतोष नेगी को समन भेजना इसी जांच का हिस्सा है। हालांकि, उनसे पूछताछ के बाद जांच में क्या सामने आता है और कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं, यह आगे की जांच से ही स्पष्ट होगा।

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मानहानि मामले में BTV News को एक लाख रुपये देने का आदेश, कर्नाटक बैंक से मांगनी होगी माफी

कर्नाटक की एक अदालत ने कन्नड़ न्यूज चैनल BTV News को कर्नाटक बैंक को एक लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया है।

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Tuesday, 27 October, 2026
Court512

कर्नाटक की एक अदालत ने कन्नड़ न्यूज चैनल BTV News को कर्नाटक बैंक को एक लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया है। अदालत ने चैनल को बैंक से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और बैंक तथा उसके अधिकारियों के खिलाफ इस विवाद से जुड़े मानहानिकारक बयान दोबारा प्रकाशित या प्रसारित नहीं करने का निर्देश भी दिया है।

बेंगलुरु के अतिरिक्त सिटी सिविल एवं सेशंस जज आरवाई शशिधर ने 1 अक्टूबर को दिए फैसले में कहा कि चैनल ने भरोसेमंद स्रोतों से जानकारी की पुष्टि किए बिना बैंक के खिलाफ आरोप प्रसारित किए। अदालत के मुताबिक, चैनल ने भारतीय प्रेस परिषद (Press Council of India) की ओर से तय पत्रकारिता के आचरण संबंधी मानकों और नैतिक सिद्धांतों का पालन नहीं किया।

बैंक के एमडी और सीईओ के इस्तीफे के बाद शुरू हुआ विवाद

यह मामला कर्नाटक बैंक के तत्कालीन प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD एवं CEO) श्रीकृष्णन हरि हरा शर्मा के इस्तीफे के बाद शुरू हुआ था। उन्होंने 29 जून 2025 को इस्तीफा दिया था।

बैंक के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 के ऑडिट में सामने आया था कि शर्मा ने सलाहकारों और अन्य राजस्व खर्चों पर अपने निर्धारित अधिकारों से अधिक 1.16 करोड़ रुपये खर्च किए थे। इसके बाद बैंक के बोर्ड ने ऑडिट के निष्कर्षों पर विचार किया और संबंधित राशि की वसूली की सिफारिश की। बैंक ने इन घटनाक्रमों की जानकारी 14 मई 2025 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को दी थी।

इसके बाद शर्मा ने व्यक्तिगत कारणों और मुंबई स्थानांतरित होने की इच्छा का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया।

बैंक की वित्तीय स्थिति को लेकर प्रसारण पर आपत्ति

कर्नाटक बैंक ने अदालत में आरोप लगाया कि BTV News ने इस्तीफे से जुड़े घटनाक्रमों की पुष्टि किए बिना बैंक की वित्तीय स्थिति, आंतरिक कामकाज और ग्राहकों की जमा राशि की सुरक्षा को लेकर सनसनीखेज और मानहानिकारक दावे प्रसारित किए।

बैंक के अनुसार, चैनल पर ऐसी बातें कही गईं जिनसे जमाकर्ताओं के पैसे के गलत इस्तेमाल की आशंका जताई गई और लोगों को बैंक में खाता खोलने से पहले सावधानी बरतने की सलाह दी गई। चैनल ने कथित तौर पर बैंक में वित्तीय गड़बड़ियों और निदेशकों के बीच विवाद होने की बातें भी प्रसारित कीं।

बैंक ने दावा किया कि इन प्रसारणों से निवेशकों और जमाकर्ताओं के बीच चिंता पैदा हुई और बैंक के निदेशकों को कई सवालों के जवाब देने पड़े।

शेयर की कीमत गिरने का भी किया था दावा

बैंक ने अपनी याचिका में कहा कि प्रसारणों से उसकी प्रतिष्ठा और कारोबारी हितों को नुकसान पहुंचा। बैंक के मुताबिक, 26 जून 2025 को कारोबार बंद होने के समय उसके शेयर की कीमत करीब 207 रुपये थी और प्रसारणों के बाद इसमें तेज गिरावट आई।

हालांकि, शेयर की कीमत में गिरावट से जुड़ी बात बैंक की ओर से अदालत में किया गया दावा था।

कर्नाटक बैंक ने 30 जून 2025 को मानहानि का मुकदमा दायर किया था। इसमें बैंक ने 1 लाख रुपये के हर्जाने, सार्वजनिक माफी और भविष्य में ऐसे मानहानिकारक प्रसारणों पर स्थायी रोक लगाने की मांग की थी।

अदालत में पेश नहीं हुआ न्यूज चैनल

मामले की सुनवाई के दौरान BTV News समन मिलने के बावजूद अदालत में पेश नहीं हुआ। इसके बाद अदालत ने चैनल की अनुपस्थिति में मामले की सुनवाई आगे बढ़ाई।

अदालत ने बैंक के मुख्य कारोबार अधिकारी चंद्रशेखर की गवाही के साथ ऑडिट किए गए वित्तीय विवरण, तत्कालीन एमडी के इस्तीफे का पत्र, टीवी प्रसारणों की तस्वीरों और संबंधित सामग्री वाली सीडी की जांच की।

इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने माना कि चैनल ने बैंक के प्रबंधन से विश्वसनीय जानकारी हासिल किए बिना आरोप प्रसारित किए। अदालत के मुताबिक, इन प्रसारणों से बैंक की प्रतिष्ठा और कारोबारी हितों को नुकसान पहुंचा, जिसके लिए चैनल हर्जाना देने के लिए जिम्मेदार है।

हर्जाना, माफी और प्रसारण पर स्थायी रोक

अदालत ने कर्नाटक बैंक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए BTV News को 1 लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया। साथ ही, चैनल को बैंक से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और बैंक तथा उसके अधिकारियों के खिलाफ इस विवाद से संबंधित मानहानिकारक बयान प्रकाशित या प्रसारित करने से स्थायी रूप से रोक दिया।

अदालत ने मुकदमे का खर्च भी बैंक को देने का आदेश दिया।

यह फैसला मीडिया संस्थानों के लिए खबरों की पुष्टि, विश्वसनीय स्रोतों के इस्तेमाल और पत्रकारिता के पेशेवर मानकों के पालन के महत्व को रेखांकित करता है।

 

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21 न्यूज पब्लिशर्स ने डेटा प्राइवेसी कानून को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

भारत के डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून को लेकर मीडिया जगत में नई कानूनी बहस शुरू हो गई है।

Last Modified:
Tuesday, 27 October, 2026
SC95

भारत के डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून को लेकर मीडिया जगत में नई कानूनी बहस शुरू हो गई है। मुकेश अंबानी और गौतम अडानी से जुड़ी मीडिया कंपनियों समेत 21 समाचार प्रकाशकों ने इस कानून के कुछ प्रावधानों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। प्रकाशकों का कहना है कि कानून में पत्रकारों को स्पष्ट छूट नहीं मिलने से खोजी पत्रकारिता और खबरों के गोपनीय सूत्रों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) और अन्य मीडिया समूहों ने 6 अक्टूबर को याचिका दायर की थी। इस मामले की सुनवाई 27 अक्टूबर को होने की संभावना है। यह कानून के खिलाफ अब तक की प्रमुख कानूनी चुनौतियों में से एक है। 

किन मीडिया कंपनियों ने उठाए सवाल?

इस चुनौती में शामिल प्रकाशकों में मुकेश अंबानी की कंपनी नेटवर्क18, गौतम अडानी के मीडिया समूह से जुड़ा एनडीटीवी, इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स इंटरनेट जैसे नाम शामिल हैं। टाइम्स इंटरनेट, टाइम्स ऑफ इंडिया समूह का हिस्सा है।

प्रकाशकों की मुख्य आपत्ति यह है कि कानून में मीडिया संस्थानों और पत्रकारों के लिए स्पष्ट लिखित छूट नहीं दी गई है। DNPA का कहना है कि अगस्त में सरकार के साथ हुई बैठक में मीडिया कंपनियों को आश्वासन दिया गया था कि कानून प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करेगा। हालांकि, संगठन के मुताबिक, केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं है और पत्रकारों के लिए लिखित सुरक्षा प्रावधान जरूरी हैं।

DNPA ने अपनी याचिका में कानून के उन प्रावधानों को रद्द करने की मांग की है, जिन्हें वह पत्रकारिता के काम में बाधा डालने वाला मानता है।

पत्रकारिता की जांच प्रक्रिया पर क्या है आपत्ति?

प्रकाशकों की सबसे बड़ी चिंता व्यक्तिगत डेटा के इस्तेमाल के लिए सहमति लेने से जुड़े प्रावधानों को लेकर है। उनका तर्क है कि अगर किसी व्यक्ति के बारे में खोजी रिपोर्ट तैयार करने से पहले पत्रकार को उस व्यक्ति को सूचना देनी पड़े या उसकी सहमति लेनी पड़े, तो जांच प्रभावित हो सकती है।

DNPA का कहना है कि ऐसी स्थिति में जांच के दायरे में आया व्यक्ति सबूत मिटा सकता है या गवाहों पर दबाव डाल सकता है। इससे भ्रष्टाचार, कारोबारी गड़बड़ियों और चुनाव से जुड़े मामलों की पड़ताल करना मुश्किल हो सकता है।

प्रकाशकों ने यह भी चिंता जताई है कि कानून के तहत कोई व्यक्ति अपनी सहमति वापस लेकर अपने व्यक्तिगत डेटा को मिटाने की मांग कर सकता है। DNPA के मुताबिक, जनहित में प्रकाशित किसी खबर को सुरक्षित रखने के लिए स्पष्ट प्रावधान नहीं होने से मीडिया संस्थानों पर खबर हटाने या उसमें बड़े बदलाव करने का दबाव बन सकता है।

हालांकि, ये प्रकाशकों की ओर से अदालत में रखी गई दलीलें हैं। इनका अंतिम कानूनी अर्थ और कानून के अलग-अलग मामलों में लागू होने का तरीका अदालत के फैसले तथा संबंधित प्रावधानों की व्याख्या पर निर्भर करेगा।

पत्रकारों के सूत्रों की पहचान उजागर होने का डर

मीडिया समूहों ने सरकार को कुछ संगठनों से जानकारी मांगने के अधिकार से जुड़े प्रावधानों पर भी सवाल उठाए हैं। DNPA के मुताबिक, कानून के तहत संबंधित सरकारी प्राधिकरण कुछ मामलों में जानकारी मांग सकता है और नियमों का पालन नहीं करने पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

प्रकाशकों को आशंका है कि सरकार के पास जानकारी मांगने की व्यापक शक्तियां होने से पत्रकारों को अपने गोपनीय सूत्रों से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

खोजी पत्रकारिता में कई बार लोग भ्रष्टाचार, कंपनियों की कथित गड़बड़ियों या चुनावी अनियमितताओं से जुड़ी जानकारी पत्रकारों को गोपनीय तरीके से देते हैं। DNPA का कहना है कि अगर ऐसे लोगों की पहचान उजागर होने का डर बढ़ता है, तो वे पत्रकारों के साथ जानकारी साझा करने से बच सकते हैं।

संगठन ने यह भी कहा है कि कानून में सरकार को कुछ परिस्थितियों में छूट दी गई है, लेकिन पत्रकारों के लिए वैसी स्पष्ट सुरक्षा नहीं है। उसने यूरोपीय संघ, सिंगापुर और ब्रिटेन में पत्रकारिता से जुड़े सुरक्षा प्रावधानों का हवाला दिया है।

मई 2027 से लागू होने हैं कई प्रावधान

प्रकाशकों ने कानून के उन विवादित प्रावधानों को चुनौती दी है, जिन्हें मई 2027 से लागू किया जाना है। वे चाहते हैं कि अदालत कानून के अधिकांश विवादित हिस्सों को रद्द करे।

यह मामला डिजिटल व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता के बीच संतुलन से जुड़ा है। सरकार ने यह कानून लोगों के डिजिटल व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के उद्देश्य से लागू करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इससे मेटा और गूगल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी डेटा के इस्तेमाल और अनुपालन से जुड़ी जिम्मेदारियां बढ़ती हैं।

दूसरी ओर, मीडिया समूहों का कहना है कि पत्रकारिता के लिए स्पष्ट छूट के अभाव में कानून का इस्तेमाल खबरों की जांच और प्रकाशन को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है।

सरकार का पक्ष भी महत्वपूर्ण

रॉयटर्स के मुताबिक, DNPA, संबंधित मीडिया समूहों और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने उसकी टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया। इसलिए इस मामले में सरकार की विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।

सरकार पहले कह चुकी है कि वह प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान करती है और भारत में बड़ी संख्या में अखबारों तथा टीवी चैनलों वाला व्यापक मीडिया तंत्र मौजूद है। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता रैंकिंग पर भी आपत्ति जताई है।

अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से यह स्पष्ट होने की दिशा में अहम कदम उठ सकता है कि व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों और खोजी पत्रकारिता की जरूरतों के बीच कानूनी संतुलन कैसे तय किया जाए। फिलहाल, प्रकाशकों की आपत्तियां याचिका में दर्ज दलीलें हैं और अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है। 

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गुलाम जिलानी ने ‘मिंट’ में अपनी पारी को दिया विराम

मीडिया संस्थान मिंट (LiveMint) में पॉलिटिकल डेस्क एडिटर के तौर पर काम कर रहे गुलाम जिलानी ने संस्थान से विदाई ले ली है। वह फरवरी 2024 से अक्टूबर 2026 तक इस संस्थान से जुड़े रहे।

Last Modified:
Monday, 26 October, 2026
Gulam Jeelani

मीडिया संस्थान मिंट (LiveMint) में पॉलिटिकल डेस्क एडिटर के तौर पर काम कर रहे गुलाम जिलानी ने संस्थान से विदाई ले ली है। वह फरवरी 2024 से अक्टूबर 2026 तक इस संस्थान से जुड़े रहे। इस दौरान उन्होंने राजनीति और शासन से जुड़ी खबरों की कवरेज की जिम्मेदारी संभाली।

समाचार4मीडिया से बातचीत में जिलानी ने बताया कि इस दौरान उन्होंने बिहार व बंगाल चुनाव की ग्राउंड कवरेज भी की। जिलानी का कहना था कि वह जल्द ही अपनी नई पारी शुरू करेंगे और फिर उसके बारे में बताएंगे।

पत्रकारिता में 17 साल का अनुभव रखने वाले गुलाम जिलानी ने मिंट में ब्रेकिंग न्यूज, विस्तृत साक्षात्कार और विश्लेषणात्मक खबरों के जरिए राजनीतिक घटनाक्रमों को कवर किया। उन्होंने चुनाव, विरोध प्रदर्शनों और अन्य प्रमुख घटनाओं के दौरान मौके पर जाकर रिपोर्टिंग भी की। इसके अलावा, उन्होंने वीडियो इंटरव्यू और एक्सप्लेनर तैयार करने का काम किया।

मिंट से पहले गुलाम जिलानी एसोसिएटेड ब्रॉडकास्टिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (टीवी9) में सीनियर असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत थे। अगस्त 2022 से फरवरी 2024 तक यहां काम करते हुए उन्होंने News9Plus ऐप के लिए राजनीति पर 10 से 12 मिनट की वीडियो डॉक्यूमेंट्री तैयार कीं। साथ ही, News9Live वेबसाइट के लिए लेख लिखे और News9 Live के यूट्यूब लाइवस्ट्रीमिंग चैनल के लिए रिपोर्टिंग की।

इससे पहले वह मनीकंट्रोल में अगस्त 2020 से जुलाई 2022 तक असिस्टेंट एडिटर रहे। यहां उन्होंने राजनीति और शासन से जुड़े विषयों पर ब्रेकिंग न्यूज, साक्षात्कार और विश्लेषणात्मक लेख लिखे। उन्होंने विभिन्न स्रोतों और प्रतिस्पर्धी मीडिया संस्थानों की खबरों का चयन कर प्रकाशन के लिए तैयार करने का काम भी किया।

गुलाम जिलानी ने दिसंबर 2018 से अगस्त 2020 तक इंडिया टुडे ग्रुप के मेल टुडे में असिस्टेंट एडिटर के रूप में काम किया। यहां उन्होंने रिपोर्टरों की टीम का नेतृत्व करने के साथ कवर स्टोरीज के संपादन और चयन की जिम्मेदारी संभाली।

जनवरी 2017 से दिसंबर 2018 तक वह हिंदुस्तान टाइम्स में स्पेशल कॉरेस्पॉन्डेंट रहे। इस दौरान उन्होंने दिल्ली में राजनीति और शासन से जुड़े मुद्दों को कवर किया। उत्तर प्रदेश और पंजाब के विधानसभा चुनावों की रिपोर्टिंग के अलावा, उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दंगों तथा मांस और चमड़ा उद्योग पर कार्रवाई के प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी काम किया।

अपने करियर में गुलाम जिलानी हिंदुस्तान टाइम्स, सीएनएन-न्यूज18, कश्मीर रीडर और द पायनियर जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं। सीएनएन-न्यूज18 में उन्होंने उत्तर प्रदेश के स्टेट कॉरेस्पॉन्डेंट के तौर पर लखनऊ से रिपोर्टिंग की। वहीं, द पायनियर में उन्होंने शिक्षा से जुड़ी खबरों पर काम किया।

अप्रैल से सितंबर 2018 के बीच उन्होंने अमेरिका के मिनियापोलिस स्थित स्टार ट्रिब्यून में अल्फ्रेड फ्रेंडली प्रेस पार्टनर्स फेलो के रूप में भी काम किया। यहां उन्होंने खोजपरक रिपोर्टिंग और स्थानीय खबरों पर काम किया। गुलाम जिलानी ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई की है। इसके साथ ही उन्होंने यहीं से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की है।

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आउटलुक पब्लिशिंग में अदिति मल्होत्रा की नियुक्ति, बनीं जनरल मैनेजर–एचआर

आउटलुक पब्लिशिंग से पहले वह एचटी मीडिया लिमिटेड के फीवर एफएम में सीनियर मैनेजर–ह्यूमन रिसोर्स के पद पर कार्यरत थीं।

Last Modified:
Monday, 26 October, 2026
Aditi Malhotra Outlook

मीडिया कंपनी आउटलुक पब्लिशिंग (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड में अदिति मल्होत्रा ने जनरल मैनेजर–एचआर के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने लिंक्डइन पर अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की है। इस पद पर वह कंपनी के मानव संसाधन (एचआर) विभाग का नेतृत्व करेंगी।

अदिति मल्होत्रा को मीडिया, ब्रॉडकास्ट और डिजिटल कारोबार में एचआर के क्षेत्र में काम करने का अनुभव है। आउटलुक पब्लिशिंग से पहले वह एचटी मीडिया लिमिटेड के फीवर एफएम में सीनियर मैनेजर–ह्यूमन रिसोर्स के पद पर कार्यरत थीं। उन्होंने मार्च 2022 में यह जिम्मेदारी संभाली थी और सितंबर 2026 तक इस भूमिका में रहीं।

फीवर एफएम में उन्होंने कंटेंट, सेल्स, मार्केटिंग और कॉरपोरेट विभागों में एचआर बिजनेस पार्टनर के तौर पर काम किया।

इससे पहले अदिति मल्होत्रा ने जनवरी 2021 से मार्च 2022 तक बेटर डॉट कॉम में पीपल बिजनेस पार्टनर के तौर पर काम किया। उन्होंने सितंबर 2009 से फरवरी 2010 तक MAH India में मैनेजमेंट ट्रेनी के तौर पर काम किया। इसके बाद मार्च 2010 में रेड एफएम में मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में अपना सफर शुरू किया।

इसके बाद उन्होंने वहां एचआर से जुड़ी विभिन्न भूमिकाओं में काम किया और मार्च 2018 से जनवरी 2021 तक मैनेजर–ह्यूमन रिसोर्स के पद पर रहीं।

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डेल्टा एक्सचेंज बना भारत-न्यूजीलैंड सीरीज का सह-प्रायोजक

डेल्टा एक्सचेंज भारत-न्यूजीलैंड टी20 अंतरराष्ट्रीय और वनडे सीरीज का सह-प्रायोजक बना है। साझेदारी के तहत कंपनी की ब्रांडिंग मैदान और प्रसारण से जुड़े प्रमुख स्थानों पर दिखाई देगी।

Last Modified:
Monday, 26 October, 2026
delta

डेल्टा एक्सचेंज (Delta Exchange) भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेली जा रही टी20 अंतरराष्ट्रीय और वनडे सीरीज का सह-प्रायोजक बन गया है। इसके साथ ही क्रिप्टोकरेंसी डेरिवेटिव प्लेटफॉर्म ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के साथ अपनी साझेदारी को आगे बढ़ाया है।

भारत-न्यूजीलैंड सीरीज की शुरुआत 22 अक्टूबर से हुई है। इसमें पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय और पांच वनडे मुकाबले खेले जाएंगे। सीरीज 15 नवंबर तक चलेगी। साझेदारी के तहत डेल्टा एक्सचेंज की ब्रांडिंग मैदान और प्रसारण से जुड़े कई प्रमुख स्थानों पर दिखाई देगी। इसमें स्थिर और हाई-डेफिनिशन डिजिटल पेरिमीटर बोर्ड, डिजिटल साइट स्क्रीन और विकेट के पीछे वर्चुअल पिच मैट शामिल हैं।

मैच प्रेजेंटेशन, मैदान के बीच होने वाली चर्चाओं और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस्तेमाल होने वाले साझा बैकड्रॉप पर भी कंपनी की ब्रांडिंग नजर आएगी। इस साझेदारी का उद्देश्य क्रिकेट दर्शकों के बीच डेल्टा एक्सचेंज की पहचान मजबूत करना और उसके प्रोडक्ट्स के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।

डेल्टा एक्सचेंज खुद को एफआईयू-इंडिया (FIU-India) में पंजीकृत क्रिप्टोकरेंसी डेरिवेटिव एक्सचेंज के तौर पर पेश करता है।

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भास्कर रावत बने डिश टीवी के वाइस प्रेसिडेंट, ग्रोथ

भास्कर रावत डिश टीवी में वाइस प्रेसिडेंट, ग्रोथ बने हैं। इससे पहले वह ओटीटीप्ले में हेड ऑफ ग्रोथ थे और ग्रोथ, एनालिटिक्स, मार्केटिंग तथा कस्टमर एक्विजिशन पर काम करते रहे हैं।

Last Modified:
Monday, 26 October, 2026
bhaskar

भास्कर रावत (Bhaskar Rawat) ने डिश टीवी (DishTV) में वाइस प्रेसिडेंट, ग्रोथ (Vice President, Growth) के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी साझा की।

डिश टीवी से जुड़ने से पहले रावत एचटी मीडिया ग्रुप (HT Media Group) के ओटीटीप्ले (OTTplay) में हेड ऑफ ग्रोथ (Head of Growth) थे।

नई भूमिका में रावत ग्रोथ और एनालिटिक्स (Analytics) से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालेंगे। उनका फोकस कंज्यूमर बिजनेस के लिए स्केलेबल ग्रोथ सिस्टम तैयार करने पर रहेगा। उनके काम में मार्केटिंग, एनालिटिक्स, लाइफसाइकिल मैनेजमेंट, कस्टमर एक्विजिशन पार्टनरशिप और बिजनेस आउटकम्स शामिल हैं।

करियर के शुरुआती दौर में रावत ने आरपी-संजीव गोयनका ग्रुप (RP-Sanjiv Goenka Group), जियो (Jio), एयरटेल (Airtel) और लावा इंटरनेशनल (Lava International) समेत कई संस्थानों के साथ काम किया है।

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स्पॉटिफाई का मजबूत प्रदर्शन, राजस्व 5 अरब यूरो पहुंचा

स्पॉटिफाई ने तीसरी तिमाही में 16 फीसदी राजस्व वृद्धि दर्ज की। कंपनी का राजस्व 5 अरब यूरो, पेड सब्सक्राइबर 30.6 करोड़ और मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता 78.8 करोड़ पहुंच गए।

Last Modified:
Monday, 26 October, 2026
spotify

स्पॉटिफाई (Spotify) ने तीसरी तिमाही में सालाना आधार पर राजस्व में 16 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की है। कंपनी का राजस्व बढ़कर 5 अरब यूरो हो गया। इस दौरान भुगतान करने वाले ग्राहकों की संख्या 9 फीसदी बढ़कर 30.6 करोड़ पहुंच गई, जबकि मासिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं (Monthly Active Users) की संख्या 11 फीसदी बढ़कर 78.8 करोड़ हो गई।

कंपनी अब म्यूजिक से आगे बढ़कर पॉडकास्ट, क्रिएटर्स और ऑडियोबुक जैसे क्षेत्रों में भी अपनी पहुंच बढ़ा रही है। स्पॉटिफाई की योजना 2026 के अंत तक ऑडियोबुक की उपलब्धता 22 बाजारों से बढ़ाकर 180 से ज्यादा बाजारों तक करने की है। इससे दुनिया भर में 75 करोड़ से अधिक लोगों को स्ट्रीमिंग या खरीद के जरिए ऑडियोबुक उपलब्ध हो सकेंगी।

स्पॉटिफाई का पार्टनर प्रोग्राम (Partner Program) भी 35 से ज्यादा नए बाजारों तक पहुंचाया जा रहा है। इससे पात्र पॉडकास्ट क्रिएटर्स के लिए कमाई के नए अवसर खुलेंगे। कंपनी ने 34 बाजारों में क्रिएटर मेंबरशिप (Creator Membership) की शुरुआत भी की है। इसके तहत पात्र क्रिएटर्स अपने प्रशंसकों को विशेष सामग्री और अनुभव उपलब्ध करा सकेंगे।

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