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न्यूज एंकर के इमोशन को लेकर Zee बिजनेस के संपादक अनिल सिंघवी ने कही ये बात
‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ के मौके पर आयोजित एक समारोह में ‘Zee बिजनेस’ के मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी ने तमाम मुद्दों पर रखी अपनी बात
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
देश में टेलिविजन न्यूज इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने में अपना बहुमूल्य योगदान देने वालों को सम्मानित करने के लिए ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) समूह की ओर से 22 फरवरी को नोएडा के होटल रेडिसन ब्लू में ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) 2019 दिए गए।
इनबा का यह 12वां एडिशन था। इस मौके पर ‘न्यूजनेक्स्ट कॉन्फ्रेंस’ (NewsNext Conference) के तहत कई पैनल डिस्कशन भी हुए। ऐसे ही एक पैनल का विषय ‘Differentiating editorial content from propaganda’ रखा गया था। इस पैनल डिस्कशन के द्वारा लोगों को मीडिया के दिग्गजों के विचारों से रूबरू होने का मौका मिला। इस पैनल डिस्कशन को बतौर सेशन चेयर फिल्म मेकर, इंटरनेशनल एंटरप्रिन्योर, मोटिवेशनल स्पीकर और लेखक डॉ. भुवन लाल ने मॉडरेट किया। इस पैनल डिस्कशन में ‘जी बिजनेस’ के मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी, ‘एबीपी न्यूज’ के वाइस प्रेजिडेंट (प्लानिंग और स्पेशल कवरेज) सुमित अवस्थी, ‘आजतक’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) रोहित सरदाना, ‘राज्यसभा टीवी’ के एडिटर-इन-चीफ राहुल महाजन, ‘सीएनएन न्यूज18’ के एग्जिक्यूटिव एडिटर भूपेंद्र चौबे और ‘विऑन’ की एग्जिक्यूटिव एडिटर पलकी शर्मा उपाध्याय शामिल थे।
इस मौके पर डॉ. भुवन लाल का कहना था कि मैं जब भी भारत आता हूं और न्यूज चैनल्स देखता हूं तो यह देखकर अजीब सी फीलिंग होती है कि कुछ चैनल्स न्यूज के मामले में पूरी तरह एंटरटेनमेंट हो गए हैं। इन चैनल्स में सिर्फ शोरशराबा या एक तरह से कह सकते हैं कि बदतमीजी तक होती है। भुवन लाल द्वारा यह सवाल भी उठाया गया कि जब न्यूज चैनल्स अपने डिबेट शो में कुछ लोगों को बुलाते हैं और उनकी किसी बात से सहमत नहीं होते हैं, तो क्या उनके साथ किसी भी तरह की बातचीत कर सकते हैं? क्या ये जायज है?
इस पर ‘जी बिजनेस’ (Zee Business) के मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी का कहना था, ‘मेरे ख्याल से हम एकमात्र ऐसे चैनल होंगे, जो कोई पॉलिटिकल डिबेट नहीं करते हैं। इसलिए इस तरह की स्थिति या कहें कि समस्या हमारे सामने नहीं आती है। लेकिन पॉइंट यही है कि यदि आपने अपने एडिटोरियल कंटेंट में कोई एक लाइन पकड़ी हुई है और आप उस लाइन पर चलते हैं तो दर्शकों को वो साफ नजर आती है। अब यदि दर्शक उसे पसंद करेंगे तो कहेंगे कि यह चैनल सबसे बढ़िया है। जो उसे पसंद नहीं करेंगे, वे कहेंगे कि चैनल तो अपना प्रोपेगेंडा चला रहा है। लेकिन हमारे साथ ऐसा नहीं है। बिजनेस चैनल होने के नाते हम बिजनेस टॉक्स के तहत कंज्यूमर्स की जो समस्याएं हैं, वो कवर करते हैं। वहां यदि हम अपने कंज्यूमर्स के लिए आवाज उठाते हैं, तो हमें वाहवाही मिलती है। यदि हम किसी स्टॉक को रिकमंड करते हैं और उस स्टॉक में हमारे व्युअर्स पैसा बनाते हैं तो हमें वाहवाही मिलती है, लेकिन यदि वहां पर भी मैं स्टॉक को किस तरह रिकमंड कर रहा हूं अथवा मैं अपना न्यूज कंटेंट दे रहा हूं तो किस तरह से दे रहा हूं, ये भी मायने रखता है। यदि मैं अपनी बात को सॉफ्ट तरीके से समझा रहा हूं, आप (व्युअर्स) समझें तो ठीक है नहीं तो कोई बात नहीं, लेकिन यदि मैं बात को जोरदार तरीके से इस अंदाज में कहूं कि आप उस बात को मानें ही मानें यानी व्युअर्स पर थोपने की कोशिश करें, वहीं दिक्कत है।’
डॉ. भुवन लाल द्वारा यह पूछे जाने पर कि बतौर न्यूज एंकर पत्रकार के अंदर इमोशन कब आना चाहिए, अनिल सिंघवी का कहना था कि हर वक्त इमोशन आना चाहिए, लेकिन इमोशन का आना और इमोशन को लाना, इसमें काफी फर्क है। उनका कहना था कि बतौर न्यूज एंकर किसी भी चीज से इमोशन आना अच्छी बात है, लेकिन जब इसी इमोशन को लाने की कोशिश की जाती है, तो समस्या शुरू हो जाती है, क्योंकि वहां पर आप (न्यूज एंकर) एक्टिंग कर रहे होते हैं। एक अन्य सवाल के जवाब में अनिल सिंघवी का कहना था कि जितने चैनल अपने ओपिनियन में बंटे हुए हैं, उतने ही दर्शक भी अपने ओपिनयन में बंटे हुए हैं। आज के दौर में अधिकांश दर्शक भी ऐसे हो गए हैं कि उन्हें व्यूज चाहिए, न्यूज नहीं चाहिए। न्यूज चाहने वाले दर्शक बहुत कम बचे हैं। ऐसे में चैनल अपने-अपने हिसाब से व्यूज दे रहे हैं।
पैनल डिस्कशन के दौरान आखिर जब डॉ. भुवन लाल ने पूछा कि देश में किसी भी मुद्दे पर कई बार तमाम न्यूज चैनल्स सेलिब्रिटीज की राय दिखाने लग जाते हैं। क्या वे सभी सेलिब्रिटीज, जिनमें फिल्मी सेलिब्रिटीज भी शामिल हैं, क्या रातोंरात इतने एकसपर्ट हो जाते हैं कि वह किसी भी मुद्दे पर अपनी राय दे सकें। कई बार ये राय गलत होती है और लोगों पर ये राय एक तरह से थोप दी जाती है, क्या यह सही है? के जवाब में अनिल सिंघवी का कहना था, ‘लोग यदि न्यूज एंकर्स की राय जानना चाहते हैं तो उन्हें एक्टर-एक्ट्रैस की राय भी चाहिए होती है। लोगों को सेलिब्रिटीज की ओपिनयिन को सुनना अच्छा लगता है। हम तमाम एक्टर-एक्ट्रैस की राय पूछते हैं, हो सकता है कि इनमें से कई मना कर दें, लेकिन कुछ तो अपनी राय देंगे। ऐसे में जो सेलिब्रिटीज अपना ओपिनियन देते हैं, चैनल उसे चला देते हैं।’
पूरे पैनल डिस्कशन को आप इस विडियो पर क्लिक कर देख सकते हैं।
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