मार्मिक पोस्ट लिखकर रूबिका लियाकत ने ‘मां’ को यूं किया याद

किसी ने क्या खूब कहा है- ‘बिन बताए जो हर बात जान लेती है, वो ‘मां’ है जो मुस्कुराहटों में भी गम पहचान लेती है’।

Last Modified:
Wednesday, 28 July, 2021
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किसी ने क्या खूब कहा है- ‘बिन बताए जो हर बात जान लेती है, वो ‘मां’ है जो मुस्कुराहटों में भी गम पहचान लेती है’। दरअसल यहां मां की जिक्र इसलिए हो रहा है क्योंकि जानी मानी टीवी पत्रकार व सीनियर न्यूज एंकर रूबिका लियाकत ने अपनी को याद करते हुए मार्मिक पोस्ट लिखा है। दिल छू लेने वाले इस मार्मिक पोस्ट को कई लोग पसंद कर रहे हैं।

यहां देखिए, उनका ये ट्वीट-

बता दें कि रूबिका लियाकत की मां का दो माह पूर्व निधन हो गया था। आज ही के दिन उन्होंने राजस्थान के उदयपुर में अंतिम सांस ली थी। दरअसल, तब कई तरह के झूठे वीडियो शेयर किए जा रहे थे, जिसमें कहा जा रहा था कि डॉ. फातमा का निधन कोरोना की वजह से हुआ था, लेकिन रूबिका ने इस तरह की खबरों का खंडन करते हुए बताया था कि उनकी मां का निधन एक्यूट पैंक्रियाटिटीज (Acute Pancreatitis) की वजह से हुआ था।

रूबिका की मां के निधन के बाद उनके पिता अमर लियाकत ने भी एक ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने कहा था, ‘फातमा ने इतना प्यार अर्जित किया कि हर धर्म का पालन करने वालों ने भक्ति के साथ प्रार्थना की।’

बता दें कि रूबिका लियाकत की मां डॉ. फातमा लियाकत ने जीव विज्ञान में पीएचडी की थी। इसके बाद वे पानी में रहने वाले जीव-जंतुओं पर हानिकारक धातुओं के असर पर लंबे समय से शोध करती रही थीं।

नेटवर्क18 समूह में मैनेजिंग एडिटर के तौर पर कार्यरत ब्रजेश कुमार सिंह ने रूबिका लियाकत की मां के निधन के बाद एक पोस्ट लिखा था, जिसमें उन्होंने बताया था कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूबिका लियाकत से फोन पर उनकी मां की तबीयत के बारे में पूछा बल्कि उनसे बात भी की और हर संभव मदद का आश्वासन दिया था।  ब्रजेश कुमार सिंह ने 13 जून 2021 को लिखा था-

‘हाल ही में टीवी एंकर और पत्रकार रूबिका लियाकत के एक ट्वीट पर नजर पड़ी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पत्र को उद्धृत करते हुए ट्वीट किया था और आभार जताया था दुख की घड़ी में उनका साथ देने के लिए, हौसला बढ़ाने के लिए। दरअसल रूबिका की मां डॉक्टर फातमा लियाकत का इसी 28 मई को देहांत हो गया और पीएम मोदी ने इस सिलसिले में जो शोक संदेश भेजा था, वो महज खानापूर्ति नहीं, संवेदनशीलता से भरा हुआ था, दिवंगत फातमा लियाकत के व्यक्तित्व की चर्चा करते हुए था। रूबिका और मेरी जान-पहचान बहुत पुरानी नहीं रही है। चार साल पहले हम लोग एक ही मीडिया संस्थान के अलग-अलग चैनलों के लिए काम कर रहे थे, आते-जाते लिफ्ट में मुलाकात हो जाया करती थी। सोचा कि रूबिका को फोन कर लूं, किसी के लिए भी अपनी मां को खोना एक ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई नहीं हो सकती।

रूबिका को फोन किया तो पीएम मोदी के पत्र के पीछे की कहानी समझ में आई। पिछले महीने की दो तारीख (2 मई 2021) को रूबिका की मां फातमा लियाकत अचानक बीमार हो गई थीं। रूबिका को मां की बीमारी के बारे में पता चला तो वो नोएडा से भागकर उदयपुर पहुंचीं, जहां उनका परिवार रहता है। मां फातमा लियाकत जीव विज्ञान में पीएचडी करने के बाद पानी में रहने वाले जीव-जंतुओं पर हानिकारक धातुओं के असर पर लंबे समय से शोध करती रही थीं। मां की बीमारी के शुरुआती दिनों में रूबिका को ऐसा लगा मानो रमजान के उपवास के कारण गैस्ट्रोइंटेटाइटिस हो गई है, जिसमें सामान्य तौर पर लोग उल्टियां कर देते हैं। लेकिन तबीयत तेजी से खराब होती चली गई, किडनी, लीवर और हृदय पर भी गंभीर असर दिखने लगा, हालात मल्टी ऑर्गन फेल्योर जैसे बनने लगे। कोरोना के दौर में ऐसा लगा मानो ये सब कहीं कोरोना की वजह से तो नहीं हो रहा है। अस्पताल में दाखिल कराने की नौबत आई, जहां बाद में ये पता चला कि रूबिका की मां को पैंक्रेटाइटिस हो गया है यानी पैंक्रियाज को गंभीर नुकसान हो जाने वाली बीमारी। ये बीमारी काफी खतरनाक होती है, रूबिका और उनकी छोटी बहन अंजुम को भी इसका अहसास हो चला था, अहसास तो मां फातमा को भी था, खुद विज्ञान की स्कॉलर रही थीं वो। ऐसे ही माहौल के बीच ईद का त्योहार आ गया। जाहिर है ईद क्या मनती, पिता लियाकत अमर को दोनों बहनों ने घर पर रहने के लिए कहा हुआ था, खुद उदयपुर के पारस जेके अस्पताल के आईसीयू में अपनी मां के बिस्तर के पास खड़ी थीं दोनों। शुक्रवार, 14 मई 2021 को ईद के उस दिन, जब खुशियों की बजाय मां की बीमारी की वजह से दोनों बहनों के चेहरों पर मनहूसियत छाई हुई थी, रूबिका के फोन की घंटी बजी। कोई नंबर नहीं, स्क्रीन पर लिखा हुआ था नो कॉलर आईडी। समझ में नहीं आया कि फोन उठाएं या नहीं, फिर उठाया तो सामने से कहा गया प्रधानमंत्री जी बात करना चाहते हैं।

रूबिका ने कल्पना नहीं की थी कि पीएम मोदी सीधे फोन पर बात करेंगे। रूबिका सन्न रह गईं। ईद के उस दिन, कोरोना के खौफनाक माहौल और मां की बीमारी के बीच जब किसी नाते-रिश्तेदार का भी फोन नहीं आया था, तब देश के प्रधानमंत्री का फोन आना। कुछ समझतीं, उससे पहले आवाज आई- रूबिका जी, आपको ईद की ढेर सारी शुभकामनाएं। रूबिका ने मां की बीमारी की बात बताई, तो पीएम नरेंद्र मोदी ने उनके बारे में विस्तार से पूछताछ की और पूरा केस जानने के बाद आईसीयू की बेड पर पड़ी फातमा लियाकत से बात करने की इच्छा जताई। रूबिका ने अपनी मां को फोन दिया, मां खुद बोल पाने की हालत में नहीं थीं, ऊपर से पीएम मोदी के लाइन पर होने के बारे में सुना तो आंखें फटी की फटी रह गईं। दूसरी तरफ से पीएम मोदी कह रहे थे कि मुझे पूरा यकीन है कि आप पूरी हिम्मत से लड़ेंगी और इस बीमारी को मात देंगी।

फातमा लियाकत कुछ बोल तो नहीं पाईं, लेकिन हाथ उठाकर बेटी की तरफ ये इशारा जरूर किया कि वो पूरी हिम्मत से ये लड़ाई लड़ेंगी। पीएम मोदी के फोन का ये सिलसिला ईद के उस दिन करीब पांच-सात मिनट तक चला। पीएम ने फोन रखने के पहले रूबिका को आश्वस्त किया कि किसी किस्म की चिंता न करें, हर संभव मदद की जाएगी।

उस दिन के बाद पीएम मोदी का फोन तो नहीं आया, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय से रोजाना रूबिका के पास फोन आते रहे, मां के स्वास्थ्य की जानकारी ली जाती रही। यही नहीं, बीमारी से लड़ाई के लिए जितना भी श्रेष्ठ परामर्श और दवाईयां संभव हो सकती थीं, सब कुछ मुहैया कराया गया। यहां तक कि एम्स दिल्ली के डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया और इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर एंड बिलियरी साइंसेज के डायरेक्टर डॉक्टर एस.के. सरीन भी उदयपुर के अस्पताल में भर्ती फातमा लियाकत की चिकित्सा करने वाले डॉक्टरों का लगातार मार्गदर्शन करते रहे। उदयपुर के डॉक्टरों के आश्चर्य की सीमा नहीं थी कि आखिर ये हो क्या रहा है, एक तरफ इतने नामी-गिरामी डॉक्टर मार्गदर्शन कर रहे थे तो दूसरी तरफ ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया का कार्यालय किसी भी जरूरी दवा की सप्लाई करने के लिए तैयार बैठा था। जितना भी बेहतर इलाज संभव था, उसके सहारे फातमा लियाकत ने 26 दिन तक अपनी बीमारी के साथ संघर्ष किया। लेकिन होनी को टालना किसी के लिए भी संभव नहीं। आखिरकार 28 मई को उन्होंने दम तोड़ दिया, जब उन्हें एयर एंबुलेंस के जरिये उदयपुर से दिल्ली लाने की तैयारी की जा रही थी। फातमा लियाकत की मौत स्वाभाविक तौर पर पूरे परिवार के लिए गहरे सदमे और दुख का कारण रही। लेकिन रूबिका ही नहीं, उनके पिता को भी इस बात से काफी संतोष मिला कि दुख की इस घड़ी में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके साथ खड़े रहे। हर तरीके से मदद की, लगातार हिम्मत बंधाते रहे।

रूबिका लियाकत ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर धन्यवाद दिया। रूबिका और उनके पिता या फिर छोटी बहन के लिए पीएम मोदी का ये रूप सर्वथा नया था। खुद रूबिका का भी परिचय मोदी से कोई ज्यादा पुराना नहीं था। पहली बार 20 फरवरी 2019 को ही पीएम मोदी से रूबिका का आमने-सामने मिलना हुआ था, जब सउदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सुलेमान के सम्मान में आयोजित लंच पर रूबिका को आमंत्रित किया गया था। रूबिका और उनके परिवार को समझ में नहीं आया कि जिस नरेंद्र मोदी की छवि उनके अपने मुस्लिम समाज में पिछले दो दशक से खलनायक की बनाई गई है, जहां ये बात की जाती है कि मुसलमानों को मोदी से डर लगता है, वैसी छवि के उलट मुसीबत की घड़ी में, जब परिवार के लिए सबसे मुश्किल दौर था, पीएम मोदी उनके साथ चट्टान की तरह खड़े रहे, हर तकलीफ को दूर करने की कोशिश की। जिस मोदी के नाम को सामने कर मुस्लिम वोटों की ठेकेदारी करने वाले नेता देश के करोड़ों मुस्लिमों को डराते हैं, उस मोदी ने फातमा लियाकत की बीमारी से डरे परिवार को हिम्मत देने की हर कोशिश की।

रूबिका की मां का इंतकाल होने पर मोदी ने खत लिखा था। रूबिका और उनके परिवार के लिए मोदी का ये वो रूप था, जिसे कभी उन्होंने देखा नहीं था और न ही किसी से सुना था। इसी बीच फातमा लियाकत की मौत की खबर मिलने के बाद पीएम मोदी ने शोक संदेश भेजा, जिसमें न सिर्फ रूबिका की मां के बारे में विस्तार से लिखा था, बल्कि परिवार को ढांढस भी बंधाया गया था। पीएम मोदी का ये पत्र पाते ही रूबिका के पिता भावनाओं के आवेग में बह गये, उन्होंने बेटियों को कहा कि दुख के इस दौर में पहले फोन और फिर पत्र का आना, लियाकत परिवार कभी भूल नहीं पाएगा। भला परिवार का कोई सदस्य सोच भी कैसे सकता था कि पिछले सात साल से देश की बागडोर संभालने वाले पीएम मोदी अपनी तमाम व्यस्तताओं के बीच उदयपुर के इस साधारण परिवार के दुख की घड़ी में इस तरह से संबल बनकर उभरेंगे।

भावनाओं के इसी ज्वार में रूबिका ने पीएम मोदी को धन्यवाद देते हुए पत्र लिखा– ‘मेरी मां घर की प्रधान थीं, जब देश के प्रधान ने उनका हाल लिया तो वो पल पूरे परिवार के लिए बड़ा आत्मीय था। इतने व्यस्त समय में आपने मेरी मां के लिए वक्त निकाला, ये कोई घर का बड़ा ही कर सकता है।’

ब्रजेश जी आगे लिखते हैं, ‘ऐसा नहीं है कि मुसीबत की घड़ी में देश के प्रधानमंत्री के साथ ही घर के बड़े की तरह व्यवहार करने का मोदी का ये कोई अकेला किस्सा है। ऐसे सैकड़ों किस्से हैं, लेकिन ज्यादातर लोग इसलिए सामने नहीं आते, क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर पीएम मोदी के मानवीय और करुणामय स्वरूप को बताने वाले किस्से उन्होंने सार्वजनिक किए, तो ऐसा लगेगा मानों वो लोग पीएम मोदी से अपनी निकटता को साबित करने में लगे हैं।’

उनका ये पूरा लेख आप यहां पढ़ सकते हैं-

जब मुसीबत के समय मोदी होते हैं संकटमोचक, दुख की घड़ी में देते हैं साथ

  

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सड़क किनारे पड़ा मिला पत्रकार का शव, पुलिस ने जताई ये आशंका

शादी समारोह से लौट रहा था युवा पत्रकार। घटनास्थल से मिले प्रेस के आई कार्ड से उसकी शिनाख्त हुई।

Last Modified:
Saturday, 21 May, 2022
Journalist death

छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर इलाके में शुक्रवार की सुबह सड़क किनारे पत्रकार का शव मिला है। राखी थाना क्षेत्र में हुई इस घटना में मौके के पास मिले प्रेस के आई कार्ड से उसकी शिनाख्त युवराज शुक्ला के रूप में हुई। बताया जाता है कि युवराज शुक्ला स्थानीय न्यूज एजेंसी में बतौर पत्रकार कार्यरत था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शादी समारोह से वापस लौटने के दौरान सड़क हादसे में युवराज की मौत हुई है। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया है और मामला दर्ज कर अज्ञात वाहन की तलाश में जुट गई है।

राखी थाना प्रभारी कमला पुसाम ठाकुर के अनुसार, राखी पुलिस को शुक्रवार की सुबह नवा रायपुर इलाके में सड़क किनारे एक युवक का शव पड़ा होने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच के दौरान पाया कि घटना तड़के लगभग चार से पांच बजे के बीच की है। युवक की पहचान पत्रकार युवराज शुक्ला (32) के रूप में हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण सड़क हादसा बताया गया है।'

पुलिस के मुताबिक ग्राम नरदहा जिला दुर्ग का रहने वाला युवराज शुक्ला अपने बड़े पिताजी के घर ग्राम बुढेनी जिला धमतरी में शादी कार्यक्रम में गया हुआ था। शादी समारोह से लौटते समय सड़क हादसे में उसकी मौत हो गई। युवराज के शव के पास कुछ दूर पर उसकी वैगनआर कार भी खड़ी हुई थी। पुलिस के अनुसार, रास्ते में युवराज लघुशंका के लिए कार से बाहर निकला होगा, तभी किसी बड़े वाहन की चपेट में आने से सड़क हादसे का शिकार हो गया और घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई।

जिस इलाके में युवराज का शव मिला है, वहां कई खदानें हैं। ऐसे में आशंका यह भी जताई जा रही है कि युवराज की मौत के पीछे खनन माफिया का हाथ हो सकता है। हालांकि इस तरह की शिकायत पुलिस के पास नहीं पहुंची है।

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गोली मारकर पत्रकार की हत्या, हवा में हथियार लहराते हुए फरार हो गए बदमाश

पुलिस का कहना है कि इस हत्याकांड में शामिल सभी अपराधियों को चिन्हित कर लिया है, जल्द ही उन सभी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

Last Modified:
Saturday, 21 May, 2022
Shot Dead

बिहार के बेगूसराय में शुक्रवार की रात बेखौफ अपराधियों द्वारा एक पत्रकार की गोली मारकर हत्या करने का मामला सामने आया है। यह घटना बखरी थाना क्षेत्र के परिहारा ओपी स्थित बहुआरा साखू गांव की है। मृतक की पहचान साखू गांव निवासी सुभाष कुमार पुत्र अर्जुन के रूप में हुई है। सुभाष कुमार एक निजी न्यूज चैनल के लिए काम करते थे और अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्रवार को गांव में ही चौक के समीप एक लड़के की शादी का कार्यक्रम था। शाम को सुभाष उसी कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। वहां से लौटने के दौरान पिता एवं चाचा आगे बढ़ गए, इसी बीच वहां पहले से घात लगाए बदमाशों ने सुभाष के सिर में गोली मार दी और हथियार लहराते हुए फरार हो गए। आनन-फानन में स्थानीय लोगों द्वारा सुभाष को बखरी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि साखू में एक लड़के की शादी के अवसर पर आम-महुआ विवाह रस्म के दौरान रास्ते में डीजे पर गांव की लड़की के साथ कुछ लोगों ने छेड़खानी कर दी थी, जिसका सुभाष ने विरोध किया था। छेड़खानी करने वाला मुख्य आरोपी पड़ोसी गांव का था और इस वैवाहिक कार्यक्रम में आमंत्रित भी नहीं था। सुभाष द्वारा विरोध किया जाना आरोपी को नागवार गुजरा और भोज खाकर निकलते ही सैकड़ों लोगों के बीच अपने साथियों के साथ मिलकर सुभाष को गोली मारकर फरार हो गया।

वहीं मृतक के परिजनों का कहना है कि सुभाष की हत्या चुनावी रंजिश की वजह से हुई है। बताया जा रहा है कि सुभाष ने अपने एक नजदीकी को पंचायत में वार्ड सदस्य का चुनाव लड़ाया था, जिसमें वह जीत गया था। इससे प्रतिद्वंद्वी उनसे नाराज चल रहे थे। पुलिस सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच में जुट गई है।

इधर, सुभाष हत्याकांड की निंदा करते हुए तमाम पत्रकारों, राजनीतिक दलों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आक्रोश जताया है। पोस्टमार्टम के बाद शनिवार की सुबह सुभाष की पार्थिव देह को प्रेस क्लब लाया गया, जहां तमाम पत्रकारों ने पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। वहीं बेगूसराय के एसपी योगेंद्र कुमार का कहना है कि इस हत्याकांड में शामिल सभी अपराधियों को चिन्हित कर लिया है, जल्द ही उन सभी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।  

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देश में मीडिया-एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की ग्रोथ को लेकर अनुराग ठाकुर ने जताई ये उम्मीद

कान्स में ‘पालिस डेस फेस्टिवल्स’ (Palais des Festivals) में इंडिया फोरम को संबोधित करते हुए अनुराग ठाकुर ने लोगों को केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा इस दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी दी।

Last Modified:
Saturday, 21 May, 2022
Anurag Thakur

केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर का कहना है कि देश में मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा इस दिशा में उठाए जा रहे कदमों के आधार पर उम्मीद है कि भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री वर्ष 2025 तक हर साल 53 बिलियन डॉलर का राजस्व अर्जित कर सकती है।

कान्स में ‘पालिस डेस फेस्टिवल्स’ (Palais des Festivals) में इंडिया फोरम को संबोधित करते हुए अनुराग ठाकुर ने लोगों को केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा इस दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए कहा, ‘केंद्र ने भारत में सह-निर्माण, फिल्म शूटिंग और फिल्म सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए पिछले आठ वर्षों में प्रमुख पहल की हैं, वहीं उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने अपनी फिल्म सुविधा नीतियां तैयार की हैं और सह-निर्माण के अवसर प्रदान किए हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य देश के मीडिया और एंटरटेनमेंट ईकोसिस्टम को बढ़ावा देना है, जिससे 2025 तक सालाना 53 बिलियन डालर अर्जित होने की उम्मीद है।’

इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत में ओटीटी बाजार सालाना 21 फीसदी की दर से बढ़कर वर्ष 2024 तक करीब दो बिलियन डॉलर होने का अनुमान है। यह वर्ष कान्स फिल्म फेस्टिवल और भारत-फ्रांस राजनयिक संबंधों की स्थापना दोनों का 75वां वर्ष है। कान्स के महत्व पर बोलते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में 'फेस्टिवल डी कान्स' ने भारत-फ्रांस संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मंत्री ने भारतीय सिनेमा की ऐतिहासिक ऊंचाइयों के बारे में बात की और कहा कि भारतीय कंटेंट वैश्विक दर्शकों के दिल और दिमाग पर राज कर रहा है। कान्स में भारत की वर्तमान मौजूदगी पर बोलते हुए, मंत्री ने कहा, ‘भारत आपको ग्लोबल ऑडियंस, देश की सिनेमाई उत्कृष्टता, तकनीकी कौशल, समृद्ध संस्कृति और स्टोरटैलिंग की शानदार विरासत का स्वाद चखाना चाहता है। रेड कार्पेट पर भारत की मौजूदगी ने न केवल विभिन्न भाषाओं और क्षेत्रों के अभिनेताओं और फिल्म निर्माताओं के प्रतिनिधित्व के मामले में, बल्कि ओटीटी प्लेटफार्म्स के रूप में हमारी सिनेमाई उत्कृष्टता की विविधता को नई पहचान दी है, जिसमें संगीतकारों और लोक कलाकारों की भी मजबूत उपस्थिति है।‘

अनुराग ठाकुर ने वादा किया कि सरकार भारत को एक वैश्विक सामग्री उप-महाद्वीप (global content) में बदलने के लिए सभी आवश्यक उपाय करेगी और भारत को एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) सेक्टर के लिए पसंदीदा पोस्ट-प्रोडक्शन हब बनाने के लिए युवाओं के कौशल का उपयोग करेगी और इसके लिए सरकार तेजी से काम करेगी। उन्होंने कहा कि ये कदम अगले पांच वर्षों में देश को दुनिया भर में अग्रणी गुणवत्ता सामग्री उत्पादक देशों की लिस्ट में पहुंचा देंगे। गौरतलब है कि इस साल 75वें कान्स फिल्म फेस्टिवल का आयोजन फ्रांस में किया गया है। यह फेस्टिवल 28 मई तक चलेगा।

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बालाजी टेलिफिल्म्स में ग्रुप CEO नचिकेत पंतवैद्य ने लिया ये बड़ा फैसला

कंपनी द्वारा ‘बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज’ (BSE) को दी गई सूचना के अनुसार, वह 31 मई 2022 तक कंपनी के साथ बने रहेंगे।

Last Modified:
Friday, 20 May, 2022
Nachiket Pantvaidya

‘बालाजी टेलिफिल्म्स’ (Balaji Telefilms) में ग्रुप चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर नचिकेत पंतवैद्य ने एक साल के भीतर ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी द्वारा ‘बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज’ (BSE) को दी गई सूचना के अनुसार, वह 31 मई 2022 तक कंपनी के साथ बने रहेंगे। बता दें कि कंपनी के साथ नचिकेत की यह दूसरी पारी थी।

इस बारे में ‘बीएसई’ को दी गई जानकारी में कंपनी ने कहा है, ‘सूचीकरण विनियमों के रेगुलेशन 30 के अनुसार हम आपको सूचित करना चाहते हैं कि निदेशक मंडल की 20 मई 2022 को हुई बैठक में कंपनी के ग्रुप सीईओ नचिकेत पंतवैद्य के इस्तीफे को रिकॉर्ड में ले लिया गया है, जो 31 मई, 2022 से प्रभावी होगा।’

बता दें कि ‘बालाजी टेलिफिल्म्स’ ने जुलाई 2021 में पंचवैद्य को ग्रुप सीईओ के पद पर नियुक्त किया था। ‘बालाजी’ से पहले पंचवैद्य ’एशियानेट न्यूज मीडिया एंड एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड’ (AMEL) में बतौर मैनेजिंग डायरेक्टर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। वहीं, इससे पहले वह ‘बालाजी टेलिफिल्म्स’ में ग्रुप चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर और ऑल्ट बालाजी (ALTBalaji) में सीईओ के तौर पर जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

पंतवैद्य को ब्रॉडकास्ट और डिजिटल मीडिया कंपनियों के साथ काम करने का 20 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की कुछ जानी-मानी कंपनियों जैसे-‘सोनी एंटरटेनमेंट टेलिविजन’, ‘स्टार प्लस’, ‘स्टार प्रवाह’ और ‘फॉक्स टेलिविजन स्टूडियो’ में वरिष्ठ पदों पर अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। वह ‘डिज्नी’ और ‘बीबीसी’ का हिस्सा भी रहे हैं। 

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Alt Balaji में इस बड़े पद से अलग हुईं दिव्या दीक्षित

दिव्या दीक्षित इस कंपनी में करीब पौने चार साल से जुड़ी हुई थीं। 31 मई 2022 को इस कंपनी में उनका आखिरी कार्यदिवस होगा।

Last Modified:
Friday, 20 May, 2022
Divya

‘ऑल्ट बालाजी’ (ALTBalaji) में सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (Marketing, Partnerships & Revenue) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 31 मई 2022 को इस कंपनी में उनका आखिरी कार्यदिवस होगा।

बता दें कि दिव्या दीक्षित इस कंपनी में करीब पौने चार साल से जुड़ी हुई थीं। उन्होंने सितंबर 2018 में इस कंपनी में बतौर सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (मार्केटिंग) के पद पर जॉइन किया था।

दीक्षित के पास डिजिटल, ब्रॉडकास्टिंग, टेलिकॉम, म्यूजिक और रिटेल सहित कई इंडस्ट्री में विभिन्न ब्रैंड्स के साथ काम करने का 20 साल से ज्यादा का अनुभव है। पूर्व में वह ZEE5, LeEco और Percept आदि कंपनियों में अपनी भूमिका निभा चुकी हैं।

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अब इस मीडिया समूह में बड़ी भूमिका निभाएंगे वरिष्ठ पत्रकार गीतेश्वर प्रसाद सिंह

उत्तर भारत और पूरब के दर्जन भर से अधिक प्रमुख शहरों में तमाम बड़े अखबारों में अपनी जिम्मेदारी निभाने के बाद वरिष्ठ पत्रकार गीतेश्वर प्रसाद सिंह ने अब दक्षिण भारत का रुख किया है।

Last Modified:
Thursday, 19 May, 2022
Giteshwar Prasad Singh

उत्तर भारत और पूरब के दर्जन भर से अधिक प्रमुख शहरों में तमाम बड़े अखबारों में अपनी जिम्मेदारी निभाने के बाद वरिष्ठ पत्रकार गीतेश्वर प्रसाद सिंह ने अब दक्षिण भारत का रुख किया है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित मीडिया ग्रुप 'ईटीवी भारत' के साथ नई शुरुआत की है और हैदराबाद में बतौर रीजनल न्यूज को-ऑर्डिनेटर के पद पर जॉइन किया है।

इससे पहले गीतेश्वर प्रसाद सिंह करीब चार-पांच महीने से ‘यूपीडीएफ’ समूह के साथ जुड़े हुए थे। दरअसल, वह इस ग्रुप द्वारा लॉन्च की जा रही नेशनल मैगजीन की योजना को मूर्त रूप देने के लिए इस समूह का हिस्सा बने थे। अब मैगजीन के पहले एडिशन के लिए अपना एडिटोरियल पार्ट पूरा करने के बाद वह 'ईटीवी भारत' आए हैं। ‘यूपीडीएफ’ में आने से पहले गीतेश्वर प्रसाद करीब पौने तीन साल से ‘हिन्दुस्तान’ के भागलपुर संस्करण में स्थानीय संपादक के तौर पर अपनी भूमिका निभा रहे थे।

मूल रूप से छपरा (बिहार) के रहने वाले गीतेश्वर प्रसाद सिंह को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव है। ‘हिन्दुस्तान’ से पहले वह ‘पंजाब केसरी’,’ दैनिक जागरण’ और ‘अमर उजाला’ में प्रमुख जिम्मेदारी निभा चुके हैं। गीतेश्वर प्रसाद सिंह की पत्रकारिता के साथ-साथ साहित्य में गहरी रुचि है। वह गजलें लिखने के शौकीन भी हैं। दूरदर्शन और आकाशवाणी से इनकी कई रचनाएं प्रसारित हुई हैं।

उन्होंने ‘इलाहाबाद विश्वविद्यालय’ से दर्शनशास्त्र में एमए और ‘पूर्वांचल विश्वविद्यालय’ से हिंदी में एमए तक की पढ़ाई की है। इसके अलावा उन्होंने ‘उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन ओपन यूनिवर्सिटी’ से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।

गीतेश्वर प्रसाद सिंह को ‘आचार्य लक्ष्मीकांत मिश्र राष्ट्रीय सम्मान’ समेत तमाम पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। समाचार4मीडिया की ओर से गीतेश्वर प्रसाद सिंह को उनके नए सफर के लिए ढेरों शुभकामनाएं।

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इन 12 पत्रकारों को मिला इस बार का ‘देवऋषि नारद सम्मान'

‘इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र’, दिल्ली की ओर से आयोजित कार्यक्रम में आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर एवं केन्द्रीय राज्यमंत्री संजीव कुमार बालियान ने पत्रकारों को किया सम्मानित

Last Modified:
Thursday, 19 May, 2022
Narad Samman

आरएसएस की संचार शाखा ‘इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र’, दिल्ली की ओर से पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे पत्रकारों को दिए जाने वाले ‘नारद सम्मान 2022’ के विजेताओं की घोषणा कर दी गई है।

12वें देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान 2022 के तहत नारद जी की जयंती पर पत्रकारिता जगत की महत्ता एवं पत्रकारों की तपस्या एवं बलिदान को सम्मान देने के लिए 18 मई 2022 को स्पीकर हॉल, कांस्टीट्यूशन क्लब, नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में विभिन्न श्रेणियों में 12 पत्रकारों को सम्मानित किया गया।

इसके तहत आशुतोष कुमार पाण्डेय (हिन्दुस्थान समाचार) को युवा पत्रकार नारद सम्मान, निशांत कुमार आजाद (ऑर्गनाइजर) को स्त्री सरोकार/महिला संवेदना पत्रकार नारद सम्मान, उमाशंकर मिश्र (इंडिया साइंस वायर) को ग्रामीण पत्रकारिता नारद सम्मान, सुरेश कुमार जायसवाल (दूरदर्शन न्यूज) को न्यूज रूम सहयोग नारद सम्मान, नुपुर जे. शर्मा (ऑप इंडिया) को डिजिटल पत्रकार नारद सम्मान, प्रियंका देव (न्यूज जंक्शन) को सोशल मीडिया पत्रकार नारद सम्मान से सम्मानित किया गया।

इसके साथ ही मिहिर सिंह (पंजाब केसरी) को उत्कृष्ट छाया चित्रकार (प्रिंट) नारद सम्मान, विद्यानाथ झा (न्यूज नेशन) को उत्कृष्ट छायाचित्रकार (टीवी) नारद सम्मान, उमेश चतुर्वेदी को उत्कृष्ट स्तम्भकार नारद सम्मान, पीएम नारायणन को विदेशी पत्रकारिता नारद सम्मान (भारत संबंधित पत्रकारिता) से सम्मानित किया गया। इन सभी को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह, शाल तथा 11,000/- रुपये का चेक देकर सम्मानित किया गया।

वरिष्ठ पत्रकार दीपक उपाध्याय को उत्कृष्ट पत्रकार नारद सम्मान से सम्मानित किया गया। इन्हें प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह, शाल तथा 51,000/- रुपये की चेक देकर सम्मानित किया गया।

पूर्व संपादक, पत्रकार, स्तंभकार एवं लेखक बलबीर पुंज को आजीवन सेवा नारद सम्मान से सम्मानित किया गया। इन्हें प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह, शाल तथा 1,00,000/- रुपये का चेक देकर सम्मानित किया गया।

इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर मुख्य वक्ता तथा डॉ. संजीव कुमार बालियान, राज्यमंत्री, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार मुख्य एवं आनंद नरसिम्हन, प्रबंध संपादक, नेटवर्क 18, विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुनील आंबेकर ने कहा कि हमारे जितने भी प्रोफेशन हैं, वह जब से शुरू हुए उसमें स्किल और नॉलेज पर तो जोर दिया ही गया, साथ ही उसका एक चरित्र भी दिया गया। हम जिस व्यक्ति को जिस प्रोफेशन की जो शिक्षा दे रहे हैं उसमें उसको ग्रहण करने की क्षमता होनी चाहिए। उसे जो शक्ति दे रहे है उसमे उपयोग करने की क्षमता होनी चाहिए। वह शक्ति का दुरुपयोग न करें और समाज के हित में उपयोग करें। नारद जी पत्रकारिता के इसी शक्ति का प्रतीक है। जहां शक्ति का उपयोग समाज के हित में होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में सत्य को लेकर जाना और सत्य के साथ कोई समझौता नहीं करना। किस सत्य को लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि उसमें लोक हित सर्वोपरि चाहिए। एक रिस्पांसिबल जर्नलिज्म की बहुत जरूरत है। नारद जी समाचार पहुंचाने के साथ-साथ समाधान भी बताते और उसका मार्ग भी दिखाते थे।

मीडिया में सकारात्मकता की आवश्यकता पर जोर देते हुए आंबेकर ने कहा की वातावरण में बदलाव आया है। आज भारत के लोग आकांक्षी बनकर आगे बढ़ना चाहते हैं, जो अनुकूल बात करता है वह लोगों को अच्छी लगती है प्रतिकूल बातें अच्छी नहीं लगती है। मीडिया में भी लोग सकारात्मकता से आगे बढ़ रहे हैं। मीडिया में जिम्मेदारी की आवश्यकता है। हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने समाचार पत्रों को लोक जागरण का माध्यम बनाया। वे स्वतंत्रता सेनानी हमारी पत्रकारिता के आदर्श है। मीडिया में बदलती तकनीक पर उन्होंने कहा की हमें नई तकनीक से डरने की जरूरत नहीं है। टेक्नोलॉजी के झटके पहले भी लगते रहे हैं और आगे भी लगता रहेंगे।

वहीं, कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. संजीव कुमार बालियान, राज्यमंत्री, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार ने कहा कि पत्रकारिता इतनी महत्वपूर्ण है कि वह हर जनमानस को प्रभावित करती है। वह सकारात्मक दिशा में होनी चाहिए न कि नकारात्मक दिशा में।

डॉ. बालियान ने कहा कि हमें सभी विचारों का सम्मान करना चाहिए है। हर व्यक्ति अपनी विचारधारा पर काम करने के लिए स्वतंत्र है। कोई भी विचारधारा हो पत्र,कारिता में निष्पक्ष होना बहुत जरूरी है। आपको किसी के पक्ष या विपक्ष में होने की जरूरत नहीं है। जो तथ्य है, उस तत्व के साथ होना है और तथ्यों के आधार पर ही विश्लेषण होना चाहिए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि आनंद नरसिम्हन (प्रबंध संपादक, नेटवर्क18) ने कहा कि देवऋषि नारद जी की भूमिका जो हम लोगों के मन में बनी है उनकी भूमिका उससे बहुत बड़ी है। हममें से कितनों ने नारद संहिता पड़ी है? हमसे कितनों ने अपने ग्रंथों को पड़ा है चाहे वह किसी भी भाषा में हो? हमने हमारे सभ्यता हमारी संस्कृति के बारे में क्या लिखा क्या कहा? आज बोलचाल में आ रहा है कि हमारा इतिहास क्या है? इंडिया और इन्वेडर? हमारा इतिहास आक्रान्ताओं का इतिहास है या भारत का इतिहास हमारा इतिहास है? आज समय बदल रहा है। आज मीडिया में खुलकर के लोग भारत की बात कहने लगे हैं जो कि पहले संभव नहीं था।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेन्द्र ठाकुर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र प्रचार प्रमुख अनिल जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली प्रान्त कार्यवाह भारत जी, दूरदर्शन के महानिदेशक मयंक अग्रवाल, एडीजी प्रिया कुमार सहित कई गणमान्य अतिथि शामिल हुए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मीडिया कर्मी, संपादक, वरिष्ठ पत्रकार शामिल हुए। इन्द्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष अशोक सचदेवा ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

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‘न्यूज नेशन’ छोड़कर एंकर पूजा शर्मा ने तलाशी नई मंजिल

हिंदी न्यूज चैनल ‘न्यूज नेशन’ (News Nation) के मध्य प्रदेश-छ्त्तीसढ़ चैनल से जुड़ी टीवी पत्रकार पूजा शर्मा ने यहां अपनी पारी को विराम दे दिया है

Last Modified:
Wednesday, 18 May, 2022
PoojaSharma45454

हिंदी न्यूज चैनल ‘न्यूज नेशन’ (News Nation) के मध्य प्रदेश-छ्त्तीसढ़ चैनल से जुड़ी टीवी पत्रकार पूजा शर्मा ने यहां अपनी पारी को विराम दे दिया है और अब अपनी नई पारी की शुरुआत ‘इंडिया टीवी’ से बतौर न्यूज एंकर की है।

बता दें कि ‘न्यूज नेशन एमपी-छत्तीसगढ़’ चैनल में भी वे न्यूज एंकर के पद पर कार्यरत थीं। जनवरी, 2022 में उन्होंने यहां अपना सफर शुरू किया था। इसके पहले वे ‘न्यूज इंडिया’ चैनल में कार्यरत थीं।

दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में स्नातक रही पूजा शर्मा ने 21 साल की उम्र में एंकरिंग की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने पत्रकारिता करियर की शुरुआत JK24x7News चैनल के साथ अक्टूबर 2020 में की थी। 

मूल रूप से उत्तर प्रदेश की मथुरा की रहने वाली पूजा शर्मा पत्रकारिता के क्षेत्र में अब तक डेढ़ साल का अनुभव है।    

समाचार4मीडिया की ओर से पूजा शर्मा को उनकी नई पारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं। 

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SONY से जुड़े प्रदीप हेजमादी, मिली यह बड़ी जिम्मेदारी

इसके साथ ही कंपनी ने राकेश चक्रवर्ती (Rakesh Chakraborty) को सोनी एंटरटेनमेंट टेलिविजन के लिए हेड (Fiction Programming, Strategy & Insights) के पद पर नियुक्त किया है।

Last Modified:
Tuesday, 17 May, 2022
Pradeep Hejmadi

‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया’ (SPNI) ने प्रदीप हेजमादी (Pradeep Hejmadi) को ‘सोनी एंटरटेनमेंट टेलिविजन’(SET) के लिए बिजनेस ऑपरेशंस हेड के पद पर नियुक्त किया है। वह एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट और बिजनेस हेड (SET, Sony LIV और StudioNext) दानिश खान को रिपोर्ट करेंगे। इसके साथ ही कंपनी ने राकेश चक्रवर्ती (Rakesh Chakraborty) को ‘सोनी एंटरटेनमेंट टेलिविजन’ के लिए हेड (Fiction Programming, Strategy & Insights) के पद पर नियुक्त किया है। ‘सोनी एंटरटेनमेंट टेलिविजन’ की फिक्शन प्रोग्रामिंग टीम और इनसाइट व स्ट्रैटेजी टीम चक्रवर्ती को रिपोर्ट करेगी, जबकि वह हेजमादी को रिपोर्ट करेंगे।

बता दें कि ‘सोनी एंटरटेनमेंट टेलिविजन’ को जॉइन करने से पहले हेजमादी डेढ़ साल से ज्यादा समय से ‘Hathway Cable & Datacom’ में चीफ मार्केटिंग ऑफिसर की जिम्मेदारी निभा रहे थे। हेजमादी को 28 साल से ज्यादा का अनुभव है। पूर्व में वह ‘जी टीवी’ (Zee TV) में बिजनेस हेड के पद पर भी काम कर चुके हैं।  

वहीं, चक्रवर्ती को एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में काम करने का 20 साल से ज्यादा का अनुभव है। इनमें से 11 साल से ज्यादा समय तक वह ‘स्टार इंडिया नेटवर्क’ (Star India network) के साथ जुड़े रहे हैं। ‘सोनी एंटरटेनमेंट टेलिविजन’ को जॉइन करने से पहले वह ‘स्टार प्लस’ (Star Plus) में मार्केटिंग हेड की भूमिका निभा रहे थे।

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‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ को शैलेश लोढ़ा ने कहा अलविदा!

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शो के प्रड्यूसर असित कुमार मोदी उन्हें मनाने के प्रयासों में जुटे हुए हैं।

Last Modified:
Tuesday, 17 May, 2022
ShaileshLodha453

‘सोनी सब’ (Sony Sab) पर प्रसारित होने वाले ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ धारावाहिक में तारक मेहता का किरदार निभा रहे शैलेश लोढ़ा के बारे में खबर मिली है कि उन्होंने इस शो को छोड़ दिया है। हालांकि, उन्होंने यह निर्णय क्यों लिया, फिलहाल इसकी वजह सामने नहीं आई है। इसके अलावा शैलेश लोढ़ा की ओर से भी इस बात की आधिकारिक रूप से घोषणा नहीं की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शो के प्रड्यूसर असित कुमार मोदी उन्हें मनाने के प्रयासों में जुटे हुए हैं। जाने-माने कवि, लेखक, अभिनेता और ‘तारक मेहता’ के नाम से घर-घर में मशहूर शैलेश लोढ़ा के बड़ी संख्या में प्रशंसक हैं और इस शो के किरदार ‘जेठालाल’ के साथ उनकी दोस्ती को लोग काफी पसंद करते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लोढ़ा ने पहले ही इस शो की शूटिंग बंद कर दी है और शो में लौटने का उनका कोई इरादा नहीं है।

गौरतलब है कि यह शो टेलीविजन के इतिहास में सबसे लंबे समय तक चलने वाले शो में से एक है। साल 2008 से शुरू हुआ ये शो लगातार दर्शकों का मनोरंजन कर रहा है। इस शो को लोग बहुत पसंद करते हैं। जितना मशहूर यह टीवी सीरियल है, उससे भी कहीं ज्यादा मशहूर इसके किरदार हैं। 

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