पत्रकार सिद्दीकी कप्‍पन को मिली जमानत, कोर्ट ने रखी ये शर्त

हाथरस जाते वक्त गिरफ्तार किए गए जर्नलिस्ट सिद्दीकी कप्पन को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सशर्त जमानत दे दी है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 16 February, 2021
Last Modified:
Tuesday, 16 February, 2021
Kappan

हाथरस जाते वक्त गिरफ्तार किए गए जर्नलिस्ट सिद्दीकी कप्पन को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सशर्त जमानत दे दी है। कोर्ट ने उन्हें अपनी बीमार मां से मिलने जाने के लिए पांच दिन की जमानत दी है। कप्पन ने अपनी मां के स्वास्थ्य के आधार पर जमानत मांगी थी। 

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा कि सिद्दीकी कप्पन पुलिस की सुरक्षा में ही रहेंगे। पांच दिन के बाद सिद्दीकी कप्पन फिर जेल में रिपोर्ट करेंगे। जमानत के दौरान वह किसी और से मुलाकात नहीं करेंगे। उन्हें 24 घंटे पुलिस की सुरक्षा में रहना होगा। इसके अतिरिक्त वे इस दौरान कोई भी मीडिया या फिर सोशल मीडिया पर बयान जारी नहीं करेंगे। हालांकि वह परिवार और डॉक्टर से मुलाकात कर सकते हैं।

पिछले साल उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक दलित युवती से सामूहिक दुष्कर्म की घटना का मामला सामने आने के बाद वहां जा रहे कप्पन को गिरफ्तार किया गया था।

सिद्दीक कप्पन के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारियों की एक टीम भी जाएगी और केरल पुलिस उनके साथ सहयोग करेगी। सिद्दीकी कप्पन की तरफ से कोर्ट में पेश कपिल सिब्बल ने कहा कि गिरफ्तार पत्रकार सिद्दीकी कप्पन की मां का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। लिहाजा सिद्दीकी कप्पन को 5 दिन के लिए जमानत दी जाए।

वहीं यूपी सरकार ने कोर्ट में कहा कि गिरफ्तार पत्रकार सिद्दीकी कप्पन पर गंभीर मामला है, वो पीएफआई के एक्टिव सदस्य हैं, पैसों का मनी ट्रेल पता करना है, कुछ पोस्टर की भी जांच की जा रही है। अभी उन्हें जमानत देने का आधार नहीं बन रहा है। यूपी सरकार ने कहा कि सिद्दीकी कप्पन से जुड़े लोग केरल में पैसा इकट्ठा कर रहे हैं।  

यूपी सरकार ने कहा कि देश की सुरक्षा से बढ़कर मां का स्वास्थ्य या फिर कोई और बड़ा आधार नहीं हो सकता है। देश की सुरक्षा सबसे पहले है। सिद्दीकी कप्पन चार महीनों से उत्तर प्रदेश की मथुरा जेल में बंद हैं।

PFI से संबध रखने के आरोप में सिद्दीकी कप्पन को हाथरस जाते हुए गिरफ्तार किया गया था। सिद्दीकी कप्पन को 5 अक्टूबर 2020 को हाथरस जाते वक्त रास्ते में मथुरा पुलिस ने गिरफ्तार किया था। मथुरा पुलिस ने इस संबंध में दावा किया था कि उनका पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से रिश्ता है।

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पेगासस मामले में एडिटर्स गिल्ड ने भी SC का किया रुख, SIT जांच की मांग

पेगासस जासूसी मामले (pegasus spyware case) को लेकर अब एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 04 August, 2021
Last Modified:
Wednesday, 04 August, 2021
EGI

पेगासस जासूसी मामले (pegasus spyware case) को लेकर अब एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। अपनी याचिका में एडिटर्स गिल्ड ने पेगासस जासूसी सॉफ्टवेयर के जरिये सरकार द्वारा पत्रकारों और अन्य पर कथित तौर पर नजर रखने की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआइटी) के गठन का अनुरोध किया है। साथ ही यह जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराए जाने की मांग की है।

एडिटर्स गिल्ड की ओर से अदालत से यह भी मांग की गई है कि वह स्पाइवेयर कॉन्ट्रैक्ट पर सरकार से डिटेल और टारगेटेड लोगों की लिस्ट भी मांगे। बता दें कि कोर्ट इस मामले में 5 अगस्त को सुनवाई करेगा।

एडिटर्स गिल्ड की याचिका में कहा गया कि पत्रकारों का काम जनता को सूचना देने और सरकार को जवाबदेह बनाने का काम सुनिश्चित करने का है। गिल्ड के सदस्यों और सभी पत्रकारों का कर्तव्य है कि वे राज्य की कार्रवाई और निष्क्रियता के लिए सूचना, स्पष्टीकरण और संवैधानिक रूप से वैध औचित्य की मांग करके सरकार की सभी शाखाओं को जवाबदेह ठहराएं।

गिल्ड ने कहा कि इस भूमिका को पूरा करने के लिए प्रेस की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखा जाना चाहिए। याचिका में कहा गया, प्रेस की स्वतंत्रता पत्रकारों की रिपोर्टिंग में सरकार और उसकी एजेंसियों द्वारा हस्तक्षेप नहीं किए जाने पर निर्भर होती है। इसमें सूत्रों के साथ सुरक्षा एवं गोपनीयता के साथ बात करने की उनकी क्षमता, सत्ता के दुरुपयोग एवं भ्रष्टाचार की जांच, सरकारी अक्षमता को उजागर करना और सरकार के विरोध में या विपक्ष से बात करना शामिल है।

गिल्ड ने तर्क दिया कि भारत के नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि क्या सरकार संविधान के तहत अपने अधिकार की सीमाओं का अतिक्रमण कर रही है और उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

गौरलतलब है कि पेगासस जासूसी मामले में कई अन्य लोगों ने भी शीर्ष अदालत में याचिकाएं दायर की हैं, जिनमें वरिष्ठ पत्रकार एन. राम और शशि कुमार भी शामिल हैं। इसके अलावा भी कुछ पत्रकारों, वकील और राज्यसभा सांसद ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाकर इस मामले की जांच कोर्ट की निगरानी वाली SIT या किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच एजेंसी से करवाने की गुहार लगाई है। इनमें वकील एमएल शर्मा, CPI(M) से राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास, एक्टिविस्ट परंजॉय ठाकुरता सहित कुछ अन्य नाम शामिल हैं।

क्या है पेगासस केस

पिछले महीने के आखिर में कुछ मीडिया संगठनों के अंतरराष्ट्रीय समूह ने कहा था कि भारत में इजरायल की कंपनी के पेगासस स्पाइवेयर के जरिए सैंकड़ों मोबाइल नंबर्स की संभवत: निगरानी की गई, जिनमें दो मंत्री, 40 से अधिक पत्रकारों, तीन विपक्षी नेताओं के अलावा कार्यकर्ताओं के नंबर भी थे। वहीं सरकार ने इस मामले में विपक्ष के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है।

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इस कार्यक्रम में डॉ. अनुराग बत्रा करेंगे वीर सांघवी के साथ चर्चा, आप भी हो सकते हैं शामिल

जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार, स्तंभकार और लेखक वीर सांघवी अपनी नई किताब ‘A Rude Life‘ को लेकर चर्चा में हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 04 August, 2021
Last Modified:
Wednesday, 04 August, 2021
Dr Annurag Batra Vir Sanghvi

जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार, स्तंभकार और लेखक वीर सांघवी अपनी नई किताब ‘A Rude Life‘ को लेकर चर्चा में हैं। वीर सांघवी कॉलमिस्ट, टीवी होस्ट और फ़ूड क्रिटिक के तौर पर भी अपनी पहचान बना चुके हैं। उनकी नई किताब ‘A Rude Life‘  को लेकर प्रतिष्ठित संस्थान ‘एक्सचेंज4 मीडिया’ द्वारा एक वेबिनार का आयोजन किया जा रहा है।

इसके तहत ‘बिजनेस वर्ल्ड’ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा वीर सांघवी से उनकी नई किताब और उनके अनुभवों के बारे में संवाद करेंगे। वीर सांघवी और डॉ.अनुराग बत्रा के बीच वर्चुअल तौर पर होने वाली इस चर्चा का समय शनिवार 14 अगस्त, 2021 की शाम पांच बजे रखा गया है।

आप भी यहां क्लिक कर रजिस्टर कर सकते हैं और इस संवाद का हिस्सा बन सकते हैं।

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मीडिया मुगल डॉ. सुभाष चंद्रा ने लिखा ओपन लेटर, नए वेंचर को लेकर कही ये बात

‘एस्सेल’ (Essel) ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा ने मंगलवार को दूसरा ओपन लेटर जारी किया है।

Last Modified:
Tuesday, 03 August, 2021
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‘एस्सेल’ (Essel) ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा ने मंगलवार को दूसरा ओपन लेटर जारी किया है। इस ओपन लेटर में उन्होंने ऋण समाधान प्रक्रिया (debt resolution process) और ऋणदाताओं को भुगतान करने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण दिया है। डॉ. सुभाष चंद्रा ने इस ओपन लेटर के जरिये बताया है कि 43 ऋणदाताओं की 91 प्रतिशत से ज्यादा देनदारियों का भुगतान कर दिया गया है और बाकी के भुगतान की प्रक्रिया भी जारी है।

बता दें कि इससे पहले डॉ. चंद्रा ने 25 जनवरी को पहला ओपन लेटर लिखा था। उस लेटर में उन्होंने ‘आईएल एंड एफएस’ (IL&FS) मामले से उत्पन्न तरलता संकट के कारण उधारदाताओं के सामने आने वाली कठिनाइयों के लिए माफी मांगी थी और अपनी क्षमताओं के अनुसार पैसे चुकाने के लिए प्रतिबद्धता जताई थी। ऋणदाताओं के समर्थन और विश्वास की बदौलत डॉ. चंद्रा अपना वादा पूरा करने में कामयाब रहे हैं। हालांकि, महामारी के दौरान परिसंपत्ति विनिवेश प्रक्रिया (asset divestment process) को झटका लगा, जिसके कारण समग्र ऋण समाधान प्रक्रिया धीमी हो गई। डॉ. चंद्रा ने ऋणदाताओं का 100 प्रतिशत बकाया भुगतान करने के बाद दूसरा ओपन लेटर जारी करने की इच्छा व्यक्त की, हालांकि इस अभूतपूर्व समय के कारण इसमें देरी हुई।

ऋण समाधान से संबंधित प्रमुख बिंदुओं के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. चंद्रा ने कहा, 'मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हम वित्तीय तनाव की स्थिति से बाहर आ गए हैं और 43 ऋणदाताओं के 91 प्रतिशत बकाया का भुगतान कर दिया है। 88.3 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जा चुका है, जबकि शेष 2.9 प्रतिशत भुगतान किए जाने की प्रक्रिया में है।  हम अपने कुल कर्ज के शेष 8.8% के निपटान के लिए सभी आवश्यक प्रयास कर रहे हैं।'

इस ओपन लेटर में डॉ. चंद्रा ने इस वित्तीय वर्ष के अंत तक या उससे पहले शेष बकाया राशि का निपटान करने की अपनी इच्छा जाहिर की है। इसके बाद डॉ. चंद्रा ने कहा कि उन्होंने जो भी निर्णय लिए हैं, वह परिवार के हित को देखते हुए हैं और इसका उन्हें कोई मलाल नहीं है। उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय सेवाओं और प्रिंट मीडिया व्यवसायों से बाहर निकलने की बात दोहराई है।

डॉ. चंद्रा ने डिजिटल ईकोसिस्टम में वीडियो के क्षेत्र में एक वेंचर शुरू करने के अपने अगले कदम के बारे में भी बताया है। 53 वर्षों के विशाल अनुभव के साथ, डॉ. चंद्रा अत्याधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के द्वारा एक बार फिर डिजिटल वीडियो स्पेस में छा जाने के लिए तैयार हैं।

अपने नए वेंचर के बारे में डॉ. चंद्रा ने कहा है, ‘वीडियो बिजनेस में मुझे काफी अनुभव है। इसलिए अब मैं जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) के साथ किसी टकराव में पड़े बिना वीडियो इन डिजिटल स्पेस के साथ-साथ वीडियो स्पेस में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एंड मशीन लर्निंग (AI/ML) में नए रास्ते और बिजनेस अवसर तलाश रहा हूं। मैं बहुत जल्द ही इसके बारे में विस्तार से जानकारी दूंगा और जल्द ही आप सभी एक और वेंचर की शुरुआत के साक्षी बनेंगे।’

 

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iTV नेटवर्क से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता, मिली यह बड़ी जिम्मेदारी

जाने-माने संपादक और ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ के पूर्व अध्यक्ष आलोक मेहता (पदमश्री) ने अपनी नई पारी की शुरुआत की है।

Last Modified:
Tuesday, 03 August, 2021
Alok Mehta

जाने-माने संपादक और ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ के पूर्व अध्यक्ष आलोक मेहता (पदमश्री) ने देश के बड़े न्यूज ब्रॉडकास्टर्स में शुमार ‘आईटीवी नेटवर्क’ (iTV Network) के साथ अपनी नई पारी की शुरुआत की है। यहां उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें नेटवर्क के हिंदी न्यूज चैनल ‘इंडिया न्यूज’ (india news) और दैनिक अखबार ‘आज समाज’ (Aaj Samaj) का एडिटोरियल डायरेक्टर नियुक्त किया गया है।

बता दें कि पत्रकारिता की लक्ष्मण रेखा की बारिकीयों को समझने वाले आलोक मेहता ने हिंदी पत्रकारिता को एक नई पहचान दी है। सात सितंबर 1952 को मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में जन्मे आलोक मेहता पिछले लंबे समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। आलोक मेहता ने प्रिंट पत्रकारिता के साथ-साथ टेलीविजन और रेडियो के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य कर अपनी अलग पहचान बनाई है। दूरदर्शन, आकाशवाणी और अन्य टीवी चैनलों पर समसामयिक विषयों पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों में उन्हें अकसर देखा और सुना जाता है। आलोक मेहता राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के साथ व कई अन्य प्रतिनिधिमंडलों में शामिल होकर विदेश जाने का अवसर भी कई बार मिला है। वे 35 से ज्यादा देशों की यात्राएं कर चुके हैं।

आलोक का नाम उन पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने पत्रकारिता के साथ-साथ साहित्यिक विषयों पर भी अपनी रुचि दिखाई है। पत्रकारिता, पर्यटन, कविता, कहानियों और समसामयिक विषयों पर आलोक मेहता की करीब एक दर्जन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इनमें ‘नामी चेहरे-यादगार मुलाकातें’, ‘पत्रकारिता की लक्ष्मण रेखा’, ‘भारतीय पत्रकारिता’, ‘इंडियन जर्नलिज्म-कीपिंग इट क्लीन’, ‘सफर सुहाना दुनिया का’, ‘तब और अब’, ‘चिडिय़ा फिर नहीं चहकी’ (कहानी संग्रह), ‘भारत में पत्रकारिता', ‘राइन के किनारे’, ‘स्मृतियाँ ही स्मृतियाँ’, ‘राव के बाद कौन’, ‘आस्था का आँगन’, ‘सिंहासन का न्याय’, ‘अफगानिस्तान-बदलते चेहरे’ आदि प्रमुख हैं।

पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में आलोक मेहता के योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार, हिंदी अकादमी दिल्ली द्वारा साहित्यकार सम्मान, राष्ट्रीय सद्भावना पुरस्कार-1983, इंदिरा प्रियदर्शिनी सम्मान-1995, पत्रकारिता में उत्कृष्ट सम्मान-1995, राष्ट्रीय तुलसी सम्मान-1996, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा पत्रकारिता भूषण सम्मान-2006 और हल्दी घाटी सम्मान-2007 से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा वे नेशनल बुक ट्रस्ट, राजा राममोहन राय फाउंडेशन पुस्तकालय कोलकता के न्यासी और भारतीय प्रेस परिषद, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, वर्ल्ड मीडिया एसोसिएशन वाशिंगटन, भारत सरकार की शिक्षा नीति समिति, इंडिया नेशनल कमीशन फॉर को-ऑपरेशन विध युनेस्को आदि संस्थाओं से भी जुड़े रहे हैं।

हाल ही में आलोक मेहता ने ‘Power, Press & Politics’ नाम से नई किताब लिखी है। इस किताब में उन्होंने भारतीय मीडिया के सफर और इसकी चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताया है।

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पेगासस जासूसी मामले में 5 अन्य पत्रकार पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, किया ये अनुरोध

पेगासस जासूसी मामले में अब एक नया मोड़ आया है। दरअसल, कथित तौर पर जासूसी के लिए संभावित सूची में शामिल पांच पत्रकारों ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

Last Modified:
Tuesday, 03 August, 2021
SC45

पेगासस जासूसी मामले (Pegasus scandal) में अब एक नया मोड़ आया है। दरअसल, कथित तौर पर जासूसी के लिए संभावित सूची में शामिल पांच पत्रकारों ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इन्होंने कोर्ट से इसराइली जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस का उनके मोबाइल में उपयोग करने संबंधी मंजूरी और जांच से जुड़ी सामग्री का खुलासा करने के लिए केंद्र को निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया है।

साथ ही कहा गया है कि कोर्ट इसके इस्तेमाल को अवैध घोषित करे। याचिका में कहा गया है कि सरकारी एजेंसियों द्वारा निगरानी के अनधिकृत उपयोग ने उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया है और वे पेगासस स्पाइवेयर के उपयोग से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। दरअसल, मोबाइल फोन की कथित हैकिंग से सीधे प्रभावित और व्यक्तिगत रूप से पीड़ित होने का दावा करने वाले व्यक्तियों की ओर से ये पहली याचिका है।

याचिकाकर्ताओं में परंजॉय गुहा ठाकुरता, SNM आब्दी, प्रेम शंकर झा, रूपेश कुमार सिंह और इप्सा शताक्शी शामिल हैं। इनका कहना है कि एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा की गई उनके मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच से पता चला है कि इनको (मोबाइल फोन को) पेगासस का इस्तेमाल करके निशाना बनाया गया था। याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उनके पास यह विश्वास करने का ठोस कारण है कि भारत सरकार या किसी अन्य तीसरे पक्ष ने उनकी गहन जासूसी की और हैकिंग के लिए निशाना बनाया।

शीर्ष अदालत पहुंचने वाले वरिष्ठ पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता ने उच्चतम न्यायालय से जासूसी सॉफ्टवेयर के उपयोग को गैर-कानूनी और असंवैधानिक घोषित करने का अनुरोध किया और कहा कि पेगासस की मौजूदगी का भारत में वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार पर 'गंभीर प्रतिकूल प्रभाव' पड़ेगा।

वरिष्ठ पत्रकार ने अदालत से यह भी अनुरोध किया कि वह केंद्र सरकार को पेगासस जैसे जासूसी सॉफ्टवेयर या साइबर हथियारों से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित करने के लिए उपयुक्त कदम उठाने का भी निर्देश दे।

इससे पहले तीन याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हो चुकी हैं, जिन पर प्रधान न्यायाधीश एनवी रमणा की अध्यक्षता वाली पीठ पेगासस मामले संबंधी तीन अलग-अलग याचिकाओं पर पांच अगस्त को सुनवाई करेगी। इनमें वरिष्ठ पत्रकार एन.राम और शशि कुमार की याचिका भी शामिल है, जिसमें पेगासस मामले की मौजूदा या सेवानिवृत्त न्यायाधीश से स्वतंत्र जांच कराने का अनुरोध किया गया है।

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कोविड से जान गंवाने वाले पत्रकारों के परिजनों को CM ने दिए 10 लाख रुपये के चेक

चेक वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ ‘इंडिया टीवी’ (India TV) के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा भी मौजूद थे।

Last Modified:
Saturday, 31 July, 2021
CM YOGI

कोरोनावायरस (कोविड-19) की वजह से जान गंवाने वाले प्रदेश के पत्रकारों के परिवारों को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी है। लखनऊ के लोक भवन ऑडिटोरियम में शनिवार की दोपहर 12:00 बजे आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने दिवंगत पत्रकारों के आश्रितों को आर्थिक सहायता के चेक प्रदान किए।

चेक वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ ‘इंडिया टीवी’ (India TV) के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा भी मौजूद थे। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा, ‘पत्रकारों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और उन्हें प्रोत्साहित करना जारी रखेगी।’

गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ ने हिंदी पत्रकारिता दिवस (30) पर कोरोनावायरस (कोविड-19) की वजह से जान गंवाने वाले प्रदेश के पत्रकारों के परिवारों को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया था। मुख्यमंत्री का निर्देश मिलने के बाद प्रदेश का सूचना विभाग कोविड-19 की वजह से जान गंवाने वाले पत्रकारों का ब्यौरा जुटाने में लग गया था, ताकि उनके परिवारों को जल्द से जल्द आर्थिक सहायता प्रदान की जा सके। इसके लिए पीड़ित परिवारों से प्रार्थना पत्र मांगे गए थे।

बता दें कि कोरोना काल में कवरेज के दौरान कई पत्रकार कोरोना से संक्रमित हो गए थे, जिनमें कई का निधन हो गया है। ऐसे में उनके परिजनों के सामने भरण-पोषण की मुश्किल आ गई है। इसे देखते हुए ही योगी सरकार ने यह फैसला किया है। वहीं, अपर मुख्य सचिव (सूचना) नवनीत सहगल का कहना है कि कुछ प्रार्थना पत्र देरी से मिले हैं, लेकिन उन पीड़ित परिवारों को भी सहायता राशि दी जाएगी।

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प्रसार भारती के पूर्व सीईओ जवाहर सरकार के राज्यसभा पहुंचने का रास्ता हुआ साफ!

पूर्व नौकरशाह और ‘प्रसार भारती’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रहे जवाहर सरकार को राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किया गया है।

Last Modified:
Friday, 30 July, 2021
jawahar Sircar

पूर्व नौकरशाह और ‘प्रसार भारती’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रहे जवाहर सरकार को राज्यसभा के लिए नॉमिनेट किया गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने उन्हें पार्टी की ओर से नॉमिनेट किया है। इस बारे में तृणमूल कांग्रेस की ओर से एक ट्वीट भी किया गया है।

इस ट्वीट में कहा गया है, ‘हमें संसद के उच्च सदन में जवाहर सरकार को मनोनीत करते हुए प्रसन्नता हो रही है। सरकार ने लगभग 42 साल सार्वजनिक सेवा में बिताए और प्रसार भारती के सीईओ भी रह चुके हैं। सार्वजनिक सेवा में उनका अमूल्य योगदान हमें अपने देश की और भी बेहतर सेवा करने में मदद करेगा।’

यह सीट तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद दिनेश त्रिवेदी द्वारा खाली की गई है। बता दें कि फरवरी में राज्यसभा से इस्तीफा देने वाले त्रिवेदी बीजेपी में शामिल हो गए हैं। जवाहर सरकार ने कोलकाता में विधानसभा में नामांकन-पत्र दाखिल कर दिया है।

इधर, भारतीय जनता पार्टी ने  गुरुवार को घोषणा की कि वह पश्चिम बंगाल से राज्यसभा की एक सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं करेगी। बीजेपी इस फैसले के बाद जवाहर सरकार के निर्विरोध निर्वाचित होने का रास्ता साफ हो गया है। सोमवार को इसकी घोषणा की जाएगी। 

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि बीजेपी राज्यसभा के लिए किसी भी उम्मीदवार को नामित नहीं करेगी। नंदीग्राम से बीजेपी विधायक अधिकारी ने ट्विटर पर कहा, ‘आज पश्चिम बंगाल में राज्यसभा उपचुनाव के नामांकन के लिए आखिरी तारीख है। बीजेपी इस सीट के लिए कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं कर रही है। चुनाव का नतीजा हम सभी को पता है...इस अविवेकशील सरकार के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी।’

दरअसल, शुक्रवार को विधानसभा सचिवालय में नामांकन पत्र की जांच की गई। राज्य सभा उपचुनाव के अधिकारियों ने नामांकन पत्र को वैध पाया। चूंकि किसी अन्य उम्मीदवार ने नामांकन पत्र दाखिल नहीं किया है, लिहाजा इस वजह से जवाहर सरकार का निर्विरोध चुना जाना तय है। सोमवार को तीन बजे नामांकन पत्र वापस लेने की अंतिम तिथि है। उसके बाद उन्हें निर्विरोध विजयी घोषित कर दिया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बारे में जवाहर सरकार का कहना है,’ मैं एक नौकरशाह था। मैं राजनीतिक व्यक्ति नहीं हूं, लेकिन, मैं लोगों के विकास के लिए काम करूंगा और जनता से जुड़े मुद्दों को संसद में उठाउंगा।’

69 वर्षीय जवाहर सरकार कोलकाता के रहने वाले हैं। जवाहर सरकार ने राजनीति शास्त्र में ऑनर्स के साथ स्नातक, समाज शास्त्र में एक एम.ए और इतिहास में और एक एम.ए किया है। वह यूनाइटेड किंगडम के कैंब्रिज तथा ससेक्स विश्वविद्यालयों से प्रशिक्षित होने के अलावा न्यूयार्क विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर चुके हैं।

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इन अखबारों-चैनलों के खिलाफ मानहानि के 90 मामलों को CM ने लिया वापस

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने गुरुवार को एक बड़ा फैसले लेते हुए पत्रकारों, अखबारों और टेलीविजन चैनलों के खिलाफ दायर मानहानि के 90 मामलों को वापस लेने का निर्देश दिया है।

Last Modified:
Friday, 30 July, 2021
MK-Stalin5454

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने गुरुवार को एक बड़ा फैसले लेते हुए पत्रकारों, अखबारों और टेलीविजन चैनलों के खिलाफ दायर मानहानि के 90 मामलों को वापस लेने का निर्देश दिया है। बता दें कि इसमें ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के खिलाफ दर्ज पांच मामले और ‘इकनॉमिक टाइम्स’ के खिलाफ एक मामला शामिल है।

2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान अपने घोषणापत्र में डीएमके ने मीडिया घरानों के खिलाफ दर्ज ऐसे सभी मानहानि के मामलों को वापस लेने का वादा किया था।

आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया कि ‘प्रतिशोध की भावना से पत्रकारों के खिलाफ दायर मानहानि से जुड़े सभी मामलों’ को वापस लेने के द्रमुक के चुनावी वायदे को पूरा करते हुए मुख्यमंत्री ने 90 मामलों को वापस लेने का आदेश दिया है।

बता दें कि ये मामले 2012 और फरवरी 2021 के बीच संपादकों, प्रकाशकों और टेलीविजन चैनलों के खिलाफ दायर किए गए थे, जब अन्नाद्रमुक सत्ता में थी।

अंग्रेजी दैनिक अखबार ‘द हिंदू’, ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’, ‘द इकनॉमिक टाइम्स’, वहीं, तमिल अखबार ‘दिनामलार’, द्रमुक से जुड़े अखबार ‘मुरासोली’, ‘दिनाकरन’ और तमिल पत्रिका ‘आनंदा विकातन’, ‘जूनियर विकातन’ और ‘नक्कीरन’ ने इस तरह के मामलों का सामना किया।

वहीं, टेलीविजन चैनलों में ‘पुथिया थलाईमुराई’, ‘न्यूज 7’, ‘कलैगनार थोलाईकाची’, ‘साथियाम’, ‘कैप्टन’, ‘एनडीटीवी’ और ‘टाइम्स नाउ’ ने इस तरह के मामलों का सामना किया।

बता दें कि 2011 और 2016 के बीच, तत्कालीन तमिलनाडु सरकार ने पूर्व सीएम जे. जयललिता की आलोचना करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ 213 मानहानि के मुकदमे दर्ज किए थे।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा तत्कालीन अन्नाद्रमुक सरकार द्वारा दायर मानहानि के मामलों की जांच के बाद 2016 में सरकार की ओर से मानहानि मामले की प्रक्रिया के दौरान 213 मामलों की सूची सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई थी।

वहीं, 2019 में, तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री ए.के. पलनिस्वामी ने तहलका के पूर्व मैनेजिंग एडिटर सैमुअल मैथ्यू और छह अन्य पर कथित तौर पर 2017 कोडनाड डकैती में पलनिस्वामी का नाम जोड़ने वाली एक वीडियो क्लिप प्रसारित करने के लिए मुकदमा दायर किया था। उन्होंने हर्जाने में 1.10 करोड़ रुपए की भी मांग की थी।

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शिल्पा शेट्टी का फूटा गुस्सा, कई मीडिया घरानों पर किया केस

पोर्नोग्राफी केस में राज कुंद्रा की गिरफ्तारी और मुंबई क्राइम ब्रांच की तरफ पूछताछ का सामना करने के बाद बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी ने सारा ठीकरा मीडिया पर फोड़ दिया है।

Last Modified:
Friday, 30 July, 2021
ShilpaShetty45454

पोर्नोग्राफी केस में राज कुंद्रा की गिरफ्तारी और मुंबई क्राइम ब्रांच की तरफ पूछताछ का सामना करने के बाद बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी ने सारा ठीकरा मीडिया पर फोड़ दिया है। दरअसल, शिल्पा शेट्टी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख करते हुए मीडिया पर अपनी छवि को बदनाम करने का आरोप लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिल्पा शेट्टी ने 29 मीडियाकर्मियों और मीडिया घरानों के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में मानहानि मुकदमा दायर किया है। अभिनेत्री ने राज कुंद्रा पोर्नोग्राफी मामले में उनके बारे में गलत रिपोर्टिंग और उनकी छवि खराब करने का आरोप लगाया है। इस मामले पर कोर्ट में शुक्रवार यानी आज सुनवाई होगी।    

बता दें कि राज कुंद्रा पोर्नोग्राफी केस में शिल्पा शेट्टी से भी पूछताछ हो चुकी है। वहीं, राज कुंद्रा अश्लील फिल्में बनाने के आरोप में बुरी तरह फंसते जा रहे हैं। आए दिन मामले में नई कड़ियां जुड़ रही हैं और लगातार उनकी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।

इसी बीच बुधवार को मुंबई की एक अदालत ने कथित तौर पर पोर्नोग्राफिक फिल्में बनाने और उन्हें कुछ ऐप्स के जरिए प्रसारित करने से संबंधित मामले में कारोबारी राज कुंद्रा की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। शिल्पा शेट्टी के पति कुंद्रा को मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने 19 जुलाई को गिरफ्तार किया था। उन पर भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। मंगलवार को यहां एक मजिस्ट्रेट अदालत ने कुंद्रा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। कुंद्रा ने जमानत याचिका दायर की थी लेकिन अदालत ने बुधवार को उसे खारिज कर दिया। बंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को उन्हें कोई तत्काल अस्थायी राहत देने से भी इनकार कर दिया था।

वहीं, पुलिस ने दावा किया कि मामले की जांच के दौरान यह पाया गया कि कुंद्रा ने आर्म्सप्राइम मीडिया प्राइवेट लिमिटेड बनायी, जिसने लंदन की केनरिन प्राइवेट लिमिटेड के जरिए सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक वीडियो अपलोड करने के लिए हॉटशॉट्स ऐप खरीदी। उसने यह भी आरोप लगाया कि कुंद्रा ने हॉटशॉट्स के जरिए पिछले साल अगस्त से दिसंबर के बीच 1.17 करोड़ रुपए से अधिक की कमायी की। पुलिस ने आरोपी के कार्यालय पर छापों के दौरान 51 आपत्तिजनक वीडियो पाए जाने का भी दावा किया।

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संपादक अतुल अग्रवाल ने ट्रोलर्स पर किया पलटवार, कुछ यूं साधा ‘निशाना’

‘हिन्दी खबर’ न्यूज चैनल के प्रधान संपादक अतुल अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि कई वेबसाइट्स उनके बारे में भ्रामक बातें फैला रही हैं।

Last Modified:
Friday, 30 July, 2021
Atul Agrawal

‘हिन्दी खबर’ न्यूज चैनल के प्रधान संपादक अतुल अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि कई वेबसाइट्स उनके बारे में भ्रामक बातें फैला रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी पत्नी और बच्चे के बारे में भी अमर्यादित और अशोभनीय शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अपने और अपनी पत्नी के खिलाफ कथित रूप से अभद्र टिप्पणी करने के मामले में उन्होंने दो वेबसाइट सहित कई अज्ञात लोगों के खिलाफ नोएडा के सेक्टर-36 स्थित साइबर थाने में मामला दर्ज कराया है।

अब अपने ट्विटर हैंडल पर अतुल अग्रवाल ने इस बारे में कई ट्वीट किए हैं। इनमें से एक ट्वीट में उनका कहना है, ‘टुच्चे_ट्रोलर्स सुन लो, मैं तुम लोगों से नहीं डरता. गाली-गलौज, अश्लील, अपमानजनक, आपराधिक भाषा, ऊट-पटांग झूठे तथ्य और मॉर्फ्ड फोटो पोस्ट करने वाले मुझे ना तो झुका सकते हैं और ना ही डरा सकते हैं। साइबर अपराध शाखा में FIR दर्ज है. पुलिस की गहन विवेचना जारी है।’

इसके साथ ही एक अन्य ट्वीट में अतुल अग्रवाल ने लिखा है, ‘मूल विषय से हट कर, निजी जिंदगी में तांक-झांक करने पर आमादा लोगों के मन की शांति के लिए बता दूं कि 19 जून 2021 की शाम सवा 7 बजे, सेक्टर-45 नोएडा में, 3 मुस्लिम बहनों के घर पर मैं डिनर के लिए गया था। साल 2007 से ही ये हमारी छोटी बहनें हैं। इन्हे 'महिला मित्र' बताने वालों पर लानत है।’

यही नहीं, अतुल अग्रवाल ने एक और ट्वीट में सीसीटीवी की फुटेज शेयर करते हुए लिखा है, ‘अनुकंपा स्वरूप, विलंब से मिले #OYO होटल के इस CCTV वीडियो को गौर से देखिए और खोजिए कोई महिला मित्र दिखी क्या? हाईटेक पुलिस के बड़े साहेबानों के पास भी ये मौजूद था मगर अनुकूल सत्य बताने-फैलाने के फेर में ये पीछे छूट गया था। ये सर्वमान्य तथ्य है कि #चरित्र_हत्या सबसे सरल है।’

उल्लेखनीय है कि शिकायतकर्ता ने कुछ दिन पहले खुद के साथ लूट होने की शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए लूट की घटना को गलत बताया था। इसी मामले को लेकर उनके और परिवार के खिलाफ भ्रामक प्रचार करने का आरोप लगाया गया है।

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