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PR इंडस्ट्री में महिलाओं की भूमिका: e4m समिट में लीडर्स ने साझा किए अनुभव व चुनौतियां
एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप द्वारा आयोजित कार्यक्रम e4m PR & Corp Comm Women's Achiever Summit में पब्लिक रिलेशंस व कम्युनिकेशंस इंडस्ट्री की प्रतिष्ठित महिला लीडर्स ने भाग लिया
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 11 months ago
एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप द्वारा आयोजित कार्यक्रम e4m PR & Corp Comm Women's Achiever Summit में पब्लिक रिलेशंस व कम्युनिकेशंस इंडस्ट्री की प्रतिष्ठित महिला लीडर्स ने भाग लिया, जहां पारंपरिक रूप से पुरुष-प्रधान क्षेत्र में महिलाओं के लिए मौजूद चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा की गई। इस पैनल का संचालन Media Mic की कम्युनिकेशन एडवाइजर माधवी चौधरी ने किया। पैनल में Doceree की कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन डायरेक्टर तान्या सिंह, Swiggy की AVP - PR एंड कम्युनिकेशन आकांक्षा जैन और Ipsos की PR हेड व मीडिया एंगेजमेंट एवं पार्टनरशिप हेड मधुरिमा भाटिया शामिल थीं।
सेशन की शुरुआत इस चर्चा से हुई कि PR इंडस्ट्री में नेतृत्व के मॉडल को फिर से परिभाषित करने के लिए महिलाओं के पास क्या संभावनाएं हैं। हालांकि इस क्षेत्र में कार्यबल का बड़ा हिस्सा महिलाओं का है, फिर भी यह इंडस्ट्री पुरुष-प्रधान बनी हुई है। पैनलिस्ट्स ने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं को पारंपरिक धारणाओं को चुनौती देनी चाहिए और संगठनों के भीतर अधिक रणनीतिक भूमिकाएं निभानी चाहिए।
माधवी चौधरी ने इस बात को रेखांकित किया कि महिलाओं को केवल सपोर्ट फंक्शन के रूप में नहीं बल्कि रणनीतिक भागीदार के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने एक जेंडर-न्यूट्रल संगठन में काम करने के अपने अनुभव साझा किए, लेकिन इस धारणा की ओर भी इशारा किया कि PR को अब भी एक व्यावसायिक ड्राइवर के बजाय लागत केंद्र के रूप में देखा जाता है। उन्होंने महिलाओं से आग्रह किया कि वे इस सोच से बाहर निकलें, अधिक रणनीतिक रूप से सोचें और अपने विचारों को तर्कसंगत रूप से प्रस्तुत करें।
तान्या सिंह ने इस विचार से सहमति जताई और कहा कि महिलाओं को अपनी आवाज बुलंद करनी होगी। उन्होंने बताया कि PR प्रोफेशनल्स को अक्सर इस चुनौती का सामना करना पड़ता है कि उन्हें बिजनेस लाने वाले लोगों की तुलना में कम महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि PR का ब्रांड की प्रतिष्ठा और व्यावसायिक वृद्धि पर अप्रत्यक्ष लेकिन महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है और इसे पहचाना जाना चाहिए।
पैनलिस्ट्स ने इस पर भी चर्चा की कि नेतृत्व भूमिकाओं में महिलाओं को किन विशिष्ट चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जैसे कि अवचेतन पूर्वाग्रह और कई अपेक्षाओं को संतुलित करना। आकांक्षा जैन ने साझा किया कि जब वह पुरुष लीडर्स से भरे एक कमरे में अकेली महिला होती हैं, तो अक्सर असहजता महसूस होती है। उन्होंने बताया कि जब महिलाएं अपने विचार खुलकर रखती हैं, तो उन्हें आक्रामक समझा जाता है, जिससे उनके लिए ऊंचे पदों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
मधुरिमा भाटिया ने कहा कि कई बार महिलाएं खुद ही अपने लिए बाधाएं खड़ी कर लेती हैं, अपनी क्षमताओं पर संदेह करती हैं और आत्म-प्रचार नहीं करतीं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं को अपने लिए खड़ा होना चाहिए और समान वेतन जैसे मुद्दों पर उचित बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने उन स्थितियों का भी उल्लेख किया, जहां महिलाओं से उनकी वैवाहिक स्थिति या मातृत्व योजनाओं को लेकर अनुचित सवाल किए जाते हैं, जो कि एक बड़ी प्रणालीगत समस्या है।
इसके बाद चर्चा इस ओर मुड़ी कि संगठन किस तरह महिला प्रोफेशनल्स का समर्थन कर सकते हैं और PR टीमों में विविधता और समानता को बढ़ावा दे सकते हैं। पैनलिस्ट्स ने सहमति व्यक्त की कि PR फंक्शन के महत्व को मान्यता देना आवश्यक है। आकांक्षा जैन ने कहा कि PR प्रोफेशनल्स को अन्य विभागों, जैसे कि HR की तुलना में कम प्राथमिकता दी जाती है, जबकि वे किसी भी कंपनी की प्रतिष्ठा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मधुरिमा भाटिया ने इस बात पर जोर दिया कि नेतृत्व स्तर पर विविधता और समावेश सुनिश्चित करने के लिए नेतृत्वकर्ताओं की प्रतिबद्धता आवश्यक है। उन्होंने उस संगठन के अपने अनुभव साझा किए, जहां लीडरशिप टीम में 50/50 पुरुष-महिला अनुपात था और पुरुष मेंटर्स का सहयोग बहुत सकारात्मक प्रभाव डाल रहा था। उन्होंने मेंटरशिप प्रोग्राम और ऐसे प्लेटफॉर्म बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, जहां महिलाएं अपने अनुभव साझा कर सकें और एक-दूसरे से सीख सकें।
पैनलिस्ट्स ने इस पर भी चर्चा की कि इंडस्ट्री के दिग्गज किस प्रकार उभरती हुई महिला प्रतिभाओं के लिए अवसर पैदा कर सकते हैं। तान्या सिंह ने मेंटरशिप के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह खासतौर पर उन युवतियों के लिए जरूरी है जो इस क्षेत्र में नया कदम रख रही हैं। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने कंप्यूटर इंजीनियरिंग से PR में बदलाव किया और इस दौरान मेंटर्स का मार्गदर्शन उनके लिए बहुत मददगार साबित हुआ।
माधवी चौधरी ने सुझाव दिया कि मेंटरशिप को जीवनशैली का हिस्सा बना लेना चाहिए, जहां महिला लीडर्स अपनी कहानियां और चुनौतियां साझा करके दूसरों को प्रेरित करें। उन्होंने इस बात का भी प्रस्ताव रखा कि महिलाओं के लिए ऐसे समुदाय बनाए जाएं, जहां वे निरंतर बातचीत कर सकें और एक-दूसरे का समर्थन कर सकें।
अंतिम सत्र में पैनलिस्ट्स से पूछा गया कि कंपनियां तुरंत क्या कदम उठा सकती हैं ताकि PR में महिलाओं को सशक्त बनाया जा सके। मधुरिमा भाटिया ने कहा कि PR प्रोफेशनल्स को बोर्डरूम और कार्यकारी समितियों में जगह मिलनी चाहिए, क्योंकि PR का व्यवसायिक विकास में रणनीतिक योगदान है।
तान्या सिंह ने सुझाव दिया कि संगठनों को एक आंतरिक मूल्यांकन करना चाहिए ताकि यह समझा जा सके कि वे महिलाओं के सशक्तिकरण के मामले में कहां खड़े हैं और सभी स्तरों पर सुधार के लिए कदम उठाने चाहिए। उन्होंने वेतन मानकीकरण (सैलरी स्टैंडर्डाइजेशन) की जरूरत को भी रेखांकित किया ताकि शीर्ष स्तरों पर वेतन समानता सुनिश्चित की जा सके।
आकांक्षा जैन ने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं को सभी स्तरों पर प्रशिक्षित किया जाना चाहिए और उनके कौशल का सही उपयोग किया जाना चाहिए ताकि वे संगठन को अधिक ऊंचाइयों तक ले जा सकें। उन्होंने CEO और CXO स्तर के अधिकारियों से आह्वान किया कि वे महिलाओं की विश्लेषणात्मक क्षमता और सहज ज्ञान (इंट्यूशन) को पहचानें और उनका लाभ उठाएं।
सत्र का समापन इस आह्वान के साथ हुआ कि महिलाएं और संगठन मिलकर बाधाओं को तोड़ें और PR इंडस्ट्री को अधिक समावेशी और समानतापूर्ण बनाएं। पैनलिस्ट्स ने इस बात पर जोर दिया कि नेतृत्व में महिलाओं को लाने के लिए मेंटरशिप, आत्म-संरक्षण (सेल्फ-एडवोकेसी) और संगठनों के समर्थन की आवश्यकता है, ताकि वे प्रभावशाली बदलाव ला सकें।
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