गुरुवार को जयंती रंगनाथन जी का उपन्यास ‘शैडो’ मेरे पास आया था। मैंने इसी दिन इसे पकड़ा तो आधा खत्म कर दिया। फिर शुक्रवार को भीमताल चला गया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो