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इन 7 कैटेगिरीज के जरिए होगी फेक न्यूज की पहचान
सिर्फ भारत में ही यह समस्या नहीं है, बल्कि दुनिया के अन्य देश भी इससे जूझ रहे हैं
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
फेक न्यूज के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। सिर्फ भारत में ही यह समस्या नहीं है, बल्कि दुनिया के अन्य देश भी इससे जूझ रहे हैं। फेक न्यूज से निपटने के लिए तमाम स्तर पर कवायद भी हो रही है, लेकिन यह समस्या काबू में नहीं आ रही है।
फेक न्यूज पर रिसर्च कर रहे अमेरिका की पेन्सिलेवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अब सात तरह की फेक न्यूज की पहचान की है। इस रिसर्च का उद्देश्य फेक न्यूज को बेहतर तरीके से पहचानना और इस तरह की तकनीक बनाना है, जो अपने आप इस तरह के कंटेंट को पहचान ले। शोधकर्ताओं ने फेक न्यूज को सात श्रेणियों- गलत समाचार (false news), ध्रुवीकृत कंटेंट (polarized content), गलत रिपोर्टिंग (misreporting), व्यंग्य (satire), टिप्पणी (commentary), दबाव देनी वाली सूचना (persuasive information) और नागरिक पत्रकारिता (citizen journalism) में बांटा है।
‘अमेरिकन बिहेवेरियल साइंटिस्ट’ (American Behavioral Scientist) मैगजीन में छपे एक रिसर्च में इन फेक न्यूज की असली न्यूज के साथ तुलना की गई है। इस बारे में शोधकर्ताओं का कहना है कि असली समाचार में कई विशेषताएं होती है, जो इसे फेक न्यूज की इन श्रेणियों से अलग बनाती हैं। जैसे-असली समाचार में पत्रकारिता की शैली का पालन किया जाता है। इसमें व्याकरण और तथ्यों का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है, जबकि फेक न्यूज में ऐसा नहीं होता है। वहीं, फेक न्यूज की हेडलाइन भ्रामक होती है और इसमें भावनात्मक रूप से प्रेरित बातों पर ज्यादा जोर रहता है। फेक न्यूज का सोर्स और इनके इस्तेमाल के तरीके भी अलग होते हैं।
इस रिसर्च में यह भी पाया गया कि फेक न्यूज में जिस वेब एड्रेस का इस्तेमाल किया जाता है, वह मानक के अनुरूप नहीं होता है। इसके साथ ही इसमें कॉंटेक्ट करने के लिए निजी ईमेल आईडी दिए जाते हैं। सोशल मीडिया पर इस तरह की फेक न्यूज ज्यादा देखने को मिलती हैं। मैगजीन में छपे इस रिसर्च पेपर में यह भी कहा गया है कि ऑनलाइन न्यूज के मैसेज को देखकर, उसका स्रोत किया है और उसके लिए किस नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया है, इसकी पहचान कर फेक न्यूज को पहचाना जा सकता है।
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