'रिपोर्टर टीवी' के MD एंटो ऑगस्टीन गिरफ्तार, घर से 67 लीटर शराब मिलने का आरोप

केरल पुलिस की ओर से रिपोर्टर टीवी (Reporter TV) के ठिकानों पर छापेमारी के एक दिन बाद चैनल के मैनेजिंग एडिटर और डायरेक्टर एंटो ऑगस्टीन (Anto Augustine) को गिरफ्तार कर लिया गया है।

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Friday, 18 September, 2026
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केरल पुलिस की ओर से 'रिपोर्टर टीवी' (Reporter TV) के ठिकानों पर छापेमारी के एक दिन बाद चैनल के मैनेजिंग एडिटर और डायरेक्टर एंटो ऑगस्टीन (Anto Augustine) को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह गिरफ्तारी अवैध रूप से शराब रखने के आरोप में केरल के आबकारी विभाग (Excise Department) ने की है।

पुलिस ने 'रिपोर्टर टीवी' के खिलाफ एक कथित धोखाधड़ी के मामले में छापेमारी की थी। यह मामला फुटबॉल के दिग्गज खिलाड़ी लियोनेल मेसी (Lionel Messi) को केरल लाने की असफल कोशिश से जुड़ा बताया जा रहा है।

ऑगस्टीन के वायनाड स्थित घर की तलाशी के दौरान विशेष जांच दल (SIT) को कथित तौर पर 67 लीटर अवैध इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) और फॉरेन मेड फॉरेन लिकर का स्टॉक मिला। इसके बाद आबकारी विभाग ने कार्रवाई करते हुए केरल आबकारी कानून (Kerala Abkari Act) के तहत मामला दर्ज किया।

केरल में एक व्यक्ति को अधिकतम तीन लीटर IMFL रखने की अनुमति है। आबकारी विभाग के सूत्रों के मुताबिक, ऑगस्टीन पर लगाए गए अपराध गैर-जमानती हैं और दोष साबित होने पर उन्हें इन धाराओं के तहत 10 साल तक की जेल हो सकती है। 

ऑगस्टीन को गुरुवार सुबह कोच्चि स्थित 'रिपोर्टर टीवी' के मुख्यालय से हिरासत में लिया गया। हालांकि, उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है।

ऑगस्टीन ने कहा, “मैंने मेसी से जुड़े सभी दस्तावेज सौंप दिए थे। अब आबकारी विभाग यह मामला लेकर आया है कि उन्हें मेरे घर में शराब का स्टॉक मिला है। मैंने अपनी जिंदगी में कभी शराब नहीं पी। मैं जांच में सहयोग करूंगा।” उन्हें वायनाड की एक अदालत में पेश किया जाएगा।

गिरफ्तारी से पहले 'रिपोर्टर टीवी' के ठिकानों पर छापेमारी

'रिपोर्टर टीवी' और उसके मैनेजिंग डायरेक्टर के ठिकानों पर पुलिस की छापेमारी के बाद केरल में राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया था। विपक्षी CPI(M) ने आरोप लगाया था कि यह कार्रवाई “आपातकाल के दिनों की याद दिलाती है।”

वहीं, मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने पुलिस की कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने कहा कि पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार के दौरान भी मीडिया के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। 

पिछली LDF सरकार के दौरान राज्य के खेल विभाग ने मेसी की अगुवाई वाली अर्जेंटीना फुटबॉल टीम को अंतरराष्ट्रीय मैच के लिए केरल लाने की दिशा में कदम उठाए थे। इस आयोजन का प्रायोजक 'रिपोर्टर टीवी' था, जबकि सरकार इसमें सुविधा उपलब्ध कराने वाली भूमिका में थी। यह कार्यक्रम 2025 के अंत में आयोजित किया जाना था। राज्य सरकार ने आयोजन के लिए कोच्चि का अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम भी 'रिपोर्टर टीवी' और Reporter Broadcasting Company (RBC) को सौंपा था। हालांकि, यह कार्यक्रम नहीं हो सका।

126 करोड़ रुपये के कथित लेन-देन की भी जांच

मई में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद खेल विभाग ने इस मामले की जांच के आदेश दिए थे। जांच में कथित तौर पर 126 करोड़ रुपये के अवैध वित्तीय लेन-देन और जीएसटी भुगतान में चूक का पता चलने की बात सामने आई। यह भी आरोप लगाया गया कि RBC ने इस मामले से जुड़े कई दस्तावेजों में कथित तौर पर फर्जीवाड़ा किया था। विशेष जांच दल की जानकारी के आधार पर दर्ज FIR में पहचान बदलकर धोखाधड़ी, धोखे से संपत्ति हासिल करना और आपराधिक साजिश जैसी धाराएं लगाई गई हैं।

पुलिस ने चैनल के न्यूजरूम और उसी इमारत में स्थित RBC के कार्यालय के अलावा एंटो ऑगस्टीन और उनके भाइयों रोजी और जोसेकुट्टी के कोच्चि और वायनाड स्थित घरों पर भी छापेमारी की। FIR में आरोप लगाया गया है कि ऑगस्टीन और अन्य लोगों ने दिसंबर 2024 से पहले आपराधिक साजिश रची और अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन के साथ हुए कथित समझौतों को तैयार किया।

FIR के मुताबिक, इन दस्तावेजों के आधार पर राज्य सरकार के साथ धोखाधड़ी की गई। आरोप है कि संदिग्धों ने इस सौदे से अवैध लाभ हासिल किया और राज्य सरकार को कोच्चि का अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम चैनल को आयोजन के लिए सौंपने के लिए तैयार किया, जबकि बाद में यह आयोजन हुआ ही नहीं।

फिलहाल, एंटो ऑगस्टीन ने शराब रखने से जुड़े आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि वह जांच में सहयोग करेंगे। वहीं, मेसी को केरल लाने से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन और दस्तावेजों की जांच भी जारी है

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भावना वर्मा ने हिंदुस्तान यूनिलीवर से लिया ब्रेक : पांच साल बाद कंपनी छोड़ी

भावना वर्मा ने हिंदुस्तान यूनिलीवर में पांच साल पूरे करने के बाद कंपनी से विदाई ली है। उन्होंने लिंक्डइन पोस्ट में अपने अनुभव, चुनौतियों और सीख को साझा करते हुए आभार जताया।

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Friday, 18 September, 2026
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भावना वर्मा (Bhavna Verma) ने हिंदुस्तान यूनिलीवर (Hindustan Unilever) में पांच साल पूरे करने के बाद कंपनी से विदाई ले ली है। वह कंपनी में पॉन्ड्स (POND’S) की ग्लोबल ब्रांड डायरेक्टर (Global Brand Director) के तौर पर काम कर रही थीं। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपने सफर के खत्म होने की जानकारी साझा की।

अपने पांच साल के सफर को याद करते हुए वर्मा ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि पॉन्ड्स की ब्रांड डायरेक्टर के तौर पर उन्हें इतने बड़े ग्लोबल प्लेटफॉर्म (Global Platform) पर काम करने का मौका मिलेगा। इस दौरान मिले अनुभवों, चुनौतियों और सीख ने उनके प्रोफेशनल सफर (Professional Journey) को आकार दिया।

उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “आज हिंदुस्तान यूनिलीवर में मेरे पांच साल पूरे हो रहे हैं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि पॉन्ड्स की ब्रांड डायरेक्टर के तौर पर मुझे जेनजी (GenZ) के लिए आइकॉनिक गूगली वूगली वूक्स (Googly Woogly Wooksh) को फिर से बनाने का मौका मिलेगा।”

कंपनी से विदाई लेते हुए वर्मा ने उन लोगों और टीमों का धन्यवाद किया, जिनके साथ उन्होंने काम किया और जिन्होंने उनके सफर में सहयोग दिया। उन्होंने पिछले पांच सालों में मिले मौकों और बनी यादों के लिए भी आभार जताया। अब वह अपने प्रोफेशनल सफर के अगले अध्याय की ओर बढ़ रही हैं।

भावना वर्मा ग्लोबल ब्रांड स्ट्रैटेजिस्ट (Global Brand Strategist) और पीएंडएल ऑपरेटर (P&L Operator) हैं। उन्हें उपभोक्ताओं और कारोबार के लिए प्रभावशाली वैल्यू तैयार करने वाले सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक ब्रांड बनाने का 13 साल से ज्यादा का अनुभव है।

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‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ के एंटो जोसेफ संभालेंगे नया बिजनेस ‘द फाइनेंशियल स्टैंडर्ड’

‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ (TNIE), तमिलनाडु के रेजिडेंट एडिटर एंटो जोसेफ (Anto Joseph) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

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Friday, 18 September, 2026
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‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ (TNIE), तमिलनाडु के रेजिडेंट एडिटर एंटो जोसेफ (Anto Joseph) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अब वह समूह के आने वाले बिजनेस डेली ‘द फाइनेंशियल स्टैंडर्ड’ (The Financial Standard) की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके साथ ही पांच साल से ज्यादा समय बाद उनकी वित्तीय पत्रकारिता में वापसी होगी।

नया बिजनेस डेली नवंबर में लॉन्च होने की उम्मीद है और इसका मुख्यालय कोच्चि में होगा। इसे एक राष्ट्रीय वित्तीय दैनिक के तौर पर पेश किया जाएगा। अखबार का फोकस भारत में तेजी से बदल रहे विकास के क्षेत्रों पर होगा। इसमें मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, इनोवेशन, परिवार के स्वामित्व वाले कारोबार और उभरते क्षेत्रीय बाजार शामिल हैं।

जोसेफ ने पांच साल से ज्यादा समय तक TNIE के तमिलनाडु एडिटोरियल ऑपरेशंस का नेतृत्व किया है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब खासकर दक्षिण भारत में बिजनेस अखबारों के क्षेत्र में नई दिलचस्पी देखने को मिल रही है।

वित्तीय पत्रकारिता में लंबा अनुभव

एंटो जोसेफ ने द इकोनॉमिक टाइम्स (The Economic Times) में एक दशक से ज्यादा समय तक काम किया। यहां उन्होंने एडिटर–इंफ्रास्ट्रक्चर की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद उन्होंने DNA में पांच साल से ज्यादा समय बिताया। यहां उन्होंने एसोसिएट एडिटर से शुरुआत की और आगे चलकर मैनेजिंग एडिटर-बिजनेस बने।

इससे पहले जोसेफ करीब छह साल तक फाइनेंशियल क्रॉनिकल (Financial Chronicle) में रेजिडेंट एडिटर, मुंबई और एसोसिएट एडिटर के पद पर भी काम कर चुके हैं। उन्होंने ब्रिटेन की Chevening Scholarship के तहत लंदन में The Guardian के लिए स्ट्रिंगर के तौर पर भी काम किया है। इसके अलावा वह Fortune, Newslaundry, Mint, Money9 और Caravan जैसे प्रकाशनों के लिए भी लिख चुके हैं।

बिजनेस अखबारों के बाजार में नई एंट्री

‘द फाइनेंशियल स्टैंडर्ड’ की लॉन्चिंग भारत के बिजनेस अखबारों के बाजार में एक और नाम जोड़ेगी। 2007 में Mint और 2008 में Financial Chronicle के लॉन्च के बाद से इस क्षेत्र में नए राष्ट्रीय खिलाड़ियों की संख्या सीमित रही है।

कोच्चि से शुरू होने वाला ‘द फाइनेंशियल स्टैंडर्ड’ भारत के आर्थिक विकास के बदलते भौगोलिक स्वरूप पर ध्यान देने की कोशिश करेगा। इसका मकसद पारंपरिक वित्तीय केंद्रों से आगे बढ़कर देश के दूसरे हिस्सों में बन रहे नए आर्थिक केंद्रों को भी कवरेज में जगह देना होगा।

क्या होगी ‘द फाइनेंशियल स्टैंडर्ड’ की कवरेज?

समूह के मुताबिक, ‘द फाइनेंशियल स्टैंडर्ड’ को एक प्रीमियम प्रकाशन के तौर पर पेश किए जाने की संभावना है। इसमें कॉरपोरेट जगत, सार्वजनिक नीति, पूंजी बाजार, कमोडिटीज और व्यापक बिजनेस इकोसिस्टम से जुड़ी खबरों को जगह मिलेगी। अखबार का जोर ओरिजिनल रिपोर्टिंग और विश्लेषण पर रहेगा।

‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ ग्रुप की CEO लक्ष्मी मेनन ने एक्सचेंज4मीडिया से बातचीत में कहा कि अखबार का फोकस भारत में आर्थिक विकास के बदलते स्वरूप पर होगा।

उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में भारत की विकास कहानी कुछ बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रही है। अब उभरते शहरों के उद्यमी, औद्योगिक क्षेत्रों के निर्माता, बढ़ते उपभोक्ता बाजार, हर जिले तक पहुंचते डिजिटल कारोबार और देश के अलग-अलग हिस्सों से तेजी से विस्तार कर रहे कारोबार इसमें बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

लक्ष्मी मेनन के मुताबिक, समूह को ऐसे वित्तीय दैनिक के लिए बड़ा अवसर दिखाई देता है, जो भारत के बदलते आर्थिक परिदृश्य को सामने रख सके।

उन्होंने कहा कि अखबार की संपादकीय कवरेज उन कारोबारों, उद्योगों, नीतियों और लोगों पर केंद्रित होगी, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में आर्थिक बदलाव को आगे बढ़ा रहे हैं। इसमें मैन्युफैक्चरिंग हब, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, इनोवेशन इकोसिस्टम, परिवार के स्वामित्व वाले कारोबार, क्षेत्रीय कंपनियां और तेजी से बढ़ते शहर शामिल होंगे।

बड़े वित्तीय केंद्र भी कवरेज में रहेंगे

लक्ष्मी मेनन ने कहा कि देश के स्थापित वित्तीय केंद्र भी अखबार की कवरेज का अहम हिस्सा बने रहेंगे। हालांकि, इन्हें भारत की व्यापक आर्थिक कहानी से जोड़कर देखा जाएगा।

उनके मुताबिक, अखबार स्थानीय कारोबार को राष्ट्रीय बाजारों से, क्षेत्रीय घटनाक्रम को व्यापक आर्थिक रुझानों से और उभरते कारोबारों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने की कोशिश करेगा। इसका फोकस वहां रहेगा, जहां पूंजी, प्रतिभा, तकनीक और कारोबारी महत्वाकांक्षा आर्थिक मूल्य पैदा कर रहे हैं।

बदलते पाठक व्यवहार के बीच लॉन्च

‘द फाइनेंशियल स्टैंडर्ड’ का लॉन्च ऐसे समय हो रहा है, जब प्रकाशक बदलती पाठक आदतों और बढ़ती उत्पादन लागत के बीच अपनी प्रिंट रणनीति में बदलाव कर रहे हैं। एक अलग बिजनेस डेली में निवेश करके समूह विशेष बिजनेस पत्रकारिता की मांग पर भरोसा जता रहा है। खास तौर पर ऐसे पाठकों के बीच, जो ओरिजिनल रिपोर्टिंग, गहराई और विश्लेषण वाली खबरें चाहते हैं।

‘‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ ग्रुप’ का इतिहास

चेन्नई मुख्यालय वाला ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ ग्रुप अपनी शुरुआत The Indian Express से जोड़ता है। इसकी स्थापना 1932 में पी. वरदराजुलु नायडू ने की थी और बाद में इसे रामनाथ गोयनका ने अधिग्रहित किया। 1999 में एक्सप्रेस ग्रुप के पुनर्गठन के बाद दक्षिण भारत के संस्करण ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ ग्रुप का हिस्सा बन गए, जबकि उत्तर भारत के संस्करण द इंडियन एक्सप्रेस के तहत जारी रहे।

आज समूह The New Indian Express के 40 से ज्यादा संस्करण प्रकाशित करता है। इसके अलावा समूह के प्रकाशनों में The Sunday Express, The Morning Standard, The Sunday Standard और तमिल दैनिक Dinamani भी शामिल हैं।

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CCI की जांच के अधिकार को मैडिसन कम्युनिकेशन की चुनौती, दिल्ली HC में 15 दिसंबर को सुनवाई

दिल्ली हाई कोर्ट ने मैडिसन कम्युनिकेशन (Madison Communication) की उस याचिका पर सुनवाई के लिए 15 दिसंबर की तारीख तय की है

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Friday, 18 September, 2026
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दिल्ली हाई कोर्ट ने मैडिसन कम्युनिकेशन (Madison Communication) की उस याचिका पर सुनवाई के लिए 15 दिसंबर की तारीख तय की है, जिसमें कंपनी ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की जांच से जुड़ी शक्तियों को चुनौती दी है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि मामले में पहले से लागू कोई भी अंतरिम राहत फिलहाल जारी रहेगी।

इस याचिका में CCI की जांच की संवैधानिक सीमाओं को लेकर सवाल उठाए गए हैं। खास तौर पर यह मुद्दा उठाया गया है कि क्या CCI का महानिदेशक (Director General) उस जांच का दायरा उन पक्षों और आरोपों से आगे बढ़ा सकता है, जिनके आधार पर आयोग ने अपनी शुरुआती राय यानी prima facie opinion बनाई थी।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने मैडिसन की याचिका और उससे जुड़ी अर्जियों को 15 दिसंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। साथ ही कोर्ट ने कहा कि मामले में पहले से लागू कोई अंतरिम आदेश आगे भी प्रभावी रहेगा।

यह मामला CCI की जांच प्रक्रिया से जुड़े एक बड़े कानूनी विवाद का हिस्सा है। इसमें यह सवाल भी शामिल है कि जब CCI किसी मामले में prima facie राय बनाता है, तो उसके बाद उसका महानिदेशक उन कंपनियों या गतिविधियों तक जांच को कितना बढ़ा सकता है, जिनका नाम शुरुआती आदेश में साफ तौर पर नहीं था।

मैडिसन ने धारा 26(1) की संवैधानिक वैधता पर उठाए सवाल

मैडिसन ने Competition Act की Section 26(1) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। कंपनी का कहना है कि इस प्रावधान के तहत महानिदेशक को CCI की शुरुआती prima facie राय का आधार बने पक्षों और आरोपों से आगे जाकर जांच का दायरा बढ़ाने की अनुमति नहीं मिलती।

विज्ञापन एजेंसी का तर्क है कि अगर जांच करने वाली इकाई को खुद ही जांच का दायरा बढ़ाने की छूट दी जाती है, तो यह CCI की वैधानिक शक्तियों का जरूरत से ज्यादा हस्तांतरण माना जा सकता है। मैडिसन ने इसे प्राकृतिक न्याय (natural justice) से जुड़ी चिंता भी बताया है।

दूसरी ओर, CCI ने महानिदेशक की जांच संबंधी शक्तियों का बचाव किया है। आयोग का कहना है कि एक बार Section 26(1) के तहत prima facie राय बन जाने के बाद, महानिदेशक मामले के विषय से जुड़ी कंपनियों और गतिविधियों की जांच कर सकता है।

फरवरी 2024 की लेनिएंसी अर्जी से शुरू हुआ मामला

मैडिसन का कहना है कि यह जांच फरवरी 2024 में दाखिल की गई लेनिएंसी आवेदन (leniency application) से आगे बढ़ी थी। कंपनी के मुताबिक, इसमें मुख्य रूप से भारतीय विज्ञापनदाताओं की संस्था Indian Society of Advertisers (ISA) के जरिए काम करने वाले विज्ञापनदाताओं के बीच संभावित buyers’ cartel से जुड़े आरोप उठाए गए थे।

मैडिसन का दावा है कि बाद की जांच में विज्ञापन एजेंसियों पर भी काफी ध्यान दिया गया। कंपनी ने एजेंसियों और विज्ञापनदाताओं के साथ किए गए अलग-अलग व्यवहार पर भी सवाल उठाए हैं। इसके लिए उसने मार्च 2025 में अपने मुंबई कार्यालय में की गई तलाशी और जब्ती की कार्रवाई का भी जिक्र किया है।

मैडिसन ने CCI के prima facie आदेश की व्याख्या और उसके बाद महानिदेशक की ओर से की गई जांच को भी चुनौती दी है। कंपनी ने ISA की ओर से कथित तौर पर प्रसारित Model Agency Agreement का हवाला देते हुए कहा है कि विज्ञापनदाताओं और एजेंसियों के बीच बातचीत या सौदेबाजी पर लगी पाबंदियों का असर एजेंसियों की कमाई के मॉडल पर पड़ा।

मैडिसन, जो Advertising Agencies Association of India (AAAI) की सदस्य है, का कहना है कि मीडिया एजेंसी के पारिश्रमिक से जुड़ी AAAI की गाइडलाइंस का उद्देश्य ऐसी परिस्थितियों के असर से एजेंसियों को बचाना था।

कंपनी ने इसी आधार पर सवाल उठाया है कि क्या महानिदेशक बिना CCI के किसी नए या ज्यादा स्पष्ट निर्देश के मूल आरोपों से आगे जाकर दूसरे पक्षों और दूसरी गतिविधियों की जांच कर सकता है।

वकीलों से जुड़े नियम भी चुनौती के घेरे में

यह मामला सिर्फ CCI की जांच के दायरे तक सीमित नहीं है। इसमें CCI (General) Regulations, 2024 के उन प्रावधानों को भी चुनौती दी गई है, जो जांच के दौरान वकीलों के आचरण और उनकी भागीदारी से जुड़े हैं। 

मैडिसन ने Regulations 46(3), 46(4), 46A और 47(c) समेत कई प्रावधानों को चुनौती दी है। कंपनी का कहना है कि ये प्रावधान CCI के वैधानिक अधिकार से आगे जाते हैं और Bar Council of India (BCI) के अधिकार क्षेत्र में दखल देते हैं। खास तौर पर Regulation 46(3) और 46(4) पर सवाल उठाए गए हैं। मैडिसन का तर्क है कि इनके जरिए CCI उन अधिकृत प्रतिनिधियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है, जिनके व्यवहार को पेशेवर कदाचार (professional misconduct) माना जाए।

कंपनी का कहना है कि वकीलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की व्यवस्था Advocates Act, 1961 के तहत होती है और यह अधिकार वैधानिक बार काउंसिल व्यवस्था के पास है।

BCI ने भी CCI के प्रावधानों का विरोध किया

इस चुनौती के चलते Bar Council of India भी मामले में सीधे जुड़ गया है। BCI का कहना है कि Advocates Act वकीलों के पंजीकरण, पेशेवर आचरण और अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़ी पूरी वैधानिक व्यवस्था देता है।

BCI के मुताबिक, किसी दूसरे कानून के तहत काम करने वाला नियामक अधीनस्थ कानून यानी subordinate legislation के जरिए वकीलों के लिए अलग से अनुशासनात्मक व्यवस्था नहीं बना सकता।

परिषद ने खास तौर पर उन प्रावधानों का विरोध किया है, जिनके चलते CCI की जांच के दौरान वकीलों के पेशेवर कदाचार को लेकर कोई निष्कर्ष या कार्रवाई हो सकती है। BCI ने उन शब्दों और भाषा पर भी सवाल उठाए हैं, जिनसे जांच के दौरान किसी व्यवहार को अनुचित माना जा सकता है।

CCI की पूछताछ के दौरान वकील की भूमिका का सवाल

मामले का एक और अहम मुद्दा Regulation 47(c) है। यह प्रावधान वकीलों को पूछताछ के लिए बुलाए गए लोगों के साथ जाने की अनुमति देता है, लेकिन जब बयान दर्ज किया जा रहा हो, तब वकील को इतनी दूरी पर रहने से रोकता है कि वह बातचीत सुन सके।

मैडिसन और BCI ने इस व्यवस्था को चुनौती दी है। उनका कहना है कि अगर वकील सवाल और उसके जवाब सुन ही नहीं सकता, तो उसकी मौजूदगी का फायदा काफी सीमित हो जाता है। BCI का तर्क है कि ऐसी पाबंदी से वकील अपने मुवक्किल को प्रभावी कानूनी सलाह देने, कानूनी विशेषाधिकार (privilege) से जुड़े मुद्दे पहचानने, प्रक्रिया में गड़बड़ी बताने या पूछताछ के दौरान कानूनी चिंता होने पर दखल देने की स्थिति में नहीं रहेगा।

परिषद ने “defiant behaviour” जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए हैं। उसने कहा है कि CCI की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने या संस्थागत गरिमा के खिलाफ माने जाने वाले आचरण की भाषा अस्पष्ट हो सकती है और इसका असर वैध प्रतिकूल या प्रभावी कानूनी पैरवी पर पड़ सकता है।

CCI का कहना है कि उसके नियामकीय प्रावधान उसकी वैधानिक शक्तियों के दायरे में हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि अधिकृत प्रतिनिधियों से जुड़े प्रावधानों को वकीलों पर बार काउंसिल की अनुशासनात्मक शक्तियों से अलग करके देखा जाना चाहिए।

विज्ञापन क्षेत्र में CCI की जांच पर भी नजर

मैडिसन की यह कानूनी चुनौती ऐसे समय में आई है, जब विज्ञापन और मीडिया खरीदारी (media buying) से जुड़े क्षेत्र में CCI की जांच को लेकर पहले से कानूनी सवाल उठ रहे हैं। व्यापक जांच में विज्ञापन क्षेत्र के अलग-अलग पक्षों के बीच कथित तालमेल की पड़ताल की गई है। इसमें विज्ञापन एजेंसियां और उद्योग से जुड़े संगठन भी CCI की जांच के दायरे में आए हैं।

मैडिसन की याचिका ने इस सवाल को अलग तरीके से सामने रखा है कि क्या किसी खास आरोप के आधार पर शुरू हुई जांच को बाद में महानिदेशक उन दूसरे पक्षों या गतिविधियों तक बढ़ा सकता है, जिनकी जानकारी जांच के दौरान सामने आती है।

इस मामले का असर सिर्फ विज्ञापन क्षेत्र तक सीमित नहीं हो सकता, क्योंकि Section 26(1) की व्याख्या से यह तय हो सकता है कि CCI की शुरुआती prima facie राय दर्ज होने के बाद उसकी जांच का दायरा कितना आगे तक जा सकता है।

इसके साथ ही, CCI की 2024 General Regulations भी संवैधानिक जांच के दायरे में आ गई हैं, खासकर उन मामलों में जहां ये नियम किसी पक्ष के कानूनी प्रतिनिधित्व के अधिकार और पेशेवर संस्थाओं की अनुशासनात्मक शक्तियों से जुड़े हैं।

फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट ने इन सभी मूल मुद्दों पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। मामले को 15 दिसंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है और लागू अंतरिम राहत जारी रहेगी। इस तरह, CCI की जांच की सीमा, वकीलों से जुड़े उसके नियमों और विज्ञापन क्षेत्र की व्यापक जांच को लेकर उठाए गए संवैधानिक सवालों पर अभी अंतिम फैसला होना बाकी है।

 

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ZEE की AGM में सभी 8 प्रस्ताव पास, सौरव अधिकारी समेत 5 निदेशकों पर फैसला

AGM के दौरान शेयरधारकों के लिए सवाल-जवाब का सत्र भी रखा गया। कंपनी के CEO पुनीत गोयनका ने उनके सवालों का जवाब दिया।

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Friday, 18 September, 2026
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जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (Zee Entertainment Enterprises Limited) की 44वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) 17 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। बैठक शाम 4 बजे शुरू हुई और 5:16 बजे समाप्त हुई। कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, बैठक में रखे गए सभी 8 प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ पास हो गए।

बैठक की अध्यक्षता कंपनी के चेयरपर्सन आर. गोपालन ने की। उन्होंने शेयरधारकों, निदेशकों, ऑडिटरों और अन्य प्रतिभागियों का स्वागत किया। कंपनी ने शेयरधारकों को AGM से पहले रिमोट ई-वोटिंग की सुविधा दी थी। इसके अलावा, बैठक के दौरान भी उन शेयरधारकों के लिए ई-वोटिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई, जिन्होंने पहले अपना वोट नहीं दिया था।

बैठक में कंपनी के CEO पुनीत गोयनका समेत बोर्ड के कई सदस्य मौजूद रहे। स्वतंत्र निदेशक डॉ. पी.वी. रमण मूर्ति AGM में शामिल नहीं हो सके और उनकी ओर से शिशिर देसाई ने बैठक में हिस्सा लिया। कंपनी के वैधानिक, आंतरिक और सचिवीय ऑडिटर, CEO, CFO और कंपनी सचिव के प्रतिनिधि भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में मौजूद थे।

16 शेयरधारकों ने पूछे सवाल 

AGM के दौरान शेयरधारकों के लिए सवाल-जवाब का सत्र भी रखा गया। कुल 16 शेयरधारकों ने कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन और अन्य संबंधित मामलों पर सवाल या टिप्पणियां की। कंपनी के CEO पुनीत गोयनका ने उनके सवालों का जवाब दिया।

कंपनी सचिव ने बताया कि विनोद कोठारी एंड कंपनी की जॉइंट मैनेजिंग पार्टनर विनिता नायर को वोटों की जांच के लिए स्क्रूटिनाइजर नियुक्त किया गया था। उन्होंने रिमोट ई-वोटिंग और AGM के दौरान हुई ई-वोटिंग की जांच की।

AGM में कौन-कौन से प्रस्ताव रखे गए?

AGM में कुल 8 प्रस्तावों पर मतदान हुआ। इनमें वित्तीय वर्ष 2025-26 के ऑडिटेड स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय नतीजों को मंजूरी देना, ₹2 प्रति इक्विटी शेयर अंतिम डिविडेंड घोषित करना और सौरव अधिकारी की दोबारा नियुक्ति शामिल थी। इसके अलावा कॉस्ट ऑडिटर के पारिश्रमिक की पुष्टि और चार स्वतंत्र निदेशकों की दोबारा नियुक्ति से जुड़े प्रस्ताव भी रखे गए। इन चार स्वतंत्र निदेशकों में दीपू बंसल, उत्तम प्रकाश अग्रवाल, डॉ. वेंकट रमण मूर्ति पिनिसेट्टी और शिशिर बाबुभाई देसाई शामिल हैं। इन सभी प्रस्तावों को भी जरूरी बहुमत मिला।

₹2 डिविडेंड के प्रस्ताव को 99.90% वोट

कंपनी के वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ₹2 प्रति इक्विटी शेयर अंतिम डिविडेंड घोषित करने के प्रस्ताव के पक्ष में 32,93,58,906 वोट पड़े, जो कुल वैध वोटों का 99.9050% था। इसके खिलाफ 3,13,103 वोट पड़े, यानी 0.0950% वोट विरोध में रहे।

वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 के ऑडिटेड स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय विवरणों को मंजूरी देने वाले प्रस्ताव के पक्ष में 32,69,73,821 वोट पड़े, जो 99.8084% थे। इसके खिलाफ 6,27,557 वोट, यानी 0.1916% वोट पड़े।

सौरव अधिकारी की दोबारा नियुक्ति को 92.21% वोट

सौरव अधिकारी को गैर-कार्यकारी, गैर-स्वतंत्र निदेशक के पद पर दोबारा नियुक्त करने के प्रस्ताव के पक्ष में 30,33,94,872 वोट पड़े, जो कुल वैध वोटों का 92.2102% था। वहीं, 2,56,30,525 वोट यानी 7.7898% वोट प्रस्ताव के खिलाफ पड़े। कॉस्ट ऑडिटर की पारिश्रमिक (फीस) को लेकर वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पुष्टि करने वाले प्रस्ताव के पक्ष में 99.4794% वोट पड़े, जबकि 0.5206% वोट इसके खिलाफ रहे।

चार स्वतंत्र निदेशकों की दोबारा नियुक्ति को भी मंजूरी

दीपू बंसल की स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव के पक्ष में 30,58,33,101 वोट, यानी 92.9513% वोट पड़े। इसके खिलाफ 7.0487% वोट रहे। उत्तम प्रकाश अग्रवाल की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव को 92.9522% वोट मिले, जबकि 7.0478% वोट इसके खिलाफ पड़े।

वहीं, डॉ. वेंकट रमण मूर्ति पिनिसेट्टी की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव के पक्ष में 78.5235% वोट पड़े और 21.4765% वोट इसके खिलाफ रहे। जबकि शिशिर बाबुभाई देसाई की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव को 78.5210% वोट मिले, जबकि 21.4790% वोट इसके खिलाफ पड़े।

स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट के मुताबिक, सभी 8 प्रस्ताव 17 सितंबर 2026 को जरूरी बहुमत के साथ पास हुए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वोटों के आंकड़े चार दशमलव तक लिए गए हैं।

AGM की वोटिंग के लिए 10 सितंबर 2026 को कट-ऑफ डेट तय की गई थी। इस तारीख को कंपनी में कुल 6,37,473 शेयरधारक थे। AGM में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 9 प्रमोटर/प्रमोटर ग्रुप और 117 पब्लिक शेयरधारकों ने हिस्सा लिया।

 

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NDTV ने स्नेहा मोरदानी को किया नियुक्त, सौंपी यह जिम्मेदारी

वह इससे पहले इंडिया टुडे, सीएनएन-न्यूज18, टाइम्स नाउ और न्यूजएक्स जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं।

Last Modified:
Thursday, 17 September, 2026
Sneha Mordani

‘एनडीटीवी’ (NDTV) ने वरिष्ठ पत्रकार स्नेहा मोरदानी (Sneha Mordani) को हेल्थ एडिटर के पद पर नियुक्त किया है। मोरदानी को टेलीविजन पत्रकारिता में करीब 19 वर्षों का अनुभव है। वह इससे पहले इंडिया टुडे, सीएनएन-न्यूज18, टाइम्स नाउ और न्यूजएक्स जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं।

NDTV में उनका स्वागत करते हुए कंपनी के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल ने कहा कि हेल्थ पत्रकारिता उन क्षेत्रों में से एक है, जहां पत्रकारिता लोगों के जीवन पर सीधा असर डाल सकती है। इसके लिए गंभीरता, विश्वसनीयता और जटिल जानकारी को ऐसे पत्रकारिता कंटेंट में बदलने की क्षमता जरूरी है, जिसे दर्शक आसानी से समझ सकें और जिस पर भरोसा कर सकें।

राहुल कंवल ने कहा कि स्नेहा मोरदानी के पास विशेषज्ञ रिपोर्टिंग का वर्षों का अनुभव, मजबूत संपादकीय समझ और हेल्थ बीट की गहरी समझ है।

वहीं, NDTV के चीफ कंटेंट ऑफिसर विनय सरावगी ने कहा कि NDTV Lifeline को हेल्थ से जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्र के आसपास एक डिजिटल-फर्स्ट पहल के तौर पर तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विश्वसनीय पत्रकारिता, भरोसेमंद विशेषज्ञता और ऐसे फॉर्मेट को एक साथ लाना है, जिनके जरिए आज के दर्शक जानकारी खोजते और उसे देखते हैं। विनय सरावगी के मुताबिक, हेल्थ पत्रकारिता में स्नेहा मोरदानी का अनुभव और सार्थक व निरंतर कवरेज तैयार करने की उनकी समझ इस पहल को आकार देने में महत्वपूर्ण होगी।

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टाटा संस के बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार को दी मंजूरी

टाटा संस के बोर्ड ने चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल पांच साल बढ़ाने और आरबीआई के निर्देश के अनुसार कंपनी की सार्वजनिक लिस्टिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ाने को मंजूरी दी।

Last Modified:
Thursday, 17 September, 2026
tata

टाटा संस (Tata Sons) के बोर्ड ने चेयरमैन एन चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) के कार्यकाल को पांच साल बढ़ाने को मंजूरी दी है। इसके साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) के निर्देश के अनुसार होल्डिंग कंपनी की पब्लिक लिस्टिंग (Public Listing) के लिए जरूरी कदम उठाने का फैसला किया गया है।

ये फैसले गुरुवार को हुई टाटा संस की बोर्ड मीटिंग (Board Meeting) में लिए गए। बैठक में मुख्य रूप से आरबीआई की लिस्टिंग से जुड़ी दिशा और चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर चर्चा हुई। इससे पहले चेयरमैन के उत्तराधिकारी और टाटा संस के आरबीआई से जुड़े आवेदन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी।

टाटा संस ने प्राइवेट कंपनी के रूप में बने रहने के लिए आरबीआई से कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (Core Investment Company) का रजिस्ट्रेशन वापस लेने का आवेदन किया था। आरबीआई ने पिछले सप्ताह इस आवेदन को खारिज कर दिया था। इसके बाद टाटा संस पर अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (Upper-layer Non-Banking Financial Company) से जुड़े नियामकीय नियम लागू होंगे, जिसमें लिस्टिंग की जरूरत भी शामिल है।

बोर्ड मीटिंग में कंपनी की लिस्टिंग के मुद्दे पर चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, नोएल टाटा (Noel Tata) ने भी बोर्ड के सामने अपना पक्ष रखा। इसके बाद बोर्ड ने आईपीओ (IPO) प्रस्ताव पर मतदान किया और उसे मंजूरी दे दी।

वहीं, एन चंद्रशेखरन का पांच साल का एक्सटेंशन टाटा संस के निदेशक के रूप में उनकी दोबारा नियुक्ति पर निर्भर है। उनका मौजूदा चेयरमैन कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म हो रहा है। चेयरमैन के पद पर बने रहने के लिए उनका निदेशक बने रहना जरूरी है।

टाटा संस की वार्षिक आम बैठक (Annual General Meeting) भी फिलहाल लंबित है। अगस्त में कोरम (Quorum) पूरा नहीं होने के कारण बैठक स्थगित हो गई थी।

इससे पहले टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रिम्यूनरेशन कमेटी (Nomination and Remuneration Committee) ने चंद्रशेखरन को एक और पांच साल के लिए निदेशक के रूप में दोबारा नियुक्त करने की सिफारिश करने का फैसला किया था। सूत्रों के मुताबिक, कमेटी के सदस्य वेणु श्रीनिवासन (Venu Srinivasan) ने भी चंद्रशेखरन के बने रहने का समर्थन किया।

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वरिष्ठ पत्रकार रास बिहारी ने जॉइन किया Varta24 Media, बने पॉलिटिकल एडिटर

रास बिहारी पश्चिम बंगाल की राजनीति पर चार पुस्तकें लिख चुके हैं। इसके अलावा वह विभिन्न टीवी चैनलों पर राजनीतिक बहसों में हिस्सा लेते रहते हैं।

Last Modified:
Thursday, 17 September, 2026
Ras Bihari

वरिष्ठ पत्रकार रास बिहारी ने वार्ता24मीडिया (Varta24 Media) के साथ नई पारी की शुरुआत की है। उन्होंने यहां बतौर पॉलिटिकल एडिटर जॉइन किया है।

रास बिहारी को मीडिया में काम करने का करीब साढ़े चार दशक का अनुभव है। करीब 20 साल दैनिक हिन्दुस्तान में काम करने के बाद वे नईदुनिया में मेट्रो संपादक, गवर्नेंस नाउ में सीनियर एडिटर, हिन्दुस्थान समाचार एजेंसी में कार्यकारी संपादक, लाइव इंडिया में ब्यूरो चीफ, रांची एक्सप्रेस में राजनीतिक संपादक रहे। इसके अलावा प्रधानमंत्री जनऔषधि परियोजना में डायरेक्टर (मीडिया) रह चुके हैं।

करियर के शुरुआत में वह वीर अर्जुन अखबार में रहे। इसके अलावा कॉलेज के दिनों में उन्होंने नवभारत टाइम्स और पंजाब केसरी में अपनी सेवाएं दीं। रास बिहारी ने आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और हरियाणा में हिसार स्थित गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए की पढ़ाई की है।

रास बिहारी पश्चिम बंगाल की राजनीति पर चार पुस्तकें लिख चुके हैं। इसके अलावा वह विभिन्न टीवी चैनलों पर राजनीतिक बहसों में हिस्सा लेते रहते हैं।

गौरतलब है कि Varta24 Media देश के तेजी से विस्तार कर रहे एकीकृत मीडिया संगठनों में शामिल है। यह न्यूज मीडिया, एडवरटाइजिंग, कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन और स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशन के चार प्रमुख क्षेत्रों में कार्य करती है। इसके कार्यालय दिल्ली-नोएडा, लखनऊ, हैदराबाद और मुंबई में स्थित हैं।

समाचार4मीडिया की ओर से रास बिहारी को उनकी नई पारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।

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गोपिका पंत बनीं वोडाफोन आइडिया की स्वतंत्र महिला निदेशक

वोडाफोन आइडिया ने कानूनी विशेषज्ञ गोपिका पंत को अतिरिक्त निदेशक और स्वतंत्र महिला निदेशक नियुक्त किया है। अनिल बेररा की स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्ति पर भी शेयरधारकों से मंजूरी मांगी है।

Last Modified:
Thursday, 17 September, 2026
Vodafone Idea

वोडाफोन आइडिया (Vodafone Idea) ने कानूनी विशेषज्ञ गोपिका पंत (Gopika Pant) को बोर्ड में अतिरिक्त निदेशक (Additional Director) और स्वतंत्र महिला निदेशक (Independent Woman Director) नियुक्त किया है। उनका पांच साल का कार्यकाल 17 सितंबर 2026 से शुरू हुआ है।

कंपनी के बोर्ड (Board) ने 14 सितंबर को उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी थी। हालांकि, इस नियुक्ति के लिए अब शेयरधारकों (Shareholders) की मंजूरी जरूरी होगी। इसके लिए कंपनी ने पोस्टल बैलेट (Postal Ballot) प्रक्रिया शुरू की है।

गोपिका पंत को कानूनी क्षेत्र में चार दशक से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने इंडियन लॉ पार्टनर्स (Indian Law Partners) की स्थापना की है। वह भारत में कानून की प्रैक्टिस करने के लिए योग्य हैं और न्यूयॉर्क बार (New York Bar) में भी एडमिटेड हैं। उनकी विशेषज्ञता में कॉरपोरेट और कमर्शियल लॉ (Corporate and Commercial Law), सीमा-पार लेनदेन (Cross-border Transactions), विलय एवं अधिग्रहण (Mergers and Acquisitions) और कॉरपोरेट रिस्ट्रक्चरिंग (Corporate Restructuring) शामिल हैं।

इसके अलावा, वोडाफोन आइडिया ने अनिल बेररा (Anil Berera) की स्वतंत्र निदेशक (Independent Director) के रूप में नियुक्ति के लिए भी शेयरधारकों की मंजूरी मांगी है। बेररा ने 31 अगस्त 2026 से पांच साल के कार्यकाल के लिए बोर्ड में जिम्मेदारी संभाली है।

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Dentsu में IT सर्च के बाद हर्ष राजदान ने संभाला मोर्चा, एम्प्लॉयीज को दिया भरोसा

ऐडवर्टाइजिंग ग्रुप Dentsu के भारत में इनकम टैक्स विभाग की कई शहरों में हुई सर्च के बाद कंपनी के साउथ एशिया के सीईओ हर्ष राजदान ने एम्प्लॉयीज के साथ कई टाउनहॉल मीटिंग कीं।

Last Modified:
Thursday, 17 September, 2026
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ऐडवर्टाइजिंग ग्रुप Dentsu के भारत में इनकम टैक्स विभाग की कई शहरों में हुई सर्च के बाद कंपनी के साउथ एशिया के सीईओ हर्ष राजदान ने एम्प्लॉयीज के साथ कई टाउनहॉल मीटिंग कीं। इस दौरान उन्होंने एम्प्लॉयीज के सहयोग और एकजुटता की सराहना की और भरोसा दिलाया कि कंपनी मौजूदा स्थिति से बाहर निकल जाएगी।

मामले से परिचित लोगों के मुताबिक, टाउनहॉल का मुख्य मकसद सर्च ऑपरेशन के बाद एम्प्लॉयीज को भरोसा दिलाना और कंपनी के कामकाज में निरंतरता बनाए रखना था। इनकम टैक्स की यह कार्रवाई कई दिनों तक चली और इस दौरान Dentsu के भारत में अलग-अलग ऑफिसों में वित्तीय व व्यक्तिगत रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और सर्वर पर मौजूद डेटा की जांच की गई।

एम्प्लॉयीज को दिया भरोसा

टाउनहॉल के दौरान हर्ष राजदान ने एम्प्लॉयीज से कहा कि कंपनी इस मौजूदा स्थिति से निकल जाएगी और चीजें धीरे-धीरे सामान्य हो जाएंगी। उन्होंने सर्च के दौरान एम्प्लॉयीज की ओर से दिखाए गए सहयोग और एकजुटता के लिए उनका धन्यवाद भी किया।

जानकारी के मुताबिक, हर्ष राजदान का संदेश मुख्य रूप से एम्प्लॉयीज को भरोसा देने और कामकाज जारी रखने पर केंद्रित रहा। उन्होंने इनकम टैक्स जांच की विस्तृत जानकारी पर चर्चा नहीं की। उन्होंने सर्च के कारण एम्प्लॉयीज को हुई परेशानी को स्वीकार किया और इस दौरान हुई असुविधा के लिए माफी भी मांगी। खास तौर पर उन एम्प्लॉयीज का धन्यवाद किया गया, जो सीधे तौर पर ऑफिसों में हुई सर्च से प्रभावित हुए थे।

एक एम्प्लॉयी के मुताबिक, कई दिनों की अनिश्चितता के बाद एम्प्लॉयीज के लिए नेतृत्व से सीधे बात सुनना जरूरी था। टाउनहॉल में एम्प्लॉयीज को साथ बने रहने, अपने काम पर ध्यान देने और मौजूदा स्थिति को संगठन के कामकाज पर हावी न होने देने का संदेश दिया गया।

कई शहरों में हुई थी इनकम टैक्स की सर्च

इनकम टैक्स विभाग की कार्रवाई की शुरुआत Dentsu के मुंबई और दिल्ली ऑफिस से हुई थी। इसके बाद इसमें कंपनी के अन्य लोकेशन भी शामिल हुए। मुंबई ऑफिस में करीब 20 इनकम टैक्स अधिकारियों के पहुंचने की जानकारी सामने आई थी।

अधिकारियों ने कंपनी के वित्तीय और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की, जिसमें सर्वर पर मौजूद डेटा भी शामिल था। सर्च के दौरान एम्प्लॉयीज की आवाजाही पर भी कुछ समय के लिए प्रतिबंध लगाया गया था और कुछ व्यक्तिगत फोन व लैपटॉप की जांच की गई थी। इसके बाद एम्प्लॉयीज को घर से काम करने के लिए कहा गया था।

इस पूरी कार्रवाई के दौरान कंपनी की ओर से जानकारी साझा करने की क्षमता भी सीमित रही, क्योंकि इनकम टैक्स विभाग अपनी जांच कर रहा था। ऐसे में एम्प्लॉयीज के बीच कंपनी और उनके काम पर संभावित असर को लेकर चिंता बनी हुई थी।

कंपनी फिर से सामान्य स्थिति में आएगी’

टाउनहॉल में कंपनी की ओर से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि मौजूदा स्थिति एक मुश्किल दौर है, लेकिन इससे Dentsu का कामकाज रुकने वाला नहीं है।

एक एम्प्लॉयी के अनुसार, नेतृत्व का जोर इस बात पर था कि कंपनी अपने क्लाइंट्स और काम पर ध्यान बनाए रखे और जांच के साथ-साथ कारोबार को भी सामान्य तरीके से चलाया जाए।

Dentsu के एम्प्लॉयीज के मुताबिक, टाउनहॉल का मकसद जांच से जुड़ी नई जानकारी देना कम और एम्प्लॉयीज का भरोसा बनाए रखना ज्यादा था।

जांच में क्या सामने आया, अभी स्पष्ट नहीं

इनकम टैक्स विभाग की कार्रवाई में वित्तीय रिकॉर्ड, टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी व राजनीतिक अभियानों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच किए जाने की जानकारी है। हालांकि, जांच में किन खास लेन-देन को देखा जा रहा है और क्या इससे कोई टैक्स देनदारी सामने आएगी, इसकी सार्वजनिक रूप से जानकारी नहीं दी गई है।

Dentsu India ने भी इनकम टैक्स जांच का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया है। e4m ने इस मामले पर Dentsu से प्रतिक्रिया मांगी थी, लेकिन खबर प्रकाशित होने तक कंपनी की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

Dentsu पहले भी जांच के दायरे में रहा है

Dentsu India इससे पहले भी अलग-अलग मामलों में जांच का सामना कर चुका है। 2022 में इनकम टैक्स विभाग ने कंपनी के मुंबई ऑफिस की तलाशी ली थी। यह कार्रवाई उसके एक क्लाइंट से जुड़ी जांच के सिलसिले में हुई थी।

इसके अलावा दिसंबर 2024 में प्रवर्तन निदेशालय ने Dentsu India से जुड़े परिसरों की तलाशी ली थी। यह कार्रवाई कथित ₹137 करोड़ के गबन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई थी। उस मामले में Dentsu ने पहले कहा था कि मामला किसी खास बिजनेस यूनिट से जुड़े पूर्व एम्प्लॉयीज और तीसरे पक्ष की कथित धोखाधड़ी से संबंधित था।

कंपनी एक अलग मामले में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की जांच के दायरे में भी रही है। हालांकि, CCI की कार्यवाही और मौजूदा इनकम टैक्स जांच के बीच कोई स्थापित संबंध नहीं बताया गया है। फिलहाल Dentsu में फोकस कारोबार को सामान्य स्थिति में लाने और एम्प्लॉयीज का भरोसा बनाए रखने पर है। टाउनहॉल से भी यही संकेत मिला कि कंपनी मौजूदा व्यवधान के बावजूद अपना कामकाज जारी रखने और आगे बढ़ने पर जोर दे रही है।

 

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पैनोरमा स्टूडियोज ने ‘Drishyam 3’ के लिए किया डिस्ट्रीब्यूशन एग्रीमेंट

पैनोरमा स्टूडियोज इंटरनेशनल ने अपकमिंग हिंदी फिल्म ‘दृश्यम-3 / दृश्यम – द कंक्लूजन के लिए Digital18 Media Private Limited के साथ डिस्ट्रीब्यूशन एग्रीमेंट  किया है।

Last Modified:
Thursday, 17 September, 2026
PanoramaStudios874

पैनोरमा स्टूडियोज इंटरनेशनल (Panorama Studios International Limited) ने अपकमिंग हिंदी फिल्म ‘दृश्यम-3' / दृश्यम – द कंक्लूजन के लिए Digital18 Media Private Limited के साथ डिस्ट्रीब्यूशन एग्रीमेंट  किया है। कंपनी ने यह जानकारी 16 सितंबर 2026 को स्टॉक एक्सचेंज को दी है।

कंपनी के मुताबिक, यह समझौता फिल्म के सिनेमाघरों में प्रदर्शन और हवाई यात्रा के दौरान प्रसारण से जुड़े अधिकारों के उपयोग से संबंधित है।

‘दृश्यम-3’ में अजय देवगन और अन्य कलाकार नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन अभिषेक पाठक ने किया है। 

Panorama Studios ने यह जानकारी SEBI Listing Regulations, 2015 के Regulation 30 के तहत स्टॉक एक्सचेंज के साथ साझा की है।

कंपनी ने बताया कि उसने इस फिल्म के अधिकारों को लेकर Digital18 Media Private Limited के साथ डिस्ट्रीब्यूशन समझौता किया है। हालांकि, फाइलिंग में इस समझौते से होने वाली डील वैल्यू या कंपनी की कमाई से जुड़ी कोई जानकारी नहीं दी गई है।

 

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