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यौन उत्पीड़न का विरोध करने वाली तमाम महिला पत्रकारों की जीत है प्रिया रमानी केस: IWPC
दिल्ली की एक अदालत ने वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर की मानहानि के मामले में पत्रकार प्रिया रमानी को बुधवार को बरी कर दिया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
दिल्ली की एक अदालत ने वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर की मानहानि के मामले में पत्रकार प्रिया रमानी को बुधवार को बरी कर दिया है। कोर्ट में यह मामला दो साल से अधिक समय तक चला। वहीं इस मामले को लेकर अब भारतीय महिला प्रेस वाहिनी (आईडब्ल्यूपीसी) का बयान सामने आया है।
आईडब्ल्यूपीसी ने पूर्व मंत्री एमजे अकबर द्वारा दायर मानहानि के मामले में पत्रकार प्रिया रमानी का बरी होने को महिला पत्रकारों की जीत करार दिया है।
आईडब्ल्यूपीसी का कहना है कि एक महिला पत्रकार के रूप में रमानी ने हमेशा ही यौन उत्पीड़न के खिलाफ आवाजें उठाईं हैं। वह न्यूज रूम में अप्रिय टिप्पणियों से दूर रही हैं और बुरी नजरों से बचती रही हैं।
बता दें कि #MeToo कैंपेन के तहत 2018 में प्रिया रमानी ने एमजे अकबर पर तकरीबन 20 साल पहले उनके साथ यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था। हालांकि, अकबर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। यौन उत्पीड़न के आरोप लगने के बाद अकबर ने प्रिया रमानी के खिलाफ दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में 15 अक्टूबर 2018 को मानहानि का मुकदमा दायर किया था।
दिल्ली की एक अदालत ने मानहानि के मामले में बुधवार को अपना फैसला सुनाते वक्त यह कहते हुए रमानी को बरी कर दिया कि एक महिला को दशकों के बाद भी किसी भी मंच पर अपनी शिकायत दर्ज करने का अधिकार है। इस दौरान अदालत ने यह भी माना कि किसी महिला को अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न के खिलाफ आवाज बुलंद करने पर दंडित नहीं किया जाना चाहिए।
एक बयान में आईडब्ल्यूपीसी ने कहा कि वह रमानी को बरी किए जाने के अदालत के फैसले का स्वागत करती है। यह महिला पत्रकारों की जीत है, जिन्होंने हमेशा ही यौन उत्पीड़न का विरोध किया है।
बयान में यह भी कहा गया, ‘हम सभी सुरक्षित कार्यस्थल चाहते हैं, लेकिन भेड़िये अंदर ही बैठे हुए हैं।’ संगठन ने कहा कि वह मुद्दे पर रमानी के संकल्प की प्रशंसा करता है।
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