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OTT पर दिव्यांग दर्शकों की सुविधा संबंधी दिशा-निर्देश तीन महीने में होंगे तैयार: MIB
केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि वह आने वाले तीन महीनों में सुनने और देखने में अक्षम लोगों के लिए OTT प्लेटफॉर्म्स पर एक्सेसिबिलिटी से जुड़े दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप दे देगी।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 4 months ago
केंद्र सरकार ने गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि वह आने वाले तीन महीनों में सुनने और देखने में अक्षम लोगों के लिए ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स पर एक्सेसिबिलिटी से जुड़े दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप दे देगी।
जस्टिस सचिन दत्ता ने सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया कि मंत्रालय ने इन दिशा-निर्देशों का ड्राफ्ट अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया है और अब इस पर जनता और हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं।
कोर्ट यह मामला उन दृष्टिबाधित लोगों की याचिका पर सुन रहा था जिन्होंने हाल ही में रिलीज हुई बॉलीवुड फिल्मों में दिव्यांग दर्शकों के लिए आवश्यक सुविधाओं की कमी को लेकर शिकायत दर्ज की थी।
बता दें कि प्रसारण (broadcasting) के क्षेत्र में OTT कंटेंट वह ऑडियो, वीडियो या अन्य मीडिया सामग्री होती है जो इंटरनेट के जरिए दर्शकों तक पहुंचाई जाती है, यानी इसके लिए केबल टीवी या सैटेलाइट सेवा की जरूरत नहीं होती।
सरकार की ओर से मंत्रालय के वकील ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि याचिकाकर्ताओं की ओर से दिए गए सुझावों पर विचार किया जाएगा और उन्हें अंतिम दिशा-निर्देश तैयार करते समय ध्यान में रखा जाएगा। मंत्रालय ने यह भी आश्वासन दिया कि अंतिम दिशा-निर्देश तीन महीने के भीतर जारी कर दिए जाएंगे। इस आश्वासन के बाद जस्टिस ने कहा कि अब इस याचिका में किसी अतिरिक्त आदेश की आवश्यकता नहीं है और मामले का निपटारा कर दिया गया।
इससे पहले कोर्ट ने मंत्रालय को निर्देश दिया था कि वह "विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम" के तहत इन दिशा-निर्देशों को तैयार करे।
वहीं, याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ड्राफ्ट दिशा-निर्देशों में कुछ खामियां हैं। उनका कहना था कि मंत्रालय ने उद्योग जगत के लोगों से तो सलाह ली, लेकिन दिव्यांग व्यक्तियों से कोई परामर्श नहीं किया, जबकि सभी हितधारकों की राय लेना जरूरी है।
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को यह छूट भी दी कि वे इन ड्राफ्ट दिशा-निर्देशों पर अपनी प्रतिक्रिया मंत्रालय को सौंप सकते हैं। जस्टिस ने कहा, “यदि याचिकाकर्ता को दिशा-निर्देशों के निर्माण से संबंधित कोई आपत्ति या शिकायत है, तो उसे कानूनी कार्रवाई करने की स्वतंत्रता होगी।”
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