OpenAI जुटाएगी 30 अरब डॉलर, 1.4 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा वैल्यूएशन का लक्ष्य

चैट जीपीटी (ChatGPT) बनाने वाली कंपनी OpenAI करीब 30 अरब डॉलर की नई फंडिंग जुटाने की तैयारी में है।

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Wednesday, 21 October, 2026
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चैट जीपीटी (ChatGPT) बनाने वाली कंपनी OpenAI करीब 30 अरब डॉलर की नई फंडिंग जुटाने की तैयारी में है। कंपनी इस फंडिंग के जरिए अपना मूल्यांकन 1.4 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा पहुंचाने का लक्ष्य रख रही है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, OpenAI यह प्रक्रिया तेजी से पूरी करना चाहती है, ताकि नवंबर के मध्य में प्रतिद्वंद्वी कंपनी Anthropic के संभावित आईपीओ से पहले निवेशकों से पैसा जुटाया जा सके।

रिपोर्ट के मुताबिक, OpenAI के मौजूदा निवेशकों में शामिल जापान के सॉफ्टबैंक ग्रुप और अबू धाबी की एमजीएक्स के इस फंडिंग दौर में हिस्सा लेने को लेकर बातचीत चल रही है। कंपनी ने बड़े निवेश फंडों और सरकारी निवेश संस्थानों के साथ भी बैठकें की हैं। वह कम समय में इस फंडिंग प्रक्रिया को पूरा करना चाहती है।

50 अरब डॉलर तक पहुंचा OpenAI का सालाना राजस्व

OpenAI निवेशकों को बता रही है कि उसका सालाना आधार पर अनुमानित राजस्व 50 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। कंपनी को उम्मीद है कि साल के अंत तक यह बढ़कर 70 अरब डॉलर हो सकता है। नए एआई मॉडल लॉन्च होने के बाद कंपनी के राजस्व में बढ़ोतरी हुई है।

कंपनी ने अपने कम कीमत वाले एआई मॉडल की कीमतें भी घटाई हैं। OpenAI का कहना है कि इससे उसके मॉडल का इस्तेमाल बढ़ा है और भविष्य में कीमतों में और कटौती की गुंजाइश बन सकती है।

OpenAI इस फंडिंग के जरिए अपने बड़े बुनियादी ढांचे से जुड़े खर्चों को पूरा करना और वित्तीय स्थिति मजबूत करना चाहती है। कंपनी की योजना 2027 में शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की भी है।

Anthropic के राजस्व में भी तेजी

OpenAI की सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धियों में शामिल Anthropic भी निवेशकों का ध्यान खींच रही है। रॉयटर्स की पिछली रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई तक कंपनी का सालाना आधार पर अनुमानित राजस्व करीब 65 अरब डॉलर पहुंच गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, Anthropic ने निवेशकों को बताया कि उसका तिमाही राजस्व दूसरी तिमाही के 11.6 अरब डॉलर से बढ़कर तीसरी तिमाही में 16.8 अरब डॉलर हो गया। हालांकि, महीने-दर-महीने राजस्व वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ने से कंपनी के मूल्यांकन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, Anthropic के संभावित आईपीओ के लिए कुछ मौजूदा और संभावित निवेशक करीब 1.5 लाख करोड़ डॉलर के मूल्यांकन के पक्ष में हैं, जबकि कंपनी 2 लाख करोड़ डॉलर के मूल्यांकन की उम्मीद कर रही है। तीसरी तिमाही के नतीजे उम्मीदों से कमजोर रहने के बाद इस अंतर पर चर्चा तेज हुई है।

दोनों कंपनियों के बीच निवेश जुटाने की होड़

OpenAI और Anthropic तेजी से बढ़ते एआई बाजार में निवेशकों से पूंजी जुटाने की होड़ में हैं। दोनों कंपनियों के निवेशकों का दायरा भी काफी हद तक एक-दूसरे से मिलता-जुलता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, OpenAI चाहती है कि Anthropic के वित्तीय आंकड़े सार्वजनिक होने से पहले उसकी फंडिंग प्रक्रिया पूरी हो जाए। इससे निवेशकों को दोनों कंपनियों की वित्तीय स्थिति की तुलना करने के लिए मिलने वाली जानकारी के समय पर असर पड़ सकता है।

दोनों कंपनियों के राजस्व की गणना के तरीके भी चर्चा में हैं। OpenAI साझेदारों का हिस्सा घटाने के बाद राजस्व दर्ज करती है। उसने आरोप लगाया है कि Anthropic तीसरे पक्ष के क्लाउड सेवा प्रदाताओं के जरिए बेचे गए अनुबंधों की कुल रकम को राजस्व के रूप में गिनती है। हालांकि, Anthropic का कहना है कि वह लेखांकन के स्थापित नियमों का पालन करती है।

मार्च में 852 अरब डॉलर था OpenAI का मूल्यांकन

मार्च में 122 अरब डॉलर की फंडिंग जुटाने के बाद OpenAI का मूल्यांकन 852 अरब डॉलर हो गया था। इस फंडिंग में Amazon की ओर से 50 अरब डॉलर तक निवेश करने की प्रतिबद्धता भी शामिल थी।

अब कंपनी नए फंडिंग दौर के जरिए अपने मूल्यांकन को और बढ़ाना चाहती है। हालांकि, एआई कंपनियों के बढ़ते मूल्यांकन और उनके बुनियादी ढांचे पर होने वाले भारी खर्च को लेकर निवेशकों में सतर्कता भी बढ़ रही है।

एआई कंपनियों के आईपीओ पर बाजार की नजर

एआई कंपनियों के मूल्यांकन को लेकर बढ़ती चिंता का असर दूसरी कंपनियों की शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की योजनाओं पर भी पड़ रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ कंपनियों ने Anthropic के संभावित आईपीओ से पहले निवेशकों का ध्यान और पूंजी हासिल करने की प्रतिस्पर्धा से बचने के लिए अपनी लिस्टिंग योजनाएं टाल दी हैं या रोक दी हैं।

इनमें ब्लैकस्टोन समर्थित AirTrunk REIT, एनवीडिया समर्थित Firmus और सॉफ्टबैंक समर्थित SB Energy शामिल हैं। परमाणु ऊर्जा सेवाओं से जुड़ी कंपनी Holtec ने भी डेटा सेंटर की मांग को लेकर अनिश्चितता का हवाला देते हुए पिछले महीने अमेरिका में अपनी लिस्टिंग योजना वापस ले ली थी।

एआई इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों पर भी दबाव

एआई कारोबार को चलाने के लिए डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग क्षमता और सेमीकंडक्टर पर भारी निवेश की जरूरत होती है। ऐसे में निवेशक अब यह देख रहे हैं कि कंपनियां अपने खर्च के मुकाबले कितना राजस्व और मुनाफा कमा पाएंगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी CoreWeave के शेयरों और कर्ज में तेज गिरावट आई है। निवेशक कंपनी के विस्तार के लिए लिए गए करीब 50 अरब डॉलर के कर्ज को लेकर सवाल उठा रहे हैं। सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में भी भारी गिरावट देखी गई है।

बढ़ती बॉन्ड यील्ड, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और टेक्नोलॉजी शेयरों में हालिया बिकवाली ने भी बाजार का माहौल प्रभावित किया है। इससे आईपीओ लाने की तैयारी कर रही कंपनियों के लिए निवेशकों को आकर्षित करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

कुल मिलाकर, OpenAI की तेजी से फंडिंग जुटाने की कोशिश दिखाती है कि एआई क्षेत्र में कारोबार और राजस्व तेजी से बढ़ने के बावजूद निवेशकों का ध्यान अब कंपनियों के वास्तविक वित्तीय प्रदर्शन, बुनियादी ढांचे पर खर्च और भविष्य में मिलने वाले रिटर्न पर भी है। ऐसे माहौल में खरबों डॉलर के मूल्यांकन को सही साबित करना OpenAI और Anthropic, दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

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टीवी चैनलों को सूचना-प्रसारण मंत्रालय की सख्त हिदायत, AI व अपराध की खबरों पर बरतें सावधानी

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को कार्यक्रम संहिता (Programme Code) का सख्ती से पालन करने की हिदायत दी है।

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Wednesday, 21 October, 2026
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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को कार्यक्रम संहिता (Programme Code) का सख्ती से पालन करने की हिदायत दी है। मंत्रालय ने अपराध की सनसनीखेज खबरें दिखाने, परेशान करने वाले दृश्यों को बार-बार प्रसारित करने, लाइव बहसों में भड़काऊ बयान और खबरों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई है।

21 अक्टूबर 2026 को जारी सलाह में मंत्रालय ने कहा है कि टीवी चैनलों को केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 और केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 के प्रावधानों का पूरी तरह पालन करना होगा। नियमों का उल्लंघन होने पर संबंधित चैनलों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

मंत्रालय की यह सलाह इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी (IDC) की टिप्पणियों के बाद आई है। इस समिति ने पाया कि कई टीवी चैनलों पर प्रसारित होने वाली सामग्री हमेशा कार्यक्रम संहिता की भावना के अनुरूप नहीं होती। समिति ने यह भी देखा कि एक जैसे विषयों पर कई चैनल मिलते-जुलते समाचार और दृश्य प्रसारित कर रहे हैं।

समिति ने सभी निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को उनके कानूनी दायित्वों की याद दिलाने की सिफारिश की थी। साथ ही, उसने कहा कि टीवी प्रसारण के जरिए अनुचित व्यवहार और भाषा को सामान्य नहीं बनाया जाना चाहिए।

आतंकी अभियानों की लाइव कवरेज पर रोक

मंत्रालय ने साफ किया है कि सुरक्षा बलों की ओर से चलाए जा रहे आतंकवाद विरोधी अभियानों की लाइव कवरेज पर रोक है। केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमों के नियम 6(1)(p) के तहत ऐसे अभियानों के दौरान मीडिया कवरेज केवल अधिकृत अधिकारी की ओर से समय-समय पर दी जाने वाली जानकारी तक सीमित रहनी चाहिए। अभियान खत्म होने तक इस नियम का पालन करना होगा।

मंत्रालय ने चैनलों को यह भी सलाह दी है कि जरूरत पड़ने पर वीडियो और तस्वीरों पर तारीख व समय जरूर दिखाएं। इससे दर्शकों को पहले रिकॉर्ड किए गए दृश्यों को लाइव प्रसारण समझने की गलतफहमी नहीं होगी।

इस संबंध में मंत्रालय ने 12 जून 2024 और 26 अप्रैल 2025 को जारी अपनी पिछली सलाह का भी जिक्र किया है।

अपराध और हिंसा की खबरों में बरतें सावधानी

मंत्रालय ने टीवी चैनलों को हिंसक, डरावने और परेशान करने वाले दृश्य दिखाते समय सावधानी बरतने को कहा है। ऐसे कार्यक्रमों को नियम 6(1)(a) का पालन करना होगा, जिसके तहत ऐसी सामग्री से बचना जरूरी है जो अच्छे स्वाद और शालीनता के मानकों के खिलाफ हो या दर्शकों को अनावश्यक परेशानी पहुंचाए।

मंत्रालय के मुताबिक, अपराध और हिंसा से जुड़ी खबरें सत्यापित तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए और उन्हें संतुलित व जिम्मेदारी के साथ दिखाया जाना चाहिए। चैनलों को जानबूझकर गलत जानकारी, भ्रामक संकेत और आधे-अधूरे सच प्रसारित करने से बचने की हिदायत दी गई है। नियम 6(1)(d) के तहत इस तरह की सामग्री पर रोक है।

इसके अलावा, ऐसी सनसनीखेज खबरें दिखाने से भी बचने को कहा गया है, जिनसे गैरकानूनी या सामाजिक रूप से अनुचित व्यवहार को बढ़ावा मिलता हो या उसे सामान्य बताया जाता हो।

मंत्रालय ने परेशान करने वाले दृश्यों को बार-बार दिखाने या लगातार दोहराने से बचने को कहा है। जरूरत पड़ने पर तस्वीरों और वीडियो को धुंधला करने या उनके कुछ हिस्सों को छिपाने की सलाह भी दी गई है, ताकि दर्शकों की शालीनता और संवेदनशीलता का ध्यान रखा जा सके।

मंत्रालय ने 9 जनवरी 2023 को जारी अपनी पिछली सलाह का भी उल्लेख किया है। इसमें अपराध, दुर्घटना, हिंसा और मौत से जुड़ी घटनाओं की खबरों के प्रसारण में कार्यक्रम संहिता के अनुरूप व्यवस्था बनाने को कहा गया था।

महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों से जुड़े दृश्य दिखाते समय भी विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। ऐसे मामलों में नियम 6(1)(k) और 6(1)(l) का पालन करना जरूरी होगा।

आपदा की खबरों में पुराने दृश्य दिखाकर न फैलाएं डर

मंत्रालय ने प्राकृतिक आपदाओं, बड़ी दुर्घटनाओं और अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं की खबरों में जरूरत के मुताबिक वीडियो और तस्वीरों पर तारीख व समय दिखाने को कहा है। इसका उद्देश्य पुराने दृश्यों के कारण दर्शकों में अनावश्यक डर या घबराहट पैदा होने से रोकना है। ऐसी खबरें भी सत्यापित तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए। इसके लिए नियम 6(1)(d) का पालन करना होगा।

मंत्रालय ने इस संबंध में 9 अगस्त 2024 और 18 नवंबर 2025 को जारी अपनी पिछली सलाह का भी हवाला दिया है। चैनलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि आपदाओं और दुर्घटनाओं के दृश्य दोबारा दिखाते समय उनकी सही पृष्ठभूमि और समय की जानकारी स्पष्ट हो।

लाइव बहसों में भड़काऊ बयानों पर नजर

मंत्रालय ने लाइव बहसों और पैनल चर्चाओं के दौरान चैनलों की संपादकीय जिम्मेदारी पर भी जोर दिया है।

नियम 6(1)(c) और 6(1)(e) के तहत कार्यक्रमों में सांप्रदायिक या राष्ट्र-विरोधी भावनाओं को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। मंत्रालय ने चैनलों से कहा है कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनकी चर्चाओं के जरिए ऐसी भावनाएं न भड़कें और सामग्री पर पर्याप्त संपादकीय नियंत्रण बना रहे। इसके लिए डिबेट में शामिल होने वाले विशेषज्ञों और अन्य प्रतिभागियों का चयन सावधानी से करने और जरूरत पड़ने पर कार्यक्रम से पहले उन्हें जरूरी निर्देश देने की सलाह दी गई है।

अगर किसी लाइव कार्यक्रम में अपमानजनक, गाली-गलौज वाली या भड़काऊ सामग्री प्रसारित होने का खतरा हो, तो चैनलों को तुरंत जरूरी कदम उठाने होंगे। इनमें किसी प्रतिभागी की आवाज बंद करना, अस्वीकरण जारी करना, कार्यक्रम को बीच में रोकना या प्रसारण बंद करना शामिल है।

मंत्रालय ने 8 जून 2023 को जारी अपनी पिछली सूचना का भी उल्लेख किया है, जिसमें कार्यक्रम संहिता का पालन करने की बात कही गई थी।

भारत के सही नक्शे दिखाने और पीड़ितों की पहचान छिपाने के निर्देश

मंत्रालय ने निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को प्रसारण, ग्राफिक्स और डिजिटल प्रस्तुतियों में भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) की ओर से प्रकाशित भारत के प्रामाणिक नक्शों का ही इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश कार्यक्रम संहिता के नियम 6(1)(h) से जुड़ा है, जिसका संबंध देश की अखंडता बनाए रखने से है।

चैनलों को यौन अपराधों के पीड़ितों की पहचान सुरक्षित रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन करने की भी याद दिलाई गई है।

इसके तहत केवल नाम और तस्वीरें छिपाना ही पर्याप्त नहीं होगा। ऐसी कोई भी जानकारी प्रसारित नहीं की जानी चाहिए, जिससे पीड़ित की पहचान हो सके। इसमें परिवार का विवरण, इलाके की जानकारी, अन्य निजी तथ्य और पहचान उजागर करने वाले अप्रत्यक्ष संकेत भी शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा कि इस संबंध में 13 सितंबर 2024 को भी सलाह जारी की गई थी।

खबरों में AI का इस्तेमाल सहायक भूमिका तक सीमित रहे

टीवी न्यूजरूम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के बीच मंत्रालय ने AI टूल्स के उपयोग में भी सावधानी बरतने को कहा है। इसमें जनरेटिव AI से तैयार ग्राफिक्स और वर्चुअल न्यूज प्रस्तुतियों जैसे इस्तेमाल शामिल हैं। हालांकि, मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ये केवल कुछ उदाहरण हैं और निर्देश का दायरा इससे आगे भी है।

मंत्रालय के मुताबिक, AI टूल्स का इस्तेमाल सहायक भूमिका में किया जा सकता है, लेकिन इससे खबरों की सटीकता, प्रामाणिकता और संवेदनशीलता पर असर नहीं पड़ना चाहिए। साथ ही, चैनलों को कार्यक्रम संहिता का पालन भी सुनिश्चित करना होगा।

संपादकीय जांच और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर जोर

मंत्रालय ने चैनलों को खबर जुटाने से लेकर संपादन, निर्माण, प्रसारण और टीवी पर दिखाए जाने तक पूरी प्रक्रिया में संपादकीय जांच और सामग्री की समीक्षा की व्यवस्था मजबूत करने को कहा है। खबर जुटाने, संपादन, कार्यक्रम बनाने और प्रसारण से जुड़े कर्मचारियों को कार्यक्रम संहिता के नियमों की पर्याप्त जानकारी होनी चाहिए।

इसके लिए मंत्रालय ने संपादकीय और प्रोडक्शन टीमों के लिए नियमित कार्यशालाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम और जागरूकता सत्र आयोजित करने की सलाह दी है, ताकि नियमों का लगातार पालन सुनिश्चित किया जा सके।

मंत्रालय ने दोहराया है कि कानूनी दायित्वों का पालन करना जरूरी है। नियमों का उल्लंघन होने पर केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 और इसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

इस सलाह के जरिए मंत्रालय ने खबरों की प्रस्तुति, लाइव कार्यक्रमों, वीडियो और तस्वीरों के इस्तेमाल, पीड़ितों की निजता और AI जैसी नई तकनीकों के उपयोग को लेकर अपनी अपेक्षाएं स्पष्ट की हैं। चैनलों से कहा गया है कि वे संपादकीय निगरानी, तथ्यों की जांच और कर्मचारियों के प्रशिक्षण के जरिए नियमों का पालन सुनिश्चित करें।

 

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एचपी टेलीकॉम इंडिया की नई सीईओ बनीं डॉ. गरिमा मिश्रा

एचपी टेलीकॉम इंडिया ने डॉ. गरिमा मिश्रा को मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया है। वह कंपनी की रणनीति, संचालन, विकास, बिक्री और ग्राहक अनुभव से जुड़े कार्यों का नेतृत्व करेंगी।

Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2026
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एचपी टेलीकॉम इंडिया लिमिटेड (HP Telecom India Limited) ने डॉ. गरिमा मिश्रा को अपना मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ (CEO) नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 21 अक्टूबर से प्रभावी हो गई है। नई भूमिका में वह कंपनी की रणनीति, संचालन और विकास से जुड़े कार्यों का नेतृत्व करेंगी।

डॉ. गरिमा मिश्रा के पास रक्षा, उपभोक्ता वस्तुओं और तकनीकी वितरण के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) में इंजीनियर के रूप में की थी। यहां उन्होंने करीब एक दशक तक तकनीकी और परिचालन से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं।

इसके बाद उन्होंने कॉरपोरेट सेक्टर का रुख किया और डियाजियो (Diageo) तथा पर्नोड रिकार्ड (Pernod Ricard) में वरिष्ठ बिक्री और वाणिज्यिक भूमिकाओं पर काम किया। इसके बाद रेडिंगटन (Redington) में उन्होंने एप्पल (Apple) के कारोबार का नेतृत्व किया।

एचपी टेलीकॉम में डॉ. मिश्रा का मुख्य फोकस कंपनी की विकास गति को तेज करना होगा। इसके लिए वह कंपनी की पहुंच बढ़ाने के साथ ब्रांड साझेदारों, ग्राहकों और चैनल पार्टनर्स के साथ संबंधों को मजबूत करेंगी।

वह बेहतर प्रक्रियाओं, डेटा आधारित निर्णय लेने और ग्राहक अनुभव पर अधिक ध्यान देकर कंपनी की बिक्री और संचालन को मजबूत करने पर भी काम करेंगी। कंपनी के विस्तार के अगले चरण में उनकी भूमिका रणनीति और कारोबार को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण होगी।

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गेमिंग पर पाबंदी के बाद विज्ञापन बाजार का नया खेल: अब कौन लगा रहा है दांव?

2025 में ऑनलाइन गेमिंग कानून के बाद रियल मनी गेमिंग पर रोक से विज्ञापन बाजार में खालीपन की आशंका थी, पर 2026 की रिपोर्टें बताती हैं कि गेमिंग विज्ञापन घटने के बजाय नए ब्रैंड्स के साथ आगे बढ़ रहा है।

Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2026
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2025 में ऑनलाइन गेमिंग कानून आने के बाद पैसे से खेले जाने वाले खेलों (रियल मनी गेमिंग, RMG) पर देश में रोक लग गई। जो कंपनियां आईपीएल से लेकर सोशल मीडिया तक सबसे बड़े विज्ञापनदाताओं में गिनी जाती थीं, वे लगभग गायब हो गईं। तब आशंका थी कि विज्ञापन बाजार में बड़ा खालीपन बनेगा। सितंबर–अक्टूबर 2026 की रिपोर्टें अलग तस्वीर दिखाती हैं: गेमिंग विज्ञापन सिकुड़ा नहीं है, बल्कि उसके खरीदार बदल गए हैं।

पाबंदी से पहले: RMG का दबदबा

जुलाई 2026 में आई MIXI Global Investments की रिपोर्ट 'इंडियाज स्टेट ऑफ प्ले 2026' के अनुसार, कानून से पहले RMG इंडस्ट्री का अनुमानित आकार 3.7 अरब डॉलर था। यह देश के गेमिंग राजस्व का लगभग 85% था, करीब दो लाख लोगों को रोजगार देता था और करीब 2.3 अरब डॉलर का कर राजस्व देता था।

पाबंदी से पहले विज्ञापन की दुनिया में RMG कंपनियों का बड़ा हाथ था। अगस्त 2025 में स्टोरीबोर्ड18 ने इंडस्ट्री के अधिकारियों के हवाले से लिखा कि अपने सबसे अच्छे दौर में RMG कंपनियां भारत के कुल डिजिटल विज्ञापन खर्च का करीब 10% देती थीं। यह लगभग ₹4,000 करोड़ हर साल बैठता है। उसी रिपोर्ट में एलारा सिक्योरिटीज ने अनुमान लगाया था कि पाबंदी से आईपीएल की विज्ञापन कमाई का करीब 25% हिस्सा खतरे में पड़ सकता है। वैसे यह भी बता दें कि ये सिर्फ अनुमान था, ऑडिट किए गए आंकड़े नहीं।

वहीं, एक्सचेंज4मीडिया (9 अक्टूबर 2026) के अनुसार इंडस्ट्री के अधिकारियों का अनुमान है कि 2025 में गेमिंग विज्ञापन करीब 12% बढ़ा। स्टेट ऑफ प्ले रिपोर्ट के मुताबिक गैर-RMG मोबाइल गेमिंग ने 2025 में लगभग 1.1 अरब डॉलर कमाए। इसमें विज्ञापन से करीब 30 करोड़ डॉलर और इन-ऐप खरीदारी से करीब 80 करोड़ डॉलर आए। भारत में 60 करोड़ से ज्यादा सक्रिय गेमर हैं और 2025 में 7.95 अरब मोबाइल गेम डाउनलोड हुए, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है।

नियामकीय बदलाव के बाद की रणनीति

स्टेट ऑफ प्ले रिपोर्ट के अनुसार कानून ने पैसे वाले ऑनलाइन खेलों पर रोक लगाई, चाहे वे कौशल के हों या किस्मत के। रिपोर्ट यह भी कहती है कि कानून अभी न्यायिक समीक्षा के अधीन है।

गेमिंग कंपनियों की रणनीति में तीन बदलाव दिखते हैं। पहला, फनसेल गेम्स के सीईओ अभिषेक मालपानी के अनुसार कुछ RMG कंपनियां अब फ्री-टू-प्ले और विज्ञापन-आधारित मॉडल की ओर जा रही हैं। दूसरा, खिलाड़ियों का रुख बदला है। स्टेट ऑफ प्ले रिपोर्ट के शुरुआती चार महीनों के डेटा के अनुसार पूर्व RMG खिलाड़ी स्ट्रैटेजी खेलों की ओर बढ़े हैं, जिनमें फैंटेसी स्पोर्ट्स, पोकर और रमी जैसी रणनीतिक सोच लगती है।

तीसरा बदलाव टैक्स विवादों में दिखा। सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 को ऑनलाइन मनी गेमिंग पर GST वसूली को बरकरार रखा और बाद के आदेशों में टैक्स योग्य मूल्य की गणना सत्यापित जमा राशि के आधार पर की गई। एक्सचेंज4मीडिया (15 अक्टूबर 2026) के अनुसार इसके बाद ड्रीम11 की संचालक स्पोर्टा टेक्नोलॉजीज, गेमक्राफ्ट और प्ले गेम्स 24x7 की कुल मांग करीब ₹70,212.87 करोड़ से घटकर ₹17,297.62 करोड़ रह गई। यह ₹52,915 करोड़ (75.4%) की कटौती है। रिपोर्ट यह भी साफ करती है कि कंपनियों पर अब भी ब्याज और जुर्माना लागू है।

विज्ञापनदाताओं की सोच भी बदली है। डेंट्सु इंडिया के रोहित पोतफोड़े के अनुसार गेमिंग को अब सोशल, वीडियो, इन्फ्लुएंसर, OTT और कॉमर्स के साथ मीडिया प्लान का नियमित हिस्सा माना जा रहा है। 2025 में गेमिंग अभियान अक्सर पायलट, छोटी अवधि और एंगेजमेंट-आधारित लक्ष्यों वाले थे, जबकि इस साल एजेंसियां बड़े और लंबे अभियान देख रही हैं। नए खरीदारों में FMCG, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स, फिनटेक, ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम, टेक्नोलॉजी और मनोरंजन की कंपनियां गिनाई गई हैं।

2026: गेमिंग खर्च और त्योहारी निवेश

एक्सचेंज4मीडिया (9 अक्टूबर 2026) के अनुसार इंडस्ट्री अधिकारी इस त्योहारी सीजन में गेमिंग विज्ञापन खर्च 15–30% बढ़ने का अनुमान लगा रहे हैं। डेंट्सु इंडिया के अनुसार डिजिटल त्योहारी मिक्स में गेमिंग का सामान्य आवंटन पिछले साल से करीब 20–30% बढ़ा है। Gozoop क्रिएटिव के अमीन घड़ियाली त्योहारी गेमिंग खर्च में 15–20% सालाना बढ़त आंकते हैं, जबकि उनके अनुसार पूरे त्योहारी विज्ञापन खर्च की बढ़त करीब 10–12% है। जो ब्रैंड पहले से गेमिंग में हैं, उनके आवंटन में वे 15–25% बढ़ोतरी का अनुमान देते हैं।

बड़े बाजार का संदर्भ फरवरी 2026 की पिच मैडिसन रिपोर्ट से मिलता है, जो कई मीडिया रिपोर्ट्स में उद्धृत है। इसके विस्तारित पैमाने पर भारत का विज्ञापन बाजार 2025 में ₹1,55,105 करोड़ रहा और 2026 में ₹1,74,605 करोड़ (12–13% वृद्धि) तक पहुंचने का अनुमान है। इसी पैमाने पर डिजिटल विज्ञापन 2025 में ₹93,156 करोड़ रहा, जो 2024 के ₹76,261 करोड़ से 22% ज्यादा है। पुराने पैमाने पर 2025 का बाजार ₹1,15,291 करोड़ था, जिसमें डिजिटल की हिस्सेदारी 46% थी।

दीर्घकालिक अनुमान भी इसी दिशा में हैं। स्टेट ऑफ प्ले रिपोर्ट के अनुसार गैर-RMG मोबाइल गेमिंग 2025 के करीब 1.1 अरब डॉलर से 2026 में 1.5 अरब डॉलर (लगभग 35% वृद्धि) और 2029 तक 2.4 अरब डॉलर हो सकती है। एक्सचेंज4मीडिया खुद सवाल उठाता है कि 15–30% की यह बढ़त एक सीजन का उछाल है या गेमिंग के लिए नया, ऊंचा आधार।

माध्यमों पर असर

टेलीविजन: सबसे साफ असर आईपीएल 2026 में दिखा। इस साल जून में BARC इंडिया और TAM स्पोर्ट्स के आंकड़ों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में लिखा गया कि सीजन के पहले हिस्से में लीनियर टीवी पर विज्ञापन देने वाले ब्रैंड करीब 31% घटे, प्रति मैच औसत दर्शक 26% गिरकर करीब 1.06 करोड़ से 78 लाख रह गए और कुल टीवी रेटिंग 18.8% गिरी। शमबैंग की दीपशिखा भारद्वाज के अनुसार ड्रीम11, माय11सर्कल और एमपीएल काफी हद तक बाहर हो गए, फिर भी आईपीएल का कुल विज्ञापन राजस्व ₹4,900–5,200 करोड़ के दायरे में रहा। उनके अनुसार AI प्लेटफॉर्म, क्विक कॉमर्स, BFSI, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, पेंट और ई-कॉमर्स सेवाएं बड़े विजेता रहे।

पिच मैडिसन के अनुसार, 2025 में लीनियर टीवी का विज्ञापन खर्च 5% गिरकर ₹32,855 करोड़ रहा और विज्ञापन वॉल्यूम 10% घटा। रिपोर्ट ने इसकी वजह FMCG की कटौती, छोटे विज्ञापनदाताओं के बाहर होने और जॉनर में बदलाव को बताया, गेमिंग को नहीं। 2026 में लीनियर टीवी के सपाट रहने का अनुमान है।

कनेक्टेड टीवी और डिजिटल वीडियो: उसी रिपोर्ट के अनुसार सीटीवी 2025 में दोगुना होकर करीब ₹6,000 करोड़ हुआ और 2026 में करीब ₹8,000 करोड़ तक जा सकता है। टीवी और सीटीवी मिलाकर 'लार्ज स्क्रीन' 2025 में ₹38,855 करोड़ (लगभग 4% वृद्धि) रही। आईपीएल में पिवटरूट्स के जिनित शाह के अनुसार सीटीवी की पहुंच 25% बढ़ी।

सोशल और डिजिटल: TAM AdEx (23 सितंबर 2026) के अनुसार जनवरी–जुलाई 2026 में डिजिटल विज्ञापन इंप्रेशन पिछले साल से 44% बढ़े। प्रोग्रामैटिक खरीद 96% इंप्रेशन में रही। रिपोर्ट में 1.68 लाख से ज्यादा विज्ञापनदाता डिजिटल पर दर्ज हुए, जिनमें 1.1 लाख से ज्यादा केवल डिजिटल पर थे, टीवी पर नहीं। कवर किए गए वेब प्रकाशकों में इंस्टाग्राम के पास 69% इंप्रेशन थे। इस रिपोर्ट के अंश में गेमिंग का अलग आंकड़ा नहीं है, इसलिए यह वृद्धि सिर्फ गेमिंग की नहीं मानी जा सकती।

गेमिंग ऐप्स: यहां विज्ञापन राजस्व करीब 30 करोड़ डॉलर (2025) माना गया है। एक्सचेंज4मीडिया के अनुसार GDAI के प्रवक्ता का कहना है कि ब्रैंड साझेदारी और इन-गेम विज्ञापन डेवलपरों के लिए नया राजस्व स्रोत बन सकते हैं, बशर्ते खिलाड़ी के अनुभव का सम्मान हो।

पाबंदी ने विज्ञापन बाजार से एक बड़ा खरीदार हटाया, जिसकी सबसे ज्यादा चोट आईपीएल के लीनियर टीवी पर दिखी। पर 2026 की उपलब्ध रिपोर्ट्स में गेमिंग विज्ञापन बढ़ता दिख रहा है और उसका खरीदार वर्ग पहले से ज्यादा विविध है। 

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क्विक कॉमर्स पर विज्ञापनों की बरसात: ब्रैंड्स क्यों खर्च कर रहे हैं हजारों करोड़?

दिवाली से पहले ब्लिंकिट, जैप्टो या स्विगी खोलते ही पहली स्क्रीन पर बिस्किट, फेस वॉश या मिठाई के विज्ञापन दिखते हैं। सर्च में भी सबसे ऊपर वही ब्रैंड आते हैं, जिन्होंने उस जगह के लिए बोली लगाई है।

Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2026
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दिवाली से पहले जब आप ब्लिंकिट, जैप्टो या स्विगी इंस्टामार्ट खोलते हैं, तो पहली स्क्रीन पर किसी बिस्किट, फेस वॉश या मिठाई के डिब्बे का बैनर दिखता है। सर्च में भी सबसे ऊपर वही ब्रैंड आते हैं जिन्होंने उस जगह के लिए बोली लगाई है। यह इत्तफाक नहीं, भारी निवेश है।

डेटम इंटेलिजेंस की 2026 फेस्टिव एडेक्स रिपोर्ट के मुताबिक, इस त्योहारी सीजन में क्विक कॉमर्स विज्ञापन पर करीब ₹2,200 करोड़ खर्च होने का अनुमान है, जो पिछले साल से 50% ज्यादा है।

बड़ी तस्वीर: कुल पाई में हिस्सेदारी

डेटम के अनुसार कॉमर्स और रिटेल मीडिया का कुल त्योहारी विज्ञापन खर्च इस साल करीब ₹11,500 करोड़ रहने का अनुमान है, जो पिछले साल से 27% ज्यादा है। इसमें क्विक कॉमर्स की हिस्सेदारी लगभग पांचवां हिस्सा, यानी करीब 19% है। रिपोर्ट इसे कॉमर्स विज्ञापन का सबसे तेजी से बढ़ता हिस्सा बताती है। रिपोर्ट के मुताबिक ब्रैंड्स इन प्लेटफॉर्म्स पर अपना खर्च पिछले साल से 25-35% बढ़ा रहे हैं।

इसके पीछे क्विक कॉमर्स की अपनी रफ्तार है। बिज़नेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, क्विक कॉमर्स का GMV रन-रेट 20.8 अरब डॉलर है, जो एक साल पहले के 14.7 अरब डॉलर से 41% ज्यादा है। इसी रिपोर्ट में त्योहारी बिक्री में क्विक कॉमर्स की हिस्सेदारी पिछले साल के 12% से बढ़कर करीब 16% होने का अनुमान है। गूगल-रेडसीयर की रिपोर्ट इसे पिछले साल के करीब 11% से बढ़कर लगभग 18% बताती है और क्विक कॉमर्स का त्योहारी GMV 110-120% बढ़ने का अनुमान देती है, जबकि बाकी ई-कॉमर्स में यह 16-18% है। दोनों के आंकड़े अलग हैं, पर दिशा एक है। बिज़नेस स्टैंडर्ड के मुताबिक इस साल त्योहारी ऑनलाइन बिक्री ₹1.55 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2025 के ₹1.20 लाख करोड़ से ज्यादा है।

किन प्रोडक्ट्स पर लग रहा है सबसे ज्यादा पैसा?

डेटम के मुताबिक क्विक कॉमर्स के त्योहारी विज्ञापन का 70% तक हिस्सा FMCG, ब्यूटी और गिफ्टिंग श्रेणियों का है। यानी नमकीन, बिस्किट, चॉकलेट और पूजा-सामग्री जैसे रोजमर्रा के ब्रैंड, स्किन केयर और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स, और मिठाई-ड्राई फ्रूट के डिब्बे व हैम्पर जैसे गिफ्ट आइटम सबसे ज्यादा विज्ञापन देते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार प्लेटफॉर्म्स को होमवेयर और फर्नीचर जैसी नई श्रेणियों को भी इस ओर लाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। गूगल-रेडसीयर की रिपोर्ट में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स को क्विक कॉमर्स की त्योहारी बिक्री का नया सहारा बताया गया है। फ्लिपकार्ट मिनट्स अब 150 से ज्यादा शहरों में करीब 1,200 माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर चला रहा है और पिछले एक साल में उसका कारोबार चार गुना हुआ है।

विज्ञापन दरें: जगह सीमित, बोली महंगी

होमपेज बैनर, कैटेगरी टेकओवर और सर्च में सबसे ऊपर की जगह गिनी-चुनी होती हैं। डेटम के अनुमान के मुताबिक त्योहारी सीजन में क्विक कॉमर्स विज्ञापन की दरें 30-40% बढ़ी हैं।

स्टोरीबोर्ड18 की 15 सितंबर 2026 की रिपोर्ट में एक मिसाल दी गई है। एक कीवर्ड, जिस पर कुछ महीने पहले ब्रैंड को ₹60 प्रति क्लिक देना पड़ता था, त्योहारी तैयारी में ₹240 तक पहुंच गया, यानी चार गुना। यह एक कीवर्ड का उदाहरण है, सब पर लागू होने वाली औसत वृद्धि नहीं। उसी रिपोर्ट के अनुसार ब्रैंड्स अपने डिजिटल खर्च का 15-20% ज्यादा हिस्सा क्विक कॉमर्स की ओर खिसका रहे हैं। 

ब्रैंड्स को क्या फायदा मिल रहा है?

पहला फायदा है खरीद के सबसे करीब विज्ञापन। क्विक कॉमर्स ऐप पर ग्राहक अक्सर पहले से जरूरत लेकर आता है, इसलिए विज्ञापन देखने और ऑर्डर करने के बीच कुछ ही मिनट का फासला होता है। डेटम इसे कॉमर्स विज्ञापन कहता है, यानी ऐसा विज्ञापन जिसे सीधे चेकआउट से जोड़कर मापा जा सके।

दूसरा फायदा है कि ऐप अब खोज का मंच बन गया है। डेटम ने 6,218 ऑनलाइन खरीदारों का सर्वे किया, जिनमें 35% ने कहा कि वे क्विक कॉमर्स ऐप्स पर नए प्रोडक्ट खोजते हैं। यह हिस्सा टीवी, ऑनलाइन और प्रिंट के विज्ञापनों से प्रोडक्ट खोजने वालों के बराबर है।

तीसरा फायदा नई श्रेणियों में तेज उछाल है। स्टोरीबोर्ड18 के मुताबिक, फ्रोजन फूड की क्विक कॉमर्स बिक्री अगस्त 2026 तक 141% बढ़कर ₹162.7 करोड़ हो गई, जिसमें नॉन-वेज प्रोडक्ट्स का बड़ा योगदान रहा। मीटज़ा (Meatzza) और रेलिश (Relish) ने सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज की। रिपोर्ट के अनुसार जगह सीमित होने से इस श्रेणी में भी विज्ञापन दरें बढ़ रही हैं।

छोटे कारोबारियों की चुनौती

डेटम के संस्थापक के हवाले से फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार क्विक कॉमर्स के कारोबार का करीब 80% हिस्सा सिर्फ 20% ब्रैंड्स के पास है। बड़े FMCG समूहों के पास बड़ा बजट और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क होता है। छोटे और D2C ब्रैंड्स को हर क्लिक का हिसाब रखना पड़ता है।

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट पर आधारित एक विश्लेषण में कहा गया है कि 30-40% की दर वृद्धि छोटे ब्रैंड्स के मार्जिन पर दबाव डाल सकती है और कंपनियों को छूट और अभियानों के बंटवारे पर दोबारा सोचना पड़ सकता है। पब्लिसिस मीडिया के दक्षिण एशिया प्रमुख के अनुसार 2026 में भारत का कुल विज्ञापन खर्च ऊंचे एक अंक की दर से बढ़ने की उम्मीद है, पर त्योहारी खर्च में सावधानी है और पैसा क्रिएटर्स और क्विक कॉमर्स की ओर जा रहा है। यानी कुल बजट सीमित है और क्विक कॉमर्स का हिस्सा बढ़ रहा है, जिसका दबाव छोटे ब्रैंड्स पर ज्यादा पड़ता है।

खरीदारी के फैसलों पर ऐप विज्ञापनों का असर

क्विक कॉमर्स में फैसला अक्सर कुछ सेकंड में होता है। तुलना का वक्त कम होता है, इसलिए स्क्रीन पर पहले दिखने वाले ब्रैंड को बढ़त मिलती है। डेटम का सर्वे बताता है कि हर तीन में एक से ज्यादा खरीदार इन ऐप्स पर नए प्रोडक्ट खोजते हैं, यानी विज्ञापन अब सिर्फ बिक्री नहीं, पसंद भी तय कर रहा है।

फ्रोजन फूड में 141% की वृद्धि बताती है कि ग्राहक नई श्रेणियां भी ऐप पर आजमाने लगे हैं। मीडिया की रिपोर्ट इसे इस सवाल से जोड़ती है कि क्या ऐप पर दिखना ही प्रोडक्ट के चुने जाने की वजह बन रहा है। एक अन्य विश्लेषण का निष्कर्ष है कि विज्ञापन खरीदकर दिखना और ब्रैंड के प्रति पसंद बनाना अलग बातें हैं। जो ब्रैंड सिर्फ बोली के दम पर ऊपर रहते हैं, उनके लिए विज्ञापन रुकते ही बिक्री गिरने का जोखिम रहता है।

आगे क्या?

क्विक कॉमर्स अब सिर्फ डिलीवरी का नया तरीका नहीं, एक बड़ा विज्ञापन मंच बन चुका है। बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार 2026 में इन प्लेटफॉर्म्स पर कुल विज्ञापन खर्च करीब ₹6,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें त्योहारी सीजन का ₹2,200 करोड़ एक बड़ा हिस्सा है। छोटे ब्रैंड्स के लिए रास्ता यही दिखता है कि सीमित बजट कुछ चुनिंदा प्रोडक्ट्स और शहरों पर लगाएं, विज्ञापन के साथ पर्याप्त स्टॉक रखें और ब्रैंड की पहचान के लिए क्विक कॉमर्स के बाहर भी मौजूद रहें।

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Zepto समेत कई कंपनियों पर कार्रवाई, एक्सपायरी बेसन व भ्रामक विज्ञापनों पर उठे सवाल

FSSAI ने खाद्य सुरक्षा नियमों के कथित उल्लंघन और प्रॉडक्ट्स के बारे में भ्रामक दावे करने के मामले में क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Zepto समेत कई कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।

Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2026
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भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाद्य सुरक्षा नियमों के कथित उल्लंघन और प्रॉडक्ट्स के बारे में भ्रामक दावे करने के मामले में क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Zepto समेत कई कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। इस मामले में Zepto के जरिए इस्तेमाल की आखिरी तारीख निकल चुके बेसन की डिलीवरी किए जाने और कुछ कंपनियों के प्रॉडक्ट्स के विवरण व विज्ञापनों में किए गए दावों पर सवाल उठाए गए हैं।

यह कार्रवाई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर की गई एक शिकायत के बाद हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि Zepto ने इस्तेमाल की आखिरी तारीख निकल चुके बेसन के दो पैकेट ग्राहक को पहुंचाए। इसके बाद FSSAI ने Zepto से मामले की जांच करने और संबंधित ऑर्डर व गोदाम की जानकारी देने को कहा है। नियामक ने यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि क्या संबंधित प्रॉडक्ट्स को स्टॉक से हटा दिया गया था और क्या ग्राहकों को पैसे वापस करने की पेशकश की गई थी।

Bakelite के प्रॉडक्ट के विवरण पर भी सवाल

FSSAI ने Bakelite और अन्य खाद्य कारोबार से जुड़ी कंपनियों के प्रॉडक्ट्स के विवरण और विज्ञापन में किए गए दावों पर भी चिंता जताई है। Zepto और Blinkit पर उपलब्ध Bakelite के ‘पुणेरी क्रीम रोल’ के लिए इस्तेमाल किए गए ‘क्रिस्पी एंड क्रीमी’ यानी कुरकुरे और मलाईदार विवरण पर सवाल उठाए गए हैं।

इसके अलावा, Storia Foods & Beverages से उसके एक प्रॉडक्ट की तुलना 100 प्रतिशत दोबारा तैयार किए गए फलों के रस से जुड़े दावे को लेकर भी जवाब मांगा गया है। नियामक ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं।

HealthyHey Foods और BMS Lifescience के नाम भी शामिल

FSSAI की कार्रवाई से जुड़ी घोषणा में HealthyHey Foods LLP और BMS Lifescience के नाम भी शामिल हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन दोनों कंपनियों के खिलाफ उठाए गए विशिष्ट सवालों का विवरण नहीं दिया गया है।

FSSAI के मुताबिक, इस कार्रवाई का उद्देश्य खाद्य सुरक्षा नियमों के कथित उल्लंघनों पर ध्यान देना और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है।

 

 

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सोनी पिक्चर्स नेटवर्क ने लॉन्च किया Sony VIZHA, तमिल एंटरटेनमेंट मार्केट में रखा कदम

सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया (SPNI) ने तमिल दर्शकों के लिए नया मनोरंजन चैनल Sony VIZHA लॉन्च किया है।

Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2026
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सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया (SPNI) ने तमिल दर्शकों के लिए नया एंटरटेनमेंट चैनल Sony VIZHA लॉन्च किया है। ‘इथु नम्मा विझा’ (Ithu Namma Vizha) की सोच पर आधारित यह चैनल तमिल संस्कृति और वहां के लोगों की बदलती पसंद को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसके जरिए कंपनी तमिल एंटरटेनमेंट मार्केट में अपनी मौजूदगी बढ़ाने जा रही है।

Sony VIZHA पर तमिल दर्शकों को नई कहानियों, जाने-माने कलाकारों और दुनिया भर में लोकप्रिय रहे कार्यक्रमों के तमिल रूपांतरण देखने को मिलेंगे। यह चैनल प्रमुख केबल और डीटीएच प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। इसके साथ ही स्थानीय केबल ऑपरेटरों (LCOs) के नेटवर्क की मदद से भी इसकी पहुंच बढ़ाई जा रही है, ताकि देशभर के तमिल भाषी परिवारों तक एंटरटेनमेंट के अलग-अलग कार्यक्रम पहुंच सकें।

फिक्शन से लेकर संगीत और फिल्मों तक मिलेंगे कार्यक्रम

Sony VIZHA पर दर्शकों के लिए कई तरह के कार्यक्रम पेश किए जाएंगे। इनमें काल्पनिक कहानियों पर आधारित धारावाहिक, रियलिटी शो, संगीत, कॉमेडी और फिल्में शामिल हैं।

कंपनी का उद्देश्य ऐसा एंटरटेनमेंट मंच तैयार करना है, जो तमिल दर्शकों की पसंद, उनकी आकांक्षाओं और आज की सांस्कृतिक सोच को दिखाए। इसके साथ ही चैनल तमिल भाषा, परंपराओं और मूल्यों से भी जुड़ा रहेगा।

Gold Winner, TTK Prestige और ATM बने विज्ञापन साझेदार

Sony VIZHA ने अपने लॉन्च के साथ ही तीन विज्ञापन साझेदार भी जोड़े हैं। इनमें Gold Winner, TTK Prestige और ATM - Akshaya Thanga Maligai शामिल हैं।

इन कंपनियों के साथ साझेदारी को Sony VIZHA की बाजार में शुरुआत के लिए अहम माना जा रहा है। इससे विज्ञापन देने वाली कंपनियों को एक नए एंटरटेनमेंट मंच के जरिए तमिल दर्शकों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।

इन साझेदारियों से यह भी पता चलता है कि नए चैनल के जरिए विज्ञापनदाताओं को तमिल दर्शकों से जुड़ने का एक नया विकल्प मिल सकता है। Sony VIZHA का लक्ष्य तमिल एंटरटेनमेंट बाजार में अपनी अलग पहचान बनाना और दर्शकों के साथ-साथ ब्रैंड्स के लिए भी एक उपयोगी मंच तैयार करना है।

तमिल दर्शकों की बदलती पसंद पर रहेगा ध्यान

Sony Pictures Networks India में साउथ रीजन के चीफ कंटेंट ऑफिसर एस. राजारमन ने चैनल की लॉन्चिंग पर कहा कि Sony VIZHA की शुरुआत कंपनी के लिए तमिल एंटरटेनमेंट के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाने की दिशा में अहम कदम है।

उन्होंने कहा कि वितरण और विज्ञापन से जुड़े साझेदारों का मजबूत समर्थन कंपनी के प्रस्ताव में उनके भरोसे को दिखाता है। कंपनी का ध्यान दुनिया भर के तमिल दर्शकों तक ऐसा एंटरटेनमेंट पहुंचाने पर है, जो तमिल संस्कृति से जुड़ा हो और उनकी बदलती आकांक्षाओं को भी दर्शाए।

राजारमन के मुताबिक, कंपनी ब्रैंड्स के लिए भी ऐसे अवसर तैयार करना चाहती है, जिनके जरिए वे तमिल दर्शकों के साथ बेहतर तरीके से जुड़ सकें।

Sony VIZHA की शुरुआत के साथ SPNI ने तमिल एंटरटेनमेंट बाजार में अपनी नई पारी शुरू की है। चैनल पर अलग-अलग तरह के कार्यक्रमों और विज्ञापन साझेदारियों के जरिए कंपनी इस बाजार में अपनी पहचान मजबूत करने की कोशिश करेगी। 

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हर महीने 20 हजार से ज्यादा ब्रॉडबैंड कनेक्शन जोड़ने पर GTPL का फोकस: अनिरुद्धसिंह जडेजा

GTPL Hathway को वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक अपने केबल टीवी कारोबार में 18 लाख से 19 लाख तक नए सब्सक्राइबर जोड़ने की उम्मीद है।

Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2026
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GTPL Hathway को वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक अपने केबल टीवी कारोबार में 18 लाख से 19 लाख तक नए सब्सक्राइबर जोड़ने की उम्मीद है। कंपनी ब्रॉडबैंड कारोबार की रफ्तार बढ़ाने, ग्राहकों को ज्यादा सेवाएं देने और परिचालन मुनाफे के मार्जिन में सुधार करने की योजना पर काम कर रही है। कंपनी के प्रमोटर एवं मैनेजिंग डायरेक्टर अनिरुद्धसिंह जडेजा और चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) पीयूष पंकज ने 14 अक्टूबर को वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजों पर आयोजित कॉन्फ्रेंस कॉल में ये बातें कहीं।

कंपनी ने बताया कि उसने ACT ग्रुप की सात कंपनियों के केबल टीवी कारोबार का अधिग्रहण 15 सितंबर 2026 को पूरा किया। इस कारोबार को अपने सिस्टम में शामिल करने और लागत में बचत के फायदे अगले कुछ महीनों में मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, कंपनी अपने HITS प्लेटफॉर्म GTPL Infinity के विस्तार, ब्रॉडबैंड सेवाओं की नई ब्रांडिंग TrueFiber और नए प्रबंधन के जरिए कारोबार को आगे बढ़ाने पर ध्यान दे रही है।

दूसरी तिमाही में 1.1 करोड़ केबल टीवी सब्सक्राइबर

पीयूष पंकज ने बताया कि 30 सितंबर 2026 तक कंपनी के डिजिटल केबल टीवी सब्सक्राइबर्स की कुल संख्या करीब 1.1 करोड़ थी। तिमाही के दौरान इसमें 15 लाख की बढ़ोतरी हुई। इनमें से 1.03 करोड़ सब्सक्राइबर भुगतान करने वाले थे। कंपनी के कारोबार को आगे बढ़ाने में उसके 51,000 से ज्यादा बिजनेस पार्टनर भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि तिमाही में जुड़े नए सब्सक्राइबर्स का पूरा वित्तीय फायदा आने वाली तिमाहियों में दिखाई देगा। इसके लिए कंपनी को अधिग्रहण के बाद मिलने वाले तालमेल के फायदे हासिल करने होंगे।

कंपनी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान अब तक डिजिटल टीवी कारोबार में करीब 16.5 लाख सब्सक्राइबर्स जुड़े हैं। पूरे वित्त वर्ष में यह संख्या 18 लाख से 19 लाख तक पहुंचने की उम्मीद है।

लंबी अवधि की योजना के बारे में बताते हुए पीयूष पंकज ने कहा कि कंपनी अगले तीन साल में अपने केबल टीवी सब्सक्राइबर्स की संख्या 1.3 करोड़ से 1.4 करोड़ तक ले जाना चाहती है। फिलहाल कंपनी के पास करीब 1.1 करोड़ केबल टीवी सब्सक्राइबर्स हैं।

उन्होंने कहा कि बाजार में तकनीक और सेवाएं पहुंचाने के तरीकों में बदलाव हो रहा है। ऐसे में कंपनी ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ब्रॉडबैंड, मनोरंजन और दूसरी सेवाओं को एक साथ उपलब्ध कराने पर काम कर रही है। कंपनी को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में उसके सब्सक्राइबर आधार में हर साल करीब 7 से 8 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है।

ACT ग्रुप के अधिग्रहण से मार्जिन बढ़ने की उम्मीद

पीयूष पंकज ने बताया कि GTPL Hathway ने ACT ग्रुप की सात कंपनियों के केबल टीवी कारोबार का अधिग्रहण कुल 35.55 करोड़ रुपये में पूरा किया है। यह सौदा 15 सितंबर 2026 को पूरा हुआ था। इस कारोबार के जरिए कंपनी को आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और कर्नाटक में करीब 6 लाख डिजिटल टीवी सब्सक्राइबर्स मिले हैं। इनमें से करीब 1.25 लाख प्राइमरी सब्सक्राइबर्स हैं, जिनसे कंपनी को अपेक्षाकृत ज्यादा औसत आय मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि ACT कारोबार से कंपनी की आय में योगदान शुरू हो चुका है, लेकिन अधिग्रहण से जुड़े सभी फायदे अभी मिलने बाकी हैं। कंपनी को इन बाजारों में अपनी सेवाओं, पैकेज, कंटेंट और कामकाज के तरीकों को GTPL के सिस्टम के साथ जोड़ना है। इसके बाद लागत में बचत और आय बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं।

पीयूष पंकज के मुताबिक, ACT कारोबार का मौजूदा परिचालन EBITDA मार्जिन करीब 12 फीसदी है। कंपनी को उम्मीद है कि एकीकरण और तालमेल के फायदे मिलने के बाद इसे बढ़ाकर 25 से 26 फीसदी तक किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि कंपनी को वित्त वर्ष 2027 के अंत तक अधिग्रहण से जुड़े कामकाज को काफी हद तक पूरा करने और उसके वित्तीय फायदे मिलने की उम्मीद है।

कंपनी ने यह भी बताया कि उसने DL GTPL Cabnet में बाकी 74 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की घोषणा की है। इस सौदे की बताई गई कीमत 8.325 करोड़ रुपये है। GTPL के पास इस कंपनी में पहले से 26 फीसदी हिस्सेदारी थी।

पीयूष पंकज ने बताया कि DL GTPL Cabnet के पास करीब 1.5 लाख केबल टीवी सब्सक्राइबर्स हैं। इसका कारोबार गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में है। उन्होंने कहा कि पूरी हिस्सेदारी मिलने से कंपनी को इन बाजारों में अपने मौजूदा कारोबार के साथ तालमेल बढ़ाने और कामकाज को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी।

ब्रॉडबैंड कारोबार में फिर तेजी लाने की तैयारी

ब्रॉडबैंड कारोबार में ग्राहकों की बढ़ोतरी धीमी होने के सवाल पर पीयूष पंकज ने कहा कि कंपनी पिछले एक से डेढ़ साल के दौरान अपने नेटवर्क और कनेक्शनों को बेहतर बनाने पर काम कर रही थी। इस वजह से नए ग्राहकों को जोड़ने की रफ्तार प्रभावित हुई।

उन्होंने बताया कि कंपनी के ब्रॉडबैंड नेटवर्क की पहुंच करीब 60 लाख घरों तक है। इनमें से पहले करीब 13 से 14 फीसदी घरों में कंपनी के कनेक्शन थे, जो अब बढ़कर लगभग 17 से 18 फीसदी हो गए हैं। कंपनी इसे करीब 20 फीसदी तक ले जाना चाहती है।

पीयूष पंकज ने कहा कि कंपनी ने ब्रॉडबैंड कारोबार के लिए नए CEO विवेक रैना को नियुक्त किया है। नई ब्रांडिंग TrueFiber के साथ कंपनी बाजार में अपनी गतिविधियां तेज कर रही है। कंपनी उपभोक्ताओं को सीधे सेवाएं देने वाले कारोबार (B2C) और दूसरी कंपनियों को सेवाएं देने वाले कारोबार (B2B), दोनों पर ध्यान दे रही है।

अनिरुद्धसिंह जडेजा ने भी ब्रॉडबैंड कारोबार की स्थिति पर बात करते हुए कहा कि कंपनी का नेटवर्क GPON तकनीक पर स्थानांतरित कर दिया गया है। इसके साथ ही नेटवर्क को फाइबर टू द होम (FTTH) मॉडल के अनुरूप बनाने का काम पूरा हो गया है।

उन्होंने कहा कि पिछले एक से डेढ़ साल के दौरान बाजार की सुस्ती और नेटवर्क में बदलाव के कारण कंपनी की रफ्तार धीमी रही। अब यह काम पूरा होने के बाद कंपनी दोबारा तेजी से नए कनेक्शन जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।

जडेजा ने उम्मीद जताई कि कंपनी फिर से हर महीने करीब 20,000 नए ब्रॉडबैंड कनेक्शन जोड़ने की स्थिति में लौट सकती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कंपनी इस संख्या को 20,000 से ऊपर ले जाने की कोशिश करेगी।

ब्रॉडबैंड में 10.7 लाख सक्रिय ग्राहक, ARPU 470 रुपये

कंपनी के मुताबिक, 30 सितंबर 2026 तक उसके सक्रिय ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स की संख्या 10.7 लाख थी। पिछली तिमाही के मुकाबले करीब 10,000 नए ग्राहक जुड़े। ब्रॉडबैंड नेटवर्क की पहुंच 60 लाख घरों तक रही।

वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में प्रति ग्राहक औसत मासिक आय (ARPU) 470 रुपये रही। वहीं, हर ग्राहक की औसत मासिक डेटा खपत 436 GB थी, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 6 फीसदी ज्यादा है।

डेटा खपत बढ़ने से नेटवर्क पर अतिरिक्त खर्च की जरूरत के सवाल पर पीयूष पंकज ने कहा कि मौजूदा स्तर पर कंपनी को इसके लिए अलग से पूंजीगत या परिचालन खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ी है। उन्होंने कहा कि नेटवर्क की तकनीक जरूरत के अनुसार क्षमता बढ़ाने में मदद करती है।

हालांकि, अगर डेटा खपत में काफी ज्यादा बढ़ोतरी होती है तो अतिरिक्त निवेश की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन उनके मुताबिक, डेटा खपत दोगुनी होने पर भी खर्च उसी अनुपात में दोगुना होना जरूरी नहीं है।

परिचालन मुनाफे का मार्जिन 150-250 बेसिस पॉइंट बढ़ाने का लक्ष्य

कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर बात करते हुए पीयूष पंकज ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में कंपनी की कुल कंसोलिडेटेड आय 1,146.4 करोड़ रुपये रही। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 964.9 करोड़ रुपये थी। इस तरह सालाना आधार पर आय में 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि पिछली तिमाही के मुकाबले यह 12 फीसदी ज्यादा रही।

कंसोलिडेटेड सब्सक्रिप्शन आय 345.5 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 302.4 करोड़ रुपये थी। ब्रॉडबैंड से आय 145.9 करोड़ रुपये रही, जो पिछले साल की समान तिमाही के 139.3 करोड़ रुपये से ज्यादा है।

कंपनी का कंसोलिडेटेड EBITDA 110.3 करोड़ रुपये रहा और रिपोर्ट किया गया EBITDA मार्जिन 9.6 फीसदी था। वहीं, कंपनी ने तिमाही में परिचालन EBITDA मार्जिन 20 फीसदी बताया।

पीयूष पंकज ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में परिचालन EBITDA मार्जिन करीब 21 फीसदी रहा है। कंपनी को उम्मीद है कि HITS प्लेटफॉर्म से लागत में बचत और अधिग्रहण से मिलने वाले तालमेल के फायदे पूरी तरह हासिल होने पर वित्त वर्ष के अंत तक परिचालन EBITDA मार्जिन में 150 से 250 बेसिस पॉइंट का सुधार हो सकता है। एक बेसिस पॉइंट का मतलब 0.01 प्रतिशत अंक होता है।

उन्होंने बताया कि कंपनी का परिचालन EBITDA मार्जिन पिछले वित्त वर्ष में करीब 22 फीसदी था। कंपनी इसे फिर से बेहतर स्तर पर ले जाने के लिए काम कर रही है।

कंपनी की स्टैंडअलोन आय भी बढ़ी। दूसरी तिमाही में यह 800.3 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 640.2 करोड़ रुपये थी। सालाना आधार पर इसमें 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। स्टैंडअलोन सब्सक्रिप्शन आय 269.2 करोड़ रुपये और EBITDA 66.7 करोड़ रुपये रहा।

घाटे में रहा कंसोलिडेटेड मुनाफा, विदेशी मुद्रा और ट्रांसपोंडर खर्च का असर

आय बढ़ने के बावजूद कंपनी को दूसरी तिमाही में कंसोलिडेटेड स्तर पर करीब 50 लाख रुपये का शुद्ध घाटा हुआ। पीयूष पंकज ने इसकी वजह बताते हुए कहा कि कंपनी पर कुल 7.5 करोड़ रुपये का अतिरिक्त असर पड़ा। इसमें विदेशी मुद्रा में बदलाव से 4.5 करोड़ रुपये का नुकसान और सात नए ट्रांसपोंडर से जुड़े खर्च के कारण 3 करोड़ रुपये का अमोर्टाइजेशन प्रभाव शामिल था।

उन्होंने कहा कि विदेशी मुद्रा में बदलाव से हुआ नुकसान लेखांकन के लिहाज से दर्ज किया गया है और समय के साथ इसमें सुधार हो सकता है। कंपनी को उम्मीद है कि अधिग्रहण से मिलने वाले फायदे और परिचालन दक्षता में सुधार से आगे वित्तीय प्रदर्शन बेहतर होगा।

हालांकि, कंपनी के सामने चुनौती यह है कि आय में हुई बढ़ोतरी को मुनाफे में भी बदलना होगा। प्रबंधन के मुताबिक, ACT कारोबार से जुड़े फायदे और HITS प्लेटफॉर्म के जरिए डिलीवरी लागत में बचत इस दिशा में मदद कर सकती है।

GTPL Infinity के 60 फीसदी से ज्यादा नेटवर्क का HITS प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरण

कंपनी ने नवंबर 2025 में अपना HITS प्लेटफॉर्म GTPL Infinity लॉन्च किया था। HITS यानी हेडएंड इन द स्काई एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके जरिए केबल ऑपरेटरों तक टीवी चैनलों के सिग्नल पहुंचाए जा सकते हैं।

पीयूष पंकज ने बताया कि कंपनी का पहला लक्ष्य अपने मौजूदा नेटवर्क को इस प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित करना है, ताकि सिग्नल पहुंचाने की लागत कम की जा सके। अब तक कंपनी के मौजूदा नेटवर्क का 60 फीसदी से ज्यादा हिस्सा HITS प्लेटफॉर्म पर आ चुका है।

कंपनी को उम्मीद है कि दिसंबर 2026 या अधिकतम जनवरी 2027 तक मौजूदा नेटवर्क का स्थानांतरण पूरा हो जाएगा। इसके बाद कंपनी को लागत में बचत का पूरा फायदा मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि नए बाजारों में विस्तार की योजनाएं भी तैयार हैं। इनमें ऐसे क्षेत्र शामिल हैं, जहां अभी केबल टीवी की पहुंच कम है, साथ ही ग्रामीण, अर्ध-शहरी और शहरी बाजार भी शामिल हैं। कंपनी मौजूदा नेटवर्क को स्थानांतरित करने के बाद जनवरी 2027 से नए बाजारों में विस्तार की गतिविधियां तेज करने की योजना बना रही है।

पीयूष पंकज के मुताबिक, कंपनी को उम्मीद है कि HITS प्लेटफॉर्म के विस्तार और अन्य परिचालन सुधारों से आने वाले समय में परिचालन मार्जिन बेहतर होगा।

केबल टीवी और ब्रॉडबैंड को एक साथ देने पर जोर

कॉन्फ्रेंस कॉल में कंपनी ने ग्राहकों को केबल टीवी, ब्रॉडबैंड और OTT जैसी सेवाएं एक साथ देने की रणनीति पर भी बात की।

पीयूष पंकज ने कहा कि कंपनी का मकसद ग्राहकों को एक से ज्यादा सेवाएं देकर उन्हें अपने साथ बनाए रखना है। जब कोई ग्राहक केबल टीवी और ब्रॉडबैंड दोनों सेवाएं लेता है, तो उसके कंपनी छोड़ने की आशंका कम हो सकती है। इससे ग्राहक बनाए रखने की दर में सुधार और कारोबार की आय को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने बताया कि कंपनी लगातार अपने मौजूदा ग्राहकों को दोहरी सेवाओं से जोड़ने की कोशिश कर रही है। कंपनी को उम्मीद है कि समय के साथ बड़ी संख्या में ग्राहक एक से ज्यादा सेवाएं लेने लगेंगे। इससे नेटवर्क के रखरखाव पर होने वाला खर्च भी घट सकता है।

ब्रॉडबैंड कारोबार में टेलीकॉम कंपनियों से प्रतिस्पर्धा पर पीयूष पंकज ने कहा कि GTPL मजबूत बाजारों में टेलीकॉम कंपनियों के बराबर प्रतिस्पर्धा करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि कंपनी अपने मजबूत बाजारों में बेहतर प्रदर्शन कर रही है और आगे भी इस दिशा में प्रयास जारी रखेगी।

आगे किन बातों पर रहेगी कंपनी की नजर?

पीयूष पंकज ने कहा कि निवेशकों को आने वाली दो से चार तिमाहियों में मुख्य रूप से दो चीजों पर ध्यान देना चाहिए। पहली, डिजिटल टीवी और ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स की संख्या में बढ़ोतरी। दूसरी, परिचालन EBITDA मार्जिन में सुधार।

उनके मुताबिक, अगर ग्राहकों की संख्या बढ़ती है तो उससे आय में भी बढ़ोतरी होनी चाहिए। वहीं, परिचालन EBITDA मार्जिन में सुधार यह दिखाएगा कि कंपनी अपने कारोबार को ज्यादा कुशलता से चला पा रही है।

कंपनी की योजना है कि वह अपने केबल टीवी कारोबार में विस्तार जारी रखे, ब्रॉडबैंड में नए कनेक्शन जोड़ने की रफ्तार बढ़ाए और ACT अधिग्रहण तथा HITS प्लेटफॉर्म से मिलने वाले फायदे हासिल करे। प्रबंधन को उम्मीद है कि इन प्रयासों का असर वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही और आगे के वर्षों में दिखाई देगा। 

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SAB इवेंट्स ने AGM के लिए मांगा 45 दिन का अतिरिक्त समय

SAB इवेंट्स एंड गवर्नेंस नाउ मीडिया लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2025-26 की सालाना आम बैठक (AGM) आयोजित करने के लिए 45 दिन का अतिरिक्त समय मांगने का फैसला किया है।

Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2026
SAB Events Governance Now Media

SAB इवेंट्स एंड गवर्नेंस नाउ मीडिया लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2025-26 की सालाना आम बैठक (AGM) आयोजित करने के लिए 45 दिन का अतिरिक्त समय मांगने का फैसला किया है। कंपनी के निदेशक मंडल ने 19 अक्टूबर, 2026 को हुई बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अब कंपनी इस संबंध में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC), मुंबई-I से और समय देने का अनुरोध करेगी।

कंपनी ने शेयर बाजारों को दी गई जानकारी में बताया कि 31 मार्च, 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए 13वीं सालाना आम बैठक आयोजित करने की समयसीमा बढ़ाने को लेकर पहले भी कदम उठाए गए थे। इससे पहले 31 जुलाई और 24 अगस्त, 2026 को इस संबंध में जानकारी दी गई थी। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज, मुंबई-I ने 24 अगस्त, 2026 के अपने आदेश के तहत बैठक आयोजित करने के लिए 45 दिन का अतिरिक्त समय दिया था।

कॉरपोरेट प्रक्रियाएं पूरी होने में लग रहा समय

कंपनी के मुताबिक, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मुंबई पीठ ने उसके रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी। इस मंजूर योजना को लागू करने के तहत कंपनी कई कॉरपोरेट प्रक्रियाएं पूरी कर रही है। इनमें शेयर पूंजी में कटौती और उससे जुड़ी अन्य प्रक्रियाएं शामिल हैं।

कंपनी ने बताया कि इन प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन कुछ जरूरी औपचारिकताएं अभी पूरी नहीं हुई हैं। इनमें कंपनी के मौजूदा ISIN को फ्रीज करना, शेयर पूंजी में कटौती के बाद नए इक्विटी शेयर जारी करना, नए ISIN को सक्रिय करना और इससे जुड़ी डिपॉजिटरी व नियामकीय प्रक्रियाएं पूरी करना शामिल है।

AGM के लिए और समय की जरूरत

कंपनी का कहना है कि इन सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने और 13वीं AGM आयोजित करने के लिए उसे अतिरिक्त समय की जरूरत पड़ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए निदेशक मंडल ने कंपनी अधिनियम, 2013 के लागू प्रावधानों के तहत रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज, मुंबई-I से 45 दिन की और मोहलत मांगने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

कंपनी ने यह भी कहा कि यह कदम कंपनी और उसके हितधारकों के हितों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

19 अक्टूबर को हुई निदेशक मंडल की बैठक सुबह 11:20 बजे शुरू हुई और दोपहर 1 बजे समाप्त हुई। कंपनी ने इस फैसले की जानकारी बीएसई और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को दी है।

 

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नेहा सिंह राठौर से जुड़ी गलत खबर पर NCW सख्त, 15 दिन में मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट

ABP News के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित गलत खबर के लिए नेटवर्क ने मांगी थी माफी, आयोग ने सूचना-प्रसारण मंत्रालय से संबंधित नियामक और स्व-नियामक संस्थाओं के जरिए कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा

Last Modified:
Monday, 19 October, 2026
NCW Report

लोक गायिका नेहा सिंह राठौर को कथित सेक्स रैकेट से जोड़ने वाली खबर के मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग की अध्यक्ष विजया किशोर राहतकर ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) से इस मामले में संबंधित नियामक, प्रशासनिक और मीडिया उद्योग की स्व-नियामक संस्थाओं के माध्यम से तत्काल और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।

आयोग ने 15 दिनों के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट (एटीआर) भी मांगी है। यह मामला एबीपी नेटवर्क के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित एक खबर से जुड़ा है। सार्वजनिक आलोचना के बाद नेटवर्क ने स्वीकार किया था कि संबंधित खबर तथ्यात्मक रूप से गलत थी और इसके लिए माफी मांगी थी।

सूचना-प्रसारण मंत्रालय से कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया किशोर राहतकर ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से कहा है कि वह संबंधित संस्थाओं को इस मामले में तत्काल और समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दे। इनमें प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई), इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मॉनिटरिंग सेंटर (ईएमएमसी), न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन (एनबीडीए) और डिजिटल पब्लिशर्स कंटेंट ग्रीवेंस काउंसिल (डीपीसीजीसी) शामिल हैं।

आयोग ने इन संस्थाओं के माध्यम से सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही, 15 दिनों के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट देने को कहा गया है।

यह है पूरा मामला

यह विवाद 17 अक्टूबर 2026 को सामने आया, जब एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लोक गायिका नेहा सिंह राठौर से संबंधित एक रिपोर्ट प्रसारित की गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें एक हॉस्टल में कथित सेक्स रैकेट और पुलिस की छापेमारी का जिक्र करते हुए नेहा सिंह राठौर का नाम जोड़ा गया था।

इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए नेहा सिंह राठौर ने आरोप लगाया कि इससे उनकी गरिमा और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। सार्वजनिक आलोचना के बाद एबीपी नेटवर्क ने स्पष्टीकरण जारी किया। नेटवर्क ने स्वीकार किया कि उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित संबंधित खबर तथ्यात्मक रूप से गलत थी। इसके लिए नेटवर्क ने खेद जताते हुए माफी भी मांगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नेहा सिंह राठौर ने इस माफी को पर्याप्त नहीं माना और मामले में कानूनी कार्रवाई करने की बात कही।

महिलाओं की गरिमा और प्रतिष्ठा की सुरक्षा पर जोर

राष्ट्रीय महिला आयोग ने महिलाओं के खिलाफ लिंग आधारित चरित्र हनन और डिजिटल उत्पीड़न को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया है। आयोग के मुताबिक, मीडिया की स्वतंत्रता का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। खबरों में तथ्यों की सटीकता के साथ महिलाओं की गरिमा, निजता और प्रतिष्ठा का ध्यान रखना भी जरूरी है। आयोग ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से संबंधित संस्थाओं के माध्यम से इस मामले में तत्काल और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा 15 दिनों के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है।

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ABP Network में पंकज राय की नियुक्ति, बने रेवेन्यू हेड-डिजिटल

एबीपी नेटवर्क से जुड़ने से पहले वह Huella में सीनियर वाइस प्रेजिडेंट-एड सेल्स, इंडिया के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने 15 अक्टूबर 2026 को Huella से इस्तीफा दे दिया था।

Last Modified:
Monday, 19 October, 2026
Pankaj Rai..

मीडिया और विज्ञापन जगत से जुड़े पंकज राय ने एबीपी नेटवर्क (ABP Network) के साथ नई पारी शुरू की है। वह यहां रेवेन्यू हेड-डिजिटल (Revenue Head – Digital) के पद पर जुड़े हैं।

पंकज राय को ब्रॉडकास्ट और डिजिटल मीडिया क्षेत्र में 18 साल से अधिक का अनुभव है। एबीपी नेटवर्क से जुड़ने से पहले वह Huella में सीनियर वाइस प्रेजिडेंट-एड सेल्स, इंडिया के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने 15 अक्टूबर 2026 को Huella से इस्तीफा दे दिया था। मार्च 2026 में उन्हें इस पद पर पदोन्नत किया गया था। वहां वह NEXad, NewsroomAI और AIgnite जैसे प्लेटफॉर्म्स के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञापन बिक्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

Huella से पहले पंकज राय ने AI-संचालित डिजिटल एक्सपीरियंस प्लेटफॉर्म Publive में चीफ बिजनेस ऑफिसर के रूप में काम किया था। इससे पहले वह जी मीडिया (Zee Media Corporation Limited) में विऑन (WION) और जी बिजनेस (Zee Business) के बिजनेस हेड के पद पर कार्यरत थे। अपने करियर में वह Qyou Media में नेशनल सेल्स हेड की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। इसके अलावा, वह Zee TV, Zee Cinema और Zee Bollywood जैसे प्रतिष्ठित चैनलों के लिए उत्तर और पूर्वी भारत में व्यावसायिक जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।

'जी मीडिया' से पहले पंकज राय दो साल से अधिक समय तक 'द क्यू नेटवर्क' (The Qyou Network ) (ब्रॉडकास्ट, गेमिंग व सीटीवी) में ब्रांच हेड और 'द क्यू एंड गेमिंग सॉल्यूशंस' (The Q and Gaming Solutions) में नेशनल हेड के तौर पर अपनी भूमिका निभा चुके हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने 'मिड-डे' (Mid-day) और 'पीपल इंटरएक्टिव' (People Interactive) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ भी काम किया है।

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