ABP News के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित गलत खबर के लिए नेटवर्क ने मांगी थी माफी, आयोग ने सूचना-प्रसारण मंत्रालय से संबंधित नियामक और स्व-नियामक संस्थाओं के जरिए कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
लोक गायिका नेहा सिंह राठौर को कथित सेक्स रैकेट से जोड़ने वाली खबर के मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग की अध्यक्ष विजया किशोर राहतकर ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) से इस मामले में संबंधित नियामक, प्रशासनिक और मीडिया उद्योग की स्व-नियामक संस्थाओं के माध्यम से तत्काल और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।
आयोग ने 15 दिनों के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट (एटीआर) भी मांगी है। यह मामला एबीपी नेटवर्क के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित एक खबर से जुड़ा है। सार्वजनिक आलोचना के बाद नेटवर्क ने स्वीकार किया था कि संबंधित खबर तथ्यात्मक रूप से गलत थी और इसके लिए माफी मांगी थी।
सूचना-प्रसारण मंत्रालय से कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया किशोर राहतकर ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से कहा है कि वह संबंधित संस्थाओं को इस मामले में तत्काल और समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दे। इनमें प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई), इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मॉनिटरिंग सेंटर (ईएमएमसी), न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन (एनबीडीए) और डिजिटल पब्लिशर्स कंटेंट ग्रीवेंस काउंसिल (डीपीसीजीसी) शामिल हैं।
आयोग ने इन संस्थाओं के माध्यम से सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही, 15 दिनों के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट देने को कहा गया है।
यह है पूरा मामला
यह विवाद 17 अक्टूबर 2026 को सामने आया, जब एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लोक गायिका नेहा सिंह राठौर से संबंधित एक रिपोर्ट प्रसारित की गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें एक हॉस्टल में कथित सेक्स रैकेट और पुलिस की छापेमारी का जिक्र करते हुए नेहा सिंह राठौर का नाम जोड़ा गया था।
इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए नेहा सिंह राठौर ने आरोप लगाया कि इससे उनकी गरिमा और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। सार्वजनिक आलोचना के बाद एबीपी नेटवर्क ने स्पष्टीकरण जारी किया। नेटवर्क ने स्वीकार किया कि उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित संबंधित खबर तथ्यात्मक रूप से गलत थी। इसके लिए नेटवर्क ने खेद जताते हुए माफी भी मांगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नेहा सिंह राठौर ने इस माफी को पर्याप्त नहीं माना और मामले में कानूनी कार्रवाई करने की बात कही।
महिलाओं की गरिमा और प्रतिष्ठा की सुरक्षा पर जोर
राष्ट्रीय महिला आयोग ने महिलाओं के खिलाफ लिंग आधारित चरित्र हनन और डिजिटल उत्पीड़न को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया है। आयोग के मुताबिक, मीडिया की स्वतंत्रता का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। खबरों में तथ्यों की सटीकता के साथ महिलाओं की गरिमा, निजता और प्रतिष्ठा का ध्यान रखना भी जरूरी है। आयोग ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से संबंधित संस्थाओं के माध्यम से इस मामले में तत्काल और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा 15 दिनों के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है।
National Commission for Women has taken suo motu cognizance of reports regarding the publication of allegedly defamatory content by a News linking folk singer Ms. Neha Singh Rathore to an alleged sex racket. Following public criticism, the news network reportedly acknowledged that the report was factually incorrect and issued an apology. The NCW Chairperson, Smt. Vijaya Rahatkar, has asked the Ministry of Information and Broadcasting to direct the concerned regulatory bodies, such as the Press Council of India; administrative bodies, such as the Electronic Media Monitoring Centre (EMMC); and self-regulatory bodies of the media industry, such as the News Broadcasters and Digital Association (NBDA) and the Digital Publishers Content Grievance Council (DPCGC), to ensure immediate and time-bound action under the Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021. An Action Taken Report (ATR) has been sought within 15 days. The Commission has called for safeguards against gender-based character assassination and digital harassment against women. Media freedom must be exercised responsibly, with due regard for factual accuracy, women’s dignity, privacy and reputation. @MIB_India #suomotu #ncwindia #rashtriyamahilaaayog
— NCW (@NCWIndia) October 19, 2026
एबीपी नेटवर्क से जुड़ने से पहले वह Huella में सीनियर वाइस प्रेजिडेंट-एड सेल्स, इंडिया के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने 15 अक्टूबर 2026 को Huella से इस्तीफा दे दिया था।
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मीडिया और विज्ञापन जगत से जुड़े पंकज राय ने एबीपी नेटवर्क (ABP Network) के साथ नई पारी शुरू की है। वह यहां रेवेन्यू हेड-डिजिटल (Revenue Head – Digital) के पद पर जुड़े हैं।
पंकज राय को ब्रॉडकास्ट और डिजिटल मीडिया क्षेत्र में 18 साल से अधिक का अनुभव है। एबीपी नेटवर्क से जुड़ने से पहले वह Huella में सीनियर वाइस प्रेजिडेंट-एड सेल्स, इंडिया के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने 15 अक्टूबर 2026 को Huella से इस्तीफा दे दिया था। मार्च 2026 में उन्हें इस पद पर पदोन्नत किया गया था। वहां वह NEXad, NewsroomAI और AIgnite जैसे प्लेटफॉर्म्स के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञापन बिक्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
Huella से पहले पंकज राय ने AI-संचालित डिजिटल एक्सपीरियंस प्लेटफॉर्म Publive में चीफ बिजनेस ऑफिसर के रूप में काम किया था। इससे पहले वह जी मीडिया (Zee Media Corporation Limited) में विऑन (WION) और जी बिजनेस (Zee Business) के बिजनेस हेड के पद पर कार्यरत थे। अपने करियर में वह Qyou Media में नेशनल सेल्स हेड की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। इसके अलावा, वह Zee TV, Zee Cinema और Zee Bollywood जैसे प्रतिष्ठित चैनलों के लिए उत्तर और पूर्वी भारत में व्यावसायिक जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।
'जी मीडिया' से पहले पंकज राय दो साल से अधिक समय तक 'द क्यू नेटवर्क' (The Qyou Network ) (ब्रॉडकास्ट, गेमिंग व सीटीवी) में ब्रांच हेड और 'द क्यू एंड गेमिंग सॉल्यूशंस' (The Q and Gaming Solutions) में नेशनल हेड के तौर पर अपनी भूमिका निभा चुके हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने 'मिड-डे' (Mid-day) और 'पीपल इंटरएक्टिव' (People Interactive) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ भी काम किया है।
News Pinch से जुड़ने से पहले सिद्धार्थ पुरोहित Oneindia में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत थे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
पत्रकार सिद्धार्थ पुरोहित ने मीडिया प्लेटफॉर्म न्यूज पिंच (News Pinch) में एग्जिक्यूटिव प्रोड्यूसर के तौर पर नई पारी शुरू की है। उन्होंने लिंक्डइन पर अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की है।
News Pinch से जुड़ने से पहले सिद्धार्थ पुरोहित Oneindia में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने अप्रैल 2025 में Oneindia जॉइन किया था और अक्टूबर 2026 तक यहां काम किया। इस दौरान वह इंटरनेशनल रिलेशंस और डिफेंस कवरेज की टीम लीड कर रहे थे। उनकी भूमिका में एडिटोरियल प्लानिंग, कंटेंट मैनेजमेंट और विभिन्न डिजिटल फॉर्मेट के लिए खबरों की तैयारी शामिल थी।
Oneindia में रहते हुए उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर, दिल्ली ब्लास्ट और सीजेपी प्रदर्शनों जैसे प्रमुख घटनाक्रमों की कवरेज का नेतृत्व किया। इसके अलावा उन्होंने पॉडकास्ट, एक्सप्लेनर, विश्लेषणात्मक रिपोर्ट और रिसर्च आधारित कंटेंट तैयार करने और मैनेज करने का काम किया। वह ब्रैंडेड कंटेंट की योजना बनाने से लेकर उसके प्रोडक्शन, होस्टिंग और क्रियान्वयन तक से जुड़े रहे। उन्होंने लाइव ब्रॉडकास्ट और महत्वपूर्ण घटनाओं की रियल-टाइम डिजिटल कवरेज भी संभाली। Oneindia की हिंदी वेबसाइट के लिए विदेश मामलों से जुड़ी एक्सक्लूसिव खबरें और डिजिटल स्टोरीज भी तैयार कीं।
इससे पहले सिद्धार्थ पुरोहित रिपब्लिक वर्ल्ड (Republic World) में सीनियर डिजिटल प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर चुके हैं। मार्च 2024 से मई 2025 तक यहां अपनी भूमिका के दौरान उन्होंने इंटरनेशनल अफेयर्स की कवरेज, एडिटोरियल रणनीति, कंटेंट स्ट्रैटेजी और ऑडियंस ग्रोथ प्लानिंग पर काम किया। उन्होंने भू-राजनीति, विदेश मामलों और रक्षा से जुड़े एक्सप्लेनर तैयार किए। इसके साथ ही यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स सहित विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए कंटेंट प्रोडक्शन और पब्लिशिंग का काम संभाला।
सिद्धार्थ पुरोहित ने जनवरी 2022 से मार्च 2024 तक जागरण न्यू मीडिया (Jagran New Media) में सीनियर प्रोड्यूसर के तौर पर काम किया। यहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्ट, डॉक्यूमेंट्री और अंतरराष्ट्रीय संबंधों, भू-राजनीति तथा वैश्विक मामलों से जुड़े एक्सप्लेनर वीडियो तैयार किए। उन्होंने नए एडिटोरियल फॉर्मेट और कंटेंट प्रोजेक्ट की योजना बनाने के साथ कंटेंट रणनीति, ऑडियंस ग्रोथ और एडिटोरियल प्लानिंग पर भी काम किया। वह Jagran English के लिए भी अंतरराष्ट्रीय और डिजिटल न्यूज कवरेज में योगदान देते रहे। इस दौरान उन्होंने Google और IIT कानपुर के सहयोग से आयोजित ‘AI in the Newsroom’ वर्कशॉप में पहला स्थान हासिल किया।
अपने करियर में सिद्धार्थ पुरोहित जी न्यूज (ZEE News) और एबीपी नेटवर्क (ABP Network) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं। ZEE News में दिसंबर 2019 से जून 2020 तक वह कॉरेस्पॉन्डेंट रहे।
ABP Network में उन्होंने जून 2018 से अक्टूबर 2019 तक रिपोर्टर के तौर पर काम किया। यहां वह अपराध और राजनीति से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते थे। उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव, बुराड़ी मामले, पुलवामा हमले और कुंभ 2019 सहित कई प्रमुख घटनाओं की कवरेज की। इसके अलावा दिल्ली के अपराध जगत से जुड़े मामलों की पड़ताल और विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की।
सिद्धार्थ पुरोहित ने मार्च 2018 से जून 2018 तक दैनिक भास्कर में कॉपी एडिटर के रूप में काम किया। यहां उनकी जिम्मेदारियों में वेब के लिए कॉपी एडिटिंग, हेडलाइन तैयार करना, वीडियो के लिए न्यूज मेटा कीवर्ड बनाना और वेबसाइट पर खबरें प्रकाशित करना शामिल था। इससे पहले वह जुलाई 2016 से फरवरी 2018 तक भोपाल के IND24 न्यूज चैनल में ब्रॉडकास्ट जर्नलिस्ट के तौर पर कार्यरत थे, जहां उन्होंने राजनीतिक पत्रकारिता की।
सिद्धार्थ पुरोहित ने भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से 2016 से 2018 के बीच पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने हिमालयन यूनिवर्सिटी से कॉमर्स में स्नातक की पढ़ाई की है।
लोक गायिका नेहा सिंह राठौर ने खबर को लेकर ABP पर गंभीर आरोप लगाए थे। विवाद के बीच ABP नेटवर्क के डिजिटल प्लेटफॉर्म ने खबर में तथ्यात्मक गलती स्वीकार करते हुए खेद जताया और माफी मांगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
लोक गायिका और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बात रखने वाली नेहा सिंह राठौर से जुड़े एक मामले में ABP नेटवर्क को अपनी खबर पर सफाई देनी पड़ी है। नेटवर्क के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित खबर को तथ्यों के आधार पर गलत पाए जाने की बात स्वीकार करते हुए माफी मांगी गई है। जिस खबर को लेकर विवाद हुआ, उस पर नेहा ने कड़ी आपत्ति जताई थी। इसके बाद ABP की ओर से सामने आया स्पष्टीकरण इस पूरे मामले का अहम घटनाक्रम बन गया है।
ABP News के आधिकारिक एक्स हैंडल पर जारी स्पष्टीकरण में कहा गया, ‘ABP नेटवर्क के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लोक गायिका नेहा सिंह राठौर से संबंधित एक ख़बर प्रसारित की गई, जो तथ्यों के आधार पर ग़लत पाई गई। इस त्रुटिपूर्ण प्रसारण के लिए हमें खेद है, हम इसके लिए क्षमा प्रार्थी हैं।’
स्पष्टीकरण एवं खेद : ABP नेटवर्क के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लोक गायिका नेहा सिंह राठौर से संबंधित एक ख़बर प्रसारित की गई, जो तथ्यों के आधार पर ग़लत पाई गई. इस त्रुटिपूर्ण प्रसारण के लिए हमें खेद है, हम इसके लिए क्षमा प्रार्थी हैं. https://t.co/5KJkFucoP9
— ABP News (@ABPNews) October 17, 2026
इससे पहले नेहा सिंह राठौर ने इसी खबर को लेकर ABP News पर गंभीर आरोप लगाए थे। अपने एक्स पोस्ट में उन्होंने कहा कि चैनल उन्हें ‘वेश्या और कॉल गर्ल’ बताना चाहता है। नेहा ने खबर पर नाराजगी जताते हुए इसे उनके अपमान की कोशिश बताया।
नेहा ने अपने पोस्ट में राष्ट्रीय महिला आयोग को भी टैग किया और पूछा कि क्या देश का महिला आयोग इस मामले पर ध्यान नहीं देगा। नेहा ने आरोप लगाया कि सरकार से सवाल पूछने पर उन्हें इस तरह अपमानित करने की कोशिश की जा रही है।
@ABPNews की ये ख़बर देखिए. ये चैनल मुझे वेश्या और कॉल गर्ल बताना चाहता है. मैं सरकार से सवाल पूछूँगी तो ये बिके हुए चैनल मुझे इस तरह से अपमानित करने का प्रयास करेंगे. इस देश का महिला आयोग मर गया है क्या? @NCWIndia इन गोदी चैनलों का भाजपा की दलाली से पेट नहीं भर रहा है. इन्हें अब बेटियों का सम्मान खाना है. @narendramodi इस देश को आपने बेटियों के लिए नर्क बना दिया है.
— Neha Singh Rathore (@nehafolksinger) October 17, 2026
सुनो @abp न्यूज़, मैं कोई कॉsल गर्ल या प्रॉस्टिट्यूsट नहीं हूँ. जब भाजपा का आईटी सेल मेरा हौसला नहीं तोड़ पाया तो तुम जैसे गोदी मीडिया को कमान सौंप दी? पहले भाजपा के नेता बेटियों की इज्जत ख़राब करते थे, अब तुम लोग भी बेटियों की इज्जत लूटोगे? इतनी हिम्मत? इतनी बेशर्मी? ये बात यहीं खत्म नहीं होगी @abp बेटियों का सम्मान तुम लोगों के लिए खेल का सामान हो गया है? @narendramodi @NCWIndia
— Neha Singh Rathore (@nehafolksinger) October 17, 2026
थियागा चेम्मेल को ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री में 20 साल का अनुभव है। वह इससे पहले News18 Tamil Nadu में एडिटर-पॉलिटिकल के पद पर कार्यरत थे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
तमिल न्यूज मीडिया के अनुभवी पत्रकार थियागा चेम्मेल (Thiyaga Chemmel) ने नई पारी शुरू की है। उन्होंने Kumudam Publications Pvt Ltd में Kumudam News 24/7 के न्यूज हेड के रूप में जॉइन किया है। उन्होंने लिंक्डइन पर अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की है।
थियागा चेम्मेल को पत्रकारिता और ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री में करीब 20 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत Vikatan ग्रुप में स्टूडेंट रिपोर्टर के तौर पर की थी। इसके बाद उन्होंने Sun TV Network, Polimer Media, Puthiya Thalaimurai और News7 Tamil जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया।
उन्होंने न्यूज आधारित और मार्केटिंग से जुड़ी कई ब्रैंड अवेयरनेस कैंपेन शुरू किए। इनमें उनका ‘Say No to Drugs’ कैंपेन प्रमुख रहा, जिसके तहत 5 लाख से अधिक युवाओं ने नशे के खिलाफ शपथ ली।
इसके अलावा, मैनेजमेंट के सहयोग से उन्होंने महिला कर्मचारियों के लिए मेंस्ट्रुअल लीव पॉलिसी भी शुरू की थी। थियागा चेम्मेल ने Rathinam Global University से बीएससी विजुअल कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है।
इस नियुक्ति के साथ कंपनी का लक्ष्य टेलीविजन, डिजिटल, सोशल मीडिया और अन्य उभरते प्लेटफॉर्म पर Good Times को लाइफस्टाइल और एंटरटेनमेंट के प्रमुख ब्रैंड्स में से एक के रूप में आगे बढ़ाना है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
‘एनडीटीवी’ (NDTV) ने मेहर बाजवा को NDTV Good Times का एडिटर नियुक्त किया है। इस नियुक्ति के साथ कंपनी का लक्ष्य टेलीविजन, डिजिटल, सोशल मीडिया और अन्य उभरते प्लेटफॉर्म पर Good Times को लाइफस्टाइल और एंटरटेनमेंट के प्रमुख ब्रैंड्स में से एक के रूप में आगे बढ़ाना है।
मेहर बाजवा को मीडिया क्षेत्र में 15 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर में लाइफस्टाइल, ट्रैवल, लग्जरी और डिजिटल पब्लिशिंग जैसे क्षेत्रों में काम किया है। उनकी नई भूमिका में एडिटोरियल विजन और कंटेंट स्ट्रैटेजी का नेतृत्व करना, नए कंटेंट प्रॉपर्टीज विकसित करना, डिजिटल और सोशल मीडिया पर दर्शकों की भागीदारी बढ़ाना और लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड, फैशन, कल्चर तथा समकालीन जीवनशैली से जुड़े नए स्टोरीटेलिंग फॉर्मेट तैयार करना शामिल है।
इससे पहले मेहर बाजवा Travel + Leisure India & South Asia की एडिटर-इन-चीफ थीं। इस भूमिका में उन्होंने ब्रैंड की एडिटोरियल दिशा को विकसित करने, उसकी डिजिटल पहुंच बढ़ाने और कंटेंट व अनुभवों पर आधारित नई पहल तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।
इससे पहले वह Hubert Burda Media में वरिष्ठ नेतृत्व की भूमिकाओं में काम कर चुकी हैं। यहां उन्होंने डिप्टी रीजनल डायरेक्टर, डिजिटल ऑपरेशंस, एशिया के रूप में भारत, हांगकांग, मलेशिया, सिंगापुर और थाईलैंड के बाजारों की जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान Lifestyle Asia, Augustman और Travel + Leisure जैसे ब्रैंड्स की डिजिटल पहुंच बढ़ाने, कंटेंट क्षमताओं को मजबूत करने और विकास को गति देने पर काम किया।
मेहर बाजवा Microsoft News में न्यूजरूम डायरेक्टर भी रह चुकी हैं। इस भूमिका में उन्होंने 16 देशों में एडिटोरियल ऑपरेशंस का नेतृत्व किया और 140 से ज्यादा एडिटर्स व पत्रकारों की टीम संभाली। अपने करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने Maxim और Cosmopolitan में भी एडिटोरियल भूमिकाओं में काम किया और कंटेंट स्ट्रैटेजी तथा नई एडिटोरियल पहलों को विकसित करने में योगदान दिया।
NDTV के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल ने मेहर बाजवा की नियुक्ति पर कहा कि Good Times लाइफस्टाइल मीडिया का एक प्रतिष्ठित नाम रहा है और इसके पास दर्शकों का मजबूत आधार है। मीडिया उपभोग के तौर-तरीकों में बदलाव के साथ इस ब्रैंड को नई पीढ़ी के लिए नए रूप में पेश करने के अवसर हैं। उन्होंने मेहर के एडिटोरियल अनुभव, डिजिटल दर्शकों की समझ और कंटेंट के जरिए ब्रैंड विकसित करने की क्षमता को इसकी अगली पारी के लिए अहम बताया।
अपनी नियुक्ति पर मेहर बाजवा ने कहा कि Good Times की विरासत शानदार है और इसका भविष्य भी संभावनाओं से भरा है। उनके मुताबिक, आज लाइफस्टाइल कंटेंट केवल जीवनशैली तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संस्कृति, अनुभव, आकांक्षाएं और आधुनिक जीवन को आकार देने वाली कहानियां भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि दर्शक अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर प्रामाणिक, प्रासंगिक और आकर्षक कंटेंट चाहते हैं। वह Good Times की मौजूदा खूबियों को आगे बढ़ाने, नई कंटेंट सीरीज विकसित करने और दर्शकों के साथ इसके जुड़ाव को मजबूत करने के लिए काम करेंगी।
मुंबई में कार्यरत पत्रकार अविनाश पाण्डेय ने अनादि टीवी जॉइन कर लिया है। समाचार4मीडिया से बातचीत में अविनाश पाण्डेय ने बताया कि उन्हें महाराष्ट्र स्टेट ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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मुंबई में कार्यरत पत्रकार अविनाश पाण्डेय ने राष्ट्रीय न्यूज चैनल अनादि टीवी (Anaadi TV) जॉइन कर लिया है। समाचार4मीडिया से बातचीत में अविनाश पाण्डेय ने बताया कि उन्हें महाराष्ट्र स्टेट ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले पाण्डेय को टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में करीब 20 साल का अनुभव है। उन्होंने वर्ष 2006 में इंडिया टीवी (India TV) में ट्रेनी रिपोर्टर के तौर पर पत्रकारिता की शुरुआत की थी।
इसके बाद उन्होंने सीटीवी (CTV), लाइव इंडिया (Live India), न्यूज 24 (News 24), एनबीटी ऑनलाइन (NBT Online) और लीड न्यूज टुडे डिजिटल (Lead News Today Digital) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया।
अविनाश पाण्डेय एनबीटी ऑनलाइन में असिस्टेंट न्यूज एडिटर (महाराष्ट्र हेड) और लीड न्यूज टुडे डिजिटल में एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर काम कर चुके हैं। न्यूज 24 में उन्होंने प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट, जबकि लाइव इंडिया और मी मराठी (Mi Marathi) में कॉरेस्पॉन्डेंट के तौर पर काम किया।
पत्रकारिता के दौरान अविनाश पाण्डेय ने राजनीति, अपराध, अदालत, नागरिक मामलों, रक्षा और राष्ट्रीय मुद्दों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग की है।
समाचार4मीडिया की ओर से अविनाश पाण्डेय को उनके नए सफर के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।
पंकज पिसोलकर को प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री में 26 साल से अधिक का अनुभव है। वह सकाल मीडिया ग्रुप, दैनिक भास्कर और लोकमत ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में काम कर चुके हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सीनियर मीडिया प्रोफेशनल पंकज जगदीश पिसोलकर पुढारी पब्लिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड (Pudhari Publications Private Limited) से जुड़ गए हैं। कंपनी ने उन्हें पीसीएमसी क्षेत्र के लिए असिस्टेंट जनरल मैनेजर (एडवरटाइजमेंट सेल्स) नियुक्त किया है।
पुढारी पब्लिकेशंस ने सोशल मीडिया पर इस नियुक्ति की जानकारी साझा करते हुए पंकज पिसोलकर का स्वागत किया है। कंपनी को उम्मीद है कि एडवरटाइजमेंट सेल्स के कामकाज को मजबूत करने और ग्राहकों व साझेदारों के साथ बेहतर संबंध बनाने में उनका अनुभव उपयोगी साबित होगा।
पंकज पिसोलकर को प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री में 26 साल से अधिक का अनुभव है। अपने करियर के दौरान वह सकाल मीडिया ग्रुप, दैनिक भास्कर और लोकमत ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में काम कर चुके हैं।
पुढारी पब्लिकेशंस के मुताबिक, पंकज पिसोलकर का अनुभव कंपनी के विज्ञापन बिक्री से जुड़े कामकाज को मजबूत करने में मददगार होगा। कंपनी को क्लाइंट्स और पार्टनर्स के साथ लंबे समय तक मजबूत संबंध बनाने में भी उनके योगदान की उम्मीद है।
इप्सिता जौहरी राणे डायरेक्टएक्स से सीनियर वाइस प्रेसिडेंट-रणनीति और हेड-ब्रांड सॉल्यूशंस के तौर पर जुड़ी हैं। वह रणनीति, ब्रांड निर्माण और तकनीक के जरिए कारोबार से जुड़े बेहतर नतीजों पर काम करेंगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इप्सिता जौहरी राणे (Ipsita Johri Rane) डायरेक्टएक्स (DirectX) से सीनियर वाइस प्रेसिडेंट-रणनीति और हेड-ब्रांड सॉल्यूशंस (Senior Vice President-Strategy and Head-Brand Solutions) के तौर पर जुड़ी हैं। उन्हें मार्केटिंग, कम्युनिकेशंस, ब्रांड निर्माण और उद्यमिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
डायरेक्टएक्स में इप्सिता जौहरी राणे कंपनी की रणनीति और ब्रांड सॉल्यूशंस को मजबूत करने पर काम करेंगी। उनकी भूमिका में कंज्यूमर इनसाइट, एक्सपीरियंस और टेक्नोलॉजी को एक साथ जोड़कर ब्रांड की चुनौतियों के समाधान तैयार करने और कारोबार से जुड़े बेहतर नतीजे हासिल करने पर जोर रहेगा।
अपनी नई जिम्मेदारी को लेकर इप्सिता जौहरी राणे ने कहा कि ब्रांड्स के लिए स्थानीय बाजारों में केवल लोगों तक पहुंचना या उनकी भागीदारी बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। उन्हें यह समझना जरूरी है कि उपभोक्ताओं के व्यवहार को कौन-सी चीज प्रभावित करेगी, अवसर कहां मौजूद है और उस अवसर को प्रभावी कार्रवाई में कैसे बदला जा सकता है।
उन्होंने कहा कि डायरेक्टएक्स में उनका फोकस रणनीतिक सोच को और मजबूत करने तथा लोगों, संस्कृति और परिस्थितियों की गहरी समझ को समाधान तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल करने पर रहेगा। इसका उद्देश्य ग्राहकों को केवल किसी कैंपेन की योजना बनाने से आगे ले जाकर उनकी वास्तविक ब्रांड या कारोबारी समस्या का समाधान करने में मदद करना होगा।
अपने करियर के शुरुआती दौर में इप्सिता जौहरी राणे द वॉल्ट डिज्नी कंपनी इंडिया (The Walt Disney Company India), सोनी पिक्चर्स (Sony Pictures) और टीबीडब्ल्यूए इंडिया (TBWA India) समेत कई प्रमुख कंपनियों के साथ भी काम कर चुकी हैं।
महादेव ऑनलाइन बेटिंग मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि Ebix Inc. के अमेरिका स्थित मुख्यालय को 1.26 करोड़ डॉलर (12.6 मिलियन डॉलर) के कर्ज के बदले गिरवी रखा गया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
महादेव ऑनलाइन बेटिंग मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एबिक्स इंक. (Ebix Inc.) के अमेरिका स्थित मुख्यालय को 1.26 करोड़ डॉलर (12.6 मिलियन डॉलर) के कर्ज के बदले गिरवी रखा गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब एबिक्स और एराया लाइफस्पेसेज (Eraaya Lifespaces) से जुड़े कारोबारी विकास गर्ग प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हिरासत में हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के अटलांटा के पास जॉन्स क्रीक में स्थित एबिक्स का 17 एकड़ में फैला कॉरपोरेट मुख्यालय इस कर्ज के लिए गिरवी रखा गया है। मामला इसलिए अहम है, क्योंकि भारतीय जांच एजेंसी ने पहले ही एराया की एबिक्स में हिस्सेदारी समेत करीब 940.77 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क करने का आदेश जारी किया था।
प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि नैस्डैक में सूचीबद्ध अमेरिकी कंपनी एबिक्स को महादेव बेटिंग नेटवर्क से जुड़े कथित अवैध धन के जरिये खरीदा गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस धन को हवाला नेटवर्क के माध्यम से इधर-उधर भेजा गया था। एराया लाइफस्पेसेज भारत में सूचीबद्ध कंपनी है और विकास गर्ग से जुड़ी हुई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईडी ने उसकी संपत्तियां भी कुर्क की हैं।
5 जून 2026 को जारी अस्थायी कुर्की आदेश संख्या 16/2026 के तहत 940.77 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर कार्रवाई की गई थी। इसमें एबिक्स में एराया की हिस्सेदारी भी शामिल थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि एबिक्स के अधिग्रहण में इस्तेमाल किया गया पैसा स्काईएक्सचेंज (SkyExchange) से जुड़े कथित अवैध सट्टेबाजी कारोबार से आया और दुबई के हवाला नेटवर्क के जरिये आगे भेजा गया।
अमेरिका में कर्ज का समझौता कैसे हुआ?
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय एजेंसियों ने एबिक्स के प्रबंधन को लिखित निर्देश देकर कहा था कि संबंधित संपत्तियों की बिक्री, हस्तांतरण, उन पर किसी दूसरे पक्ष का अधिकार बनाने या पहले से मौजूद अधिकारों में बदलाव की अनुमति न दी जाए।
इसके बावजूद, 4 अगस्त 2026 को एबिक्स के अमेरिकी अध्यक्ष गगन सेठी ने कैलिफोर्निया की कर्ज देने वाली कंपनी वेलोसिटी कमर्शियल कैपिटल एलएलसी (Velocity Commercial Capital LLC) के साथ कर्ज सुरक्षित करने के लिए एक कानूनी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। यह तारीख विकास गर्ग की दिल्ली स्थित आवास से गिरफ्तारी के करीब तीन सप्ताह बाद की बताई गई है।
जॉर्जिया के भूमि रिकॉर्ड में यह दस्तावेज 12 अगस्त को दर्ज किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, एबिक्स ने अपने '1 एबिक्स वे' (1 Ebix Way) परिसर को कर्ज के बदले गिरवी रखा। दस्तावेज में कंपनी ने कर्जदाता को यह भरोसा भी दिया कि उसे संपत्ति गिरवी रखने का पूरा अधिकार है।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि दस्तावेज में भारत में लागू संपत्ति कुर्की से जुड़ी रोक का उल्लेख नहीं किया गया। हालांकि, इस लेन-देन और संबंधित दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
संपत्ति से होने वाली कमाई भी कर्जदाता को मिलेगी
रिपोर्ट के मुताबिक, 1.26 करोड़ डॉलर के इस कर्ज से जुड़ा समझौता 2056 तक प्रभावी रहेगा। इसके तहत इमारत से मिलने वाला किराया भी कर्जदाता को सौंप दिया गया है।
इस घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि कर्ज से मिले 1.15 करोड़ डॉलर का इस्तेमाल पहले से मौजूद कर्ज चुकाने में किया गया। यह बकाया वॉच हिल (Watch Hill) और मेलानी लेन (Melanie Lane) से जुड़ा बताया गया है। इन निवेशकों ने एबिक्स और एराया, दोनों कंपनियों में निवेश किया था।
भारतीय जांचकर्ताओं के लिए यह घटनाक्रम चिंता का विषय हो सकता है, क्योंकि संपत्ति को गिरवी रखकर कर्ज लेने से भविष्य में उससे वसूली की जा सकने वाली रकम प्रभावित हो सकती है। यदि भारतीय अदालतें आगे चलकर संपत्तियों को जब्त करने का आदेश देती हैं, तो अमेरिका स्थित मुख्यालय पर पहले से बने कर्ज और दूसरे वित्तीय अधिकार वसूली की प्रक्रिया को जटिल बना सकते हैं।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि एबिक्स का यह परिसर बिक्री के लिए रखा गया है। रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी क्रेसा (Cresa) के जरिये इसकी बिक्री की प्रक्रिया चलने की बात कही गई है। यह भी दावा है कि पास में स्थित जॉन्स क्रीक अस्पताल का संचालन करने वाली स्वास्थ्य सेवा कंपनी एमोरी हेल्थकेयर (Emory Healthcare) इस संपत्ति को खरीदने में दिलचस्पी रखती है। हालांकि, इस संभावित सौदे की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
भारतीय शेयर बाजार में जानकारी नहीं देने का आरोप
रिपोर्ट के मुताबिक, एराया लाइफस्पेसेज ने भारतीय शेयर बाजारों को अमेरिका में हुए 1.26 करोड़ डॉलर के इस गिरवी समझौते की जानकारी नहीं दी। आरोप है कि कंपनी ने भारतीय नियामकों और सार्वजनिक निवेशकों के सामने इस कर्ज का खुलासा नहीं किया, जबकि ऐसी जानकारी देना उसके लिए जरूरी हो सकता था।
इस मामले में एक और कानूनी पेच सामने आया है। अमेरिका में हुए कर्ज समझौते के अनुसार, किसी सरकारी एजेंसी की ओर से संपत्ति कुर्क करने या इसी तरह की कानूनी कार्रवाई को कर्ज चूक यानी डिफॉल्ट की स्थिति माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में वेलोसिटी कमर्शियल कैपिटल को कर्ज की पूरी रकम वापस मांगने का अधिकार मिल सकता है।
यदि ईडी अमेरिका में स्थित परिसर को कुर्क करने के अपने आदेश को लागू कराने की कोशिश करती है, तो भारतीय एजेंसी की कार्रवाई और अमेरिकी कर्जदाता के अधिकारों के बीच कानूनी विवाद खड़ा हो सकता है। इससे भारत और अमेरिका में लंबी कानूनी प्रक्रिया की आशंका पैदा हो सकती है।
विकास गर्ग, जिन्हें दिल्ली भाजपा के आर्थिक प्रकोष्ठ का पूर्व संयोजक बताया गया है, फिलहाल जमानत पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जमानत पर फैसला करते समय अदालतें इस बात पर भी विचार करती हैं कि आरोपी सबूतों को प्रभावित कर सकता है या संपत्तियों को बेचकर अथवा उनका स्वरूप बदलकर जांच और वसूली की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा सकता है।
रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि कुर्क की गई संपत्तियों पर कर्ज लेने से गर्ग की जमानत की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। हालांकि, जमानत पर अंतिम फैसला अदालत संबंधित तथ्यों और कानूनी दलीलों के आधार पर करेगी।
भारतीय ईडी का आदेश अपने आप अमेरिका के जॉर्जिया राज्य के भूमि रिकॉर्ड में किसी लेन-देन को रोक नहीं सकता। ऐसे में भारत को संपत्ति पर अपने दावे को लागू कराने के लिए पारस्परिक कानूनी सहायता संधि (Mutual Legal Assistance Treaty यानी MLAT) जैसे अंतरराष्ट्रीय कानूनी माध्यमों का सहारा लेना पड़ सकता है।
लंदन में हुई बैठकों से जुड़ा कथित नेटवर्क
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एबिक्स के अधिग्रहण की योजना के पीछे लंदन में हुई कुछ गोपनीय बैठकें थीं। इन बैठकों में दिल्ली के कारोबारी विकास गर्ग और दुबई में रहने वाले हरि शंकर तिबरेवाल के बीच बातचीत होने का आरोप लगाया गया है। तिबरेवाल को महादेव ऑनलाइन बुक नेटवर्क से जुड़ा एक प्रमुख हवाला कारोबारी बताया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, तिबरेवाल को कई बार समन भेजे जाने के बावजूद उनके पेश नहीं होने की जानकारी ईडी के रिकॉर्ड में दर्ज है। उन्हें कोलकाता में जन्मा कारोबारी बताया गया है, जिसकी भूमिका कथित सट्टेबाजी से हासिल धन को कंपनियों तक पहुंचाने में जांच के दायरे में है।
आरोप है कि लंदन में हुई रणनीतिक बैठकों के दौरान गर्ग और तिबरेवाल ने स्काईएक्सचेंज से आने वाले कथित अवैध धन का इस्तेमाल कर अमेरिका की नैस्डैक में सूचीबद्ध एक बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनी को खरीदने की योजना बनाई थी। इस योजना के जरिये सट्टेबाजी से कमाए गए धन को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय कारोबारी सौदे में लगाने का आरोप है।
स्काईएक्सचेंज और हवाला नेटवर्क का कथित कारोबार
रिपोर्ट के अनुसार, स्काईएक्सचेंज एक बड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी मंच के रूप में काम करता था। इसके जरिये छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों के लोगों से रोजाना बड़ी रकम जुटाए जाने का आरोप है।
ईडी की अभियोजन शिकायतों में स्काईएक्सचेंज को तिबरेवाल के साथ सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल से जुड़ा हुआ बताया गया है। ये दोनों महादेव ऑनलाइन बुक मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल हैं।
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक:
रिपोर्ट के मुताबिक, इन गतिविधियों को मिलाकर इस कथित नेटवर्क का सालाना कारोबार 4,000 से 5,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता था। यह रकम किसी वैध मध्यम आकार की सूचीबद्ध कंपनी के कारोबार के बराबर बताई गई है।
आरोप है कि दुबई से संचालित शेल कंपनियों, एक-दूसरे से जुड़े बैंक खातों और ऐसे वित्तीय रिकॉर्ड के जरिये धन के वास्तविक स्रोत को छिपाया गया, जिनका पता लगाना मुश्किल था। इसके बाद इस रकम को वैध कारोबारी पूंजी के रूप में दिखाकर कंपनियों में निवेश किए जाने का दावा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि धन को भारत में वापस लाने और सूचीबद्ध कंपनियों में लगाने के लिए योग्य संस्थागत निवेश (Qualified Institutional Placements यानी QIPs), विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (Foreign Portfolio Investments यानी FPIs) और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investments यानी FDIs) जैसे माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि इस तरह का निवेश गर्ग से जुड़ी कंपनियों में पहुंचाया गया।
13 रुपये के शेयर से 36.1 करोड़ डॉलर के अधिग्रहण तक का सफर
इस पूरे मामले में जस्टराइड एंटरप्राइजेज (Justride Enterprises) का नाम भी सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह कंपनी पहले एक छोटी कंपनी थी, जिसके शेयर की कीमत करीब 13 रुपये थी। बाद में इसका नाम बदलकर एराया लाइफस्पेसेज कर दिया गया।
दावा किया गया है कि 2024 में कंपनी के शेयर में असाधारण तेजी आई और अगस्त 2024 तक इसकी कीमत करीब 800 रुपये प्रति शेयर पहुंच गई। रिपोर्ट इस तेजी को एक साल में लगभग 6,000 प्रतिशत की बढ़ोतरी बताती है। आरोप है कि बाद में कंपनी का इस्तेमाल कथित अवैध धन को निवेश करने और बड़े कारोबारी सौदे को पूरा करने के लिए किया गया।
इसके बाद एराया ने अमेरिका की दिवालियापन अदालत में एबिक्स इंक. की संपत्तियों की नीलामी में 36.1 करोड़ डॉलर (361 मिलियन डॉलर) की बोली जीतने का दावा किया। एबिक्स बीमा क्षेत्र के लिए सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी रही है, जो वित्तीय संकट में फंस गई थी।
रिपोर्ट इस अधिग्रहण को कथित अवैध सट्टेबाजी से हासिल धन को बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनी के अधिग्रहण में लगाने की कोशिश के रूप में पेश करती है। इसके मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क का कथित रास्ता रायपुर से शुरू होकर दुबई के हवाला कारोबार और फिर अमेरिका के अटलांटा स्थित कॉरपोरेट मुख्यालय तक पहुंचा।
मामले में आगे क्या?
अमेरिका में एबिक्स के मुख्यालय को गिरवी रखने, उससे जुड़े कर्ज की शर्तों और संपत्ति की संभावित बिक्री को लेकर सामने आए दावों से महादेव बेटिंग मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी जटिलताएं बढ़ सकती हैं। यदि भारतीय एजेंसियों की कुर्की और अमेरिकी कर्जदाता के अधिकारों के बीच टकराव होता है, तो संपत्ति पर दावे को लेकर दोनों देशों में कानूनी कार्रवाई की जरूरत पड़ सकती है।
हालांकि, इन आरोपों और लेन-देन से जुड़े सभी दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि, संबंधित कंपनियों का पक्ष और अदालतों के अंतिम निष्कर्ष इस मामले की वास्तविक स्थिति तय करने के लिए महत्वपूर्ण होंगे। जांच में लगाए गए आरोपों को अदालत द्वारा दोष सिद्ध किए जाने के बराबर नहीं माना जा सकता।
दक्षिण भारतीय सिनेमा की कहानियां अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं हैं। तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ भाषा की फिल्मों और सीरीज को दुनिया के अलग-अलग देशों में भी दर्शक मिल रहे हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दक्षिण भारतीय सिनेमा की कहानियां अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं हैं। तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ भाषा की फिल्मों और सीरीज को दुनिया के अलग-अलग देशों में भी दर्शक मिल रहे हैं। Netflix India की कंटेंट वाइस प्रेसिडेंट मोनिका शेरगिल ने CII Big Picture Summit 2026 में बताया कि इस साल दक्षिण भारतीय कंटेंट ने Netflix की टॉप-10 सूची में 60 देशों में जगह बनाई है। पिछले साल यह संख्या 20 से भी कम थी। यह बदलाव दिखाता है कि क्षेत्रीय भाषाओं की कहानियां अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना रही हैं।
‘Into the Southverse: Dissecting the South Indian Content Boom’ नाम के इस सत्र में फिल्मकारों और कलाकारों ने चर्चा की कि दक्षिण भारतीय कहानियों की लोकप्रियता क्यों बढ़ रही है और वे भाषा व भौगोलिक सीमाओं को पार कर दुनिया भर के दर्शकों तक कैसे पहुंच रही हैं। रेडियो प्रेजेंटर ऋषिकेश कन्नन ने इस चर्चा का संचालन किया। इसमें निर्माता सौंदर्या रजनीकांत, तमिल अभिनेता और फिल्मकार एलन, अभिनेता अर्जुन दास और अभिनेत्री प्रियंका मोहन शामिल हुईं। प्रियंका मोहन कोरिया पर्यटन की ब्रांड एंबेसडर भी हैं।
यह चर्चा ऐसे समय हुई, जब Netflix भारत में अपने 10 साल पूरे कर रहा है। कंपनी ने जनवरी 2016 में भारत में अपनी सेवाएं शुरू की थीं। Netflix में पिछले सात साल से काम कर रहीं मोनिका शेरगिल ने बताया कि इन वर्षों में कंपनी के काम करने के तरीके में काफी बदलाव आया है। शुरुआत में कंपनी भारतीय दर्शकों के लिए अंतरराष्ट्रीय कंटेंट लाने पर ध्यान दे रही थी, लेकिन अब वह स्थानीय रचनाकारों के साथ मिलकर भारतीय कहानियों को दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचाने पर काम कर रही है।
भारत में शुरुआत से लेकर स्थानीय कहानियों तक का सफर
जब Netflix ने भारत में कदम रखा था, तब उसकी शुरुआती ओरिजिनल फिल्मों और सीरीज को अमेरिका स्थित कार्यालय के जरिए तैयार किया जाता था। उस समय भारत में कंपनी का कोई स्थानीय कार्यालय नहीं था। धीरे-धीरे Netflix ने भारतीय दर्शकों की पसंद को समझना शुरू किया। शुरुआती दो से तीन साल तक कंपनी ने अलग-अलग तरह के कंटेंट के साथ प्रयोग किए। इसके बाद उसने दर्शकों के सामने ज्यादा विविधता वाली कहानियां पेश करने की दिशा में काम किया।
शेरगिल के मुताबिक, अब कंपनी का मकसद सिर्फ ऐसी कहानियां दिखाना नहीं है, जिन्हें दर्शक पहले से पसंद करते हैं। वह ऐसी कहानियां भी सामने लाना चाहती है, जिन्हें देखकर दर्शकों को महसूस हो कि वे भी इस तरह का कंटेंट देखना चाहते थे, लेकिन उन्हें इसका पहले अंदाजा नहीं था।
दक्षिण भारतीय कंटेंट के लिए इस बदलाव ने नए मौके खोले हैं। पहले कई दशकों तक दक्षिण भारतीय फिल्मों की कहानियों को दूसरी भाषाओं में दोबारा बनाया जाता रहा। लेकिन अब स्थिति बदल रही है। तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ की मूल कहानियां हिंदी समेत भारत की दूसरी भाषाओं के दर्शकों और विदेशों में रहने वाले लोगों तक अपनी अलग पहचान के साथ पहुंच रही हैं।
शेरगिल ने कहा कि दक्षिण भारत के फिल्मकार लंबे समय से अलग-अलग तरह की और अपनी खास पहचान रखने वाली कहानियां बना रहे हैं। हालांकि, पहले इन कहानियों को ज्यादा दर्शकों तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती थी। स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने इस कमी को दूर करने में मदद की है। अब ऐसे दर्शक भी इन कहानियों को देख सकते हैं, जिन्हें पहले इनके बारे में पता नहीं था।
‘मेड इन कोरिया’ ने दुनिया भर में बनाई पहचान
इस चर्चा में Netflix की तमिल फिल्म ‘Made in Korea’ का उदाहरण दिया गया। प्रियंका मोहन की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म की कहानी तमिलनाडु के एक गांव की युवती के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका सफर उसे दक्षिण कोरिया के सियोल शहर तक ले जाता है। फिल्म में स्थानीय परिवेश के साथ दो अलग-अलग संस्कृतियों के बीच जुड़ाव दिखाया गया है।
शेरगिल ने बताया कि फिल्म का विचार देखने में काफी सरल था, लेकिन यह Netflix के लिए बड़ी सफलता साबित हुई। जब इस परियोजना पर चर्चा हो रही थी, तब कुछ सहयोगियों ने सवाल उठाया था कि क्या भारत की कहानी किसी दूसरी संस्कृति से जुड़े परिवेश में भी दर्शकों को पसंद आएगी। भाषा और सांस्कृतिक अंतर को देखते हुए इस पर संदेह जताया गया था।
इसके बावजूद Netflix की दक्षिण भारतीय टीम ने इस विचार के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया। शेरगिल के अनुसार, फिल्म बाद में Netflix की दुनिया भर की गैर-अंग्रेजी कंटेंट की टॉप-10 सूची में पहले स्थान पर पहुंच गई। साथ ही, इसने 53 देशों की टॉप-10 सूची में भी जगह बनाई।
इस सफलता से प्रियंका मोहन को भी व्यापक पहचान मिली। शेरगिल ने बताया कि दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान आयोजित राजकीय रात्रिभोज में प्रियंका मोहन को आमंत्रित किया गया था। उन्हें कोरिया पर्यटन की मानद एंबेसडर भी बनाया गया।
Netflix के लिए यह फिल्म इस बात का उदाहरण बनी कि किसी खास जगह और संस्कृति से जुड़ी कहानी भी अपने घरेलू बाजार से बाहर बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंच सकती है। फिल्म की सफलता के लिए उसकी तमिल पहचान को हटाने की जरूरत नहीं पड़ी। इसके बजाय, तमिलनाडु से सियोल तक का सफर ही अलग-अलग संस्कृतियों के दर्शकों को कहानी से जोड़ने का जरिया बना।
‘मिन्नल मुरली’ और ‘आरआरआर’ का भी दिया उदाहरण
शेरगिल ने दक्षिण भारतीय सिनेमा की अंतरराष्ट्रीय पहुंच समझाने के लिए मलयालम फिल्म ‘Minnal Murali’ का भी जिक्र किया। सुपरहीरो पर आधारित इस फिल्म को भारत के बाहर भी ध्यान मिला था। यहां तक कि अभिनेता टॉम हॉलैंड ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए इस किरदार में दिलचस्पी दिखाई थी।
उन्होंने तेलुगु फिल्म ‘RRR’ का भी उल्लेख किया। इस फिल्म को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान ने तेलुगु सिनेमा और उससे जुड़े कलाकारों को दुनिया भर में होने वाली चर्चाओं में जगह दिलाने में मदद की।
शेरगिल ने यह भी कहा कि दक्षिण भारतीय सिनेमा को एक जैसी कहानियां बनाने वाले उद्योग के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इस क्षेत्र की हर फिल्म इंडस्ट्री की अपनी कहानी कहने की शैली और दर्शकों की पसंद है।
उनके मुताबिक, मलयालम सिनेमा की शैली तमिल सिनेमा से अलग है। तेलुगु फिल्मों में अक्सर बड़े पैमाने पर फिल्म निर्माण के साथ एक्शन या कॉमेडी पर जोर दिया जाता है। वहीं, तमिल सिनेमा में कई बार ऐसे विचारों पर आधारित कहानियां देखने को मिलती हैं, जिनका आधार अपने आप में खास और नया होता है।
इस तरह की विविधता और लगातार बन रहे नए कंटेंट की वजह से स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के पास दुनिया भर के दर्शकों को दिखाने के लिए कई तरह की कहानियां मौजूद हैं।
सबटाइटल और डबिंग से भाषा की बाधा हो रही कम
क्षेत्रीय कहानियों के लिए भाषा हमेशा एक अहम पहचान रही है, लेकिन अब यह दर्शकों तक पहुंचने में पहले जैसी बड़ी बाधा नहीं रह गई है। शेरगिल ने बताया कि Netflix पर होने वाली कुल व्यूइंग का 70 प्रतिशत हिस्सा सबटाइटल और डबिंग के जरिए देखा जाता है।
सबटाइटल के जरिए दर्शक अपनी भाषा में लिखे संवाद पढ़ सकते हैं, जबकि डबिंग में फिल्म या सीरीज के संवाद दूसरी भाषा में सुनाई देते हैं। इससे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की कहानियां देखना आसान हो जाता है, भले ही दर्शक मूल भाषा न समझते हों।
सत्र में पेश किया गया यह आंकड़ा बताता है कि दर्शक अब अपनी भाषा और सांस्कृतिक दायरे से बाहर का कंटेंट देखने के लिए भी तैयार हैं। इससे क्षेत्रीय फिल्मकारों को उन दर्शकों तक पहुंचने का मौका मिलता है, जिन्हें किसी कहानी की संस्कृति, जगह या सामाजिक परिवेश के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती।
दर्शकों की पसंद में बदलाव से फिल्मकारों को मिल रही आजादी
इस बदलाव का असर दर्शकों की पसंद पर भी पड़ रहा है। एलन ने कहा कि बीते वर्षों में अंतरराष्ट्रीय फिल्मों तक दर्शकों की पहुंच बढ़ी है। पहले इंटरनेट के जरिए और फिर स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के आने से लोगों को घर बैठे दुनिया भर के सिनेमा को देखने का मौका मिला।
इससे दर्शकों की सोच और पसंद में बदलाव आया है। अब फिल्मकारों के लिए अलग-अलग विधाओं और कहानी कहने के नए तरीकों के साथ प्रयोग करने की गुंजाइश बढ़ी है।
अपने शुरुआती करियर को याद करते हुए एलन ने बताया कि उन्होंने ‘The Silence of the Lambs’ और ‘Memories of Murder’ जैसी फिल्मों से प्रेरित एक थ्रिलर बनाने के लिए 100 से ज्यादा निर्माताओं से संपर्क किया था। लेकिन उस समय उन्हें इस परियोजना के लिए कोई तैयार नहीं हुआ।
निर्माताओं को संदेह था कि भारतीय दर्शक इस तरह की कहानी को समझ पाएंगे या पसंद करेंगे। एलन के मुताबिक, अब माहौल बदल चुका है। आज ऐसी फिल्मों और थ्रिलर कहानियों को भी दर्शक मिल रहे हैं, जिन्हें पहले व्यावसायिक रूप से जोखिम भरा माना जा सकता था।
इस बदलाव से फिल्मकारों को नए विचारों और अलग तरह की कहानियों पर काम करने की ज्यादा आजादी मिल रही है। साथ ही, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ऐसी फिल्मों को दर्शकों तक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं, जो पारंपरिक सिनेमाघरों की व्यावसायिक उम्मीदों पर पूरी तरह खरी न उतरती हों।
सौंदर्या रजनीकांत ने बताया, सीरीज बनाने का अनुभव फिल्मों से अलग
निर्माता सौंदर्या रजनीकांत ने कहा कि मनोरंजन उद्योग में अलग-अलग माध्यमों के साथ काम करने से नए अवसर सामने आ रहे हैं। वह एनीमेशन, परफॉर्मेंस कैप्चर, लाइव-एक्शन फिल्मों और अब स्ट्रीमिंग सीरीज के साथ काम कर चुकी हैं।
उन्होंने बताया कि Netflix के लिए तमिल भाषा में लंबे प्रारूप का प्रोजेक्ट बनाना फीचर फिल्म बनाने से अलग अनुभव था। इसमें लेखन, संपादन और कहानी को दर्शकों के सामने पेश करने का तरीका भी अलग रखना पड़ा।
उनकी सीरीज ‘#Love’ का निर्देशन बालाजी मोहन ने किया है। चेन्नई की पृष्ठभूमि पर बनी यह सीरीज दो ऐसे लोगों के रिश्ते की कहानी दिखाती है, जिनकी प्यार में आपसी तालमेल और एक-दूसरे से जुड़ाव को लेकर सोच अलग-अलग है। शेरगिल ने इसे युवाओं से जुड़ी, नई और ऐसी प्रेम कहानी बताया, जिससे अलग-अलग जगहों के दर्शक जुड़ सकते हैं, जबकि इसकी जड़ें तमिल परिवेश में हैं।
रजनीकांत ने कहा कि यह परियोजना लंबे प्रारूप वाले कंटेंट की दुनिया में उनके लिए एक अहम कदम रही है और वह आगे भी ऐसी और सीरीज बनाना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि तमिल दर्शक पारंपरिक रूप से फिल्मों को देखने के ज्यादा आदी रहे हैं। ऐसे में एपिसोड के रूप में कहानी पेश करना दर्शकों से लंबे समय तक जुड़ने का एक नया अवसर है।
रचनाकारों को भरोसा देना प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी
चर्चा में इस बात पर भी जोर दिया गया कि स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म को फिल्मकारों और रचनाकारों को नए प्रयोग करने का भरोसा देना चाहिए।
सौंदर्या रजनीकांत के मुताबिक, किसी भी मंच की ओर से कहानीकार को दिया जाने वाला सबसे अहम सहयोग भरोसा है। रचनाकार को यह विश्वास होना चाहिए कि उसके विचार में दम है और उसकी कहानी बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंच सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि पूरी प्रक्रिया के दौरान एक ऐसे सहयोगी का होना जरूरी है, जो परियोजना को समझे और उसके साथ खड़ा रहे। साथ ही, रचनाकारों को यह भी समझना चाहिए कि दर्शक किसी कहानी को उस नजरिए से न देखें, जिस नजरिए से उसे बनाते समय सोचा गया था।
उनकी बातों से स्ट्रीमिंग कारोबार से जुड़ा एक अहम सवाल सामने आया कि प्लेटफॉर्म रचनाकारों की अलग पहचान को बनाए रखते हुए उनका समर्थन कैसे कर सकते हैं, बिना हर परियोजना को एक ही तरह के ढांचे में ढाले।
क्षेत्रीय कहानियां जब बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचने की कोशिश करती हैं, तो फिल्मकारों के लिए यह जरूरी है कि वे अपनी कहानी की खासियत और स्थानीय पहचान को बनाए रखें। साथ ही, कहानी में ऐसा जुड़ाव भी होना चाहिए, जिससे दूसरी जगहों के दर्शक भी उससे खुद को जोड़ सकें।
क्या दक्षिण भारतीय कलाकारों को कोरियाई सितारों जैसा प्यार मिल सकता है?
इस चर्चा में यह सवाल भी उठा कि क्या दक्षिण भारतीय कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैसी लोकप्रियता मिल सकती है, जैसी कोरियाई ड्रामा के सितारों को मिलती है।
‘#Love’ में नजर आने वाले अभिनेता अर्जुन दास ने कहा कि भारतीय कलाकारों की तुलना सीधे कोरियाई ड्रामा के सितारों से करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने भारतीय संस्कृति, भावनाओं और पारिवारिक रिश्तों से जुड़ी कहानियों की ताकत पर जोर दिया।
यह सवाल भारत में कोरियाई मनोरंजन की बढ़ती लोकप्रियता और दक्षिण भारतीय कलाकारों के लिए दूसरे देशों में प्रशंसक वर्ग तैयार होने की संभावना को भी दिखाता है।
शेरगिल ने कहा कि क्षेत्रीय कंटेंट की सफलता से पता चलता है कि अगर कहानी दर्शकों से जुड़ने में सफल रहती है, तो वे अनजान जगहों और संस्कृतियों के किरदारों को भी पसंद कर सकते हैं।
यह अवसर सिर्फ प्रेम कहानियों तक सीमित नहीं है। दक्षिण भारतीय कंटेंट में थ्रिलर, एक्शन फिल्में, सुपरहीरो की कहानियां और अलग-अलग संस्कृतियों के बीच आगे बढ़ने वाले किरदारों की कहानियां भी शामिल हैं। इस विविधता से स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म को दर्शकों के सामने दक्षिण भारतीय सिनेमा पेश करने के कई रास्ते मिलते हैं। इसके लिए किसी एक भाषा या शैली पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है।
स्थानीय पहचान बनाए रखते हुए दुनिया तक पहुंचने की चुनौती
पूरी चर्चा में बार-बार यह बात सामने आई कि किसी कहानी को उसकी स्थानीय पहचान से अलग किए बिना दूसरे देशों के दर्शकों तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती है।
स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म फिल्मों और सीरीज को दुनिया भर में दिखाने और नए दर्शकों तक पहुंचाने का मौका दे सकते हैं। लेकिन अंत में कहानी का दमदार होना जरूरी है। किरदार असली लगने चाहिए, कहानी का विचार दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखने वाला होना चाहिए और उसमें कुछ ऐसा होना चाहिए, जिससे अलग-अलग जगहों के लोग भी जुड़ सकें।
Netflix भारत में अपने दूसरे दशक में प्रवेश कर रहा है। ऐसे में ‘Southverse’ पर हुई यह चर्चा दिखाती है कि क्षेत्रीय कहानियां भारत की वैश्विक मनोरंजन महत्वाकांक्षाओं का एक बड़ा हिस्सा बनती जा रही हैं।
इस साल दक्षिण भारतीय फिल्मों और सीरीज का Netflix की टॉप-10 सूची में 60 देशों तक पहुंचना इस बदलाव का संकेत है। अब आगे की चुनौती यह है कि फिल्मकार और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म इस पहुंच को कैसे बढ़ाते हैं, नए विचारों के साथ और प्रयोग कैसे करते हैं और एक सफल अंतरराष्ट्रीय कहानी के बाद ऐसी कई दूसरी कहानियों के लिए भी दुनिया भर में दर्शक कैसे तैयार करते हैं।