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सुहैल सेठ के जन्मदिन पर खास: हर रंग में ढली एक जिंदगी, जो हमेशा समय से आगे चलती है
आज सुहैल सेठ का जन्मदिन है- एक ऐसा नाम जो भारत की विज्ञापन, कंसल्टिंग, थिएटर, लेखन और सार्वजनिक विमर्श की दुनिया में अपनी अलग ही पहचान रखता है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 8 months ago
आज सुहैल सेठ का जन्मदिन है- एक ऐसा नाम जो भारत की विज्ञापन, कंसल्टिंग, थिएटर, लेखन और सार्वजनिक विमर्श की दुनिया में अपनी अलग ही पहचान रखता है। 28 मई 1963 को कोलकाता में जन्मे सुहैल सेठ ने जीवन के हर मोर्चे पर अपनी बेजोड़ उपस्थिति दर्ज कराई है। वे Counselage India के संस्थापक और मैनेजिंग पार्टनर हैं, जो एक प्रमुख स्ट्रैटजिक कंसल्टिंग फर्म है, जिसकी सलाह देश के सबसे बड़े कॉरपोरेट घराने लेते हैं।
विपरीत परिस्थितियों से बना आत्मविश्वास
सुहैल की प्रारंभिक शिक्षा कोलकाता के ला मार्टिनियर स्कूल में हुई, जहां वे डिबेटिंग टीम का हिस्सा रहे। इसके बाद सेंट जोसेफ कॉलेज नैनीताल और फिर जादवपुर यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा ली। उनके पिता की केमिकल फैक्ट्री राजनीतिक उथल-पुथल और नक्सल आंदोलन के चलते बंद हो गई थी, लेकिन इन परिस्थितियों ने सुहैल को जिंदगी को गहराई से देखने और समझने का नजरिया दिया।
विज्ञापन से लेकर सलाहकार तक का सफर
1996 में उन्होंने अपने भाई के साथ Equus नाम की विज्ञापन एजेंसी शुरू की और फिर शूनु सेन के साथ Quadra Advisory की स्थापना की। 2002 में Counselage India की शुरुआत की, जो आज भारत की सबसे भरोसेमंद ब्रांड सलाहकार कंपनियों में से एक मानी जाती है। टाटा समूह के ब्रांड संकट से उबरने में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही, और इसके बाद अदाणी समूह ने भी उन्हें ब्रांड सलाहकार के रूप में नियुक्त किया।
लेखन, रंगमंच और फिल्म में भी बेजोड़
सुहैल सेठ केवल कंसल्टिंग तक सीमित नहीं हैं। वे एक साप्ताहिक कॉलमिस्ट, टीवी पंडित और एक प्रखर वक्ता हैं। फाइनेंशियल टाइम्स, हिंदुस्तान टाइम्स, द टेलीग्राफ और इंडियन एक्सप्रेस जैसे अखबारों में वे नियमित रूप से लिखते हैं।
थिएटर में उन्होंने 135 से अधिक अंग्रेजी नाटकों में अभिनय किया है, और ‘गुजारिश’, ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’, ‘रोग’ और ‘कैलेंडर गर्ल्स’ जैसी फिल्मों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
किताबों की दुनिया में भी चमक
उन्होंने चार किताबें लिखी हैं, जिनमें 'In Your Face', ‘Kalighat to Calcutta’, ‘Get to the Top’ और ‘The Target’ शामिल हैं। उनकी किताबें महत्वाकांक्षी भारतीयों के लिए मार्गदर्शन का काम करती हैं, चाहे वह नेटवर्किंग हो या सफलता की सीढ़ी चढ़ने का हुनर।
सामाजिक सरोकारों से गहरा जुड़ाव
सुहैल Max Foundation, Partition Museum, और Indian Head Injury Foundation जैसी संस्थाओं से जुड़े हैं। उन्होंने अपने माता-पिता की याद में Partition Museum को ₹50 लाख का दान भी दिया है।
निजी जीवन और जीवनशैली
वे लक्ष्मी सेठ के साथ विवाहित हैं और उनकी एक बेटी गायत्री है। जब वे दुनिया के दौरे पर नहीं होते, तो दिल्ली और गोवा स्थित अपने घरों में समय बिताते हैं। उन्हें पढ़ना, पार्टी करना और मेहमाननवाजी करना बेहद पसंद है। उनकी तेज-तर्रार बुद्धि, लेखन और टेलीविजन बहसों में साफ झलकती है।
जीवन का सार: Joie de Vivre
सुहैल सेठ का जीवन सचमुच joie de vivre (यानी जिंदगी को पूरे जोश, उत्साह और आनंद के साथ जीने का जज्बा) का प्रतीक है। वे समय के पाबंद हैं, हर मीटिंग के लिए पूरी तैयारी से जाते हैं और हर बातचीत में साफगोई से काम लेते हैं। उन्होंने कई दोस्त बनाए और कुछ दुश्मन भी, लेकिन अपनी स्पष्टता और आत्मविश्वास से कभी पीछे नहीं हटे।
आज उनके जन्मदिन के मौके पर यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि सुहैल सेठ ने न सिर्फ कई जिंदगियां छुई हैं, बल्कि खुद भी कई जिंदगियां जी ली हैं। और उनकी यात्रा अभी बाकी है।
सुहैल सेठ को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं!
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